क्या 12वाँ घर वास्तव में ज्योतिष ज्ञान के अनुसार बुरा है?...


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MAA KALI VAATU JYOTISH

World Famous Vastu Consultant & Astrologer

1:00
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हेलो दोस्तों नमस्ते मैं महाकाली वास्तु ज्योतिष से अमूल्य पांडा बाद कदम मुंबई महाराष्ट्र से आपका यह क्वेश्चन है कि ज्योतिष शास्त्र में भादवा स्थानों का भाव की अनुसार ज्योतिष शास्त्र में 12 भाव का स्थान क्या पूरा स्थान है अब सही क्वेश्चन के हैं ज्योतिष शास्त्र का 12वां स्थान होता है वह होता है जो जिसका खुदा बड़ा स्थान होता है सबसे अच्छा भाव होता है और पंचम होता है नवा भाग होता है तो स्वभाव होता है और आपका जवाब होता है वह होता है बाबा संजू बे होता है कि जातक की कुंडली में जो तीसरा भाग जाता है लेकिन कुंडली लग्न कुंडली देखने की पदक हम उसमें हम डिसाइड कर सकते हैं कौन सा पौधा करेगा कौन सा अच्छा प्रभाव है इसके लिए आप अपनी कुंडली भेज कर आप संपर्क कर लीजिए आपको पूरी जानकारी दी जाएगी धन्यवाद

hello doston namaste main mahakali vastu jyotish se amuly panda baad kadam mumbai maharashtra se aapka yah question hai ki jyotish shastra me bhaadwa sthano ka bhav ki anusaar jyotish shastra me 12 bhav ka sthan kya pura sthan hai ab sahi question ke hain jyotish shastra ka va sthan hota hai vaah hota hai jo jiska khuda bada sthan hota hai sabse accha bhav hota hai aur pancham hota hai nava bhag hota hai toh swabhav hota hai aur aapka jawab hota hai vaah hota hai baba sanju be hota hai ki jatak ki kundali me jo teesra bhag jata hai lekin kundali lagn kundali dekhne ki padak hum usme hum decide kar sakte hain kaun sa paudha karega kaun sa accha prabhav hai iske liye aap apni kundali bhej kar aap sampark kar lijiye aapko puri jaankari di jayegi dhanyavad

हेलो दोस्तों नमस्ते मैं महाकाली वास्तु ज्योतिष से अमूल्य पांडा बाद कदम मुंबई महाराष्ट्र से

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ज्योतिषी झा मेरठ (Pt. K L Shashtri)

Astrologer Jhaमेरठ,झंझारपुर और मुम्बई

1:03
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नमस्कार सर वह हानि का स्थान होता है थोड़ा सा नकारात्मक बोला जाता है परंतु यदि विदेश यात्रा की हम बात करें तो इसका भी विचार जो है बार में भाव से ही किया जाता है कोई भी भाव पूरा नहीं होता बुरा होते हैं कि वहां पर कौन सी राशि है कौन सा ग्रह बैठा हुआ है उसके अनुसार आपको शुभ फल मिल रहे हैं या अशुभ फल जैसे हम शुक्र की बात करें तो शुक्रवार में भाव में जाकर यदि एक्साइटिड पोजीशन में मतलब उस स्थिति में जा करके बैठ जाए तो व्यक्ति को सारी सुख सुविधाएं दे देते हैं जो किसी भी भाव को खराब बोलना उचित नहीं है धन्यवाद

namaskar sir vaah hani ka sthan hota hai thoda sa nakaratmak bola jata hai parantu yadi videsh yatra ki hum baat kare toh iska bhi vichar jo hai baar me bhav se hi kiya jata hai koi bhi bhav pura nahi hota bura hote hain ki wahan par kaun si rashi hai kaun sa grah baitha hua hai uske anusaar aapko shubha fal mil rahe hain ya ashubh fal jaise hum shukra ki baat kare toh sukravaar me bhav me jaakar yadi excited position me matlab us sthiti me ja karke baith jaaye toh vyakti ko saari sukh suvidhaen de dete hain jo kisi bhi bhav ko kharab bolna uchit nahi hai dhanyavad

नमस्कार सर वह हानि का स्थान होता है थोड़ा सा नकारात्मक बोला जाता है परंतु यदि विदेश यात्रा

