जेंडर निष्पक्ष समाज की रचना में परिवार जनसंचार माध्यम तथा शिक्षक भूमिका की चर्चा कीजिए?...


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प्रशासन की प्रकृति देखने पर यह पता चलता है कि जिस बात पर चर्चा करने जा रहे हैं जेंडर उसके निष्पक्षता की बात जो करने जा रहे हैं व्यापक का प्रश्न है खासकर भारतीय समाज में हम पाते हैं कि लिंगभेद काफी प्राचीन काल से चलता है और अगर वैदिक सभ्यता को छोड़ दें वह भी पर वैदिक काल तो उसके बाद चाहे वह उत्तर वैदिक काल हो या उसके बाद जो भी कर रहा हर कालखंड में चाहे वह आधुनिक काल ही क्यों ना हो स्त्रियों के साथ भेदभाव देखा गया है स्त्री और पुरुष में भेदभाव किया जाता रहा है तो जेंडर निष्पक्ष हो भेदभाव ना हो इसके लिए जो हमारी सामाजिक रचना है उसमें परिवार और जनसंचार साथ ही साथ शिक्षक की भूमिका जो है वह महत्वपूर्ण हो जाती है परिवार बॉस समूह जो एक रक्त से बना जिसमें पति-पत्नी में तो वैवाहिक संबंध होता है बाकी जो सदस्य होते हैं वह रक्त समूह से जुड़े तो परिवार में माता-पिता अपने बच्चे और बच्चियों में भेदभाव ना करें यह जरूरी है ऐसा देखा जाता है कि जो लड़के हैं उन्हें मां-बाप की तरह से प्रोत्साहन दिया जाता है उन्हें कभी रोका टोका नहीं जाता लेकिन जब बात आती है इसलिए की तो उन्हें बात बात पर रोका टोका जाता है कि बाहर नहीं जाना है इनसे नहीं मिलना है इस खेल को खेलना है इसी विषय को पढ़ना है जिस खासकर स्त्रियों को आर्ट सब्जेक्ट पढ़ने के लिए बाध्य किया जाता है होम साइंस लेने के लिए बाध्य किया जाता है तो माता-पिता की भूमिका यहां अग्रणी हो जाती है कि वह अपने बच्चों में विभेद ना करें अगर लड़कियां अच्छा कर रही है उनमें डॉक्टर इंजीनियर है तो उनका सहयोग करें उन्हें तरह-तरह के सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर प्रदान करें वह बात बात पर रोते रोते नहीं लड़कियों का मनोबल बढ़ेगा और जो लिंग भेद है वह कम होगा बात करते हैं अब जनसंचार के तो भारतीय जनसंख्या की जो प्रणाली है उसकी भूमिका अभी तक उसने निष्पक्ष नहीं हुई लोगों की सोच नहीं बदली तो यह भी उसने बदल नहीं पाया अभी तक भारत में बहुत सी ऐसे क्षेत्र हैं जहां स्त्रियों को मौका नहीं दिया जाता काम के लिए अभी हाल के दिनों में फौज में भर्ती किया गया इसके पहले वह फौज में शामिल नहीं हो सकती थी रेल का परिचालन नहीं कर सकती थी हाल में एक महिला ने रेल का परिचालन किया ऑटो ड्राइवर नहीं हो सकती थी आजकल लड़कियां ऑटो ड्राइवर तो यह जो हम बात कर रहे हैं जनसंचार की तो वाशिंग पाउडर निरमा का प्रचार दिखाने के लिए एक लड़की एक औरत ही आती है एक साबुन का प्रचार करना हो तो औरत में आती है तो ऐसे तो हम देखते हैं की दवा घरेलू प्रोडक्शन के प्रचार के लिए कंपनियां जो है औरतों को ही चीज करते हैं यहां तक की है अंडर वियर के प्रचार के लिए भी उम्मीदवार खड़े किए और मीडिया को भी बदलना होगा मीडिया में खासकर समाचार पत्रों में अबला नारी और स्त्रियों को उनका अधिकार मिलना चाहिए उस चीजों को लेकर के जैसे टीवी पर डिबेट होना क्यों तो पैसे कब पेपर नहीं चाहिए सनी करनी चाहिए घर से रात में नहीं निकलना चाहिए यह सारी चीजें और कारण भी है कि समाज में बहुत सारे लोग भी हैं जो उनका गलत फायदा उठाते थे जनसंचार जो है वह है साथ ही उसने काम भी किया है आज महिलाएं बहुत सारे क्षेत्रों में आगे आ रही है और आज तो लगभग लगभग कहा जाए तो कोई ऐसा क्षेत्र बचा नहीं है जहां महिलाएं हर जगह महिलाएं और जब बात आती है शिक्षक की यहां तो मैं कहूंगा कि एक कुशल शिक्षक हूं और वह महिलाओं का सम्मान ना करें उन्हें उनका अधिकार ना दिलाएं एक शिक्षक होने का क्या फायदा शिक्षक के काबिल नहीं है शिक्षक का कर्तव्य है कि वह बालक और बालिका में विवेचना करें वर्ग में उन्हें प्रोत्साहित करें उन्हें खेल के लिए प्रोत्साहित करें उन्हें विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें और मैं तो यही कहूंगा कि शिक्षा के बहुत सारे काम की नहीं है लड़कियों से नहीं हो सकता इस लड़के इस तरह की बातों का स्टेटमेंट नीति का परित्याग करें और सबको मौका दें और मुझे लगता है कि अगर ऐसा कुछ करते हैं तो जरूर हमारा समाज जो है वह उसे सुधार होगा जेंडर में स्वच्छता को हम देख पाएंगे धन्यवाद

