जिन लोगों को मैं आदर देता हूँ वो मुझे आदर नहीं देते। क्या ऐसा सोचना सही है या मुझमें कुछ कमी है?...


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J.P. Y👌g i

Psychologist

3:01

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

कुशन है जिन लोगों में आदर देता हूं वह मुझे आदर नहीं देते क्या सोचना सही है या मुझ में कमी है आदर जो हम देते हैं ना तो अंत करण में उसकी अपेक्षा ज्यादा लगते हैं और अपने आप पर भरोसा करते हैं कि मैंने बहुत विशेष आदर पूर्वक इस को सम्मान दिया है लेकिन वह उसके एवज में समझ नहीं पाया है और उसके बाद वह इग्नोर मतदान प्रक्रिया में गुजर चुका लेकिन यह जरूरी नहीं है आदर करना अपना स्वभाव हो जाना चाहिए अपना कौन है दूसरा उसके अपने गुणों में है अगर वह नहीं करता तो कोई बात नहीं इसमें हमें कोई इस लालसा में नहीं रहना चाहिए कि मैं सीख पर आधारित था कि मुझे मैं जो आदर दी हुई मेरे को सम्मान देकर तो नेकी कर कुएं में डाल और फिर अब इसमें क्यों डालते हैं इस तरह में अपने आप में मस्त रहना चाहिए और हमें अगर किसी चीज की अपेक्षा रखेंगे तो हमें अधिकांश कुछ न कुछ शोभित होना पड़ेगा मतलब उत्पीड़न की भूमिका में आ जाएंगे फायदा क्या कोई वृत्ति भी हमारे को हमारे स्वरूप में दखलअंदाजी करती हो तो फायदा क्या है तो सबसे बड़ी बात है कि आपने आपसे अपने आप को सम्मान देना चाहिए कि हमारा वेट दे हमारा मन कितना अच्छा और उत्तम है कि हम सम्मान देने के लिए दूसरों को प्रेरित करते हैं और वह उसके जवाब में कुछ भी हो सकता लेकिन आप अपने से आपसे अपने आप को सम्मान देने की कोशिश करना चाहिए कि मैं बहुत अच्छा हूं मैं बहुत सुंदर हूं मैं बहुत कोमल हूं मेरा मन इतना अच्छा है तो अपने आप में अपनी अच्छाई पर ध्यान देना चाहिए अपने आप से भी अपने आप को सहमति में रखना चाहिए ऐसी बात नहीं है तो जब उन संस्कार होगा वह आपको कहीं आखिर की जरूरत ही क्या है क्योंकि यह प्रमाण की भावना में सम्मान दिया जाता है इसमें कोई स्वार्थ नहीं होता है यह दिल की भावनाएं होती है और फिर वह उसका केंद्र भूत उनके मस्तिष्क में होता है ना क्यों आशिक हो जाते हैं जिसको हम सम्मान देते हैं उसके आश्रितों के अपेक्षित होकर हम सम्मान नहीं देते देना चाहिए हमें कीजिए मैं उससे पहले ही बहुत ज्यादा उससे आकांक्षा बढ़ा दूंगा और उसके बाद मैं करा उसके प्रत्युत्तर में मुझे जो हमारे अंदर धारणा है उसके भाव में नहीं आया तो फिर हमारी सो रहे थे ऐसा कुछ नहीं होना चाहिए सम्मान देना आप की कला है आप का स्वरूप है आपका गुण है और यह इन बातों पर ध्यान नहीं रखना चाहिए 1 दिन सबको समझ में आती है और आ जाएगी और आपको अपने आपको हमेशा खुशहाल खुद मिलाद में रहना चाहिए

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कुशन है जिन लोगों में आदर देता हूं वह मुझे आदर नहीं देते क्या सोचना सही है या मुझ में कमी

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