पति पत्नी शारीरिक संबंध क्यों बनाते हैं?...


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Hemant Priyadarshi

Writer | Philospher| Teacher |

4:21

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वैसे तो सुनकर हंसी आई यह प्रश्न पढ़कर हंसी आई वैसे मैंने भी शादी नहीं की है और अपने की है या नहीं पता नहीं लेकिन फिर भी शादी नहीं करने का यह मतलब नहीं कि ज्ञान नहीं हो सकता आप भी जानते हैं खैर आपने आप एक्सप्रेशन जानना चाहते हैं आप इसे व्याख्या इसकी व्याख्या जानना चाहते हैं कि आखिर यह क्यों आपके मन में यह कोतवाल है इसका उत्तर यह तो बिल्कुल ही नहीं है कि मजा लेने के लिए यह बात तो बिल्कुल नहीं है कि पति पत्नी शारीरिक संबंध मजा लेने के लिए यह मजाक फिर क्या है सवाल उठेगा कौन सा मजा किस प्रकार का मजा और क्या है वह मजा वास्तविकता में कोई मजा कोई नुकसान ऐसा कुछ नहीं है ना कोई मजा है और ना ही उसमें कोई नुकसान है यह प्रेम की चरम सीमा है प्रेम जब अत्यंत क्षणों में होता है तो वह सारी जुड़ाव महसूस जरूरत महसूस करता है सारिक जुराब की आखिर क्यों है उत्तर विज्ञान भी बताता है विज्ञान का कहना है कि पुरुष जो है वह धनात्मक है स्त्री जो है वह ऋण आत्मक है क्योंकि पुरुष को छोड़ता है देता है स्त्री ग्रहण करती है कुछ लेती है तो इस त्रिगुणात्मक था और पुरुष धनात्मक धनात्मक और ऋण आत्मक मिलकर ऊर्जा का नया आया हूं पैदा करते हैं तुरंत अष्टक को प्राप्त करते हैं आपने रसायन में यह शब्द जाना होगा या पूर्णता के लिए है और आध्यात्म भी यही कहता है पुरुष और स्त्री उसके दोनों अंग उसके गुप्तांग जब एक साथ मिल जाते हैं और कई उसमें स्टेप्स हैं और इधर मत मिले हुए हैं उधर वक्त मिले हुए हैं फिर ना भी मिली हुई है कमर मिला हुआ है और दोनों गुप्तांग एक दूसरे के अंदर है पैर में पैर मिले हुए पूरा का पूरा शरीर एक दूसरे से संयुक्त हो जाता है और संयुक्त होते हैं एक वाले उत्पन्न होता है एक पैराबोला उत्पन्न होता है और वह चक्र बन जाता है उड़ जाता है एनर्जी साइकल बनता है और उस एनर्जी साइकिल में ऊर्जा का प्रवाह होता है उस उर्जा का इतना प्रवाह उसके अंदर होता है वह एक युगल अंदर खुद अनुभव करता है और उसी के लिए वह बार-बार यह क्रिया करना चाहता हालांकि भले ही उसे अंदर से यह पता नहीं कि मैं क्यों या करता हूं लेकिन वह उसे इतना सुख देता है कि वह इसे बार-बार जीवन में करता है और दूसरी बात यह होती है उस आध्यात्मिकता के उन क्षणों में तू साइकिल के बाहर वह ऊर्जा विस्फोटक भी होती है और उससे प्रकृति संरक्षित होती है प्रकृति ऊर्जावान बनती है और प्रकृति को उससे लाभ मिलता है तो यह प्रकृति खुद इस बात के लिए उत्तेजित करती है पुरुष और स्त्री को क्योंकि वह एक नैसर्गिक क्रिया है हमारा जन्म ही उससे हुआ है इसीलिए हम बार-बार प्रकृति के इन हवाओं से इन मिट्टियों से जल्द से जिन पांच चीजों से हमारा मिलकर शरीर बना है उन्ही पांच चीजों में हम जी भी रहे हैं और यह पांचो चीज़ नैसर्गिक है प्रकृति पर करते हैं यही हमें फोर्स करते हैं और इनको हम एकता यह हमें खाद पानी देते हैं और हम फिर ऊर्जा निकाल के इन हवाओं में बिगड़ते हैं इन्हें वातावरण में बिखेरते हैं और इससे यह लोग सिंचित होते हैं यह पूरा का पूरा एक साइकिल है जीवन का ब्रह्मांड का इसीलिए साली के संबंध बनाया जाता है

