इंटरनेट के कारण आज कल का युवा बात करने की शैली भूल रहा है, क्या यह बात सही है?...


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Sapna

Social Worker

2:00

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आपका प्रश्न है इंटरनेट के कारण आज कल का युवा बात करने की शैली बोल रहा है क्या यह बात सही है तो आपका जो प्रश्न है तो मैं अपने अनुभव के अनुसार यही बताना चाहूंगी कि आप जो बोल रहे हैं वह बिल्कुल सही है इंटरनेट के कारण जो आज का युवा है वह पैसे और महिलाओं के पीछे भाग रहा है स्त्री जाति के पीछे भाग रहा है और पैसा ज्यादा से ज्यादा हमारे पास आए हो कैसी आई ऐसी बातों के प्रति भाग रहा है इंटरनेट पर यदि कोई युवा चलता है तो उसके दो ही सपने हो जाते हैं एक सुंदर कोई लड़की मिले या हमें इतना पैसा मिले कि जिससे हमें सुंदर लड़की मिल आसानी हो पैसा वह क्या चाहता है क्योंकि उसके अंदर ऐसी भावनाएं आ जाती हैं जो उसे सिर्फ पैसा और लड़की यह दो ही चीज है पानी की जिंदगी में सीता बनी रहती है जिसके कारण उसे और जो उसके फर्ज होते हैं जिसके प्रति उसके फल जोड़ते हैं कि उसे जो हमारे अन्य लोग हैं हमारे परिवार के लोग हैं समाज के लोग हैं देश के लोग हैं उनके लिए हमें क्या करना चाहिए हमें उन्हें कैसी नजर से देखना चाहिए उनसे हमें ऐसी कैसे बोलना चाहिए तो यह वह सारी जो संस्कार होते हैं वह भूल जाता है उसे बस दो ही बातों का ध्यान रहता है जो मैं आपको बता चुकी हूं इंटरनेट के कारण आज का युवा इस तरीके से बर्बादी के रास्ते पर जा रहा है सपना शर्मा

aapka prashna hai internet ke karan aaj kal ka yuva baat karne ki shaili bol raha hai kya yah baat sahi hai toh aapka jo prashna hai toh main apne anubhav ke anusaar yahi batana chahungi ki aap jo bol rahe hain vaah bilkul sahi hai internet ke karan jo aaj ka yuva hai vaah paise aur mahilaon ke peeche bhag raha hai stree jati ke peeche bhag raha hai aur paisa zyada se zyada hamare paas aaye ho kaisi I aisi baaton ke prati bhag raha hai internet par yadi koi yuva chalta hai toh uske do hi sapne ho jaate hain ek sundar koi ladki mile ya hamein itna paisa mile ki jisse hamein sundar ladki mil aasani ho paisa vaah kya chahta hai kyonki uske andar aisi bhaavnaye aa jaati hain jo use sirf paisa aur ladki yah do hi cheez hai paani ki zindagi me sita bani rehti hai jiske karan use aur jo uske farz hote hain jiske prati uske fal jodte hain ki use jo hamare anya log hain hamare parivar ke log hain samaj ke log hain desh ke log hain unke liye hamein kya karna chahiye hamein unhe kaisi nazar se dekhna chahiye unse hamein aisi kaise bolna chahiye toh yah vaah saari jo sanskar hote hain vaah bhool jata hai use bus do hi baaton ka dhyan rehta hai jo main aapko bata chuki hoon internet ke karan aaj ka yuva is tarike se barbadi ke raste par ja raha hai sapna sharma

आपका प्रश्न है इंटरनेट के कारण आज कल का युवा बात करने की शैली बोल रहा है क्या यह बात सही ह

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Kumar lalit

Life Coach , Love Guru , Hotel Cunsultant, Motivational Speekar

4:48
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नमस्कार मैं ललित कुमार दिल्ली से मोटिवेशनल स्पीकर हूं और जीवन के रूप में अपने आप को आप क्या कर रहा हूं जीवन गुरु का मतलब नहीं है कि मुझे आधा जीवन का ज्ञान हो जाएगा अपने जीवन से जो ज्ञान प्राप्त किया उसके द्वारा आपके सवालों का जवाब देने की कोशिश करूंगा इंटरनेट के कारण आजकल युवा बात करने की शैली बोल रहा है क्या यह बात सही है बिल्कुल सही है जी क्योंकि हर वक्त आप कुछ देखते हैं और सुनते हैं और खेलते हैं ठीक है आप टाइप करते हैं थोड़ा सा इंग्लिश टूटी-फूटी तो बात तो नहीं करते आप किसी से बात नहीं करते हैं एक बहुत बड़ा इसका महीने स्पीड इंटरनेट के ऊपर जो भी आप कितने भी कमा रहे हो ए लाखों-करोड़ों यह जो भी आप देखते होंगे यूट्यूब पर तो उसके उसका मतलब यह निकल रहा है कि उसका अंजाम क्या हो रहा है भैया आप किसी के सामने बैठ कर बात नहीं करते हो आमने-सामने बैठते नहीं है रूबरू नहीं होते हो और जब बात नहीं करते हो तो शब्दों की कमी अपने आप हो जाती है एजुकेशन सो जाती है आपको मैंने नजर नहीं आता उसमें किसी के सामने बैठ कर बात करने में कोई परेशानी है तो है लगी के कम से कम जो बोलना चाहता है मेरे जैसा आदमी उसे बोलने के लिए प्लेटफार्म तो मिल रहा है नेटवर्क पढ़ते रहना सब चीज बड़ा भारी हो जाता है आपको अपनी जो सीखा है उसको निकालना भी तो है आपको जो आया है उसको बताना भी तो है इसलिए जो है बहुत ही बेहतरीन मुझे लगा और बहुत सारे लोग बोल करके अपने किसी के हाजी टाइप करते हैं शर्माते हैं किसी भी सवाल नहीं कर पाते हैं उनके लिए भी प्लेटफार्म बहुत बढ़िया है आप सवाल कर लीजिए आपकी जानकारी गुप्त है और आपके जवाब सवाल का जवाब भी आपको कई लोगों के द्वारा बैठे-बैठे घर में आपको किसी के पास नहीं जाना लेकिन आपको 100 लोग भी शायद एक ही टॉपिक अपनी राय दे देंगे उसमें जिसकी आपको सलाह अच्छी लगे और जिस का तरीका अच्छा लगे और आपको जिसकी काबिलियत हो उसमें आपको नजर आए उसके जवाब दो आप अपने जीवन में बस मेरा यही सवाल बिल्कुल सही बात है आपको हर काम एक-दो घंटे बाद चेंज करते रहना चाहिए जैसे अगर आप सिगरेट भी पीते हो तो मेरा यह मानना है क्या करेगी ब्रैंडको आप जिंदगी भर पीते हैं तो वह आप पर असर करना बंद कर देती है और इसीलिए हर हफ्ते आपको ब्रांड चेंज करते रहना चाहिए ऐसी शराब का है ऐसी दवाइयों का है एक दवाई अगर लंबे समय तक आप लेते रहते हैं दर्द की पेन किलर तो वह आप पर असर करना बंद कर देते बॉडी उसके हिसाब से एडजस्ट हो जाती है आपके यहां साहब की चीजें सब उसको समझने लग जाते हैं तो इसलिए उस पर वह उसको जीतने का काम चालू कर देते तो यही बता रहा हूं मैं आपको कि कोई भी काम एकदम से एक ही पैटर्न पर एक ही तरीके से नहीं करना चाहिए और इसमें थोड़ा थोड़ा बदलाव करते रहना थोड़ा आप सुने थोड़ा देखें थोड़ा पड़े अपने जो भी लिया है उसको अपने दोस्तों फोन करके बताओ ऐसी बताने लगा यार यह होता है वह बता चाइना में ऐसा होता है वैसा होता है बराबर आपको रखनी चाहिए और किताबें पढ़ते रहे जो बायोग्राफी है कहानियां है मुंशी प्रेमचंद हैं और भी बहुत सारे हैं मंटू हैं उनके सारे गद कहानियां हैं जो पढ़ते रहे तो आपको सब चीज में महारत आपको बता दूं लास्टली अगर आप इंटरनेट से पैसे तो कमा रहे हैं और आप अपने जो वे विचार है वह अगर किसी के सामने व्यक्त नहीं कर पा रहे हैं और आपको हैबिटेशन हो रहा है किसी के सामने बैठने में आपको लगता है टाइम वेस्ट हो रहा है तो यहां भी आपको आगे दिक्कतें आने वाली पैसा आपका जीवन साथी आपको पसंद करें या ना करें यह बड़ी एक मैटर हो जाता है आपके लाइफ पार्टनर कि आपका कोई फ्रेंड आपकी कोई गर्लफ्रेंड है आपकी कोई आपका जिसकी तरफ रुझान वह आपकी आदतों को पसंद कर रही है नहीं कर रही है बहुत बड़ी चीज होती है आप जानिए धन्यवाद

