हम भगवान को मंदिर में ही क्यों पूजते हैं मस्जिदों में ही पूछते हैं?...


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सुरेश चंद आचार्य

Social Worker ( Self employed )

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नमस्कार साथियों भगवान शब्द सनातन संस्कृति हिंदू संस्कृति का प्रतीक है और सनातन धर्म में ही मूर्ति पूजा का प्रावधान है मस्जिदों में मूर्ति पूजा का प्रावधान नहीं है मस्जिदों वाले संप्रदाय भगवान शब्द को नहीं मानते हुए अल्लाह को मानते हैं और अल्लाह के प्रार्थना करने के लिए जहां वह समुदाय के रूप में एकत्र होते हैं वह स्थान मस्जिद के सकते हैं जो कहीं भी हो सकती है उसमें पूजा का कोई कार्यक्रम नहीं होता है केवल एक समाज किसी भी जगह इकट्ठा होकर उनकी भाषा में प्रार्थना करने को नमाज कहा जाता है और उस जगह को मस्जिद का यही मूल फर्क है भगवान शब्द सनातन होने के कारण सनातन संस्कृति को मानने वाले ही मंदिर बनाकर उसमें भगवान की मूर्ति प्रतिष्ठित कर वहां पर पूजा करते हैं

namaskar sathiyo bhagwan shabd sanatan sanskriti hindu sanskriti ka prateek hai aur sanatan dharm me hi murti puja ka pravadhan hai masjidon me murti puja ka pravadhan nahi hai masjidon waale sampraday bhagwan shabd ko nahi maante hue allah ko maante hain aur allah ke prarthna karne ke liye jaha vaah samuday ke roop me ekatarr hote hain vaah sthan masjid ke sakte hain jo kahin bhi ho sakti hai usme puja ka koi karyakram nahi hota hai keval ek samaj kisi bhi jagah ikattha hokar unki bhasha me prarthna karne ko namaz kaha jata hai aur us jagah ko masjid ka yahi mul fark hai bhagwan shabd sanatan hone ke karan sanatan sanskriti ko manne waale hi mandir banakar usme bhagwan ki murti pratishthit kar wahan par puja karte hain

नमस्कार साथियों भगवान शब्द सनातन संस्कृति हिंदू संस्कृति का प्रतीक है और सनातन धर्म में ही

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Adbhut

Sex Guru, Spiritual leader, Philosopher, Motivational speaker

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हम भगवान को मंदिर मस्जिद में ही क्यों पूछते हैं किसने कहा है आपसे आपके भगवान को मंदिर मस्जिद नहीं पूछी यह तो आप की धर्मांधता है ना जब यह संसार ईश्वर का ही बनाया हुआ है तो आप उसे मंदिर मस्जिद में क्यों ढूंढ रहे हैं यह आपका अल्प ज्ञान है धर्म के बारे में क्योंकि आपने कभी भी ईश्वर को महसूस नहीं किया आपने ईश्वर के बारे में कभी विचार नहीं किया आपने ईश्वर को पढ़ा आपने इस और कुछ सुना पड़ा कहां धर्म की किताबों में सुना किन से पंडितों से मूल्यों से मौलवी हो सकता दरियों से कभी खुद से उसे ढूंढने की कोशिश नहीं की अगर उसे कभी खुद से ढूंढना होता तुम ने भगवान को जानने की कोशिश की होती कभी उसे समझने की कोशिश की होती वह कहां मिलता है कैसे मिलता है कैसा होता है तो फिर तुम इस सवाल नहीं पूछते हो मस्जिद में नहीं मिलता वह मंदिर में नहीं मिलता तो तुम्हारे हृदय में है बस तुम्हें पता होना चाहिए कि कौन सा दिया जलाना है उसे देखने के लिए और तुम्हारे हृदय नहीं है तुम्हारे अंदर ही है बस तुम उस दिया को जला ही नहीं पा रहे हो

hum bhagwan ko mandir masjid me hi kyon poochhte hain kisne kaha hai aapse aapke bhagwan ko mandir masjid nahi puchi yah toh aap ki dharmandhata hai na jab yah sansar ishwar ka hi banaya hua hai toh aap use mandir masjid me kyon dhundh rahe hain yah aapka alp gyaan hai dharm ke bare me kyonki aapne kabhi bhi ishwar ko mehsus nahi kiya aapne ishwar ke bare me kabhi vichar nahi kiya aapne ishwar ko padha aapne is aur kuch suna pada kaha dharm ki kitabon me suna kin se pandito se mulyon se maulavi ho sakta dariyon se kabhi khud se use dhundhne ki koshish nahi ki agar use kabhi khud se dhundhana hota tum ne bhagwan ko jaanne ki koshish ki hoti kabhi use samjhne ki koshish ki hoti vaah kaha milta hai kaise milta hai kaisa hota hai toh phir tum is sawaal nahi poochhte ho masjid me nahi milta vaah mandir me nahi milta toh tumhare hriday me hai bus tumhe pata hona chahiye ki kaun sa diya jalaana hai use dekhne ke liye aur tumhare hriday nahi hai tumhare andar hi hai bus tum us diya ko jala hi nahi paa rahe ho

हम भगवान को मंदिर मस्जिद में ही क्यों पूछते हैं किसने कहा है आपसे आपके भगवान को मंदिर मस्ज

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हम भगवान को मंदिर में क्यों पूछते मस्जिदों में किस प्रकार का उचित नहीं है क्योंकि भगवान को मंदिरों में पूजा जाता है और मस्जिदों में पूजा करता है क्योंकि वह एक धर्म विशेष की आस्था का विषय है वहां ब्रिज उसी प्रकार का अपमान है उसी प्रकार का स्वर है वही परमात्मा है कोई अल्लाह है रिकॉर्ड है जो उसका गुण ही यही है कि दूसरों के लिए इस मानव जीव मात्र की रक्षा करना सुरक्षा करना

hum bhagwan ko mandir me kyon poochhte masjidon me kis prakar ka uchit nahi hai kyonki bhagwan ko mandiro me puja jata hai aur masjidon me puja karta hai kyonki vaah ek dharm vishesh ki astha ka vishay hai wahan bridge usi prakar ka apman hai usi prakar ka swar hai wahi paramatma hai koi allah hai record hai jo uska gun hi yahi hai ki dusro ke liye is manav jeev matra ki raksha karna suraksha karna

हम भगवान को मंदिर में क्यों पूछते मस्जिदों में किस प्रकार का उचित नहीं है क्योंकि भगवान को

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