आज हमारी शिक्षा व्यवस्था डाउन क्यों होती जा रही है क्या कारण है?...


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Sushil Kumar

Accountant

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बिग शिक्षा व्यवस्था डाउन और इसका मुख्य कारण है सही शिक्षक की नियुक्ति आप एक सहित शिक्षक की नियुक्ति नहीं कर पा रहे हैं आपके पास मानसिक प्रक्रिया पर बोलने का सही साधन नहीं है एग्जाम ले लेते हैं वह पढ़ पढ़ कर खुद थक जाते हैं फिर पारिवारिक पेंशन अध्यापक के लिए गए और बेटे को प्राइवेट स्कूल में क्या एक नवजीवन लेकिन नौकरी 89 व्यक्तियों को रखा जाता है लेकिन नव युवा वर्ग को रखा जाता है प्राइवेट स्कूलों में टाइम क्या हो रहा है को जानते हैं जो 1 डिग्री पार करके पार कर रहे हैं आप भी कर चुके हैं उनके लिए नेक्स्ट डोनेशन को समझना उतना ही मुश्किल हो जाता है जितना किसी किसी नदी से दो बाल्टी पानी निकलना डाउन पिक्चर बताओ ना दोस्त ठीक है दोस्त बहुत अच्छी है जरूरत है नियम और बनाने की नियम उल्टे करने से आपको नियम उल्टी करने पर हर स्कूल में जिस किसी ने भी सरकारी डिपार्टमेंट में फॉर्म भरा हुआ है अपने अध्यापन कार्य को कराने का वह अपने कैमरे पूरे स्कूल की बिल्डिंग पूरा वातावरण कैमरे की निगरानी में हो और उसकी सीडी दिल्ली आपको मेल करनी है और वहां तो अगली बार में बैठा हूं उसका चेक करने के लिए मां की गतिविधियों को काम करना है तो पूछ रहा था ने बढ़ेंगे रोजगार तभी तो बढ़ेंगे काम ही नहीं करना चाहती चित्तौड़ पत्रकार पढ़े लिखे लोग हैं वह चलते दूसरे के आर्डर पर आर्डर देना अच्छी बात है सही है आप कुछ हसीन पल है ठीक है लेकिन कुछ हसीन पल सबसे ज्यादा शिक्षित व्यक्ति का होना चाहिए गलत निर्णय पर पहुंचा जाते हैं कि हमारे समर्थक में इतनी चीजें हैं जो पास कर दीजिए जनता में सर्वे हुआ नहीं हुआ है से कुछ जमीनी स्तर पर कुछ नहीं पता दो चार लोगों से हजार लोगों से करवा लिया सवा सौ करोड़ जनता में से एक है कि आप सही है वह शिक्षा व्यवस्था में आप बस में करने शिक्षक का चित्र की व्यवस्था कीजिए शिक्षा सब ठीक है

big shiksha vyavastha down aur iska mukhya karan hai sahi shikshak ki niyukti aap ek sahit shikshak ki niyukti nahi kar paa rahe hain aapke paas mansik prakriya par bolne ka sahi sadhan nahi hai exam le lete hain vaah padh padh kar khud thak jaate hain phir parivarik pension adhyapak ke liye gaye aur bete ko private school me kya ek navjivan lekin naukri 89 vyaktiyon ko rakha jata hai lekin nav yuva varg ko rakha jata hai private schoolon me time kya ho raha hai ko jante hain jo 1 degree par karke par kar rahe hain aap bhi kar chuke hain unke liye next donation ko samajhna utana hi mushkil ho jata hai jitna kisi kisi nadi se do balti paani nikalna down picture batao na dost theek hai dost bahut achi hai zarurat hai niyam aur banane ki niyam ulte karne se aapko niyam ulti karne par har school me jis kisi ne bhi sarkari department me form bhara hua hai apne adhyapan karya ko karane ka vaah apne camera poore school ki building pura vatavaran camera ki nigrani me ho aur uski CD delhi aapko male karni hai aur wahan toh agli baar me baitha hoon uska check karne ke liye maa ki gatividhiyon ko kaam karna hai toh puch raha tha ne badhenge rojgar tabhi toh badhenge kaam hi nahi karna chahti chittor patrakar padhe likhe log hain vaah chalte dusre ke order par order dena achi baat hai sahi hai aap kuch Haseen pal hai theek hai lekin kuch Haseen pal sabse zyada shikshit vyakti ka hona chahiye galat nirnay par pohcha jaate hain ki hamare samarthak me itni cheezen hain jo paas kar dijiye janta me survey hua nahi hua hai se kuch zameeni sthar par kuch nahi pata do char logo se hazaar logo se karva liya sava sau crore janta me se ek hai ki aap sahi hai vaah shiksha vyavastha me aap bus me karne shikshak ka chitra ki vyavastha kijiye shiksha sab theek hai

बिग शिक्षा व्यवस्था डाउन और इसका मुख्य कारण है सही शिक्षक की नियुक्ति आप एक सहित शिक्षक की

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Sanjiv Kumar

Social Worker , Motivational Speaker

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शिक्षा का निजीकरण हमारे आज के शिक्षा स्तर को गिरा रहा है प्राइवेट स्कूल में शिक्षा का स्तर सबसे निम्न जहां तक सरकारी स्कूल का बात है तो सरकारी स्कूल की शिक्षा प्रणाली पूर्णता भोजपुरी और रिश्वतखोरी पर टिकी हुई है जिसके चलते विद्यालय में कार्य डांस नहीं हो पा रहा नहीं तो ऐसा तो कोई बात ही नहीं है कि शिक्षा के गड्ढों की सब पढ़ आएंगे तो शिक्षा का विकास नहीं होगा तो तुम ही स्थिति प्राइवेट स्कूल में महिला टीचरों का अधिकांश महिला टीचर होने के कारण वह बच्चों पर उस तरह से शासन नहीं कर पाती है जिस तरह से साफ करना चाहिए और बच्चों को शिक्षित बनाना चाहिए वही मर जाएंगे क्योंकि परिवार पलते हैं वह कम पैसे पर रह नहीं पाते हैं इसलिए उसको स्कूल रखना नहीं चाहती है मुश्किल से एक ही चल रख लेते हैं किसी तरह से

shiksha ka nijikaran hamare aaj ke shiksha sthar ko gira raha hai private school me shiksha ka sthar sabse nimn jaha tak sarkari school ka baat hai toh sarkari school ki shiksha pranali purnata bhojpuri aur rishwat khori par tiki hui hai jiske chalte vidyalaya me karya dance nahi ho paa raha nahi toh aisa toh koi baat hi nahi hai ki shiksha ke gaddho ki sab padh aayenge toh shiksha ka vikas nahi hoga toh tum hi sthiti private school me mahila ticharon ka adhikaansh mahila teacher hone ke karan vaah baccho par us tarah se shasan nahi kar pati hai jis tarah se saaf karna chahiye aur baccho ko shikshit banana chahiye wahi mar jaenge kyonki parivar palate hain vaah kam paise par reh nahi paate hain isliye usko school rakhna nahi chahti hai mushkil se ek hi chal rakh lete hain kisi tarah se

शिक्षा का निजीकरण हमारे आज के शिक्षा स्तर को गिरा रहा है प्राइवेट स्कूल में शिक्षा का स्तर

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शिक्षा डाउन होने का सबसे बड़ी बड़ा यही कारण है कि इतने सालों से जो शिक्षा दी जा रही है उसमें कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है कोई जैसे कि विदेशों में होता है कि सारे लैपटॉप पर और कंप्यूटर बेस्ड पढ़ाई दी जा रही है

shiksha down hone ka sabse badi bada yahi karan hai ki itne salon se jo shiksha di ja rahi hai usme koi badlav nahi kiya ja raha hai koi jaise ki videshon me hota hai ki saare laptop par aur computer based padhai di ja rahi hai

शिक्षा डाउन होने का सबसे बड़ी बड़ा यही कारण है कि इतने सालों से जो शिक्षा दी जा रही है उसम

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डॉ अर्चना चौधरी

कवयित्री ,कॉन्सलर ,समाजसेवी , शिक्षिका

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आज हमारी शिक्षा व्यवस्था डाउन होती जा रही है बिल्कुल सत्य है इसके कई कारण है क्योंकि उद्देश्य जो हम रखते हैं चाय शिक्षक विद्यार्थी हूं समाज में सिर्फ हम किसी व्यवस्थापक को दोष नहीं दे सकते हमारा यह समाज शिक्षक शिक्षार्थी व्यवस्थापक से मिलकर बना हुआ एक शिक्षक होना बहुत ही कठिन काम है जो कि एक शिक्षक उसे कहा जा सकता है जो छात्र का समग्र विकास करें सिर्फ किताबी ज्ञान देना और किताबी ज्ञान लेना या ना शिक्षा का काम है ना शिक्षक का काम है ना छात्र का काम है क्योंकि आप देखते हैं तमाम बाजार भरे पड़े हैं गूगल गुरु में जाइए किसी भी क्वेश्चन का आंसर मिल जाएगा फिर भी आज विद्यालय चल रहा है क्योंकि जो बच्चे होते हैं जो शिक्षार्थी होते हैं उनके मन के अंदर अनेक तरह के सवाल होते हैं और कोई शिक्षक उन्हें उस सवाल का जवाब देने के लिए अपने आपको उसी समय में ले जाता अपने बचपन के काल में ले जाता अपने छात्र के काल में ले जाता और फिर उस बच्चे को समझने की कोशिश करता और जब उसे समझने की कोशिश करता है तो ज्यादा समझ में आता है तो पहले समझना पड़ता है लेकिन आप इस तथ्य को कोई समझ नहीं रहा है जब कोई नौकरी नहीं मिलती है तो लोग शिक्षक बन जाते हैं और शिक्षक बन जाते हैं तो फिर वह भूल जाते हैं बस पैसे कमाने का अपना उद्देश्य बना लेते हैं और अभिभावक भी बिना कुछ सोचे समझे अपने बच्चे को कहीं भी पढ़ने के लिए भेज देते इसमें उनकी भी गलती नहीं है वहां थोड़ा सा अवनीश नहीं है उनको अनुभव नहीं है और उसका किए जाते हैं हमारे अभिभावक जिस तरीके से प्राइवेट स्कूलों का चलन हो गया है और यह एकदम चाय बन के रह गया जिसके कारण हमारा शिक्षा व्यवस्था बहुत ही नीचे गिरती जा रही है समाज में शिक्षकों का मान सम्मान में काफी कमी आ गई है इसके लिए आज भी उतना ही दोषी है जितना शिक्षक दोषी है और दोनों को अपने अंदर यह सुधार करना पड़ेगा हम जिनके पास अपने बच्चे को पढ़ने भेजते हैं अगर हम उनका सम्मान नहीं करते हैं आज तो बच्चे देखते हैं उसको और जब बच्चे सम्मान नहीं करते हैं अपने शिक्षक का तो उनकी पढ़ाई बातें उन पर कोई असर नहीं डालती एक झुकती है कि श्रद्धा वान लभते ज्ञानम् आपको श्रद्धा का विकास करना होगा बिना श्रद्धा का विकास की अपने अंदर में हम किसी चीज में की प्राप्ति नहीं कर सकते हैं चाहे वह शिक्षा हो धन्य हो बाबू कुछ भी हो किसी भी चीज को पाने के लिए आपके अंदर श्रद्धा का होना बहुत जरूरी है श्रद्धा क्या निष्ठा से जब हृदय में प्रेम जाता है तो हम दुगुने उत्साह से काम करते काम दो तरीके से करते एक काम कोट होते हैं और एक प्रेम से कर दिया दोनों का दो तरीका होता है तो जब हम एक दूसरे को समझने का प्रयास करेंगे थोड़ा अपने आप को करना होगा समाज को भी शिक्षक को भी और व्यवस्था को भी एक शिक्षक कौन हो सकता है तो इस तरह से समाज में शिक्षा की स्थिति को बेहतर करने के लिए हमें इन सब तथ्यों पर बहुत ध्यान देना होगा कि हम अपने बच्चे को किसके पास ले रहे हैं थोड़ा अध्ययन करना होगा और उसके बाद आप इसका प्रतिफल देखने को मिलेगा एक बात मैं और कहना चाहूंगी कि हमारे समाज में जो सेवानिवृत्त शिक्षक हैं हर गांव में आपको 245 10 शिक्षक जरूर मिल जाएंगे उपेक्षित जीवन जी रहे हैं वृद्धावस्था को प्राप्त हुए हैं अगर समाज के लोगों के द्वारा उनको सम्मानित किया जाम तो सम्मान दिया जाए तो उनके अंदर ज्ञान का असीम भंडार हम वहां से अपने बच्चों को पढ़ा सकते हैं हमें कहीं जाने की आवश्यकता नहीं होगी बहुत अच्छा गार्डेंस मिलेगा लेकिन इन बातों पर लोग ध्यान नहीं देते और हम अपने बच्चों को किसी भी प्राइवेट स्कूल में जो दमक दमक में काफी अच्छा है लेकिन अंदर बहुत खोखला है वहां भेजने के लिए तत्पर हो जाते हैं तो थोड़ा इसमें चिंतन और मनन की आवश्यकता है धन्यवाद