namaskar main lalit kumar delhi se Motivational speaker hoon aur jeevan ke roop me apne aap ko aap kya kar raha hoon jeevan guru ka matlab nahi hai ki mujhe aadha jeevan ka gyaan ho jaega apne jeevan se jo gyaan prapt kiya uske dwara aapke sawalon ka jawab dene ki koshish karunga internet ke karan aajkal yuva baat karne ki shaili bol raha hai kya yah baat sahi hai bilkul sahi hai ji kyonki har waqt aap kuch dekhte hain aur sunte hain aur khelte hain theek hai aap type karte hain thoda sa english tuti phooti toh baat toh nahi karte aap kisi se baat nahi karte hain ek bahut bada iska mahine speed internet ke upar jo bhi aap kitne bhi kama rahe ho a laakhon karodo yah jo bhi aap dekhte honge youtube par toh uske uska matlab yah nikal raha hai ki uska anjaam kya ho raha hai bhaiya aap kisi ke saamne baith kar baat nahi karte ho aamane saamne baithate nahi hai rubaru nahi hote ho aur jab baat nahi karte ho toh shabdon ki kami apne aap ho jaati hai education so jaati hai aapko maine nazar nahi aata usme kisi ke saamne baith kar baat karne me koi pareshani hai toh hai lagi ke kam se kam jo bolna chahta hai mere jaisa aadmi use bolne ke liye platform toh mil raha hai network padhte rehna sab cheez bada bhari ho jata hai aapko apni jo seekha hai usko nikalna bhi toh hai aapko jo aaya hai usko batana bhi toh hai isliye jo hai bahut hi behtareen mujhe laga aur bahut saare log bol karke apne kisi ke haji type karte hain sharmate hain kisi bhi sawaal nahi kar paate hain unke liye bhi platform bahut badhiya hai aap sawaal kar lijiye aapki jaankari gupt hai aur aapke jawab sawaal ka jawab bhi aapko kai logo ke dwara baithe baithe ghar me aapko kisi ke paas nahi jana lekin aapko 100 log bhi shayad ek hi topic apni rai de denge usme jiski aapko salah achi lage aur jis ka tarika accha lage aur aapko jiski kabiliyat ho usme aapko nazar aaye uske jawab do aap apne jeevan me bus mera yahi sawaal bilkul sahi baat hai aapko har kaam ek do ghante baad change karte rehna chahiye jaise agar aap cigarette bhi peete ho toh mera yah manana hai kya karegi braindako aap zindagi bhar peete hain toh vaah aap par asar karna band kar deti hai aur isliye har hafte aapko brand change karte rehna chahiye aisi sharab ka hai aisi dawaiyo ka hai ek dawai agar lambe samay tak aap lete rehte hain dard ki pen killer toh vaah aap par asar karna band kar dete body uske hisab se adjust ho jaati hai aapke yahan saheb ki cheezen sab usko samjhne lag jaate hain toh isliye us par vaah usko jitne ka kaam chaalu kar dete toh yahi bata raha hoon main aapko ki koi bhi kaam ekdam se ek hi pattern par ek hi tarike se nahi karna chahiye aur isme thoda thoda badlav karte rehna thoda aap sune thoda dekhen thoda pade apne jo bhi liya hai usko apne doston phone karke batao aisi batane laga yaar yah hota hai vaah bata china me aisa hota hai waisa hota hai barabar aapko rakhni chahiye aur kitaben padhte rahe jo Biography hai kahaniya hai munshi Premchand hain aur bhi bahut saare hain mantu hain unke saare gad kahaniya hain jo padhte rahe toh aapko sab cheez me maharat aapko bata doon lastly agar aap internet se paise toh kama rahe hain aur aap apne jo ve vichar hai vaah agar kisi ke saamne vyakt nahi kar paa rahe hain aur aapko habitation ho raha hai kisi ke saamne baithne me aapko lagta hai time west ho raha hai toh yahan bhi aapko aage dikkaten aane wali paisa aapka jeevan sathi aapko pasand kare ya na kare yah badi ek matter ho jata hai aapke life partner ki aapka koi friend aapki koi girlfriend hai aapki koi aapka jiski taraf rujhan vaah aapki aadaton ko pasand kar rahi hai nahi kar rahi hai bahut badi cheez hoti hai aap janiye dhanyavad

नमस्कार मैं ललित कुमार दिल्ली से मोटिवेशनल स्पीकर हूं और जीवन के रूप में अपने आप को आप क्य

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Shwetima Sahay

Social Worker

4:40
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

प्रश्न इंटरनेट के कारण आज कल का युवा बात करने की शैली भूल रहा है क्या बात सही है कुछ हद तक सही भी है क्या होता है ना कि इंटरनेट आपकी सुविधा के लिए है आप हमें किस ढंग से उसके उपयोग करते हैं ना वह आप पर डिपेंड करता है इंटरनेट है मोबाइल है व्हाट्सएप फेसबुक से आइए आपका सोशल मीडिया से जितनी भी यह आपको पॉजिटिविटी के लिए आपके काम के लिए है लेकिन हम क्या करते हैं कि हम इस पर दिन रात चैटिंग कर रहे हैं समय बर्बाद चल रहे हैं फोन पर सारा दिन लगे रहे बे फालतू कभी बात करने में लगे हुए हैं और अपना-अपना जो काम होता है उसको डाल देते हैं तो इंटरनेट पर बहुत सारी गलत चीजें भी हम देख सकते हैं घर बैठे बैठे तो वह भी देख रहे हैं गाली गलौज चित्र हम हम इस चीज को किस ढंग से यूज करें उस पर डिपेंड करता है यह नहीं है कि इंटरनेट गलत है या व्हाट्सएप कर लेते या फोन गलत है यह इन्वेंशन आपके लाइफ इजी बनाने के लिए वह तो आप इसका सदुपयोग करें दुरुपयोग ना करें तो अगर हम इसका दुरुपयोग करेंगे तो हम गलत आदतें सीखेंगे गलत बातें सीखेंगे और सदुपयोग करेंगे तो आपके काम के लिए बहुत हेल्पफुल है जिसे हम घर बैठे बैठे आप भी क्या है लॉन्ग डाउन है लेकिन हम क्या करते हैं जो ऑफिस में प्राइवेट शिक्षण में या फिर गवर्नमेंट के पास आज ऑफिस भेजो कि फ्रॉम होम हो रहा है तो यह हम क्यों कर पा रहे इंटरनेट की सुविधा इसीलिए हमारा जो है प्राइवेट शिक्षण का जो प्राइवेट सेक्टर का जो काम है वह रुका नहीं है वह कर रहे हैं लोग घर बैठे बैठे हम कुछ खाने का मन हुआ तो हम इतना सुविधा इतने सारे ऐप आ गए हैं जोमैटो है सही है तो हम ऑर्डर कर पा रहे हैं यह सब हमारे आपके लिए है अब हम बैठ के सारा दिन व्हाट्सएप पर चैटिंग कर रहे हैं या फिर गाली गलौज कर रहा है उसे गलत देख रहें यह हमारी अपनी गलती है या कि इंटरनेट की गलती है तो इसलिए जो इंटरनेट के कारण जो युवा बातें करने की शैली भूले इंटरनेट की जगह भी गलती नहीं है उनकी अपनी गलती है उनके अपने अपनी सोच उनकी खराब होती जा रही है तो इसलिए इंटरनेट इतनी देर तक यूज़ करें किताब को जरूरत है बाकी समय आप की ताबीर पड़े हैं और हर किसी को पहले क्या था ना कि हम लोग नंदन नंदन सारी नंदन चंपक बहुत सारी ऐसी आती थी बुक्स होती थी जितना अमर चित्र कथाएं होती थी तुमसे हम लोग पढ़ पढ़ कर बहुत सारे नॉलेज के इन करते थे बहुत सारे छोटे-छोटे पंचतंत्र की कहानियां होती बहुत अच्छी अच्छी कहानियां 30 दिन हम लोग को बहुत अच्छी अच्छी सीख मिलती थी तो हम लोग सब पढ़कर अपने खाली समय में वह सब पढ़ते थे एकदम परेशान रहते थे उसको पढ़ने के लिए नंदन पड़े चंपक पर अपना बहुत सारे चंद्रकांता की स्टोरी है पढ़ते थे तो इससे विक्रम बेताल पढ़ते थे तो बहुत सारे अमरजीत कथाएं हुआ करती थी फैमिली पिक स्वागत तिथि जून आगरा स्पेशल पढ़ने के लिए परेशान रहते थे में अच्छी-अच्छी बातें सिखाई में हमें बहुत सारी पुरानी कथाओं का आम लोगों को नॉलेज होता था पंचमी की बहुत सारी पुरानी पुरानी कथाएं होती थी जिसे हम दो बना ले जाता था तो आजकल के बच्चे जो हैं आजकल के युवा जो है ना वह बस खाली समय में क्या कहते हैं इंटरनेट चला रहे हैं कुछ नहीं है तो इधर उधर दिमाग सटक गया खाली दिमाग शैतान का घर तो इसलिए इंटरनेट का यूज आप सिर्फ अपने सुविधा की अपने काम तक के लिए करें बाकी समय में आप किताबी नॉलेज प्ले किताबी नॉलेज बहुत ही जरूरी होता हर किसी के लिए किताब को पढ़ना उसे नॉलेज के निकट इसीलिए आज के युवा को इंटरनेट पर अपने काम तक यूज़ करना चाहिए व्हाट्सएप है तो आपको जरूरत है तो व्हाट्सएप यूज कीजिए अगर किसी से फोन पर बात करनी है तो तुझे जितना काम भरे ना सारा दिन एकदम लगे वह पता नहीं यार तू फालतू सब इसमें गलती कभी हमारे फोन की इंटरनेट किए सबकी कभी गलती नहीं होती गलती हमारी सोच की होती है

