पढ़ाई के साथ और पढ़ाई के बाद बच्चों पर ज़्यादा सरकारी नौकरी के लिए दबाव देना क्या यह सही हैं?...


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Sushil Kumar

Accountant

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देखिए आप का सवाल है पढ़ाई पढ़ाई के साथ और भाई के बाद बच्चों पर नौकरी का दवा देना सही है या गलत दबाव सही भी है और गलत ही दवाओं का प्रकार आप अलग रखेंगे तो अच्छा रहेगा दबाव का प्रकार मतलब आप उसे गार्डन से हैं उसे उसके बताएं उसके बारे में उसका भविष्य बताएं उसके मन में उसके प्रति लगन पैदा करें दबाव मत दे जवाब क्या होता है दबाव कुछ समझता नहीं है दबाव देकर आप उसी को उस काम के लिए आगे भेज सकती हैं लेकिन जब तक उसके मन में अपने उस चीज के प्रति भाव पैदा नहीं होगा तब तक वह उस कार्य को फूल नहीं कर सकता या कर भी लेगा तो सही ज्ञान नहीं लगता तो सरकारी नौकरी रही बात तो सरकारी नौकरी का कंपटीशन लेवल तक है लेकिन उसके लिए आपको अपने बच्चे पर कड़ी निगरानी और सही दिशा देना जरूरी है उसे नकार दिया है कि बच्चों को कोच्चि भेजना नहीं बच्चों को पहले उस चीज के बारे में उस रास्ते पर जाने के लिए किन किन समस्याओं किन किन रास्तों से गुजरना पड़ेगा वह सब पहले उनको पता होना चाहिए तभी तो जांच करेंगे कि बच्चा सही रास्ते पर है कि गलत रास्ते पर है समाज तो एक भीड़ का हिस्सा है और भीड़ में तो सब खो जाते हैं आगे डूब जाते हैं यादें तैयार जाते हैं तो जवाब देना कोई वह नहीं है उचित नहीं है हां सलाह देना उचित है आप चला दीजिए उसे रोज रोज प्रेरित कीजिए यासबेक वैसा हो रहा है अलअसंदे लेकिन गलत कार्य क्लिप क्लिप प्रेरित या मारना पीटना या उसको जबरदस्ती नहीं है क्यों नहीं करेगा बस आपको एक काम करना है उसके मन में लगन पैदा करनी है समाज की तुलनात्मक दृष्टि के सामने रखनी है कि आप ऐसा करोगे तो ऐसे बनोगे ऐसा करोगे तो ऐसे बनोगे आगे उसकी मर्जी है उसे आप सोचने का मौका दीजिए

dekhiye aap ka sawaal hai padhai padhai ke saath aur bhai ke baad baccho par naukri ka dawa dena sahi hai ya galat dabaav sahi bhi hai aur galat hi dawaon ka prakar aap alag rakhenge toh accha rahega dabaav ka prakar matlab aap use garden se hain use uske bataye uske bare me uska bhavishya bataye uske man me uske prati lagan paida kare dabaav mat de jawab kya hota hai dabaav kuch samajhata nahi hai dabaav dekar aap usi ko us kaam ke liye aage bhej sakti hain lekin jab tak uske man me apne us cheez ke prati bhav paida nahi hoga tab tak vaah us karya ko fool nahi kar sakta ya kar bhi lega toh sahi gyaan nahi lagta toh sarkari naukri rahi baat toh sarkari naukri ka competition level tak hai lekin uske liye aapko apne bacche par kadi nigrani aur sahi disha dena zaroori hai use nakar diya hai ki baccho ko Kochi bhejna nahi baccho ko pehle us cheez ke bare me us raste par jaane ke liye kin kin samasyaon kin kin raston se gujarana padega vaah sab pehle unko pata hona chahiye tabhi toh jaanch karenge ki baccha sahi raste par hai ki galat raste par hai samaj toh ek bheed ka hissa hai aur bheed me toh sab kho jaate hain aage doob jaate hain yaadain taiyar jaate hain toh jawab dena koi vaah nahi hai uchit nahi hai haan salah dena uchit hai aap chala dijiye use roj roj prerit kijiye yasbek waisa ho raha hai alasande lekin galat karya clip clip prerit ya marna pitana ya usko jabardasti nahi hai kyon nahi karega bus aapko ek kaam karna hai uske man me lagan paida karni hai samaj ki tulnaatmak drishti ke saamne rakhni hai ki aap aisa karoge toh aise banogey aisa karoge toh aise banogey aage uski marji hai use aap sochne ka mauka dijiye

देखिए आप का सवाल है पढ़ाई पढ़ाई के साथ और भाई के बाद बच्चों पर नौकरी का दवा देना सही है या

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Prem Koranga

Social Worker

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Krishna Kumar Gupta

Astrologer And Tantrokt Vastu Consultant

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Laljee Gupta

Career Counsellor

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जी आपका बहुत अच्छा प्रश्न है कि जो स्टडी टाइम है उसके बाद बच्चों का ज्यादा सरकारी नौकरियों की तरफ से दबाव बना रहता है और उसके साथ-साथ उसके परिवार में भी लोग और सामाजिक प्रतिष्ठा के लिए भी आजकल लोग सामाजिक सुरक्षा के लिए भी और असामाजिक इंश्योरेंस के लिए भी पारिवारिक सुरक्षा के लिए भी लोग सरकारी नौकरियों की तरफ भाग रहे हैं अब दवा देना कहां तक सही है कहां तक नहीं सही है देखिए इसमें जो प्रतिभाएं हैं बहुत अच्छे टैलेंट्स है जिनको नौकरियों की कमी नहीं है और सरकार इसके बजाय प्राइवेट क्षेत्रों में उनसे ज्यादा लोगों को सुविधाएं और सैलरी मिल रही है तो मेरा यह कहना है किसी भी टैलेंट पर किसी भी विद्यार्थी या किसी भी छात्र पर पढ़ाई के दौरान या पढ़ाई के साथ या पढ़ाई के बाद किसी भी तरह का दबाव नहीं डालना चाहिए उनको अपने प्रतिभा को विकसित करने देना चाहिए उनकी प्रतिमाएं जितनी ही ज्यादा से ज्यादा विकसित होंगी उनको नौकरियों की कोई कमी होगी पढ़ाई के साथ-साथ सरकारी नौकरी का दवा क्या यह सही है यह बिल्कुल सही नहीं है यह बिल्कुल भी सही नहीं है बाबू की प्रतिभाएं विकसित हो न जाने को सरकारी नौकरी किया जाए बहुत अच्छी नौकरी उससे भी ज्यादा अच्छी उसको मिले पर दबाव महसूस नहीं करना चाहिए चलते चलते चलते चलते रास्ते में कुछ मिल जाए तो उसे छोड़ना भी नहीं चाहिए ऐसा मेरा विचार है

ji aapka bahut accha prashna hai ki jo study time hai uske baad baccho ka zyada sarkari naukriyon ki taraf se dabaav bana rehta hai aur uske saath saath uske parivar me bhi log aur samajik prathishtha ke liye bhi aajkal log samajik suraksha ke liye bhi aur asamajik insurance ke liye bhi parivarik suraksha ke liye bhi log sarkari naukriyon ki taraf bhag rahe hain ab dawa dena kaha tak sahi hai kaha tak nahi sahi hai dekhiye isme jo pratibhayen hain bahut acche talents hai jinako naukriyon ki kami nahi hai aur sarkar iske bajay private kshetro me unse zyada logo ko suvidhaen aur salary mil rahi hai toh mera yah kehna hai kisi bhi talent par kisi bhi vidyarthi ya kisi bhi chatra par padhai ke dauran ya padhai ke saath ya padhai ke baad kisi bhi tarah ka dabaav nahi dalna chahiye unko apne pratibha ko viksit karne dena chahiye unki pratimaen jitni hi zyada se zyada viksit hongi unko naukriyon ki koi kami hogi padhai ke saath saath sarkari naukri ka dawa kya yah sahi hai yah bilkul sahi nahi hai yah bilkul bhi sahi nahi hai babu ki pratibhayen viksit ho na jaane ko sarkari naukri kiya jaaye bahut achi naukri usse bhi zyada achi usko mile par dabaav mehsus nahi karna chahiye chalte chalte chalte chalte raste me kuch mil jaaye toh use chhodna bhi nahi chahiye aisa mera vichar hai

जी आपका बहुत अच्छा प्रश्न है कि जो स्टडी टाइम है उसके बाद बच्चों का ज्यादा सरकारी नौकरियों

