समाज ऐसा क्यों सोचता है की औरत कमज़ोर है या उसे दबाकर रखा जा सकता है?...


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Gopal Srivastava

Acupressure Acupuncture Sujok Therapist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जय माता दी मनीष जी हमारे जैसे लोगों से मिले तो कहीं ना कहीं ना कहीं न कहीं फाइनल करूंगा कि हां हम लोगों की अगर चेंज हो जाएगी और समाज को अपनी सिस्टर को या अपने फ्रेंड्स को करने के लिए मना करते हैं ना वह लोग क्या कहेंगे भी नहीं कहूंगा कि हर चीज में आपको समाज को छोड़कर करना चाहिए या समाज से बिल्कुल विपरीत चलना चाहिए समाज देखनी चाहिए परंतु कुछ ऐसी चीजें हैं जो लेडी जो के लिए पावरफुल चीजें हैं और जो वह कर सकती है और कुछ चीजें हैं जो जो है क्या नाम उन्हें करने नहीं की जा सकती बहुत चाहे वह लड़का हो लड़की हो कोई भी वॉइस राइज अट हर्मनसन की स्वतंत्रता है उसको हम अधिकारी ग्रुप पर अपने अकॉर्डिंग नहीं चला सकते पर यह गलत है बाहर एक जैसे हमारी एक इच्छा होती कि हमारी वाइफ हमारे अकॉर्डिंग काम करें और हमें लगता है वह नहीं कर रही तो कहीं ना कहीं इच्छा होती कि मेरा हस्बैंड हमारे हम ही से हमारे साथ रहें हम इसे सारी चीजें शेयर कर लेकिन हम नहीं करते ना तो हर एक व्यक्ति की एक पर्सनल चीजें होती हैं और हम उन्हें अपने अकॉर्डिंग चलाने की कोशिश करते गलत चीजें क्योंकि और एक चीज क्योंकि स्त्री को कहीं ना कहीं एक बलिदान का कारक माना गया है हर चीज एक्सपेक्ट करेगी वहीं वहीं हर चीजों में सक्रिय फाइल्स करें हमें खुद से चेंज जलाने चाहिए और कुछ चीजों में उनकी हेल्प करनी चाहिए बहुत सी ऐसी लेडीस है मैंने अभी कुछ दिन पहले एक हमारे बहुत अच्छे मित्र हैं रुकिया मदर है जो बहुत अच्छी आर्ट जानती थी बट उनके बच्चे हो गए हो सारे चीजों के फैमिली पैसा था इसलिए वह बहुत कुछ नहीं कर पाई और आज उन्होंने पिक्चर सेंड किया हमला शेयर की थी फेसबुक पर मेरी मां ने बहुत सालों सालों पहले ऐसी चीजें बनाई थी पहले क्यों तब परिवार के चलते हम वह सके हम क्यों नहीं तो यह चीजें सोचनीय है और हम कहते हैं हर व्यक्ति को अपने में जलाने चाहिए और समाज के बारे में सोचना चाहिए जो सत्य है और जो सही है वह चीजें हमें करनी चाहिए बाकी सारी चाहिए ठीक है समाज लेकर भी चलना चाहिए और कई समाज को छोड़कर भी कुछ कदम उठाने चाहिए ताकि हम कुछ नया और अच्छा कर सके वह समाज के हित में हेतु धन्यवाद

jai mata di manish ji hamare jaise logo se mile toh kahin na kahin na kahin na kahin final karunga ki haan hum logo ki agar change ho jayegi aur samaj ko apni sister ko ya apne friends ko karne ke liye mana karte hain na vaah log kya kahenge bhi nahi kahunga ki har cheez me aapko samaj ko chhodkar karna chahiye ya samaj se bilkul viprit chalna chahiye samaj dekhni chahiye parantu kuch aisi cheezen hain jo lady jo ke liye powerful cheezen hain aur jo vaah kar sakti hai aur kuch cheezen hain jo jo hai kya naam unhe karne nahi ki ja sakti bahut chahen vaah ladka ho ladki ho koi bhi voice rahije attack harmanasan ki swatantrata hai usko hum adhikari group par apne according nahi chala sakte par yah galat hai bahar ek jaise hamari ek iccha hoti ki hamari wife hamare according kaam kare aur hamein lagta hai vaah nahi kar rahi toh kahin na kahin iccha hoti ki mera husband hamare hum hi se hamare saath rahein hum ise saari cheezen share kar lekin hum nahi karte na toh har ek vyakti ki ek personal cheezen hoti hain aur hum unhe apne according chalane ki koshish karte galat cheezen kyonki aur ek cheez kyonki stree ko kahin na kahin ek balidaan ka kaarak mana gaya hai har cheez expect karegi wahi wahi har chijon me sakriy files kare hamein khud se change jalane chahiye aur kuch chijon me unki help karni chahiye bahut si aisi ladies hai maine abhi kuch din pehle ek hamare bahut acche mitra hain rukiya mother hai jo bahut achi art jaanti thi but unke bacche ho gaye ho saare chijon ke family paisa tha isliye vaah bahut kuch nahi kar payi aur aaj unhone picture send kiya hamla share ki thi facebook par meri maa ne bahut salon salon pehle aisi cheezen banai thi pehle kyon tab parivar ke chalte hum vaah sake hum kyon nahi toh yah cheezen sochniya hai aur hum kehte hain har vyakti ko apne me jalane chahiye aur samaj ke bare me sochna chahiye jo satya hai aur jo sahi hai vaah cheezen hamein karni chahiye baki saari chahiye theek hai samaj lekar bhi chalna chahiye aur kai samaj ko chhodkar bhi kuch kadam uthane chahiye taki hum kuch naya aur accha kar sake vaah samaj ke hit me hetu dhanyavad