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प्रश्न इंटरनेट के कारण आज कल का युवा बात करने की शैली भूल रहा है क्या बात सही है कुछ हद तक

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Rahul Jangra

Health and Fitness Expert, Yoga Teacher

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आपने क्या कहा इंटरनेट के कारण आजकल युवा बात करने की शैली भूल रहा है या बात या क्या यह बात सही है बिल्कुल या वैसे ही आज के युवा हैं ज्यादातर अपना समय इंटरनेट से गुजार रहे हैं इंटरनेट पर क्या होता है कि हमारा जो पूरा का पूरा जब नॉलेज होता है उसमें कई प्रकार के तरह के लोग होते हैं क्योंकि वाले लड़का मूवी देख रहा है चित्र देख रहा कुछ भी देख रहा होता है लेकिन टावर नहीं मिलता है यह बिल्कुल समाजिक होता जा रहा है पता नहीं कहां से सीख कर के आया है तो हम भी कह सकते हैं आप बिल्कुल कह रहे हैं कि इंटरनेट के कारण आज के युवाओं के बात करने की पहली बिल्कुल प्रभावित हो गई है क्योंकि वह इंटरनेट पर बहुत सारे आइकन को बहुत सारे लोगों को बहुत कुछ देखते हैं तो उनसे उनका जो जीवन प्रभावित हो रहा उनकी भाषा शैली उनका रहन-सहन आपने इतने समय देखा होगा छोटा बच्चा 3 साल का बच्चा है वह भी हेयर स्टाइल इतने समय तक इसकी ले लिया है तो सब पूर्व पूरा जीवन प्रभावित हो रहा है कि हर जो भी इंटरनेट से या किसी भी पर डिवाइस से या किसी अच्छे व्यक्ति से संपर्क में आते तो में बदलाव जरूर आता है तो इस प्रकार से हुआ में बदलाव है उस बदलाव कंपोस्ट बदलाव कहेंगे हम नहीं करेंगे लेकिन हां एक चीज होती है सिटी में कन्वर्ट हो जाती है तो पार्टी बदलाव कौन एक्सेप्ट करना चाहिए नंगे टू बतलाओ जब हमें बच्चे ने दिख रहा है युवाओं में देख रहा है तो उसको रोकना चाहिए उनको सही मार्गदर्शन करने की जरूरत है तो यह समाज को बच्चों को सही मार्गदर्शन और दिशा देना चाहिए

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आपने क्या कहा इंटरनेट के कारण आजकल युवा बात करने की शैली भूल रहा है या बात या क्या यह बात

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नमस्कार यह सच है कि आज का युवा वर्ग है वह भाषा का संस्कार बोलता जा रहा है माता की तमीज भूलता जा रहा बोलचाल की जो हमारी भाषा है वह बिगड़ती जा रही है अब दिक्कत यह है कि आज का जो युवा वर्ग है वह कहता है कि यही भाषा अच्छी है बोलचाल की जो यह लैंग्वेज है जिसे आज के जमाने में हम इंग्लिश में कहते हैं सबसे अच्छी मानते हैं उसे आज आज के युवा दो पीढ़ियों का टकराव भी है जो युवाओं की से पहले की पीढ़ी है वह मानती है कि वह जिस बोलचाल में जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं जैसा वह बोलते हैं वह अच्छी है और दूसरी पीढ़ी मतलब आज की युवा पीढ़ी कहती है कि नहीं आप की भाषा बड़ी बुरी है और आप जो बोलते हैं जैसा बोलते हैं बहुत कम्युनिटी कि नहीं लेकिन जो आज की युवा पीढ़ी है जो वह जो भाषा इस्तेमाल करती हूं जिस तरह की लैंग्वेज इस्तेमाल करती हो ज्यादा कब निकलेगी है और ज्यादा सरल है ज्यादा और कम समय लेती है कि नहीं करता उसमें बोलना भी यह एक उसमें शामिल हो गया कि लोग अब जल्दी बोलना चाहते हैं फटाफट बोलना चाहते हैं बात को तुरंत खत्म करना चाहते हैं क्योंकि उसकी भी दूसरे काम पड़े हुए आज की जो मल्टीनेशनल कंपनियों में या जो भी निजी सेक्टर में ज्यादा लोग नौकरी करते हैं वहां मोकरिया ज्यादा है और वहां काम का दबाव बहुत ज्यादा है पढ़ाई तो कर रहा है उसके लिए कंपटीशन बहुत बढ़ गया है वह जब किसी कंपटीशन एग्जाम की तैयारी कर रहा होता है तो उसके लिए और ढेर सारी चीजें पगली प्रति कितनी से बहुत सारे लोगों से कंपटीशन करना है और उन सबको पीछे छोड़ करके आगे बढ़ना जो इससे पहले कि उनके सामने भी चुनौतियां थी उनकी सामने भी मुश्किलें थी लेकिन जिंदगी इतनी आपाधापी भरी नहीं थी कंपटीशन इस हद तक नहीं था क्योंकि तब जनसंख्या भी कम थी और शिक्षा का भी प्रचार प्रसार था वह इतना ज्यादा नहीं था तो शिक्षित लोग कम थे और जो कंपटीशन में ऊबी कम होती थी तुम उस तरह से उतना कंपटीशन नहीं था आज कंपटीशन बढ़ गया है तो एक तो उस कंपटीशन को फ्रेश करने के लिए अपना ज्यादा समय देना पड़ता और बाकी सब जगह चुराते हैं खाना भी बाकी काम अगर वह अपनी पढ़ाई कितनी सीरियस है तो उसे देना चाहता है तो यह सब जो आज की जोड़ी है अपनी जो बदलती हुई पाता है तू आजकल तू है पहली की भाषा आप कह सकते हैं कि संस्कारी भाषा से किसी को सम्मान हम देते थे बातचीत का लहजा अगर हम बड़ों की बात कर रहे हैं तो हमारा यह क्या बताता था कि हम उसे सम्मान दे रहे हमारी भाषा में ऐसे हमारी बोलचाल में से सब तो होते थे जो बताते थे कि मुझे सम्मान दे रहे हैं जो बनता है वह ज्यादा शॉर्ट फॉर्म में बातें होती हैं जैसे अगर कोई हमें पूरा तक लिखना है तो वह उसका शॉर्ट फॉर्म अब लिख देते टेक केयर देते हैं तो हम कह देते हैं कि कि तू उससे गुड नाईट बोल देते हैं जबकि हमारा हमारे समय में यह कहे कि इस युवा पीढ़ी पहले की प्रीति को शुभरात्रि क्या मतलब किसी को पूरी भक्ति का इस्तेमाल करती थी कि अपना ख्याल रखिएगा जा रहे हैं तो कहीं भी आपको हमारी शुभकामनाएं तू समय भाषा की लिपि के उसके पीछे सबसे बड़ी वजह यही है समय की कमी है असर देकर आप इंटरनेट कोई वह बता रहे हैं वह बता रहे हैं कि पश्चिमी देशों में जो शैली विकसित हुई वहीं भारत में अपनाई जा रही है इंटरनेट टीवी चैनल हमसे तमाम तरह के कार्यक्रम होते हैं उनकी वगैरा-वगैरा आज का युवा वर्ग प्रभावित होता है और बहुत हद तक उसकी नकल भी करता है क्योंकि आप देखिए अमेरिका इंग्लैंड स्पेन इटली फ्रांस जर्मनी को हम बुद्धिमान कम सफल देश मानते हैं और हम जिद्दी सुख सफल देश मानते हैं वहां जो कुछ भी हो रहा है उसे अपनाना चाहते हैं यही वजह है कि आज की युवा पीढ़ी है वह विदेश भागना चाहती कि मानती है कि वह बहुत अच्छा देश है बहुत साफ सुथरा और सारी सुविधाओं वाला देश है सुविधा संपन्न है तू उसकी नकल की भी प्रगति होगी जो अच्छा देश देश को माना जा रहा है उसकी नकल की प्रवृत्ति भी दूसरी वजह यह भी है कि अपने देश के प्रति को लगाओ जुड़ा है इस चकाचौंध के आगे फीकी पड़ती जा रही हालांकि यह सब के दिन को विदेश जाने का मौका मिलता है वह छोड़ देते हैं या फिर विदेश जा कर के फिर अपने देश में आकर के नए सिरे से काम करते हैं छोटा काम खाकर तो उसे बड़े मुकाम तक ले जाते हैं और जो बहुतायत में हैं वह पश्चिमी देशों से प्रभावित है और प्रभाव पैदा करने में प्रभाव पैदा करने में इंटरनेट की भूमिका बहुत ज्यादा है टीवी की भूमिका बहुत ज्यादा है और इन्हीं सब बातों से यह असर हो रहा है धन्यवाद

