संस्कार हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है ,क्यों?...


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Kumar lalit

Life Coach , Love Guru , Hotel Cunsultant, Motivational Speekar

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नमस्कार मैं ललित कुमार दिल्ली से अभी तू क्या सवाल कर रखा है तूने हमारे संस्कार हमारे जीवन का महत्वपूर्ण है वहां बैठकर क्षमा करिएगा इस बात को सीरियसली मत लीजिएगा मैं कह रहा हूं अगर मेरे ऐसे संस्कार है क्या आपको पसंद आए तो संस्कार जरूरी हिस्सा है मेरे भाई अब सुनिए मेरी दूसरी बरका हेलो मैं नमस्कार मैं ललित कुमार मेरे भाई मैं आपका दोस्त आपका प्रेमी आपका भाई और कैसे हैं आप घर में सब कैसे हैं आप बात करो ना से पूरा बचाव है ना कोई समस्या तो नहीं है कहीं आप अटके तो नहीं है आपको कहीं जाना हो तो मुझे बताइएगा मैं आपकी मदद कर पाऊंगा और बाकी घर परिवार में सब ठीक है आपको मेरी दोनों बातों में से कौन सी बात अच्छी लगी कि आप खुद सोच कर के बताइए यह दूसरी वाली बात ज्योति है संस्कारी है मैं संस्कारी हूं अरे संस्कारी होने में कुछ भी नहीं लगता 2 मिनट अपनी जुबान उल्टी चलानी पड़ती है और आप है संस्कारी हो जाते हो तो आपको मेरी दोनों बातों में से कौन सी बात पसंद आई इस बात पर आप खुद ही डिसाइड कर लीजिएगा कि संस्कार हमारे जीवन में महत्वपूर्ण हैं या नहीं और हैं तो क्यों नमस्कार आपका दिन शुभ हो

namaskar main lalit kumar delhi se abhi tu kya sawaal kar rakha hai tune hamare sanskar hamare jeevan ka mahatvapurna hai wahan baithkar kshama kariega is baat ko seriously mat lijiega main keh raha hoon agar mere aise sanskar hai kya aapko pasand aaye toh sanskar zaroori hissa hai mere bhai ab suniye meri dusri baraka hello main namaskar main lalit kumar mere bhai main aapka dost aapka premi aapka bhai aur kaise hain aap ghar me sab kaise hain aap baat karo na se pura bachav hai na koi samasya toh nahi hai kahin aap atake toh nahi hai aapko kahin jana ho toh mujhe bataiega main aapki madad kar paunga aur baki ghar parivar me sab theek hai aapko meri dono baaton me se kaun si baat achi lagi ki aap khud soch kar ke bataiye yah dusri wali baat jyoti hai sanskari hai main sanskari hoon are sanskari hone me kuch bhi nahi lagta 2 minute apni jubaan ulti chalani padti hai aur aap hai sanskari ho jaate ho toh aapko meri dono baaton me se kaun si baat pasand I is baat par aap khud hi decide kar lijiega ki sanskar hamare jeevan me mahatvapurna hain ya nahi aur hain toh kyon namaskar aapka din shubha ho

नमस्कार मैं ललित कुमार दिल्ली से अभी तू क्या सवाल कर रखा है तूने हमारे संस्कार हमारे जीवन