जय माता दी मनीष जी हमारे जैसे लोगों से मिले तो कहीं ना कहीं ना कहीं न कहीं फाइनल करूंगा कि

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार आपका प्रश्न है समाज ऐसा क्यों सोचता है कि औरतें कमजोर है या उन्हें दबा कर रखा जा सकता है समाज का ऐसा सोचना कोई महत्व नहीं रखता क्योंकि औरतों जैसा सशक्त व्यक्तित्व पुरुषों के पास नहीं है वह अनेक रूपों में हमें स्नेह प्रेम वात्सल्य प्रदान करती हैं और इसके साथ हर समस्या में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहती हैं उन्हें अपना व्यक्तित्व साबित करने के लिए किसी सत्य की आवश्यकता या प्रमाण की आवश्यकता नहीं है क्योंकि आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे से आगे बढ़कर अपने व्यक्तित्व को प्रस्तुत कर चुकी हैं इसलिए उन्हें कमजोर या छोटा समझने वाले लोग अपनी सोच को बदलें और आगे बढ़े धन्यवाद आपका दिन शुभ हो

namaskar aapka prashna hai samaaj aisa kyon sochta hai ki auraten kamjor hai ya unhe daba kar rakha ja sakta hai samaaj ka aisa sochna koi mahatva nahi rakhta kyonki auraton jaisa sashakt vyaktitva purushon ke paas nahi hai vaah anek roopon mein hamein sneh prem vatsalya pradan karti hain aur iske saath har samasya mein purushon ke saath kandhe se kandha milakar khadi rehti hain unhe apna vyaktitva saabit karne ke liye kisi satya ki avashyakta ya pramaan ki avashyakta nahi hai kyonki aaj mahilaen har kshetra mein aage se aage badhkar apne vyaktitva ko prastut kar chuki hain isliye unhe kamjor ya chota samjhne waale log apni soch ko badale aur aage badhe dhanyavad aapka din shubha ho

नमस्कार आपका प्रश्न है समाज ऐसा क्यों सोचता है कि औरतें कमजोर है या उन्हें दबा कर रखा जा स

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Dr Asha B Jain

Dip in Naturopathy, Yoga therapist Pranic healer, Counselor

2:04
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जो भी अगर यह सोचता है कि औरत कमजोर होती है या उसे दबा कर रखा जा सकता है या रखना चाहिए वह बिल्कुल ही गलत सोच है पहली बात तो औरत कमजोर होती नहीं है औरत जिद्दी मेंटली स्ट्रांग है उतने तो पुरुष भी नहीं है अगर स्ट्रांग में देखी जाए जब भी कोई दो बच्चे पैदा होते हैं जुड़वा लड़का और लड़की हमें क्या डॉक्टर बोलते हैं कि अगर बहुत क्रिटिकल कंडीशन में हो वह दोनों हमेशा लड़की सरवाइव करती है लड़की की डेट होती हैं इसलिए ऊर्जा शक्ति जो होती है वह लड़कियों में ही ज्यादा होती है पावर मेंटल पावर भी लड़कियों में ज्यादा होती है पुरुष में बस फिजिकल पावर होती है फिजिकली अगर लड़की को लड़के से लड़ाई लड़ेगी करती है और कोई शंकर बड़ी से आजकल भारतवर्ष में हड़बड़ी क्वेश्चन पर लड़कियां वाला रही हैं जितने भी रिजल्ट आते हैं चाय वाय एस ऑफिसर के हो चाहे वह मैट्रिक के हाई सेकेंडरी का पेपर में देख लो लड़कियों की कितनी तादाद बढ़ रही है हर जगह ऊंची पोस्ट पर लड़कियां पोस्ट पर आ रही है इससे यह जाहिर होता है कि लड़कियां कितनी आगे निकल रहे हैं तो उन्हें अब पुराना जमाना नहीं है क्या वह आप उसको एक कमरे में बंद करके रख दोगे दबा कर रख दोगे उसे हर तरीके से उपयोग करोगे उसका और उस पर अत्याचार करोगे वह जमाना नहीं रहा है बहुत हद तक वह चीज खत्म हो गई है पर यह नहीं कहूंगी कि वह अभी भी पुणे तो खत्म हो गई है अभी भी है कई लोग जो इस तरीके से अत्याचार महिलाओं पर करते हैं वह एक्शन में पुरुष है ही नहीं जो इस तरीके से एक स्त्री को दबा कर रखते हैं क्योंकि वह भी एक इंसान कोई जानवर नहीं है जिसको खूंटे से बांधकर रख दिया जाए तो यह बिल्कुल भी नहीं है बहुत पर बनाया है परिवर्तन की आवश्यकता है समाज में