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

शिक्षा उद्यमिता रोजगार की तीनों बातें परस्पर आपस में जुड़ी हुई आज के परिपेक्ष में शिक्षा पूरी होने के बाद रोजगार प्राप्त करना एक अत्यंत पीड़ा लाई विषय बन चुका है राजनीतिक दृष्टि से सामाजिक दृष्टि से व्यक्ति का आर्थिक रूप से सुयोग्य होना आवश्यक माना जाता है इसलिए उद्यमिता और रोजगार के क्षेत्र में किसी एक विकल्प को चुनना ही इस समस्या का समाधान है और व्यक्ति इस निर्णय को जितनी परिपक्वता से जितनी शीघ्रता से ग्रहण कर ले यह उतना ही उत्तम है इसके लिए सुझाव परामर्श पर शिक्षण की विधियां हैं अपने बड़ों से सुझाव लेना तो योग्य संस्थानों में सुलभ प्रशिक्षण केंद्रों में जाकर अध्ययन करना इसका समाधान है धन्यवाद

shiksha udhmita rojgar ki tatvo batein paraspar aapas me judi hui aaj ke paripeksh me shiksha puri hone ke baad rojgar prapt karna ek atyant peeda lai vishay ban chuka hai raajnitik drishti se samajik drishti se vyakti ka aarthik roop se suyogya hona aavashyak mana jata hai isliye udhmita aur rojgar ke kshetra me kisi ek vikalp ko chunana hi is samasya ka samadhan hai aur vyakti is nirnay ko jitni paripakvata se jitni shighrata se grahan kar le yah utana hi uttam hai iske liye sujhaav paramarsh par shikshan ki vidhiyan hain apne badon se sujhaav lena toh yogya sansthano me sulabh prashikshan kendron me jaakar adhyayan karna iska samadhan hai dhanyavad

शिक्षा उद्यमिता रोजगार की तीनों बातें परस्पर आपस में जुड़ी हुई आज के परिपेक्ष में शिक्षा प

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MRI

Retired Executive (PSU), Electrical Engineer, AUTHOR, हिंदी भषा में चार पुस्तकें प्रकाशित. जल्द ही तीन और प्रकाशित होने वाली हैं ।

1:48
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका सवाल है पढ़ाई के साथ और पढ़ाई के बाद बच्चों पर ज्यादा सरकारी नौकरी के लिए दबाव देना क्या सही है सवाल यह नहीं है कि पढ़ाई के साथ क्या पढ़ाई के बाद पटना सरकारी नौकरी के लिए लोग बहुत कोशिश करते हैं दबाव बहुत देते हैं घरवाले चकांड यही है कि सरकारी नौकरियां जब आई शुरू हुई हैं तबीयत बेरोजगारी को कम करने के लिए आई थी बहुत से सरकारी कंपनियां ऐसी हैं जहां पर लोगों को मिली है केवल बेरोजगारी कम करने के लिए इसलिए जहां पर चार आदमी चाहिए वहां पहुंचे ताकि 2 साल में होंगे और सरकारी नौकरी में काम कम रहता है क्या करना है अब इसी बात की है कि सरकारी नौकरी के लिए मुश्किल है जानी दुश्मन एक बार नौकरी मिल गई लेकिन प्राइवेट में ऐसा नहीं है कि मालिक की मर्जी है कबाब रखे आपको आपको निकाल दे यार जिंदगी भर तक रहेगी जब तक खुद कोई कमेंट ना करें इतने लोग सरकारी नौकरी चाहते हैं और अपनों पर दवा डालते ही सरकारी नौकरी कोशिश करो समाज में लड़कियों की तरफ से शादी के ऑफर भी ज्यादा आते हैं

aapka sawaal hai padhai ke saath aur padhai ke baad baccho par zyada sarkari naukri ke liye dabaav dena kya sahi hai sawaal yah nahi hai ki padhai ke saath kya padhai ke baad patna sarkari naukri ke liye log bahut koshish karte hain dabaav bahut dete hain gharwale chakand yahi hai ki sarkari naukriyan jab I shuru hui hain tabiyat berojgari ko kam karne ke liye I thi bahut se sarkari companiya aisi hain jaha par logo ko mili hai keval berojgari kam karne ke liye isliye jaha par char aadmi chahiye wahan pahuche taki 2 saal me honge aur sarkari naukri me kaam kam rehta hai kya karna hai ab isi baat ki hai ki sarkari naukri ke liye mushkil hai jani dushman ek baar naukri mil gayi lekin private me aisa nahi hai ki malik ki marji hai kabab rakhe aapko aapko nikaal de yaar zindagi bhar tak rahegi jab tak khud koi comment na kare itne log sarkari naukri chahte hain aur apnon par dawa daalte hi sarkari naukri koshish karo samaj me ladkiyon ki taraf se shaadi ke offer bhi zyada aate hain

आपका सवाल है पढ़ाई के साथ और पढ़ाई के बाद बच्चों पर ज्यादा सरकारी नौकरी के लिए दबाव देना

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Dr.Paramjit Singh

Health and Fitness Expert/ Lecturer In Physical Education/

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Raju Ram

Career Counsellor And Motivater

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आपका सवाल है पढ़ाई के साथ और पढ़ाई के बाद बच्चों को ज्यादा सरकारी नौकरी के लिए दबाव देना क्या सही है नहीं इसको सही नहीं कह सकता बिल्कुल ही सही नहीं कहा जा सकता है देखिए सरकारी नौकरी एक के आजीविका चलाने का जरिया है सरकारी नौकरी बहुत बढ़िया है अगर करना चाहिए कि यदि किसी कैंडिडेट का मन सरकारी नौकरी में नहीं है नॉट आउट उसके ऊपर दबाव बनाना मित्रता में गिरा सरकारी नौकरी में कोई भी काम करने के लिए किसी के ऊपर दबाव बना बनाना गलत है आप जिस फिल्म में जाना चाहते हो उस फिल्म में जो समझ गए इसके साथ मगर वालों से सलाह कीजिएगा यदि घरवाले आपके ऊपर ज्यादा दबाव बना रहे हैं कि सरकारी नौकरी सरकारी नौकरी लेकिन आप किस में जाना चाहते हैं अब किसी कंपनी में काम करना चाहते हैं आप ना शाम का जो है कोई बिजनेस खोलना चाहते हैं या स्कूल या कॉलेज या कोई और दूसरा जो भी मन में हो आप अपने घर वालों के साथ बैठकर चर्चा करें तो या आपका कोई भाई छोटा भाई है या कोई स्टूडेंट है उसके ऊपर कभी भी आप जो पढ़ाई के साथ ना ही पढ़ाई के बाद सरकारी नौकरी का दबाव बनाना सिखाइए जो तेरे को अच्छा लगता है उसको बेहतर तरीके से कीजिए

aapka sawaal hai padhai ke saath aur padhai ke baad baccho ko zyada sarkari naukri ke liye dabaav dena kya sahi hai nahi isko sahi nahi keh sakta bilkul hi sahi nahi kaha ja sakta hai dekhiye sarkari naukri ek ke aajiwika chalane ka zariya hai sarkari naukri bahut badhiya hai agar karna chahiye ki yadi kisi candidate ka man sarkari naukri me nahi hai not out uske upar dabaav banana mitrata me gira sarkari naukri me koi bhi kaam karne ke liye kisi ke upar dabaav bana banana galat hai aap jis film me jana chahte ho us film me jo samajh gaye iske saath magar walon se salah kijiega yadi gharwale aapke upar zyada dabaav bana rahe hain ki sarkari naukri sarkari naukri lekin aap kis me jana chahte hain ab kisi company me kaam karna chahte hain aap na shaam ka jo hai koi business kholna chahte hain ya school ya college ya koi aur doosra jo bhi man me ho aap apne ghar walon ke saath baithkar charcha kare toh ya aapka koi bhai chota bhai hai ya koi student hai uske upar kabhi bhi aap jo padhai ke saath na hi padhai ke baad sarkari naukri ka dabaav banana sikhaiye jo tere ko accha lagta hai usko behtar tarike se kijiye

आपका सवाल है पढ़ाई के साथ और पढ़ाई के बाद बच्चों को ज्यादा सरकारी नौकरी के लिए दबाव देना क