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संस्कार हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है तो इस पर हम थोड़ा सा प्रकाश डालेंगे कि संस्कार जो होते हैं को हमें जीना सिखाते हैं यदि हम शिक्षा प्राप्त करने शिक्षित हो जाए कहीं डिग्रियां प्राप्त कर ले कहीं डिप्लोमा प्राप्त कर ले अच्छी जॉब प्राप्त कर लें लेकिन यदि हमारे अंदर संस्कार नहीं है तो हम अपनी संस्कृति को सभ्यता को नहीं समझ पाएंगे हमारे अंदर मानवता नहीं आ पाएगी परित की भावना नहीं आ पाएगी और हम जो हैं एक प्रकार से स्वार्थपरता के बंधन में बंध जाएंगे हम सिर्फ तक सीमित रहेंगे मैक्सिमम तक हम कभी नहीं जा पाएंगे यह जो आज अभी तक का सफर है उसमें संस्कार काफी कुछ हद तक मतलब उस में सकारात्मक भूमिका अदा करते हैं ना दूसरा यह है कि हम इसी बात करें इसका मैसेज समझ सकते हैं कि जैसे किसी परिवार में बच्चों को अच्छी शिक्षा दी उन्हें पूर्ण में पड़ा है उन्होंने अच्छे अच्छे से पढ़ा फॉरेन गए और मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब कर रहा हूं करते हैं विदेश में रहते हैं किंतु चुकी अपने माता-पिता के साथ ज्यादा समय रहे नहीं और उनमें संस्कार आ नहीं पाया तो ऐसी स्थिति में क्या होगा कि वह लोग एक मशीनी दिल के हो जाते मशीनीकरण दिमाग हो जाता हूं और वह एक प्रकार से मशीन हो जाते हैं क्योंकि उनमें अपना तो नहीं हो जाता मैं संस्कार नहीं दिए हैं उनमें सभ्यता नहीं है संस्कृति नहीं है और तू कैसे फिक्र करें कैसे ख्याल रखें कैसे करें हमारे माता-पिता के बारे में नहीं सोच पाएंगे तो अक्सर तो यही होता है कि बहुत से जो पीस कमेटी होती हो अपने बच्चों को संस्कार नहीं दे पाते उन्हें समय नहीं दे पाते तो उनके बच्चे जो होते हैं वह उसी प्रकार से डर जाते हैं सर हम सुनते हैं कि उनके फादर की डेथ हो गई और उसका बेटा विदेश में है वह विदेश से आ नहीं पाया जमरू यहां पर आया नहीं तो यह उसी केस में जब होता है जब बच्चों को संस्कार नहीं दिए जाते तो वह माता-पिता और दूसरे जो रिश्ते होते हैं इनका वह कभी भी उनका महत्व नहीं समझते ना ही उन्हें वह समय देते हैं ना उनके जो इंपोर्टेंस है उसे कभी समझ पाते इसलिए जीवन में जो है संस्कारों का बहुत अधिक अधिक महत्व है और भूमिका है संस्कार जो होते हैं वह इस प्रकार से आजीवन के लिए एक उर्वरक और जो एक्टिव पौधे के लिए खाद की जरूरत होती है और उस सफलता खुलता है ऐसे ही मानव जीवन में उसके नैतिक नैतिक मानवता व्यवहारिकता संहिता मदद की भावना प्रेम सेवाभावी सभी गुणों का विकास है वह सरकार के संस्कार के माध्यम से ही पैदा होते हैं जो संस्कार होते हैं वह हमारे घर के जो बड़े बुजुर्ग होते हैं माता-पिता हैं दादा दादी है कि है इन सब से ही आते हैं इसलिए कहा जाता है कि जो पुराने समय में जब शिव परिवार होते थे तो जॉइंट फैमिली में संस्कार प्रफुल्लित होते थे और वहां पर ललित कुमार संस्कार बच्चों में देकर जाते थे एक दूसरे का सम्मान करते थे लेकिन जब से हम मतलब पश्चिमी संस्कृति का अनुसरण करने लगे हैं और वेस्टर्न कल्चर है उसको देखकर हम कुछ सीखने लगे हैं तो हमारे यहां पर संयुक्त परिवार से आज हमारे भारत में वर्तमान में यह स्थिति है कि आज वह संयुक्त परिवार विकसित होकर एकल परिवार में परिवर्तित हो गए हैं तो आज जो एकल परिवार है उसमें सिर्फ माता पिता और बच्चे तुम ही तक सीमित होता है और तीन चार चार सदस्य ही एक परिवार में होते हैं तो उनमें वह संस्कार नहीं आ पाता उस में होता क्या है कि यदि माता-पिता दोनों जो है अब आप अपने किसी बिजनेस में संलग्न है किसी काम में व्यस्त हैं अपने बच्चों को समय नहीं दे पाते इसीलिए तो नैतिकता है बच्चों में और जो संस्कार का गुण है तो वह गुणों का उनमें गुण गुण जो है उसमें उत्पन्न नहीं हो पाते घूम नहीं आ पाते क्योंकि बच्चों को कुछ चीजें ऐसी होती है जो किताबों से हटकर उन्हें अलग से सिखाना पड़ता था दिखाना पड़ता है और सिखाना पड़ता पड़ेगा क्योंकि हम सभी जानते हैं कि हम पुराने समय की बात करें पुराने समय में जब स्कूल नहीं थी गुरुकुल हुआ करते थे तो वहां पर जो अनुशासन होते थे और गुरु जो है उनमें संस्कार संस्कारों का शंकर बच्चों में डिवेलप करते थे तो उस समय में यह सब चीजें थी जो आज के समय में ना के बराबर हो गई आज यदि हम बात करें जो प्राइवेट स्कूल से हैं वह बच्चों को एक प्रतिस्पर्धा कंपटीशन के लिए अंधा बना देती हूं वह चाहते हैं कि बसी आगे बढ़े कंप्यूटेट करें किंतु उन्हें वह सब चीजें नहीं दे पाते जो उनके जीवन जीने के लिए जरूरी है जीवन में सिर्फ पैसे होने से ऐसे ही सब कुछ नहीं होगा रिश्ते और व्यक्ति के अंदर संस्कार भी होना चाहिए क्योंकि यह संस्कार ही वह वट वृक्ष है जो सभी गुणों को विकसित करता है अतः जो हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है