jo bhi agar yah sochta hai ki aurat kamjor hoti hai ya use daba kar rakha ja sakta hai ya rakhna chahiye vaah bilkul hi galat soch hai pehli baat toh aurat kamjor hoti nahi hai aurat jiddi mentally strong hai utne toh purush bhi nahi hai agar strong mein dekhi jaaye jab bhi koi do bacche paida hote hain judwa ladka aur ladki hamein kya doctor bolte hain ki agar bahut critical condition mein ho vaah dono hamesha ladki survive karti hai ladki ki date hoti hain isliye urja shakti jo hoti hai vaah ladkiyon mein hi zyada hoti hai power mental power bhi ladkiyon mein zyada hoti hai purush mein bus physical power hoti hai physically agar ladki ko ladke se ladai ladegi karti hai aur koi shankar badi se aajkal bharatvarsh mein hadbadi question par ladkiyan vala rahi hain jitne bhi result aate hain chai why s officer ke ho chahen vaah metric ke high secondary ka paper mein dekh lo ladkiyon ki kitni tadad badh rahi hai har jagah unchi post par ladkiyan post par aa rahi hai isse yah jaahir hota hai ki ladkiyan kitni aage nikal rahe hain toh unhe ab purana jamana nahi hai kya vaah aap usko ek kamre mein band karke rakh doge daba kar rakh doge use har tarike se upyog karoge uska aur us par atyachar karoge vaah jamana nahi raha hai bahut had tak vaah cheez khatam ho gayi hai par yah nahi kahungi ki vaah abhi bhi pune toh khatam ho gayi hai abhi bhi hai kai log jo is tarike se atyachar mahilaon par karte hain vaah action mein purush hai hi nahi jo is tarike se ek stree ko daba kar rakhte hain kyonki vaah bhi ek insaan koi janwar nahi hai jisko khunte se bandhkar rakh diya jaaye toh yah bilkul bhi nahi hai bahut par banaya hai parivartan ki avashyakta hai samaaj mein

जो भी अगर यह सोचता है कि औरत कमजोर होती है या उसे दबा कर रखा जा सकता है या रखना चाहिए वह ब

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Mahika Sharma

Clinical Psychologist

1:44
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मेरे ख्याल से समाज को औरतों के प्रति जो एक हाल है वह सिर्फ इन वह ऐसी नहीं बनाई दिन में ही बना वह बहुत ही पुराने आलू भर के हजारों साल के ऊपर कई विचार है एक जो कारण है वह यह है कि शारीरिक रूप से औरतें और जो बोला छोटू की जो हमसे कहते हैं जो उनका वेट होता है जो उनकी झूमर पागल होती है वह मर्दों से कमजोर जरूर होती है तो इसीलिए ऐसा लगता है दूसरी बात है जो उनका जो सामाजिक रूल जनरल रूल्स इसे कहते हैं तो समाज में जो औरतों का जोर के प्रति जो नजरिया है वह यही है कामकाज करने का कोई भी नहीं बनाया हमारे हिंदुस्तान में नहीं है वह कैसा है दुनिया भर में उतारा है पर अभी सोच में भी परिवर्तन आ रहा है और घर परिवार के अलावा उनका निकलती जून के अंदर कौन है वह बाहर आ रहे हैं समाज को दिखाई दे रहे हैं आर्मी के अंदर पायलट बन रही है लेखक बन गए हैं और टेक्नोलॉजी ने विकास हो रहा है सूत्रों में हो चुका है तो दिखाई दे रहा है तो मेरे ख्याल से अभी बना रहा है

mere khayal se samaaj ko auraton ke prati jo ek haal hai vaah sirf in vaah aisi nahi banai din mein hi bana vaah bahut hi purane aalu bhar ke hazaron saal ke upar kai vichar hai ek jo karan hai vaah yah hai ki sharirik roop se auraten aur jo bola chotu ki jo humse kehte hain jo unka wait hota hai jo unki jhumar Pagal hoti hai vaah mardon se kamjor zaroor hoti hai toh isliye aisa lagta hai dusri baat hai jo unka jo samajik rule general rules ise kehte hain toh samaaj mein jo auraton ka jor ke prati jo najariya hai vaah yahi hai kaamkaaj karne ka koi bhi nahi banaya hamare Hindustan mein nahi hai vaah kaisa hai duniya bhar mein utara hai par abhi soch mein bhi parivartan aa raha hai aur ghar parivar ke alava unka nikalti june ke andar kaun hai vaah bahar aa rahe hain samaaj ko dikhai de rahe hain army ke andar pilot ban rahi hai lekhak ban gaye hain aur technology ne vikas ho raha hai sootron mein ho chuka hai toh dikhai de raha hai toh mere khayal se abhi bana raha hai

मेरे ख्याल से समाज को औरतों के प्रति जो एक हाल है वह सिर्फ इन वह ऐसी नहीं बनाई दिन में ही

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जिस समय की बात है सा समाज है जिस घर के रहन-सहन है उसको देख लेना चाहिए और जाना चाहिए अथवा नहीं जाना चाहिए देखना चाहिए डिटेल

jis samay ki baat hai sa samaaj hai jis ghar ke rahan sahan hai usko dekh lena chahiye aur jana chahiye athva nahi jana chahiye dekhna chahiye detail

जिस समय की बात है सा समाज है जिस घर के रहन-सहन है उसको देख लेना चाहिए और जाना चाहिए अथवा न

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

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आपका प्रश्न है समाज ऐसा क्यों सोचता है कि औरत औरत कमजोर है या उसे दबा कर रखा जा सकता है यह समाज की नेगेटिविटी है यह समाज की बहुत कम लेवल की है और कुछ समाज की सोच बहुत हाई लेवल की है जो औरतों को मान सम्मान इज्जत आदर देते हैं और कुछ समाज औरतों को मान सम्मान इज्जत आदर नहीं देते फिर बोलो क्या करते हो और चलो वहीं समाज का त्याग कर देते वही समाज को छोड़ देते हैं और वह अपने तरीके से अपनी जिंदगी आगे अच्छे से बढ़ाते और सफलता प्राप्त करते हैं आपका दिन शुभ हो धन्यवाद गुड लक फॉर लाइफ

aapka prashna hai samaaj aisa kyon sochta hai ki aurat aurat kamjor hai ya use daba kar rakha ja sakta hai yah samaaj ki negativity hai yah samaaj ki bahut kam level ki hai aur kuch samaaj ki soch bahut high level ki hai jo auraton ko maan sammaan izzat aadar dete hain aur kuch samaaj auraton ko maan sammaan izzat aadar nahi dete phir bolo kya karte ho aur chalo wahin samaaj ka tyag kar dete wahi samaaj ko chhod dete hain aur vaah apne tarike se apni zindagi aage acche se badhate aur safalta prapt karte hain aapka din shubha ho dhanyavad good luck for life

