सवरी ने रामायण में, राम को क्या खिलाये थे?...


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Girdhari Lal Mishra

Accountant(M.com,LLB)

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शबरी ने रामायण में राम जी को क्या खिलाया था यह प्रश्न है यह बहुत चर्चित और प्रसिद्ध आख्यान है कि मतंग ऋषि की शिक्षा सब्जी को उनके गुरु हुए निमता गिरीश जी ने यह आश्वासन दिया था कि तुम किसी कुटिया में हमेशा रहना भगवान की भक्ति करना और श्री राम जी स्वयं आकर आपको दर्शन नहीं है भगवान और आदमी को भगवान पर जाना पड़ता है लेकिन आपके कुटिया में भगवान स्वयं आएंगे या कृष्ण गुरु ने दिया था और गुरुत्वाकर्षण का मान करके वह नित्य भगवान का ध्यान करते थे और रास्ता बुखारा करती थी कि श्री राम जी आएंगे शबरी संवारे रास्ता आएंगे श्री राम जी तो और जो भगवान जब श्याम सुंदर की खोज में प्रशासन पहुंचे थे जिन्होंने देश में उपलब्ध फल उनको प्रस्तुत किया था भगवान श्रीराम में बड़े चाव से बेर खाए थे और लक्ष्मी जी ने नहीं खाए थे उनको यह था कि एक तो क्षत्रिय और वह सबरी भील जाति की थी भीलनी थी और बड़े प्यार से उसे भगवान बेर खिलाए थे तो भगवान का चाव से खाते थे यह गोलू के जूठे बेर खाती थी नीचे जुबेर होते थे उन्हीं देशों को संकलित करती थी कट्टे वालों को नहीं लगता था उसमें सभी ने भगवान को बेर खिलाए थे इस प्रश्न को जरा कविता में सुनिए आनंद लीजिए अब एक कवि की वह कहते हैं हम गाय खाते-खाते लक्ष्मण से बोले क्यों रघुराई लक्ष्मण तुमने खाया ही नहीं देखो तो कैसा मीठा है पाताल से लेकर स्वर्ग तलक जो भी है इससे फीका है तुमने भी बहुत खिलाए हैं उनसे ज्यादा आनंद नहीं इसके आगे सीता जी का प्रसाद भोजन भी पसंद नहीं तुम खाते नहीं सब अब क्या है संकुचित हो क्यों बोलो लक्ष्मण इन पेड़ों में है प्रेम भरा लो एक बार बोलो लक्ष्मण आज्ञा मानी लक्ष्मण ने बेर ले लिया एक आंख बचाकर राम की पीछे को दिया पैक पीछे को फेंकू तो दिया मगर दिल में कुछ खटका बना रहा अंतर्यामी की आंखों से यह भेद भला कब छुपा रहा था गाड़ी आवेगी वह दूनागिरी पर जाकर गिरा श्री रामचंद्र की चाल से संजीवना उसने हुई पैदा जब लक्ष्मण के शक्ति लगी थी तो हनुमान और आए थे तब इसी बेर की बूटी ने लक्ष्मण के प्राण बचाए थे जो भी हो यही कहेंगे हम के भाव यहां का ऊंचा है लिखनी हमारी नीति है भक्ति का दर्जा ऊंचा है तो इस तरह सभी को आना है और भगवान श्री राम कि जो सामाजिकता थी जो कहते थे पहले समाज में अस्पृश्यता व्याप्त थी लेकिन उसका खंडन किया था निषादराज को और सभी को मकर राशि मित्रता की थी और तबियत पधारे थे भक्ति का सिला दिया था ठीक है और समाज में प्रतिष्ठा बढ़ाई थी तो इस प्रकार जी अच्छा ज्ञान है धन्यवाद जय श्री राम