sanskar hamare jeevan ka mahatvapurna hissa hai toh is par hum thoda sa prakash daalenge ki sanskar jo hote hain ko hamein jeena sikhaate hain yadi hum shiksha prapt karne shikshit ho jaaye kahin digriyan prapt kar le kahin diploma prapt kar le achi job prapt kar le lekin yadi hamare andar sanskar nahi hai toh hum apni sanskriti ko sabhyata ko nahi samajh payenge hamare andar manavta nahi aa payegi parit ki bhavna nahi aa payegi aur hum jo hain ek prakar se swarthaparata ke bandhan me bandh jaenge hum sirf tak simit rahenge maximum tak hum kabhi nahi ja payenge yah jo aaj abhi tak ka safar hai usme sanskar kaafi kuch had tak matlab us me sakaratmak bhumika ada karte hain na doosra yah hai ki hum isi baat kare iska massage samajh sakte hain ki jaise kisi parivar me baccho ko achi shiksha di unhe purn me pada hai unhone acche acche se padha foreign gaye aur multinational company me job kar raha hoon karte hain videsh me rehte hain kintu chuki apne mata pita ke saath zyada samay rahe nahi aur unmen sanskar aa nahi paya toh aisi sthiti me kya hoga ki vaah log ek mashini dil ke ho jaate mashinikaran dimag ho jata hoon aur vaah ek prakar se machine ho jaate hain kyonki unmen apna toh nahi ho jata main sanskar nahi diye hain unmen sabhyata nahi hai sanskriti nahi hai aur tu kaise fikra kare kaise khayal rakhen kaise kare hamare mata pita ke bare me nahi soch payenge toh aksar toh yahi hota hai ki bahut se jo peace committee hoti ho apne baccho ko sanskar nahi de paate unhe samay nahi de paate toh unke bacche jo hote hain vaah usi prakar se dar jaate hain sir hum sunte hain ki unke father ki death ho gayi aur uska beta videsh me hai vaah videsh se aa nahi paya jamaru yahan par aaya nahi toh yah usi case me jab hota hai jab baccho ko sanskar nahi diye jaate toh vaah mata pita aur dusre jo rishte hote hain inka vaah kabhi bhi unka mahatva nahi samajhte na hi unhe vaah samay dete hain na unke jo importance hai use kabhi samajh paate isliye jeevan me jo hai sanskaron ka bahut adhik adhik mahatva hai aur bhumika hai sanskar jo hote hain vaah is prakar se aajivan ke liye ek urvarak aur jo active paudhe ke liye khad ki zarurat hoti hai aur us safalta khulta hai aise hi manav jeevan me uske naitik naitik manavta vyavaharikta sanhita madad ki bhavna prem sevabhavi sabhi gunon ka vikas hai vaah sarkar ke sanskar ke madhyam se hi paida hote hain jo sanskar hote hain vaah hamare ghar ke jo bade bujurg hote hain mata pita hain dada dadi hai ki hai in sab se hi aate hain isliye kaha jata hai ki jo purane samay me jab shiv parivar hote the toh joint family me sanskar prafullit hote the aur wahan par lalit kumar sanskar baccho me dekar jaate the ek dusre ka sammaan karte the lekin jab se hum matlab pashchimi sanskriti ka anusaran karne lage hain aur western culture hai usko dekhkar hum kuch sikhne lage hain toh hamare yahan par sanyukt parivar se aaj hamare bharat me vartaman me yah sthiti hai ki aaj vaah sanyukt parivar viksit hokar ekal parivar me parivartit ho gaye hain toh aaj jo ekal parivar hai usme sirf mata pita aur bacche tum hi tak simit hota hai aur teen char char sadasya hi ek parivar me hote hain toh unmen vaah sanskar nahi aa pata us me hota kya hai ki yadi mata pita dono jo hai ab aap apne kisi business me sanlagn hai kisi kaam me vyast hain apne baccho ko samay nahi de paate isliye toh naitikta hai baccho me aur jo sanskar ka gun hai toh vaah gunon ka unmen gun gun jo hai usme utpann nahi ho paate ghum nahi aa paate kyonki baccho ko kuch cheezen aisi hoti hai jo kitabon se hatakar unhe alag se sikhaana padta tha dikhana padta hai aur sikhaana padta padega kyonki hum sabhi jante hain ki hum purane samay ki baat kare purane samay me jab school nahi thi gurukul hua karte the toh wahan par jo anushasan hote the aur guru jo hai unmen sanskar sanskaron ka shankar baccho me develop karte the toh us samay me yah sab cheezen thi jo aaj ke samay me na ke barabar ho gayi aaj yadi hum baat kare jo private school se hain vaah baccho ko ek pratispardha competition ke liye andha bana deti hoon vaah chahte hain ki basi aage badhe kampyutet kare kintu unhe vaah sab cheezen nahi de paate jo unke jeevan jeene ke liye zaroori hai jeevan me sirf paise hone se aise hi sab kuch nahi hoga rishte aur vyakti ke andar sanskar bhi hona chahiye kyonki yah sanskar hi vaah vat vriksh hai jo sabhi gunon ko viksit karta hai atah jo hamare jeevan ka mahatvapurna hissa hai