आपका प्रश्न है समाज ऐसा क्यों सोचता है कि औरत औरत कमजोर है या उसे दबा कर रखा जा सकता है यह

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यह एक बहुत लंबा हमारा इतिहास है अगर आप बहुत पुराने समय की तरह वापस जाओगे तो थोड़ा सा महिलाओं को यहां दबाने का मतलब नहीं होता है यहां पर हमारा मानना थोड़ा समझ कर फिर जो कि जो महिलाएं होती है उनकी रक्षा करने के लिए पुरुष हमेशा आगे होना चाहिए और पुरुषों के अंदर यह अभिमान होता है या गरम होता है कि वह महिलाओं की रक्षा करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं तो ऐसा सोच कर के महिला को लगता है कि पुरुषों ने दबा रहे और पुरुषों को लगता है कि हम उनकी रक्षा करने के लिए ऐसे कदम उठा रहे हैं धन्यवाद अधिक जानकारी के लिए आप हमसे पुणे जुड़िए

yah ek bahut lamba hamara itihas hai agar aap bahut purane samay ki tarah wapas jaoge toh thoda sa mahilaon ko yahan dabane ka matlab nahi hota hai yahan par hamara manana thoda samajh kar phir jo ki jo mahilaen hoti hai unki raksha karne ke liye purush hamesha aage hona chahiye aur purushon ke andar yah abhimaan hota hai ya garam hota hai ki vaah mahilaon ki raksha karne ke liye hamesha taiyar rehte hain toh aisa soch kar ke mahila ko lagta hai ki purushon ne daba rahe aur purushon ko lagta hai ki hum unki raksha karne ke liye aise kadam utha rahe hain dhanyavad adhik jaankari ke liye aap humse pune judiye

यह एक बहुत लंबा हमारा इतिहास है अगर आप बहुत पुराने समय की तरह वापस जाओगे तो थोड़ा सा महिला

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Tanay Mishra

Head Control Clerk In Forest Department U.P.

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह सोच बहुत पहले ही प्राचीन काल की सोच थी अब ऐसा बिल्कुल भी नहीं है आप किसी भी क्षेत्र में उठाकर देख लीजिए क्रिकेट हो खेल हो या ऑफिसर बनने में हो या किसी पढ़ाई में हो स्क्रीन की औरतें किसी से भी कमजोर नहीं है ना उनको दबाकर रखा जा सकता है कर दबा कर रखा जाता तो ना अभी साइना नेहवाल होती ना पीवी सिंधु होती ना स्मृति मंधाना होती ना शेफाली होती नहीं हरप्रीत कौर होती ना मिताली राज होती और भी ऐसी बहुत सारी लेडीस है जिन्होंने हर क्षेत्र में आप सफलता प्राप्त की है तो अब समाज अगर ऐसा सोचता है तो बहुत ही गलत सोचता है परेश उनकी सोच से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता के बरतिया लेडी अब ऊपर आकर मर्दों से ज्यादा अच्छा काम कर रही हैं धन्यवाद

yah soch bahut pehle hi prachin kaal ki soch thi ab aisa bilkul bhi nahi hai aap kisi bhi kshetra me uthaakar dekh lijiye cricket ho khel ho ya officer banne me ho ya kisi padhai me ho screen ki auraten kisi se bhi kamjor nahi hai na unko dabakar rakha ja sakta hai kar daba kar rakha jata toh na abhi saina nehwal hoti na pv sindhu hoti na smriti mandhana hoti na shefali hoti nahi harprit kaur hoti na mitali raj hoti aur bhi aisi bahut saari ladies hai jinhone har kshetra me aap safalta prapt ki hai toh ab samaj agar aisa sochta hai toh bahut hi galat sochta hai paresh unki soch se zyada fark nahi padta ke baratiya lady ab upar aakar mardon se zyada accha kaam kar rahi hain dhanyavad

यह सोच बहुत पहले ही प्राचीन काल की सोच थी अब ऐसा बिल्कुल भी नहीं है आप किसी भी क्षेत्र में