aaj hamari shiksha vyavastha down hoti ja rahi hai bilkul satya hai iske kai karan hai kyonki uddeshya jo hum rakhte hain chai shikshak vidyarthi hoon samaj me sirf hum kisi vyavasthapak ko dosh nahi de sakte hamara yah samaj shikshak shiksharthi vyavasthapak se milkar bana hua ek shikshak hona bahut hi kathin kaam hai jo ki ek shikshak use kaha ja sakta hai jo chatra ka samagra vikas kare sirf kitabi gyaan dena aur kitabi gyaan lena ya na shiksha ka kaam hai na shikshak ka kaam hai na chatra ka kaam hai kyonki aap dekhte hain tamaam bazaar bhare pade hain google guru me jaiye kisi bhi question ka answer mil jaega phir bhi aaj vidyalaya chal raha hai kyonki jo bacche hote hain jo shiksharthi hote hain unke man ke andar anek tarah ke sawaal hote hain aur koi shikshak unhe us sawaal ka jawab dene ke liye apne aapko usi samay me le jata apne bachpan ke kaal me le jata apne chatra ke kaal me le jata aur phir us bacche ko samjhne ki koshish karta aur jab use samjhne ki koshish karta hai toh zyada samajh me aata hai toh pehle samajhna padta hai lekin aap is tathya ko koi samajh nahi raha hai jab koi naukri nahi milti hai toh log shikshak ban jaate hain aur shikshak ban jaate hain toh phir vaah bhool jaate hain bus paise kamane ka apna uddeshya bana lete hain aur abhibhavak bhi bina kuch soche samjhe apne bacche ko kahin bhi padhne ke liye bhej dete isme unki bhi galti nahi hai wahan thoda sa avnish nahi hai unko anubhav nahi hai aur uska kiye jaate hain hamare abhibhavak jis tarike se private schoolon ka chalan ho gaya hai aur yah ekdam chai ban ke reh gaya jiske karan hamara shiksha vyavastha bahut hi niche girti ja rahi hai samaj me shikshakon ka maan sammaan me kaafi kami aa gayi hai iske liye aaj bhi utana hi doshi hai jitna shikshak doshi hai aur dono ko apne andar yah sudhaar karna padega hum jinke paas apne bacche ko padhne bhejate hain agar hum unka sammaan nahi karte hain aaj toh bacche dekhte hain usko aur jab bacche sammaan nahi karte hain apne shikshak ka toh unki padhai batein un par koi asar nahi daalti ek jhukti hai ki shraddha i labhate gyanam aapko shraddha ka vikas karna hoga bina shraddha ka vikas ki apne andar me hum kisi cheez me ki prapti nahi kar sakte hain chahen vaah shiksha ho dhanya ho babu kuch bhi ho kisi bhi cheez ko paane ke liye aapke andar shraddha ka hona bahut zaroori hai shraddha kya nishtha se jab hriday me prem jata hai toh hum dugune utsaah se kaam karte kaam do tarike se karte ek kaam coat hote hain aur ek prem se kar diya dono ka do tarika hota hai toh jab hum ek dusre ko samjhne ka prayas karenge thoda apne aap ko karna hoga samaj ko bhi shikshak ko bhi aur vyavastha ko bhi ek shikshak kaun ho sakta hai toh is tarah se samaj me shiksha ki sthiti ko behtar karne ke liye hamein in sab tathyon par bahut dhyan dena hoga ki hum apne bacche ko kiske paas le rahe hain thoda adhyayan karna hoga aur uske baad aap iska pratiphal dekhne ko milega ek baat main aur kehna chahungi ki hamare samaj me jo sevanivritt shikshak hain har gaon me aapko 245 10 shikshak zaroor mil jaenge upekshit jeevan ji rahe hain vriddhavastha ko prapt hue hain agar samaj ke logo ke dwara unko sammanit kiya jam toh sammaan diya jaaye toh unke andar gyaan ka asim bhandar hum wahan se apne baccho ko padha sakte hain hamein kahin jaane ki avashyakta nahi hogi bahut accha gardens milega lekin in baaton par log dhyan nahi dete aur hum apne baccho ko kisi bhi private school me jo damak damak me kaafi accha hai lekin andar bahut khokhla hai wahan bhejne ke liye tatpar ho jaate hain toh thoda isme chintan aur manan ki avashyakta hai dhanyavad

आज हमारी शिक्षा व्यवस्था डाउन होती जा रही है बिल्कुल सत्य है इसके कई कारण है क्योंकि उद्

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Dr Kavita Choudhary

Principal Psychologist Educationist Counselor

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न है भारत में शिक्षा व्यवस्था का गिरना बहुत अच्छा प्रश्न आपने किया और इस प्रश्न पर हमें सभी को विचार करना चाहिए अगर मैं मानूं तो हमारी गिनती भी व्यवस्था शिक्षा व्यवस्था के लिए कोई एक कारण या एक कारक उत्तरदाई नहीं है बहुत सारे कारक है हमारी शिक्षा नीतियां बनती हैं संशोधन होते हैं समय के अनुरूप आवश्यकताओं के अनुरूप लेकिन उन संशोधनों का उन शिक्षा नीतियों का व्यवहारिक परिणाम नहीं मिल पाते 23 का जो पहला क्वेश्चन मार्क या प्रश्न चेंज जिस पर लगता है वह है आज के हमारे अध्यापक यह हमारा शिक्षक वर्ग अगर वर्तमान में आप यह बहुत कटु सत्य है कि बहुत सारे B.Ed कॉलेजेस भारत के अंदर संचालित हो रहे हैं लेकिन अगर देखें तो उनमें एक नॉन अटेंडिंग कल्चर चल रही है और यह जो नॉन अटेंडिंग कल्चर है उनको ट्रेनिंग घर बैठे मिल रही है तो क्या आपको लगता है कि उनके अंदर मुश्किल डेवलपमेंट हो रहा है उनमें वह टीचिंग मेथड डिवेलप हो पा रहे हैं नहीं नहीं वह अपने उस उत्तरदायित्व को समझ पा रहे हैं क्योंकि उनके अंदर वो ट्रेनिंग आई नहीं रही है और ट्रेनिंग उनके अंदर पैदा नहीं की जा रही है वह केवल 1 डिग्री धारी है डिग्री ले रहे हैं और डिग्री के आधार पर उनका शिक्षक के रूप में चयन भी हो जाता है और वह शिक्षक भी बन जाते हैं लेकिन ट्रेनिंग के अभाव में विधियों के अभाव में मनोविज्ञान के अभाव में बच्चों के टेंडेंसी को समझने के अभाव में वह उनको वह शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं जो शिक्षा उनको मिलने चाहिए दूसरे शिक्षा का जो स्वरूप है वह ऐसा होना चाहिए कि शिक्षक जो शिक्षा है यह जो शिक्षार्थी है उसका सर्वांगीण विकास हो इसमें कोई संदेह नहीं कि हमारी शिक्षा प्रतियां में जितने भी उद्देश्य रखे गए हैं ऑब्जेक्टिव्स रखे गए हैं वह बालक के सर्वांगीण विकास की ओर ले जा रहे हैं और अब तू जो नई नीतियों में आ रहे हैं वह टीचर को सेकेंडरी बना रहे हैं कि टीचर इजाफे से लेटर एकता स्लीपिंग के रूप में लेकर चल रहे हैं लेकिन एक वह गाइडेंस के रूप में तभी काम कर पाएगा जब उसको सही खुद को उस चीज का ज्ञान होगा तो इसलिए जो शिक्षक वर्ग है उसको बहुत उत्थान की आवश्यकता है उसको बहुत मजबूत करने की आवश्यकता है दूसरी तरफ अगर हम बात करें शिक्षार्थी की तो आज शिक्षार्थी में भी नैतिक मूल्यों का बहुत अभाव है आज शिक्षक और विद्यार्थी के बीच में जो संबंध है वह उस तरह के नहीं है जैसे पहले हुआ करते थे मैं मानती हूं कि आज का शिक्षक दिवस शिक्षक है पैसा कमाने की मशीन है वह कभी गुरु नहीं बन पाता जब तक गुरु और शिष्य प्रणाली नहीं प्रारंभ होगी तब तक हमारी शिक्षा व्यवस्था में हम अगर चाहे कि सुधार करें तो सुधार संभव नहीं है और यही दो तीन कारण मैंने आपको बताया बाकी उसके ऊपर अगर हम विचार-विमर्श करें तो बहुत सारे कारण अभिभावक बेचने उत्तरदाई हैं बहुत सारे ऐसे अन्य कारण है

