जब चीन भारत को तबाह करना चाहते थे तो मोदी जी की चीन से भी मुलाकात करने जाते थे इसका जवाब दीजिए?...


user

Prabhakar Tiwari

National Trainer,Motivational Speaker, Social Activist

0:41
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न है कि जब चीन भारत को तबाह करना चाहता था तो मोदी जी की चीन से भी मुलाकात करने क्यों जाते थे इसका जवाब दीजिए तो देखी जवाब राजनीति में रहता है तो आपको दुश्मन क्या भी जाना होता है दोस्त भी जाना होता है और हर आदमी को दिखाना पड़ता है कि हमारी उनसे संबंध हमारे बहुत ही अच्छे हैं क्योंकि हमारे देश में बहुत बड़ा व्यापार करता है चीन से बड़ा व्यापारिक संबंध है और हम लोग चीन से कई चीजें आयात और निर्यात करते हैं इसलिए मोदी जी का जाना केवल एक दिखावा था उनका चीन से लगाओ नहीं है

aapka prashna hai ki jab china bharat ko tabah karna chahta tha toh modi ji ki china se bhi mulakat karne kyon jaate the iska jawab dijiye toh dekhi jawab raajneeti me rehta hai toh aapko dushman kya bhi jana hota hai dost bhi jana hota hai aur har aadmi ko dikhana padta hai ki hamari unse sambandh hamare bahut hi acche hain kyonki hamare desh me bahut bada vyapar karta hai china se bada vyaparik sambandh hai aur hum log china se kai cheezen ayat aur niryat karte hain isliye modi ji ka jana keval ek dikhawa tha unka china se lagao nahi hai

आपका प्रश्न है कि जब चीन भारत को तबाह करना चाहता था तो मोदी जी की चीन से भी मुलाकात करने क

Romanized Version
Likes  68  Dislikes    views  777
WhatsApp_icon
30 जवाब
qIcon
ask
ऐसे और सवाल
Loading...
Loading...
user

Yogesh Kumar

Politician

1:57
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

विश्व के बदलते हुए दौर में अगर हमारी किसी देश से दुश्मनी भी होती है तो उसको कूटनीति के तहत किया जाता है जैसे भारत में सरकार का भीतर से जिसको सहयोग रहता है कि चीनी सामान के खिलाफ आंदोलन लगातार चलता है यानी चाइना का सामान हम यूज ना करें तो हमारा देश का पैसा देश में रहेगा इसी प्रकार भारत के जो आया तो निर्यात है जिसमें भारत का कारखानों का बना हुआ माल दूसरे देशों में बिकता है यानी कि हर देश ने दूसरे देश से और आपस में एग्रीमेंट किए हुए हैं कि आप हमारे हमारे सकते हैं हम आपके हैं माल भेज सकते हैं तो इसमें कुछ हमारा सामान भी है जो चाइना में बिकता है ऐसे में बिल्कुल संबंध ख़त्म कर लिए जाएंगे तो कुछ हमारी जरूरत है प्रभावित होंगी कुछ हमारा सामान जो वहां बिकता है उनकी रोजगार की समस्या भी उत्पन्न हो जाएगी इसलिए कूटने कूटनीतिक कारणों से देश में एक दूसरे से मिलते हैं ऐसे विश्व में अनेक देशों के अनेक उदाहरण हैं जिनकी आपस में तनाव है लेकिन व्यापारिक कारणों से अपने देश के आर्थिक कारणों से वह एक दूसरे से मिलते हैं मजबूरी में लेकिन देश भक्ति हमेशा उनके प्रति जागरूक सजग और देशभक्त ही रहते हैं हमें तक की दृष्टि से नहीं बल्कि अपनी जरूरतों और अपनी मजबूरियों के तहत इस विषय को देखना चाहिए

vishwa ke badalte hue daur me agar hamari kisi desh se dushmani bhi hoti hai toh usko kootneeti ke tahat kiya jata hai jaise bharat me sarkar ka bheetar se jisko sahyog rehta hai ki chini saamaan ke khilaf andolan lagatar chalta hai yani china ka saamaan hum use na kare toh hamara desh ka paisa desh me rahega isi prakar bharat ke jo aaya toh niryat hai jisme bharat ka karkhanon ka bana hua maal dusre deshon me bikta hai yani ki har desh ne dusre desh se aur aapas me Agreement kiye hue hain ki aap hamare hamare sakte hain hum aapke hain maal bhej sakte hain toh isme kuch hamara saamaan bhi hai jo china me bikta hai aise me bilkul sambandh khatam kar liye jaenge toh kuch hamari zarurat hai prabhavit hongi kuch hamara saamaan jo wahan bikta hai unki rojgar ki samasya bhi utpann ho jayegi isliye kootne kutanitik karanon se desh me ek dusre se milte hain aise vishwa me anek deshon ke anek udaharan hain jinki aapas me tanaav hai lekin vyaparik karanon se apne desh ke aarthik karanon se vaah ek dusre se milte hain majburi me lekin desh bhakti hamesha unke prati jagruk sajag aur deshbhakt hi rehte hain hamein tak ki drishti se nahi balki apni jaruraton aur apni majburiya ke tahat is vishay ko dekhna chahiye

विश्व के बदलते हुए दौर में अगर हमारी किसी देश से दुश्मनी भी होती है तो उसको कूटनीति के तहत

Romanized Version
Likes  46  Dislikes    views  601
WhatsApp_icon
user

Pradeep Dubey

Career Counsellor

10:00
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

दोस्तों चीन भारत को तबाह करना चाहता है वह मोदी जी चीन से मुलाकात करने क्यों जाते थे हमारा विश्व विभिन्न रास्तों से भरा पड़ा है जहां तक चीन और भारत की बात है तो यह दोनों देश एशिया के सबसे बड़े देश विश्व की जोटा 5 या 5 बड़ी अर्थव्यवस्था है उनमें चीन भी है और भारत भी शामिल दोनों देशों के बीच आज से नहीं बल्कि प्राचीन काल से घनिष्ठ व्यापारिक सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध है आपको याद होगा बुद्ध के काल में और उसके पश्चात सम्राट अशोक के द्वार बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए चीन बौद्ध भिक्षु भेजे गए थे आपको यह भी याद होगा या इतिहास में आपने विद्यालय शिक्षा के दौरान पड़ा होगा कि भारत में वेनसांत सिंह फाह्यान जैसे अनेक चीनी यात्री जो बौद्ध भिक्षु थे वह भी आए थे उनके साथ अनेक व्यापारी मंडल भी होते थे जो भारत के प्राचीन शास्त्रों के विभिन्न राज दरबार में पहुंचते थे सामाजिक सांस्कृतिक आदान-प्रदान करते थे व्यापार करते थे यह सिलसिला पहले दौर में काफी धीमा हुआ करता था इसका कारण यह था कि उस समय परिवहन के साधन इतनी एडवांस नहीं थे जितने कि आज है पैदल यात्राएं होती थी घुड़सवार ओं द्वारा यात्राएं और आप जानते हैं कि भारत और चीन के बीच हिमालय की जो पर्वती संकला है वह दोनों देशों के आवागमन में उस समय कितनी बड़ी जटिल और कठिन आपदा होती थी या एक चुनौती होती थी बावजूद इसके दोनों देशों में व्यापार होता था यह सिलसिला हमेशा चलता रहा है चीन से होकर रेशम मार्ग यूरोप तक जाता था उस मार्ग से भारत भी जुड़ा हुआ था एक बात हम बताते हैं एक बड़े ही इंटरेस्टिंग और रुचिकर आपको तथ्य बताना चाहूंगा पहली शताब्दी ईस्वी में भारत में कुषाण वंश का शासन था कनिष्का उस समय भारत के सम्राट चीन की राजधानी उस समय पेशाब भारत के इतिहास में भारत का एकमात्र शासक ऐसा हुआ है जिसमें चीन पर आक्रमण किया था इनका जो पश्चिमी भाग है जहां पर आज शिंजियांग प्रांत है उस क्षेत्र में एक काश वियर यार कंद और खोता नमक बड़े शहर भी हैं इस क्षेत्र को कनिष्क ने अपनी जीत लिया था युद्ध के द्वारा और इस क्षेत्र पर जो रेशम मार्ग पर अपना नियंत्रण स्थापित किया था इससे भारत को बहुत अत्यधिक आर्थिक फायदा हुआ बहुत आपको याद होगा कि जब इतिहास में आ पुस्तकें पड़ेंगे तो आप पाएंगे कि कनिष्क और कुषाण काल में भारत में सर्वाधिक शुद्ध सोने के सिक्के मिलते हैं इसका कारण यह था कि भारत चीन द्वारा विकसित किए गए रेशम मार्ग से जुड़ गया था और उसके एक मार्ग पर कनिष्क ने आक्रमण करके नियंत्रण स्थापित कर लिया था और यूरोप से अपने आपको संबंध कर लिया था तो यह परंपरा चलती आई है पहले से ही लेकिन 88 19वीं शताब्दी में जब भारत ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन में था ठीक उसी समय भारत में चीन में भी आपने देखा होगा कि चीन में भी ब्रिटेन फ्रांस जापान अमेरिका जर्मनी ने चीन के विभिन्न हिस्सों को व्यापारिक रिश्तो के माध्यम से एक तरबूज के रूप में बांट लिया था अलग-अलग देशों का चीन फ्रांस जर्मनी इन सभी देशों का अमेरिका और जापान बाद में जुड़े लेकिन उन्होंने सचिन का बंटवारा कर लिया और चीन का आर्थिक शोषण शुरू हुआ यह बात शुरू होती है अफीम युद्ध से 18 से 40 के आसपास से उसके बाद भारत सहित तीन भी ऐसे उपनिवेश का शिकार हो गया यह क्रम चलता रहा भारत में जहां स्वतंत्रता संघर्ष चल रहा था वही चीन में भी चीन में भी उसी समय चीन में उस समय आपका वहां पर भी राष्ट्रीय आंदोलन शुरु धीरे-धीरे वहां पर कम्युनिस्ट पार्टी का कम्युनिस्ट पार्टी का नियंत्रण स्थापित हुआ चीन पर वहां पर ग्रामीण स्तर पर संगठन बनाए गए उनको लड़ाकू युद्ध लड़ने का कौशल दिया गया प्रशिक्षण दिया गया और तमिल पार्टी चीन में एक शक्तिशाली पार्टी के रूप में उभरकर आई जैसा कि आप जानते हैं अमेरिका ब्रिटेन फ्रांस यह सभी पूंजीवादी देश है तो यह नहीं चाहते थे कि चीन में कम्युनिस्ट पार्टी का विकास हो इसलिए उन्होंने वहां के तानाशाह श्याम का इसे उनको समर्थन देना शुरू किया था उस दौरान चीन जो है चंकाई से कि क्रूर और शोषण शासक शोषित शासन के कारण वहां पर जो है तमिल पार्टी लोकप्रिय होती गई और 1949 में भारत की आजादी के 2 वर्ष बाद चीन में कम्युनिस्ट पार्टी की चीनी रिपब्लिक की स्थापना भी टीम में जो कम्युनिस्ट पार्टी है वह केवल एकमात्र पार्टी है उसने विशाल देश पर राज कर रही है 1949 से माऊ माऊ चेतन का आपने नाम सुना होगा इस पार्टी ने पूरे चीन पर अपना लो आवरण बना लिया एक तंत्र स्थापित किया और कठोर अनुशासन के द्वारा प्रेस वहां पर एक ही है जो सरकार चाहती वही प्रेस बोलती है और कठोर अनुशासन जनता द्वारा कठिन परिश्रम से आज चीन विश्व की आर्थिक शक्ति बन गया है चीन का जो कम्युनिस्ट पार्टी का रवैया है वह 1949 के पहले से ही ऑपरेशन का था जबकि भारत में लोकतंत्र की स्थापना हुई पक्ष-विपक्ष है यहां पर संसदीय कार्यप्रणाली है तो भारत के जो शासन प्रशासन है आपको बहुत लचीला और पारदर्शी नजर आता है जब चीन में ऐसा नहीं है चीन का एडमिशन भारत काफी समय से खेलता रहा है 1962 में चीन ने भारत पर आक्रमण किया था वह भारत की अनेक टेरिटरीज जो कि मैक मोहन लाइन द्वारा ब्रिटिश सरकार द्वारा निर्धारित थी और उसके पहले तिब्बत के द्वारा हमारी जो संध्या थी उनके द्वारा निर्धारित थी उसने उनको नहीं माना और भारत पर आक्रमण किया चीन एक ऐसा विश्व का देश है जिसका लगभग अपने 16 देशों से जो कि उसके सीमावर्ती देश है सबसे सीमा का विवाद चल रहा है लेकिन इसका का यह नहीं हो सकता कि सीमा विवाद अलग चीज है लेकिन व्यापार वाणिज्य अलग चीज है हम दोनों चीजों पर अलग-अलग सेक्टर में काम करते हैं भारत का परंपरागत रुप पाकिस्तान है लेकिन कुछ समय पहले तक उससे भी हमारे व्यापारिक संबंध थी और तनाव भी था सीमा विवाद भी था तस्वीर विश्व था इसी प्रकार से अनेक देशों में आपसी मतभेद होते हैं लेकिन इसके बावजूद स्पाइडर व्यापार-व्यवसाय वाणिज्य जारी रहता है आर्थिक विकास सभी देशों की अर्थव्यवस्था के लिए वहां के लोगों के जीवन के लिए रोजगार के लिए अपरिहार्य होता है अतः सभी देश व्यापार वाणिज्य को भी प्रोत्साहित भारत के पहले मोदी जी के पहले भी अनेक भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई जी राजीव गांधी जी इंदिरा जी सभी लोग एवं प्रधानमंत्री हमारे पहले प्रथम प्रधानमंत्री नेहरु जी ने भी काफी प्रयास किया कि चीन से सीमा विवाद सुलझा लेकिन चीन की कम्युनिस्ट सरकार हटवा देता और अग्रेशन के कारण जो है यह नीतियां सफल नहीं हो पाए लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम उनसे संबंध खराब कर ले या संबंध विच्छेद कर लें दोनों प्रक्रिया चलनी चाहिए आर्थिक विकास दी और पांचवी इसमें शांतिपूर्ण सह अस्तित्व अति आवश्यक है जो दोनों देशों के आर्थिक सामाजिक हितों के लिए जरूरी है अतः मैं समझता हूं कि चीन और यह मोदी प्रधानमंत्री मोदी या अन्य राष्ट्र अध्यक्ष जो एक दूसरे के यहां जाते हैं आते हैं बातचीत का दौर चलता है और समस्या एक दूसरे की मजबूरियां समझते हैं कंपल्शन समझते हैं और एक दूसरे को जानते हैं और उसी के आधार पर कुछ निष्कर्ष बनाते हैं यह