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प्रशासन की प्रकृति देखने पर यह पता चलता है कि जिस बात पर चर्चा करने जा रहे हैं जेंडर उसके

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Rahul kumar

Junior Volunteer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

निष्पक्ष समाज की रचना में परिवार जनसंचार माध्यम और शिक्षक भूमिका की चर्चा की बिल्कुल दीजिए जो शिक्षक या फिल्म जनसंचार माध्यम बोलते तो ने बहुत ही इंपॉर्टेंट भूमिका अदा करती है क्योंकि शिक्षक ऐसा एक के बोल सकते हैं देश है कैसा होता है जिसके चुरु कोई भी उस पर चढ़ के आगे जिंदगी में जो मुकाम हासिल कर पाता है ठीक 20 मिनट होता है अगर शिक्षक सही तरीके से नहीं शिक्षा दे शिक्षक सही तरीके से नहीं ज्ञान दे तो इनके इंटरेक्शन जो चेंज होता है एक सही गुरु सहित शिक्षक जो है बच्चे की केयर को बेहतर बनाने में बहुत बड़ा योगदान होता है और जहां तक जन जन संचार माध्यम की बात है तो यह भी काफी इंपोर्टेंट सांसदों का नजरिया 3 होता है कोई पोस्टपेड के पीछे लोग गलत तरीके से सोचते हैं कि से क्या सही है क्या गलत है एक नजरिया यूनिट फॉर इंटरव्यूज है मैंने कहीं चेंज होता है जनसंचार माध्यम से दोनों का स्थान बहुत इंपॉर्टेंट होता है मेरे ख्याल से जनता निष्पक्ष समाज की रचना करने के लिए लोगों की सोच बदलनी चाहिए लोग जो है जब तो सोच नहीं बदलेगा इस पर कीजिए जो पूरी तरह से खत्म कभी नहीं होगा

nishpaksh samaj ki rachna mein parivar jansanchar madhyam aur shikshak bhumika ki charcha ki bilkul dijiye jo shikshak ya film jansanchar madhyam bolte toh ne BA hut hi important bhumika ada karti hai kyonki shikshak aisa ek ke bol sakte hai desh hai kaisa hota hai jiske churu koi bhi us par chad ke aage zindagi mein jo mukam hasil kar pata hai theek 20 minute hota hai agar shikshak sahi tarike se nahi shiksha de shikshak sahi tarike se nahi gyaan de toh inke interaction jo change hota hai ek sahi guru sahit shikshak jo hai BA cche ki care ko behtar BA naane mein BA hut BA da yogdan hota hai aur jaha tak jan jan sanchar madhyam ki BA at hai toh yah bhi kaafi important sansadon ka najariya 3 hota hai koi postpaid ke peeche log galat tarike se sochte hai ki se kya sahi hai kya galat hai ek najariya unit for interviewers hai maine kahin change hota hai jansanchar madhyam se dono ka sthan BA hut important hota hai mere khayal se janta nishpaksh samaj ki rachna karne ke liye logo ki soch BA dalni chahiye log jo hai jab toh soch nahi BA dalega is par kijiye jo puri tarah se khatam kabhi nahi hoga

निष्पक्ष समाज की रचना में परिवार जनसंचार माध्यम और शिक्षक भूमिका की चर्चा की बिल्कुल दीजिए

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