aapka prashna hai bharat me shiksha vyavastha ka girna bahut accha prashna aapne kiya aur is prashna par hamein sabhi ko vichar karna chahiye agar main manun toh hamari ginti bhi vyavastha shiksha vyavastha ke liye koi ek karan ya ek kaarak uttardai nahi hai bahut saare kaarak hai hamari shiksha nitiyan banti hain sanshodhan hote hain samay ke anurup avashayaktaon ke anurup lekin un sanshodhano ka un shiksha nitiyon ka vyavaharik parinam nahi mil paate 23 ka jo pehla question mark ya prashna change jis par lagta hai vaah hai aaj ke hamare adhyapak yah hamara shikshak varg agar vartaman me aap yah bahut katu satya hai ki bahut saare B Ed colleges bharat ke andar sanchalit ho rahe hain lekin agar dekhen toh unmen ek non attending culture chal rahi hai aur yah jo non attending culture hai unko training ghar baithe mil rahi hai toh kya aapko lagta hai ki unke andar mushkil development ho raha hai unmen vaah teaching method develop ho paa rahe hain nahi nahi vaah apne us uttardayitva ko samajh paa rahe hain kyonki unke andar vo training I nahi rahi hai aur training unke andar paida nahi ki ja rahi hai vaah keval 1 degree dhari hai degree le rahe hain aur degree ke aadhar par unka shikshak ke roop me chayan bhi ho jata hai aur vaah shikshak bhi ban jaate hain lekin training ke abhaav me vidhiyon ke abhaav me manovigyan ke abhaav me baccho ke tendency ko samjhne ke abhaav me vaah unko vaah shiksha nahi de paa rahe hain jo shiksha unko milne chahiye dusre shiksha ka jo swaroop hai vaah aisa hona chahiye ki shikshak jo shiksha hai yah jo shiksharthi hai uska Sarvangiṇa vikas ho isme koi sandeh nahi ki hamari shiksha pratiyan me jitne bhi uddeshya rakhe gaye hain objectives rakhe gaye hain vaah balak ke Sarvangiṇa vikas ki aur le ja rahe hain aur ab tu jo nayi nitiyon me aa rahe hain vaah teacher ko secondary bana rahe hain ki teacher ijafe se letter ekta Sleeping ke roop me lekar chal rahe hain lekin ek vaah guidance ke roop me tabhi kaam kar payega jab usko sahi khud ko us cheez ka gyaan hoga toh isliye jo shikshak varg hai usko bahut utthan ki avashyakta hai usko bahut majboot karne ki avashyakta hai dusri taraf agar hum baat kare shiksharthi ki toh aaj shiksharthi me bhi naitik mulyon ka bahut abhaav hai aaj shikshak aur vidyarthi ke beech me jo sambandh hai vaah us tarah ke nahi hai jaise pehle hua karte the main maanati hoon ki aaj ka shikshak divas shikshak hai paisa kamane ki machine hai vaah kabhi guru nahi ban pata jab tak guru aur shishya pranali nahi prarambh hogi tab tak hamari shiksha vyavastha me hum agar chahen ki sudhaar kare toh sudhaar sambhav nahi hai aur yahi do teen karan maine aapko bataya baki uske upar agar hum vichar vimarsh kare toh bahut saare karan abhibhavak bechne uttardai hain bahut saare aise anya karan hai

आपका प्रश्न है भारत में शिक्षा व्यवस्था का गिरना बहुत अच्छा प्रश्न आपने किया और इस प्रश्न

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नारी शिक्षा व्यवस्था के डाउन होने का सबसे पहला अखाड़ा गुणवत्ता का कमी बच्चों में समर्थन की गणित शिक्षकों में जो है उचित समय न देना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण की आभा और साथ ही साथ छात्रों को उचित ढंग से नहीं पढ़ाना एवं समय को व्यर्थ जमाना छात्र का खुद स्वाध्याय में मन नहीं लगना यह सारे व्यवधान के कारण शिक्षा की गुणवत्ता कम होती जा रही है

nari shiksha vyavastha ke down hone ka sabse pehla akhada gunavatta ka kami baccho me samarthan ki ganit shikshakon me jo hai uchit samay na dena aur gunavattaapoorn shikshan ki aabha aur saath hi saath chhatro ko uchit dhang se nahi padhana evam samay ko vyarth jamana chatra ka khud swaadhyaay me man nahi lagna yah saare vyavdhan ke karan shiksha ki gunavatta kam hoti ja rahi hai

नारी शिक्षा व्यवस्था के डाउन होने का सबसे पहला अखाड़ा गुणवत्ता का कमी बच्चों में समर्थन की

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S.B. SAGAR PRAJAPATI

Artist & Social Worker

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पढ़ाई के लिए माहौल चाहिए जिससे बच्चे आज मोबाइल इंटरनेट आज या मीडिया का दुरुपयोग कर रहे हैं या गलत जो अवधारणा बन रही है इसके कारण और अभिभावकों और शिक्षकों को भी भूमिका उसमें होती है कि वे स्कूल जाने देते हैं जो ध्यान देते भी त्वचा अत्यधिक नंबर प्राप्त हो बच्चे को जो व्यावहारिक जानकारी होती है वह संभवत मिल नहीं पाता है यही कारण है

padhai ke liye maahaul chahiye jisse bacche aaj mobile internet aaj ya media ka durupyog kar rahe hain ya galat jo avdharna ban rahi hai iske karan aur abhibhavakon aur shikshakon ko bhi bhumika usme hoti hai ki ve school jaane dete hain jo dhyan dete bhi twacha atyadhik number prapt ho bacche ko jo vyavaharik jaankari hoti hai vaah sambhavat mil nahi pata hai yahi karan hai

पढ़ाई के लिए माहौल चाहिए जिससे बच्चे आज मोबाइल इंटरनेट आज या मीडिया का दुरुपयोग कर रहे हैं

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Sandeep Shahi

Career Advisor @ Motivational Person

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लेकिन इस बात में तो ज्यादा नहीं कहूंगा मैं थोड़ी शब्दों में अपनी बात बताना चाहता हूं कि शिक्षा व्यवस्था आज के समय में मेरा मन ना इसलिए नीचे जा रहा है क्योंकि यह शिक्षा व्यवस्था व्यापार का चित्र बना हुआ जिसके पास पैसा है मुश्किल फुल दे रहा है क्योंकि उसको पता है कि मैं शिक्षा को कराना इधर आना पड़ा ना ही है इसलिए अच्छा व्यापारी जीवन में कोई है नहीं अभी फ्री गेम है मैं सरकारी स्कूल है लेकिन मेरा मानना है जैसी परसेंट ऐसी है सत्य है लेकिन कड़वा जिसको लगे लगे

lekin is baat me toh zyada nahi kahunga main thodi shabdon me apni baat batana chahta hoon ki shiksha vyavastha aaj ke samay me mera man na isliye niche ja raha hai kyonki yah shiksha vyavastha vyapar ka chitra bana hua jiske paas paisa hai mushkil full de raha hai kyonki usko pata hai ki main shiksha ko krana idhar aana pada na hi hai isliye accha vyapaari jeevan me koi hai nahi abhi free game hai main sarkari school hai lekin mera manana hai jaisi percent aisi hai satya hai lekin kadwa jisko lage lage

लेकिन इस बात में तो ज्यादा नहीं कहूंगा मैं थोड़ी शब्दों में अपनी बात बताना चाहता हूं कि शि

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डाॅ. देवेन्द्र जोशी उज्जैन म प्र

पत्रकार, साहित्यकार शिक्षाविद

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Dharam Singh Thakur

पत्रकार ,समाज सेवक,लेखक

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आज हमारी शिक्षा व्यवस्था का स्तर इसीलिए चिंता चला जा रहा है क्योंकि हमारी शिक्षा विभाग है ही नहीं हमारी न केवल काली है मैं पहले भी कह चुका हूं कि हमें 98% जो है शिक्षा जो है वह प्रभावित करनी चाहिए और मात्र 2% शिक्षा कागदी रहे तो जाकर के हमारी शिक्षा व्यवस्था करता पुनीत हो सकता कुछ हो सकता है ऐसा मैं विचार रखता हूं

aaj hamari shiksha vyavastha ka sthar isliye chinta chala ja raha hai kyonki hamari shiksha vibhag hai hi nahi hamari na keval kali hai main pehle bhi keh chuka hoon ki hamein 98 jo hai shiksha jo hai vaah prabhavit karni chahiye aur matra 2 shiksha kagdi rahe toh jaakar ke hamari shiksha vyavastha karta puneeth ho sakta kuch ho sakta hai aisa main vichar rakhta hoon

आज हमारी शिक्षा व्यवस्था का स्तर इसीलिए चिंता चला जा रहा है क्योंकि हमारी शिक्षा विभाग है

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Eh Dr.Y.N Mishra

Electrohomoeopath

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आपके प्रश्न शिक्षा व्यवस्था डाउन के होती जा रही है क्या कारण है पर थोड़ा सा प्रकाश डालना चाहूंगा कि आज की जो शिक्षा व्यवस्था है पुरानी शिक्षा व्यवस्था से बहुत अलग हो गई है ना तो उस तरह के अध्यापक हैं और ना ही उस तरह के दोनों का जो एक कंबीनेशन बनता था वह कंबीनेशन आज के दौर में मुझे लगता है कि उसका 10% भी विश्नोई सर्वप्रथम शिक्षा व्यवस्था को देखा जाए तो जब से यह व्यवसायीकरण हुआ है चीजों को ब्लॉन्डिंग में ले जाया गया मीडियम चेंज हुए कान्वेंट स्कूल है इंग्लिश मीडियम में हम जाने लगे जितना कितना एडवांस एडवांस होने की कोशिश कर रहे हैं गुरु के प्रति याद में इज्जत देता था गुरु का था आज का छात्र उसके दिमाग में सिर्फ यह होता है कि मैं इसे पैसा दे रहा हूं और यह व्यक्ति मुझे किताबों को समझा रहा है ज्ञान दे रहा है कहीं भी उनमें एक दूसरे के पर ना तो कोई डेडीकेशन देखा जा रहा है ना ही कोई आज तक देखा जा रहा है और अब जगह सभी थोड़ा सा अपलोड करके ले थोड़ा सा और हायर एजुकेशन में जाए तो वहां तो एकदम बिल्कुल बराबरी का दर्जा हो जाता है मैंने मैं किसी विशेष की उस में आलोचना करना नहीं चाहूंगा लेकिन बताना चाहूंगा कि यह चीज है अगर आप अभी देखें तो सरस्वती शिशु मंदिर और विद्या मंदिर में यह व्यवस्था अदर की अपेक्षा जरूर अच्छी चल रही है क्योंकि वहां अभी भी नहीं पहुंचा तो आधी अधूरी सही लेकिन गुरुकुल की पद्धति को अपनाया जा रहा है और और शिक्षार्थी के बीच अखंड प्रेम को एक अनन्य प्रेम को दिखाया जा रहा है कि शिक्षक के पास अगर शिक्षार्थी जाता है तो सर्वप्रथम प्रणाम करना और प्रार्थना के समय मंत्रों का उच्चारण स्थान होने का मुख्य कारण है ऐसा मेरा मानना है मैं और के बारे में नहीं कह सकता धन्यवाद

aapke prashna shiksha vyavastha down ke hoti ja rahi hai kya karan hai par thoda sa prakash dalna chahunga ki aaj ki jo shiksha vyavastha hai purani shiksha vyavastha se bahut alag ho gayi hai na toh us tarah ke adhyapak hain aur na hi us tarah ke dono ka jo ek combination banta tha vaah combination aaj ke daur me mujhe lagta hai ki uska 10 bhi Vishnoi sarvapratham shiksha vyavastha ko dekha jaaye toh jab se yah vyavasayikaran hua hai chijon ko blanding me le jaya gaya medium change hue convent school hai english medium me hum jaane lage jitna kitna advance advance hone ki koshish kar rahe hain guru ke prati yaad me izzat deta tha guru ka tha aaj ka chatra uske dimag me sirf yah hota hai ki main ise paisa de raha hoon aur yah vyakti mujhe kitabon ko samjha raha hai gyaan de raha hai kahin bhi unmen ek dusre ke par na toh koi dedikeshan dekha ja raha hai na hi koi aaj tak dekha ja raha hai aur ab jagah sabhi thoda sa upload karke le thoda sa aur hire education me jaaye toh wahan toh ekdam bilkul barabari ka darja ho jata hai maine main kisi vishesh ki us me aalochana karna nahi chahunga lekin batana chahunga ki yah cheez hai agar aap abhi dekhen toh saraswati shishu mandir aur vidya mandir me yah vyavastha other ki apeksha zaroor achi chal rahi hai kyonki wahan abhi bhi nahi pohcha toh aadhi adhuri sahi lekin gurukul ki paddhatee ko apnaya ja raha hai aur aur shiksharthi ke beech akhand prem ko ek anany prem ko dikhaya ja raha hai ki shikshak ke paas agar shiksharthi jata hai toh sarvapratham pranam karna aur prarthna ke samay mantron ka ucharan sthan hone ka mukhya karan hai aisa mera manana hai main aur ke bare me nahi keh sakta dhanyavad