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Pushpendra Rajput

Soft Skill Trainer

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नहीं यह तो देखिए पूरी तरीके से गलत है कि आप ही सोचिए कि कोई इसलिए इतना अधिक कंपटीशन है और उसमें अब 200 300 के ऊपर अगर 1000000 बंदी फाइट कर रहे हैं तो जरूरी नहीं होता है कि कई बार होता है कि अब उसमें से 1000000 में से कंप्लीट नहीं कर पाते इसके लिए फोर्स करने की जरूरत नहीं है और कोशिश करिए कि प्रयास करने के लिए आप उन्हें उत्साहित करिए ना कि उनको मजबूर करिए ना कि उनके ऊपर दवा बनाई है तो उससे क्या होता है कि सामने वाला बंदा भी डिप्रेशन में चला जाता है और वह जो अच्छे थोड़ा बहुत प्रयास भी करना चाहता हूं और नहीं करता है

nahi yah toh dekhiye puri tarike se galat hai ki aap hi sochiye ki koi isliye itna adhik competition hai aur usme ab 200 300 ke upar agar 1000000 bandi fight kar rahe hain toh zaroori nahi hota hai ki kai baar hota hai ki ab usme se 1000000 me se complete nahi kar paate iske liye force karne ki zarurat nahi hai aur koshish kariye ki prayas karne ke liye aap unhe utsaahit kariye na ki unko majboor kariye na ki unke upar dawa banai hai toh usse kya hota hai ki saamne vala banda bhi depression me chala jata hai aur vaah jo acche thoda bahut prayas bhi karna chahta hoon aur nahi karta hai

नहीं यह तो देखिए पूरी तरीके से गलत है कि आप ही सोचिए कि कोई इसलिए इतना अधिक कंपटीशन है और

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Sandip Sinha

Engineer,Banker,Ex-serviceman

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नहीं पढ़ाई के दौरान और पढ़ाई के बाद बच्चों को सरकारी नौकरी पर जोड़ देना नहीं चाहिए उन्हें अपनी इच्छा अनुसार उनके समर्थकों सार उनके विवेक अनुसार अपना विकास का स्तर चुनना चाहिए अगर वह सरकारी नौकरी के लिए लाए थे तो उनके लिए बेहतर तैयारी करना होगा अगर उनका दिमाग बुद्धिमानी बिजनेस में है तो उन्हें व्यापार व्यवस्था की और अगर वह अपने आपको इससे लाइक मानते हैं कि देश सेवा की हो तो सैनिक के रूप में या इंजीनियरिंग क्षेत्र में मेडिकल क्षेत्र में परमाणु क्षेत्र में खासतौर पर वर्तमान समय में भारत वर्ष में खेल में भी काफी रुचि और संभावनाएं देखी गई है तो पढ़ाई के दौरान आप लड़ाई के बाद इन सभी फील्ड में अभिभावकों के द्वारा और शाहिद करना चाहिए

nahi padhai ke dauran aur padhai ke baad baccho ko sarkari naukri par jod dena nahi chahiye unhe apni iccha anusaar unke samarthakon saar unke vivek anusaar apna vikas ka sthar chunana chahiye agar vaah sarkari naukri ke liye laye the toh unke liye behtar taiyari karna hoga agar unka dimag budhhimani business me hai toh unhe vyapar vyavastha ki aur agar vaah apne aapko isse like maante hain ki desh seva ki ho toh sainik ke roop me ya Engineering kshetra me medical kshetra me parmanu kshetra me khaasataur par vartaman samay me bharat varsh me khel me bhi kaafi ruchi aur sambhavnayen dekhi gayi hai toh padhai ke dauran aap ladai ke baad in sabhi field me abhibhavakon ke dwara aur shahid karna chahiye

नहीं पढ़ाई के दौरान और पढ़ाई के बाद बच्चों को सरकारी नौकरी पर जोड़ देना नहीं चाहिए उन्हें

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Bk Arun Kaushik

Youth Counselor Motivational Speaker

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bhaand's Theatre and Acting Classes

Acting And drama Coach Casting director Drama Director

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जहां तक मेरा मानना है कि कुछ मायने में सही भी है कुछ मायने में सही नहीं भी है गवर्नमेंट जॉब में जैसा इंडियन साइकोलॉजी है कि गवर्नमेंट जॉब में पैसा है इज्जत है और मेन सिंह की जॉब सिक्योरिटी है वह सब प्राइवेट जॉब में भी होने के साथ-साथ उस प्रॉब्लम यहां पर आती है कि वहां पर जॉब सिक्योरिटी नहीं है इसलिए लोग बच्चों के ऊपर ही इस बात का प्रेशर रखते हैं गवर्नमेंट जॉब करिए आप तो हमको यह समझने की जरूरत है बहुत सारी हाईली पैड प्राइवेट जॉब से भी हैं जो गवर्नमेंट जॉब से कहीं बेहतर सिक्योरिटी फैसिलिटी सैलरी देती हैं तो हमें यह नहीं सोचना है कि हमारा बच्चा गवर्नमेंट में जाएगा या प्राइवेट में जाएगा इस चीज पर फोकस ना देते हुए उसकी पढ़ाई का अच्छा आपको इंतजाम करना है जिससे उसको जो को समझने का मौका मिले जिस स्टैंडर्ड में है जहां पर भी है वह उस चीज को कुछ समझता हूं समझते हुए क्लियर करें ना कि उनको हटाकर अब आगे भेज देंगे कल को ना तो वह गवर्नमेंट के लिए तैयार हो पाएगा ना प्राइवेट के लिए तैयार हो पाएगा आप कोशिश करिए कि उनको जितनी अच्छी एजुकेशन सकते हैं वह दीजिए प्रेशर अभी देने का समय नहीं है आज वह ग्रेजुएशन लेवल में पहुंच जाए तो उसके बाद आप उसमें प्रेशर डाल सकते हैं लेकिन अभी तुरंत में अगर बच्चा है मेटल कितने सेकंड ईयर से नीचे हैं तो वहां तक आपको कोई प्रेशर देने की जरूरत नहीं है हां यह है कि आप जॉब के बारे में उनको बता सकते हैं समझा सकते हैं अपनी तरफ से यह चीजें आप जो कर सकते हैं वह करिए बाकी उसको डिसाइड डिसाइड करने दीजिएगा गवर्नमेंट करना चाहता है या प्राइवेट लेकिन लेकिन उसके लिए आपको प्राइवेट गवर्नमेंट क्या जॉब से कैसे मिलती हैं क्या चल रही होगी क्या लाइफ हो गई थोड़ा सा उसको डायरेक्शन देंगे तो पूरी से आसानी होगी उसको डिसाइड करने के लिए गवर्नमेंट जॉब बेटर है या प्राइवेट जॉब बेटर या कौन सी जॉब मुझे करनी है थैंक यू

jaha tak mera manana hai ki kuch maayne me sahi bhi hai kuch maayne me sahi nahi bhi hai government job me jaisa indian psychology hai ki government job me paisa hai izzat hai aur main Singh ki job Security hai vaah sab private job me bhi hone ke saath saath us problem yahan par aati hai ki wahan par job Security nahi hai isliye log baccho ke upar hi is baat ka pressure rakhte hain government job kariye aap toh hamko yah samjhne ki zarurat hai bahut saari highly pad private job se bhi hain jo government job se kahin behtar Security facility salary deti hain toh hamein yah nahi sochna hai ki hamara baccha government me jaega ya private me jaega is cheez par focus na dete hue uski padhai ka accha aapko intajam karna hai jisse usko jo ko samjhne ka mauka mile jis standard me hai jaha par bhi hai vaah us cheez ko kuch samajhata hoon samajhte hue clear kare na ki unko hatakar ab aage bhej denge kal ko na toh vaah government ke liye taiyar ho payega na private ke liye taiyar ho payega aap koshish kariye ki unko jitni achi education sakte hain vaah dijiye pressure abhi dene ka samay nahi hai aaj vaah graduation level me pohch jaaye toh uske baad aap usme pressure daal sakte hain lekin abhi turant me agar baccha hai metal kitne second year se niche hain toh wahan tak aapko koi pressure dene ki zarurat nahi hai haan yah hai ki aap job ke bare me unko bata sakte hain samjha sakte hain apni taraf se yah cheezen aap jo kar sakte hain vaah kariye baki usko decide decide karne dijiyega government karna chahta hai ya private lekin lekin uske liye aapko private government kya job se kaise milti hain kya chal rahi hogi kya life ho gayi thoda sa usko direction denge toh puri se aasani hogi usko decide karne ke liye government job better hai ya private job better ya kaun si job mujhe karni hai thank you

जहां तक मेरा मानना है कि कुछ मायने में सही भी है कुछ मायने में सही नहीं भी है गवर्नमेंट ज

