वर्तमान शिक्षा को जीवन से कैसे जोड़े?...


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Deepak Tiwari

Freelance Writer And Poet, Working As Journalist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

वर्तमान शिक्षा को नैतिक शिक्षा के साथ-साथ रोजगार उन्मुख की बनाकर हम जीवन से जोड़ सकते हैं अर्थात हम किताबों के माध्यम से वही पढ़ें जिससे अपने जीवन में उतार सके और उसका आचरण कर सकें इसके लिए हमारे शिक्षाविदों को शिक्षा पद्धति और पाठ्यक्रम में आमूलचूल परिवर्तन करना होगा और अपने पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर एक सार्वभौमिक सार्वभौमिक और सर्वमान्य पाठ्यक्रम तैयार करना होगा जिसमें सभी वर्गों और बातों का समुचित स्थान हो और बच्चों की ग्राहक क्षमता उनकी अवस्था को ध्यान में रखकर प्रत्येक वर्ग व उम्र के बालक बालिकाओं के लिए एक सार्वभौमिक पाठ्यक्रम तैयार करने की आवश्यकता है जिसे विधि बढ़ाकर हम शिक्षा को जीवन से जुड़ने की सार्थक पहल कर सकते हैं

vartaman shiksha ko naitik shiksha ke saath saath rojgar unmukh ki banakar hum jeevan se jod sakte hain arthat hum kitabon ke madhyam se wahi padhen jisse apne jeevan me utar sake aur uska aacharan kar sake iske liye hamare shikshaavidon ko shiksha paddhatee aur pathyakram me amulchul parivartan karna hoga aur apne purvagrahon se mukt hokar ek sarvabhaumik sarvabhaumik aur sarvmanya pathyakram taiyar karna hoga jisme sabhi vargon aur baaton ka samuchit sthan ho aur baccho ki grahak kshamta unki avastha ko dhyan me rakhakar pratyek varg va umar ke balak balikaon ke liye ek sarvabhaumik pathyakram taiyar karne ki avashyakta hai jise vidhi badhakar hum shiksha ko jeevan se judne ki sarthak pahal kar sakte hain

वर्तमान शिक्षा को नैतिक शिक्षा के साथ-साथ रोजगार उन्मुख की बनाकर हम जीवन से जोड़ सकते हैं

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संत श्री रामजी महाराज

ध्यान योगी, आध्यात्मिक गुरु, राम कथा भागवत कथा,प्रवक्ता वित्तीय सलाहकार राजनेता एवं विचारक

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आपका प्रश्न बड़ा महत्वपूर्ण है स्वागत है वर्तमान शिक्षा को जीवन से कैसे जोड़ें तो वर्तमान शिक्षा क्या है शिक्षा का चयन तो आपको ही करना है ना आपको किस क्षेत्र में जाना है इसका चयन तो करना है तू जोड़ने के लिए मैं यही कहूंगा कि यह कहीं पर निगाहें कहीं पर निशाना वाला काम ठीक नहीं होगा आदमी का दिल कहीं और हो दिमाग कहीं और हो तो सारी जिंदगी है खेतान बनी रहे आप दिल में कुछ और चाहते हैं लेकिन कैरियर की वजह से दिमाग में कुछ और भरे बैठे हैं तो वर्तमान शिक्षा को जीवन से जोड़ना है तो अच्छा होगा जो चीज दिमाग में हो जो आपको फ्री हो उसी विषय के ऊपर आप आगे बढ़े आपके दिल में कला के प्रति प्यार है और आप पर सब्जेक्ट विज्ञान लेते हैं क्योंकि कैरियर मिलेगा दोनों में खींचातानी रहेगी आपके दिल में अज्ञात में आप सब्जेक्ट गणित चुनते हैं तो जो चीज आपके दिल में है जिससे आप प्यार कर सकते हैं उसी को दिमाग में स्थापित करें या नहीं उसी को शिक्षा का क्योंकि अभी तो चैन है ना आप कर सकते भाई विषयक आपको करना है ना तो विषय का चयन कैरियर की दृष्टि सामने रखकर न करें विषय का चयन अपने दिल के मुताबिक अपनी इच्छा के मुताबिक अपने-अपने हो कि मैं यह कहूंगा अपनी जो हॉबी है उसी को वर्क बना दे उसी को शिक्षा तो आपकी जो आते हैं जो इच्छा है उसी के अनुरूप अगर आपकी शिक्षा हो जाएगी तो सफल होंगे पीपल पूजन में गई कुल अपने की लाज में पीपल पूजा और हरि मिले तो एक पंथ दो काज जो मुझे अच्छा लगता था उसी को मैंने शिक्षा में जोड़ा और उसी के अंदर में भेजी गई तो फिर मेरे दो विचार नहीं रहे दिल और दिमाग दोनों को एडजेक्ट करने की जरूरत नहीं है क्योंकि दिल में जो चीज है दिल की सुनो दिमाग की कम दिमाग स्वार्थ वश में आकर गए नौकरी जल्दी मिल जाएगी इसे पैसा ज्यादा मिल जाएगा ऐसे व्यक्ति के जीने के कुछ अलग अलग मापदंड होते हैं कुछ लोग होते हैं जो पैसा कमाने के लिए जीते हैं कुछ लोग होते हैं जिनको नाम और यश चाहिए कुछ लोग होते जब जिनको समाज सेवा ही चाहिए उनको नाम और यश और पैसा भी नहीं चाहिए समाज सेवा ही चाहिए आपको मालूम है हमारा जो नर्मदा आंदोलन जिन्होंने चलाया वह आईएएस अधिकारी थी फोन को कलेक्टर पद भी नहीं चाहिए था अब उनके लिए समाज सेवा बड़ा उन्होंने समाज सेवा के लिए सब कुछ त्याग कर दिया छोड़ दिया 2 मिनट में अभी जो चीज आपका दिल में हो वही चीज आपके दिमाग में हूं के बीच में संतुलन रहना चाहिए नमस्कार