आपके प्रश्न शिक्षा व्यवस्था डाउन के होती जा रही है क्या कारण है पर थोड़ा सा प्रकाश डालना च

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Ekta Jain

Educator, Author, Motivational speaker

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

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आदमी चिट्ठा मिस्टर डाउन क्यों की जाती है क्या कारण है तीन कारण आधुनिक संसाधनों का आगमन अर्थात इंटरनेट और मोबाइल की उपयोगिता पूरी सनी की साठ से सत्तर परसेंट नोट कर लीजिए कुल सुनने का 770 परसेंट इंटरनेट पर लगे रहना दूसरा हमारे विद्यालय में हमारे स्कूलों में कालेजों में शिक्षा के वर्क किताबी रह गई है व्यवहारिक शिक्षा खत्म हो गई है क्योंकि विद्यार्थी इंटरनेट से निशाना जानकारी करके अपने आप को संतुष्ट हो ज्ञानी मांग लेता है और उसके पास किताबों को पढ़ने के लिए वक्त नहीं है तीसरा हमारी सरकार की गलत राजनीति गलत शिक्षणी और गलत सरकार की गलत अवधारणा शिक्षा विभाग मंत्री या देश का प्रधानमंत्री एक सशक्त और शिक्षा ज्ञान होना चाहिए जैसे कभी राजा होते थे आज तो राजनीति वाला प्रधानमंत्री है राजस्थान में कितने मरीज शिक्षा के तीन कारण है जिसमें शिक्षा के जनाजे पर यह जो पित्ताशय व्यवस्था के साथ में महत्वपूर्ण सेविंग

aadmi chittha mister down kyon ki jaati hai kya karan hai teen karan aadhunik sansadhano ka aagaman arthat internet aur mobile ki upayogita puri sunny ki saath se sattar percent note kar lijiye kul sunne ka 770 percent internet par lage rehna doosra hamare vidyalaya me hamare schoolon me kalejon me shiksha ke work kitabi reh gayi hai vyavaharik shiksha khatam ho gayi hai kyonki vidyarthi internet se nishana jaankari karke apne aap ko santusht ho gyani maang leta hai aur uske paas kitabon ko padhne ke liye waqt nahi hai teesra hamari sarkar ki galat raajneeti galat shikshani aur galat sarkar ki galat avdharna shiksha vibhag mantri ya desh ka pradhanmantri ek sashakt aur shiksha gyaan hona chahiye jaise kabhi raja hote the aaj toh raajneeti vala pradhanmantri hai rajasthan me kitne marij shiksha ke teen karan hai jisme shiksha ke janaje par yah jo pittashaya vyavastha ke saath me mahatvapurna saving

आदमी चिट्ठा मिस्टर डाउन क्यों की जाती है क्या कारण है तीन कारण आधुनिक संसाधनों का आगमन अर

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संत श्री रामजी महाराज

ध्यान योगी, आध्यात्मिक गुरु, राम कथा भागवत कथा,प्रवक्ता वित्तीय सलाहकार राजनेता एवं विचारक

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आपका प्रश्न भी बहुत अच्छा प्रश्न है इससे पहले एक साथी का प्रश्न था उसी से मिलता-जुलता प्रश्न है और मैं जवाब देना चाहूंगा कि आपका प्रश्न है आज हमारी शिक्षा व्यवस्था डाउन क्यों होती जा रही है क्योंकि शिक्षा देने वाले और शिक्षा लेने वाले दोनों में समर्पण का अभाव है पहले शिक्षक विद्यार्थियों के प्रति समर्पित होते थे हमारे वह विद्यालय समय के पश्चात भी हमारा ध्यान रखते थे अभी तो हालात ये हो गई कि अगर 4:00 बजे विद्यालय छूटने वाला है तो शिक्षक लोग सोचते हैं कि 3:30 बजे क्यों निकल लिया जाए 10:00 बजे का विद्यालय तो कोशिश करते हैं क्या रे चले चलेंगे 10:30 बजे क्यों नहीं क्यों पहुंचा जाए कालांश 8:40 का तो कोशिश करेंगे 8:50 बजे पहुंचे 10 मिनट तो धीरे-धीरे परेशानी होती है कि आप उस काम को स्वार्थ व कर रहे हैं रुचि से नहीं कर पाया अगर आप पढ़ाना आपकी वो भी हो जाए तो आप सुबह से लेकर शाम तक 24 घंटे 12 घंटे पढ़ाते रहे तो भी आपको थकान नहीं होगी तो भाई ना समर्पित शिक्षक रहें ना ही समर्पित छात्र और फिर मैनेजमेंट देखो तो इसी तरह का होगे आप बच्चों को सुविधाएं चाहिए अब मुझे समझ में नहीं आता हम जैन मुनियों के वहां गए और जैन मुनियों के यहां पर हम तो अपने प्रवचन में पंखे उनके ऐसी वैसी जातक अच्छी से अच्छी सुविधा रखते हैं लेकिन जैन मुनियों के यहां परिवर्तन के बड़े कक्ष में पंखा नहीं होता मैं नाम लेना चाहूंगा मारे ज्ञान विजय सूरी जी महाराज और ध्यान विजय सूरी दोनों के सानिध्य में मुझे रहने का मौका मिला तो इतने करोड़पति सेट नीचे बैठते हैं लेकिन जाओ उपासना स्थलों में पंखा लगाने की अनुमति नहीं होती और एक दिन तो जानू जो सूरी जी महाराज ने कहा कि क्या बेवकूफ लोग उपाश्रय में भी उपाश्रय मतलब का उपासना करते हैं उपाश्रय में भी पंखा चाहिए अब बोलिए हम तो थोड़ा सा गर्मी बर्दाश्त नहीं कर सकते तो कहने का मतलब सुविधाओं के नाम पर खूब पैसा लूटा जा रहा है जिससे कोई यह कोई भोग भोगने जैसी चीज हो अरे विद्यार्थी को सुविधा नहीं कष्ट मिलना चाहिए तब जाकर क्यों महान बनेगा यह पश्चात का तरीका बदलेगा आधुनिक तरीका बदलेगा तभी शिक्षा व्यवस्था तो तभी सुधरेगी बाकी तो ठीक है पेट भरने का काम तो चालू है हरि ओम

aapka prashna bhi bahut accha prashna hai isse pehle ek sathi ka prashna tha usi se milta julataa prashna hai aur main jawab dena chahunga ki aapka prashna hai aaj hamari shiksha vyavastha down kyon hoti ja rahi hai kyonki shiksha dene waale aur shiksha lene waale dono me samarpan ka abhaav hai pehle shikshak vidyarthiyon ke prati samarpit hote the hamare vaah vidyalaya samay ke pashchat bhi hamara dhyan rakhte the abhi toh haalaat ye ho gayi ki agar 4 00 baje vidyalaya chutney vala hai toh shikshak log sochte hain ki 3 30 baje kyon nikal liya jaaye 10 00 baje ka vidyalaya toh koshish karte hain kya ray chale chalenge 10 30 baje kyon nahi kyon pohcha jaaye kalansh 8 40 ka toh koshish karenge 8 50 baje pahuche 10 minute toh dhire dhire pareshani hoti hai ki aap us kaam ko swarth va kar rahe hain ruchi se nahi kar paya agar aap padhana aapki vo bhi ho jaaye toh aap subah se lekar shaam tak 24 ghante 12 ghante padhate rahe toh bhi aapko thakan nahi hogi toh bhai na samarpit shikshak rahein na hi samarpit chatra aur phir management dekho toh isi tarah ka hoge aap baccho ko suvidhaen chahiye ab mujhe samajh me nahi aata hum jain muniyon ke wahan gaye aur jain muniyon ke yahan par hum toh apne pravachan me pankhe unke aisi vaisi jatak achi se achi suvidha rakhte hain lekin jain muniyon ke yahan parivartan ke bade kaksh me pankha nahi hota main naam lena chahunga maare gyaan vijay suri ji maharaj aur dhyan vijay suri dono ke sanidhya me mujhe rehne ka mauka mila toh itne crorepati set niche baithate hain lekin jao upasana sthalon me pankha lagane ki anumati nahi hoti aur ek din toh janu jo suri ji maharaj ne kaha ki kya bewakoof log upashray me bhi upashray matlab ka upasana karte hain upashray me bhi pankha chahiye ab bolie hum toh thoda sa garmi bardaasht nahi kar sakte toh kehne ka matlab suvidhaon ke naam par khoob paisa loota ja raha hai jisse koi yah koi bhog bhogane jaisi cheez ho are vidyarthi ko suvidha nahi kasht milna chahiye tab jaakar kyon mahaan banega yah pashchat ka tarika badlega aadhunik tarika badlega tabhi shiksha vyavastha toh tabhi sudharegi baki toh theek hai pet bharne ka kaam toh chaalu hai hari om

आपका प्रश्न भी बहुत अच्छा प्रश्न है इससे पहले एक साथी का प्रश्न था उसी से मिलता-जुलता प्रश

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आज हमारी शिक्षा व्यवस्था डाउन होती जा रही है इसका क्या कारण है देखिए प्रश्न आपका बहुत ही ज्वलंत और बहुत ही विचारणीय है इसके बहुत सारे कारण हैं जिन्हें एक तो बातों में व्यक्त हम नहीं कर सकते हैं लेकिन हां यह जानना बहुत जरूरी होगा जब कोई अपने चीज को या अपने घर में होने वाली वस्तुओं को त्याग करके और दूसरों पर निर्भर हो जाता है तुझे दूसरे पर निर्भर होगा तो जब वहां से मिलेगा तो खाएगा नहीं मेरा तो नहीं खाएगा बुखार आ जाएगा वैसे ही जब हमारी शिक्षा व्यवस्था हम लोगों के हाथ में भारतीय पद्धति पर थी तो ठीक था लेकिन भारतीय पद्धति को छोड़ करके दूसरी क्या होता है जब हम दूसरे की भाषा सीखते हैं दूसरी चीजों को लेने लगते हैं तो उसमें बहुत समय लग जाता है और हम लोगों के साथ भी ऐसा ही हुआ भारत की जो परंपराएं थी उनको दौड़ करके जब अंग्रेजों का शासन था तो अंग्रेजों ने यही कार्य किया यहां 1835 में निकालें आते हैं और यहां देख कर के सब जाते हैं और डायरेक्ट बोल देते हैं कि आगे शिक्षा पद्धति को बदल दो उस समय भारत की शिक्षा भारत का शैक्षिक स्तर 93 वर्ष 97% या 98% गिरकर 200 वर्ष 300 वर्ष पहले 98% से ग्रस्त रहता है और 10 और हमारा 55 परसेंट पर आ जाता है भावंतर से कहीं 49 परसेंट है क्या 70 परसेंट है और अब क्या है विश्वविद्यालय स्कूटी नीचे जा रही है यहीं पर आ चुका इसीलिए हम उत्तर दायित्व दे दिया जाए तो अपने गांव को शिक्षित करेगा तो सभी के सभी सेक्सी को शिक्षित हो सकते हैं और बहुत सारी खामियां हैं जिन पर और कर सकते हैं धन्यवाद