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Dr J B Tiwari

Chairman and Managing Director

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका सवाल है भाई के साथ और पढ़ाई के बाद बच्चों पर ज्यादा सरकारी नौकरी के जवाब देना क्या सही है बिल्कुल सही नहीं है बच्चे को अपनाकर कुछ ना चाहिए आज से 25 साल पहले कैरियर के ऑप्शंस बहुत कम होते थे डॉक्टर इंजीनियर को बहुत अच्छा माना जाता था बाकी के जगह कितने परसेंटेज नहीं थी लेकिन आज बहुत सारी वचन की मिल रही है क्रिकेट है बैडमिंटन है प्राइवेट नौकरी बहुत है कला का क्षेत्र है संगीत का चित्र है 88 का क्षेत्र है एक्टिंग का क्षेत्र है बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ उस पर कोई दबाव नहीं डाली जो उसका इंटरेस्ट है वही करने दीजिए ऋषि कपूर ने एक इंटरव्यू में कहा था मैं वही करता हूं जो मुझे पसंद है जो उनको पसंद है वही बात करेंगे वह दिन को कह रहा तो हम रहेंगे तो बच्चों को जो पसंद है वही कृष्णा दीजिए

aapka sawaal hai bhai ke saath aur padhai ke baad baccho par zyada sarkari naukri ke jawab dena kya sahi hai bilkul sahi nahi hai bacche ko apnakar kuch na chahiye aaj se 25 saal pehle carrier ke options bahut kam hote the doctor engineer ko bahut accha mana jata tha baki ke jagah kitne percentage nahi thi lekin aaj bahut saari vachan ki mil rahi hai cricket hai Badminton hai private naukri bahut hai kala ka kshetra hai sangeet ka chitra hai 88 ka kshetra hai acting ka kshetra hai baccho ko padhane ke saath saath us par koi dabaav nahi dali jo uska interest hai wahi karne dijiye rishi kapur ne ek interview me kaha tha main wahi karta hoon jo mujhe pasand hai jo unko pasand hai wahi baat karenge vaah din ko keh raha toh hum rahenge toh baccho ko jo pasand hai wahi krishna dijiye

आपका सवाल है भाई के साथ और पढ़ाई के बाद बच्चों पर ज्यादा सरकारी नौकरी के जवाब देना क्या सह

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

2:01
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पढ़ाई के बाद पढ़ाई के साथ बच्चों पर सरकारी नौकरी के लिए ज्यादा जवाब देना क्या यह सही है मैं उचित नहीं मानता हूं जॉनी मानता हूं पढ़ाई केवल नौकरी के लिए नहीं किया कि पढ़ाई ज्ञान की लेकर आती है पढ़ाई से जीवन समर्पित जीवन चल सकता है जीवन में बहुत से बदलाव आते हैं एच ए नौकरी नई रोजगार भी संभव है और हम अपने ज्ञान में अनेकों को रोजगार दे सकते हैं ओके कहां लोगों को रोजगार देंगे तो नौकरी से बेहतर है जो रोजगार क्योंकि नौकरी को सरकारी नौकरी को आज लोगों ने जीवन की सफलता का रहस्य मान लिया और यह जीवन की बहुत बड़ी कमजोरी है बच्चों का जीवन नर्क बन जाता है अगर वह सरकारी नौकरी नहीं प्राप्त कर पाते तो माता-पिता की विरोधी हो जाती तो छोड़िए उनकी पढ़ाई पर लगाया पैसा मानो उन्होंने पाप कर दिया और बच्चों का दिन आराम करते थे कुल जनसंख्या के एक प्रसिद्ध सरकारी नौकरी है एक प्रश्न के लिए एक नौकरी से हजार लोग प्रतिजन जी होते हैं ऐसी स्थिति में सरकारी नौकरी पाना बहुत मुश्किल है और वह भी जब-जब भ्रष्टाचारी का बोलबाला हो लेकिन हां कुछ अच्छे लोग कुछ बुद्धिजीवी लोग संघर्ष करते हुए को प्राप्त करना बुरा नहीं है लेकिन मां-बाप का सरकारी नौकरी का डीए बच्चों के जवाब देना हमसे

padhai ke baad padhai ke saath baccho par sarkari naukri ke liye zyada jawab dena kya yah sahi hai main uchit nahi maanta hoon Jonny maanta hoon padhai keval naukri ke liye nahi kiya ki padhai gyaan ki lekar aati hai padhai se jeevan samarpit jeevan chal sakta hai jeevan me bahut se badlav aate hain h a naukri nayi rojgar bhi sambhav hai aur hum apne gyaan me anekon ko rojgar de sakte hain ok kaha logo ko rojgar denge toh naukri se behtar hai jo rojgar kyonki naukri ko sarkari naukri ko aaj logo ne jeevan ki safalta ka rahasya maan liya aur yah jeevan ki bahut badi kamzori hai baccho ka jeevan nark ban jata hai agar vaah sarkari naukri nahi prapt kar paate toh mata pita ki virodhi ho jaati toh chodiye unki padhai par lagaya paisa maano unhone paap kar diya aur baccho ka din aaram karte the kul jansankhya ke ek prasiddh sarkari naukri hai ek prashna ke liye ek naukri se hazaar log pratijan ji hote hain aisi sthiti me sarkari naukri paana bahut mushkil hai aur vaah bhi jab jab bhrashtachaari ka bolbala ho lekin haan kuch acche log kuch buddhijeevi log sangharsh karte hue ko prapt karna bura nahi hai lekin maa baap ka sarkari naukri ka da baccho ke jawab dena humse

पढ़ाई के बाद पढ़ाई के साथ बच्चों पर सरकारी नौकरी के लिए ज्यादा जवाब देना क्या यह सही है म

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Dr.Mohsin Naqvi

Doctor (Homeopath)

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बच्चों पर कभी भी दबाव नहीं बनाना चाहिए कि वह नौकरी करनी है उन्हें या उन्हें किसी तरह का काम करना है या उनको जबरदस्ती जो है एक ही चीज बार-बार दोहरा नहीं है ऐसा कभी भी ना करें बच्चे जिस तरीके से अपना पढ़ाई कर रहे हैं उनको पढ़ाई करते रहने दे हां बस उनको जो है समय-समय पर गाइडेंस मिलती रहनी चाहिए धन्यवाद

baccho par kabhi bhi dabaav nahi banana chahiye ki vaah naukri karni hai unhe ya unhe kisi tarah ka kaam karna hai ya unko jabardasti jo hai ek hi cheez baar baar dohra nahi hai aisa kabhi bhi na kare bacche jis tarike se apna padhai kar rahe hain unko padhai karte rehne de haan bus unko jo hai samay samay par guidance milti rehni chahiye dhanyavad

बच्चों पर कभी भी दबाव नहीं बनाना चाहिए कि वह नौकरी करनी है उन्हें या उन्हें किसी तरह का का

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Yogender Dhillon

Law Educator , Advocate,RTI Activist , Motivational Coach

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखो अपने बच्चों में सबसे ज्यादा यह प्रेस और आप यह पढ़ो आपको यह बनना है आपको वह करना है नहीं आप यह सब कभी मत करो बस हां इतना है कि बच्चों बच्चे पढ़ते रहे एवरेज पढ़ते रहे ऐसा नहीं हो कि बच्चों को पूछो ही नहीं आप क्या पढ़ते हो क्या नहीं पढ़ते हो दूसरी बात कैरियर की बात वह अपने आपको बताना स्टार्ट कर देंगे प्लस टू कि मुझे यह बनना है मेरा इंटरेस्ट इसमें है पढ़ाई लॉजिकल माइंड क्रिएट करने के लिए क्रिएटिविटी पैदा करने के लिए अपनी स्किन को पहचानने के लिए की जाती है तो हम यह कहे कि सरकारी नौकरी नहीं और पढ़ाई के बाद भी हम बच्चों पर यह कहे कि तुम सरकारी ही नौकरी करो कोई जरूरी नहीं है जी आजकल प्राइवेट इंस्टिट्यूट में जितनी भी प्राइवेट जगह पर बिजनेस में इतनी सारी जॉब है दूसरी बात जो यह ठीक नहीं है कि सरकारी नौकरी सरकारी नौकरी आदमी को बस यह हो जाता है कि सिक्योरिटी है वकील हार्दिक बनाता है और आप एक शिक्षक सैलरी में क्या करोगे काम को अपलोड करो और हजार लोगों को नौकरी दो इसलिए यह ना तो पढ़ाई के साथ ना पढ़ाई के बाद बच्चों पर सरकारी नौकरी के लिए जवाब देना ठीक नहीं है जी

dekho apne baccho me sabse zyada yah press aur aap yah padho aapko yah banna hai aapko vaah karna hai nahi aap yah sab kabhi mat karo bus haan itna hai ki baccho bacche padhte rahe average padhte rahe aisa nahi ho ki baccho ko pucho hi nahi aap kya padhte ho kya nahi padhte ho dusri baat carrier ki baat vaah apne aapko batana start kar denge plus to ki mujhe yah banna hai mera interest isme hai padhai logical mind create karne ke liye creativity paida karne ke liye apni skin ko pahachanne ke liye ki jaati hai toh hum yah kahe ki sarkari naukri nahi aur padhai ke baad bhi hum baccho par yah kahe ki tum sarkari hi naukri karo koi zaroori nahi hai ji aajkal private institute me jitni bhi private jagah par business me itni saari job hai dusri baat jo yah theek nahi hai ki sarkari naukri sarkari naukri aadmi ko bus yah ho jata hai ki Security hai vakil hardik banata hai aur aap ek shikshak salary me kya karoge kaam ko upload karo aur hazaar logo ko naukri do isliye yah na toh padhai ke saath na padhai ke baad baccho par sarkari naukri ke liye jawab dena theek nahi hai ji