aapka prashna bada mahatvapurna hai swaagat hai vartaman shiksha ko jeevan se kaise joden toh vartaman shiksha kya hai shiksha ka chayan toh aapko hi karna hai na aapko kis kshetra me jana hai iska chayan toh karna hai tu jodne ke liye main yahi kahunga ki yah kahin par nigahen kahin par nishana vala kaam theek nahi hoga aadmi ka dil kahin aur ho dimag kahin aur ho toh saari zindagi hai khetan bani rahe aap dil me kuch aur chahte hain lekin carrier ki wajah se dimag me kuch aur bhare baithe hain toh vartaman shiksha ko jeevan se jodna hai toh accha hoga jo cheez dimag me ho jo aapko free ho usi vishay ke upar aap aage badhe aapke dil me kala ke prati pyar hai aur aap par subject vigyan lete hain kyonki carrier milega dono me khinchatani rahegi aapke dil me agyaat me aap subject ganit chunte hain toh jo cheez aapke dil me hai jisse aap pyar kar sakte hain usi ko dimag me sthapit kare ya nahi usi ko shiksha ka kyonki abhi toh chain hai na aap kar sakte bhai vishayak aapko karna hai na toh vishay ka chayan carrier ki drishti saamne rakhakar na kare vishay ka chayan apne dil ke mutabik apni iccha ke mutabik apne apne ho ki main yah kahunga apni jo hobby hai usi ko work bana de usi ko shiksha toh aapki jo aate hain jo iccha hai usi ke anurup agar aapki shiksha ho jayegi toh safal honge pipal pujan me gayi kul apne ki laj me pipal puja aur hari mile toh ek panth do kaaj jo mujhe accha lagta tha usi ko maine shiksha me joda aur usi ke andar me bheji gayi toh phir mere do vichar nahi rahe dil aur dimag dono ko edajekt karne ki zarurat nahi hai kyonki dil me jo cheez hai dil ki suno dimag ki kam dimag swarth vash me aakar gaye naukri jaldi mil jayegi ise paisa zyada mil jaega aise vyakti ke jeene ke kuch alag alag maapdand hote hain kuch log hote hain jo paisa kamane ke liye jeete hain kuch log hote hain jinako naam aur yash chahiye kuch log hote jab jinako samaj seva hi chahiye unko naam aur yash aur paisa bhi nahi chahiye samaj seva hi chahiye aapko maloom hai hamara jo narmada andolan jinhone chalaya vaah IAS adhikari thi phone ko collector pad bhi nahi chahiye tha ab unke liye samaj seva bada unhone samaj seva ke liye sab kuch tyag kar diya chhod diya 2 minute me abhi jo cheez aapka dil me ho wahi cheez aapke dimag me hoon ke beech me santulan rehna chahiye namaskar

