क्या राजनीति के बिना देश खुशहाल रह सकता है।?...


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S. M. Jha

Social Worker

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राजनीति वह कीड़ा है जो अंदर ही अंदर देश को देश की गरिमा को देश के अंदर मातृत्व को देश के अंदर सामाजिकता को देश के अंदर सामंजस्य को खोखला करने का काम सदियों से करते रहिए राजनीति नहीं होने से समाज में सामाजिकता होता है समाज के सभी लोग आपस में एक होते हैं समाज में कई कोई वर्गीकरण नहीं होता है यह सारे सामाजिक विभेद सामाजिक वर्गीकरण समाज को जातियों में बांटा समाज को जातिगत रूप में कमजोर करना समाज में धर्मांधता को पैदा करना समाज में धर्मांधता को बढ़ावा देना यह सारे कार्य करने के कारण राजनीति को आप उसकी डे के रूप में देख सकते हैं जो समाज को अंदर ही अंदर खोखला करने में अपना समय व्यतीत करता है राजनीति के बिना देश प्रगति करता रहा लेकिन जब से देश के अंदर राजनीति आई देश को अंदर ही अंदर खोखला कर दिया तोड़ दिया आप सम्राट अशोक के शासनकाल को ले सकते हैं आप चंद्रगुप्त मोरया के शासनकाल को ले सकते हैं आप अकबर के शासन काल को ले सकते हैं जब राजनीति नहीं थी देश के अंदर तब देश खुशहाल था जब राजनीति नहीं था तब भारत विश्व गुरु था जब राजनीति नहीं था तब भारत सोने की चिड़िया कहीं जाती थी लेकिन जब से भारत के अंदर राजनीति का पदार्पण हुआ है तब से भारत आर्थिक रूप से खोखला सामाजिक रूप से टूटा हुआ वर्गों में बंटा हुआ जातिगत रूप से खंड खंड हुआ आज एक हिंदू के अंदर ही दलित महादलित अति दलित यह दलित वह दलित ओबीसी के अंदर में एबीसीडी भी सीसीवीसी सवर्णों के अंदर में यह वह इस तरह से राजनीति ने समाज को टुकड़ों में तोड़ कर रख दिया है राजनीति न समाज के चेहरे को विद्रूप कर दिया है इतना ज्यादा घिनौना बना दिया है जो अब दवा बनाकर प्रतीत होता है राजनीति की कुत्सित प्रयास के कारण ही आज देश के अंदर धर्मांधता फैलते जा रही है राजनीति की कुत्सित कार्य कृत कृत्य के कारण ही आज एक व्यक्ति दूसरे पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं राजनीति के कुत्सित चाल के कारण ही आज हिंदू हिंदू में एकता नहीं है राजनीति के कुत्सित प्रयास के कारण ही आज समाज हित की सोच ग्रुप सी हो गई है राजनीति नामक इस किले को जितना जल्द खत्म कर दिया जाए देश हित में उतना ही बेहतर होगा धन्यवाद

raajneeti vaah kida hai jo andar hi andar desh ko desh ki garima ko desh ke andar matritwa ko desh ke andar samajikta ko desh ke andar samanjasya ko khokhla karne ka kaam sadiyon se karte rahiye raajneeti nahi hone se samaj me samajikta hota hai samaj ke sabhi log aapas me ek hote hain samaj me kai koi vargikaran nahi hota hai yah saare samajik vibhed samajik vargikaran samaj ko jaatiyo me baata samaj ko jaatigat roop me kamjor karna samaj me dharmandhata ko paida karna samaj me dharmandhata ko badhawa dena yah saare karya karne ke karan raajneeti ko aap uski day ke roop me dekh sakte hain jo samaj ko andar hi andar khokhla karne me apna samay vyatit karta hai raajneeti ke bina desh pragati karta raha lekin jab se desh ke andar raajneeti I desh ko andar hi andar khokhla kar diya tod diya aap samrat ashok ke shasankal ko le sakte hain aap chandragupta morya ke shasankal ko le sakte hain aap akbar ke shasan kaal ko le sakte hain jab raajneeti nahi thi desh ke andar tab desh khushahal tha jab raajneeti nahi tha tab bharat vishwa guru tha jab raajneeti nahi tha tab bharat sone ki chidiya kahin jaati thi lekin jab se bharat ke andar raajneeti ka padarpan hua hai tab se bharat aarthik roop se khokhla samajik roop se tuta hua vargon me bata hua jaatigat roop se khand khand hua aaj ek hindu ke andar hi dalit mahadalit ati dalit yah dalit vaah dalit OBC ke andar me ABCD bhi CCVC swarno ke andar me yah vaah is tarah se raajneeti ne samaj ko tukadon me tod kar rakh diya hai raajneeti na samaj ke chehre ko vidrup kar diya hai itna zyada ghinauna bana diya hai jo ab dawa banakar pratit hota hai raajneeti ki kutsit prayas ke karan hi aaj desh ke andar dharmandhata failate ja rahi hai raajneeti ki kutsit karya krit kritya ke karan hi aaj ek vyakti dusre par bharosa nahi kar paa rahe hain raajneeti ke kutsit chaal ke karan hi aaj hindu hindu me ekta nahi hai raajneeti ke kutsit prayas ke karan hi aaj samaj hit ki soch group si ho gayi hai raajneeti namak is kile ko jitna jald khatam kar diya jaaye desh hit me utana hi behtar hoga dhanyavad

राजनीति वह कीड़ा है जो अंदर ही अंदर देश को देश की गरिमा को देश के अंदर मातृत्व को देश के अ