aaj hamari shiksha vyavastha down hoti ja rahi hai iska kya karan hai dekhiye prashna aapka bahut hi jwalant aur bahut hi vicharniya hai iske bahut saare karan hain jinhen ek toh baaton me vyakt hum nahi kar sakte hain lekin haan yah janana bahut zaroori hoga jab koi apne cheez ko ya apne ghar me hone wali vastuon ko tyag karke aur dusro par nirbhar ho jata hai tujhe dusre par nirbhar hoga toh jab wahan se milega toh khaega nahi mera toh nahi khaega bukhar aa jaega waise hi jab hamari shiksha vyavastha hum logo ke hath me bharatiya paddhatee par thi toh theek tha lekin bharatiya paddhatee ko chhod karke dusri kya hota hai jab hum dusre ki bhasha sikhate hain dusri chijon ko lene lagte hain toh usme bahut samay lag jata hai aur hum logo ke saath bhi aisa hi hua bharat ki jo paramparayen thi unko daudh karke jab angrejo ka shasan tha toh angrejo ne yahi karya kiya yahan 1835 me nikale aate hain aur yahan dekh kar ke sab jaate hain aur direct bol dete hain ki aage shiksha paddhatee ko badal do us samay bharat ki shiksha bharat ka shaikshik sthar 93 varsh 97 ya 98 girkar 200 varsh 300 varsh pehle 98 se grast rehta hai aur 10 aur hamara 55 percent par aa jata hai bhavantar se kahin 49 percent hai kya 70 percent hai aur ab kya hai vishwavidyalaya scooty niche ja rahi hai yahin par aa chuka isliye hum uttar dayitva de diya jaaye toh apne gaon ko shikshit karega toh sabhi ke sabhi sexy ko shikshit ho sakte hain aur bahut saari khamiyan hain jin par aur kar sakte hain dhanyavad

आज हमारी शिक्षा व्यवस्था डाउन होती जा रही है इसका क्या कारण है देखिए प्रश्न आपका बहुत ही ज

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Dhananjay Kumar

government

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आज हमारी शिक्षा प्रणाली जो डाउनलोड किए जा रहे उसके पीछे एक प्रमुख कारण है राजनीतिक दूसरा कारण हमारी जो शिक्षा पद्धति है वह हसन करोगे तो हम बताना चाहेंगे किस पर हमारा व्यक्तिगत तौर पर भी और सामाजिक स्तर पर भी इसका विरोध करना चाहिए सुंदर लगते हो

aaj hamari shiksha pranali jo download kiye ja rahe uske peeche ek pramukh karan hai raajnitik doosra karan hamari jo shiksha paddhatee hai vaah hasan karoge toh hum batana chahenge kis par hamara vyaktigat taur par bhi aur samajik sthar par bhi iska virodh karna chahiye sundar lagte ho

आज हमारी शिक्षा प्रणाली जो डाउनलोड किए जा रहे उसके पीछे एक प्रमुख कारण है राजनीतिक दूसरा क

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Rohil Kabir

banker & Proffessor (Career Counsellor)

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सीधी सी बात है शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है परंतु यह होगा कैसे इसको लेकर इस पर करना चाहिए जहां तक में सुधार के लिए क्या करना पड़ेगा और देश की जनता का कोई रुचि नहीं है मुझे ऐसा लगता है कि ईरान निकट भविष्य में शिक्षा प्रणाली में कोई बड़ा बदलाव आने वाला नहीं है कोई बड़ा सुधार होने वाला नहीं है क्योंकि हमारी देश की जनता शिक्षा का क्षेत्र के लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है यही कारण है कि हमारे दिन प्रतिदिन जा रही हो

seedhi si baat hai shiksha pranali me sudhaar ki avashyakta hai parantu yah hoga kaise isko lekar is par karna chahiye jaha tak me sudhaar ke liye kya karna padega aur desh ki janta ka koi ruchi nahi hai mujhe aisa lagta hai ki iran nikat bhavishya me shiksha pranali me koi bada badlav aane vala nahi hai koi bada sudhaar hone vala nahi hai kyonki hamari desh ki janta shiksha ka kshetra ke lekar bilkul bhi gambhir nahi hai yahi karan hai ki hamare din pratidin ja rahi ho

सीधी सी बात है शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है परंतु यह होगा कैसे इसको लेकर इस पर

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Ajit Pandit

visual Artist आप ललित कला में कैरियर बनाना हैं तो संपर्क कर सकते हैं

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देखिए इसका मुख्य कारण है सरकार की नीति उसके बाद दूसरी कारण यह है जो समाज का उदासीन बना टीचरों के प्रति इसी कारण यह जो टीचरों का टीचरों पर इतना लगाम लगा देना जवाब बच्चों को डांटे सकते हैं बच्चों को बच्चों के हाथ में उठा सकते अब अपना टाइम सोचिए ऐसे 10 साल पहले जो शिक्षा व्यवस्था क्या थी ठीक है जो आप बच्चों को जो पहले जैसे टूटा जाता था वैसे मत पूछिए लेकिन टीचरों से छड़ी मच्छी नहीं है उनसे छीन छीन लेंगे तो बच्चे संस्कार भूल जाएंगे और बच्चे संस्कार भूल जाएंगे तो समाज की स्थिति क्या होगी और सब लोग के सामने है और उसकी ट्रेलर देखने लगी है जो स्थिति है तो इसीलिए मुझे लगता है अभी भी सरकार को थोड़ा सोचना चाहिए कम से कम टीचरों के हाथ में छड़ी जरूर होनी चाहिए जो वह बच्चों को बता सके जुपिटर संस्कार और ज्ञान क्या होता है अगर जी नहीं होता है तो फिर कुछ नहीं कर सकते यह समाज ऐसे ही बढ़ते जाएगी और यह समाज में अब तो आने वाली पीढ़ी होंगे 10:00 15 साल बाद की नई पीढ़ी क्या करेंगे

dekhiye iska mukhya karan hai sarkar ki niti uske baad dusri karan yah hai jo samaj ka udasin bana ticharon ke prati isi karan yah jo ticharon ka ticharon par itna lagaam laga dena jawab baccho ko Dante sakte hain baccho ko baccho ke hath me utha sakte ab apna time sochiye aise 10 saal pehle jo shiksha vyavastha kya thi theek hai jo aap baccho ko jo pehle jaise tuta jata tha waise mat puchiye lekin ticharon se chadi macchi nahi hai unse cheen cheen lenge toh bacche sanskar bhool jaenge aur bacche sanskar bhool jaenge toh samaj ki sthiti kya hogi aur sab log ke saamne hai aur uski trelar dekhne lagi hai jo sthiti hai toh isliye mujhe lagta hai abhi bhi sarkar ko thoda sochna chahiye kam se kam ticharon ke hath me chadi zaroor honi chahiye jo vaah baccho ko bata sake Jupiter sanskar aur gyaan kya hota hai agar ji nahi hota hai toh phir kuch nahi kar sakte yah samaj aise hi badhte jayegi aur yah samaj me ab toh aane wali peedhi honge 10 00 15 saal baad ki nayi peedhi kya karenge

देखिए इसका मुख्य कारण है सरकार की नीति उसके बाद दूसरी कारण यह है जो समाज का उदासीन बना टीच

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Harender Kumar Yadav

Career Counsellor.

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Sapna

Social Worker

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आपका प्रश्न है आज हमारी शिक्षा व्यवस्था डाउन क्यों होती जा रही है क्या कारण है तो आपको कुछ में क्या ग्रुप में आपको बताना चाहूंगी कि वह इस पिक्चर को या विद्यार्थी आज हर किसी की जरूरत पड़ता बन गई है इसलिए हमारी शिक्षा व्यवस्था डाउन हो रही है सपना

aapka prashna hai aaj hamari shiksha vyavastha down kyon hoti ja rahi hai kya karan hai toh aapko kuch me kya group me aapko batana chahungi ki vaah is picture ko ya vidyarthi aaj har kisi ki zarurat padta ban gayi hai isliye hamari shiksha vyavastha down ho rahi hai sapna

आपका प्रश्न है आज हमारी शिक्षा व्यवस्था डाउन क्यों होती जा रही है क्या कारण है तो आपको कुछ

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Sandip Sinha

Engineer,Banker,Ex-serviceman

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आज हमारी शिक्षा व्यवस्था का व्यवसायीकरण हो चुका है सभी स्कूल या कोई भी शिक्षण संस्था है अब वैसे नहीं रह गई हैं उन्हें सिर्फ बेवफाई करण पर ही जोर दिया किसी तरह अपने यहां बच्चे को ज्यादा से ज्यादा संख्या में लाया जाए और उनसे ज्यादा फीस और तरह-तरह के राशि वसूली जाए यह शिक्षा का व्यवसायीकरण और भगवान से में शिक्षा दिखावे पर ज्यादा चले गए

aaj hamari shiksha vyavastha ka vyavasayikaran ho chuka hai sabhi school ya koi bhi shikshan sanstha hai ab waise nahi reh gayi hain unhe sirf bewafai karan par hi jor diya kisi tarah apne yahan bacche ko zyada se zyada sankhya me laya jaaye aur unse zyada fees aur tarah tarah ke rashi vasuli jaaye yah shiksha ka vyavasayikaran aur bhagwan se me shiksha dikhaave par zyada chale gaye

आज हमारी शिक्षा व्यवस्था का व्यवसायीकरण हो चुका है सभी स्कूल या कोई भी शिक्षण संस्था है

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G.singh

Social Worker

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सर्वप्रथम ओक लाइफ से जुड़े सभी प्रतिभागियों को सादर नमन वंदन अभिनंदन करता हूं शिक्षा व्यवस्था क्यों गिरती आ रही इस पर किया गया है मेरा मानना है कि शिक्षा से त्वरित लाभ नहीं होता है इससे व्यक्ति शिक्षा से दूर हटता जा रहा है यदि शिक्षा को हम इनकम से जोड़ दिए या प्रोफेशनल कोर्स कराए जाएं बच्चा यम्मी की डिग्री ले करके आता है और वह उसे कहा जाए कि आप ₹10 सुबह कमाकर लाए तो ना खेत में काम कर पाता है 9 कमा कर लाता है जबकि उसे हम एक फार्मासिस्ट की डिग्री दिला दें उससे प्रोफेशनल कोर्स करा दें तो वह इनकम जनरेट करेगा और सभी का लगाओ शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ता रहेगा जब ऐसा नहीं करते हैं तो शिक्षा का स्तर धीरे-धीरे घटता जा रहा है

sarvapratham oak life se jude sabhi pratibhagiyon ko sadar naman vandan abhinandan karta hoon shiksha vyavastha kyon girti aa rahi is par kiya gaya hai mera manana hai ki shiksha se twarit labh nahi hota hai isse vyakti shiksha se dur hatata ja raha hai yadi shiksha ko hum income se jod diye ya professional course karae jayen baccha yammi ki degree le karke aata hai aur vaah use kaha jaaye ki aap Rs subah kamaakar laye toh na khet me kaam kar pata hai 9 kama kar lata hai jabki use hum ek pharmacist ki degree dila de usse professional course kara de toh vaah income generate karega aur sabhi ka lagao shiksha ke kshetra me nirantar aage badhta rahega jab aisa nahi karte hain toh shiksha ka sthar dhire dhire ghatata ja raha hai