doston china bharat ko tabah karna chahta hai vaah modi ji china se mulakat karne kyon jaate the hamara vishwa vibhinn raston se bhara pada hai jaha tak china aur bharat ki baat hai toh yah dono desh asia ke sabse bade desh vishwa ki jota 5 ya 5 badi arthavyavastha hai unmen china bhi hai aur bharat bhi shaamil dono deshon ke beech aaj se nahi balki prachin kaal se ghanishth vyaparik samajik aur sanskritik sambandh hai aapko yaad hoga buddha ke kaal me aur uske pashchat samrat ashok ke dwar Baudh dharm ke prachar ke liye china Baudh bhikshu bheje gaye the aapko yah bhi yaad hoga ya itihas me aapne vidyalaya shiksha ke dauran pada hoga ki bharat me vensant Singh fahyan jaise anek chini yatri jo Baudh bhikshu the vaah bhi aaye the unke saath anek vyapaari mandal bhi hote the jo bharat ke prachin shastron ke vibhinn raj darbaar me pahunchate the samajik sanskritik aadaan pradan karte the vyapar karte the yah silsila pehle daur me kaafi dheema hua karta tha iska karan yah tha ki us samay parivahan ke sadhan itni advance nahi the jitne ki aaj hai paidal yatraen hoti thi ghudsavaar on dwara yatraen aur aap jante hain ki bharat aur china ke beech himalaya ki jo parvati sankala hai vaah dono deshon ke aavagaman me us samay kitni badi jatil aur kathin aapda hoti thi ya ek chunauti hoti thi bawajud iske dono deshon me vyapar hota tha yah silsila hamesha chalta raha hai china se hokar resham marg europe tak jata tha us marg se bharat bhi juda hua tha ek baat hum batatey hain ek bade hi interesting aur ruchikar aapko tathya batana chahunga pehli shatabdi isvi me bharat me kushan vansh ka shasan tha kanishka us samay bharat ke samrat china ki rajdhani us samay peshab bharat ke itihas me bharat ka ekmatra shasak aisa hua hai jisme china par aakraman kiya tha inka jo pashchimi bhag hai jaha par aaj shinjiyang prant hai us kshetra me ek kash wear yaar kand aur khota namak bade shehar bhi hain is kshetra ko kanishk ne apni jeet liya tha yudh ke dwara aur is kshetra par jo resham marg par apna niyantran sthapit kiya tha isse bharat ko bahut atyadhik aarthik fayda hua bahut aapko yaad hoga ki jab itihas me aa pustakein padenge toh aap payenge ki kanishk aur kushan kaal me bharat me sarvadhik shudh sone ke sikke milte hain iska karan yah tha ki bharat china dwara viksit kiye gaye resham marg se jud gaya tha aur uske ek marg par kanishk ne aakraman karke niyantran sthapit kar liya tha aur europe se apne aapko sambandh kar liya tha toh yah parampara chalti I hai pehle se hi lekin 88 vi shatabdi me jab bharat british aupniweshik shasan me tha theek usi samay bharat me china me bhi aapne dekha hoga ki china me bhi britain france japan america germany ne china ke vibhinn hisson ko vyaparik rishto ke madhyam se ek tarabuj ke roop me baant liya tha alag alag deshon ka china france germany in sabhi deshon ka america aur japan baad me jude lekin unhone sachin ka batwara kar liya aur china ka aarthik shoshan shuru hua yah baat shuru hoti hai afeem yudh se 18 se 40 ke aaspass se uske baad bharat sahit teen bhi aise upnivesh ka shikaar ho gaya yah kram chalta raha bharat me jaha swatantrata sangharsh chal raha tha wahi china me bhi china me bhi usi samay china me us samay aapka wahan par bhi rashtriya andolan shuru dhire dhire wahan par communist party ka communist party ka niyantran sthapit hua china par wahan par gramin sthar par sangathan banaye gaye unko ladaku yudh ladane ka kaushal diya gaya prashikshan diya gaya aur tamil party china me ek shaktishali party ke roop me ubharakar I jaisa ki aap jante hain america britain france yah sabhi punjiwadi desh hai toh yah nahi chahte the ki china me communist party ka vikas ho isliye unhone wahan ke tanashah shyam ka ise unko samarthan dena shuru kiya tha us dauran china jo hai chankai se ki krur aur shoshan shasak shoshit shasan ke karan wahan par jo hai tamil party lokpriya hoti gayi aur 1949 me bharat ki azadi ke 2 varsh baad china me communist party ki chini Republic ki sthapna bhi team me jo communist party hai vaah keval ekmatra party hai usne vishal desh par raj kar rahi hai 1949 se maoo maoo chetan ka aapne naam suna hoga is party ne poore china par apna lo aavaran bana liya ek tantra sthapit kiya aur kathor anushasan ke dwara press wahan par ek hi hai jo sarkar chahti wahi press bolti hai aur kathor anushasan janta dwara kathin parishram se aaj china vishwa ki aarthik shakti ban gaya hai china ka jo communist party ka ravaiya hai vaah 1949 ke pehle se hi operation ka tha jabki bharat me loktantra ki sthapna hui paksh vipaksh hai yahan par sansadiya Karya Pranali hai toh bharat ke jo shasan prashasan hai aapko bahut lachila aur pardarshi nazar aata hai jab china me aisa nahi hai china ka admission bharat kaafi samay se khelta raha hai 1962 me china ne bharat par aakraman kiya tha vaah bharat ki anek teritrij jo ki mac mohan line dwara british sarkar dwara nirdharit thi aur uske pehle tibet ke dwara hamari jo sandhya thi unke dwara nirdharit thi usne unko nahi mana aur bharat par aakraman kiya china ek aisa vishwa ka desh hai jiska lagbhag apne 16 deshon se jo ki uske seemavarti desh hai sabse seema ka vivaad chal raha hai lekin iska ka yah nahi ho sakta ki seema vivaad alag cheez hai lekin vyapar wanijya alag cheez hai hum dono chijon par alag alag sector me kaam karte hain bharat ka paramparagat roop pakistan hai lekin kuch samay pehle tak usse bhi hamare vyaparik sambandh thi aur tanaav bhi tha seema vivaad bhi tha tasveer vishwa tha isi prakar se anek deshon me aapasi matbhed hote hain lekin iske bawajud SPYDER vyapar vyavasaya wanijya jaari rehta hai aarthik vikas sabhi deshon ki arthavyavastha ke liye wahan ke logo ke jeevan ke liye rojgar ke liye apariharya hota hai atah sabhi desh vyapar wanijya ko bhi protsahit bharat ke pehle modi ji ke pehle bhi anek bharat ke pradhanmantri atal bihari vajpayee ji rajeev gandhi ji indira ji sabhi log evam pradhanmantri hamare pehle pratham pradhanmantri nehru ji ne bhi kaafi prayas kiya ki china se seema vivaad suljha lekin china ki communist sarkar hatva deta aur aggression ke karan jo hai yah nitiyan safal nahi ho paye lekin iska matlab yah nahi hai ki hum unse sambandh kharab kar le ya sambandh vichched kar le dono prakriya chalni chahiye aarthik vikas di aur paanchvi isme shantipurna sah astitva ati aavashyak hai jo dono deshon ke aarthik samajik hiton ke liye zaroori hai atah main samajhata hoon ki china aur yah modi pradhanmantri modi ya anya rashtra adhyaksh jo ek dusre ke yahan jaate hain aate hain batchit ka daur chalta hai aur samasya ek dusre ki majabooriyan samajhte hain compulsion samajhte hain aur ek dusre ko jante hain aur usi ke aadhar par kuch nishkarsh banate hain yah