देखो अपने बच्चों में सबसे ज्यादा यह प्रेस और आप यह पढ़ो आपको यह बनना है आपको वह करना है नह

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Gopal Srivastava

Acupressure Acupuncture Sujok Therapist

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Vikas Singh

Political Analyst

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए पढ़ाई के साथ और पढ़ाई के बाद कभी भी अपने बच्चों के ऊपर सरकारी नौकरी के लिए दबाव नहीं बनाना चाहिए अगर आपका बच्चा पढ़ाई कर रहा है उसका इंटरेस्ट अगर पॉलिटिक्स में है तो पॉलिटिक्स में जाएगा क्योंकि उसका दिल दिमाग मांग सब कुछ कहता है कि मैं इसी में कुछ बेहतर कर सकता हूं और मेरे अंदर क्वालिटी है समाज के लोग भी कहते हैं कि नहीं आपका बेटा बहुत अच्छा बोलता है और यह पक्का 1 दिन सांसद विधायक या कुछ बने बने गा तो उसे पॉलिटिक्स में जाने दीजिए छोड़ दीजिए उसके ऊपर अगर आपका बच्चा प्राइवेट जॉब में सफलता प्राप्त करना चाहता है तो उसे प्राइवेट जॉब में सफलता प्राप्त करने दीजिए अगर बच्चा चाहता है कि नहीं मैं गवर्नमेंट फील्ड में ही जाऊंगा उसी में नौकरी करूंगा तू उसी में नौकरी करेगा उसी में खुश रहेगा सुंदर पिचाई गूगल के सीईओ हैं और उनका तनख्वाह न जाने कितना होगा कई सौ करोड़ होगा तो क्या वह सरकारी नौकरी करते हैं प्राइवेट जॉब करते हैं सरकारी नौकरी में शुरू में तनख्वाह ज्यादा मिलता है लेकिन बहुत कम इन ट्रीटमेंट होता है बाद में और जीवन खत्म हो जाता है 1 लेवल तक लेकिन प्राइवेट नौकरी हो सकता है कि आज आप 10,000 से स्टार्ट कर रहे हो लेकिन तीन लाख चार लाख पर भी पहुंच जाते हैं लोग किसी के ऊपर दबाव नहीं बनाना चाहिए आपके बच्चे का जो मन करता है उसे करने दीजिए माता-पिता दबाव इसलिए बनाते हैं क्योंकि वह जो काम नहीं कर पाए वह अपने बच्चों से करवाना चाहते भैया ऐसा बिल्कुल मत सोचिए जो बच्चे होते हैं ना यह अपना टारगेट अपने तरीके से प्राप्त करने की कोशिश करते हैं कैरियर हर फील्ड में बनाया जा सकता है मैं आपको एक कहानी बताता हूं एक जूनियर एक बंदा था जिसने इंजीनियरिंग किया था उसका दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन हो गया एमबीए में जब एमबीए करने गया तो 1 साल के बाद ही उसका यही वाला आ गया गवर्नमेंट में और एमबीए छोड़कर वह जाई बन गया जी बनने के बाद 2 साल जॉब किया फिर वह बंदा अपने गांव जाता है राजस्थान का होता है वह बीकानेर साइड का वहां जाता है तो अपने पापा से कहता है पापा हम लोगों के घर 8:10 बजे खेत है मैं एलोवेरा की खेती करूंगा पापा कहते पागल हो गया है क्या गांव वाले आते हैं पड़ोसी और उसके पापा कहते हैं अरे यार समझाओ इस कोई देवी का नौकरी छोड़ रहा है तो गांव वाले कहते हैं अबे बेवकूफ हो गए हो तुम एलोवेरा की खेती करोगे एलोवेरा की खेती हम लोगों ने भी किया था कुछ नहीं होता है जीवन बर्बाद हो जाएगा बच्चा जिंदगी जब एक बार बर्बाद होती है ना तो फिर सही नहीं हो पाती है चुपचाप जी बने हो नौकरी करो रिस्पेक्टेड जॉब है तो बंदा कहता है कि नहीं मैं मैं एलोवेरा की खेती करूंगा मैं नौकरी छोड़ रहा हूं सच में नौकरी छोड़ देता है आज तो असली गेम एलोवेरा की खेती करवाता है करवाया था आज की डेट में हो कई हजार भी गए दूसरी का खेत लेकर एलोवेरा की खेती करवाता है और मैं आपको बता देना चाहता हूं वह व्यक्ति पतंजलि को सबसे अधिक एलोवेरा बेचने वाला व्यक्ति है आज की डेट में बहुत बड़ा बिजनेस ऐसा होना चाहिए एक बंदा था जो पीसीएस क्वालीफाई कर लेता है अब उसकी शादी भी 30 रन की लड़की से प्रेम हो जाती है अब वह अपने घर जाता है तो कहता है कि पापा में पीसीएस नहीं बनूंगा मैं छोड़ रहा हूं इसको मैं ट्यूशन पर आऊंगा पापा कहते हैं अबे बेवकूफ है क्या विनाश काले विपरीत बुद्धि उसके ससुर भी आते हैं लड़के की तो कहते हैं कि बेटा तू पीसीएस निकाला है मेरी बेटी भी टीसीएस है दोनों लोग खुश रहोगे कमाऊ की खाओगे क्या दिक्कत है तो पीछे मत छोड़ो पता नहीं छोडूंगा अगर आपको अपनी बेटी का शादी करना है तो करिए नहीं करना है तो मुझे कोई दिक्कत नहीं है मुझे कोई दूसरी लड़की मिल जाएगी लेकिन अब शादी तय हो गया रहता है बस 15 दिन 20 दिन बाद शादी का डेट पड़ा रहता है जो शादी करते हैं लोग कर दो भाई जो भाग्य में होगा होगा आज की डेट में वह बंदा मेडजी में पड़ा रहा है और वह बताते हैं कि आज के डेट में मेरे पापा मेरे ससुर सभी लोग मुझसे बोलते हैं कि बेटा तूने जो डिसीजन लिया बहुत सही डिसीजन लिया तो कहने का मतलब है कि सिर्फ गवर्नमेंट जॉब में ही कैरियर नहीं होता है कैरियर किसी भी क्षेत्र में बना सकते हैं बिजनेसमैन बन सकते हैं पॉलीटिशियन बन सकते हैं समाज सेवक बन सकते हैं और एक अच्छे किसान बन सकते हैं तो कुछ भी करिए सफलता को प्राप्त करिए बच्चों के ऊपर प्रेशर पढ़ो पढ़ो पढ़ो अरे यार पढ़ने का उसका मन नहीं कर रहा है तो जबरदस्ती पढ़ा रहे हो उसका जिस फील्ड में इंटरेस्ट है उसी में जाने दो ना तत्वों की चाइना बहुत आगे चाइना में बच्चों को देखा जाता है कि किस फील्ड में बच्चों का इंटरेस्ट है उसी फील्ड में उसे डाल दिया जाता है जिसका पढ़ने का मन करता है पड़ता है जिसका खेलने का मन करता है उस खेलता है तू बोलने वाला बंदा है जो अच्छा समाज सेवा के साथ अच्छा स्पीकर है उसको पॉलिटिक्स में लोग लाते हैं तो हर आदमी का विचार अलग होता है पांचों उंगली बराबर नहीं है इसलिए कभी भी दबाव मत बनाइए बच्चे अपना भविष्य खुद से बनाएंगे और उनका सपोर्ट करिए सपोर्ट करिए उन्हें गाइडलाइन दीजिए अच्छा गाइडलाइन जब बच्चों को मिलेगा तो जीवन में बहुत तरक्की पाएंगे धन्यवाद