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Daivagya Krishna Shastri

Astrologer, Ved, Bhagvat Mahapuran

1:16

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जय श्री राधे कृष्णा जय श्री श्यामा कुंडली का द्वादश भाव वैभव कहां गया है और कोई भी भाव हमारे यहां बुरा नहीं है क्योंकि बुराई की अच्छाई का प्रादुर्भाव है यदि बुरा नहीं रहेगा तो अच्छे की कोई कीमत नहीं रह जाएगी और बुरा इसलिए नहीं क्योंकि वह भाव से ही व्यक्ति के खर्चे का पता लगता है और जब आप खर्च करोगे तभी आपके अंदर आए का प्रादुर्भाव होगा तभी आपके आय को बढ़ावा मिलेगा और जब खर्च करने की क्षमता नहीं होगी आपके जीवन में आए भी होने वाला नहीं है और बारहवें भाव से ही ज्योतिष के अनुसार मोक्ष का भी विचार किया जाता है विदेश यात्रा का विचार किया जाता है निश्चित रूप से कुंडली का कोई भी भाव व्यर्थ नहीं है कोई भी भाव बुरा नहीं है सभी भाव बढ़िया है कोई उत्तम है कोई माध्यम है तो कोई निम्न है इस तरह से संज्ञा हमें परिभाषित करनी चाहिए बुरा और अच्छा ऐसा किसी को कहने पर अपराध लगता है तुलसीदास जी भी कहते हैं किन्ही बड़े छोटे कहां तक राधे श्री राधे कृष्णा जय श्यामा

jai shri radhe krishna jai shri shyaama kundali ka dwadash bhav vaibhav kahaan gaya hai aur koi bhi bhav hamare yahan bura nahi hai kyonki burayi ki acchai ka pradurbhav hai yadi bura nahi rahega toh acche ki koi kimat nahi reh jayegi aur bura isliye nahi kyonki vaah bhav se hi vyakti ke kharche ka pata lagta hai aur jab aap kharch karoge tabhi aapke andar aaye ka pradurbhav hoga tabhi aapke aay ko badhawa milega aur jab kharch karne ki kshamta nahi hogi aapke jeevan mein aaye bhi hone vala nahi hai aur barahaven bhav se hi jyotish ke anusaar moksha ka bhi vichar kiya jata hai videsh yatra ka vichar kiya jata hai nishchit roop se kundali ka koi bhi bhav vyarth nahi hai koi bhi bhav bura nahi hai sabhi bhav badhiya hai koi uttam hai koi madhyam hai toh koi nimn hai is tarah se sangya hamein paribhashit karni chahiye bura aur accha aisa kisi ko kehne par apradh lagta hai tulsidas ji bhi kehte hain kinhi bade chote kahaan tak radhe shri radhe krishna jai shyaama

जय श्री राधे कृष्णा जय श्री श्यामा कुंडली का द्वादश भाव वैभव कहां गया है और कोई भी भाव हमा

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बताना चाहूंगा कि छोड़ा है इस भाव से और 88 उसको ज्योतिष शास्त्र में सही नहीं कहा गया है बार किस प्रकार से नहीं कहा गया मैं बताऊंगा आपको क्या अर्थ है इसका पता स्थान अर्थ का है काजल ऐसा ऐसा कुछ नहीं है हमारे भाव खराब कैसे होते हैं हर बहुत सही होते हैं हर बार खराब होते हैं हमारे भाव खराब कैसे होता है यदि शनि की दृष्टि कुर ग्रहों की दृष्टि इस बहुत पढ़ती हो समझ लो शुभम खराब हो जाता है बिल्कुल उस भाव के रूप गुण कम हो जाते हैं उसके फल कम हो जाते हैं भुजरियों बताऊंगा आपको छठे स्थान का स्वामी है किसी भी भाव में जाकर बैठता है उस भाव के फलों में कमी करता है अच्छे फूलों की कमी करता हूं वहां पर हाथ में भाव का स्वामी यदि ज्योतिष का जानकार हो समझ पाएगा आठवें भाव का स्वामी यदि किसी स्थान पर जाकर बैठ तो उसे स्थानों कमी करता है उस स्थान को नकारात्मक कर देता है थोड़ा सा और जो 12 भाव और विशेष बारोट देखते हम 12 बॉक्स का कारक है बंधन का भी कार्य कब आ रहा हूं खर्चे का कारक है हमारी अमूल संपत्ति खराब हो तो हमारी अमूल्य संपत्ति है उसे नष्ट कर देते हैं बिना कुछ सोचे-समझे क्षणिक सुखों के लिए एक शानदार है तो हम सांसारिक भोगों को भोग कर अंत में मोक्ष को प्राप्त करते हैं हम चारों वर्णों का चारों आश्रमों का सिम का पालन करते हुए हम अंत में मुख्य को प्राप्त करते हैं यदि बारहवें स्थान शानदार हो तो ले लो पैसा नहीं मालूम होता है जब कोई करता तब होता है समझ लो अब तो करोगे तो बोर हो जाओगे

