ज्योतिष में कस्प कुंडली का महत्व बताइए?...


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RAJKUMAR

Sharp Astrology

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ज्योतिष में कस्तर कुंडली का महत्व बताएं उसकी भी हत्या होती है पढ़ने की जैसे हम चंद्र कुंडली पढ़ते हो सबको पता चल जाएगा कि आपने अभी तक जो लिखा है वही 192 नदी यह नीति 1617 मूर्ति बदलती नहीं सीकेपी जिसको कहते है यह मतलब या फिर लगना कुंडली में यही मंगला का ज्ञान वेतन में यहां पर दसवें स्थान में तो यहां पर यह दसवें स्थान में कौन से नक्षत्र में और उस नक्षत्र का सब लोड नक्षत्र का स्वामी कौन होता है वह दिखा जाता है और यहां पर आप मंगल को वह रीवा सेनापति है मंगल का जो स्वामी नक्षत्र स्वामी होता है और जो सब तारण सोता ही नहीं सब लोड होता है उस नक्षत्र का स्वामी भी होता है वह सब को भी देखना पड़ता है और वह जो होता है ना अबकी लग्न कुंडली में मंगल ग्रह की दशा में आप यहां पर उसके साथ बैठे हुए मिन कुल्ली में नहीं है जीवन में नहीं है यहां पर आपको अंगारक दोष नहीं लगेगा बेटी में अगर है तो भी नहीं लगेगा तो यहां पर क्या हुआ तो यहां पर मंगल जोशना जिस नक्षत्र का जिस नक्षत्र में बैठा उस जो नक्षत्र का स्वामी है और राहुल जिस नक्षत्र में बैठा है उस नक्षत्र का स्वामी जो भी होगा अगर वह एक साथ बैठे होंगे ना तो दूसरा योग बनेगा तो यहां पर बड़ा मजेदार यह भी सही है और मुझे सीखने दे यह लगता था कि बहुत ही जिसमें बहुत सारी मिस्टेक हुई कभी-कभी मैंने भी किया कि मैंने किसी को सीखना ही छोड़ दिया दिमाग से बाहर बहुत आता था तो देखो यहां पर जो अभी हिंदुस्तान की हो या फिर वर्ल्ड की एडवांस एडवांस इसलिए आप थोड़ा शुभ सुनाओ जान सकते हो जैसे कि एग्जांपल देता हूं मैं आपको हम चंद्रपुर के नक्षत्र ग्रीन कलर के कपड़े पहने या फिर ब्लू कलर के कपड़े कपड़े इतना डिब्बे की आपने जो कपड़े पहने उसका वजन दिया जाता है इसके लिए सीखने वाले का अनुभव होना चाहिए और मान लो कि आपको शरीर में बुखार है तो यहां से आपको कितने डिग्री का बुखार है वह भी आप चेक कर सकते हो और आप कब कब हुआ था और कब मिटेगा इतना सुख तो ज्यादातर आपको जब यह बीमारी देखे तो खेती के अंदर चंद्र का रोल मैं जरूर आऊंगा चंद्र करो ना भूले और चंद्र जिस नक्षत्र का स्वामी है जिस नक्षत्र में बैठा है उसका जो स्वामी उसको भी ना भूले यह बड़ा काम में आएगा जब आप के भी सीखेंगे तब