दोस्तों चीन भारत को तबाह करना चाहता है वह मोदी जी चीन से मुलाकात करने क्यों जाते थे हमारा

Romanized Version
Likes  3  Dislikes    views  121
WhatsApp_icon
user
1:15
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए यह चीज कहीं रिटर्न में नहीं आई है अब तक के चीन भारत को तबाह करना चाहता है हां यह जो किसी हर स्टेट की पॉलिसी होती हैं अब हिरण पॉलिसी हमारे भी स्टेट की कहीं न कहीं किसी राज्य को किसी देश को किसी यूनाइटेड के जो मेंबर हैं उन को हानि पहुंचाने की रही होगी क्योंकि एक दूसरे को यह पॉलिसी होती हैं अपने-अपने जो पॉलिटिक्स स्टाइलिश करने के लिए या इकोनामिक ग्रोथ करने के लिए एक दूसरे राज्य को दूसरे देश को में यह मेरा यहां राज्य से तात्पर्य इंटरनेशनल लेवल पर एक देश से है कंट्री से तो ऐसा नहीं है कि चीन ने चीन जो चाहेगा कि भारत को समाप्त कर देगा या भारत को हानि पहुंचा देगा क्योंकि चीन कोई ज्यादा नहीं है भारत के सामने भारत एक सुरक्षित हाथों में है आपको सोचने की याद करने की जरूरत नहीं है लेकिन हां एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते किसी भी वाहक रमणिया परिस्थितियों के लिए देश सेवा के लिए तैयार रहो ऐसी कोई स्थिति नहीं है कि चीन जो भारत को तबाह कर देगा क्योंकि भारत और शिक्षा में भारत विश्व शक्ति बनने की राह पर कोई दिक्कत नहीं

dekhiye yah cheez kahin return me nahi I hai ab tak ke china bharat ko tabah karna chahta hai haan yah jo kisi har state ki policy hoti hain ab hiran policy hamare bhi state ki kahin na kahin kisi rajya ko kisi desh ko kisi united ke jo member hain un ko hani pahunchane ki rahi hogi kyonki ek dusre ko yah policy hoti hain apne apne jo politics stylish karne ke liye ya economic growth karne ke liye ek dusre rajya ko dusre desh ko me yah mera yahan rajya se tatparya international level par ek desh se hai country se toh aisa nahi hai ki china ne china jo chahega ki bharat ko samapt kar dega ya bharat ko hani pohcha dega kyonki china koi zyada nahi hai bharat ke saamne bharat ek surakshit hathon me hai aapko sochne ki yaad karne ki zarurat nahi hai lekin haan ek zimmedar nagarik hone ke naate kisi bhi vahak ramniya paristhitiyon ke liye desh seva ke liye taiyar raho aisi koi sthiti nahi hai ki china jo bharat ko tabah kar dega kyonki bharat aur shiksha me bharat vishwa shakti banne ki raah par koi dikkat nahi

देखिए यह चीज कहीं रिटर्न में नहीं आई है अब तक के चीन भारत को तबाह करना चाहता है हां यह जो

Romanized Version
Likes  28  Dislikes    views  1852
WhatsApp_icon
user

DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

2:30
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लेकिन भारत को तबाह करना चाहते थे तो मोदी जी की चीन से भी मुलाकात करने जाते थे क्यों जाते थे तो मोदी जी से पूछे बिना मोदी जी के पास इतना विवेक कहां है मेरे खुला चैलेंज करता हूं उनके पास नानी जी है ना बुझे ना विवेक है एक तरफ अमेरिका जाते हैं दूसरी तरफ चीन जाते हैं जिससे सब रसिया जाते तो चित्र पाकिस्तान जाकर अपना दोस्त बना लोगे तो दुश्मनों का नाश होता है और कितनी क्या होती है कांग्रेसियों ने कहा था चीन कभी अमेरिका अमेरिका चीन कभी अपना नहीं हो सकता लेकिन मोदी जी उनके चरणों में जाके पड़े अमेरिका जी के चरणों में जाकर पड़े तुमसे दोस्ती की आज कंपनी चाइना ने भारत को कहां पहुंचा दी है यह मोदी जी के समझ में नहीं आ सकता काश छोटी प्रदेश कहां होता राजनीत मिथुन सुपरस्टार हो सकते हो लेकिन जन्नत में नहीं अरे भाई सीधी सी बात है 22:00 तक आपके यहां ग्रेजुएशन की कॉपी जांच आए तो क्या होगा कुछ नहीं जानता ही नहीं गिरी मिशन क्या होता है तो कॉपी जांच ना तो घोर अन्याय कोई हमारे देश में है मोदी जी की कुशलता प्रधानमंत्री बनाया उन्हें दिल से मारना चाहिए कि जो योग्यता मेरे पास नहीं है उन योद्धाओं को मृत्यु से योग व्यक्तियों से चला कानून अपना कलाकार मांग उचित सलाह करके मैं ले लूं और जो भी मैं तेनू से जनता को सरकार राज करती खुद अपने आप को भगवान बन गए भगवान बन के सारे कृष्णा जी अरे भाई मैं प्रजापत रहा हूं 45 साल मैंने जिंदगी के लगाई पढ़ाई में लेकिन सभी बच्चों का ज्ञाता आदमी नहीं तुम किन विषयों का मैंने दिन नहीं किया उन बच्चों को पढ़ा नहीं सकता हूं तो राजनीति क्या करूंगा हंसी खेल नहीं है रागिनी और सास का दिन करने वाला गाना क्या होता है केवल 7 की गले में फंदा टांग लेने चुके शास्त्री नहीं हो जाता

lekin bharat ko tabah karna chahte the toh modi ji ki china se bhi mulakat karne jaate the kyon jaate the toh modi ji se pooche bina modi ji ke paas itna vivek kaha hai mere khula challenge karta hoon unke paas naani ji hai na bujhe na vivek hai ek taraf america jaate hain dusri taraf china jaate hain jisse sab rasiya jaate toh chitra pakistan jaakar apna dost bana loge toh dushmano ka naash hota hai aur kitni kya hoti hai congressiyo ne kaha tha china kabhi america america china kabhi apna nahi ho sakta lekin modi ji unke charno me jake pade america ji ke charno me jaakar pade tumse dosti ki aaj company china ne bharat ko kaha pohcha di hai yah modi ji ke samajh me nahi aa sakta kash choti pradesh kaha hota rajanit maithun superstar ho sakte ho lekin jannat me nahi are bhai seedhi si baat hai 22 00 tak aapke yahan graduation ki copy jaanch aaye toh kya hoga kuch nahi jaanta hi nahi giri mission kya hota hai toh copy jaanch na toh ghor anyay koi hamare desh me hai modi ji ki kushalata pradhanmantri banaya unhe dil se marna chahiye ki jo yogyata mere paas nahi hai un yoddhaon ko mrityu se yog vyaktiyon se chala kanoon apna kalakar maang uchit salah karke main le loon aur jo bhi main tenu se janta ko sarkar raj karti khud apne aap ko bhagwan ban gaye bhagwan ban ke saare krishna ji are bhai main prajapat raha hoon 45 saal maine zindagi ke lagayi padhai me lekin sabhi baccho ka gyaata aadmi nahi tum kin vishyon ka maine din nahi kiya un baccho ko padha nahi sakta hoon toh raajneeti kya karunga hansi khel nahi hai ragini aur saas ka din karne vala gaana kya hota hai keval 7 ki gale me fanda taang lene chuke shastri nahi ho jata

लेकिन भारत को तबाह करना चाहते थे तो मोदी जी की चीन से भी मुलाकात करने जाते थे क्यों जाते थ