आपका प्रश्न बड़ा महत्वपूर्ण है स्वागत है वर्तमान शिक्षा को जीवन से कैसे जोड़ें तो वर्तमान

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Eh Dr.Y.N Mishra

Electrohomoeopath

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आज की जो शिक्षा प्रणाली है सर्वप्रथम तो मैं यह कहना चाहूंगा कि अध्यापक और छात्र के बीच संबंध नहीं रहे छात्र सोचता है कि अध्यापक एक वेतनभोगी यानी हम उसे पैसा देते हैं और वह हमें ज्ञान देता है जब तक इस विचारधारा को हम निकालेंगे नहीं और गुरु के प्रति एक सच्चा आदर नहीं प्रस्तुत करेंगे उसके प्रति अपने को समर्पित नहीं करेंगे और शिक्षा का मतलब यह नहीं होता है कि हमारे परीक्षाओं को पास कर लिया हम एजुकेटेड हो गए शिक्षा का मतलब होता है कि दिव्य अपने अंदर कितना खून और उसके अंदर विकसित हुआ है अगर हटके प्रयोगात्मक

aaj ki jo shiksha pranali hai sarvapratham toh main yah kehna chahunga ki adhyapak aur chatra ke beech sambandh nahi rahe chatra sochta hai ki adhyapak ek vetanbhogi yani hum use paisa dete hain aur vaah hamein gyaan deta hai jab tak is vichardhara ko hum nikalenge nahi aur guru ke prati ek saccha aadar nahi prastut karenge uske prati apne ko samarpit nahi karenge aur shiksha ka matlab yah nahi hota hai ki hamare parikshao ko paas kar liya hum educated ho gaye shiksha ka matlab hota hai ki divya apne andar kitna khoon aur uske andar viksit hua hai agar hatake prayogatmak

आज की जो शिक्षा प्रणाली है सर्वप्रथम तो मैं यह कहना चाहूंगा कि अध्यापक और छात्र के बीच संब

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Dr R K Pathak

Astrologer

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वर्तमान शिक्षा को जीवन से जोड़ने के लिए आपको जीवन की अच्छी समझ होनी चाहिए के साथ साथ ही ध्यान रखेंगे शिक्षा का मतलब केवल धन बीमा योजना नहीं है स्पेशल मींस नॉट ओनली जयपुर डेवलपमेंट बट इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ शिक्षा का महत्व आर्थिक विकास का सर्वांगीण विकास शिक्षा को आप अपने जीवन से इस तरह जुड़ सकते हैं कि उसका मूल्य आपके जीवन में हो शिक्षा जो ग्रहण करते हैं उसका आपके जीवन में उपयोग होगा रात को दुनिया को जोड़ सकते हैं

vartaman shiksha ko jeevan se jodne ke liye aapko jeevan ki achi samajh honi chahiye ke saath saath hi dhyan rakhenge shiksha ka matlab keval dhan bima yojana nahi hai special means not only jaipur development but integrated development of shiksha ka mahatva aarthik vikas ka Sarvangiṇa vikas shiksha ko aap apne jeevan se is tarah jud sakte hain ki uska mulya aapke jeevan me ho shiksha jo grahan karte hain uska aapke jeevan me upyog hoga raat ko duniya ko jod sakte hain

वर्तमान शिक्षा को जीवन से जोड़ने के लिए आपको जीवन की अच्छी समझ होनी चाहिए के साथ साथ ही ध्