namaskar yah sach hai ki aaj ka yuva varg hai vaah bhasha ka sanskar bolta ja raha hai mata ki tamij bhulta ja raha bolchal ki jo hamari bhasha hai vaah bigadati ja rahi hai ab dikkat yah hai ki aaj ka jo yuva varg hai vaah kahata hai ki yahi bhasha achi hai bolchal ki jo yah language hai jise aaj ke jamane me hum english me kehte hain sabse achi maante hain use aaj aaj ke yuva do peedhiyon ka takraav bhi hai jo yuvaon ki se pehle ki peedhi hai vaah maanati hai ki vaah jis bolchal me jis tarah ki bhasha ka istemal karte hain jaisa vaah bolte hain vaah achi hai aur dusri peedhi matlab aaj ki yuva peedhi kehti hai ki nahi aap ki bhasha badi buri hai aur aap jo bolte hain jaisa bolte hain bahut community ki nahi lekin jo aaj ki yuva peedhi hai jo vaah jo bhasha istemal karti hoon jis tarah ki language istemal karti ho zyada kab nikalegi hai aur zyada saral hai zyada aur kam samay leti hai ki nahi karta usme bolna bhi yah ek usme shaamil ho gaya ki log ab jaldi bolna chahte hain phataphat bolna chahte hain baat ko turant khatam karna chahte hain kyonki uski bhi dusre kaam pade hue aaj ki jo multinational companion me ya jo bhi niji sector me zyada log naukri karte hain wahan mokriya zyada hai aur wahan kaam ka dabaav bahut zyada hai padhai toh kar raha hai uske liye competition bahut badh gaya hai vaah jab kisi competition exam ki taiyari kar raha hota hai toh uske liye aur dher saari cheezen pagli prati kitni se bahut saare logo se competition karna hai aur un sabko peeche chhod karke aage badhana jo isse pehle ki unke saamne bhi chunautiyaan thi unki saamne bhi mushkilen thi lekin zindagi itni apadhapi bhari nahi thi competition is had tak nahi tha kyonki tab jansankhya bhi kam thi aur shiksha ka bhi prachar prasaar tha vaah itna zyada nahi tha toh shikshit log kam the aur jo competition me ubi kam hoti thi tum us tarah se utana competition nahi tha aaj competition badh gaya hai toh ek toh us competition ko fresh karne ke liye apna zyada samay dena padta aur baki sab jagah churate hain khana bhi baki kaam agar vaah apni padhai kitni serious hai toh use dena chahta hai toh yah sab jo aaj ki jodi hai apni jo badalti hui pata hai tu aajkal tu hai pehli ki bhasha aap keh sakte hain ki sanskari bhasha se kisi ko sammaan hum dete the batchit ka lahaja agar hum badon ki baat kar rahe hain toh hamara yah kya batata tha ki hum use sammaan de rahe hamari bhasha me aise hamari bolchal me se sab toh hote the jo batatey the ki mujhe sammaan de rahe hain jo banta hai vaah zyada short form me batein hoti hain jaise agar koi hamein pura tak likhna hai toh vaah uska short form ab likh dete take care dete hain toh hum keh dete hain ki ki tu usse good night bol dete hain jabki hamara hamare samay me yah kahe ki is yuva peedhi pehle ki preeti ko shubhratri kya matlab kisi ko puri bhakti ka istemal karti thi ki apna khayal rakhiega ja rahe hain toh kahin bhi aapko hamari subhkamnaayain tu samay bhasha ki lipi ke uske peeche sabse badi wajah yahi hai samay ki kami hai asar dekar aap internet koi vaah bata rahe hain vaah bata rahe hain ki pashchimi deshon me jo shaili viksit hui wahi bharat me apnai ja rahi hai internet TV channel humse tamaam tarah ke karyakram hote hain unki vagera vagera aaj ka yuva varg prabhavit hota hai aur bahut had tak uski nakal bhi karta hai kyonki aap dekhiye america england Spain italy france germany ko hum buddhiman kam safal desh maante hain aur hum jiddi sukh safal desh maante hain wahan jo kuch bhi ho raha hai use apnana chahte hain yahi wajah hai ki aaj ki yuva peedhi hai vaah videsh bhaagna chahti ki maanati hai ki vaah bahut accha desh hai bahut saaf suthara aur saari suvidhaon vala desh hai suvidha sampann hai tu uski nakal ki bhi pragati hogi jo accha desh desh ko mana ja raha hai uski nakal ki pravritti bhi dusri wajah yah bhi hai ki apne desh ke prati ko lagao juda hai is chakachaundh ke aage feeki padti ja rahi halaki yah sab ke din ko videsh jaane ka mauka milta hai vaah chhod dete hain ya phir videsh ja kar ke phir apne desh me aakar ke naye sire se kaam karte hain chota kaam khakar toh use bade mukam tak le jaate hain aur jo bahutayat me hain vaah pashchimi deshon se prabhavit hai aur prabhav paida karne me prabhav paida karne me internet ki bhumika bahut zyada hai TV ki bhumika bahut zyada hai aur inhin sab baaton se yah asar ho raha hai dhanyavad

नमस्कार यह सच है कि आज का युवा वर्ग है वह भाषा का संस्कार बोलता जा रहा है माता की तमीज भूल

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Urbanbaba

Health and Fitness Expert

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नहीं मुझे यह नहीं लगता कि आजकल फोन और स्मार्टफोन की वजह से आजकल का युवा बात करने की कला को भूल रहा है बल्कि यूट्यूब टॉप और ऐसी ऐप से तो बहुत कुछ सीख सकता है बहुत कुछ सीखता है बहुत लोगों का उसका जो एक्स्पोज़र है वह बहुत ज्यादा बढ़ जाता है उसको ज्यादा से ज्यादा लोग देखने को मिलने पर किस चीज को सीखना चाहता है किस चीज को नहीं सीखना चाहता है तो यह मेरा

nahi mujhe yah nahi lagta ki aajkal phone aur smartphone ki wajah se aajkal ka yuva baat karne ki kala ko bhool raha hai balki youtube top aur aisi app se toh bahut kuch seekh sakta hai bahut kuch sikhata hai bahut logo ka uska jo ekspozar hai vaah bahut zyada badh jata hai usko zyada se zyada log dekhne ko milne par kis cheez ko sikhna chahta hai kis cheez ko nahi sikhna chahta hai toh yah mera