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

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समाज ऐसा क्यों सोचता है कि औरत कमजोर है उसे दबा कर उसके पीछे बहुत ही कारण बड़ा भगवान ने जो औरतों को रूप से फिजिकल रूप से थोड़ा कम शक्तिमान बनाया मानसिक रूप से ज्यादा शक्तिमान है लेकिन सारे कुत्ते थोड़ा कम शक्तिमान बनाया और पहले के जमाने में होता क्या था कि पुरुष धन कमाते से और महिलाएं कर चलाता माने वाले का ज्यादा महिलाओं को आगे बढ़ने से रोका जाता था दहेज प्रथा और सती प्रथा विधवा पुनर्विवाह ना होना यह सब महिलाओं के प्रति अन्याय अब आज के समय में शहरों में ओपन से कम हो ही रहा है और कुछ कुछ कहा है कि महिलाओं के लिए शिक्षण होता गया जैसे-जैसे लिटरेसी बड़ी महिलाओं में जागृति बड़ी अपने हक को लेने के लिए वह जागृत है और अब वह पुरुष से समुद्री यानी कि पुरुष के समान हक मांग रही हैं जो कि उनका हक है लेकिन सोचने वाली बात यह है कि महिलाएं हैं यह सोचती है कि वह पुरुष के समान है जबकि उनकी सोच गलत है गलत क्यों है गलत इस मायने में है मेरे ख्याल से मेरे विचार से महिलाएं पुरुषों से ज्यादा महान होती m.a. की महिलाएं वहीं पुरुष को जन्म दात्री जिस जाति को पैदा करने वाली खुद महिला हो तो वह पुरुष कैसे उनसे समान हो सकते हैं वह तुमसे एक कदम पीछे हुए ना इसलिए महिलाओं को एक कदम आगे स्थान मिलना चाहिए जिसमें महिलाओं को सम्मान मिलता है जिस घर में महिलाओं को सम्मान मिलता और उनके महत्व को स्वीकार किया जाता है वहां पर सब कुछ शुभ और लाभ होता है इसलिए समय बदलता है बदल रहा है तेजी से और समय के साथ साथ सभी लोगों को अपने विचार में परिवर्तन अवश्यंभावी करना ही चाहिए धन्यवाद

samaj aisa kyon sochta hai ki aurat kamjor hai use daba kar uske peeche bahut hi karan bada bhagwan ne jo auraton ko roop se physical roop se thoda kam shaktiman banaya mansik roop se zyada shaktiman hai lekin saare kutte thoda kam shaktiman banaya aur pehle ke jamane me hota kya tha ki purush dhan kamate se aur mahilaye kar chalata maane waale ka zyada mahilaon ko aage badhne se roka jata tha dahej pratha aur sati pratha vidva punarvivah na hona yah sab mahilaon ke prati anyay ab aaj ke samay me shaharon me open se kam ho hi raha hai aur kuch kuch kaha hai ki mahilaon ke liye shikshan hota gaya jaise jaise literacy badi mahilaon me jagriti badi apne haq ko lene ke liye vaah jagrit hai aur ab vaah purush se samudri yani ki purush ke saman haq maang rahi hain jo ki unka haq hai lekin sochne wali baat yah hai ki mahilaye hain yah sochti hai ki vaah purush ke saman hai jabki unki soch galat hai galat kyon hai galat is maayne me hai mere khayal se mere vichar se mahilaye purushon se zyada mahaan hoti m a ki mahilaye wahi purush ko janam datri jis jati ko paida karne wali khud mahila ho toh vaah purush kaise unse saman ho sakte hain vaah tumse ek kadam peeche hue na isliye mahilaon ko ek kadam aage sthan milna chahiye jisme mahilaon ko sammaan milta hai jis ghar me mahilaon ko sammaan milta aur unke mahatva ko sweekar kiya jata hai wahan par sab kuch shubha aur labh hota hai isliye samay badalta hai badal raha hai teji se aur samay ke saath saath sabhi logo ko apne vichar me parivartan awasyambhavi karna hi chahiye dhanyavad

समाज ऐसा क्यों सोचता है कि औरत कमजोर है उसे दबा कर उसके पीछे बहुत ही कारण बड़ा भगवान ने जो

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Dr. Jitubhai Shah

Friend, Philosopher and Guide

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समझ ऐसा क्यों सोचता है कि औरत कमजोर है और दबाकर रखा जा सकता है इसका कारण यही है कि औरत नहीं यह परमिशन दी है मुर्दों को पहले ही दिन जब औरत को दबाने की कोशिश करता है उस समय वह असर्टिव रहकर अगर उनका विरोध करती है कि मुझे बिल्कुल पसंद नहीं है कोई मेरे साथ ही इस प्रकार का व्यवहार करें तो वह शुरू से ही बंद हम कर सकते हैं सामने वाले व्यक्ति को हमारे साथ कैसा व्यवहार करना वह हम ही तय करते हैं मैं तेरी जगह पर देखता हूं तो औरत बहुत सेल्फ डिपेंडेंट ली अपने आप को भी अच्छी तरह से खुश रखती हुई अपने मन को भी खुश रखते हुए परिवार को भी खुश रखती हुई और किसी से भी दबाती नहीं हुई रह सकती है लेकिन उसके लिए महिला को ही स्वयं प्रयत्न करना होगा अपने आप को पीपर करना होगा और किसी भी भी लिया और एक बात को पहले दिन से ही नहीं चलाना होगा तो ही आप अच्छी तरह से जी सकते हैं

samajh aisa kyon sochta hai ki aurat kamjor hai aur dabakar rakha ja sakta hai iska karan yahi hai ki aurat nahi yah permission di hai murdon ko pehle hi din jab aurat ko dabane ki koshish karta hai us samay vaah asartiv rahkar agar unka virodh karti hai ki mujhe bilkul pasand nahi hai koi mere saath hi is prakar ka vyavhar karen toh vaah shuru se hi band hum kar sakte hain saamne waale vyakti ko hamare saath kaisa vyavhar karna vaah hum hi tay karte hain main teri jagah par dekhta hoon toh aurat bahut self dependent li apne aap ko bhi achi tarah se khush rakhti hui apne man ko bhi khush rakhte hue parivar ko bhi khush rakhti hui aur kisi se bhi dabati nahi hui reh sakti hai lekin uske liye mahila ko hi swayam prayatn karna hoga apne aap ko pipar karna hoga aur kisi bhi bhi liya aur ek baat ko pehle din se hi nahi chalana hoga toh hi aap achi tarah se ji sakte hain

