आयुर्वेदिक दवाओं के ऊपर लोगों का विश्वास क्यों उठ गया?...


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हमारे भारत देश में 300 साल पहले बोलो 500 साल पहले बोलो महाभारत काल से जो दवाई चलती आ रही थी वह है आयुर्वेद महाभारत के अंदर मतलब साडे 5000 साल पहले महाभारत के अंदर विद मुद्दा होता था रात को लोग छावनी में आते थे छावनी में बैठे वाले वह घाव को मलमपट्टी करते थे सवेरे घाव भरता था और लोग वापस लौटने को जाते थे यह हमारे भारत देश की सबसे बड़ी आयुर्वेदिक की देन है पर अंग्रेज हमारे देश के ऊपर हुकूमत करें और उन्होंने एलोपैथिक दवा का हमारे देश के ऊपर प्रचार और प्रचार किया इसीलिए आज सबके दिमाग में एलोपैथिक दवा बैठे वाली है मेरे भाई मेरे तमाम लाखों दर्शकों को मैं यह बताना चाहता हूं कि दूसरे देश में प्रथम आयुर्वेद है दूसरे नंबर पर एलोपैथिक होम्योपैथी के और तीसरे नंबर पर जरूरत पड़ी तो एलोपैथिक है हमारे देश में ऐसी परिस्थिति बंद है कि प्रथम हमारे देश में एलोपैथी के दूसरे नंबर पर होम्योपैथिक और तीसरे नंबर पर आज आयुर्वेदिक गया वाला है पर मैं मैं तमाम लाखों दर्शकों को यह बताना चाहता हूं को आयुर्वेद से जो प्रॉपर इलाज होता है यह मर्ज एन सी के लिए एलोपैथिक और लंबे लंबे रूट के इलाज के लिए हमें आयुर्वेदिक का ही इस्तेमाल करना चाहिए या अंग्रेजी दवा हमें नहीं खाना चाहिए क्या अंग्रेजी दवा से हमारी लाइफ कम होती जा रही है यह सबकॉन्शियस माइंड की बात है वह लोग आ बिजनेस करके ले करने के लिए हमारे सबकॉन्शियस माइंड में ऐसे ऐसे दवा डाल देते हैं और हम निकल चलते सा देश से सादा खेड़ी का आदमी गोरा उसको अगर कुछ आ जाओ क्या हुआ दवाखाने में गया था वह बोलता था डॉक्टर साहब ने इंजेक्शन लगा दो तो मुझे ठीक लगेगा क्योंकि यह बात उसके सबकॉन्शियस माइंड में बैठने वाली है कि इंजेक्शन लगाने से मेरा भला होने वाला है और प्रॉपर जो हमारे नजदीक के पेड़ पौधे की दवाएं हम नहीं खाते यही संदेह है कि हमारे सबकॉन्शियस माइंड में एलोपैथिक किसी और ने डाली है करके आयुर्वेदिक का डिमांड आज मार्केट से कम हो चुका

hamare bharat desh me 300 saal pehle bolo 500 saal pehle bolo mahabharat kaal se jo dawai chalti aa rahi thi vaah hai ayurveda mahabharat ke andar matlab saade 5000 saal pehle mahabharat ke andar with mudda hota tha raat ko log chavani me aate the chavani me baithe waale vaah ghaav ko malampatti karte the savere ghaav bharta tha aur log wapas lautne ko jaate the yah hamare bharat desh ki sabse badi ayurvedic ki then hai par angrej hamare desh ke upar hukumat kare aur unhone allopathic dawa ka hamare desh ke upar prachar aur prachar kiya isliye aaj sabke dimag me allopathic dawa baithe wali hai mere bhai mere tamaam laakhon darshakon ko main yah batana chahta hoon ki dusre desh me pratham ayurveda hai dusre number par allopathic homeopathy ke aur teesre number par zarurat padi toh allopathic hai hamare desh me aisi paristhiti band hai ki pratham hamare desh me allopathy ke dusre number par homeopathic aur teesre number par aaj ayurvedic gaya vala hai par main main tamaam laakhon darshakon ko yah batana chahta hoon ko ayurveda se jo proper ilaj hota hai yah merge N si ke liye allopathic aur lambe lambe root ke ilaj ke liye hamein ayurvedic ka hi istemal karna chahiye ya angrezi dawa hamein nahi khana chahiye kya angrezi dawa se hamari life kam hoti ja rahi hai yah subconscious mind ki baat hai vaah log aa business karke le karne ke liye hamare subconscious mind me aise aise dawa daal dete hain aur hum nikal chalte sa desh se saada khedi ka aadmi gora usko agar kuch aa jao kya hua davakhane me gaya tha vaah bolta tha doctor saheb ne injection laga do toh mujhe theek lagega kyonki yah baat uske subconscious mind me baithne wali hai ki injection lagane se mera bhala hone vala hai aur proper jo hamare nazdeek ke ped paudhe ki davayain hum nahi khate yahi sandeh hai ki hamare subconscious mind me allopathic kisi aur ne dali hai karke ayurvedic ka demand aaj market se kam ho chuka

हमारे भारत देश में 300 साल पहले बोलो 500 साल पहले बोलो महाभारत काल से जो दवाई चलती आ रही

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