नहीं मुझे यह नहीं लगता कि आजकल फोन और स्मार्टफोन की वजह से आजकल का युवा बात करने की कला को

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Bk Ashok Pandit

आध्यात्मिक गुरु

4:23
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बिल्कुल ही इंटरनेट के कारण आजकल कई बार बात करने की सैलरी मिल गया है यह जो आपने यह प्रश्न पूछा बिल्कुल ही राइट है क्योंकि इंटरनेट आने से इस मोबाइल के अंदर पूरी दुनिया ही मुट्ठी में आ गया है पहले हम बचपन से ही सुना करते थे के चाहे राम जी है या इसे देवी देवता हैं या रावण ने भी पूरे विश्व पराजित किया विश्व में उनके ऐसे अधीन थे इस प्रकार से बहुत सारे किस्सा कहानियां बचपन से ही सुनते आए हैं लेकिन यह सुनकर के आश्रय लगता था कि कैसे यह संभव हो सकता है कि विश्व को अपना अधीन बना ले विश्व पर शासन करें लेकिन आज के जो परिवेश है यह हम देख रहे हैं कि यह जो साइंस के स्टूडेंट यस साधन है और उसने विशेष इंटरनेट के द्वारा पूरे दुनिया ही अपने मुट्ठी में है जब चाहे तब जोशी देखना चाहे अच्छाई और बुराई सब चीजें इस में व्याप्त है और इस कारण से व्यक्ति इतना इसमें रंग चुका है कि बाजू में अपना होते भी अपनों से कितना दूर चला गया है और इसी कारण से आज अपनों के द्वारा जो समय प्यार का आदान-प्रदान होता था वह जैसे जीवन सुख गया है जीवन का साहिन बन चुका है क्योंकि अनेक मनोरंजन के साधन अनेक प्रकार के नॉलेज क्या जिसके द्वारा तो मिल जाएगा लेकिन जो फीलिंग महसूस ताजा है जो जब एक दूसरे के पास बैठते हैं प्यार से बात करते हैं अपने दिल का वध उद्गार उनके सामने रखते हैं और जो अनुभूति उनके द्वारा होती है और सदा के लिए समिति बन जाती है वह इस तरह प्राप्त नहीं होगा थोड़ा सा मंजन कर सकते हैं यह घंटा दो घंटा जब तक रहेंगे लेकिन जो फीलिंग जो चाहिए वह फीलिंग या नहीं होता है तो सिर्फ बात करना है यही नहीं बात करने के लिए उनकी लंबाई जो है वह शिव भोला है लेकिन इसके साथ-साथ बहुत सारी चीजें हैं जो जीवन के अनुरूप होनी चाहिए वह सब आज केवाय गलत मार्केट जा रहे हैं भले ही साइंस चांद तक पहुंच गया लेकिन आज बैठेंगे बागी में एक व्यक्ति की से कितना दूर हो गए तो अनेक प्रकार से देखा जाए कि यह साधन एक प्रकार से यह मनुष्य के लिए सिटी युवाओं के लिए नहीं लेकिन हर वर्ग के लिए हर आयु के के लिए यही एक अभिशाप बनता जा रहा है पिछले जितना आवश्यक है इन साधनों का इतना ही उपयोग में लाई है मां के साधन का आधार नहीं बनाई है जो आपके पास जो लोग है उनके दिल का भाव क्या है वह समझने का प्रयास कीजिए एक दूसरे को बहुत प्यार से रिस्पेक्ट से बात कीजिए सम्मानजनक बात कीजिए अपनापन अंदर आइए कुछ दीजिए यही एक जीवन है जिसमें हम सुख दुख का अनुभव कर सकते हैं

bilkul hi internet ke karan aajkal kai baar baat karne ki salary mil gaya hai yah jo aapne yah prashna poocha bilkul hi right hai kyonki internet aane se is mobile ke andar puri duniya hi mutthi me aa gaya hai pehle hum bachpan se hi suna karte the ke chahen ram ji hai ya ise devi devta hain ya ravan ne bhi poore vishwa parajit kiya vishwa me unke aise adheen the is prakar se bahut saare kissa kahaniya bachpan se hi sunte aaye hain lekin yah sunkar ke asray lagta tha ki kaise yah sambhav ho sakta hai ki vishwa ko apna adheen bana le vishwa par shasan kare lekin aaj ke jo parivesh hai yah hum dekh rahe hain ki yah jo science ke student Yes sadhan hai aur usne vishesh internet ke dwara poore duniya hi apne mutthi me hai jab chahen tab joshi dekhna chahen acchai aur burayi sab cheezen is me vyapt hai aur is karan se vyakti itna isme rang chuka hai ki baju me apna hote bhi apnon se kitna dur chala gaya hai aur isi karan se aaj apnon ke dwara jo samay pyar ka aadaan pradan hota tha vaah jaise jeevan sukh gaya hai jeevan ka sahin ban chuka hai kyonki anek manoranjan ke sadhan anek prakar ke knowledge kya jiske dwara toh mil jaega lekin jo feeling mehsus taaza hai jo jab ek dusre ke paas baithate hain pyar se baat karte hain apne dil ka vadh ugdar unke saamne rakhte hain aur jo anubhuti unke dwara hoti hai aur sada ke liye samiti ban jaati hai vaah is tarah prapt nahi hoga thoda sa manzan kar sakte hain yah ghanta do ghanta jab tak rahenge lekin jo feeling jo chahiye vaah feeling ya nahi hota hai toh sirf baat karna hai yahi nahi baat karne ke liye unki lambai jo hai vaah shiv bhola hai lekin iske saath saath bahut saari cheezen hain jo jeevan ke anurup honi chahiye vaah sab aaj KY galat market ja rahe hain bhale hi science chand tak pohch gaya lekin aaj baitheange baagi me ek vyakti ki se kitna dur ho gaye toh anek prakar se dekha jaaye ki yah sadhan ek prakar se yah manushya ke liye city yuvaon ke liye nahi lekin har varg ke liye har aayu ke ke liye yahi ek abhishap banta ja raha hai pichle jitna aavashyak hai in saadhano ka itna hi upyog me lai hai maa ke sadhan ka aadhar nahi banai hai jo aapke paas jo log hai unke dil ka bhav kya hai vaah samjhne ka prayas kijiye ek dusre ko bahut pyar se respect se baat kijiye sammanjanak baat kijiye apnapan andar aaiye kuch dijiye yahi ek jeevan hai jisme hum sukh dukh ka anubhav kar sakte hain

बिल्कुल ही इंटरनेट के कारण आजकल कई बार बात करने की सैलरी मिल गया है यह जो आपने यह प्रश्न प

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Dharamvir singh

Serviceman Indian Army

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आपका प्रश्न गणित के कारण आज कल का युवा बात करने के लिए बोल रहा है यह कहीं तक बात उचित हो सकती है लेकिन पराजित नहीं है इंटरनेट पर आज लाखों-करोड़ों नहीं बल्कि एक अरब से ज्यादा युवा वर्ग इंटरनेट और शिक्षा से जुड़ने वालों की कमी नहीं है उन्हें बहुत से लोग अच्छी बातें भी सीधे बात करनी करने का शैली भी सीख पा रहा है और भूल भी पा रहे हैं दोनों ही सामने आ रही है किसी चीज के मेल से तो उसको डिमैरिट्स भी है यानी कि गुण और दोष हर चीज के होते हैं जिस प्रकार इंसान के अंदर विद्यमान है और अब भी है किसने कहा कि साधु ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय सर सर को त्याग दें सार सार को पहले और थोथा देई उड़ाय जाने की जो हमारे काम की चीज है उसको अपने दिमाग में बताएं अंकल बातों को अनुचित बातों को युवा वर्ग नशे के यही ईश्वर से कामना है कि परमात्मा हमारे देश के युवाओं को सद्बुद्धि प्रदान करें और उनको स्वर्णिम भविष्य की और अपने लक्ष्य की वो परमात्मा को प्रेरित करें थैंक यू धन्यवाद

aapka prashna ganit ke karan aaj kal ka yuva baat karne ke liye bol raha hai yah kahin tak baat uchit ho sakti hai lekin parajit nahi hai internet par aaj laakhon karodo nahi balki ek arab se zyada yuva varg internet aur shiksha se judne walon ki kami nahi hai unhe bahut se log achi batein bhi sidhe baat karni karne ka shaili bhi seekh paa raha hai aur bhool bhi paa rahe hain dono hi saamne aa rahi hai kisi cheez ke male se toh usko dimairits bhi hai yani ki gun aur dosh har cheez ke hote hain jis prakar insaan ke andar vidyaman hai aur ab bhi hai kisne kaha ki sadhu aisa chahiye jaisa soup subhay sir sir ko tyag de saar saar ko pehle aur thotha uday jaane ki jo hamare kaam ki cheez hai usko apne dimag me bataye uncle baaton ko anuchit baaton ko yuva varg nashe ke yahi ishwar se kamna hai ki paramatma hamare desh ke yuvaon ko sadbuddhi pradan kare aur unko swarnim bhavishya ki aur apne lakshya ki vo paramatma ko prerit kare thank you dhanyavad