dekhiye padhai ke saath aur padhai ke baad kabhi bhi apne baccho ke upar sarkari naukri ke liye dabaav nahi banana chahiye agar aapka baccha padhai kar raha hai uska interest agar politics me hai toh politics me jaega kyonki uska dil dimag maang sab kuch kahata hai ki main isi me kuch behtar kar sakta hoon aur mere andar quality hai samaj ke log bhi kehte hain ki nahi aapka beta bahut accha bolta hai aur yah pakka 1 din saansad vidhayak ya kuch bane bane jaayega toh use politics me jaane dijiye chhod dijiye uske upar agar aapka baccha private job me safalta prapt karna chahta hai toh use private job me safalta prapt karne dijiye agar baccha chahta hai ki nahi main government field me hi jaunga usi me naukri karunga tu usi me naukri karega usi me khush rahega sundar pichai google ke ceo hain aur unka tankhvaah na jaane kitna hoga kai sau crore hoga toh kya vaah sarkari naukri karte hain private job karte hain sarkari naukri me shuru me tankhvaah zyada milta hai lekin bahut kam in treatment hota hai baad me aur jeevan khatam ho jata hai 1 level tak lekin private naukri ho sakta hai ki aaj aap 10 000 se start kar rahe ho lekin teen lakh char lakh par bhi pohch jaate hain log kisi ke upar dabaav nahi banana chahiye aapke bacche ka jo man karta hai use karne dijiye mata pita dabaav isliye banate hain kyonki vaah jo kaam nahi kar paye vaah apne baccho se karwana chahte bhaiya aisa bilkul mat sochiye jo bacche hote hain na yah apna target apne tarike se prapt karne ki koshish karte hain carrier har field me banaya ja sakta hai main aapko ek kahani batata hoon ek junior ek banda tha jisne Engineering kiya tha uska delhi university me admission ho gaya mba me jab mba karne gaya toh 1 saal ke baad hi uska yahi vala aa gaya government me aur mba chhodkar vaah jaii ban gaya ji banne ke baad 2 saal job kiya phir vaah banda apne gaon jata hai rajasthan ka hota hai vaah bikaner side ka wahan jata hai toh apne papa se kahata hai papa hum logo ke ghar 8 10 baje khet hai main aloevera ki kheti karunga papa kehte Pagal ho gaya hai kya gaon waale aate hain padosi aur uske papa kehte hain are yaar samjhao is koi devi ka naukri chhod raha hai toh gaon waale kehte hain abe bewakoof ho gaye ho tum aloevera ki kheti karoge aloevera ki kheti hum logo ne bhi kiya tha kuch nahi hota hai jeevan barbad ho jaega baccha zindagi jab ek baar barbad hoti hai na toh phir sahi nahi ho pati hai chupchap ji bane ho naukri karo respected job hai toh banda kahata hai ki nahi main main aloevera ki kheti karunga main naukri chhod raha hoon sach me naukri chhod deta hai aaj toh asli game aloevera ki kheti karwata hai karvaya tha aaj ki date me ho kai hazaar bhi gaye dusri ka khet lekar aloevera ki kheti karwata hai aur main aapko bata dena chahta hoon vaah vyakti patanjali ko sabse adhik aloevera bechne vala vyakti hai aaj ki date me bahut bada business aisa hona chahiye ek banda tha jo pcs qualify kar leta hai ab uski shaadi bhi 30 run ki ladki se prem ho jaati hai ab vaah apne ghar jata hai toh kahata hai ki papa me pcs nahi banunga main chhod raha hoon isko main tuition par aaunga papa kehte hain abe bewakoof hai kya vinash kaale viprit buddhi uske sasur bhi aate hain ladke ki toh kehte hain ki beta tu pcs nikaala hai meri beti bhi TCS hai dono log khush rahoge kamau ki khaoge kya dikkat hai toh peeche mat chodo pata nahi chodunga agar aapko apni beti ka shaadi karna hai toh kariye nahi karna hai toh mujhe koi dikkat nahi hai mujhe koi dusri ladki mil jayegi lekin ab shaadi tay ho gaya rehta hai bus 15 din 20 din baad shaadi ka date pada rehta hai jo shaadi karte hain log kar do bhai jo bhagya me hoga hoga aaj ki date me vaah banda medji me pada raha hai aur vaah batatey hain ki aaj ke date me mere papa mere sasur sabhi log mujhse bolte hain ki beta tune jo decision liya bahut sahi decision liya toh kehne ka matlab hai ki sirf government job me hi carrier nahi hota hai carrier kisi bhi kshetra me bana sakte hain bussinessmen ban sakte hain politician ban sakte hain samaj sevak ban sakte hain aur ek acche kisan ban sakte hain toh kuch bhi kariye safalta ko prapt kariye baccho ke upar pressure padho padho padho are yaar padhne ka uska man nahi kar raha hai toh jabardasti padha rahe ho uska jis field me interest hai usi me jaane do na tatvon ki china bahut aage china me baccho ko dekha jata hai ki kis field me baccho ka interest hai usi field me use daal diya jata hai jiska padhne ka man karta hai padta hai jiska khelne ka man karta hai us khelta hai tu bolne vala banda hai jo accha samaj seva ke saath accha speaker hai usko politics me log laate hain toh har aadmi ka vichar alag hota hai panchon ungli barabar nahi hai isliye kabhi bhi dabaav mat banaiye bacche apna bhavishya khud se banayenge aur unka support kariye support kariye unhe guideline dijiye accha guideline jab baccho ko milega toh jeevan me bahut tarakki payenge dhanyavad

देखिए पढ़ाई के साथ और पढ़ाई के बाद कभी भी अपने बच्चों के ऊपर सरकारी नौकरी के लिए दबाव नहीं

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Ajit Pandit

visual Artist आप ललित कला में कैरियर बनाना हैं तो संपर्क कर सकते हैं

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

सर यह मुझे लगता है यह मेरे अनुकूल यह बिहारी मानसिकता है सरकारी नौकरी क्योंकि आप यहां से बाहर जाइए या फिर क्या लीजिए हिंदी भाषी क्षेत्र में जो यह है सरकारी नौकरी बिजनेस करना चाहता है सर रुक जाता है जो अपना काम करें वो कहते हैं ना कहावत है सर मतलब भरा लॉकर होने से बढ़िया है छोटा मालिक हो तो बच्चे को अच्छा एजुकेशन दीजिए और कोशिश कीजिए वह अपने पैरों पर खड़े हो गवर्नमेंट का नौकरी भी सर बहुत अच्छा नहीं है अगर आप करते हैं तो पता चलता होगा जो एक पैर पर खड़े रहना पड़ता है तो इसको ऐसे मत आ किए गवर्नमेंट जॉब प्राइवेट जॉब पर देखिए बच्चों में बच्चों काबिलियत क्या है या फिर आपकी काबिलियत क्या हुआ क्या कर सकते हैं यह बिहारी मानसिकता सरकारी नौकरी या फिर के लीजिए हिंदी में से चित्रों का मानसिकता बस

sir yah mujhe lagta hai yah mere anukul yah bihari mansikta hai sarkari naukri kyonki aap yahan se bahar jaiye ya phir kya lijiye hindi bhashi kshetra me jo yah hai sarkari naukri business karna chahta hai sir ruk jata hai jo apna kaam kare vo kehte hain na kahaavat hai sir matlab bhara locker hone se badhiya hai chota malik ho toh bacche ko accha education dijiye aur koshish kijiye vaah apne pairon par khade ho government ka naukri bhi sir bahut accha nahi hai agar aap karte hain toh pata chalta hoga jo ek pair par khade rehna padta hai toh isko aise mat aa kiye government job private job par dekhiye baccho me baccho kabiliyat kya hai ya phir aapki kabiliyat kya hua kya kar sakte hain yah bihari mansikta sarkari naukri ya phir ke lijiye hindi me se chitron ka mansikta bus

सर यह मुझे लगता है यह मेरे अनुकूल यह बिहारी मानसिकता है सरकारी नौकरी क्योंकि आप यहां से बा