Romanized Version
Likes  402  Dislikes    views  4655
WhatsApp_icon
user

Gaurav Sharma

Health Counsellor

8:13
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार आपने कहा कि जब चीन भारत को तबाह करना चाहते थे तो मोदी जी चीन से भी मुलाकात करने जाते थे इसका जवाब दीजिए देखिए दोस्ती यह एक राजनीतिक विषय है हम जिस व्यवस्था के अंतर्गत रहते हैं उसमें हम बेहद आसानी के साथ एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंच जाती है अर्थात हमारे ब्राह्मण का दायरा हमारे संपर्क का दायरा बेहद दादा विस्तृत हो चुका है मात्र यहां हमारे देश की बात ही नहीं होती बल्कि हमें यह भी देखना होता है कि हमारे आस पड़ोस से हमारे संबंध कहते हैं हमारे घर में यदि एक व्यक्ति हमें नुकसान पहुंचाना चाहता है तो निश्चित तौर पर हम उस व्यक्ति से अपना व्यवहार कम कर देते हैं अथवा उस व्यक्ति से कुछ दूरी बना लेते हैं लेकिन उपरोक्त व्यक्ति से संबंध विकसित की जहां बात आती है तो ऐसा करने में हमें समय लगता है ठीक ऐसा ही किसी दूसरे देश के ऊपर निर्भर करता है अथवा पाकिस्तान आदि की बात करें जो कि हमें नुकसान पहुंचाना चाहते हैं अथवा प्रत्यक्ष तौर पर हमें नुकसान पहुंचा रहे हम तब भी उन्हें विश्व के पटल से नजरअंदाज नहीं कर सकते दुनिया को दिखाने के लिए हमें जो है यही दिखाना होगा कि हम उनसे बेहतर संबंध की इच्छा रखते हैं और वास्तव में भारत संपूर्ण विश्व में एकमात्र ऐसा देश है जो किसी के साथ सकारात्मक प्रतिस्पर्धा में तो विश्वास रखता है लेकिन अनैतिक प्रतिस्पर्धा में कभी विश्वास नहीं रखता और या फिर आप इसे यूं भी कह सकते हैं कि भारत किसी के साथ प्रतिस्पर्धा करता हुआ नहीं दिखता लेकिन विश्व के अनेक ऐसे देश हैं जो हमारे देश के साथ प्रतिस्पर्धात्मक व्यवहार करते और जहां तक आप चीन की बात करते तो चीन पूरी दुनिया जानती है कि चीन अपनी जमीन को सदैव बढ़ाने में प्रयासरत रहता है चीन हमेशा अपनी जगह को बनवाना चाहता है दूसरों के स्थानों को हथियाना चाहता है यह चीन की एक पॉलिसी है जिसके तहत रहे अपने आवाम का संरक्षण करता है चीन को यह नीति अच्छी लगती है वह इस नीति को सपोर्ट करता है लेकिन भारत सदैव सकारात्मक व्यवहार की ओर दृष्टि का रहता है भारत तथा सकारात्मक व्यवहार को करना चाहता है यही कारण है कि हम अपना पूरा करने के बाद भी हम यही कोशिश करते हैं कि सामने वाले के संबंध हमसे और यह क्वेश्चन तब तक करते रहते हैं जब तक सामने वाला पूर्ण रूप से लड़ने के लिए हमारे सामने खड़ा नहीं हो जाए और यह केवल आज की बात नहीं है आप मोदी जी के बेटे में बात कर रहे हैं लेकिन अगर आप मोदी जी से पहले जाएं अथवा मोदी जी के आगे भी जाएंगे तो आपको इसी प्रकार के व्यवहार मिलेंगे क्योंकि इसे राजनीति कहते हैं इसे नीति कहते हैं हम किसी के साथ स्वयं खराब व्यवहार नहीं करना चाहते ताकि हमारा समाज में अथवा दुनिया की नजर में हम अपना एक जो हमने मुकाम बनाया है या फिर दूसरों के दूसरे देशों की नजर में हमने जो अपनी एक रेपो बिल्डअप है उस रेपो को कहीं से कहीं तक कोई धक्का ना पहुंच गई आज आप देखे यह सच है कि चीन एक बहुत बड़ी अर्थव्यवस्था है और एक विकसित देशों में चीन की गिनती होती है हमारे देश की गिनती अभी भी विकासशील देशों में होती है तो हमें भी चीन की जब आवश्यकता होती है तो चीन हमें नजरअंदाज नहीं कर पाता कहीं ना कहीं किसी भी तरीके से वह हमें नुकसान पहुंचाना चाहे लेकिन फिर भी उसे हमारी मदद करनी पड़ती है समय-समय पर तू यही मदद प्राप्त करने के लिए अथवा विश्व पटल पर यह दिखाने के लिए कि हम चीन के साथ कोई दुर्व्यवहार नहीं रखते और ना ही हम चीन पर कोई आधिपत्य स्थापित करना चाहते हैं बल्कि हम चीन से दोस्ताना व मैत्री बस व्यवहार रखना चाहते हैं यह दुनिया को दिखाने हेतु हमें इस प्रकार के काम करने पड़ते हैं जैसे कि चीन ने हम पर हमला किया था उसके बाद भी नेहरू जी ने चीन को सपोर्ट किया विश्व पटल पर जिस जगह पर हम आ सकते थे उस जगह पर उन्होंने चीन को बैठा दिया तिब्बत की समस्या के लिए उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में केस किया और हमारी अपनी जमीन जो देश हमारा था अथवा जो इजीली हमारे साथ आ सकता था आज वह देश विवादों में घिर कर जिनके जुल्मों का शिकार हो रहा है यह तक मात्र इसलिए नहीं था कि हम कमजोर थे बल्कि यह कारण यह था कि हमारी नीति कुछ इस तरीके की है अथवा हमारे जो पूर्वजों को इस प्रकार का निर्धारण कर कर गए हैं इससे भी और आगे जाएं तो भगवान राम के टाइम में देखिए रावण से उन्होंने सदैव मैत्री का प्रयास किया सदैव यह प्रयास किया कि हम जाएं रावण सीता को लौटा दे और हमें युद्ध ना करना पड़े क्योंकि युद्ध केवल विनाश ही देता है और विनाश के बाद सूजन होता है यह सच है लेकिन यदि हम विनाश की विभीषिका से बचे रहें तो वह ज्यादा उत्तम होता है विनाश के बाद होने वाले विकास की अपेक्षा हर एक का यही प्रयास होता है कि हम आसानी से युद्ध जैसे स्थिति में ना आए दूसरा हम समाज अथवा दुनिया की नजर में एक महान आदर्श प्रस्तुत कर सकें जिस पर लोग आगे चलकर अपने भविष्य के लिए अपने भविष्य के लिए उन्नत अथवा आदर्श स्थिति में ले जाकर लोगों को दिखा पाए धन्यवाद

namaskar aapne kaha ki jab china bharat ko tabah karna chahte the toh modi ji china se bhi mulakat karne jaate the iska jawab dijiye dekhiye dosti yah ek raajnitik vishay hai hum jis vyavastha ke antargat rehte hain usme hum behad aasani ke saath ek jagah se dusri jagah tak pohch jaati hai arthat hamare brahman ka dayara hamare sampark ka dayara behad dada vistrit ho chuka hai matra yahan hamare desh ki baat hi nahi hoti balki hamein yah bhi dekhna hota hai ki hamare aas pados se hamare sambandh kehte hain hamare ghar me yadi ek vyakti hamein nuksan pahunchana chahta hai toh nishchit taur par hum us vyakti se apna vyavhar kam kar dete hain athva us vyakti se kuch doori bana lete hain lekin uparokt vyakti se sambandh viksit ki jaha baat aati hai toh aisa karne me hamein samay lagta hai theek aisa hi kisi dusre desh ke upar nirbhar karta hai athva pakistan aadi ki baat kare jo ki hamein nuksan pahunchana chahte hain athva pratyaksh taur par hamein nuksan pohcha rahe hum tab bhi unhe vishwa ke patal se najarandaj nahi kar sakte duniya ko dikhane ke liye hamein jo hai yahi dikhana hoga ki hum unse behtar sambandh ki iccha rakhte hain aur vaastav me bharat sampurna vishwa me ekmatra aisa desh hai jo kisi ke saath sakaratmak pratispardha me toh vishwas rakhta hai lekin anaitik pratispardha me kabhi vishwas nahi rakhta aur ya phir aap ise yun bhi keh sakte hain ki bharat kisi ke saath pratispardha karta hua nahi dikhta lekin vishwa ke anek aise desh hain jo hamare desh ke saath pratispardhatmak vyavhar karte aur jaha tak aap china ki baat karte toh china puri duniya jaanti hai ki china apni jameen ko sadaiv badhane me prayasarat rehta hai china hamesha apni jagah ko banwana chahta hai dusro ke sthano ko hathiyana chahta hai yah china ki ek policy hai jiske tahat rahe apne avam ka sanrakshan karta hai china ko yah niti achi lagti hai vaah is niti ko support karta hai lekin bharat sadaiv sakaratmak vyavhar ki aur drishti ka rehta hai bharat tatha sakaratmak vyavhar ko karna chahta hai yahi karan hai ki hum apna pura karne ke baad bhi hum yahi koshish karte hain ki saamne waale ke sambandh humse aur yah question tab tak karte rehte hain jab tak saamne vala purn roop se ladane ke liye hamare saamne khada nahi ho jaaye aur yah keval aaj ki baat nahi hai aap modi ji ke bete me baat kar rahe hain lekin agar aap modi ji se pehle jayen athva modi ji ke aage bhi jaenge toh aapko isi prakar ke vyavhar milenge kyonki ise raajneeti kehte hain ise niti kehte hain hum kisi ke saath swayam kharab vyavhar nahi karna chahte taki hamara samaj me athva duniya ki nazar me hum apna ek jo humne mukam banaya hai ya phir dusro ke dusre deshon ki nazar me humne jo apni ek repo buildup hai us repo ko kahin se kahin tak koi dhakka na pohch gayi aaj aap dekhe yah sach hai ki china ek bahut badi arthavyavastha hai aur ek viksit deshon me china ki ginti hoti hai hamare desh ki ginti abhi bhi vikasshil deshon me hoti hai toh hamein bhi china ki jab avashyakta hoti hai toh china hamein najarandaj nahi kar pata kahin na kahin kisi bhi tarike se vaah hamein nuksan pahunchana chahen lekin phir bhi use hamari madad karni padti hai samay samay par tu yahi madad prapt karne ke liye athva vishwa patal par yah dikhane ke liye ki hum china ke saath koi durvyavahar nahi rakhte aur na hi hum china par koi aadhipatya sthapit karna chahte hain balki hum china se dostana va maitri bus vyavhar rakhna chahte hain yah duniya ko dikhane hetu hamein is prakar ke kaam karne padate hain jaise ki china ne hum par hamla kiya tha uske baad bhi nehru ji ne china ko support kiya vishwa patal par jis jagah par hum aa sakte the us jagah par unhone china ko baitha diya tibet ki samasya ke liye unhone sanyukt rashtra me case kiya aur hamari apni jameen jo desh hamara tha athva jo ijili hamare saath aa sakta tha aaj vaah desh vivadon me ghir kar jinke julmon ka shikaar ho raha hai yah tak matra isliye nahi tha ki hum kamjor the balki yah karan yah tha ki hamari niti kuch is tarike ki hai athva hamare jo purvajon ko is prakar ka nirdharan kar kar gaye hain isse bhi aur aage jayen toh bhagwan ram ke time me dekhiye ravan se unhone sadaiv maitri ka prayas kiya sadaiv yah prayas kiya ki hum jayen ravan sita ko lauta de aur hamein yudh na karna pade kyonki yudh keval vinash hi deta hai aur vinash ke baad sujan hota hai yah sach hai lekin yadi hum vinash ki vibheeshika se bache rahein toh vaah zyada uttam hota hai vinash ke baad hone waale vikas ki apeksha har ek ka yahi prayas hota hai ki hum aasani se yudh jaise sthiti me na aaye doosra hum samaj athva duniya ki nazar me ek mahaan adarsh prastut kar sake jis par log aage chalkar apne bhavishya ke liye apne bhavishya ke liye unnat athva adarsh sthiti me le jaakar logo ko dikha paye dhanyavad

नमस्कार आपने कहा कि जब चीन भारत को तबाह करना चाहते थे तो मोदी जी चीन से भी मुलाकात करने जा