संस्कार हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है तो इस पर हम थोड़ा सा प्रकाश डालेंगे कि संस्कार

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संस्कार हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योंकि बिना कपड़ों के नैतिकता अच्छे व्यवहार आदि का अधिक वृद्धि नहीं हो सकती नैतिकता एक ऐसी चीज होती है जिससे हम अच्छे मूल्यों का प्रदर्शन कंकाल मुल्लों की जननी होती होते हैं अगर हमारे अंदर अच्छे मूल्यों का विकास नहीं होता है हम किसी के साथ अच्छा व्यवहार नहीं कर सकते हमारे लिए सामाजिक आध्यात्मिक धार्मिक आर्थिक रूप में आगे बढ़ने के मौके पर तुझे मूल्य उत्पन्न होते हैं उसके ही समाज में हम सम्मान के भागी तारों का हमारे अंदर होना बड़ा ही आवश्यक है

sanskar hamare jeevan ka mahatvapurna hissa hai kyonki bina kapdo ke naitikta acche vyavhar aadi ka adhik vriddhi nahi ho sakti naitikta ek aisi cheez hoti hai jisse hum acche mulyon ka pradarshan kankal mullon ki janani hoti hote hain agar hamare andar acche mulyon ka vikas nahi hota hai hum kisi ke saath accha vyavhar nahi kar sakte hamare liye samajik aadhyatmik dharmik aarthik roop me aage badhne ke mauke par tujhe mulya utpann hote hain uske hi samaj me hum sammaan ke bhaagi taaron ka hamare andar hona bada hi aavashyak hai

संस्कार हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योंकि बिना कपड़ों के नैतिकता अच्छे व्यवहार

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हेलो पंजाब का सवाल है बहुत ही अच्छा है संस्कृति हमारी पहचान होती हमारी पहचान हमारे शरीर से यह हमारी खूबसूरती से नहीं होती जो हमारे गुरुजन में संसार दिया हमारे माता-पिता ने चलने वाला हमारे लिए संस्कारों से हमें पहचानते हैं वहां का संस्कृत शब्द

hello punjab ka sawaal hai bahut hi accha hai sanskriti hamari pehchaan hoti hamari pehchaan hamare sharir se yah hamari khoobsoorti se nahi hoti jo hamare gurujan me sansar diya hamare mata pita ne chalne vala hamare liye sanskaron se hamein pehchante hain wahan ka sanskrit shabd

हेलो पंजाब का सवाल है बहुत ही अच्छा है संस्कृति हमारी पहचान होती हमारी पहचान हमारे शरीर से

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