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

पढ़ाई के साथ और पढ़ाई के बाद बच्चों पर ज्यादा सरकारी नौकरी के लिए दबाव हम सबको नहीं बनाना चाहिए क्योंकि मेरा यह मानना है कि पढ़ाई के लिए भी दबाव नहीं बनाते यह शैक्षिक चीजें होती हैं दबाव से कहीं न कहीं हमारा जो बालक है वह वह टूट सकता है बिखर सकता है यह भी एक दूसरा पक्ष है जिसके लिए हम को सोचने को विवश होना चाहिए हम जरूर यह कोशिश करें कि बच्चे को अच्छी शिक्षा मिले वह पड़े लेकिन अनावश्यक रूप से दबाव नहीं होना चाहिए आवश्यक रूप से जो चीजें हो सकती हैं जो आप बात कर सकते हैं और जिनकी अकेले आप आग्रह कर सकते हैं बालक बालको से और उनसे कह सकते हैं कि भाई आप इन चीजों पर काम करिए इससे सुधार होगा आपकी पढ़ाई और पढ़ाई अच्छी होनी चाहिए पटना भी चाहिए समय बस तरीके से पढ़ना चाहिए लेकिन मानसिक दबाव के कारण से अगर पढ़ाई हम लोग लगातार दबाव के कारण पिक रखते हैं तो उससे और भी बड़ा नुकसान होने का अंदेशा रहता है रही बात सरकारी नौकरी की दोस्त विश्व की आबादी आप देखिए तो हम डेढ़ सौ करोड़ से ऊपर हैं दिखा 30 करोड़ की आबादी है पहुंच रहे हैं देश के प्रति व्यक्ति आगे क्योंकि हम डेढ़ सौ करोड़ के सिटी में पहुंचने वाले हैं और इनमें स्थितियों में सब्जी को सरकारी नौकरी मिलना यह कतई संभव नहीं है यह बात आप सब पढ़े लिखे यदि हमारे वर्ग के लोग हैं वह जानते हैं ऐसी स्थिति में स्वावलंबी बनना स्वरोजगार खोज में रहना और अपने साथ-साथ देश के और करोड़ों युवाओं को स्वावलंबी बनाना को रोजगार देना यह हमारे देश के युवाओं का कर्तव्य बनेगा मैंने पहले भी कहा है कि देश के युवाओं को लायबिलिटी से एसिड बनाने की जिम्मेदारी को हमारे देश के जो बड़े लीडर हैं उन्होंने इसको अपने कार्यक्रम में स्थान दिया है चाहे वह कौशल विकास योजना हो स्टार्टअप योजना हो स्टैंड अप योजना हो इन सब के माध्यम से देश के युवाओं को रोजगार दाता बनाने की कोशिश की जा रही है ताकि वह हाथ फैला कर के किसी कंपनी के सामने मत खड़े हो सरकारी नौकरियों के चक्कर में अपना जीवन ना बर्बाद करें वह देश की मुख्यधारा में आ करके देश की कुनामी कल ग्रोथ को बढ़ाने में सक्षम योगदान दे सकते हैं स्वरोजगार के माध्यम से देश भर में ऐसे हजारों चार्ट अब शुरू हुए हैं मुद्रा लोन ओके आजाद के माध्यम से जो देश के लाखों युवाओं को रोजगार प्रदान कर रहे हैं ऐसी स्थिति में हम सब को यथासंभव प्रयास करना चाहिए हम सरकारी नौकरी के लिए जरूर अपना हाथ-पांव मारे लेकिन किन्ही कारणों से अगर सरकारी नौकरियों में हम नहीं जा पाए तो हम यह भी कोशिश करें कि क्या हम स्वाबलंबी बंद करके अपने पैरों पर खड़े होकर के कोई रोजगार शुरू कर सकते हैं कोई व्यापार शुरू कर सकते हैं जिससे और भी लोगों को हम लाभार्थी बना सके अपने व्यापार में और उनको रोजगार प्रदान कर सकें हमारे माध्यम से भी देश के हजारों लोगों के लिए चलें घरों में करो में भोजन हमारे घर हमारे प्रयासों के माध्यम से उनके घरों में रोटियां पहुंचे दो वक्त का भोजन मिले इससे बड़ा पुण्य का कार्य कुछ नहीं हो सकता है तो मैं हमेशा इस बात का पक्षधर रहा हूं कि देश में सरकारी नौकरियों के अलावा भी अन्य क्षेत्रों में अन्य जो स्किल डेवलपमेंट के मारे कोर्सेज हैं उन व्यवसायों में भी हम जरूर अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकते हैं अपने घर परिवार अपने मित्रों के बीच में इस बात को जरूर घुमाएं और उनकी जो टैलेंट है उनके जो प्रतिभा है उसके अनुरूप रोजगार खोजने में उनको सहायता करें उनकी मदद करें कुछ अगर आवश्यक वित्तीय अब तो की पूर्ति हो सकती है आर्थिक मदद हो सकती है तो हम उसको भी करें उनकी शैक्षिक कार्यों के अनुसार उनका रोजगार अगर मिलेगा तो वह मन से बच बच कर्म से उस पर विशेष ध्यान देकर के काम करेंगे और 23 समाज घर परिवार की उन्नति में अपनी महती भूमिका को निभाने वाले हैं तुम्हें हमेशा इस बात को आप सब से अनुरोध के रूप में रखूंगा कि सरकारी नौकरियों के पीछे जाएं लेकिन आगे नहीं कोशिश करें अगर स्थितियां अनुकूल नहीं होती है तो हमें स्वरोजगार के क्षेत्र में भी अपना हाथ पांव मारना चाहिए इससे हम अपना ही नहीं कई और परिवारों का भी भरण पोषण कर सकेंगे

padhai ke saath aur padhai ke baad baccho par zyada sarkari naukri ke liye dabaav hum sabko nahi banana chahiye kyonki mera yah manana hai ki padhai ke liye bhi dabaav nahi banate yah shaikshik cheezen hoti hain dabaav se kahin na kahin hamara jo balak hai vaah vaah toot sakta hai bikhar sakta hai yah bhi ek doosra paksh hai jiske liye hum ko sochne ko vivash hona chahiye hum zaroor yah koshish kare ki bacche ko achi shiksha mile vaah pade lekin anavashyak roop se dabaav nahi hona chahiye aavashyak roop se jo cheezen ho sakti hain jo aap baat kar sakte hain aur jinki akele aap agrah kar sakte hain balak baalako se aur unse keh sakte hain ki bhai aap in chijon par kaam kariye isse sudhaar hoga aapki padhai aur padhai achi honi chahiye patna bhi chahiye samay bus tarike se padhna chahiye lekin mansik dabaav ke karan se agar padhai hum log lagatar dabaav ke karan pic rakhte hain toh usse aur bhi bada nuksan hone ka andesha rehta hai rahi baat sarkari naukri ki dost vishwa ki aabadi aap dekhiye toh hum dedh sau crore se upar hain dikha 30 crore ki aabadi hai pohch rahe hain desh ke prati vyakti aage kyonki hum dedh sau crore ke city me pahuchne waale hain aur inmein sthitiyo me sabzi ko sarkari naukri milna yah katai sambhav nahi hai yah baat aap sab padhe likhe yadi hamare varg ke log hain vaah jante hain aisi sthiti me svaavlambi banna swarojgar khoj me rehna aur apne saath saath desh ke aur karodo yuvaon ko svaavlambi banana ko rojgar dena yah hamare desh ke yuvaon ka kartavya banega maine pehle bhi kaha hai ki desh ke yuvaon ko Liability se acid banane ki jimmedari ko hamare desh ke jo bade leader hain unhone isko apne karyakram me sthan diya hai chahen vaah kaushal vikas yojana ho startup yojana ho stand up yojana ho in sab ke madhyam se desh ke yuvaon ko rojgar data banane ki koshish ki ja rahi hai taki vaah hath faila kar ke kisi company ke saamne mat khade ho sarkari naukriyon ke chakkar me apna jeevan na barbad kare vaah desh ki mukhyadhara me aa karke desh ki kunami kal growth ko badhane me saksham yogdan de sakte hain swarojgar ke madhyam se desh bhar me aise hazaro chart ab shuru hue hain mudra loan ok azad ke madhyam se jo desh ke laakhon yuvaon ko rojgar pradan kar rahe hain aisi sthiti me hum sab ko yathasambhav prayas karna chahiye hum sarkari naukri ke liye zaroor apna hath paav maare lekin kinhi karanon se agar sarkari naukriyon me hum nahi ja paye toh hum yah bhi koshish kare ki kya hum swabalambi band karke apne pairon par khade hokar ke koi rojgar shuru kar sakte hain koi vyapar shuru kar sakte hain jisse aur bhi logo ko hum labharthi bana sake apne vyapar me aur unko rojgar pradan kar sake hamare madhyam se bhi desh ke hazaro logo ke liye chalen gharon me karo me bhojan hamare ghar hamare prayaso ke madhyam se unke gharon me rotiyan pahuche do waqt ka bhojan mile isse bada punya ka karya kuch nahi ho sakta hai toh main hamesha is baat ka pakshadhar raha hoon ki desh me sarkari naukriyon ke alava bhi anya kshetro me anya jo skill development ke maare courses hain un vyavasayon me bhi hum zaroor apni bhagidari sunishchit kar sakte hain apne ghar parivar apne mitron ke beech me is baat ko zaroor ghumaen aur unki jo talent hai unke jo pratibha hai uske anurup rojgar khojne me unko sahayta kare unki madad kare kuch agar aavashyak vittiy ab toh ki purti ho sakti hai aarthik madad ho sakti hai toh hum usko bhi kare unki shaikshik karyo ke anusaar unka rojgar agar milega toh vaah man se bach bach karm se us par vishesh dhyan dekar ke kaam karenge aur 23 samaj ghar parivar ki unnati me apni mahati bhumika ko nibhane waale hain tumhe hamesha is baat ko aap sab se anurodh ke roop me rakhunga ki sarkari naukriyon ke peeche jayen lekin aage nahi koshish kare agar sthitiyan anukul nahi hoti hai toh hamein swarojgar ke kshetra me bhi apna hath paav marna chahiye isse hum apna hi nahi kai aur parivaron ka bhi bharan poshan kar sakenge

