गांधीवादी चरण कब हुआ?...


play
user

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

25 दिसंबर 19 दिसंबर

25 december 19 december

25 दिसंबर 19 दिसंबर

Romanized Version
Likes  3  Dislikes    views  97
WhatsApp_icon
2 जवाब
qIcon
ask
ऐसे और सवाल
Loading...
Loading...
user
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ऐसे अगर सीधे शब्दों में गांधीवादी चरण की बात कर ले तो गांधीवादी चरण 1919 से लेकर कुछ पुस्तकों में 1942 तक भारत छोड़ो आंदोलन तक के काल को भी गांधीवादी काल कहा है गांधीवादी चरण कहां है और कुछ में 1947 तक ज्यादातर पुस्तके 1947 की पुष्टि करती तो क्या हम लोग बात करें तुम देखेंगे कि 18 से 50 ईसवी में कांग्रेस की स्थापना हुई थी कांग्रेस की स्थापना हुई थी वह एक ब्रिटिश अधिकारी थे वही ओम जी के सहायता से कांग्रेस की स्थापना होगी हुई थी कांग्रेस की स्थापना के अट्ठारह सौ पचासी से लेकर आजादी मिलने तक 1947 तक कांग्रेस के कार्यकाल को तीन चरणों में विभक्त किया जाता है पहला अट्ठारह सौ पचासी से लेकर 1905 स्वीट दूसरा 1925 से लेकर 1919 ईस्वी तक और तीसरा 1919 से लेकर 1947 तक कि हमने आपको पहले ही बता दिया था कि कुछ पुस्तक में 1942 की भी चर्चा की जाती है 1942 तक लेकिन अधिकांश 1947 की बातें की जाती है 18 से लेकर 19 तक का जो काल था इस समय को उदारवादी चरण कहा जाता है उदारवाद के जो नेता थे वह हिंसा में विश्वास नहीं करते थे वह आग्रह करते थे याचना करते थे पत्र लिखकर गवर्नर से विनती करते थे कि हमें यह दे वह अपनी मांगों को पत्र के माध्यम से रखते थे जे अग्रवादी यों का काल कहा जाता है या बर्बादी का चरण कहा जाता है लाला लाजपत राय बाल गंगाधर तिलक बिपिन चंद्र पाल नेता थे जो कि हिंसा में विश्वास करते थे उन्हें लगता था कि जो इस तरह हम प्रार्थना करके याचिका देकर ऐसे करने से हमें हमारी मांगे पूरी नहीं हो पाएगी हमें नहीं मिलेगी जो हम मांग रहे हैं तो यह लग हिंसा में विश्वास करने लगे इसके लिए इस काल को उग्रवादी का काल कहा गया और उसके बाद 1919 से लेकर 1947 तक का जो कलश को गांधीवादी चरानिया गांधी युग के नाम से जाना जाता आपको थोड़ी सी नहीं बता देता हूं कि जैसे कि आप जानते हैं गांधीजी 1915 ईस्वी में दक्षिण अफ्रीका से लौटे थे और वहां पर वह सत्याग्रह का पहला प्रयोग वहीं उन्होंने किया था और वहीं पर फेमस हो गए थे और इंडिया में यह उस समय तक फेमस हो चुके थे 1915 ईस्वी में हर कोई जानने लगा था कि एक भारतीय है जो दक्षिण अफ्रीका में इस तरह से मुकदमा लड़ा और दिल आया उसके बाद यह 1915 के बाद 1987 में जैसे कि जानते हैं कि चंपारण सत्याग्रह में भी भाग लिया और वहां उसके बाद तो यह काफी प्रसिद्ध हो गए और फिर धीरे-धीरे इसी तरह प्रतीत हो गए और उन्होंने जिस से जानते हैं कि वगैरह भी आता है उसके बाद गांधी जी का अच्छा खासा बरकत हो जाता है राजनीति में इसीलिए उन्होंने इसके बाद के काल को ही गांधीवादी चरण कहा जाता मुझे लगता है कि आप लोगों को समझ आ गई होगी अगर नहीं आ रही होगी तो प्लीज कमेंट करें और मैं अपनी गलती को सुधारने का कोशिश करूंगा हां एक बात और कि मैं इलेक्शन को थोड़ा सा बड़ा करके रखता मत थोड़ा ज्यादा मिनट का लेक्चर डालता हूं मैं चाहता हूं सूजन क्लियर हो क्योंकि एक बार लेने से तो उससे तो अच्छा ही है कि थोड़ा सा ज्यादा लेक्चर 5 मिनट ज्यादा तो नहीं लोगे तो क्या होगा इसलिए देखिए अगर अच्छा लगे तो लाइक कर दीजिए ताकि हम को पता चले कि आप लोग संतोष चोर हैं मेरे जवाब दें फिर मैं दूंगा इसी टाइप का जवाब थैंक यू