jyotish me kastar kundali ka mahatva bataye uski bhi hatya hoti hai padhne ki jaise hum chandra kundali padhte ho sabko pata chal jaega ki aapne abhi tak jo likha hai wahi 192 nadi yah niti 1617 murti badalti nahi CKP jisko kehte hai yah matlab ya phir lagna kundali me yahi mangala ka gyaan vetan me yahan par dasven sthan me toh yahan par yah dasven sthan me kaun se nakshtra me aur us nakshtra ka sab load nakshtra ka swami kaun hota hai vaah dikha jata hai aur yahan par aap mangal ko vaah reeva senapati hai mangal ka jo swami nakshtra swami hota hai aur jo sab tarana sota hi nahi sab load hota hai us nakshtra ka swami bhi hota hai vaah sab ko bhi dekhna padta hai aur vaah jo hota hai na abki lagn kundali me mangal grah ki dasha me aap yahan par uske saath baithe hue mein kulli me nahi hai jeevan me nahi hai yahan par aapko angarak dosh nahi lagega beti me agar hai toh bhi nahi lagega toh yahan par kya hua toh yahan par mangal joshna jis nakshtra ka jis nakshtra me baitha us jo nakshtra ka swami hai aur rahul jis nakshtra me baitha hai us nakshtra ka swami jo bhi hoga agar vaah ek saath baithe honge na toh doosra yog banega toh yahan par bada majedar yah bhi sahi hai aur mujhe sikhne de yah lagta tha ki bahut hi jisme bahut saari mistake hui kabhi kabhi maine bhi kiya ki maine kisi ko sikhna hi chhod diya dimag se bahar bahut aata tha toh dekho yahan par jo abhi Hindustan ki ho ya phir world ki advance advance isliye aap thoda shubha sunao jaan sakte ho jaise ki example deta hoon main aapko hum chandrapur ke nakshtra green color ke kapde pehne ya phir blue color ke kapde kapde itna dibbe ki aapne jo kapde pehne uska wajan diya jata hai iske liye sikhne waale ka anubhav hona chahiye aur maan lo ki aapko sharir me bukhar hai toh yahan se aapko kitne degree ka bukhar hai vaah bhi aap check kar sakte ho aur aap kab kab hua tha aur kab mitega itna sukh toh jyadatar aapko jab yah bimari dekhe toh kheti ke andar chandra ka roll main zaroor aaunga chandra karo na bhule aur chandra jis nakshtra ka swami hai jis nakshtra me baitha hai uska jo swami usko bhi na bhule yah bada kaam me aayega jab aap ke bhi sikhenge tab

ज्योतिष में कस्तर कुंडली का महत्व बताएं उसकी भी हत्या होती है पढ़ने की जैसे हम चंद्र कुंडल

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दीपक कुंडली केपी एस्ट्रोलॉजी का भाग है पुण्य में बताती है कि ग्रहों की वास्तविक स्थिति क्या है कई बार क्या होता है की जन्म कुंडली में जो ग्रह जहां पर है वास्तव में कुछ पोजीशन में नहीं होते हैं इसलिए हमें कष्ट फोन रिसीव

deepak kundali KP astrology ka bhag hai punya me batati hai ki grahon ki vastavik sthiti kya hai kai baar kya hota hai ki janam kundali me jo grah jaha par hai vaastav me kuch position me nahi hote hain isliye hamein kasht phone receive

दीपक कुंडली केपी एस्ट्रोलॉजी का भाग है पुण्य में बताती है कि ग्रहों की वास्तविक स्थिति क्य

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Nikunj Sodagar

Environmental Engineer, Life Coach, Astro Vastu Consultant, Hypnotherapist

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ज्योतिष में कुंडली का महत्व बताइए आपका प्रश्न है सालों से पिछले कुछ सालों से जिसको केपी सिस्टम भी बोलते हैं क्योंकि अपने वहां जो पुरानी ज्योतिषशास्त्र है इसमें खासतौर पर राशियों के आधार पर कुंडली बनाई जाती है और उसमें थोड़ा एक्यूरेसी कम रहता है ऐसा शुक्र कुंडली का उपयोग करने वाले ज्योतिषाचार्य का मानना है मगर बात यह है कि जब आप जो प्राचीन कुंडली जो है इस्तेमाल कर रहे हो तो उसमें वर्ग कुंडली के साथ आपको आपकी लाइफ में कुंडली और चंद्र कुंडली से उपयोग करके आप सचिव भविष्य दे सकते हो दशा अंतर्दशा से भी आप चेक कर सकते हो अब पूछो उस पे बैठा है नक्षत्र में उसे कहते हैं उसी तरह हर कच्छ के हिसाब से कौन सी राशि नक्षत्र और पद और चरण तक उसका अध्ययन किया जाता है और हर एक भाव को वह चरण पद और नक्षत्र के हिसाब से मूल्यांकन किया जाता है और उसी आधार पर हर एक गांव का ज्योतिष निदान किया जाता है यार जो पलटी किया जाता है उस कष्ट कुंडली का इस्तेमाल करते हैं तो जैसे के दशा अंतर्दशा वगैरह की ज्यादा उपयोग नहीं होता है उसमें कोई भी घाव कक्कड़ कौन सी राशि में कौन से नक्षत्र में कौन से चरण में है नक्षत्र के उस को निर्धारित करके उससे भविष्य निदान किया जाता है

