भारत में जाति व्यवस्था यानी कास्ट सिस्टम क्या है आज लोगों के जीवन पर इसका क्या असर पड़ता है?...


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KRISHNA KUMAR SINGH

Social Activist

0:59

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

एक का सीजन जैसा सब तो पहले खत्म हो गया लोग में जो अनटचेबिलिटी क्यों खत्म हो चुकी है तो आप रिजर्वेशन का बेस लेकर क्यों चलते हैं आज का ट्रैफिक में बहुत पैसे वाले हो गए वोट के लिए सारे राज्य की काठी गलती कर रही है सपना का शिकार बना कर के

ek ka season jaisa sab toh pehle khatam ho gaya log mein jo anatachebiliti kyon khatam ho chuki hai toh aap reservation ka base lekar kyon chalte hain aaj ka traffic mein bahut paise waale ho gaye vote ke liye saare rajya ki kathi galti kar rahi hai sapna ka shikaar bana kar ke

एक का सीजन जैसा सब तो पहले खत्म हो गया लोग में जो अनटचेबिलिटी क्यों खत्म हो चुकी है तो आप

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Govind Saraf

Entrepreneur

1:44
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए भारत में जाति व्यवस्था का सिस्टम आप बहुत अच्छे से जानते हैं जतिन स्पेशल कैटेगरी में टीम का स्कोर स्पेशल गाड़ी खरीदी गई है एससी एसटी ओबीसी जनरल को सामान्य रखा गया है ट्रांसलेशन में रिजर्वेशन भी है आता है आरक्षण भी आता है तो इस तरीके से इसका जीवन पर बहुत डेफिनटली असर पड़ता है अगर आप किसी सरकारी परीक्षा का एग्जाम दे रहे हो या फिर आप अलग-अलग एजुकेशन इंस्टीट्यूशन में देखो आप ठीक है तो उसमें भी आज दिन तक आकाश का रिजर्वेशन एलॉटेड है एंड कंपास एंड में बच्चों के लिए जा रहा है जो अलग नितिन गडकरी से आते हैं एससी एसटी ओबीसी तुझे जीवन में बहुत ज्यादा यह डिफरेंस में महसूस होता है देखने में दूसरा बर्थडे फस गया है कि आप फी स्ट्रक्चर पर देखो तो उसका शीर्षक से भी थोड़ा डिफरेंस हो जाता है मेरे कहने का मतलब यह है कि मेरे हिसाब से इस देश में रिजर्वेशन इन नहीं होना चाहिए आप उन्हें सहायता कीजिए सपोर्ट कीजिए आर्थिक सहायता यह पाठ दीजिए लेकिन आप उन्हें रिजर्वेशन आरक्षण दे रहे हो उन्हें ऐसा सपोर्ट देर हो बिना वह अपने बलबूते पर सेवा पर पैर रखकर आगे बढ़ जाए यह कोई मतलब नहीं है दुश्मन है मेरे हिसाब से आरक्षण एकदम नहीं होना चाहिए उन्हें पता चलिए दिया जाए ठीक है उन्हें सहायता लत रखे सहायता दी जाए वो अलग चीज है आरक्षण कोई सहायता नहीं है यह उल्टा देश को देश के नागरिकों कोई दूसरी पिक कुचल के आगे बढ़ने के लिए एक तरह का तीसरी सिखाया जा रही बहुत ही गंदी राजनीति है