सर्वप्रथम ओक लाइफ से जुड़े सभी प्रतिभागियों को सादर नमन वंदन अभिनंदन करता हूं शिक्षा व्यव

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Ashwini Sharma

Social Worker

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आज हमारी शिक्षा व्यवस्था डाउन क्यों होती जा रही है क्या कारण है इसका सबसे महत्वपूर्ण कारण हैं हमारी नैतिकता ही खत्म होती जा रही है हमारे अंदर नैतिकता नहीं है सबसे पहले नैतिक गुणों का चारित्रिक गुणों का और राष्ट्रभक्ति केयर भक्ति के गुणों का होना आवश्यक है फिर श्रद्धा होना आवश्यक है फिर शिक्षा ज्ञान के लिए धन के लिए नहीं है हम धन के लिए शिक्षा ग्रहण करते हैं करना चाहते हैं इसलिए शिक्षा व्यवस्था डाउन हो रही है यदि इसमें से धन का लालच हटा दिया जाए इसको बिजनेस न करके सेवा का माध्यम बनाया जाए तू सेवा शिक्षा की व्यवस्था में सुधार के लिए सबसे अच्छा साधन हो सकती है विद्या दान महादान है शिक्षा का दान सीखना दूसरों को सिखाना देश देता है हम सब को सब कुछ देश हमें देता है सब कुछ हम भी तो कुछ देना सीखे ऐसी परोपकार की भावना हम सबके मन में होनी चाहिए ज्ञान की और दाने की भावना होनी चाहिए क्या नेता ने की भावना होगी तो शिक्षा की व्यवस्था अच्छी होगी और ज्ञानदान की भावना नहीं होगी हमारी तरफ दास्तां विश्वास नहीं होगा तो शिक्षा की व्यवस्था हो ही नहीं सकती शिक्षा ज्ञान का भंडार है आजीवन चलने वाली शिक्षा है शिक्षा को बिजनेस नहीं बनाना श्री लेंगे नहीं तो ना आज स्कोर बिजनेस बना दिया हमने व्यापार बना दिया पैसे का लेनदेन कर दिया पैसे की चाह में लाल शिक्षा व्यवस्था बिगाड़ दी शिक्षा की व्यवस्था बिगड़ने का सबसे बड़ा कारण है पैसे का लालच पैसे के लालच में हम शिक्षा ग्रहण करनी चाहते हैं हम शिक्षकों की खरीदना चाहते हैं इसलिए शिक्षा व्यवस्था डाउन हो रही है

aaj hamari shiksha vyavastha down kyon hoti ja rahi hai kya karan hai iska sabse mahatvapurna karan hain hamari naitikta hi khatam hoti ja rahi hai hamare andar naitikta nahi hai sabse pehle naitik gunon ka charittrik gunon ka aur rashtra bhakti care bhakti ke gunon ka hona aavashyak hai phir shraddha hona aavashyak hai phir shiksha gyaan ke liye dhan ke liye nahi hai hum dhan ke liye shiksha grahan karte hain karna chahte hain isliye shiksha vyavastha down ho rahi hai yadi isme se dhan ka lalach hata diya jaaye isko business na karke seva ka madhyam banaya jaaye tu seva shiksha ki vyavastha me sudhaar ke liye sabse accha sadhan ho sakti hai vidya daan mahadan hai shiksha ka daan sikhna dusro ko sikhaana desh deta hai hum sab ko sab kuch desh hamein deta hai sab kuch hum bhi toh kuch dena sikhe aisi paropkaar ki bhavna hum sabke man me honi chahiye gyaan ki aur daane ki bhavna honi chahiye kya neta ne ki bhavna hogi toh shiksha ki vyavastha achi hogi aur gyanadan ki bhavna nahi hogi hamari taraf dastan vishwas nahi hoga toh shiksha ki vyavastha ho hi nahi sakti shiksha gyaan ka bhandar hai aajivan chalne wali shiksha hai shiksha ko business nahi banana shri lenge nahi toh na aaj score business bana diya humne vyapar bana diya paise ka lenden kar diya paise ki chah me laal shiksha vyavastha bigad di shiksha ki vyavastha bigadne ka sabse bada karan hai paise ka lalach paise ke lalach me hum shiksha grahan karni chahte hain hum shikshakon ki kharidna chahte hain isliye shiksha vyavastha down ho rahi hai

आज हमारी शिक्षा व्यवस्था डाउन क्यों होती जा रही है क्या कारण है इसका सबसे महत्वपूर्ण कारण

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Jitendra Singh

Social Worker

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आज हमारी शिक्षा व्यवस्था डाउन क्यों होती जा रही है क्या कारण है इसका कारण हमारा जो पढ़ाई का सिलेबस है वह इसका मेन कारण है अभी आज से नहीं वर्षों से डाउन होती जा रही है पहले हमारा पढ़ाई का जो शिक्षा का स्तर सा शब्द बोला था शब्दों के गुणों से शिक्षा का ज्ञान होता था आदमी ज्ञानी ज्ञानी तेजस्वी यशस्वी राष्ट्रभक्त होते आज हमारा शिक्षा का बयान अर्थ ज्ञान है अर्थ ज्ञान क्या होता है और सिद्धार्थ मिश्रा संरचना है सब समझाना अर्थ शब्द में ही उसका गुण छिपा हुआ है आध्यात्मिक जगत की रचना जहां रुक जाती है थम जाती है ऐसे समझाना रे संरचना और ऐसे आध्यात्मिक जहां आध्यात्मिक जगत आ करके रुक जाता है वहां से भौतिक जगत चालू होता है इस प्रकार का ज्ञानपीठ शिक्षा मिलेगी तो हम सिर्फ जाने मुनि ज्ञानी होंगे और इस व्यवस्था को लागू करना ही चाहिए मैं तो आज से सभी से निवेदन करता हूं कि शब्द गुरु ज्ञान शिक्षा में चाहिए शब्द का ज्ञान होना चाहिए देखिए एक शब्द की व्याख्या कर रहा हूं आप उसे किसी शिक्षक से पूछें आप उसे किसी आईएएस और पीसीएस से पूछे तो वह पढ़ा लिखा होने के बावजूद उस चीज को शब्द बोल में नहीं गिनते उसका भाव तो जानते हैं लेकिन उसका गुण नहीं जानते एक शब्द है विवेक विवेक हम जो हैं अपने बचे अपना विवेक जगह विवेक क्या होता है इसका अगर हम सब की बात करें तो वह शब्द हमको उसके बारे में बताता है देखिए बीवी शब्द में 300 रन दिए और का अब इनको जहां अक्षरों को देखते हैं तो विश्व विधि यानी की विधि सम्मत हो बेस्ट विचार और बिजी भी हो और विचार के माध्यम से कैसे करूं अगर हम विधि और विचार करके कर्म को करते हैं तो विवेक हो जाता उस विवेक को हम जो हैं बस विवेक कहते थे हम उस विवेक के गुण नहीं जानते अगर यह शिक्षा का सिलेबस हमारे शिक्षा में आ जाए तो शिक्षा व्यवस्था हमारी बिल्कुल से दूर हो जाएगी आप एक बात बताइए क्या जो आप के शिक्षा मंत्री हैं क्या वह इस शिक्षा ज्ञान को जानते हैं फिर जब उस शब्द गुण संपन्न ज्ञान को नहीं जानते शब्द का गुण ही नहीं जानते तो उनको हमने मंत्री कैसे बनाती है क्यों बना दिया इस चीज को हम लोग किसी को नहीं पूछते हैं जिसको जो बना दिया बना दिया योग्यता के आधार पर मंत्रालयों का बंटवारा गाना चाहिए और अगर योग्य मंत्रालय योग्य आदमी के पास में होगा वह मुझे पूरा भरोसा है कि देश की शिक्षा व्यवस्था डाउन नहीं होगी और शुद्ध हो जाएगी और देश हमारा संबंध हो जाएगा सब किसान जवान सब खुशहाल हो जाएंगे हम आज इस प्रकार के जंगलों में उलझे हुए हैं इसका मेन कारण है अज्ञानता हम पढ़ लिख कर के भी अज्ञानी ही है पढ़ा लिखा अज्ञानी लोग जो है वह अहंकारी हो गए हैं भ्रष्टाचारी हो गए हैं क्योंकि उन्हें शब्द पर ज्ञान का पता नहीं कि हम हमारा पद क्या है पद हमारा क्या कह रहा है पद के साथ में मन लग जाता है क्यों अज्ञानता जाता है और नहीं तो पद के साथ में कद कद से मत यह तीन प्रकार की श्रेणियों से इंसान आज जी रहा है और मद में चूर हो करके फिर वह गिरता है वह गिरता है और कितना है हम इस व्यवस्था को सुधार सकते हैं नई आने वाली पीढ़ी को शब्द गुरु ज्ञान की शिक्षा देकर शब्द गुरु ज्ञान क्या है यह सिलेबस मैं तैयार कर रहा हूं इसमें आप सहयोग कीजिए ज्यादा से ज्यादा शिक्षा भिन्न और जो हमारे विद्या के प्रिय लोग हैं उन लोगों से प्रोफेशन से और अन्य ऐसे लोगों से संपर्क कर एक संगठन तैयार करें और शब्द गुण संपन्न शिक्षा को हम अपने समाज में लाएं तो हमारे आने वाली पीढ़ी हमारे बच्चे ध्यानी मनी लोगी होंगे मुझे ऐसा पूर्ण विश्वास है आपने शिक्षा से संबंधित पसंद किया इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद देखिए जिस देश की जिस राष्ट्र की शिक्षा नीति अच्छी होती है उदास हमेशा उन्नत होता है और शिक्षा नीति हमारी आज वह लोग बना रहे हैं जो लोग अपने को शिक्षा नीति बनाने का मतलब क्या है उसमें त्याग भी चाहिए तब भी चाहिए और उसमें ज्ञान भी चाहिए तो हमारा ना त्याग है लगता है ना नेट ना क्या है जो तूफान नहीं उसे क्या ज्ञान होगा और जिसे ज्ञान में वह क्या किताब दिखेगा वह क्या करेगा इसलिए आज जो ज्ञान है भौतिक जगत का ज्ञान है अर्थ जगत के ज्ञान में लोग अंधाधुन पैसा कमाने पर लगे हुए हैं आज स्पेशल की क्या वैल्यू है घर में सब बैठे हैं पैसा रखे रहें मुझे इसकी कोई वैल्यू नहीं लग रही है आज कोई भी कुछ भी नहीं कमा रहा है प्रभु की नीति देखिए आज हम सब मुंह पर अपने मुंह ढके घूम रहे हैं और आज हवा में प्रदूषण कम है लेकिन फिर भी हम भयभीत से मुंह ढके घूम रहे हैं और जब प्रदूषण था उस समय मुंह नहीं लगते थे यह प्रकृति की नीति इंसान जैसा करेगा जितना गिरेगा उतना ही प्रकृति उसको उतना ही गिराते चली जाएगी तो हम लोग आज शिक्षित समाज के हिसाब से गिरते जा रहे हैं किसी को शिक्षा के बारे में बात कीजिए वह अपने को अपमानित महसूस करता है इसलिए मेरा आपसे निवेदन यह भी है आपने अच्छा क्वेश्चन किया इसके जरिए आप उसको दूर दूर तक फैला है और एक संगठन बनाइए और उस संगठन को बना करके शब्द ज्ञान की शिक्षा देने के लिए भारत सरकार को और अपने राज्य सरकारों को उनको इस चीज की सलाह मशवरा दीजिए हो सकता है हमारी सलाह और आपकी सलाह से हमारा देश फिर पहले जैसा उन्नत हो जाए हम रहे या ना रहे लेकिन देश है और रहेगा यही सनातन का विशेष बोल है धन्यवाद जय हिंद जय भारत

