भारत को दक्षिण से क्यों नहीं नियंत्रित किया जा सकता है?...


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Varinder Pramod

Journalist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

राधा कृष्ण जी क्या कहते हैं

radha krishna ji kya kehte hain

राधा कृष्ण जी क्या कहते हैं

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Rahul Bharat

राजनैतिक विश्लेषक

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

चीटियां भी कई तरह से जिम्मेदार होती हैं अगर हम चाहते हैं कि दक्षिण से नियंत्रित करें तो एक तराजू के समान हमारी दुआएं जो बराबर ना होना चाहिए तो दिल्ली है दिल में समाती है कि राजधानी किसी भी देश की ऐसी होना चाहिए जहां पर पहुंचने की सर्व सुलभता को हर तरह के साधन और संसाधन हो और किसी भी व्यक्ति कम समय में वहां पहुंच सके तो एक तरह से होता है लेकिन हम यह भी चाहते हैं कि दक्षिण एक तरह से कटा कटा कर रहा है जो आंध्र प्रदेश केरल तमिलनाडु और इनको भी हमें बहुत व्यवस्थित तरीके से जोड़ना चाहिए और इनमें जुड़ाव रहे इतने प्रयास करना जरूरी है क्योंकि बेबी हमारे देश की एक पार्टी है उन लोगों को भी किसी तरह की तकलीफ नहीं होना चाहिए इस तरह से उपराजधानी भी साउथ क्षेत्र में बनाई जा सकती है लेकिन यह ना हो कि बाद में लोग साउथ की देश की मांग करने लगे इस पर भी हमें नियंत्रण करना होगा

chitiyan bhi kai tarah se zimmedar hoti hain agar hum chahte hain ki dakshin se niyantrit karein toh ek taraju ke saman hamari duaen jo barabar na hona chahiye toh delhi hai dil mein samati hai ki rajdhani kisi bhi desh ki aisi hona chahiye jahan par pahuchne ki surve sulabhata ko har tarah ke sadhan aur sansadhan ho aur kisi bhi vyakti kam samay mein wahan pahunch sake toh ek tarah se hota hai lekin hum yeh bhi chahte hain ki dakshin ek tarah se kata kata kar raha hai jo andhra pradesh kerala tamil nadu aur inko bhi humein bahut vyavasthit tarike se jodna chahiye aur inmein judav rahe itne prayas karna zaroori hai kyonki baby hamare desh ki ek party hai un logon ko bhi kisi tarah ki takleef nahi hona chahiye is tarah se uparajdhani bhi south kshetra mein banai ja sakti hai lekin yeh na ho ki baad mein log south ki desh ki maang karne lage is par bhi humein niyantran karna hoga

चीटियां भी कई तरह से जिम्मेदार होती हैं अगर हम चाहते हैं कि दक्षिण से नियंत्रित करें तो एक

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Vinod Tiwari

Journalist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मेरी दक्षिण से आते हैं ऐसा नहीं लगता है कि दक्षिण का वर्चस्व कितना है लेकिन दक्षिण दक्षिण का एक राजनीति चलाने तो वह नहीं होता क्योंकि जितने भी राजनीतिक इस चीज का निर्णय लेते हैं कि कौन देश चल आएगा उसमें उत्तर पश्चिम पूरब पश्चिम दक्षिण चारों दिशाओं से लिए जाते सवाल उठता है कि अनुभव राजनीति में बहुत महत्व रखता है अगर आपके पास अनुभव नहीं है तो आप राजनीति नहीं कर सकते तो दक्षिण की बात चल रही थी दक्षिण कुछ लोग ऐसे नेता आए हैं जिनमें देश में एक अलग ही इतिहास लिखा है जिसमें जयललिता थी उन्हें एक नया इतिहास लिया ऐसा नहीं है कि दक्षिण से नेता नहीं आए नेता बहुत है लेकिन सवाल उठता है कि दक्षिण से निजाद उसके चुनाव में संयम और समझ बहुत जरूरी है तो की दक्षिणतम विकास देते हमें पूरे देश का विकास करने वाला नेता चाहिए उसके दक्षिण पूरब और पश्चिम उत्तर कोई फर्क नहीं पड़ता हम चार दिशाओं में एक हम भारतवासी एक हैं तो हमारी चारो दिशा में कहीं से भी आए चारों दिशाएं है तो भारत की अगर भारत में से कोई भी बनेगा दक्षिण पूरब और पश्चिम जो हमारे देश के हित की बात करेगा वह हमारे देश के लिए बेहतर होगा यह अगर मैं हूं कि दक्षिण से नहीं आ रहा तो नहीं हुआ

meri dakshin se aate hain aisa nahi lagta hai ki dakshin ka varchaswa kitna hai lekin dakshin dakshin ka ek raajneeti chalane toh vaah nahi hota kyonki jitne bhi raajnitik is cheez ka nirnay lete hain ki kaun desh chal aayega usmein uttar paschim purab paschim dakshin charo dishaon se liye jaate sawaal uthata hai ki anubhav raajneeti mein bahut mahatva rakhta hai agar aapke paas anubhav nahi hai toh aap raajneeti nahi kar sakte toh dakshin ki baat chal rahi thi dakshin kuch log aise neta aaye hain jinmein desh mein ek alag hi itihas likha hai jisme Jayalalitha thi unhe ek naya itihas liya aisa nahi hai ki dakshin se neta nahi aaye neta bahut hai lekin sawaal uthata hai ki dakshin se nijad uske chunav mein sanyam aur samajh bahut zaroori hai toh ki dakshintam vikas dete hamein poore desh ka vikas karne vala neta chahiye uske dakshin purab aur paschim uttar koi fark nahi padta hum char dishaon mein ek hum bharatvasi ek hain toh hamari chaaro disha mein kahin se bhi aaye charo dishaen hai toh bharat ki agar bharat mein se koi bhi banega dakshin purab aur paschim jo hamare desh ke hit ki baat karega vaah hamare desh ke liye behtar hoga yah agar main hoon ki dakshin se nahi aa raha toh nahi hua

मेरी दक्षिण से आते हैं ऐसा नहीं लगता है कि दक्षिण का वर्चस्व कितना है लेकिन दक्षिण दक्षिण

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