batana chahunga ki choda hai is bhav se aur 88 usko jyotish shastra me sahi nahi kaha gaya hai baar kis prakar se nahi kaha gaya main bataunga aapko kya arth hai iska pata sthan arth ka hai kajal aisa aisa kuch nahi hai hamare bhav kharab kaise hote hain har bahut sahi hote hain har baar kharab hote hain hamare bhav kharab kaise hota hai yadi shani ki drishti kaur grahon ki drishti is bahut padhati ho samajh lo subham kharab ho jata hai bilkul us bhav ke roop gun kam ho jaate hain uske fal kam ho jaate hain bhujriyon bataunga aapko chhathe sthan ka swami hai kisi bhi bhav me jaakar baithta hai us bhav ke falon me kami karta hai acche fulo ki kami karta hoon wahan par hath me bhav ka swami yadi jyotish ka janakar ho samajh payega aathven bhav ka swami yadi kisi sthan par jaakar baith toh use sthano kami karta hai us sthan ko nakaratmak kar deta hai thoda sa aur jo 12 bhav aur vishesh barot dekhte hum 12 box ka kaarak hai bandhan ka bhi karya kab aa raha hoon kharche ka kaarak hai hamari amul sampatti kharab ho toh hamari amuly sampatti hai use nasht kar dete hain bina kuch soche samjhe kshanik sukho ke liye ek shandar hai toh hum sansarik bhogon ko bhog kar ant me moksha ko prapt karte hain hum charo varnon ka charo aashramon ka sim ka palan karte hue hum ant me mukhya ko prapt karte hain yadi barahaven sthan shandar ho toh le lo paisa nahi maloom hota hai jab koi karta tab hota hai samajh lo ab toh karoge toh bore ho jaoge

बताना चाहूंगा कि छोड़ा है इस भाव से और 88 उसको ज्योतिष शास्त्र में सही नहीं कहा गया है बार

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Chinta Haran Tripathi

Astrologer/Vastu Shastra

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मास्टर वास्तव में ज्योतिष के अनुसार बुरा है कहने के लिए तो 12 मार्च को शुभ नहीं माना जाता लेकिन 12वां स्थान होता है प्लीज आप द बेड पलंग चुका है अगर बारहवां भाव का स्वामी बारहवें भाव में है शुभ ग्रहों से युक्त दृष्ट है तो ऐसा व्यक्ति भोग करेगा यानी उसके विलासिता से संबंधित संबंधित सभी प्रकार के सुखों का भोग करेगा और भोग बिना धन के नहीं होता इसलिए 12 मा भाग सभी जो है देशों से अशुभ नहीं है हां 12 में भाव का स्वामी अगर अशोक भाव में हो और शुभ ग्रहों से युक्त हो पाप ग्रहों के मध्य में बारहवें भाव में पाप ग्रह हो तो 12 भाव का फल शुभ नहीं होगा पंडित चिंता हर सपा के बाद शास्त्री एवं ज्योति लखनऊ व्हाट्सएप नंबर

master vaastav me jyotish ke anusaar bura hai kehne ke liye toh 12 march ko shubha nahi mana jata lekin va sthan hota hai please aap the bed palang chuka hai agar barahavan bhav ka swami barahaven bhav me hai shubha grahon se yukt drist hai toh aisa vyakti bhog karega yani uske vilasita se sambandhit sambandhit sabhi prakar ke sukho ka bhog karega aur bhog bina dhan ke nahi hota isliye 12 ma bhag sabhi jo hai deshon se ashubh nahi hai haan 12 me bhav ka swami agar ashok bhav me ho aur shubha grahon se yukt ho paap grahon ke madhya me barahaven bhav me paap grah ho toh 12 bhav ka fal shubha nahi hoga pandit chinta har sapa ke baad shastri evam jyoti lucknow whatsapp number