jyotish me kundali ka mahatva bataiye aapka prashna hai salon se pichle kuch salon se jisko KP system bhi bolte hain kyonki apne wahan jo purani jyotishashastra hai isme khaasataur par raashiyon ke aadhar par kundali banai jaati hai aur usme thoda ekyuresi kam rehta hai aisa shukra kundali ka upyog karne waale jyotishacharya ka manana hai magar baat yah hai ki jab aap jo prachin kundali jo hai istemal kar rahe ho toh usme varg kundali ke saath aapko aapki life me kundali aur chandra kundali se upyog karke aap sachiv bhavishya de sakte ho dasha antardasha se bhi aap check kar sakte ho ab pucho us pe baitha hai nakshtra me use kehte hain usi tarah har kacch ke hisab se kaun si rashi nakshtra aur pad aur charan tak uska adhyayan kiya jata hai aur har ek bhav ko vaah charan pad aur nakshtra ke hisab se mulyankan kiya jata hai aur usi aadhar par har ek gaon ka jyotish nidan kiya jata hai yaar jo palati kiya jata hai us kasht kundali ka istemal karte hain toh jaise ke dasha antardasha vagera ki zyada upyog nahi hota hai usme koi bhi ghaav kakkar kaun si rashi me kaun se nakshtra me kaun se charan me hai nakshtra ke us ko nirdharit karke usse bhavishya nidan kiya jata hai

ज्योतिष में कुंडली का महत्व बताइए आपका प्रश्न है सालों से पिछले कुछ सालों से जिसको केपी सि

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Dr. Mahesh Mohan Jha

Asst. Professor,Astrologer,Author

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नमस्कार आपका प्रश्न है कश्यप कुंडली का महत्व बताइए कश्यप कुंडली का अर्थ होता है कृष्णमूर्ति पद्धति उत्तर भारत में ट्रांसफर पद्धति से कुंडली से संबंधित भविष्यवाणियां की जाती है चिंटू वर्तमान में कृष्णमूर्ति पद्धति है जिसको केपी पद्धति भी बोलते हैं वह दक्षिणी भारत से प्रारंभ हुआ और आज उत्तरी भारत में भी ज्योति लोग इसका अध्ययन करके सहारा ले रहे पराशर पद्धति के अनुसार भाव में स्थित ग्रह भावेश उसके सोनी ग्रहों की दृष्टि के आधार पर ही भविष्यवाणियां की जाती है किंतु केपी पद्धति में कृष्णमूर्ति पद्धति में लग्नेश जिस भाव में स्थित है लग्नेश का नक्षत्र क्या है वह नक्षत्र किस भाव में स्थित है उस भाव का नक्षत्र क्या है किस भाव में कौन सा ग्रह है और किस नक्षत्र में है उसका नक्षत्र क्या है इस सब को ध्यान में रखते हुए खेती पद्धति से भविष्य की जाती है जिसके कारण काल निर्धारण करने में क्या कोई भी घटना घटित होने के लिए समय का जो निर्धारण किया जाता है वह सूक्ष्म से सूक्ष्म तक निकालने में संभव हो पाता है जो कि पराशर पद्धति के अनुसार सुख सुख से सुख घटना का समय निर्धारण करने में कठिनाइयां होती है किंतु केपी पद्धति से सोलापुर जाता है और एक प्रकाशीय कहा गया है तू खेती पद्धति आज के ज्योतिष का एक शोध है कि रिसर्च है और जिस का महत्व आज ज्योति लोग अध्ययन करके उठा रहे हैं धन्यवाद

namaskar aapka prashna hai kashyap kundali ka mahatva bataiye kashyap kundali ka arth hota hai krishnamurti paddhatee uttar bharat me transfer paddhatee se kundali se sambandhit bhavishyavaniyan ki jaati hai chintu vartaman me krishnamurti paddhatee hai jisko KP paddhatee bhi bolte hain vaah dakshini bharat se prarambh hua aur aaj uttari bharat me bhi jyoti log iska adhyayan karke sahara le rahe parashar paddhatee ke anusaar bhav me sthit grah Bhavesh uske sony grahon ki drishti ke aadhar par hi bhavishyavaniyan ki jaati hai kintu KP paddhatee me krishnamurti paddhatee me lagnesh jis bhav me sthit hai lagnesh ka nakshtra kya hai vaah nakshtra kis bhav me sthit hai us bhav ka nakshtra kya hai kis bhav me kaun sa grah hai aur kis nakshtra me hai uska nakshtra kya hai is sab ko dhyan me rakhte hue kheti paddhatee se bhavishya ki jaati hai jiske karan kaal nirdharan karne me kya koi bhi ghatna ghatit hone ke liye samay ka jo nirdharan kiya jata hai vaah sukshm se sukshm tak nikalne me sambhav ho pata hai jo ki parashar paddhatee ke anusaar sukh sukh se sukh ghatna ka samay nirdharan karne me kathinaiyaan hoti hai kintu KP paddhatee se solapur jata hai aur ek prakashiya kaha gaya hai tu kheti paddhatee aaj ke jyotish ka ek shodh hai ki research hai aur jis ka mahatva aaj jyoti log adhyayan karke utha rahe hain dhanyavad