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Sanjay Bajaj

Retired Principal

2:43
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जैसे हम छोटे बच्चे को सिखाते हैं कि आपके मुंह में 32 दांत है और आप उन बातों का 32 बार भोजन चबाने में प्रयोग करें एक कोर को लेकर 32 बार चलाएं पर बच्चा समझ नहीं पाता अगर हम उसे यह बेसिक बात समझाएं कि सारी स्वाद ग्रंथियां जो खाने की है वह आपके मुंह में जो भी खाने का स्वाद आप निकाल सकते हैं वह स्वाद सिर्फ जीप और जी पर जो तंतु हैं उनसे ही ले सकते हैं तो जितनी देर भोजन को अपने मुंह में रखें उतना बेहतर है उतना मसाले आप भोजन का अधिक से अधिक जल्दी-जल्दी मत खाएं यह न सोचे कि साहब जल्दी खत्म हो जाएगा कोई और ले लेगा कोई और मुझे नहीं देगा आप पहले पोषण डिवाइड कर दें उनके सामने पोषण रख दें कि यह तेरा ही है उसको विश्वास दिला दें कि यह सिर्फ तेरा जितना तुझे खाने का मन होगा आराम आराम से खाना कोई जल्दी नहीं है खाने की हम जल्दी-जल्दी कहते हैं सुबह ब्रेकफास्ट करो जल्दी जाओ जल्दी जाना है हम पहले उठ जाए समय का नाम सितंबर आएं ऐसा तो उसको क्या होगा कि वह मुंह में अधिक देर तक भोजन को रखेगा और मैं आपको बताता हूं कि हमारी आहार नाल हमारे शरीर से 6 गुना लंबी है तो जवाब आ रहा नाल इतनी लंबी को क्यों है क्योंकि पचाने में बहुत अधिक समय लगे क्योंकि हम जल्दी खा रहे हम जितनी जल्दी भोजन को अंदर करेंगे उतनी ही देर लगेगी उसको पचाने में तो यह बात हमें उस बच्चे को समझाने के लिए उसे समझाना है कि तुम इस स्वाद लोग अपनी नाक से सुन लो अपनी आंख से भोजन को देखो है ना वह बहुत अच्छे से उसको मुंह में ही मजे ले लो जो भोजन के मजे हैं वह सिर्फ में उसके बाद भोजन में कोई मजा नहीं है आपके गले से नीचे भोजन गया और आपको उस भोजन का स्वाद नहीं मालूम देगा संतुष्टि आपको तब मिलेगी जब आप अधिक देर तक उस भजन को ना रहेंगे उस भोजन को आड़े हाथों से उठाएंगे हम लोगों से उठाते हैं विदेशों में वह काटे जाते अगर हम उसे यह समझाएं बात और समझाने के लिए हम उसे कहे कि देखो तुमने यह आलू के चिप्स खा रहे हो गया तुम्हें मैगी खा रहे हो 2 मिनट में बंद हो गई है और खाने में टाइम लगा लो खत्म करके उसको कोई संतुष्टि नहीं मिलेगी उसको समझाओ इसे कैसे ले कर के कांटे से रोल बनाए उसको चूस ए उससे मजा ले भोजन का मजा ले जितना भोजन का मजा लेगा जितनी देर तक वह मुंह में कब आएगा भोजन को इतनी देर तक उसको यह सब बात समझ में आएगी अगर समझ में आ गई तो भोजन चबाना जो हम उसे सिखा रहे कि 32 बार चलो यह बात उसके गले में उतर जाएगी और हमेशा के लिए बात मान लेगा वह

jaise hum chote bacche ko sikhaate hain ki aapke mooh me 32 dant hai aur aap un baaton ka 32 baar bhojan chabane me prayog kare ek core ko lekar 32 baar chalaye par baccha samajh nahi pata agar hum use yah basic baat samjhaye ki saari swaad granthiyan jo khane ki hai vaah aapke mooh me jo bhi khane ka swaad aap nikaal sakte hain vaah swaad sirf jeep aur ji par jo tantu hain unse hi le sakte hain toh jitni der bhojan ko apne mooh me rakhen utana behtar hai utana masale aap bhojan ka adhik se adhik jaldi jaldi mat khayen yah na soche ki saheb jaldi khatam ho jaega koi aur le lega koi aur mujhe nahi dega aap pehle poshan divide kar de unke saamne poshan rakh de ki yah tera hi hai usko vishwas dila de ki yah sirf tera jitna tujhe khane ka man hoga aaram aaram se khana koi jaldi nahi hai khane ki hum jaldi jaldi kehte hain subah Breakfast karo jaldi jao jaldi jana hai hum pehle uth jaaye samay ka naam september aaen aisa toh usko kya hoga ki vaah mooh me adhik der tak bhojan ko rakhega aur main aapko batata hoon ki hamari aahaar naal hamare sharir se 6 guna lambi hai toh jawab aa raha naal itni lambi ko kyon hai kyonki pachane me bahut adhik samay lage kyonki hum jaldi kha rahe hum jitni jaldi bhojan ko andar karenge utani hi der lagegi usko pachane me toh yah baat hamein us bacche ko samjhane ke liye use samajhana hai ki tum is swaad log apni nak se sun lo apni aankh se bhojan ko dekho hai na vaah bahut acche se usko mooh me hi maje le lo jo bhojan ke maje hain vaah sirf me uske baad bhojan me koi maza nahi hai aapke gale se niche bhojan gaya aur aapko us bhojan ka swaad nahi maloom dega santushti aapko tab milegi jab aap adhik der tak us bhajan ko na rahenge us bhojan ko ade hathon se uthayenge hum logo se uthate hain videshon me vaah kaate jaate agar hum use yah samjhaye baat aur samjhane ke liye hum use kahe ki dekho tumne yah aalu ke chips kha rahe ho gaya tumhe maggi kha rahe ho 2 minute me band ho gayi hai aur khane me time laga lo khatam karke usko koi santushti nahi milegi usko samjhao ise kaise le kar ke kante se roll banaye usko chus a usse maza le bhojan ka maza le jitna bhojan ka maza lega jitni der tak vaah mooh me kab aayega bhojan ko itni der tak usko yah sab baat samajh me aayegi agar samajh me aa gayi toh bhojan chabana jo hum use sikha rahe ki 32 baar chalo yah baat uske gale me utar jayegi aur hamesha ke liye baat maan lega vaah