समझ ऐसा क्यों सोचता है कि औरत कमजोर है और दबाकर रखा जा सकता है इसका कारण यही है कि औरत नही

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Dr. 9529010780

Sexologist Specialist

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आपका सवाल है समाज ऐसा क्यों सोचता है कि औरत कमजोर है या उसे दबा कर रखा जा सकता है जी अभी जमाना बहुत कुछ बदल चुका है अभी ऐसा कुछ नहीं है जो यह जो था यह जो पहले होता था अभी तो मैं खुद अच्छे क्वालिफिकेशन और डिग्रियां प्राप्त कर रही है अच्छे जॉब पर है अच्छे पोस्ट पर है तो ऐसा इस जमाने में तो मतलब ऐसी चीजें देखने को नहीं मिलती है यह जिन जिन जिन के सोचते हैं ऐसा कोई व्यक्ति नहीं करते बस एक काय सिर्फ आपने मन स्थिति का आवास

aapka sawaal hai samaaj aisa kyon sochta hai ki aurat kamjor hai ya use daba kar rakha ja sakta hai ji abhi jamana bahut kuch badal chuka hai abhi aisa kuch nahi hai jo yah jo tha yah jo pehle hota tha abhi toh main khud acche qualification aur digriyan prapt kar rahi hai acche job par hai acche post par hai toh aisa is jamaane mein toh matlab aisi cheezen dekhne ko nahi milti hai yah jin jin jin ke sochte hain aisa koi vyakti nahi karte bus ek kya sirf aapne man sthiti ka aawas

आपका सवाल है समाज ऐसा क्यों सोचता है कि औरत कमजोर है या उसे दबा कर रखा जा सकता है जी अभी ज

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Aditya kumar

Love Guru

1:49
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

समाज में हर लोग एक दूसरे को दबाकर रखना चाहते हैं तो औरत एक सॉफ्ट दिल का होता है एक अच्छे जगत में औरत शॉपिंग होते हैं सब किसी बात के लिए अगर उसे हटा दो तो वह जल्दी डर जाते हैं तो कोई भी किसी को डराता है कि यह कोई जैसे कि कोई डॉगी को इंगले लो अगर आप उससे डर रहे हो तो वह आप को डराता चला जाता है तेरा तो चला जाता है बिल्कुल उसी तरह अगर दूसरे इंसान से डर जाओ तो आप को डराता है और आप कुछ करोगे नहीं तो आप को कमजोर ही समझता है बिल्कुल उसी तरह लेडीस से भी होते लेडीस थोड़ी समझदार होते हैं जिन से ज्यादा और उनका दिल बहुत साफ होता है और बातों को वह समझते हैं अगर आप उसे डांट रखी से बात के लिए तो वह जल जवाब नहीं देती है इस वजह से वह लोग समझते हैं कि यह कमजोर है डरती है वजह से दबा के रखते हैं उसे सोचते हो वह कमजोर लकी ऐसा नहीं होता है लेडीस माहौल को शांत रखने में सहायता करते हैं हजार उत्तर लेडीस होती है कुछ ऐसे होते हैं अगर लेडीस ना डरते हो तो वहां पर हमेशा झगड़ा लड़ाई होता है आप पैसे किसी करने देखते होंगे कि दोनों जेंस और लेडीस में रोज झगड़ा वाला लेडीस में ऐसा नहीं कट रही इस वजह से

samaj me har log ek dusre ko dabakar rakhna chahte hain toh aurat ek soft dil ka hota hai ek acche jagat me aurat shopping hote hain sab kisi baat ke liye agar use hata do toh vaah jaldi dar jaate hain toh koi bhi kisi ko darata hai ki yah koi jaise ki koi doggy ko ingole lo agar aap usse dar rahe ho toh vaah aap ko darata chala jata hai tera toh chala jata hai bilkul usi tarah agar dusre insaan se dar jao toh aap ko darata hai aur aap kuch karoge nahi toh aap ko kamjor hi samajhata hai bilkul usi tarah ladies se bhi hote ladies thodi samajhdar hote hain jin se zyada aur unka dil bahut saaf hota hai aur baaton ko vaah samajhte hain agar aap use dant rakhi se baat ke liye toh vaah jal jawab nahi deti hai is wajah se vaah log samajhte hain ki yah kamjor hai darti hai wajah se daba ke rakhte hain use sochte ho vaah kamjor lucky aisa nahi hota hai ladies maahaul ko shaant rakhne me sahayta karte hain hazaar uttar ladies hoti hai kuch aise hote hain agar ladies na darte ho toh wahan par hamesha jhagda ladai hota hai aap paise kisi karne dekhte honge ki dono jens aur ladies me roj jhagda vala ladies me aisa nahi cut rahi is wajah se

समाज में हर लोग एक दूसरे को दबाकर रखना चाहते हैं तो औरत एक सॉफ्ट दिल का होता है एक अच्छे ज