मास्टर वास्तव में ज्योतिष के अनुसार बुरा है कहने के लिए तो 12 मार्च को शुभ नहीं माना जाता

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RAJKUMAR

Sharp Astrology

6:17

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द्वादश भाव व्यय का खर्च का भाव माना जाता है सैयां सुख का भाव माना जाता है मोक्ष का भाव माना जाता है नेत्र का भाव माना जाता है पांव का भाव माना जाता है द्वादश भाव यदि प्रभावित होता है यदि द्वादश भाव शुभ ग्रहों से प्रभावित होता है तो हमारा खर्च जैसे बृहस्पति द्वादश भाव में तो मानक अच्छी जगह होता है बढ़िया जगह धार्मिक जगह हमारा खर्च होता है वही बदबाप कराएं होता है तो हमारा धन अन्यथा अर्थात रोग इत्यादि में किसी समस्याओं में मुकदमे इत्यादि में होता है तो बाद में भाव का जीवन बहुत महत्व है यदि बाद में भाव में बृहस्पति होता है तो मोक्ष योग बाद में में केतु होने पर भी मुलाकात मोक्ष मोक्ष दिला आने वाला मोक्ष बताता योग भी माना जाता है क्योंकि बाद में भाव ही जीवन का अंतिम भाग है उसके बाद जीवन खत्म हो जाता है क्योंकि हमारे 12 भाव वहां पर खत्म हो जाते हैं फिर हमारा अगला जन्म होता है जिसमें फिर लगन से प्रारंभ होकर चलता है इसीलिए बाद में भाव का होली में बहुत महत्व है और यह जरूरी नहीं बुरा ही बाद में भाव सही हमने जाना कि मोक्ष में मिलेगा बाद में भाव में ही क्योंकि खर्च तो हर व्यक्ति का होता है यदि अच्छी जगह पर खर्च होता है तो उससे पॉजिटिव एनर्जी हमको मिलती है दिखाओ जरा मरा खर्च होता है तो नेगेटिव एलर्जी हमको मिलती है तो एक बड़ा महत्व है यह महत्वपूर्ण बात है जीवन में बहुत महत्व है इस चीज का इसीलिए बार-बार भाव कोई जरूरी नहीं बुरा ही हो या अच्छा फल भी दे सकता है धन्यवाद

dwadash bhav vyay ka kharch ka bhav mana jata hai saiyan sukh ka bhav mana jata hai moksha ka bhav mana jata hai netra ka bhav mana jata hai paav ka bhav mana jata hai dwadash bhav yadi prabhavit hota hai yadi dwadash bhav shubha grahon se prabhavit hota hai toh hamara kharch jaise brihaspati dwadash bhav me toh maanak achi jagah hota hai badhiya jagah dharmik jagah hamara kharch hota hai wahi badbap karaye hota hai toh hamara dhan anyatha arthat rog ityadi me kisi samasyaon me mukadme ityadi me hota hai toh baad me bhav ka jeevan bahut mahatva hai yadi baad me bhav me brihaspati hota hai toh moksha yog baad me me Ketu hone par bhi mulakat moksha moksha dila aane vala moksha batata yog bhi mana jata hai kyonki baad me bhav hi jeevan ka antim bhag hai uske baad jeevan khatam ho jata hai kyonki hamare 12 bhav wahan par khatam ho jaate hain phir hamara agla janam hota hai jisme phir lagan se prarambh hokar chalta hai isliye baad me bhav ka holi me bahut mahatva hai aur yah zaroori nahi bura hi baad me bhav sahi humne jana ki moksha me milega baad me bhav me hi kyonki kharch toh har vyakti ka hota hai yadi achi jagah par kharch hota hai toh usse positive energy hamko milti hai dikhaao zara mara kharch hota hai toh Negative allergy hamko milti hai toh ek bada mahatva hai yah mahatvapurna baat hai jeevan me bahut mahatva hai is cheez ka isliye baar baar bhav koi zaroori nahi bura hi ho ya accha fal bhi de sakta hai dhanyavad

द्वादश भाव व्यय का खर्च का भाव माना जाता है सैयां सुख का भाव माना जाता है मोक्ष का भाव मान

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