dekhiye bharat mein jati vyavastha ka system aap bahut acche se jante hain jatin special category mein team ka score special gaadi kharidi gayi hai SC ST obc general ko samanya rakha gaya hai translation mein reservation bhi hai aata hai aarakshan bhi aata hai toh is tarike se iska jeevan par bahut definatali asar padta hai agar aap kisi sarkari pariksha ka exam de rahe ho ya phir aap alag alag education institution mein dekho aap theek hai toh usme bhi aaj din tak akash ka reservation elated hai and compass and mein baccho ke liye ja raha hai jo alag nitin gadkari se aate hain SC ST obc tujhe jeevan mein bahut zyada yah difference mein mehsus hota hai dekhne mein doosra birthday fas gaya hai ki aap fee structure par dekho toh uska shirshak se bhi thoda difference ho jata hai mere kehne ka matlab yah hai ki mere hisab se is desh mein reservation in nahi hona chahiye aap unhe sahayta kijiye support kijiye aarthik sahayta yah path dijiye lekin aap unhe reservation aarakshan de rahe ho unhe aisa support der ho bina vaah apne balbute par seva par pair rakhakar aage badh jaaye yah koi matlab nahi hai dushman hai mere hisab se aarakshan ekdam nahi hona chahiye unhe pata chaliye diya jaaye theek hai unhe sahayta lat rakhe sahayta di jaaye vo alag cheez hai aarakshan koi sahayta nahi hai yah ulta desh ko desh ke nagriko koi dusri pic kuchal ke aage badhne ke liye ek tarah ka teesri sikhaya ja rahi bahut hi gandi raajneeti hai

देखिए भारत में जाति व्यवस्था का सिस्टम आप बहुत अच्छे से जानते हैं जतिन स्पेशल कैटेगरी में

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ई वांट बहुत पहले था जब राजा महाराजा और सामंत वादियों का शासन हुआ करता था लेकिन उसके बाद भारतेंदु हरिश्चंद्र की तरह के लोग आए अंग्रेजों ने भी इस तरह की कथाओं को दूर करने के प्रयास किए लेकिन उसके बाद जातिवाद एक तरफ से हो रहा था परंतु हम देखते हैं कि राजनीति में जहां जातिवाद को बढ़ावा मिला है वह करीब अभी 40 50 40 457 में बहुत ज्यादा जातिवाद उत्पन्न ना हो गया है और जातिगत आधार पर लोगों को बांट कर वोटों का ध्रुवीकरण किया जाता है और यह शुरुआत लालू यादव के स्टेट बिहार से हुई थी और इसमें एक बहुत बड़ा मसला यह है कि जातिवाद अब देश के सभी राज्यों में फैल छोटे-छोटे हिस्सों में बांट रहा है जातिवाद के अलावा यह धार्मिक ग्रुप उत्पन्न हो गए हैं यह अपना एक पंत बनाना चाहते हैं उससे भी लोगों को बांट रहे हैं यह परफेक्ट खतरनाक हो सकता है देश की सुरक्षा और देश के संविधान के साथ देश की अस्मिता के लिए

ee want bahut pehle tha jab raja maharaja aur samant vadiyon ka shasan hua karta tha lekin uske baad bharatendu harishchandra ki tarah ke log aaye angrejo ne bhi is tarah ki kathao ko dur karne ke prayas kiye lekin uske baad jaatiwad ek taraf se ho raha tha parantu hum dekhte hain ki raajneeti mein jaha jaatiwad ko badhawa mila hai vaah kareeb abhi 40 50 40 457 mein bahut zyada jaatiwad utpann na ho gaya hai aur jaatigat aadhaar par logo ko baant kar voton ka dhruvikaran kiya jata hai aur yah shuruat lalu yadav ke state bihar se hui thi aur isme ek bahut bada masala yah hai ki jaatiwad ab desh ke sabhi rajyo mein fail chote chhote hisson mein baant raha hai jaatiwad ke alava yah dharmik group utpann ho gaye hain yah apna ek pant banana chahte hain usse bhi logo ko baant rahe hain yah perfect khataranaak ho sakta hai desh ki suraksha aur desh ke samvidhan ke saath desh ki asmita ke liye

ई वांट बहुत पहले था जब राजा महाराजा और सामंत वादियों का शासन हुआ करता था लेकिन उसके बाद भा