waise toh sunkar hansi I yah prashna padhakar hansi I waise maine bhi shaadi nahi ki hai aur apne ki hai ya nahi pata nahi lekin phir bhi shaadi nahi karne ka yah matlab nahi ki gyaan nahi ho sakta aap bhi jante hain khair aapne aap expression janana chahte hain aap ise vyakhya iski vyakhya janana chahte hain ki aakhir yah kyon aapke man me yah kotwal hai iska uttar yah toh bilkul hi nahi hai ki maza lene ke liye yah baat toh bilkul nahi hai ki pati patni sharirik sambandh maza lene ke liye yah mazak phir kya hai sawaal uthega kaun sa maza kis prakar ka maza aur kya hai vaah maza vastavikta me koi maza koi nuksan aisa kuch nahi hai na koi maza hai aur na hi usme koi nuksan hai yah prem ki charam seema hai prem jab atyant kshanon me hota hai toh vaah saari judav mehsus zarurat mehsus karta hai sarik jurab ki aakhir kyon hai uttar vigyan bhi batata hai vigyan ka kehna hai ki purush jo hai vaah dhanatmak hai stree jo hai vaah rin aatmkatha hai kyonki purush ko chodta hai deta hai stree grahan karti hai kuch leti hai toh is trigunatmak tha aur purush dhanatmak dhanatmak aur rin aatmkatha milkar urja ka naya aaya hoon paida karte hain turant ashtak ko prapt karte hain aapne rasayan me yah shabd jana hoga ya purnata ke liye hai aur aadhyatm bhi yahi kahata hai purush aur stree uske dono ang uske guptang jab ek saath mil jaate hain aur kai usme steps hain aur idhar mat mile hue hain udhar waqt mile hue hain phir na bhi mili hui hai kamar mila hua hai aur dono guptang ek dusre ke andar hai pair me pair mile hue pura ka pura sharir ek dusre se sanyukt ho jata hai aur sanyukt hote hain ek waale utpann hota hai ek pairabola utpann hota hai aur vaah chakra ban jata hai ud jata hai energy cycle banta hai aur us energy cycle me urja ka pravah hota hai us urja ka itna pravah uske andar hota hai vaah ek yugal andar khud anubhav karta hai aur usi ke liye vaah baar baar yah kriya karna chahta halaki bhale hi use andar se yah pata nahi ki main kyon ya karta hoon lekin vaah use itna sukh deta hai ki vaah ise baar baar jeevan me karta hai aur dusri baat yah hoti hai us aadhyatmikta ke un kshanon me tu cycle ke bahar vaah urja vishphotak bhi hoti hai aur usse prakriti sanrakshit hoti hai prakriti urjavan banti hai aur prakriti ko usse labh milta hai toh yah prakriti khud is baat ke liye uttejit karti hai purush aur stree ko kyonki vaah ek naisargik kriya hai hamara janam hi usse hua hai isliye hum baar baar prakriti ke in hawaon se in mittiyo se jald se jin paanch chijon se hamara milkar sharir bana hai unhi paanch chijon me hum ji bhi rahe hain aur yah paancho cheez naisargik hai prakriti par karte hain yahi hamein force karte hain aur inko hum ekta yah hamein khad paani dete hain aur hum phir urja nikaal ke in hawaon me bigadte hain inhen vatavaran me bikherate hain aur isse yah log sinchit hote hain yah pura ka pura ek cycle hai jeevan ka brahmaand ka isliye saali ke sambandh banaya jata hai

वैसे तो सुनकर हंसी आई यह प्रश्न पढ़कर हंसी आई वैसे मैंने भी शादी नहीं की है और अपने की है

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