हम सीताराम क्यों होते हैं राम सीता क्यों नहीं बोलते हैं?...


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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

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हम सीताराम इसलिए कहते हैं क्योंकि हमारी भारतीय संस्कृति में स्त्रियों को सर्वाधिक सम्मान दिया गया है कि मैं आदि शक्ति माना गया है क्योंकि आजकल सभी मानव नजर आता है उसमें समा संवेदना ममता उदारता शाम को कि मानवीय पुणे समस्त की जननी मां की होती है इसलिए माता मिसाइल को सम्माननीय माना इसलिए पहली के अनुसार पांच की संस्कृति में पहली स्त्री का नाम आता है वैसे सीताराम राधेश्याम पार्वती परमेश्वर लक्ष्मीनारायण अधिक विभिन्न एग्जांपल सिंह भाटी को सम्मान दें भारतीय संस्कृति के द्वारा किया हुआ है

hum sitaram isliye kehte hain kyonki hamari bharatiya sanskriti me sthreeyon ko sarvadhik sammaan diya gaya hai ki main aadi shakti mana gaya hai kyonki aajkal sabhi manav nazar aata hai usme sama samvedana mamata udarata shaam ko ki manviya pune samast ki janani maa ki hoti hai isliye mata missile ko sammananiya mana isliye pehli ke anusaar paanch ki sanskriti me pehli stree ka naam aata hai waise sitaram radheshyam parvati parmeshwar lakshminarayan adhik vibhinn example Singh bhati ko sammaan de bharatiya sanskriti ke dwara kiya hua hai

हम सीताराम इसलिए कहते हैं क्योंकि हमारी भारतीय संस्कृति में स्त्रियों को सर्वाधिक सम्मान द

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Girdhari Lal Mishra

Accountant(M.com,LLB)

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हम सीताराम क्यों कहते हैं राम सीता क्यों नहीं बोलते हैं लेकिन अच्छी आपने लेकिन हम हमारे सनातन धर्म में शक्ति संपन्न सलमान की पूजा की जाती है और हर व्यक्ति अपनी अर्धांगिनी के माध्यम से सकता है जैसे नारायण की शक्ति लक्ष्मी है महेश्वर सच्ची उमा है और जगह नगर ब्रह्मा जी की शक्ति वाहिनी है तो ऐसे ही इन सब जो मंत्र बोले जाते हैं उन्हें भी लक्ष्मीनारायण अभ्याम नमः उमा महेश्वराय नमः वाणी हिरण्यगर्भया महासचिव पद अंदर आध्याम नमः ओम लक्ष्मी नारायण उमा महेश्वर वाणी और ब्रह्मा जी और सचिव इंद्रजीत समय पहले शक्ति फिर देवता का नाम आया इस प्रकार वैसे भी हम लोग कहते माता पिता मां पिता से बड़ी होती है मानस में तो साफ-साफ को शीला जी के मुख से तुलसीदास जी ने क्या लगाया कि जो केवल पिता एस उतारता ओ जाने जा ओ जाने बड़ी माता पिता की आज्ञा को जंगल जाने कि अकेले पिता की आज्ञा हो तो मैं कह रही हूं कि ना जाऊं मैया के पड़ी है मेरी आज्ञा का पालन करो लेकिन अगर मां कहकर ही और पिता दशरथ दोनों ने कहा है जो पितु मातु करो बन जाना तो कान में समान माता-पिता दोनों ने कहा तो तुम्हारे लिए बहुत गंभीर शब्द और एक तो इस तरह आप शक्ति और देवता तो लक्ष्मी नारायण की शक्ति पिताजी राम जी की शक्ति है तो सीताराम कहते हैं और आशा नेगी ने बहुत समझाया है किसी राम जी का स्वभाव है कि निर्मल मन जन सो मोहि पावा निर्मल मन की कहते शुरू में हम अपने को निर्मल नहीं मानते तो जब हम अच्छे होंगे साफ-सुथरे होंगे तब पिताजी मुझे पकड़कर चलाएंगे गंदे होंगे तो कहां के पास मां फिल्म को मिला जुला के अच्छे कपड़े पहना के बाबूजी बना देंगे चलने लायक तो वह समझने पहले श्री राम जी के पास उनकी वंदना है कि किसी की जगत जननी जानकी अतिशय प्रिय करुणानिधान की ताके जुग पद कमल नाम जासु कृपा निर्मल मति पावन जासु कृपा निर्मल मति पावन उनकी कृपा से मिले नर्मदा जाऊंगा जाऊंगा दुकान को पसंद करेंगे तो पुण्य मन वचन कर्म रघुनायक चरण कमल बंदो तो फिर आगे कहा जैसे सीता राम के बिना में अलग लगी है लेकिन दोनों एक साथ संयुक्त रूप से हैं जैसे वाणी और वाणी का अर्थ होता है जैसे जल और जल की लहर होती आपस में मिली हुई भी होती है और थोड़ा करने के लिए अलग भी होती तो गिरा अरथ जल बीच संकट भिन्न-भिन्न सीताराम पदम सीताराम की जनगणना करता हूं कालिदास ने भी पागल था कि उसे प्राप्त हुआ करते जगह पर वंदे पार्वती परमेश्वर पति परमेश्वर पति परमेश्वर अंबिका भवानी शंकर वंदे श्रद्धा श्रद्धा पति परमेश्वर माता पिता उदाहरणों में शक्ति का नाम लिया जाता है इसलिए हम सीताराम जी की शक्ति हैं सीताराम हरि ओम