aaj hamari shiksha vyavastha down kyon hoti ja rahi hai kya karan hai iska karan hamara jo padhai ka syllabus hai vaah iska main karan hai abhi aaj se nahi varshon se down hoti ja rahi hai pehle hamara padhai ka jo shiksha ka sthar sa shabd bola tha shabdon ke gunon se shiksha ka gyaan hota tha aadmi gyani gyani tejaswi yashashvi rashtrabhakt hote aaj hamara shiksha ka bayan arth gyaan hai arth gyaan kya hota hai aur siddharth mishra sanrachna hai sab samajhana arth shabd me hi uska gun chhipa hua hai aadhyatmik jagat ki rachna jaha ruk jaati hai tham jaati hai aise samajhana ray sanrachna aur aise aadhyatmik jaha aadhyatmik jagat aa karke ruk jata hai wahan se bhautik jagat chaalu hota hai is prakar ka gyanapeeth shiksha milegi toh hum sirf jaane muni gyani honge aur is vyavastha ko laagu karna hi chahiye main toh aaj se sabhi se nivedan karta hoon ki shabd guru gyaan shiksha me chahiye shabd ka gyaan hona chahiye dekhiye ek shabd ki vyakhya kar raha hoon aap use kisi shikshak se 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vishesh bol hai dhanyavad jai hind jai bharat

आज हमारी शिक्षा व्यवस्था डाउन क्यों होती जा रही है क्या कारण है इसका कारण हमारा जो पढ़ाई

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Gopal Srivastava

Acupressure Acupuncture Sujok Therapist

1:01
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आप कह रहे हैं शिक्षा व्यवस्था डाउन हो जाती है मैं करूं बहुत व्यवस्थित होती जा रही है छोटे-छोटे गांव से बच्चे निकल के आईपीएस ऑफिसर बन रहे हैं आईएएस ऑफिसर बनते हैं आईएस ऑफिसर बन रहे हैं कमिश्नर बन रहे हैं डिप्टी कलेक्टर बन रहे हैं और आपके शिक्षा को मोरी अभी लड़की हो यह मध्य प्रदेश से थी जिसके बाप नहीं थे और उसने कैसे पढ़ पढ़ के माने उसे उजाला करा है और वह अपनी अच्छा विश करने के लिए स्कॉलरशिप अमेरिका बीच 3 साल की स्कॉलरशिप कब वापस लिया गई और आज वाला बड़ा गांव के लोग शिक्षा बहुत ज्यादा बढ़ती जा रही है और इस गांव के लोग आ रहे हैं सर कोई नहीं कर रहा

aap keh rahe hain shiksha vyavastha down ho jaati hai main karu bahut vyavasthit hoti ja rahi hai chote chote gaon se bacche nikal ke ips officer ban rahe hain IAS officer bante hain ias officer ban rahe hain commissioner ban rahe hain deputy collector ban rahe hain aur aapke shiksha ko mori abhi ladki ho yah madhya pradesh se thi jiske baap nahi the aur usne kaise padh padh ke maane use ujaala kara hai aur vaah apni accha wish karne ke liye scholarship america beech 3 saal ki scholarship kab wapas liya gayi aur aaj vala bada gaon ke log shiksha bahut zyada badhti ja rahi hai aur is gaon ke log aa rahe hain sir koi nahi kar raha

आप कह रहे हैं शिक्षा व्यवस्था डाउन हो जाती है मैं करूं बहुत व्यवस्थित होती जा रही है छोटे

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Amrit Raj

Motivational Speakar,Social Activist,Analyst,Shayar,Strategist & Research Scholar.

2:00
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शिक्षा व्यवस्था डाउन होने के पीछे सिर्फ एक वजह नहीं है उसके पीछे कई सारे बजे हैं हमारे देश में एक आप यह समझने की सबसे घटिया और सबसे गलत चीज है कि हमारा राजनीतिक तंत्र जो पूरी तरीके से हमारे ऊपर शासन करता है वह कभी नहीं चाहता है कि हमारे देश में बेहतर शिक्षा तंत्र स्थापित हो क्योंकि यदि एक शिक्षा तंत्र बेहतर शिक्षा तंत्र हमारे देश में स्थापित हो जाता है तो लोगों को सारी चीजें समझ में आने लगती हैं देश किस तरीके से चलता है देश की अर्थव्यवस्था क्या है पॉलिटिक्स क्या है सोसाइटी क्या है रीजन क्या है आप सारे चीजों को धीरे धीरे समझने लगते हैं उससे होता क्या है क्या क्वेश्चन हीरोस करना शुरू करते हैं हम सरकार से सवाल उठाते हैं सत्ता में कोई भी हो बीजेपी की सरकार में कांग्रेस की सरकार हो या किसी और पार्टी की सरकार हो हर सप्ताह में बैठने वाले लोग इसी तंत्र में शामिल होते हैं कि यहां की शिक्षा व्यवस्था को बेहतरीन नहीं बनाया जा सके शायद यही वजह है कि आजादी के इतने सालों बाद ही हमारे प्राइमरी स्कूलों में जो मिड-डे-मील मिलते हैं उस मिड डे मील में हम लोग छिपकली पाते हैं हमारे पास कोई भी बेहतरीन विश्वविद्यालय नहीं है कि ने चुने यूनिवर्सिटी है तो इन सारी चीजों पर आपको ध्यान देने होंगे और आप इस इन सारी चीजों को आप शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करने के लिए आप अपने सांसद से और अपने आसपास जो भी आपके बिस्तर से उनसे सवाल उठाएं अच्छे विश्वविद्यालय का निर्माण क्यों नहीं हो रहा विश्वविद्यालय में प्रोफेसर उसकी सीट खाली हैं शिक्षक नहीं है फिर भी विश्वविद्यालय चल रहा है तो फिर आखिर यह किस तरीके का ड्रामा चल रहा है तो आप सोच इसमें मैं कहूंगा कि सीधे तौर पर हमारा राजनीतिक तंत्र इसका हिस्सेदार है और इसका जिम्मेदार है

shiksha vyavastha down hone ke peeche sirf ek wajah nahi hai uske peeche kai saare baje hain hamare desh me ek aap yah samjhne ki sabse ghatiya aur sabse galat cheez hai ki hamara raajnitik tantra jo puri tarike se hamare upar shasan karta hai vaah kabhi nahi chahta hai ki hamare desh me behtar shiksha tantra sthapit ho kyonki yadi ek shiksha tantra behtar shiksha tantra hamare desh me sthapit ho jata hai toh logo ko saari cheezen samajh me aane lagti hain desh kis tarike se chalta hai desh ki arthavyavastha kya hai politics kya hai society kya hai reason kya hai aap saare chijon ko dhire dhire samjhne lagte hain usse hota kya hai kya question hiros karna shuru karte hain hum sarkar se sawaal uthate hain satta me koi bhi ho bjp ki sarkar me congress ki sarkar ho ya kisi aur party ki sarkar ho har saptah me baithne waale log isi tantra me shaamil hote hain ki yahan ki shiksha vyavastha ko behtareen nahi banaya ja sake shayad yahi wajah hai ki azadi ke itne salon baad hi hamare primary schoolon me jo mid day meal milte hain us mid day meal me hum log chipkali paate hain hamare paas koi bhi behtareen vishwavidyalaya nahi hai ki ne chune university hai toh in saari chijon par aapko dhyan dene honge aur aap is in saari chijon ko aap shiksha vyavastha ko behtar karne ke liye aap apne saansad se aur apne aaspass jo bhi aapke bistar se unse sawaal uthaye acche vishwavidyalaya ka nirmaan kyon nahi ho raha vishwavidyalaya me professor uski seat khaali hain shikshak nahi hai phir bhi vishwavidyalaya chal raha hai toh phir aakhir yah kis tarike ka drama chal raha hai toh aap soch isme main kahunga ki sidhe taur par hamara raajnitik tantra iska hissedar hai aur iska zimmedar hai

शिक्षा व्यवस्था डाउन होने के पीछे सिर्फ एक वजह नहीं है उसके पीछे कई सारे बजे हैं हमारे देश

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Laljee Gupta

Career Counsellor

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हमारी शिक्षा व्यवस्था डाउन क्यों होती जा रही है क्या कारण है यह तो आप के समय से ही नहीं आ रहा होगा कि वह डाउन हो रही है परंतु सच्चाई है नहीं है सच्चाई यह है कि यह जो हमारी व्यवस्था है वह डे बाय डे स्ट्रांग होती जा रही है सिस्टमिक होती जा रही है और ऑनलाइन होती जा रही है और एक जो सबसे बड़ी बात है वह आनेस्टी और रिलायबिलिटी पर भी खरी उतर रही है तो ऐसी कोई बात नहीं है वह हर व्यक्ति को अपना मूल्यांकन होता है जो रियल एजुकेशन है अगर उधर ऐसा नहीं है तो डे बाय डे को मजबूत होता जाता है क्योंकि हर शिक्षित व्यक्ति इसमें अपना योगदान देता है और मेरी समझ में तो डाउन हो ही नहीं रहा है तो फिर कारण मैं आपको क्या बताऊं आप इसको आप करने के जो रीजन है वह मैं आपको दे सकता हूं उसका इवैल्यूएशन आपको देख सकता हूं कि ऊपर जा रहा है डाउन नहीं हो रहा है ठीक है ओके

hamari shiksha vyavastha down kyon hoti ja rahi hai kya karan hai yah toh aap ke samay se hi nahi aa raha hoga ki vaah down ho rahi hai parantu sacchai hai nahi hai sacchai yah hai ki yah jo hamari vyavastha hai vaah day bye day strong hoti ja rahi hai sistamik hoti ja rahi hai aur online hoti ja rahi hai aur ek jo sabse badi baat hai vaah anesti aur rilaybiliti par bhi khadi utar rahi hai toh aisi koi baat nahi hai vaah har vyakti ko apna mulyankan hota hai jo real education hai agar udhar aisa nahi hai toh day bye day ko majboot hota jata hai kyonki har shikshit vyakti isme apna yogdan deta hai aur meri samajh me toh down ho hi nahi raha hai toh phir karan main aapko kya bataun aap isko aap karne ke jo reason hai vaah main aapko de sakta hoon uska evaluation aapko dekh sakta hoon ki upar ja raha hai down nahi ho raha hai theek hai ok

हमारी शिक्षा व्यवस्था डाउन क्यों होती जा रही है क्या कारण है यह तो आप के समय से ही नहीं आ

