इतिहास लेखन में अभिलेख का क्या महत्व है?...


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NAFE SINGH

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इतिहास लेखन में अभिलेखों का महत्व दोस्तों प्राचीन भारतीय इतिहास को जानने के स्रोत को तीन भागों में बांटा जाता है जो प्राकृतिक स्रोत साहित्यिक स्रोत और विदेशी विवरण नदी में पुरातात्विक स्रोत प्राचीन पर या इतिहास को जानने का सर्वाधिक सक्षम विश्वसनीय साधन माना जाता है इसके अंतर्गत अभिलेख सिक्के स्मारक भवन मूर्तियां चित्रकला आदि आते हैं इनमें अभी लेट क्यों है अभिलेख पत्थरों स्तंभों धातु की पट्टियों या मृदभांड पर उत्कीर्ण प्राचीन विवरण को अभिलेख कहते हैं अभिलेख मुहूर्त तू प्रस्तर स्तंभ चट्टानों ताम्रपत्र मूर्तियों मंदिर की दीवारों औरतों पर प्राप्त होते हैं कि उस समय की अलग-अलग भाषाओं जैसे प्राकृतिक पाली संस्कृति तथा अन्य दक्षिण भाषाओं में मिलते हैं कुछ अभिलेख देसी या विदेशी भाषा में भी उत्कीर्ण है जिससे क्षेत्र की संस्कृति का पता चलता है उसमें की भाषा कविता जलता है और उस समय के जो दूसरे देशों के साथ जो व्यापारिक संबंध थे उनके साथ संबंधों का पता चलता है यह अति विश्वसनीय प्राथमिक स्रोत माने जाते हैं क्योंकि इनमें ज्यादा फेरबदल नहीं किया जा सकता

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इतिहास लेखन में अभिलेखों का महत्व दोस्तों प्राचीन भारतीय इतिहास को जानने के स्रोत को तीन भ

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ऐतिहासिक जानकारी में इतिहास लेखन में अभिलेख से हमें उस समय के ऐतिहासिक चीजों की जानकारी मिलती है जिस समय कोई लिखित अभिलेख ना ना मिलने पर हमें अभिलेखों से बहुत महत्वपूर्ण जानकारियां मिलती हैं लाइक अशोक का अशोक के अभिलेख

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ऐतिहासिक जानकारी में इतिहास लेखन में अभिलेख से हमें उस समय के ऐतिहासिक चीजों की जानकारी मि

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Geet Awadhiya

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इतिहास में जो लेखन हुए हैं उस समय जो पेपर था वह मौजूद नहीं था जिसने आज हम पेपर में लिखते हैं तो लोग पत्थरों में लिखते थे तथा ताम्रपत्र ओं में लिखते थे पेड़ों के पत्तों में लिखते थे इसलिए इतिहास में अभी लेकर नहीं आने की जो कठोर सत्ता ऊपर लिखा जाता है उसे अभी लेखन कहते हैं उसका काफी बड़ा महत्व है क्योंकि सीधी सीधी बात है हमें जो आज इतिहास के बारे में पता चल रहा है उन्हीं लेखन ओं से पता चल रहा है जो आज तक के जिंदा रह पाए हैं खराब नहीं हुआ है और ऐसे लेकिन पत्थरों वाले जो है वह काफी पुराने हैं

itihas mein jo lekhan hue hai us samay jo paper tha vaah maujud nahi tha jisne aaj hum paper mein likhte hai toh log pattharon mein likhte the tatha tamrapatra on mein likhte the pedon ke patton mein likhte the isliye itihas mein abhi lekar nahi aane ki jo kathor satta upar likha jata hai use abhi lekhan kehte hai uska kaafi BA da mahatva hai kyonki seedhi seedhi BA at hai hamein jo aaj itihas ke BA re mein pata chal raha hai unhi lekhan on se pata chal raha hai jo aaj tak ke zinda reh paye hai kharab nahi hua hai aur aise lekin pattharon waale jo hai vaah kaafi purane hain

इतिहास में जो लेखन हुए हैं उस समय जो पेपर था वह मौजूद नहीं था जिसने आज हम पेपर में लिखते ह

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