नमस्कार आपका प्रश्न है कश्यप कुंडली का महत्व बताइए कश्यप कुंडली का अर्थ होता है कृष्णमूर्त

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Vipan Sharma

Astrologer & Counsellor Motivational Speaker

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प्रणाम आपको आपका प्रश्न ज्योतिष में कल से कुंडली का महत्व समझाइए कष्ट कुंडली का बहुत ज्यादा महत्व है इसमें जो हम फलित करते हैं उसमें और ज्यादा सताती है कारण बताता हूं और लग्न कुंडली में जो है वह हमारा जो लग्न है हमारा वह करीबन 1 घंटा 50 मिनट 55 मिनट कितने का होता है और इसमें एक लग्न में नक्षत्र होते हैं जिनका ट्रांसलेट होता रहता है अब कस्बे में क्या है नक्षत्र के उप नक्षत्र को भी देखते हैं जिसको हम सब लॉर्ड बोलते हैं तो उसको भी देखते हैं लग्न कुंडली और चलित कुंडली में यही अंतर है जब हम उसको उसके सब लोड को या नक्षत्र को भी देखते हैं तो उसमें जो ग्रहों की स्थिति है कई बार वह बदल जाती है उनका फल भी बदल जाता है उनकी जो स्थिति है भाव में बैठे हुए हैं वह जैसे कोई चौथे भाव में बैठा है लेकिन जब उसके उपर नक्षत्र को भी देखते हैं या उसका पता है कि वास्तव में बैठक जरूर है लेकिन बड़ा अंतर है इसमें हम जो वैदिक ज्योतिष है इसमें हम नक्षत्र तक ही सीमित हैं लेकिन नक्षत्र जो है वह अब एक घंटा 50 मिनट का जैसे मैंने पहले बताया अब ऐसा तो संभव है नहीं कि उसे लग्न में 1 घंटे 50 मिनट की अवधि में अगर 100 बच्चों का जन्म हुआ तो 100 बच्चों का स्वभाव एक ही जैसा होगा 100 बच्चों की कुंडली है कि जैसी होगी तो उसको और ज्यादा सटीक करने के लिए और ज्यादा शुद्ध करने के लिए कष्ट का सहारा लिया जाता है जहां हर जो हमारे नवग्रह हैं तो कुछ ग्रह जो है वह 1 मिनट के बाद बदल जाते हैं कुछ ग्रह है जो हम शोधन करते हैं उनके नक्षत्र उप नक्षत्र स्वामी 25 सेकंड में 30 सेकंड में बदल जाते हैं तो 1 मिनट से भी कम अंतराल का समय में उनके उप नक्षत्र स्वामी बदल जाते हैं उसी का आधार मानकर के कुंडली का निर्माण होता है और उसी को लेकर के फलित करते हैं इस पद बहुत प्रचलित है और अब इसका प्रचलन उत्तरी भारत में भी धीरे-धीरे बढ़ना शुरू हो गया तो मुझे लगता है आपके प्रश्न का उत्तर मैंने दे दिया है और आप संतुष्ट होंगे कोई और भी जिज्ञासा जन्मकुंडली को लेकर के वेदों शास्त्रों को लेकर के हो तो आप मुझे कॉल कर सकते हैं फेसबुक में फॉलो कर सकते हैं यूट्यूब पर आप मेरे चैनल को लाइक और सब्सक्राइब कर सकते हैं जहां पर आपको इन्हीं प्रश्नों के उत्तर मिलेंगे और आपको आपके भविष्य के लिए बहुत मंगलकामनाएं भगवान भोलेनाथ और मां भगवती सदैव आप पर अपनी असीम कृपा बनाए रखें आप जीवन में बहुत आगे बढ़े बहुत-बहुत धन्यवाद बहुत-बहुत आशीर्वाद