aise agar sidhe shabdon me gandhiwaadi charan ki baat kar le toh gandhiwaadi charan 1919 se lekar kuch pustakon me 1942 tak bharat chodo andolan tak ke kaal ko bhi gandhiwaadi kaal kaha hai gandhiwaadi charan kaha hai aur kuch me 1947 tak jyadatar pustake 1947 ki pushti karti toh kya hum log baat kare tum dekhenge ki 18 se 50 isvi me congress ki sthapna hui thi congress ki sthapna hui thi vaah ek british adhikari the wahi om ji ke sahayta se congress ki sthapna hogi hui thi congress ki sthapna ke attharah sau pachasi se lekar azadi milne tak 1947 tak congress ke karyakal ko teen charno me vibhakt kiya jata hai pehla attharah sau pachasi se lekar 1905 sweet doosra 1925 se lekar 1919 isvi tak aur teesra 1919 se lekar 1947 tak ki humne aapko pehle hi bata diya tha ki kuch pustak me 1942 ki bhi charcha ki jaati hai 1942 tak lekin adhikaansh 1947 ki batein ki jaati hai 18 se lekar 19 tak ka jo kaal tha is samay ko udarvaadi charan kaha jata hai udarvad ke jo neta the vaah hinsa me vishwas nahi karte the vaah agrah karte the yachana karte the patra likhkar governor se vinati karte the ki hamein yah de vaah apni maangon ko patra ke madhyam se rakhte the je agravadi yo ka kaal kaha jata hai ya barbadi ka charan kaha jata hai lala lajpat rai baal gangadhar tilak bipin chandra pal neta the jo ki hinsa me vishwas karte the unhe lagta tha ki jo is tarah hum prarthna karke yachika dekar aise karne se hamein hamari mange puri nahi ho payegi hamein nahi milegi jo hum maang rahe hain toh yah lag hinsa me vishwas karne lage iske liye is kaal ko ugravadi ka kaal kaha gaya aur uske baad 1919 se lekar 1947 tak ka jo kalash ko gandhiwaadi charaniya gandhi yug ke naam se jana jata aapko thodi si nahi bata deta hoon ki jaise ki aap jante hain gandhiji 1915 isvi me dakshin africa se laute the aur wahan par vaah satyagrah ka pehla prayog wahi unhone kiya tha aur wahi par famous ho gaye the aur india me yah us samay tak famous ho chuke the 1915 isvi me har koi jaanne laga tha ki ek bharatiya hai jo dakshin africa me is tarah se mukadma lada aur dil aaya uske baad yah 1915 ke baad 1987 me jaise ki jante hain ki champaran satyagrah me bhi bhag liya aur wahan uske baad toh yah kaafi prasiddh ho gaye aur phir dhire dhire isi tarah pratit ho gaye aur unhone jis se jante hain ki vagera bhi aata hai uske baad gandhi ji ka accha khasa barkat ho jata hai raajneeti me isliye unhone iske baad ke kaal ko hi gandhiwaadi charan kaha jata mujhe lagta hai ki aap logo ko samajh aa gayi hogi agar nahi aa rahi hogi toh please comment kare aur main apni galti ko sudhaarne ka koshish karunga haan ek baat aur ki main election ko thoda sa bada karke rakhta mat thoda zyada minute ka lecture dalta hoon main chahta hoon sujan clear ho kyonki ek baar lene se toh usse toh accha hi hai ki thoda sa zyada lecture 5 minute zyada toh nahi loge toh kya hoga isliye dekhiye agar accha lage toh like kar dijiye taki hum ko pata chale ki aap log santosh chor hain mere jawab de phir main dunga isi type ka jawab thank you

ऐसे अगर सीधे शब्दों में गांधीवादी चरण की बात कर ले तो गांधीवादी चरण 1919 से लेकर कुछ पुस्त

Romanized Version
Likes  3  Dislikes    views  114
WhatsApp_icon
qIcon
ask
QuestionsProfiles

Vokal App bridges the knowledge gap in India in Indian languages by getting the best minds to answer questions of the common man. The Vokal App is available in 11 Indian languages. Users ask questions on 100s of topics related to love, life, career, politics, religion, sports, personal care etc. We have 1000s of experts from different walks of life answering questions on the Vokal App. People can also ask questions directly to experts apart from posting a question to the entire answering community. If you are an expert or are great at something, we invite you to join this knowledge sharing revolution and help India grow. Download the Vokal App!