shabri ne ramayana me ram ji ko kya khilaya tha yah prashna hai yah bahut charchit aur prasiddh aakhyan hai ki matang rishi ki shiksha sabzi ko unke guru hue nimta girish ji ne yah ashwasan diya tha ki tum kisi kuttiya me hamesha rehna bhagwan ki bhakti karna aur shri ram ji swayam aakar aapko darshan nahi hai bhagwan aur aadmi ko bhagwan par jana padta hai lekin aapke kuttiya me bhagwan swayam aayenge ya krishna guru ne diya tha aur gurutvaakarshan ka maan karke vaah nitya bhagwan ka dhyan karte the aur rasta bokhra karti thi ki shri ram ji aayenge shabri sanware rasta aayenge shri ram ji toh aur jo bhagwan jab shyam sundar ki khoj me prashasan pahuche the jinhone desh me uplabdh fal unko prastut kiya tha bhagwan shriram me bade chav se ber khaye the aur laxmi ji ne nahi khaye the unko yah tha ki ek toh kshatriya aur vaah sabri bhil jati ki thi bhilni thi aur bade pyar se use bhagwan ber khilaye the toh bhagwan ka chav se khate the yah golu ke juthe ber khati thi niche juber hote the unhi deshon ko sankalit karti thi katte walon ko nahi lagta tha usme sabhi ne bhagwan ko ber khilaye the is prashna ko zara kavita me suniye anand lijiye ab ek kavi ki vaah kehte hain hum gaay khate khate lakshman se bole kyon raghurai lakshman tumne khaya hi nahi dekho toh kaisa meetha hai paatal se lekar swarg talaq jo bhi hai isse fika hai tumne bhi bahut khilaye hain unse zyada anand nahi iske aage sita ji ka prasad bhojan bhi pasand nahi tum khate nahi sab ab kya hai sankuchit ho kyon bolo lakshman in pedon me hai prem bhara lo ek baar bolo lakshman aagya maani lakshman ne ber le liya ek aankh bachakar ram ki peeche ko diya pack peeche ko feku toh diya magar dil me kuch khatkaa bana raha antaryami ki aakhon se yah bhed bhala kab chupa raha tha gaadi avegi vaah dunagiri par jaakar gira shri ramachandra ki chaal se sanjivana usne hui paida jab lakshman ke shakti lagi thi toh hanuman aur aaye the tab isi ber ki buti ne lakshman ke praan bachaye the jo bhi ho yahi kahenge hum ke bhav yahan ka uncha hai likhani hamari niti hai bhakti ka darja uncha hai toh is tarah sabhi ko aana hai aur bhagwan shri ram ki jo samajikta thi jo kehte the pehle samaj me asprishyata vyapt thi lekin uska khandan kiya tha nishadraj ko aur sabhi ko makar rashi mitrata ki thi aur tabiyat padhare the bhakti ka sila diya tha theek hai aur samaj me prathishtha badhai thi toh is prakar ji accha gyaan hai dhanyavad jai shri ram

शबरी ने रामायण में राम जी को क्या खिलाया था यह प्रश्न है यह बहुत चर्चित और प्रसिद्ध आख्य

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Neelima Sharma

life skills & soft skills trainer

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जय श्री राम आपका सवाल है शबरी ने रामायण में राम को क्या खिलाया था तो माता शबरी ने रामायण में श्री राम को बेर खिलाए थे और वह भी कहा जाता है कि झूठे बेर खिलाए थे तो एक-एक जूठे बेर का आशय कुछ और ही था इस माता शबरी का प्रेमभाव कुछ और ही था वह झूठे बेर खिलाए थे उन्होंने कि वह नहीं चाहती थी कि उनके प्रभु श्री राम जी को जुबेर खिला रही है तो कोई खट्टा या कच्चा भी अब जाए इसलिए उन्होंने सारी बेरोक उत्तक चक्कर मीठे बेर खिलाए उस समय उन्हें यह होश नहीं था प्रभु के प्रेम के बस में हो इतनी थी सिर्फ उन्हें यह ध्यान था कि मैं प्रभु को मीठे बेर खिला हूं झूठे या यह सब चीज उनके दिमाग में नहीं था इसलिए माता शबरी ने प्रभु श्री राम को सारे भेज चेक चक्कर खिलाई मीठे-मीठे जो के लक्ष्मण जी को अच्छा नहीं लगा और उन्होंने खाए नहीं थे बल्कि श्री राम जी ने कहा भी था कि लक्ष्मण तुम भी खाओ कितने मीठे बेर है पर लक्ष्मण जी का ध्यान इस पर था कि वह झूठे पर प्रभु श्री राम जी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया उन्होंने सिर्फ माता शबरी का भाव देखा उनका प्रेम देखा और बड़े ही प्रेम से उन वीरों को खाया धन्यवाद आपका दिन शुभ हो