आपका प्रश्न गणित के कारण आज कल का युवा बात करने के लिए बोल रहा है यह कहीं तक बात उचित हो स

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Gopal Srivastava

Acupressure Acupuncture Sujok Therapist

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बिल्कुल सही कहा आपने कि इंटरनेट के आने से लोगों की बात करने की भाषा व्यवहार बदल गया है बोलचाल के तरीका बदल गया है मिलन सारी खत्म हो गई है सेवा भाव खत्म हो गया है दुग्ध खत्म हो गया है सिर्फ इंटरनेट चाहिए उन्हें और जब से फ्री हो गया है तब से बिल्कुल ही मामला और गड़बड़ हो गया है बाप बेटा जो है बेटा वह वाह-वाह वाह-वाह लगाता है बेटी को आ जाता है कुछ सुनता नहीं है यंग जेनरेशन ऐसी हो गई है उसको कुछ भी कहना उनके लिए बोला है बीच में बाद में उसे नुकसान होता बहुत तेजी से बढ़ता है बाबा को देखने समझते हो वही चीज है

bilkul sahi kaha aapne ki internet ke aane se logo ki baat karne ki bhasha vyavhar badal gaya hai bolchal ke tarika badal gaya hai milan saari khatam ho gayi hai seva bhav khatam ho gaya hai dugdh khatam ho gaya hai sirf internet chahiye unhe aur jab se free ho gaya hai tab se bilkul hi maamla aur gadbad ho gaya hai baap beta jo hai beta vaah wah wah wah wah lagaata hai beti ko aa jata hai kuch sunta nahi hai young generation aisi ho gayi hai usko kuch bhi kehna unke liye bola hai beech me baad me use nuksan hota bahut teji se badhta hai baba ko dekhne samajhte ho wahi cheez hai

बिल्कुल सही कहा आपने कि इंटरनेट के आने से लोगों की बात करने की भाषा व्यवहार बदल गया है बोल

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हां काफी हद तक यह बात चाहिए क्योंकि ज्यादातर युवा है वह आदमी केंद्री बन गया है ना फोन और खुद में ही उनकी दुनिया जो है वह फोन तक ही सीमित हो गई है बहुत गंभीर विषय है

haan kaafi had tak yah baat chahiye kyonki jyadatar yuva hai vaah aadmi kendri ban gaya hai na phone aur khud me hi unki duniya jo hai vaah phone tak hi simit ho gayi hai bahut gambhir vishay hai

हां काफी हद तक यह बात चाहिए क्योंकि ज्यादातर युवा है वह आदमी केंद्री बन गया है ना फोन और ख

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Rajendra

Education

6:24
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आपने बहुत सही प्रश्न उठाया है कि क्या इंटरनेट के कारण आज कल का युवा बात करने की सही बोल रहा है वाकई में इंटरनेट के कारण हमारी बहुत ज्यादा बदल रही है इंटरनेट क्या हम पूरे डिजिटल सुविधाओं के लिए ले मोबाइल में जितने सुविधाएं नहीं थे एप सहित अगर हम सबको ले ले तो हमारी निर्भरता इतनी ज्यादा बढ़ गई है इंटरनेट और मोबाइल पर कि कि हम उसके बिना रह नहीं पाते और दूसरी बात तो हमारे जीवन के हर पक्ष को प्रभावित करेंगे लेकिन ऐसा नकारात्मक कारणों से हुआ ऐसा भी है जब आपको हर समस्याओं का समाधान जहां मिलेगा आपको ही डाल लेना आपको पैसा ट्रांसफर करना है आपको मोबाइल रिचार्ज कराना है आपको टीवी रिचार्ज कराना है आपको किसी भी तुझसे बात करना है किसी कोई संदेश देना है दुनिया की किसी चीज के बारे में जानकारी लेनी है आपको मेडिटेशन करने की विधि सीखनी है आपको गीता रामायण महाभारत पढ़ना है आपका पढ़ने का मन नहीं किताब सुनने का मन है आपका मोबाइल आपको किताब पढ़कर सुनाएगा भजन सुनाए गा पास तार सुनाएगा सत्संग कराएगा फिल्मी गाने दिखाएं गा अच्छी-अच्छी किताबें भी दिखाएगा जीवन की समस्याओं का समाधान देगा खेलकूद भी दिखाएगा आपके का मुख्यमंत्री भी आयाम देगा वह जब इतनी चीजें आपको एक जगह 16 बहुत जीवन की और उसके प्रताप की निर्भरता बढ़ती जाती है और उसके माध्यम से जवाब का संवाद होता है जो आपका सोचना होता है जो आपका विचार होता है वह बहुत कुछ उससे फिर प्रभावित होने लगता लोग कहते ना संगत का असर होता है संगत से रंगत का मतलब हम संगत वहां करते हैं जहां पर खुशी मिलती है खुशी मनाते हैं उनका भी एक बड़ा होकर जाने से उसको अच्छा लगता है कांफिडेंस मिलता है या अपनी पहचान बनती है आपने कुछ होने का एहसास अभी वहीं पर जाता है और वहां से अच्छा बुरा अगर बुरी संगत है तो उन चीजों को सीखता है तो अगर हम अपने इस नेट के जमाने में इस डिजिटल इंडिया के जमाने में हम अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बोर हो चाहे हम बोर हो रहे हैं चाहे प्रसन्न हो चाहे दिखे वह चाहे उदास हैं हम जब बार-बार इंटरनेट में जाते हैं कि वह स्वाभाविक है कि इंटरनेट से हमारी जो संवाद की भाषा है जो हमारे सामान से बात को प्रभावित करेगी और कर भी रही है एक उदाहरण ले आपको पहले जैसे चारों धाम रहते थे तो और भी खतरा था तो कोई समस्या आती थी तो सबसे पहले अपने पास एक डंडा रखते थे लाठी रखे थे उसको उठाते थे अगर कोई अतिथि आ गया कुछ पूछना है तो भी धनबाद के लिए के चलते थे कोई खतरा आ गया तो पहला ध्यान उनका डंडे पर जाता था कुछ भी मतलब दिल भी का कुछ भी कार्य होना है कहीं जाना है 9:00 उठना बैठना है व्यक्ति आया है ब्रेकअप हो जाने जाना हो जाए ला रहा हूं तो वहां पर व्यक्ति को डंडा एक सहारा था धंधे का मतलब था कि वह छोटी मोटी चुनौतियों का ढंग से सामना करता था पशुओं से रखा ही नहीं जीने के दुश्मनों से रक्षा ही प्रमुख चीज नहीं थी धंधा चलने का फायदा करता था उबड़ खाबड़ रास्तों में संभालता था फिर कोई बाधा है तुझको दूर कर देता था और जो हमारी जो कार्य करने की श्रम करने की पद्धति उसमें भी डंडे लाठी-डंडे का एक महत्वपूर्ण मानता को एक उपयोग उपयोगी यंत्र भी था तू अभी तक सोता वैभव बन गया था कि कुछ भी समस्या है कोई भी चुनौती है कोई भी बात है तो सबसे पहले इसका ध्यान डंडे पर जाता था और डंडा लेकर के निकलता था किसी मित्र को जमीदारा तो भी हाथ में डंडा लेकर पहुंचना ले जाता है ऐसा नहीं दुश्मनों के लिए ही अब क्या हो गया है आप देखिए आपको कोई भी समस्या आती है आपका हाथ मोबाइल पर जाता आप किसी से आपको कोई समस्या रिप्लाई जरूर किया रिसर्च वाला हाथ आपका मोबाइल पर जाता है यहां तक कि देखा गया कि अगर घर में सांप निकला है तो आदमी जानता है कि मोबाइल से कुछ लेकिन तब भी उसका हाथ पहले मोबाइल पर जाता है तू अब क्या है कि इस तरफ से हमारी झोली भरता है और यह निर्भरता केवल नकारात्मक कारणों से नहीं है हमको जिंदगी की समस्याओं का जिंदगी की उलझन होगा जिंदगी के आनंद और आवे के चरणों का जब हर चीज का समाधान और संबंधी करण जब रिलेशन हमारा एक मोबाइल में निहित है तो यह कैसे संभव है कि हम मोबाइल से बहुत दूर रह सके कभी-कभी रह सकता है लेकिन लगातार नहीं जा पाते इसीलिए लेकिन इसका जो दूसरा पक्ष मोबाइल एक मशीनीकरण के कारण एक मशीनों से समस्याओं के समाधान होने के कारण हम धीरे-धीरे मस्ती नहीं होते जा रहे हैं मशीन हम पर हावी होती जा रही है और आपने बहुत सही कहा है कि युवा ही नहीं सब जितने लोग प्रयोग करें हैं उनकी भाषा में विचारधारा को प्रभावित कर रहा है हम जान भी नहीं पा रहे हैं हम तुम बाद में पहली भूल जा रहे हैं हम मदद लेने देने की तकनीकी जो हमारी प्रक्रिया है उसको हम बाधित कर रहे हैं हम इंटरनेट तिलिस्मी दुनिया में उलझ के रह गए हैं हम अभी कल से स्पीडी से चाय पुरानी पीढ़ी चाहे जो पूरी हो कभी इंटरनेट जाए 82 पाली जा हुआ है जब जनसामान्य इसका प्रचार प्रसार हुआ है 400 साल के अनुभव से अब लोग यह महसूस करें पूरी दुनिया के लोग महसूस कर रहे हैं कि हमको नेट की निर्भरता से हटकर के अपने तकनीकी और वैज्ञानिक दुनिया से हटकर के अपनी चुनौतियों के कुछ सामान परिस्थितियों का समान ढंग से भी मुकाबला करना हमें सीखना नहीं होगा बल्कि देता करते आए हैं उस प्रक्रिया को भी हमें जीना पड़ेगा क्योंकि मूलतः मनुष्य है हम प्रकृति से निकले हुए जीव हैं मशीन पर बहुत बड़ी निर्भरता जो है और हमारे सुख शांति और विकास में सहायक नहीं होगी