pranam aapko aapka prashna jyotish me kal se kundali ka mahatva samjhaiye kasht kundali ka bahut zyada mahatva hai isme jo hum falit karte hain usme aur zyada satati hai karan batata hoon aur lagn kundali me jo hai vaah hamara jo lagn hai hamara vaah kariban 1 ghanta 50 minute 55 minute kitne ka hota hai aur isme ek lagn me nakshtra hote hain jinka translate hota rehta hai ab kasbe me kya hai nakshtra ke up nakshtra ko bhi dekhte hain jisko hum sab lord bolte hain toh usko bhi dekhte hain lagn kundali aur chalit kundali me yahi antar hai jab hum usko uske sab load ko ya nakshtra ko bhi dekhte hain toh usme jo grahon ki sthiti hai kai baar vaah badal jaati hai unka fal bhi badal jata hai unki jo sthiti hai bhav me baithe hue hain vaah jaise koi chauthe bhav me baitha hai lekin jab uske upar nakshtra ko bhi dekhte hain ya uska pata hai ki vaastav me baithak zaroor hai lekin bada antar hai isme hum jo vaidik jyotish hai isme hum nakshtra tak hi simit hain lekin nakshtra jo hai vaah ab ek ghanta 50 minute ka jaise maine pehle bataya ab aisa toh sambhav hai nahi ki use lagn me 1 ghante 50 minute ki awadhi me agar 100 baccho ka janam hua toh 100 baccho ka swabhav ek hi jaisa hoga 100 baccho ki kundali hai ki jaisi hogi toh usko aur zyada sateek karne ke liye aur zyada shudh karne ke liye kasht ka sahara liya jata hai jaha har jo hamare navgrah hain toh kuch grah jo hai vaah 1 minute ke baad badal jaate hain kuch grah hai jo hum sodhan karte hain unke nakshtra up nakshtra swami 25 second me 30 second me badal jaate hain toh 1 minute se bhi kam antaral ka samay me unke up nakshtra swami badal jaate hain usi ka aadhar maankar ke kundali ka nirmaan hota hai aur usi ko lekar ke falit karte hain is pad bahut prachalit hai aur ab iska prachalan uttari bharat me bhi dhire dhire badhana shuru ho gaya toh mujhe lagta hai aapke prashna ka uttar maine de diya hai aur aap santusht honge koi aur bhi jigyasa janmakundali ko lekar ke vedo shastron ko lekar ke ho toh aap mujhe call kar sakte hain facebook me follow kar sakte hain youtube par aap mere channel ko like aur subscribe kar sakte hain jaha par aapko inhin prashnon ke uttar milenge aur aapko aapke bhavishya ke liye bahut mangalakamnaen bhagwan bholenaath aur maa bhagwati sadaiv aap par apni asim kripa banaye rakhen aap jeevan me bahut aage badhe bahut bahut dhanyavad bahut bahut ashirvaad

प्रणाम आपको आपका प्रश्न ज्योतिष में कल से कुंडली का महत्व समझाइए कष्ट कुंडली का बहुत ज्याद

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Acharya vineet kashyap

Vastu Expert & Astrologer Mob.8684013141

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कछु कुंडली का उपयोग केपी एस्ट्रोलॉजी के अंदर किया जाता है कृष्ण कुंडली को बहुत मिस कुंडली भी जाते हैं क्या भाव की डिग्रियों के आधार पर कुंडली का निर्माण किया जाता है उसी आधार पर भविष्यवाणी की जाती है वैसे भी केपी एस्ट्रोलॉजी फॉर नक्षत्र पर आधारित है राखी पर आधारित नहीं है धन्यवाद जवाब अच्छा लगा तो लाइक करें और फॉलो करें

kachu kundali ka upyog KP astrology ke andar kiya jata hai krishna kundali ko bahut miss kundali bhi jaate hain kya bhav ki degreeon ke aadhar par kundali ka nirmaan kiya jata hai usi aadhar par bhavishyavani ki jaati hai waise bhi KP astrology for nakshtra par aadharit hai rakhi par aadharit nahi hai dhanyavad jawab accha laga toh like kare aur follow kare

कछु कुंडली का उपयोग केपी एस्ट्रोलॉजी के अंदर किया जाता है कृष्ण कुंडली को बहुत मिस कुंडली

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