Romanized Version
Likes  140  Dislikes    views  2760
WhatsApp_icon
user

Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

2:41
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जब चीन भारत को तबाह करना चाहते थे तो मोदी जी की चीन से भी मुलाकात करने जाते थे इसका जवाब दीजिए लेकिन देश जितने भी हैं भारत के अलावा सब देशों से डिप्लोमेटिक रिश्ते रखना ही पड़ता है रख नहीं पड़ते हैं चाहे वह अमेरिका हो चाहे चीन हो चाहे जो विदेशों डिप्लोमेटिक रिश्ते होते हैं परस्पर एक दूसरे की जो लाभ हानि किस तरह से की जाए वह सब अपनी अपनी अपने अपने स्वास्थ्य पर उसमें भी तीन जो डिप्लोमेटिक रिश्ते रखने के बावजूद अंदर से वह भारत के लिए बुरा सोचता है और सिर्फ भारत के लिए नहीं वह पूरे विश्व के देशों के लिए बुरा होता है यह कोरोनावायरस संक्रमण खिलाने हिसाब से साबित हो चुका है और पूरे विश्व के देश अमेरिका होता है जो भी देश हैं सब उसके विरुद्ध और आने वाले समय में करो ना जब लोग पूरे विश्व के देश संभल जाएंगे उसके बाद चीन के ऊपर वहां से जितनी भी जैसों की कंपनी वह सब एक के बाद एक करके चेंज से पलायन कर लेंगे और चीन के प्रदेश में से जो जो कंपनियां व्हाट्सएप भारत से आता जरूर लगाएंगे क्योंकि भारत की आबादी 3 से भी कम ही है लेकिन मजदूरी सस्ती से जाने कि चीन के बाद भारत की मजदूरी सस्ती होने के कारण भारत में आशा देखी जाती है विश्व के दूसरे देशों के द्वारा लेकिन भारत को अलर्ट रहना चाहिए और अब फिर से आपसी संबंध में कूटनीतिक संबंध में चीन के साथ हैं उसमें एक नए सिरे से सोचने का वक्त आ गया है चाहे मोदी जी चाहे डोनाल्ड ट्रंप चाहे जो भी नेता विश्व के हैं वह सभी को चीन के बारे में जगह सोचने का ढंग से सोचने का वक्त आ गया है धन्यवाद

jab china bharat ko tabah karna chahte the toh modi ji ki china se bhi mulakat karne jaate the iska jawab dijiye lekin desh jitne bhi hain bharat ke alava sab deshon se diplometik rishte rakhna hi padta hai rakh nahi padate hain chahen vaah america ho chahen china ho chahen jo videshon diplometik rishte hote hain paraspar ek dusre ki jo labh hani kis tarah se ki jaaye vaah sab apni apni apne apne swasthya par usme bhi teen jo diplometik rishte rakhne ke bawajud andar se vaah bharat ke liye bura sochta hai aur sirf bharat ke liye nahi vaah poore vishwa ke deshon ke liye bura hota hai yah coronavirus sankraman khilane hisab se saabit ho chuka hai aur poore vishwa ke desh america hota hai jo bhi desh hain sab uske viruddh aur aane waale samay me karo na jab log poore vishwa ke desh sambhal jaenge uske baad china ke upar wahan se jitni bhi jaison ki company vaah sab ek ke baad ek karke change se palayan kar lenge aur china ke pradesh me se jo jo companiya whatsapp bharat se aata zaroor lagayenge kyonki bharat ki aabadi 3 se bhi kam hi hai lekin mazdoori sasti se jaane ki china ke baad bharat ki mazdoori sasti hone ke karan bharat me asha dekhi jaati hai vishwa ke dusre deshon ke dwara lekin bharat ko alert rehna chahiye aur ab phir se aapasi sambandh me kutanitik sambandh me china ke saath hain usme ek naye sire se sochne ka waqt aa gaya hai chahen modi ji chahen donald trump chahen jo bhi neta vishwa ke hain vaah sabhi ko china ke bare me jagah sochne ka dhang se sochne ka waqt aa gaya hai dhanyavad

जब चीन भारत को तबाह करना चाहते थे तो मोदी जी की चीन से भी मुलाकात करने जाते थे इसका जवाब द

Romanized Version
Likes  294  Dislikes    views  4118
WhatsApp_icon
user

Rakesh Tiwari

Life Coach, Management Trainer

1:02
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न है या चीन भारत को तबाह करना चाहते थे तो मोदी जी चीन से मुलाकात करने जाते थे इसका जवाब दीजिए कोई भी दे अपने देश की रणनीति है विदेश नीति है वह गुप्त रखता है चाइना भारत पर डायरेक्ट आक्रमण करने की स्थिति में है और ना ही कभी उसने इसी दृष्टिकोण से आर्थिक दृष्टिकोण से भारत पर ऐसी कोई आक्रामक नीति या वार किया पाकिस्तान को पाकिस्तान के माध्यम से उत्सर्जित करता रहता है आर्थिक निर्भरता अर्थव्यवस्था सब चीजों को देखना पड़ता है इसके अनुसार विदेश यात्राएं आयोजित की जाती है

aapka prashna hai ya china bharat ko tabah karna chahte the toh modi ji china se mulakat karne jaate the iska jawab dijiye koi bhi de apne desh ki rananiti hai videsh niti hai vaah gupt rakhta hai china bharat par direct aakraman karne ki sthiti me hai aur na hi kabhi usne isi drishtikon se aarthik drishtikon se bharat par aisi koi aakraman niti ya war kiya pakistan ko pakistan ke madhyam se utsarjit karta rehta hai aarthik nirbharta arthavyavastha sab chijon ko dekhna padta hai iske anusaar videsh yatraen ayojit ki jaati hai

आपका प्रश्न है या चीन भारत को तबाह करना चाहते थे तो मोदी जी चीन से मुलाकात करने जाते थे इस

Romanized Version
Likes  184  Dislikes    views  1275
WhatsApp_icon
user

Shishir Ghatpande

Blogger, Freelance Writer

0:51
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह भी कूटनीति का एक हिस्सा होता है और सफल राजनीति की वही होता है जो अपने देश की भलाई के लिए अपने अभिमान को अपने घरों को पीछे छोड़कर कूटनीति का सहारा ले ले कूटनीति का हिस्सा होता है चीन एक बहुत ही शक्तिशाली देश है और हमारा फौजी देश है तो इसीलिए हमें हमारे हितों की रक्षा के लिए कई बार जो है हमें पहल करनी पड़ती है हमारे देश के हितों की रक्षा के लिए कई बार बातचीत की पहल करनी पड़ती है अल्जीन करें हम करें बाकी है लेकिन इसका यदि हमारे देश के लिए कोई सकारात्मक परिणाम होता है तो हमें जो है यह हमारे देश के प्रधानमंत्री पर गर्व होना चाहिए और हमें विश्वास भरोसा रखना चाहिए

yah bhi kootneeti ka ek hissa hota hai aur safal raajneeti ki wahi hota hai jo apne desh ki bhalai ke liye apne abhimaan ko apne gharon ko peeche chhodkar kootneeti ka sahara le le kootneeti ka hissa hota hai china ek bahut hi shaktishali desh hai aur hamara fauji desh hai toh isliye hamein hamare hiton ki raksha ke liye kai baar jo hai hamein pahal karni padti hai hamare desh ke hiton ki raksha ke liye kai baar batchit ki pahal karni padti hai aljin kare hum kare baki hai lekin iska yadi hamare desh ke liye koi sakaratmak parinam hota hai toh hamein jo hai yah hamare desh ke pradhanmantri par garv hona chahiye aur hamein vishwas bharosa rakhna chahiye

यह भी कूटनीति का एक हिस्सा होता है और सफल राजनीति की वही होता है जो अपने देश की भलाई के लि

Romanized Version
Likes  5  Dislikes    views  165
WhatsApp_icon
user

Professor Sourabh Soni

Professor History( Arcelogist)

0:48
Play

Likes  38  Dislikes    views  528
WhatsApp_icon
user

Sunil Kumar

Online Business ,Newtork Marketing & You Tuber

2:23
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए आपकी बात बिल्कुल सही है अगर आंशिक रूप से कहा जाए तो चीन हमारा हमेशा से दुश्मन रहा है कूटनीतिक तौर पर सामाजिक तौर पर या फिर क्षेत्रीय भौगोलिक रूप से तो यह हमेशा दुश्मन था लेकिन हमारी जो कूटनीतिक चाल है हमारी जो कूटनीतिक नीति है भारत की वह हम दुश्मन से भी हाथ मिलाते हैं लेकिन हाथ मिलाने का मतलब यह नहीं हुआ कि हमारा दिल मिल जाए लेकिन वहीं दूसरी तरफ देखा जाए तो दुनिया भी सारे जितने देश हैं उन सभी में चाइना नंबर वन है अपने बिस्तर बाद नीति का अपना क्षेत्र विस्तार का खास करके उसके रास्ते में सबसे बड़ा तिरंगा जो है इंडिया तो इसलिए इंडिया से हमेशा वह हमेशा वही रखता है कि हम कैसे को नीचे गिरा कैसे मुझ को पीछे धकेलने इस बात को हमेशा रखता है लेकिन अब इसका मतलब यह नहीं हुआ कि हम चैन से बरेली दुश्मनी ले ले चाइना से डार्कली दुश्मनी हम नहीं ले सकते हैं ना ही हम लेना चाहते हैं और खुद आना खर्चा कर ले भी लें तो वह हमारे देश के लिए हमारे सेहत के लिए बहुत महंगा पड़ेगा इस चीज को आप समझते होंगे क्योंकि चाइना की को नौमी इंडिया की नौकरी कोनामी चाइना का डेवलपमेंट इंडिया का डिवेलप आप खुद कंपेयर कर लीजिए किसी भी सेक्टर जाकर आपको पता चल जाएगा कि हमारी स्थिति क्या है ना कि क्या लेकिन हम चैन से न तो डर की दुश्मनी मोल ले सकते हैं और ना ही उतनी ज्यादा दोस्ती करके विश्वास कर सकते हैं बस चुप फॉर्मेलिटी है कूटनीतिक चाल है और नीति हमारी नीति है वह चलते रहना चाहिए व्यापार चल रहा है चलने दीजिए कोई दिक्कत नहीं है लेकिन हमेशा वो हमें सावधान रहना चाहिए ऐसा नहीं कि चाइना के ऊपर टाइप करके या फिर उससे डर कर भी हम तक नहीं बढ़ सकते क्योंकि डरना भी अपने आप में खतरनाक होता है ना ही पैना से डरने के लिए हमारे पास ऐसा कोई हमारी कमजोरी भी है क्योंकि हम चाइना के बाद नंबर तू पल पर आते हैं और टेक्नोलॉजी में इतना भी कम नहीं है कि हम टेनस से डरने की जरूरत है तो इस चीज को ध्यान रखी है बाकी मुलाकातें बातें और कूटनीतिक चालें वह तो चलती रहेगी वह पूरे विश्व के साथ मारी भारत चलता है तो इसमें मैं मोदी जी को यह क्यों गए क्योंकि जिन पर से मिले हैं क्यों से मुलाकात की है जो उसके साथ बैठक करते हैं क्यों मिला करते हैं यह सब चीजें कोई मतलब नहीं होता है वह सारी फॉर्मेलिटी होती है कमेटी को लेकर हमें चलना पड़ता है बकरी हम किसी से दुश्मनी नहीं ले सकते हैं यह हर देश करता है हर समझदार देश करता है और इंडिया की कर रहा है तो इसमें कोई दो राय नहीं कि इंडिया बिल्कुल सही कर रहा है