aapne bahut sahi prashna uthaya hai ki kya internet ke karan aaj kal ka yuva baat karne ki sahi bol raha hai vaakai me internet ke karan hamari bahut zyada badal rahi hai internet kya hum poore digital suvidhaon ke liye le mobile me jitne suvidhaen nahi the app sahit agar hum sabko le le toh hamari nirbharta itni zyada badh gayi hai internet aur mobile par ki ki hum uske bina reh nahi paate aur dusri baat toh hamare jeevan ke har paksh ko prabhavit karenge lekin aisa nakaratmak karanon se hua aisa bhi hai jab aapko har samasyaon ka samadhan jaha milega aapko hi daal lena aapko paisa transfer karna hai aapko mobile recharge krana hai aapko TV recharge krana hai aapko kisi bhi tujhse baat karna hai kisi koi sandesh dena hai duniya ki kisi cheez ke bare me jaankari leni hai aapko meditation karne ki vidhi sikhni hai aapko geeta ramayana mahabharat padhna hai aapka padhne ka man nahi kitab sunne ka man hai aapka mobile aapko kitab padhakar sunaega bhajan sunaye jaayega paas taar sunaega 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आपने बहुत सही प्रश्न उठाया है कि क्या इंटरनेट के कारण आज कल का युवा बात करने की सही बोल रह

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Nisha Bhagat

Ex.teacher

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Ritika

Teacher,life Coach,motivational Speaker

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार दोस्तों आज का प्रश्न इंटरनेट के कारण आज कल का युवा बात करने की शैली भूल रहा है क्या यह बात सही है बिल्कुल यह बात हंड्रेड परसेंट सही है इंटरनेट से आज का युवा जो है वह हर एक चीज में अपनी इतनी उलझ गया है कि उसे पास समय ही नहीं होता है किसी से बात करने का किसी से व्यवहार रखने का या आपस में किसी से भी संबंध रखने का क्योंकि हर एक चीज अब ऑनलाइन हो चुकी है और हर एक इंसान पैसे कमाने की होड़ में लगा हुआ है हर एक दुनिया में इतनी महंगाई होती जा रही है कि इंसान कैसे ना कैसे पैसे कमाने के तरीके को खोज रहा है और उसी में लगा हुआ है सब आपस में एक दूसरे से आगे निकलने निकलना चाह रहे हैं ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाना चाहते यही कारण है कि इंसान इंटरनेट में डूबा हुआ है और वह अपनी जीवनशैली को बोल रहा है धन्यवाद आपका दिन शुभ हो

namaskar doston aaj ka prashna internet ke karan aaj kal ka yuva baat karne ki shaili bhool raha hai kya yah baat sahi hai bilkul yah baat hundred percent sahi hai internet se aaj ka yuva jo hai vaah har ek cheez me apni itni ulajh gaya hai ki use paas samay hi nahi hota hai kisi se baat karne ka kisi se vyavhar rakhne ka ya aapas me kisi se bhi sambandh rakhne ka kyonki har ek cheez ab online ho chuki hai aur har ek insaan paise kamane ki hod me laga hua hai har ek duniya me itni mahangai hoti ja rahi hai ki insaan kaise na kaise paise kamane ke tarike ko khoj raha hai aur usi me laga hua hai sab aapas me ek dusre se aage nikalne nikalna chah rahe hain zyada se zyada paisa kamana chahte yahi karan hai ki insaan internet me dooba hua hai aur vaah apni jeevan shaili ko bol raha hai dhanyavad aapka din shubha ho

नमस्कार दोस्तों आज का प्रश्न इंटरनेट के कारण आज कल का युवा बात करने की शैली भूल रहा है क्य

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smart king

Student

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अपने कहा कि इंटरनेट के कारण आज कल का युवा बात करने की शैली बोल रहा है क्या यह बात आजकल की बात करने के लिए बात हकीकत है कि इंटरनेट की वजह से आजकल बात करने का बोल रहा है

apne kaha ki internet ke karan aaj kal ka yuva baat karne ki shaili bol raha hai kya yah baat aajkal ki baat karne ke liye baat haqiqat hai ki internet ki wajah se aajkal baat karne ka bol raha hai

अपने कहा कि इंटरनेट के कारण आज कल का युवा बात करने की शैली बोल रहा है क्या यह बात आजकल की

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आपने अपनी राय दी है और कहा है कि इंटरनेट के कारण हंसकर का युवा बात करने की शायरी बोल रहा है क्या यह बात सही है बेशक यह सही है आजकल के दौर में जो सोशल मीडिया इंटरनेट पर दौर चल रहा है आजकल के लोग एक दूसरे से जैसे कि पहले के दौर में छुपाते हैं मोहब्बत लाख ताबू आज के दौर में मोहब्बतें नहीं क्योंकि आज किसी का हाल-चाल पूछना हो तो इंटरनेट द्वारा हेलो है उन्होंने जवाब रिप्लाई दे दिया हमारी मोहब्बत ही रास्ते की हार या कोई आया है हमारा कोई फ्रेंड आया तो दोस्त है इतनी दूर से आज इंटरनेट के द्वारा से मोहब्बत का दिल में मोहब्बत थी कम रह गई है जो कुछ पूछना होता है इंटरनेट इंटरनेट द्वारा रिकॉर्ड से आजकल युवा बात करने के लिए इसी कारण बिल्कुल सही है थैंक यू

aapne apni rai di hai aur kaha hai ki internet ke karan hansakar ka yuva baat karne ki shaayari bol raha hai kya yah baat sahi hai beshak yah sahi hai aajkal ke daur me jo social media internet par daur chal raha hai aajkal ke log ek dusre se jaise ki pehle ke daur me chhupaate hain mohabbat lakh tabu aaj ke daur me mohabbatein nahi kyonki aaj kisi ka haal chaal poochna ho toh internet dwara hello hai unhone jawab reply de diya hamari mohabbat hi raste ki haar ya koi aaya hai hamara koi friend aaya toh dost hai itni dur se aaj internet ke dwara se mohabbat ka dil me mohabbat thi kam reh gayi hai jo kuch poochna hota hai internet internet dwara record se aajkal yuva baat karne ke liye isi karan bilkul sahi hai thank you