पढ़ाई के साथ और पढ़ाई के बाद बच्चों पर ज्यादा सरकारी नौकरी के लिए दबाव हम सबको नहीं बनाना

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Anil Ramola

Yoga Instructor | Engineer

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भाई के साथ लड़ाई के बाद सर को 7:00 हो गए दो देना बहुत ही गलत है दबाव नहीं होना चाहिए तो खुशी से किचन के बच्चों की हेल्प करने के लिए और उनको मोटिवेट कीजिए अपने लक्ष्य की ओर आगे

bhai ke saath ladai ke baad sir ko 7 00 ho gaye do dena bahut hi galat hai dabaav nahi hona chahiye toh khushi se kitchen ke baccho ki help karne ke liye aur unko motivate kijiye apne lakshya ki aur aage

भाई के साथ लड़ाई के बाद सर को 7:00 हो गए दो देना बहुत ही गलत है दबाव नहीं होना चाहिए तो खु

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Rajesh Kumar Saxena

Assistant Professor

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पढ़ाई के साथ अपने बच्चे को आप वेबसाइट शिक्षा जरूर दिल जब आपका बच्चा व्यवसायिक शिक्षा ग्रहण कर लेगा तब शायद उसे सरकारी नौकरी का दबाव ज्यादा नहीं यदि वेबसाइट शिक्षित है तो वह अपने साथ कई यदि उसे सरकारी नौकरी नहीं मिलती है और नहीं भी प्रयास करता है तो वह अपना व्यवसाय तो शुरू कर सकता है इस तरीके से उसे सरकारी नौकरी का दबाव नहीं डालना पड़ेगा और स्वरोजगार की तरफ आगे बढ़ेगा

padhai ke saath apne bacche ko aap website shiksha zaroor dil jab aapka baccha vyavasayik shiksha grahan kar lega tab shayad use sarkari naukri ka dabaav zyada nahi yadi website shikshit hai toh vaah apne saath kai yadi use sarkari naukri nahi milti hai aur nahi bhi prayas karta hai toh vaah apna vyavasaya toh shuru kar sakta hai is tarike se use sarkari naukri ka dabaav nahi dalna padega aur swarojgar ki taraf aage badhega

पढ़ाई के साथ अपने बच्चे को आप वेबसाइट शिक्षा जरूर दिल जब आपका बच्चा व्यवसायिक शिक्षा ग्रहण

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Siyaram Dubey

YouTuber/Spiritual Person/Thinker/Social-media Activist

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Shipra Ranjan

Life Coach

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका सवाल है कि पढ़ाई के साथ और पढ़ाई के बाद बच्चों पर ज्यादा सरकारी नौकरी के लिए दबाव देना क्या सही है आपका यह फर्ज बनता है कि बच्चों के सामने आप सारे ऑप्शन क्लियर रखें इस समय किस एज में और किस पढ़ाई के चलते वह किस तरीके की जॉब ऑफर अपने लिए देख सकते हैं इस तरीके की जांच में कब अप्लाई कर सकते हैं इस एज ग्रुप में अप्लाई कर सकते हैं क्या क्राइटेरिया है उसे क्या फायदे हैं क्या नुकसान है यह सब बच्चों के सामने रखना ऑप्शन फॉर में रखना आपकी जिम्मेदारी है क्या करना है क्या नहीं बच्चे को ही डिसाइड करने दीजिए कि वह कॉमेंट जॉब करना चाहते हैं प्राइवेट जॉब करना चाहते हैं बिजनेस करना चाहते हैं या उन्होंने कुछ और सोचा हुआ बच्चा अपने काम करेगा तो बिल्कुल उसमें अच्छी तरीके से इनपुट देगा और उसको लाइफ में सक्सेस भी जल्दी मिलेगी बॉस को बिल्कुल अपने मन से नहीं करेगा और उसे सब्सिडी नहीं मिल पाएगी फैसला आपके हाथ में है

aapka sawaal hai ki padhai ke saath aur padhai ke baad baccho par zyada sarkari naukri ke liye dabaav dena kya sahi hai aapka yah farz banta hai ki baccho ke saamne aap saare option clear rakhen is samay kis age me aur kis padhai ke chalte vaah kis tarike ki job offer apne liye dekh sakte hain is tarike ki jaanch me kab apply kar sakte hain is age group me apply kar sakte hain kya criteria hai use kya fayde hain kya nuksan hai yah sab baccho ke saamne rakhna option for me rakhna aapki jimmedari hai kya karna hai kya nahi bacche ko hi decide karne dijiye ki vaah comment job karna chahte hain private job karna chahte hain business karna chahte hain ya unhone kuch aur socha hua baccha apne kaam karega toh bilkul usme achi tarike se input dega aur usko life me success bhi jaldi milegi boss ko bilkul apne man se nahi karega aur use subsidy nahi mil payegi faisla aapke hath me hai

आपका सवाल है कि पढ़ाई के साथ और पढ़ाई के बाद बच्चों पर ज्यादा सरकारी नौकरी के लिए दबाव देन

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Manish Menghani

Health & parenting Advisor

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Surya Prakash Mishra

Career Counsellor& Marital Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बिल्कुल नहीं अगर आप पढ़ाई के टाइम या पढ़ाई के बाद बच्चे के ऊपर दबाव डालते हैं या सरकारी नौकरी करो तो अपने फोन प्रतिभा का उपयोग नहीं कर पाएंगे जिसके कारण वह भविष्य में परेशान होंगे अगर उन्हें टाइम से सरकारी नौकरी नहीं मिली तो अन्य काम करने लायक भी नहीं बनेंगे इसलिए यह क्या करना चाहिए कि लड़के जो करना चाहते हैं उसी में ही उनका संपूर्ण योगदान करना चाहिए और साथ ही साथ में को प्रोत्साहित करना चाहिए या जो भी काम कर रहे हो वह आगे चलकर आपके भविष्य को सुरक्षित करें इसलिए ऐसा काम आप करो जो कि आपके लिए बैठा था ना कि हमारे नगर के उनके कार्यों में सहयोग करें तो वह

bilkul nahi agar aap padhai ke time ya padhai ke baad bacche ke upar dabaav daalte hain ya sarkari naukri karo toh apne phone pratibha ka upyog nahi kar payenge jiske karan vaah bhavishya me pareshan honge agar unhe time se sarkari naukri nahi mili toh anya kaam karne layak bhi nahi banenge isliye yah kya karna chahiye ki ladke jo karna chahte hain usi me hi unka sampurna yogdan karna chahiye aur saath hi saath me ko protsahit karna chahiye ya jo bhi kaam kar rahe ho vaah aage chalkar aapke bhavishya ko surakshit kare isliye aisa kaam aap karo jo ki aapke liye baitha tha na ki hamare nagar ke unke karyo me sahyog kare toh vaah

बिल्कुल नहीं अगर आप पढ़ाई के टाइम या पढ़ाई के बाद बच्चे के ऊपर दबाव डालते हैं या सरकारी नौ

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