dekhiye aapki baat bilkul sahi hai agar aanshik roop se kaha jaaye toh china hamara hamesha se dushman raha hai kutanitik taur par samajik taur par ya phir kshetriya bhaugolik roop se toh yah hamesha dushman tha lekin hamari jo kutanitik chaal hai hamari jo kutanitik niti hai bharat ki vaah hum dushman se bhi hath milaate hain lekin hath milaane ka matlab yah nahi hua ki hamara dil mil jaaye lekin wahi dusri taraf dekha jaaye toh duniya bhi saare jitne desh hain un sabhi me china number van hai apne bistar baad niti ka apna kshetra vistaar ka khas karke uske raste me sabse bada tiranga jo hai india toh isliye india se hamesha vaah hamesha wahi rakhta hai ki hum kaise ko niche gira kaise mujhse ko peeche dhakelane is baat ko hamesha rakhta hai lekin ab iska matlab yah nahi hua ki hum chain se bareilly dushmani le le china se darkly dushmani hum nahi le sakte hain na hi hum lena chahte hain aur khud aana kharcha kar le bhi le toh vaah hamare desh ke liye hamare sehat ke liye bahut mehnga padega is cheez ko aap samajhte honge kyonki china ki ko naumi india ki naukri konami china ka development india ka develop aap khud compare kar lijiye kisi bhi sector jaakar aapko pata chal jaega ki hamari sthiti kya hai na ki kya lekin hum chain se na toh dar ki dushmani mole le sakte hain aur na hi utani zyada dosti karke vishwas kar sakte hain bus chup formality hai kutanitik chaal hai aur niti hamari niti hai vaah chalte rehna chahiye vyapar chal raha hai chalne dijiye koi dikkat nahi hai lekin hamesha vo hamein savdhaan rehna chahiye aisa nahi ki china ke upar type karke ya phir usse dar kar bhi hum tak nahi badh sakte kyonki darna bhi apne aap me khataranaak hota hai na hi paina se darane ke liye hamare paas aisa koi hamari kamzori bhi hai kyonki hum china ke baad number tu pal par aate hain aur technology me itna bhi kam nahi hai ki hum tenas se darane ki zarurat hai toh is cheez ko dhyan rakhi hai baki mulakaten batein aur kutanitik chalen vaah toh chalti rahegi vaah poore vishwa ke saath mari bharat chalta hai toh isme main modi ji ko yah kyon gaye kyonki jin par se mile hain kyon se mulakat ki hai jo uske saath baithak karte hain kyon mila karte hain yah sab cheezen koi matlab nahi hota hai vaah saari formality hoti hai committee ko lekar hamein chalna padta hai bakri hum kisi se dushmani nahi le sakte hain yah har desh karta hai har samajhdar desh karta hai aur india ki kar raha hai toh isme koi do rai nahi ki india bilkul sahi kar raha hai

देखिए आपकी बात बिल्कुल सही है अगर आंशिक रूप से कहा जाए तो चीन हमारा हमेशा से दुश्मन रहा है

Romanized Version
Likes  25  Dislikes    views  596
WhatsApp_icon
user

Raj Yadav

Veterinary Doctor

0:34
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए कि मोदी जी चीन को तबाह करना चाहते हैं तो मुलाकात कैसे होगी जो काम देकर लड़ाई से कुछ नहीं होता है एक दूसरे का लड़ाई एक संघर्ष और इसमें दोनों का नुकसान होता है अगर जो काम प्यार से हो जाता है और उसका सलूशन प्यार से निकल जाता है इससे बढ़कर और इससे बेहतर और कुछ नहीं हो सकता इसलिए एक बार दूसरी मुलाकात भी तो नीचे और उसकी बात सुनी थी कि बात क्या है उसका सलूशन कैसे निकल सकता है

dekhiye ki modi ji china ko tabah karna chahte hain toh mulakat kaise hogi jo kaam dekar ladai se kuch nahi hota hai ek dusre ka ladai ek sangharsh aur isme dono ka nuksan hota hai agar jo kaam pyar se ho jata hai aur uska salution pyar se nikal jata hai isse badhkar aur isse behtar aur kuch nahi ho sakta isliye ek baar dusri mulakat bhi toh niche aur uski baat suni thi ki baat kya hai uska salution kaise nikal sakta hai

देखिए कि मोदी जी चीन को तबाह करना चाहते हैं तो मुलाकात कैसे होगी जो काम देकर लड़ाई से कुछ

Romanized Version
Likes  580  Dislikes    views  2766
WhatsApp_icon
user

Pankaj Vasuja

Cinematographer

0:50
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

चीन भारत को तबाह करना चाहते हैं तो मोदी जी से मुलाकात बहुत बढ़िया बादी शकीरा हुआ हिंदुस्तान जिस के प्रधानमंत्री मोदी जी हैं वह चाइना एक सुपर पावर जिसका ऑलमोस्ट बिजनेस बना सकते हैं इंडिया में बहुत बिजनेस चाइना का फैला हुआ व्यापार सिलसिले में उसने में प्रधानमंत्री आपस में मिलते रहते हैं बिना मिले तो कोई भी कार्य चलेगा नहीं विश्व की शक्तियां हैं तो बहुत ना मिले थे तो देखिए बड़ा ही बेतुका सवाल होता है कई बार धन्यवाद

china bharat ko tabah karna chahte hain toh modi ji se mulakat bahut badhiya badi shakira hua Hindustan jis ke pradhanmantri modi ji hain vaah china ek super power jiska alamost business bana sakte hain india me bahut business china ka faila hua vyapar silsile me usne me pradhanmantri aapas me milte rehte hain bina mile toh koi bhi karya chalega nahi vishwa ki shaktiyan hain toh bahut na mile the toh dekhiye bada hi betukaa sawaal hota hai kai baar dhanyavad

चीन भारत को तबाह करना चाहते हैं तो मोदी जी से मुलाकात बहुत बढ़िया बादी शकीरा हुआ हिंदुस्ता

Romanized Version
Likes  299  Dislikes    views  3374
WhatsApp_icon
user

राकेश

Journalist

0:55
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

चीन बहुत तेजी से अपने आपको दुनिया में आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभरना चाहता है उसके लिए कोई भी देश कोई मायने नहीं रखता चाहे भारत और अमेरिका हो या कुछ भी ऐसे में भारत चाह कर भी उसका सीधा विरोध नहीं कर सकता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की वैश्विक जिम्मेदारी है कि उन्हें सभी देशों के साथ मिलकर काम करना होगा हम चाह कर भी सीधे तौर पर चीन का विरोध नहीं कर सकते यह हमारी मजबूरी है इसे कूटनीति कहें या पूरे देश पर दुनिया भर में जो नियम बने हैं उसका एक अनुपालना करना भी हमारी मजबूरी है यही कारण है कि चीन बेशक हमारा विरोध करता है हमारे लिए समस्याएं खड़ा करता है लेकिन हम उसका विरोध नहीं कर सकते या फिर हम उसे पूरी तरह से संबंध नहीं खत्म होती थी

china bahut teji se apne aapko duniya me aarthik mahashakti ke roop me ubharana chahta hai uske liye koi bhi desh koi maayne nahi rakhta chahen bharat aur america ho ya kuch bhi aise me bharat chah kar bhi uska seedha virodh nahi kar sakta pradhanmantri narendra modi ji ki vaishvik jimmedari hai ki unhe sabhi deshon ke saath milkar kaam karna hoga hum chah kar bhi sidhe taur par china ka virodh nahi kar sakte yah hamari majburi hai ise kootneeti kahein ya poore desh par duniya bhar me jo niyam bane hain uska ek anupalna karna bhi hamari majburi hai yahi karan hai ki china beshak hamara virodh karta hai hamare liye samasyaen khada karta hai lekin hum uska virodh nahi kar sakte ya phir hum use puri tarah se sambandh nahi khatam hoti thi

चीन बहुत तेजी से अपने आपको दुनिया में आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभरना चाहता है उसके लिए क

Romanized Version
Likes  4  Dislikes    views  87
WhatsApp_icon
user

Anil Ramola

Yoga Instructor | Engineer

0:28
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

क्या आपने गुस्सा मुझे नहीं किया चाइना बात को दबाकर फिर भी हम किसी दुश्मन क्या मारेगा और करना

kya aapne gussa mujhe nahi kiya china baat ko dabakar phir bhi hum kisi dushman kya marenge aur karna

क्या आपने गुस्सा मुझे नहीं किया चाइना बात को दबाकर फिर भी हम किसी दुश्मन क्या मारेगा और कर

Romanized Version
Likes  394  Dislikes    views  8467
WhatsApp_icon
user

अशोक गुप्ता

Founder of Vision Commercial Services.

