रावण चाहकर भी सीता माता को छू भी न सका,  ऐसा क्यों?...


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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

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रामायण में रावण के पात्र से मानव मात्र को कुछ शिक्षा लेनी चाहिए रावण का पात्र अपने आप मित्र का गद्य स्थापित जनता पूरी जनता लेकिन उसमें दो-तीन दोस्त इतने जघन्य दोस्त इतने भयंकर दोस्त माननी चाहिए जिसके कारण उसकी समस्त योग्यता बताओ और कौन तिरोहित हो गए और वह समाज में घृणा का पात्र बन गया आज रावण को हम बुराई का प्रतीक मानते हैं कि सबसे बड़ा दोस्त यही है जल्दी उसके समर्थक की कहते हैं कि राक्षस संस्कृति में पराई स्त्री का पारण अलाउड था लेकिन यह नैतिकता के विरुद्ध है अनुचित है इसलिए पराई स्त्री को छूना उसका प्रिंट करना संसार का सबसे गर्म पाप है रावण निशिता को छुआ नहीं था उसका कारण यह था कि स्वयं सीता एक शक्ति का रूप टी दुर्गा का रूप थी रामायण में रामचरितमानस में तो आप ऐसा पाते हैं कि रावण हरण करके ले गया है आपने सब पढ़ा है लेकिन रामायण जो वाल्मीकि कृत है उसमें साफ शब्दों में कहा गया है कि जब पंचवटी पर राम लक्ष्मण सीता पहुंचे थे तब राम ने कहा था कि इससे आगे राक्षसों का वास है बेहतर यही होगा कि आप अग्नि में प्रवेश कर जाएं अग्नि में चले जाएं और छाया रूप आपका मेरे साथ रहेगा और यही सीता ने किया था पंचवटी में अग्नि में वह अपना ओरिजिनल रूप चली गया था उनका और केवल छाया मात्र से सीता श्री राम के साथ रही थी और छाया का ही वह अपहरण करके ले गया था एक कारण था कि आपको याद होगा कि जब लंका को जीत लिया सेम अग्निदेव ने आकर के साक्षी दीदी कहां शीते एकदम पवित्र है पुनीत है तो यह सब बातें हैं रावण के पास तुम्हें कुछ उन खेत लेकिन यह दो-तीन जो अपराध थे एक उसका एंव आप उसके देखिए एक स्त्री की खातिर उसने अपने पूरे परिवार को ईद आप पर लगा दिया यह उसकी का मान्यता थी कि का मान्यता सूची एक क्वालिफाइड एक अच्छे शिक्षक भी को सुशोभित नहीं होती है जबकि उसने देखा कि उसका मेघनाथ मेघनाथ जैसा पुत्र कुंभकरण जैसा बलवान भाई और उसके विभिन्न अधिकार महाकाल जय शिव पलवान पुत्र भी मारे गए थे सिर्फ रावण के का मान्यता के कारण रावण के अभिमान के कारण उसने विभीषण जैसे महान नीतिज्ञ भाई को भी अपमान किया सिर्फ इसी कारण जब की रानी मंदोदरी बहुत ध्यान रखती थी ज्ञान वाली थी उसने नीति की बातें बताई थी और उत्तम सोच रहा था कि सीता को जो हम करके लाए हैं यह सीता नहीं है यह रावण का यह इस लंका के राक्षसों का काल है इसको आप लौटा दीजिए पहली बात तो आप पप्पू का प्रण नहीं करना चाहिए था और अपहरण कर लिया तो उसके लिए आप गलती रिलायंस करते हुए श्री राम के चरणों में समर्पित कर दें यदि वह कर देता तो राक्षस कुल का विनाश नहीं होता क्योंकि लोग कुछ तिलक श्रीराम करुणा के अवतार हैं और श्रीराम की प्रेम प्रतिज्ञा है कि संसार के जगत तंबाकू करने के बाद भी यदि कोई मेरी शरण में आ जाता है तो मैं से क्षमा कर दूंगा श्रीराम ने इसके बहुत सारे एग्जांपल दिए हैं तो रावण को चित किया था सीता को सम्मान समर्पित करता यह बेहतर होता यही कारण है कि आप देख रहे हैं कृपया क्षमा नहीं किया है रावण को युगो युगो तक बुराई का प्रतीक माना जाता रहेगा और इसी प्रकार दशहरा पर उसका उसको चलाते रहेंगे दशहरा का जो सब आता है वह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है ठीक इसी प्रकार रावण जैसे विद्वान कालज्ञ एक महान शिव भक्त को यह सब सुप्रिया था अनुचित था उसी का परिणाम उसने सपरिवार मृत्यु को प्राप्त किया था हां यहां पर भी यह मान लूंगा विभीषण ने भी बहुत समझाया है कुंभकरण भी बहुत समझाया था और अंत में मेघनाथ ने भी बहुत समझाया था उसमें बिग नौबत यहां तक कहा पिता मैंने जान लिया है यह श्याम नारायण का अवतार है मैं नहीं चाहता कि आप इस अनुच्छेद कर्म के कारण से पूरे परिवार को लेकर दो वह उससे बेहतर यह है कि आप अभी सीता को श्री राम को समर्पित कर दो का श्रावण ने अपने फुलकारी वचनों को सुना होता लेकिन अभिमान में और का मान्यता में यह दोनों में बहुत बड़ी बुराई होती है कि यह कभी विवेक को जागृत नहीं होने देते हैं परिणाम स्वरूप इतिहास रावण को कभी माफ नहीं करेगा और रावण युगों युगों तक इसी प्रकार बुराई का प्रतीक बन कर के चलता रहेगा

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रामायण में रावण के पात्र से मानव मात्र को कुछ शिक्षा लेनी चाहिए रावण का पात्र अपने आप मित्

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