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मैं इस बात को नहीं मानता हां यह जरूर है कि समाज में बहुत सारी चीजें हैं जो बहुत सोचने पर विवश कर देती है किसी को कि किसी के लिए भी लेकिन अगर कमजोरी की बातें कैसे ताकतवर कौन है जैसे आदमी को कुछ उठाने के लिए दौड़ने के लिए खाने के लिए चलने के लिए शक्ति की जरूरत होती है वैसे ही नारी है औरत कमजोर कैसे हो सकती है वह तो पुरुष को शक्ति देने वाली है और जो शुरुआत हो सकती का वह कमजोर कैसे हो सकता है बिल्कुल नहीं और उसे रही बात दबा कर रखने की तो दबा कर नहीं रखा जाता और अगर ऐसा कोई करता है तो यह उसकी सबसे बड़ी मूर्खता है और ऐसा करो सोचता है तो यह भी सबसे बड़ी भूल गई जाएगी क्योंकि कोई औरत को दबा कर सकता है इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि औरत जननी है धरा है हम लोग धरती पर चलते हैं धरती को कितना कष्ट देते हैं लेकिन इस बात को बिल्कुल नहीं भूलना चाहिए जब आदमी करती नहीं और उसकी युवावस्था खत्म होती है तो वही इंसान धरती की तरफ झुक जाता है जब वह चल रहा होता है तो अपने सीने को चौड़ा करता है और आलू से जमीन को दबा दबा था वह चलता है उसको लगता है कि मतलब धरती दबाके चलूंगा तो धरती जो जननी है जननी जो एक औरत है और उसके ऊपर पुरुष चाहे किसी भी तरीके से यह समझे कि वह कमजोर है बिल्कुल भी नहीं है औरत जो है वह जननी है और जनानी बहुत ताकतवर है क्योंकि वह शक्ति प्रदान करने वाली है शक्ति देने वाली है व्यवस्था में वही मनुष्य धरती की तरफ झुक जाता है और उसको एक डंडा भी चाहिए होता है चलने के लिए प्रिय अपनी-अपनी सोच है सोच को बदलने की जरूरत है महिला कोई भी कमजोर नहीं है और ना ही उसको दबाकर रखा जा सकता है हां यह जरूर है कि हमको से सीखा जा सकता है त्याग समर्पण प्यार स्नेह

main is baat ko nahi maanta haan yah zaroor hai ki samaj me bahut saari cheezen hain jo bahut sochne par vivash kar deti hai kisi ko ki kisi ke liye bhi lekin agar kamzori ki batein kaise takatwar kaun hai jaise aadmi ko kuch uthane ke liye daudne ke liye khane ke liye chalne ke liye shakti ki zarurat hoti hai waise hi nari hai aurat kamjor kaise ho sakti hai vaah toh purush ko shakti dene wali hai aur jo shuruat ho sakti ka vaah kamjor kaise ho sakta hai bilkul nahi aur use rahi baat daba kar rakhne ki toh daba kar nahi rakha jata aur agar aisa koi karta hai toh yah uski sabse badi murkhta hai aur aisa karo sochta hai toh yah bhi sabse badi bhool gayi jayegi kyonki koi aurat ko daba kar sakta hai iska sabse bada karan yah hai ki aurat janani hai dhara hai hum log dharti par chalte hain dharti ko kitna kasht dete hain lekin is baat ko bilkul nahi bhoolna chahiye jab aadmi karti nahi aur uski yuvavastha khatam hoti hai toh wahi insaan dharti ki taraf jhuk jata hai jab vaah chal raha hota hai toh apne seene ko chauda karta hai aur aalu se jameen ko daba daba tha vaah chalta hai usko lagta hai ki matlab dharti dabake chalunga toh dharti jo janani hai janani jo ek aurat hai aur uske upar purush chahen kisi bhi tarike se yah samjhe ki vaah kamjor hai bilkul bhi nahi hai aurat jo hai vaah janani hai aur janani bahut takatwar hai kyonki vaah shakti pradan karne wali hai shakti dene wali hai vyavastha me wahi manushya dharti ki taraf jhuk jata hai aur usko ek danda bhi chahiye hota hai chalne ke liye priya apni apni soch hai soch ko badalne ki zarurat hai mahila koi bhi kamjor nahi hai aur na hi usko dabakar rakha ja sakta hai haan yah zaroor hai ki hamko se seekha ja sakta hai tyag samarpan pyar sneh

मैं इस बात को नहीं मानता हां यह जरूर है कि समाज में बहुत सारी चीजें हैं जो बहुत सोचने पर व

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Gunjan

Junior Volunteer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

क्या क्वेश्चन है क्या हालत कमजोर है या फिर उसे कमजोर बना दिया गया तो बिल्कुल जो है औरत है जो बिल्कुल कमजोर नहीं होती है ऐसे सरस कोमल होती है नाजुक होती है कमजोर नहीं होते क्योंकि पूरे घर को संभाल के रखने की जो जिम्मेदारी है वह औरत पर ही होती है वह को बहुत बखूबी निभाती भी है तुलसी ने जो है औरत किसी भी मामले में मर्दों से पीछे नहीं है या कम नहीं है भले ही वह एंप्लॉयमेंट की बात करें या भले वह कंधे से कंधा मिलाने मिलाकर चलने की बात करें

kya question hai kya halat kamjor hai ya phir use kamjor bana diya gaya toh bilkul jo hai aurat hai jo bilkul kamjor nahi hoti hai aise saras komal hoti hai naajuk hoti hai kamjor nahi hote kyonki poore ghar ko sambhaal ke rakhne ki jo zimmedari hai vaah aurat par hi hoti hai vaah ko bahut bakhubi nibhati bhi hai tulsi ne jo hai aurat kisi bhi mamle mein mardon se peeche nahi hai ya kam nahi hai bhale hi vaah employment ki baat karen ya bhale vaah kandhe se kandha milaane milakar chalne ki baat karen

क्या क्वेश्चन है क्या हालत कमजोर है या फिर उसे कमजोर बना दिया गया तो बिल्कुल जो है औरत है