0:45
Play

Likes  50  Dislikes    views  1652
WhatsApp_icon
user
2:45
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका सवाल है जब चीन भारत को दवा करना चाहता था मोदी जी उनको मुलाकात करने के लिए जाते थे तो इसका क्या कारण हो सकती है देखिए सबसे पहले में बताता हूं की शुरुआत से यह भर्तियों की परंपरा रही है कि हम लोग बिना वजह किसी के विरोध में अपना सत्र नहीं उठाते हैं और शुरुआत अगर किसी दूसरे देश ने किया है तो पहले तो उसको हम समझा अब जाकर उसको सलाह मशवरा करके किस को किस तरह उसको बंद किया जा सकता है उसकी इन्होंने हरकत से कैसे बढ़ाया जा सकता है इसके लिए हम कोशिश करते रहते हैं और मोदी जी इस कार्य में माहिर है क्योंकि यह राजनीतिक दृष्टिकोण से अगर कहीं जाएगी यह कूटनीति है अंतरराष्ट्रीय तौर पर कूटनीति का इस्तेमाल काफी अच्छी तरह से होती है और जो जितना अच्छा कूटनीतिज्ञ है वह उतना सफल कही जाती है अंतरराष्ट्रीय समाज में टिकट चीन का यह हमेशा कम्युनिस्ट राष्ट्र होने के नाते यह हमेशा उसका रवैया इसी तरह ही रहता है और अपनी तरह से मतलब कोई तरक्की करें और और सामरिक दृष्टिकोण से अगर कोई आगे बढ़कर जाए तो इस बात को सेंड करना चीन की बस में बात नहीं होती यह शुरुआत से हम देखते आ रहे हैं कैसी भी हो जाए से अगर चीन का भारत को तबाह करने के लिए कोई अगर कदम हमेशा उठाते रहते हैं तो कभी अगर हमें पता चला कि इस तरह का ठोस सबूत है तो ऐसे कदम उठा रहे हैं तो उसके बावजूद भी मोदी जी ने चाइना जाकर उनके साथ बातचीत किए हैं तो यह सबसे बड़ा कूटनीतिक कितने कूटनीतिक देते हैं इस तरह से हम सूत्रों को चाल के बारे में समझ सकते हैं उनके साथ बात करके हम सुलझा मिश्रा करके हम उसको लिफ्ट आने की भी कोशिश करते हैं और उनकी चाल के बारे में भी हम जान सकते हैं और उसी हिसाब से हम अपना अगला स्टेज क्या होगा अगला हम क्या-क्या कार्य करेंगे जिस तरह से इस तरह से घटना को हम सामना कर सकते हैं उसके बारे में हम सोचने के लिए भी समय मिल जाता है तो राजनीतिक दृष्टिकोण से यह कूटनीति का व्यवहार करना सबसे मुनासिब होता है राष्ट्र और समाज में तो इसीलिए मोदी जी का यह जो कदम था यह सही ठहरा था धन्यवाद

aapka sawaal hai jab china bharat ko dawa karna chahta tha modi ji unko mulakat karne ke liye jaate the toh iska kya karan ho sakti hai dekhiye sabse pehle me batata hoon ki shuruat se yah bhartiyo ki parampara rahi hai ki hum log bina wajah kisi ke virodh me apna satra nahi uthate hain aur shuruat agar kisi dusre desh ne kiya hai toh pehle toh usko hum samjha ab jaakar usko salah mashwara karke kis ko kis tarah usko band kiya ja sakta hai uski inhone harkat se kaise badhaya ja sakta hai iske liye hum koshish karte rehte hain aur modi ji is karya me maahir hai kyonki yah raajnitik drishtikon se agar kahin jayegi yah kootneeti hai antararashtriya taur par kootneeti ka istemal kaafi achi tarah se hoti hai aur jo jitna accha kutnitigya hai vaah utana safal kahi jaati hai antararashtriya samaj me ticket china ka yah hamesha communist rashtra hone ke naate yah hamesha uska ravaiya isi tarah hi rehta hai aur apni tarah se matlab koi tarakki kare aur aur samarik drishtikon se agar koi aage badhkar jaaye toh is baat ko send karna china ki bus me baat nahi hoti yah shuruat se hum dekhte aa rahe hain kaisi bhi ho jaaye se agar china ka bharat ko tabah karne ke liye koi agar kadam hamesha uthate rehte hain toh kabhi agar hamein pata chala ki is tarah ka thos sabut hai toh aise kadam utha rahe hain toh uske bawajud bhi modi ji ne china jaakar unke saath batchit kiye hain toh yah sabse bada kutanitik kitne kutanitik dete hain is tarah se hum sootron ko chaal ke bare me samajh sakte hain unke saath baat karke hum suljha mishra karke hum usko lift aane ki bhi koshish karte hain aur unki chaal ke bare me bhi hum jaan sakte hain aur usi hisab se hum apna agla stage kya hoga agla hum kya kya karya karenge jis tarah se is tarah se ghatna ko hum samana kar sakte hain uske bare me hum sochne ke liye bhi samay mil jata hai toh raajnitik drishtikon se yah kootneeti ka vyavhar karna sabse munasib hota hai rashtra aur samaj me toh isliye modi ji ka yah jo kadam tha yah sahi thahara tha dhanyavad

आपका सवाल है जब चीन भारत को दवा करना चाहता था मोदी जी उनको मुलाकात करने के लिए जाते थे तो

Romanized Version
Likes  117  Dislikes    views  2651
WhatsApp_icon
user

Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

1:01
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बेटा इंटरेस्टिंग नेशनल जो मंच होता है उस पर ऐसा नहीं किया जाता है मानो आप से उनके विचार नहीं मिलते हैं तो फिर भी आप ऐसा नहीं कह सकते कि मैं तुमसे बात नहीं करना चाहता जनरल जिंदगी में होता है पॉलिटिक्स में ऐसा वहां नहीं कर सकते हैं कि वह इंटरनेशनल मंच होता मामा बात भी करनी होती है अपने मुद्दे भी रखने होते हैं अपने विचार भी रखे जाते हैं और उनके विचार भी सुने जाते हैं जबकि ईमानदारी की बात की है कि प्रत्येक भारत का देश भक्त तुझा संसार में तुम देख रहे हैं इस कोरोना वायरस के कारण से चीन से प्रत्येक देश के लोग ना करते हैं समय में क्योंकि कोरोना विपत्ति का जनक यह चाइना

beta interesting national jo manch hota hai us par aisa nahi kiya jata hai maano aap se unke vichar nahi milte hain toh phir bhi aap aisa nahi keh sakte ki main tumse baat nahi karna chahta general zindagi me hota hai politics me aisa wahan nahi kar sakte hain ki vaah international manch hota mama baat bhi karni hoti hai apne mudde bhi rakhne hote hain apne vichar bhi rakhe jaate hain aur unke vichar bhi sune jaate hain jabki imaandaari ki baat ki hai ki pratyek bharat ka desh bhakt tujha sansar me tum dekh rahe hain is corona virus ke karan se china se pratyek desh ke log na karte hain samay me kyonki corona vipatti ka janak yah china

बेटा इंटरेस्टिंग नेशनल जो मंच होता है उस पर ऐसा नहीं किया जाता है मानो आप से उनके विचार नह

Romanized Version
Likes  342  Dislikes    views  3752
WhatsApp_icon
user

Isu Vasava

PASTOR in CHURCH.

0:40
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अभी मोदी जी भी तो एक इंसान है उसको थोड़ा मालूम है चीन का राष्ट्रपति बड़ा प्रधान गया वह उसको लगा देगा जैसे आपका दोस्त से आपके लवर आपका फ्रेंड कोई भी है वह आपको आप उसके ऊपर भरोसा करते हैं मिलते हैं लेकिन एक दिन वह अचानक आपको धोखा देता है तो वैसे चीन वालों ने भी धोखा देते इसमें नरेंद्र मोदी की की गलती थोड़ी है ना वह तो हमारे देश के अच्छे के लिए उनको मिलने गए

abhi modi ji bhi toh ek insaan hai usko thoda maloom hai china ka rashtrapati bada pradhan gaya vaah usko laga dega jaise aapka dost se aapke lover aapka friend koi bhi hai vaah aapko aap uske upar bharosa karte hain milte hain lekin ek din vaah achanak aapko dhokha deta hai toh waise china walon ne bhi dhokha dete isme narendra modi ki ki galti thodi hai na vaah toh hamare desh ke acche ke liye unko milne gaye

अभी मोदी जी भी तो एक इंसान है उसको थोड़ा मालूम है चीन का राष्ट्रपति बड़ा प्रधान गया वह उसक

Romanized Version
Likes  173  Dislikes    views  1517
WhatsApp_icon
user

Vinod uttrakhand Tiwari

Author,You Tuber(Thoght Of सक्सेस)

0:35
Play

Likes  19  Dislikes    views  345
WhatsApp_icon
user
1:52
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए आपका प्रश्न है जब चीन भारत को तबाह करना चाहते थे तो मोदी जी की चीन से भी मुलाकात करने जाते थे तो अभी तो मोदी जी बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद भारी बहुमत से सत्ता में आए आप यह क्यों भूल जाते हैं कि वह हमेशा पाकिस्तान को दुश्मन नंबर एक बोलते हैं लेकिन लंका से वापस आते समय बिना बुलाए नवाज शरीफ के घर शादी में मेहमान के रूप में चले गए और तो चीन भारत को तबाह करना चाहता है ऐसा कुछ नहीं है और तू दुश्मन देशों के लोग भी एक दूसरे से मिलते हैं राजीव गांधी जी ने भी चीन की यात्रा की थी पाकिस्तान की यात्रा की थी तो दुनिया में उत्तर कोरिया और अमेरिका एक दूसरे की जानी दुश्मन है लेकिन उत्तर कोरिया के तानाशाह हिंदू और अमेरिकन राष्ट्रपति की भी मुलाकात हुई तो कूटनीति में बहुत सारी चीजें ऐसी ऐसी जो हम एक दूसरे को डिपेंडेंट रहते हैं एक दूसरे की मदद कर सकता है सीमा विवाद अपनी जगह है तो प्रधानमंत्री मोदी शी जिनपिंग से मिलने नहीं गए शी जिनपिंग गया जोरदार स्वागत भी किया यह विदेश नीति में कूटनीति का ही हिस्सा होता है

dekhiye aapka prashna hai jab china bharat ko tabah karna chahte the toh modi ji ki china se bhi mulakat karne jaate the toh abhi toh modi ji balakot air strike ke baad bhari bahumat se satta me aaye aap yah kyon bhool jaate hain ki vaah hamesha pakistan ko dushman number ek bolte hain lekin lanka se wapas aate samay bina bulaye nawaj sharif ke ghar shaadi me mehmaan ke roop me chale gaye aur toh china bharat ko tabah karna chahta hai aisa kuch nahi hai aur tu dushman deshon ke log bhi ek dusre se milte hain rajeev gandhi ji ne bhi china ki yatra ki thi pakistan ki yatra ki thi toh duniya me uttar korea aur america ek dusre ki jani dushman hai lekin uttar korea ke tanashah hindu aur american rashtrapati ki bhi mulakat hui toh kootneeti me bahut saari cheezen aisi aisi jo hum ek dusre ko dependent rehte hain ek dusre ki madad kar sakta hai seema vivaad apni jagah hai toh pradhanmantri modi shi jinping se milne nahi gaye shi jinping gaya jordaar swaagat bhi kiya yah videsh niti me kootneeti ka hi hissa hota hai

देखिए आपका प्रश्न है जब चीन भारत को तबाह करना चाहते थे तो मोदी जी की चीन से भी मुलाकात करन

Romanized Version
Likes  56  Dislikes    views  1344
WhatsApp_icon
Likes  33  Dislikes    views  1034
WhatsApp_icon
user
Play