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DR. I.P.SINGH

Doctorate in Literature

3:26
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आपका प्रश्न आज हमारी शिक्षा व्यवस्था डाउन क्यों होती जा रही क्या कारण है एसआईपी किसी की शिक्षा व्यवस्था के चार अंग होते हैं मृत्यु सरकार होती है सरकार जैसे चाहती शैक्षणिक व्यवस्था करती हैं नंबर तो माता-पिता होते हैं जो अपनी इच्छा से पीड़ित ने बच्चों को पढ़ाने की कोशिश करते हैं नंबर तीन बच्चे होते हैं जो मां बाप से जुड़कर के लोगों के बहकावे में आकर के सपने देखते हैं जब तक को समझदार होते हैं तब तक यह सपने बिखेर देता है अन्य लोगों को संतुष्ट करने के लिए कॉलेज खोल दिया जाता है ना सरकार बिल्डिंग देखती है अध्यापक देखती है मैं कुछ देखती हूं 295 कॉलेज तो बहुत पहले तीन के पास अभी 25 प्रिंसिपल हैं तो प्रमोशन नहीं कर पा रहे हैं हर कॉलेज के पास एक ही चपरासी के बाबू भी नहीं रिप्लाई नहीं है एक आदमी को भेजकर के ताले खोल दिया जाता है वह बेचारा इधर-उधर टूटे हुए प्राइमरी स्कूल मिडिल स्कूल को लेकर के किसी तरीके से चलाता है और साल डेढ़ साल बाद वहां से कुछ व्यवस्थाएं होती है पाप सोचिए कि जहां देश के कर्णधार पैदा हो रहे हैं वहां इस तरह की व्यवस्था की जा रही है क्या करेगा अध्यापक रोशनी जाने वाले बच्चे वह भी अपने मां-बाप के आधार पर एडमिशन लेने जाते हैं अमीरों के बच्चे कोटा और दिल्ली मुंबई कोलकाता जहां कोचिंग हैं वहां पढ़ने जा रहे हैं गरीबों के बच्चे हुए गांव जहां शहरों में कोचिंग आदि है और अपने बच्चों में ऐसे डाल दिए जाते हैं कि बच्चा जब जाता है तो सपना लेकर जाता है कि मैं बनूंगा किसी के अंदर यह भाव नहीं बना जातक बेटा पहले पढ़ ले इंसान बन जा फिर नौकरी देखना और उसके बाद रही सही कसर जो होती है वह शिक्षकों की होती है कि ऐसे बच्चों को कैसे पढ़ाए जिसमें 36 परसेंट के भी हो 63 पर्सन के लिए 90 पर्सन के लिए वहां बैठा हुआ शिक्षक क्या करें और इस दौर में अब इच्छा भी एक तरह से व्यवसाय बन गई है कोचिंग क्लासेस चल रही है आंख मूंदकर के लोग पढ़ा रहे हैं रटी रटाई कैसेट की तरह गूगल देते हैं यहां अपनी और मेरी चूची होती चली जा रही है 90 से ऊपर राया कट ऑफ जा रहा है जंगल का तो जो शिक्षा व्यवस्था है वह पूरी तरह से लड़खड़ा चुकी है और उसमें मैंने योगदान के शिक्षकों का रहा कि शिक्षकों को भी इस पैसे से मतलब है क्योंकि आज शिक्षक सबसे ज्यादा पढ़ा लिखा होता है लेकिन एक आईएएस अधिकारी जिसका बेसिक केवल ग्रेजुएशन होता है और एक कॉलेज लेक्चरर में पीएचडी होता है वह उस कलेक्टर के गुलामी के अंतर्गत आता है अगर कलेक्टर चाहे तुझसे कोई भी काम ले सकता है और ना उसे कोई सुविधा मिलती है और वह तो ट्यूशन भी करता तो उसको पर अंगुली उठाई जाती है

aapka prashna aaj hamari shiksha vyavastha down kyon hoti ja rahi kya karan hai sip kisi ki shiksha vyavastha ke char ang hote hain mrityu sarkar hoti hai sarkar jaise chahti shaikshnik vyavastha karti hain number toh mata pita hote hain jo apni iccha se peedit ne baccho ko padhane ki koshish karte hain number teen bacche hote hain jo maa baap se judakar ke logo ke bahakaave me aakar ke sapne dekhte hain jab tak ko samajhdar hote hain tab tak yah sapne bikher deta hai anya logo ko santusht karne ke liye college khol diya jata hai na sarkar building dekhti hai adhyapak dekhti hai main kuch dekhti hoon 295 college toh bahut pehle teen ke paas abhi 25 principal hain toh promotion nahi kar paa rahe hain har college ke paas ek hi chaprasi ke babu bhi nahi reply nahi hai ek aadmi ko bhejkar ke tale khol diya jata hai vaah bechaara idhar udhar tute hue primary school middle school ko lekar ke kisi tarike se chalata hai aur saal dedh saal baad wahan se kuch vyavasthaen hoti hai paap sochiye ki jaha desh ke karndhar paida ho rahe hain wahan is tarah ki vyavastha ki ja rahi hai kya karega adhyapak roshni jaane waale bacche vaah bhi apne maa baap ke aadhar par admission lene jaate hain amiron ke bacche quota aur delhi mumbai kolkata jaha coaching hain wahan padhne ja rahe hain garibon ke bacche hue gaon jaha shaharon me coaching aadi hai aur apne baccho me aise daal diye jaate hain ki baccha jab jata hai toh sapna lekar jata hai ki main banunga kisi ke andar yah bhav nahi bana jatak beta pehle padh le insaan ban ja phir naukri dekhna aur uske baad rahi sahi kesar jo hoti hai vaah shikshakon ki hoti hai ki aise baccho ko kaise padhaye jisme 36 percent ke bhi ho 63 person ke liye 90 person ke liye wahan baitha hua shikshak kya kare aur is daur me ab iccha bhi ek tarah se vyavasaya ban gayi hai coaching classes chal rahi hai aankh mundakar ke log padha rahe hain rati ratai kaiset ki tarah google dete hain yahan apni aur meri choochi hoti chali ja rahi hai 90 se upar raya cut of ja raha hai jungle ka toh jo shiksha vyavastha hai vaah puri tarah se ladkhada chuki hai aur usme maine yogdan ke shikshakon ka raha ki shikshakon ko bhi is paise se matlab hai kyonki aaj shikshak sabse zyada padha likha hota hai lekin ek IAS adhikari jiska basic keval graduation hota hai aur ek college Lecturer me phd hota hai vaah us collector ke gulaami ke antargat aata hai agar collector chahen tujhse koi bhi kaam le sakta hai aur na use koi suvidha milti hai aur vaah toh tuition bhi karta toh usko par anguli uthayi jaati hai

आपका प्रश्न आज हमारी शिक्षा व्यवस्था डाउन क्यों होती जा रही क्या कारण है एसआईपी किसी की श

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Rakhi Saxena

Working Woman And Counseller

2:59
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आज हमारी शिक्षा व्यवस्था भी डाउन हो रही है इसका सबसे बड़ा कारण है कि अधिवेशन को अमीर देश में बना लिए परफेक्ट बिजनेस में लौटी तो कंडीशन मिलेंगे हर बिजनेस में आप को घटाओ सकता लेकिन अभी तक नहीं सकता एक बार आप पैकिंग करें ऐसा करना कोचिंग सेंटर चलाइए देखकर आप कितना कमाते हैं शादियों में एक गवर्नमेंट जॉब वाला भी नहीं कमाता होगा जितना आप एक डेढ़ महीने में भी कमा सकते हैं तो यही कारण है कि हमारी पिक अप में शिक्षा व्यवस्था भी पुल डाउन होती जा रही है क्योंकि बच्चे सिर्फ इतना उनको प्लस प्राइस कर दिया जाता इतना उनकी दिमाग में एक बोर्ड एग्जाम का एमबीबीएस का आईआईटी का इतना जाता सिक्योर भर दिया जाता है दर्द खा लिया जाता है कि वही साथियों को बुक की एक वर्ग दिखाना हुकुम माइंड में बाकी सब ठीक करने का पेपर कैसे कैसे कंप्यूटर की हार्दिक ने सब कुछ सीखा हमने लिखना उससे क्या है कि संख्या कम होती जा रही है उसके 99% मार्क्स ना रहे हम पर बना रहे हैं उन बच्चों में भी अगर आप आदर्श फील्ड में उनके साथ उनके बच्चों को जो है वाराणसी के फराइज ना करें कि तुम यह डिग्री करो बच्चों को प्लीज पूरी करना अपनी लाइफ में हमारे हमारे टाइम पर तो हम लोगों को पता भी नहीं होता था कि नहीं करना क्या नहीं होती थी क्योंकि हमारे पास नॉलेज के लिए न्यूज़पेपर एक छोटा सा कंप्यूटर संख्या ही आया था तो सादा कंप्यूटर चलाना भी नहीं आता था और इंटरनेट खाने को कुछ पता नहीं था उसके बारे में आजकल तो इतने अवेयर ना तो इतनी सारी चीजें इंसान जो है वह सब कुछ नेट पर ही बैठे बैठे बच्चे और एक नाइंथ स्टैंडर्ड के बच्चे को खुद ही अपना फिगर दिखाइए कर लेते हैं कि आगे क्या करना है तुम बस जो डाउन में जा रही है शिक्षा व्यवस्था उसका सबसे बड़ा कारण है कोचिंग स्कूल जो कोई बिजनेस के तौर पर यूज करने का गवर्नमेंट उसमें थोड़ा सा अपना शिकंजा कसती है उन पर टाइप में आती है तो शायद हम अपनी एजुकेशन फोटो है वही खा सकते हैं

aaj hamari shiksha vyavastha bhi down ho rahi hai iska sabse bada karan hai ki adhiveshan ko amir desh me bana liye perfect business me lauti toh condition milenge har business me aap ko ghatao sakta lekin abhi tak nahi sakta ek baar aap packing kare aisa karna coaching center chalaiye dekhkar aap kitna kamate hain shadiyo me ek government job vala bhi nahi kamata hoga jitna aap ek dedh mahine me bhi kama sakte hain toh yahi karan hai ki hamari pic up me shiksha vyavastha bhi pool down hoti ja rahi hai kyonki bacche sirf itna unko plus price kar diya jata itna unki dimag me ek board exam ka MBBS ka IIT ka itna jata secure bhar diya jata hai dard kha liya jata hai ki wahi sathiyo ko book ki ek varg dikhana hukum mind me baki sab theek karne ka paper kaise kaise computer ki hardik ne sab kuch seekha humne likhna usse kya hai ki sankhya kam hoti ja rahi hai uske 99 marks na rahe hum par bana rahe hain un baccho me bhi agar aap adarsh field me unke saath unke baccho ko jo hai varanasi ke faraij na kare ki tum yah degree karo baccho ko please puri karna apni life me hamare hamare time par toh hum logo ko pata bhi nahi hota tha ki nahi karna kya nahi hoti thi kyonki hamare paas knowledge ke liye Newspaper ek chota sa computer sankhya hi aaya tha toh saada computer chalana bhi nahi aata tha aur internet khane ko kuch pata nahi tha uske bare me aajkal toh itne aveyar na toh itni saari cheezen insaan jo hai vaah sab kuch net par hi baithe baithe bacche aur ek ninth standard ke bacche ko khud hi apna figure dikhaiye kar lete hain ki aage kya karna hai tum bus jo down me ja rahi hai shiksha vyavastha uska sabse bada karan hai coaching school jo koi business ke taur par use karne ka government usme thoda sa apna shikanja kasati hai un par type me aati hai toh shayad hum apni education photo hai wahi kha sakte hain

आज हमारी शिक्षा व्यवस्था भी डाउन हो रही है इसका सबसे बड़ा कारण है कि अधिवेशन को अमीर देश म

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Pt.Sudhakar shukla

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