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समाज ऐसा क्यों सोचते हैं कि औरत कमजोर है और उसे दबा कर रखा जा सकते देखिए औरत बहुत ही कोमल स्वभाव की होती है सबकी बात नहीं है पर आपके पर्सन स्त्रियां कुमारी होती है सुबह में और वह कमजोर कभी नहीं होती है वह सब अपने परिवार की वजह से अपनी ताकत नहीं दिखाती है वह हर एक चीज को संभाल कर रखना चाहती है वह चुप हो जाती है क्योंकि कुछ रिश्ते चुप है तो रिश्ते हैं कुछ रिश्ते हैं तो चुप हैं इसलिए औरत कभी कमजोर नहीं होती औरत अगर कमजोर होती तो बच्चा पैदा करने की जिम्मेदारी एक बाप को मिलती मार्कोनी बच्चा पैदा करना कोई मामूली बात नहीं है और उसको भगवान ने आशीर्वाद के रूप पर औरत को ही दिया है और सब कुछ सेंड करती है यह उसकी ता पति कमजोरी में और जो यह समझते हैं औरत कमजोर है लड़कियां कमजोर है उनकी बहुत छोटी सोच है बहुत छोटी सोच है इसे महाभारत में पांडवों के सामने स्त्री को निर्वस्त्र किया जा रहा था और स्त्री सबके सामने मदद मांग रहे थे कोई मदद नहीं करा था वह कमजोर नहीं थी कमजोर नीति उनको पता था कि मेरे पत्तियों के कारण मुझे ऐसा किया सारे वरना उसकी क्या गलती थी आप बताइए मेरा कहना यह समाज की सोच बहुत छोटी है वह उसको हमेशा दबाकर रखना चाहता यह ऐसा कैसा समाज है जगने पर आपसे मैंने बैठा था ऐसे समाज से तुम ऐसा समाज तो रहे ना उससे अच्छा तो यह समाज कहां से बने बिना औरत के बनाए एक औरत ने जब आज लड़की को जन्म दिया तब जाकर शर्म आनी चाहिए ऐसे सोच पर जो औरत कमजोर होती है औरत कभी कमजोर नहीं होती है भारत को कमजोर यह समाज वालों ने बनाया है बार-बार कहते हैं ना कि तुम कमजोर हो तुम्हें कुछ नहीं आता तुम्हें यह नहीं आता तुम्हें पूर्णिया औरत चाइना औरत के आगे तो भगवान भी आते हैं टीवी क्यों पूछो तो मानसी करते हैं ना कहते हैं कि नहीं करते आप बताइए एक देवी को सब पूछते हैं या नहीं पूछते राक्षस भी तो था ना वह भी देवी कोई पूछता था यह कैसा समाज औरत कभी कमजोर नहीं होती है आजकल राक्षस होते हैं ना उसका सिंगार है ना मां दुर्गा ही करती है औरत कमजोर नहीं होते अगर किसी की ऐसी सोच है कि औरत कमजोर होती है तो फिर एक बार काली मां का रूप देख लीजिए थैंक यू

samaj aisa kyon sochte hain ki aurat kamjor hai aur use daba kar rakha ja sakte dekhiye aurat bahut hi komal swabhav ki hoti hai sabki baat nahi hai par aapke person striyan kumari hoti hai subah me aur vaah kamjor kabhi nahi hoti hai vaah sab apne parivar ki wajah se apni takat nahi dikhati hai vaah har ek cheez ko sambhaal kar rakhna chahti hai vaah chup ho jaati hai kyonki kuch rishte chup hai toh rishte hain kuch rishte hain toh chup hain isliye aurat kabhi kamjor nahi hoti aurat agar kamjor hoti toh baccha paida karne ki jimmedari ek baap ko milti marconi baccha paida karna koi mamuli baat nahi hai aur usko bhagwan ne ashirvaad ke roop par aurat ko hi diya hai aur sab kuch send karti hai yah uski ta pati kamzori me aur jo yah samajhte hain aurat kamjor hai ladkiya kamjor hai unki bahut choti soch hai bahut choti soch hai ise mahabharat me pandavon ke saamne stree ko nirvastra kiya ja raha tha aur stree sabke saamne madad maang rahe the koi madad nahi kara tha vaah kamjor nahi thi kamjor niti unko pata tha ki mere pattiyo ke karan mujhe aisa kiya saare varna uski kya galti thi aap bataiye mera kehna yah samaj ki soch bahut choti hai vaah usko hamesha dabakar rakhna chahta yah aisa kaisa samaj hai jagane par aapse maine baitha tha aise samaj se tum aisa samaj toh rahe na usse accha toh yah samaj kaha se bane bina aurat ke banaye ek aurat ne jab aaj ladki ko janam diya tab jaakar sharm aani chahiye aise soch par jo aurat kamjor hoti hai aurat kabhi kamjor nahi hoti hai bharat ko kamjor yah samaj walon ne banaya hai baar baar kehte hain na ki tum kamjor ho tumhe kuch nahi aata tumhe yah nahi aata tumhe purniya aurat china aurat ke aage toh bhagwan bhi aate hain TV kyon pucho toh mansi karte hain na kehte hain ki nahi karte aap bataiye ek devi ko sab poochhte hain ya nahi poochhte rakshas bhi toh tha na vaah bhi devi koi poochta tha yah kaisa samaj aurat kabhi kamjor nahi hoti hai aajkal rakshas hote hain na uska shingar hai na maa durga hi karti hai aurat kamjor nahi hote agar kisi ki aisi soch hai ki aurat kamjor hoti hai toh phir ek baar kali maa ka roop dekh lijiye thank you

समाज ऐसा क्यों सोचते हैं कि औरत कमजोर है और उसे दबा कर रखा जा सकते देखिए औरत बहुत ही कोमल

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