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Jyoti Mehta

Ex-History Teacher

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हमारा दिल बहुत बड़ा जनसंख्या वाला देश है और हमारे देश में लोकतंत्र चलता है और इतनी बड़ी जनसंख्या को संभालने के लिए जरूरी है कि हमारे देश में राजनीति राजनीति एक ऐसा मंच है जहां पर जनता खुद अपनी मर्जी से अपने विचार से अपने दिमाग से सोच समझ कर वोट देकर अपने शहर से अपनी प्रदेश एक प्रतिनिधि चलती है और उन प्रतिनिधियों से मिलकर केंद्र में सरकार बनती है और वह सरकार सारे निर्णय लेती है देश के बारे में जनता के बारे में ऐसा नहीं है कि वह कौन है सरकार के ऊपर भी जनता का पूरा अधिकार रहता है और जो सरकार के ऊपर जो कार्य होते हैं उनकी जनता आलोचना कर सकती है उसके विरोध में उठ सकती है क्योंकि हमारे देश में स्वतंत्रता का अधिकार और नागरिक के पास हमारे संविधान ने हर नागरिक को अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और वह जो चाहे वह अपने हिसाब से बता सकता है कह सकता है और इसमें सरकार की आलोचना भी कर सकता है इसलिए हमारे देश में सरकार का होना बहुत जरूरी है राजनीति का होना बहुत जरूरी है क्योंकि राजनीति से ही कुछ अच्छे लोग ऊपर सरकारी पदों तक पहुंचते हैं एक सरकार बनती है मजबूत उसकी पदाधिकारी अलग-अलग विभागों में अपना कार्य करते हैं और यह पूरा देश चलता है अगर ऐसा नहीं होगा तो सैनिक शासन होगा या जो व्यक्ति मजबूत होगा वह लोगों पर राज करेगा और वह गलत हो जाएगा तानाशाही प्रवृत्ति जन्म लेने लगेगी जो देश की जनता के लिए सही नहीं राजनीति होनी चाहिए लेकिन स्वस्थ राजनीति होनी चाहिए जो जनता के विकास के लिए हो देश की उन्नति के लिए हो

hamara dil bahut bada jansankhya vala desh hai aur hamare desh mein loktantra chalta hai aur itni badi jansankhya ko sambhalne ke liye zaroori hai ki hamare desh mein raajneeti raajneeti ek aisa manch hai jaha par janta khud apni marji se apne vichar se apne dimag se soch samajh kar vote dekar apne shehar se apni pradesh ek pratinidhi chalti hai aur un pratinidhiyo se milkar kendra mein sarkar banti hai aur vaah sarkar saare nirnay leti hai desh ke bare mein janta ke bare mein aisa nahi hai ki vaah kaun hai sarkar ke upar bhi janta ka pura adhikaar rehta hai aur jo sarkar ke upar jo karya hote hain unki janta aalochana kar sakti hai uske virodh mein uth sakti hai kyonki hamare desh mein swatantrata ka adhikaar aur nagarik ke paas hamare samvidhan ne har nagarik ko apni abhivyakti ki swatantrata aur vaah jo chahen vaah apne hisab se bata sakta hai keh sakta hai aur isme sarkar ki aalochana bhi kar sakta hai isliye hamare desh mein sarkar ka hona bahut zaroori hai raajneeti ka hona bahut zaroori hai kyonki raajneeti se hi kuch acche log upar sarkari padon tak pahunchate hain ek sarkar banti hai majboot uski padadhikaari alag alag vibhagon mein apna karya karte hain aur yah pura desh chalta hai agar aisa nahi hoga toh sainik shasan hoga ya jo vyakti majboot hoga vaah logo par raj karega aur vaah galat ho jaega tanashahi pravritti janam lene lagegi jo desh ki janta ke liye sahi nahi raajneeti honi chahiye lekin swasthya raajneeti honi chahiye jo janta ke vikas ke liye ho desh ki unnati ke liye ho

हमारा दिल बहुत बड़ा जनसंख्या वाला देश है और हमारे देश में लोकतंत्र चलता है और इतनी बड़ी जन

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Rajat sharma

वलको प्रोडक्ट

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राजनीति के बिना देश खुशहाल नहीं हो सकता क्योंकि राजनीतिक एक ऐसा मत एक ऐसा रास्ता है जो देश को कुचल बना सकते हैं

raajneeti ke bina desh khushahal nahi ho sakta kyonki raajnitik ek aisa mat ek aisa rasta hai jo desh ko kuchal bana sakte hain

राजनीति के बिना देश खुशहाल नहीं हो सकता क्योंकि राजनीतिक एक ऐसा मत एक ऐसा रास्ता है जो देश

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Faiz

Software Tester at Cognizant Technology Solutions.

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श्री राम ने पूछा क्या राजनीति के बिना देश खुशहाल ले सकता है तू दिखे राजनीति नहीं होगी किसी भी देश में तो वापस डिक्टेटरशिप आ जाएगी और डिक्टेटरशिप लोग अपने हिसाब से चीज है कोच्चि में नहीं कर पाएंगे वहां पर कोई भी आदमी का राज्य नहीं चलेगा कि किसी भी आदमी को फ्रीडम नहीं मिलेगा बाधा से ज्यादा इसलिए मेरे साथ से तो राजनीति ही ज्यादा सही है

shri ram ne poocha kya raajneeti ke bina desh khushahal le sakta hai tu dikhe raajneeti nahi hogi kisi bhi desh mein toh wapas dictatorship aa jayegi aur dictatorship log apne hisab se cheez hai Kochi mein nahi kar payenge wahan par koi bhi aadmi ka rajya nahi chalega ki kisi bhi aadmi ko freedom nahi milega badha se zyada isliye mere saath se toh raajneeti hi zyada sahi hai

श्री राम ने पूछा क्या राजनीति के बिना देश खुशहाल ले सकता है तू दिखे राजनीति नहीं होगी किसी

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