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Vinod Tiwari

Journalist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए जात-पात जात-पात नाटक कौन है यह जात-पात हमारी लड़ाई होती है गांव में हमारा ही होता था जब शादी होती थी पिछड़ी जाति के लोग उनको बाहर बिठाया जाता था उनको खाना फेंक कर दिया जाता था लेकिन सम्मान हुआ करता था अगर उनको खाना दिया जाता था तो वह समझते थे कि हम जाते हैं किस जात के लिए बने हैं हमारा वह काम है लेकिन देश का ध्वज बदला शिक्षा बदली तमाम चीजें बदली तो लोगों में यह भेदभाव खत्म हो गया क्यों तुम अगर एक मूर्ति खा जाए जो भी था या एक ना ही था उसका बच्चा भी अगर पढ़ लिख कर आया है तो वहीं जाकर बैठा है या सामान्य जाति के लोग बैठे थे लेकिन राजनीति में कहते हैं राजनीति बड़ी षड्यंत्र कारी राजनीति होती है राजनीति में आने के लिए राजनीति में एक लाइन में खड़े हो रहे हैं उज्जैन पार्ट के नाम पर राजनीति में बदलाव किए गए हैं राम मंदिर पर एकली हिंदू मुस्लिम विवाद देखनी है हिंदू मुस्लिम सिख इसाई का विभाग देख लीजिए कोई सहायता करते हैं जातिवाद के नाम पर नफरत फैलाते हैं लेकिन जो युवा और देश का नागरिक इस चीज को समझता है वह इससे सीख लिया कि नहीं करता और उसी का परिणाम है कि आज राम मंदिर जो राम मंदिर का मुद्दा है आज कोर्ट में है लेकिन कोई भी समाज हो उसके निर्णय का इंतजार कर रहा है तू भी सर्वोपरि हमारा निर्णय क्यों है कोर्ट करेगा और उसमें जात पात का कोई मतलब जा पाता कोई लेना-देना नहीं रहेगा

dekhiye jaat pat jaat pat natak kaun hai yah jaat pat hamari ladai hoti hai gaon mein hamara hi hota tha jab shadi hoti thi pichhadi jati ke log unko bahar bithaya jata tha unko khana fenk kar diya jata tha lekin sammaan hua karta tha agar unko khana diya jata tha toh vaah samajhte the ki hum jaate hai kis jaat ke liye bane hai hamara vaah kaam hai lekin desh ka dhwaj badla shiksha badli tamaam cheezen badli toh logo mein yah bhedbhav khatam ho gaya kyon tum agar ek murti kha jaaye jo bhi tha ya ek na hi tha uska baccha bhi agar padh likh kar aaya hai toh wahi jaakar baitha hai ya samanya jati ke log baithe the lekin raajneeti mein kehte hai raajneeti baadi shadyantra kaari raajneeti hoti hai raajneeti mein aane ke liye raajneeti mein ek line mein khade ho rahe hai ujjain part ke naam par raajneeti mein badlav kiye gaye hai ram mandir par ekali hindu muslim vivaad dekhni hai hindu muslim sikh isai ka vibhag dekh lijiye koi sahayta karte hai jaatiwad ke naam par nafrat failate hai lekin jo yuva aur desh ka nagarik is cheez ko samajhata hai vaah isse seekh liya ki nahi karta aur usi ka parinam hai ki aaj ram mandir jo ram mandir ka mudda hai aaj court mein hai lekin koi bhi samaj ho uske nirnay ka intejar kar raha hai tu bhi sarvopari hamara nirnay kyon hai court karega aur usme jaat pat ka koi matlab ja pata koi lena dena nahi rahega

देखिए जात-पात जात-पात नाटक कौन है यह जात-पात हमारी लड़ाई होती है गांव में हमारा ही होता था

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Shimla Bawri

Indian Politician

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

सोशल पॉलीटिकल पार्टी जो लोग ज्यादा हो तो उनको टिकट करा दी जाती है फिर वह गीत करके आते हैं जातिवाद जातिवाद को खत्म करना है ना तो यह जहां पर जाती है जाती है वादा तो वादा भी जो जातिवाद को नकार करके उनको

social political party jo log zyada ho toh unko ticket kara di jaati hai phir vaah geet karke aate hain jaatiwad jaatiwad ko khatam karna hai na toh yah jaha par jaati hai jaati hai vada toh vada bhi jo jaatiwad ko nakar karke unko

सोशल पॉलीटिकल पार्टी जो लोग ज्यादा हो तो उनको टिकट करा दी जाती है फिर वह गीत करके आते हैं