आपने अपनी राय दी है और कहा है कि इंटरनेट के कारण हंसकर का युवा बात करने की शायरी बोल रहा ह

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ना मुझे यह बात ठीक लगती है अगर आपको टिपिकली देखा जाए तो जो हमारी प्रॉपर लैंग्वेज है जो हमारी भाषा है वह चेंज होती जा रही है क्योंकि इंटरनेट की वजह से क्या है हम अलग-अलग क्लांस बनाते हैं यानी के अलग-अलग हम लैंग्वेज लैंग्वेज या कुछ ग्रुप ऑफ वर्ड बनाते हैं उसका कुछ और मीनिंग होता है हम चीजों को शॉट करने लगे हैं प्लीज को पूरा लिखने के बजाय हम उसको पीएलएसई अपीयर्स अट ऐसे लिख देते हैं एक पूरा जो फ्रीज होता है या नहीं तीन चार वर्ड का जो समूह या ग्रुप होता है हम उसको शॉट लिख देते जैसे कि अगर मुझे लिखना आई डोंट नो तो मैं लिखूंगी आईडी के ठीक है ऐसे ही बहुत सारी चीजें होती हैं कई बार हमारे लैंग्वेज में वह इतना ज्यादा आ जाता है कि जब हम कहीं पर एक्चुअल में लिख रहे होते हैं पेपर पर कई बार तो हमें लबएग्जाम्स में भी तो हमें तो हम शॉर्ट फॉर्म सोचो किस तरीके की लैंग्वेज हो चीजें यूज़ करने लगे हैं उसी लैंग्वेज में हम लिखने लग गए हैं तो यह थोड़ी सी स्पॉइल तो हुई है लेकिन मुझे लगता इंटरनेट की वजह से भाषा बहुत ज्यादा विकसित भी हुई है क्योंकि जो चीज गांव की जानकारी हमें नहीं होती थी हमारे पास लिमिटेड रिसोर्सेस है हमारा एनवायरनमेंट लिमिटेड था तो जिस तरीके की बातें हमारे आसपास में हो रही थी जिस तरीके की बातें हम सुनते या पढ़ते थे सिर्फ उतना ही हमें मिल पा रहा था उतना ही हम सीख पा रहे थे अब जो है हमारा जो लैंग्वेज का भाव क्या हुआ कांड हुई है हम कुछ चीजें मतलब कुछ वर्ड होते हैं या किसी चीज की कोई डिस्क्रिप्शन है हमें समझ नहीं आती तो अब इंटरनेट पर ट्रांसलेशन से उसको समझना सीख सकते हैं अगर हम कोई और आजकल वेब सीरीज का बहुत ज्यादा फास्ट नहीं है मूवीस का फैशन है तो कुछ चीजें ऐसी होती हैं कि उसका निश्चय मूवी है तो स्पेनिश में वह बोल रहे होते हैं उसकी ट्रांसलेशन इंग्लिश हिंदी में आप सर्च करके देख सकते हो तो बहुत ज्यादा तरीके ऐसे भी हैं और कुछ ऐसे गेम्स पर दो उसको एक गाय हैं ऑनलाइन तो उसमें से एक ही से या लैंग्वेज सीख सकते हैं बहुत सारी आप हैं तू हर चीज के दो पहलू होते हैं फायदा भी और नुकसान भी है आप किस तरीके से उसको यूज करते हैं वह आप पर डिपेंड करता है तो आपका जो तरीका है आपका एप्लीकेशन है वह सही होना चाहिए तो मुझे लगता है आप किसी भी चीज से बने पर तो उठा सकते हैं या से अच्छी से अच्छी चीज से भी आप नुकसान ले सकते हैं अगर आप उसको ठीक से नहीं करते हैं तो

na mujhe yah baat theek lagti hai agar aapko tipikali dekha jaaye toh jo hamari proper language hai jo hamari bhasha hai vaah change hoti ja rahi hai kyonki internet ki wajah se kya hai hum alag alag klans banate hain yani ke alag alag hum language language ya kuch group of word banate hain uska kuch aur meaning hota hai hum chijon ko shot karne lage hain please ko pura likhne ke bajay hum usko PLSE apiyars attack aise likh dete hain ek pura jo freeze hota hai ya nahi teen char word ka jo samuh ya group hota hai hum usko shot likh dete jaise ki agar mujhe likhna I dont no toh main likhungi id ke theek hai aise hi bahut saari cheezen hoti hain kai baar hamare language me vaah itna zyada aa jata hai ki jab hum kahin par actual me likh rahe hote hain paper par kai baar toh hamein labaegjams me bhi toh hamein toh hum short form socho kis tarike ki language ho cheezen use karne lage hain usi language me hum likhne lag gaye hain toh yah thodi si spoil toh hui hai lekin mujhe lagta internet ki wajah se bhasha bahut zyada viksit bhi hui hai kyonki jo cheez gaon ki jaankari hamein nahi hoti thi hamare paas limited resources hai hamara environment limited tha toh jis tarike ki batein hamare aaspass me ho rahi thi jis tarike ki batein hum sunte ya padhte the sirf utana hi hamein mil paa raha tha utana hi hum seekh paa rahe the ab jo hai hamara jo language ka bhav kya hua kaand hui hai hum kuch cheezen matlab kuch word hote hain ya kisi cheez ki koi description hai hamein samajh nahi aati toh ab internet par translation se usko samajhna seekh sakte hain agar hum koi aur aajkal web series ka bahut zyada fast nahi hai Movies ka fashion hai toh kuch cheezen aisi hoti hain ki uska nishchay movie hai toh spanish me vaah bol rahe hote hain uski translation english hindi me aap search karke dekh sakte ho toh bahut zyada tarike aise bhi hain aur kuch aise games par do usko ek gaay hain online toh usme se ek hi se ya language seekh sakte hain bahut saari aap hain tu har cheez ke do pahaloo hote hain fayda bhi aur nuksan bhi hai aap kis tarike se usko use karte hain vaah aap par depend karta hai toh aapka jo tarika hai aapka application hai vaah sahi hona chahiye toh mujhe lagta hai aap kisi bhi cheez se bane par toh utha sakte hain ya se achi se achi cheez se bhi aap nuksan le sakte hain agar aap usko theek se nahi karte hain toh

ना मुझे यह बात ठीक लगती है अगर आपको टिपिकली देखा जाए तो जो हमारी प्रॉपर लैंग्वेज है जो हमा

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Ramphal

Student

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हां यह कथन सही है कि इंटरनेट के कारण आजकल आजकल युवा पीढ़ी युवा पीढ़ी बोलचाल की भाषा भूल चुकी है क्योंकि उस उन्होंने इंटरनेट को ही सब कुछ से समझा है तथा 24 घंटे में से एक को लगभग 16 घंटे इंटरनेट पर व्यतीत करते हैं तथा ना ही किसी का आदर सत्कार करते हैं और ना ही किसी के बारे में पूछते तथा अपने रिश्तेदार इत्यादि बातों को सब को भूल जाते हैं तथा इंटरनेट पर व्यस्त रहते हैं

haan yah kathan sahi hai ki internet ke karan aajkal aajkal yuva peedhi yuva peedhi bolchal ki bhasha bhool chuki hai kyonki us unhone internet ko hi sab kuch se samjha hai tatha 24 ghante me se ek ko lagbhag 16 ghante internet par vyatit karte hain tatha na hi kisi ka aadar satkar karte hain aur na hi kisi ke bare me poochhte tatha apne rishtedar ityadi baaton ko sab ko bhool jaate hain tatha internet par vyast rehte hain

हां यह कथन सही है कि इंटरनेट के कारण आजकल आजकल युवा पीढ़ी युवा पीढ़ी बोलचाल की भाषा भूल चु

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