Likes  6  Dislikes    views  194
WhatsApp_icon
user

Shantanu Purohit

Political Analyst, Life Management, Career Counseler

1:38
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

वैश्विक विदेश नीति क्या स्थापित सिद्धांतों के आधार पर यदि देखा जाए तो किसी शत्रु राष्ट्र के साथ संबंध बनाना भी कोई बुरी बात नहीं है विदेश नीति का एक मूलभूत सिद्धांत या है कि कोई भी राष्ट्र विदेश नीति के माध्यम से अपने स्वार्थों की पूर्ति करना चाहता ज्यादा से ज्यादा अपने देश का भला करना चाहता है और जब बात देश का भला करने की हो वहां यह नहीं देखा जाता कि कोई देश का दुश्मन है कोई देश अपना दोस्त है अपना काम निकालना कूटनीति के माध्यम से यह विदेश नीति का एक आधार बुद्धू है यदि चीन भारत को तबाह करना चाहता है मोदी जी चीन की यात्रा कर रहे हैं इसमें कुछ गलत नहीं है लेकिन यह एक सावधानी बरतनी पड़ेगी कि चीन कहीं हमारी इस प्रकार के व्यवहार का कोई फायदा नहीं उठा पाए पंडित नेहरू ने भी चीन से संबंध बनाने के प्रयास किए थे लेकिन नतीजा युद्ध में परिणित हुआ था हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि चीन से हम एक बार हार चुके लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए हमें समझना भी पड़ेगा लेकिन उसके संबंध बनाकर के यदि हम देश के विकास में कोई लाभ प्राप्त कर सकें यह कोई बुरी बात भी नहीं होगी धन्यवाद

vaishvik videsh niti kya sthapit siddhanto ke aadhar par yadi dekha jaaye toh kisi shatru rashtra ke saath sambandh banana bhi koi buri baat nahi hai videsh niti ka ek mulbhut siddhant ya hai ki koi bhi rashtra videsh niti ke madhyam se apne swarthon ki purti karna chahta zyada se zyada apne desh ka bhala karna chahta hai aur jab baat desh ka bhala karne ki ho wahan yah nahi dekha jata ki koi desh ka dushman hai koi desh apna dost hai apna kaam nikalna kootneeti ke madhyam se yah videsh niti ka ek aadhar buddhu hai yadi china bharat ko tabah karna chahta hai modi ji china ki yatra kar rahe hain isme kuch galat nahi hai lekin yah ek savdhani bartani padegi ki china kahin hamari is prakar ke vyavhar ka koi fayda nahi utha paye pandit nehru ne bhi china se sambandh banane ke prayas kiye the lekin natija yudh me parinit hua tha hamein yah bhi dhyan rakhna hoga ki china se hum ek baar haar chuke lekin vartaman paristhitiyon ko drishtigat rakhte hue hamein samajhna bhi padega lekin uske sambandh banakar ke yadi hum desh ke vikas me koi labh prapt kar sake yah koi buri baat bhi nahi hogi dhanyavad

वैश्विक विदेश नीति क्या स्थापित सिद्धांतों के आधार पर यदि देखा जाए तो किसी शत्रु राष्ट्र क

Romanized Version
Likes  9  Dislikes    views  126
WhatsApp_icon
user

Lokesh kesharwani

Psychologist & Philosopher (Life Coach), Counsellor Of Everything.

2:34
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका पूछ नहीं सकती है भारत को तबाह करना चाहता था तो मोदी जी की इंसुलिन मुलाकात करने जाते थे इसका जवाब दीजिए तो मैं आपको बताना चाहूंगा कि जब चीन भारत को तबाह करना चाहता था तो मोदी जी की मुलाकात करने जाते यह बहुत अच्छा किया करते थे प्रथम बाद जो भी देखे अगर सामने वाला व्यक्ति आपको गाली दे रहा है तो आप गाली दे करके उसका विरोध कर सकते हैं लेकिन उसके गाली को रोक नहीं सकते अगर आप सामने वाले को गाली दी और आप और अधिक गालियां आपको देगा लेकिन अगर उसका जवाब नहीं देते हैं अपना जवाब देगा तो मैं तुम्हें गाली दे रहा हूं आप अपना कपड़ा उसके घर में फेंकने के बजाय उसके घर में जारी है और अपने पड़ोसी से पूछिए कि आप अपना कपड़ा मेरे को आप को समझते क्या हो रही है यही करते हैं आप उसे अपना दोस्त बनाने का बदन बनाना शुरु कर दो दोस्त बनाने का प्रयास किया करो लेकिन यह ठीक नहीं था अगर उसके साथ जाकर के प्यार से पेश आते हैं और प्रॉपर्टी पूछते क्या हुआ भाई क्या दिक्कत हो रही है भारत भारत के हो रही है कुछ समझता है तो बताओ तो एक अच्छे नेता ने होती है इसलिए मैं मोदी

aapka puch nahi sakti hai bharat ko tabah karna chahta tha toh modi ji ki insulin mulakat karne jaate the iska jawab dijiye toh main aapko batana chahunga ki jab china bharat ko tabah karna chahta tha toh modi ji ki mulakat karne jaate yah bahut accha kiya karte the pratham baad jo bhi dekhe agar saamne vala vyakti aapko gaali de raha hai toh aap gaali de karke uska virodh kar sakte hain lekin uske gaali ko rok nahi sakte agar aap saamne waale ko gaali di aur aap aur adhik galiya aapko dega lekin agar uska jawab nahi dete hain apna jawab dega toh main tumhe gaali de raha hoon aap apna kapda uske ghar me fenkne ke bajay uske ghar me jaari hai aur apne padosi se puchiye ki aap apna kapda mere ko aap ko samajhte kya ho rahi hai yahi karte hain aap use apna dost banane ka badan banana shuru kar do dost banane ka prayas kiya karo lekin yah theek nahi tha agar uske saath jaakar ke pyar se pesh aate hain aur property poochhte kya hua bhai kya dikkat ho rahi hai bharat bharat ke ho rahi hai kuch samajhata hai toh batao toh ek acche neta ne hoti hai isliye main modi

आपका पूछ नहीं सकती है भारत को तबाह करना चाहता था तो मोदी जी की इंसुलिन मुलाकात करने जाते थ

Romanized Version
Likes  409  Dislikes    views  1025
WhatsApp_icon
user

Ramphal

Student

1:03
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जब दिन बात हो तो बात करना चाहता है तो मोदी जी अब अपने हालातों को लेकर चीन के पास जाते से ज्यादा उन्हें समझाते थे कि भाड़ इतना विकसित नहीं है कि आपकी शक्ति को सेंड कर सके वह चीन के साथ समझौता मित्रता का बावली पर किए जाते थे और ऐसा करने से चीन ने भारत को तबाह करने से इनकार कर दिया क्योंकि मोदी जी से बातचीत करने के बाद उनके इरादे बदल चुके थे लेकिन हमेशा से बात का कुछ रिश्तो की खराश होने के कारण चीन भारत विरोधी हो गया है तथा पाकिस्तान का पैसा का साथ दे रहा है इसको रोकने के लिए मोदी जी चीन से वार्तालाप करने के लिए चीन गए

jab din baat ho toh baat karna chahta hai toh modi ji ab apne halaton ko lekar china ke paas jaate se zyada unhe smajhate the ki bhad itna viksit nahi hai ki aapki shakti ko send kar sake vaah china ke saath samjhauta mitrata ka bawli par kiye jaate the aur aisa karne se china ne bharat ko tabah karne se inkar kar diya kyonki modi ji se batchit karne ke baad unke Irade badal chuke the lekin hamesha se baat ka kuch rishto ki kharash hone ke karan china bharat virodhi ho gaya hai tatha pakistan ka paisa ka saath de raha hai isko rokne ke liye modi ji china se vartalaap karne ke liye china gaye

जब दिन बात हो तो बात करना चाहता है तो मोदी जी अब अपने हालातों को लेकर चीन के पास जाते से ज

Romanized Version
Likes  7  Dislikes    views  149
WhatsApp_icon
user

Ranjan Singh

Asprient Of Civil Service Exam (Ias)Psychologist & Motivated Person। https://youtu.be/CqBMGAILbNU

1:21
Play

Likes  3  Dislikes    views  144
WhatsApp_icon
user
1:03
Play

Likes  6  Dislikes    views  168
WhatsApp_icon
user
Play

Likes  14  Dislikes    views  227
WhatsApp_icon
user
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए दोस्तों यह बात चलेगी चीन भारत को तबाह करना चाहते थे क्या बात है पर कूटनीतिक विदेश नीति की नाते मोदी जी को जाना चाहिए चीन और वहां शॉपी पिता आशीष अमृतवाणी आरती स्थिति पर समझौता करना पड़ता है कि विदेश नीति और कूटनीति के चाल है आप चाहते हैं बिना छिन जाए कुछ हो नहीं सकता क्योंकि कुछ हर कार्य के लिए थोड़ा बहुत तो अपनी रणनीतियों के द्वारा हमें अपना प्रभाव छोड़ना पड़ता है विदेशों में इसीलिए मोदी जी चीन चाहते थे क्योंकि कूटनीति और विदेश नीति के नाते उन्हें जाना पड़ता था इसीलिए आप चाहते हैं ऐसा नहीं है चाहे जय भारत

dekhiye doston yah baat chalegi china bharat ko tabah karna chahte the kya baat hai par kutanitik videsh niti ki naate modi ji ko jana chahiye china aur wahan shoppe pita aashish amritwani aarti sthiti par samjhauta karna padta hai ki videsh niti aur kootneeti ke chaal hai aap chahte hain bina chhin jaaye kuch ho nahi sakta kyonki kuch har karya ke liye thoda bahut toh apni rananitiyon ke dwara hamein apna prabhav chhodna padta hai videshon me isliye modi ji china chahte the kyonki kootneeti aur videsh niti ke naate unhe jana padta tha isliye aap chahte hain aisa nahi hai chahen jai bharat

देखिए दोस्तों यह बात चलेगी चीन भारत को तबाह करना चाहते थे क्या बात है पर कूटनीतिक विदेश नी

Romanized Version
Likes  6  Dislikes    views  140
WhatsApp_icon
qIcon
ask
QuestionsProfiles

Vokal App bridges the knowledge gap in India in Indian languages by getting the best minds to answer questions of the common man. The Vokal App is available in 11 Indian languages. Users ask questions on 100s of topics related to love, life, career, politics, religion, sports, personal care etc. We have 1000s of experts from different walks of life answering questions on the Vokal App. People can also ask questions directly to experts apart from posting a question to the entire answering community. If you are an expert or are great at something, we invite you to join this knowledge sharing revolution and help India grow. Download the Vokal App!