jai shri ram aapka sawaal hai shabri ne ramayana me ram ko kya khilaya tha toh mata shabri ne ramayana me shri ram ko ber khilaye the aur vaah bhi kaha jata hai ki jhuthe ber khilaye the toh ek ek juthe ber ka aashay kuch aur hi tha is mata shabri ka premabhav kuch aur hi tha vaah jhuthe ber khilaye the unhone ki vaah nahi chahti thi ki unke prabhu shri ram ji ko juber khila rahi hai toh koi khatta ya kaccha bhi ab jaaye isliye unhone saari berok uttak chakkar meethe ber khilaye us samay unhe yah hosh nahi tha prabhu ke prem ke bus me ho itni thi sirf unhe yah dhyan tha ki main prabhu ko meethe ber khila hoon jhuthe ya yah sab cheez unke dimag me nahi tha isliye mata shabri ne prabhu shri ram ko saare bhej check chakkar khilai meethe meethe jo ke lakshman ji ko accha nahi laga aur unhone khaye nahi the balki shri ram ji ne kaha bhi tha ki lakshman tum bhi khao kitne meethe ber hai par lakshman ji ka dhyan is par tha ki vaah jhuthe par prabhu shri ram ji ne is aur dhyan nahi diya unhone sirf mata shabri ka bhav dekha unka prem dekha aur bade hi prem se un veero ko khaya dhanyavad aapka din shubha ho

जय श्री राम आपका सवाल है शबरी ने रामायण में राम को क्या खिलाया था तो माता शबरी ने रामायण म

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Parv

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शबरी ने रामायण में राम को झूठे बेर की खिलाई थी और वह चुप थे इसलिए नहीं थी कि वह को झूठे खिलाना चाहती थी वह उसने झूठे इसलिए किए थे कि उसने पहले हर एक बेर को चेक किया था कि यह मीठा है या नहीं और चेक करके ही उसने राम को सिर्फ मीठे मीठे जो गेट थे वही खिलाई थी धन्यवाद

shabri ne ramayana me ram ko jhuthe ber ki khilai thi aur vaah chup the isliye nahi thi ki vaah ko jhuthe khilana chahti thi vaah usne jhuthe isliye kiye the ki usne pehle har ek ber ko check kiya tha ki yah meetha hai ya nahi aur check karke hi usne ram ko sirf meethe meethe jo gate the wahi khilai thi dhanyavad

शबरी ने रामायण में राम को झूठे बेर की खिलाई थी और वह चुप थे इसलिए नहीं थी कि वह को झूठे खि

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शबरी ने रामायण में राम को बेल खिलाया था शबरी ने रामायण में राम को बेल खिलाया था

shabri ne ramayana me ram ko bell khilaya tha shabri ne ramayana me ram ko bell khilaya tha

शबरी ने रामायण में राम को बेल खिलाया था शबरी ने रामायण में राम को बेल खिलाया था

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शबरी ने रामायण में राम को शाम को झूठे बेर खिलाए थे

shabri ne ramayana me ram ko shaam ko jhuthe ber khilaye the

शबरी ने रामायण में राम को शाम को झूठे बेर खिलाए थे

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