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

समाज को संगठित अनुशासित और एक स्वरुप में बांधने के लिए आवश्यक होता है कि समाज का वर्गीकरण ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार से शरीर का वर्गीकरण होता है हाथ को हम पैर नहीं कह सकती पैर को हाथ नहीं कह सकते सर को पेट नहीं कह सकती उसी प्रकार से समाज में जाति व्यवस्था भी इस समाज का एक अंग है कोई पैर है तो कोई सर है तो कोई वक्त है तो कोई उधर है इसी प्रकार से मरी समाज में जाति व्यवस्था रही है और सब आपस में एक दूसरे से जुड़े रहे हैं अपने कर्मों के आधार पर जुड़े रहे हैं ना कि ऊंच-नीच के आधार पर यह तो दुर्भाग्यपूर्ण रहा है कि चांदी का प्रयोग राजनीत सत्ता और शासन को प्राप्त करने में प्रयोग किया जाने लगा अन्यथा जब एकात्म मानववाद की बाद जब कर्ण आज का रिश्ते की बात हमारे महापुरुष करते हैं और जब एक आत्म चिंतन की बात आदि जगद्गुरु कहते हैं कि हम सभी व्यक्तियों में भगवान है सभी व्यक्तियों में ईश्वर है वही आत्मा मेरे अंदर कोई आत्मा सामने वाले के अंदर में प्रत्येक कण कण में वही ऊर्जा विद्यमान है तो इसमें भेद जाति के आधार पर संभव नहीं हमारे यहां तो ऐसी विचारधारा कई देश रहा है जो वसुधैव कुटुंबकम की बात करता है सर्वे भवंतु सुखिनः सर्वे संतु निरामया की बात करता है लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से जाति और धर्म को शासन पानी का एक अस्त्र शस्त्र बनाया गया क्योंकि यह प्रयोग यूरोप में बहुत हुआ और 500 साल यूरोप इन व्यवस्थाओं से जलता रहा धुप सेट्स बहुत फेमस है क्योंकि अंदर में वही प्रयोग भारत में भी रहा लेकिन भारत की जो मूल आत्मा है वह एकात्म मानववाद की आत्मा है वह पुनः फिर अपने रास्ते पर आकर के खड़ी हो जाएगी

samaaj ko sangathit anushasit aur ek swarup mein bandhne ke liye aavashyak hota hai ki samaj ka vargikaran theek usi prakar jis prakar se sharir ka vargikaran hota hai hath ko hum pair nahi keh sakti pair ko hath nahi keh sakte sir ko pet nahi keh sakti usi prakar se samaj mein jati vyavastha bhi is samaj ka ek ang hai koi pair hai toh koi sir hai toh koi waqt hai toh koi udhar hai isi prakar se mari samaj mein jati vyavastha rahi hai aur sab aapas mein ek dusre se jude rahe hain apne karmon ke aadhaar par jude rahe hain na ki unch neech ke aadhaar par yah toh durbhagyapurn raha hai ki chaandi ka prayog rajanit satta aur shasan ko prapt karne mein prayog kiya jaane laga anyatha jab ekatm manavwad ki baad jab karn aaj ka rishte ki baat hamare mahapurush karte hain aur jab ek aatm chintan ki baat aadi jagadguru kehte hain ki hum sabhi vyaktiyon mein bhagwan hai sabhi vyaktiyon mein ishwar hai wahi aatma mere andar koi aatma saamne waale ke andar mein pratyek kan kan mein wahi urja vidyaman hai toh isme bhed jati ke aadhaar par sambhav nahi hamare yahan toh aisi vichardhara kai desh raha hai jo Vasudhaiva kutumbakam ki baat karta hai survey bhavantu sukhinah survey santu niramaya ki baat karta hai lekin durbhagyapurn tarike se jati aur dharm ko shasan paani ka ek astra shastra banaya gaya kyonki yah prayog europe mein bahut hua aur 500 saal europe in vyavasthaon se jalta raha dhup sets bahut famous hai kyonki andar mein wahi prayog bharat mein bhi raha lekin bharat ki jo mul aatma hai vaah ekatm manavwad ki aatma hai vaah punh phir apne raste par aakar ke khadi ho jayegi

समाज को संगठित अनुशासित और एक स्वरुप में बांधने के लिए आवश्यक होता है कि समाज का वर्गीकरण

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