hum sitaram kyon kehte hain ram sita kyon nahi bolte hain lekin achi aapne lekin hum hamare sanatan dharm me shakti sampann salman ki puja ki jaati hai aur har vyakti apni ardhangini ke madhyam se sakta hai jaise narayan ki shakti laxmi hai maheswar sachi uma hai aur jagah nagar brahma ji ki shakti vahini hai toh aise hi in sab jo mantra bole jaate hain unhe bhi lakshminarayan abhyam namah uma maheshwaray namah vani hiranyagarbhaya mahasachiv pad andar adhyam namah om laxmi narayan uma maheswar vani aur brahma ji aur sachiv indrajit samay pehle shakti phir devta ka naam aaya is prakar waise bhi hum log kehte mata pita maa pita se badi hoti hai manas me toh saaf saaf ko shila ji ke mukh se tulsidas ji ne kya lagaya ki jo keval pita S utarata O jaane ja O jaane badi mata pita ki aagya ko jungle jaane ki akele pita ki aagya ho toh main keh rahi hoon ki na jaaun maiya ke padi hai meri aagya ka palan karo lekin agar maa kehkar hi aur pita dashrath dono ne kaha hai jo pitu mathu karo ban jana toh kaan me saman mata pita dono ne kaha toh tumhare liye bahut gambhir shabd aur ek toh is tarah aap shakti aur devta toh laxmi narayan ki shakti pitaji ram ji ki shakti hai toh sitaram kehte hain aur asha negi ne bahut samjhaya hai kisi ram ji ka swabhav hai ki nirmal man jan so mohi pawa nirmal man ki kehte shuru me hum apne ko nirmal nahi maante toh jab hum acche honge saaf suthre honge tab pitaji mujhe pakadakar chalayenge gande honge toh kaha ke paas maa film ko mila jula ke acche kapde pehna ke babu ji bana denge chalne layak toh vaah samjhne pehle shri ram ji ke paas unki vandana hai ki kisi ki jagat janani janki atishay priya karunanidhan ki take jug pad kamal naam jasu kripa nirmal mati paavan jasu kripa nirmal mati paavan unki kripa se mile narmada jaunga jaunga dukaan ko pasand karenge toh punya man vachan karm raghunayak charan kamal bando toh phir aage kaha jaise sita ram ke bina me alag lagi hai lekin dono ek saath sanyukt roop se hain jaise vani aur vani ka arth hota hai jaise jal aur jal ki lahar hoti aapas me mili hui bhi hoti hai aur thoda karne ke liye alag bhi hoti toh gira earth jal beech sankat bhinn bhinn sitaram padam sitaram ki janganana karta hoon kalidas ne bhi Pagal tha ki use prapt hua karte jagah par vande parvati parmeshwar pati parmeshwar pati parmeshwar ambika bhawani shankar vande shraddha shraddha pati parmeshwar mata pita udaharanon me shakti ka naam liya jata hai isliye hum sitaram ji ki shakti hain sitaram hari om

हम सीताराम क्यों कहते हैं राम सीता क्यों नहीं बोलते हैं लेकिन अच्छी आपने लेकिन हम हमारे सन

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जवाब है अब सीताराम क्यों कहते हैं राम सीता क्यों नहीं कहते हैं राम सीता यूं ही कह देंगे सीता जो है आदि शक्ति का रूप है दुर्गा का रूप है और दुर्गा गए जो है सबको यहां पर जो है ज्यादा किया है जितने भी देवी देवता इंसान जितने भी जितने भी आत्माएं हैं जो जीवन भर के चक्कर में पूछ रही है जो घुस रही है वह सब आदि शक्ति दुर्गा नहीं पैदा करी है इसलिए सीताराम सीताराम और जो दुर्गा आदि शक्ति है इसी में पूरी दुनिया में जहां पर जो कार्यकाल के जाल में फंसे हैं जो यहां पर जो आए हुए हैं यह पृथ्वी लोक में जितने भी दुर्गा से ही राम को बाद में लिया जाता है कि जब तक

jawab hai ab sitaram kyon kehte hain ram sita kyon nahi kehte hain ram sita yun hi keh denge sita jo hai aadi shakti ka roop hai durga ka roop hai aur durga gaye jo hai sabko yahan par jo hai zyada kiya hai jitne bhi devi devta insaan jitne bhi jitne bhi aatmaen hain jo jeevan bhar ke chakkar me puch rahi hai jo ghus rahi hai vaah sab aadi shakti durga nahi paida kari hai isliye sitaram sitaram aur jo durga aadi shakti hai isi me puri duniya me jaha par jo karyakal ke jaal me fanse hain jo yahan par jo aaye hue hain yah prithvi lok me jitne bhi durga se hi ram ko baad me liya jata hai ki jab tak

जवाब है अब सीताराम क्यों कहते हैं राम सीता क्यों नहीं कहते हैं राम सीता यूं ही कह देंगे सी

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जय किशन मौर्य

टेलर मास्टर

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