जैसे हम छोटे बच्चे को सिखाते हैं कि आपके मुंह में 32 दांत है और आप उन बातों का 32 बार भोजन

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डाॅ. देवेन्द्र जोशी उज्जैन म प्र

पत्रकार, साहित्यकार शिक्षाविद

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शिक्षा को अच्छी तरीके से जोड़ा जा सकता है जैसे डिजिटल तरीके से या अन्य शिक्षक जोड़ा जा सकता है

shiksha ko achi tarike se joda ja sakta hai jaise digital tarike se ya anya shikshak joda ja sakta hai

शिक्षा को अच्छी तरीके से जोड़ा जा सकता है जैसे डिजिटल तरीके से या अन्य शिक्षक जोड़ा जा सकत

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RAJEEV Verma

Civil Service Mentor

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शिक्षा को वर्तमान जीवन से जुड़ना एक बहुत अच्छा प्रश्न है और इससे जुड़ने के लिए महत्वपूर्ण है कि जो हमारी शिक्षा प्रणाली हैं उसका व्यवहारिक बनाया जाए विशेष रूप से हमारी शिक्षा प्रणाली में जरूरत इस चीज की है कि केवल किताबी गुनाहों को स्थान दिया जाए जैसे नैतिक मूल्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी चीजें महत्वपूर्ण हो सकती हैं इसके अलावा घर में जो हमारे संस्कार होते हैं वह हमारी शिक्षा पद्धति में आनी चाहिए यह कुछ ऐसे महत्वपूर्ण हो सकती है शिक्षा पद्धति को वर्तमान जीवन से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण हमारे पास है कि बच्चों को प्रायोगिक रूप से समझाया जाए ग्रुप से तात्पर्य हमारे पास है कि ऐसे हम किताबी ज्ञान प्राप्त करते हैं तो किताबी ज्ञान के साथ-साथ आम व्यवहारिक चीजों के मालिक पहलुओं का भी ध्यान रखें मान लीजिए हम इतिहास पढ़ा तो इतिहास को केवल हटाना चाहए बल्कि इतिहास का मानव जीवन पर क्या प्रभाव पड़ रहा है उसका सामाजिक प्रभाव हमारे पास क्या है राजनीतिक प्रभाव हमारे पास क्या है पान परिपेक्ष में उसको कैसे समझा जा सकता है यह हमारे पास महत्वपूर्ण हो सकता है उसी प्रकार से मान लीजिए आप विज्ञान से जुड़ी हुई चीजों को पढ़ा रहे हैं तो विज्ञान से जुड़ी चीजों को पढ़ा रहे हैं तो उसमें प्रायोगिक होना निश्चित रूप से महत्वपूर्ण होने प्रायोगिक करके समझाया जा सकता है इसके अलावा हमारी शिक्षा प्रणाली में नैतिक मूल्यों को प्रशासनिक क्षमताओं को ईमानदारी ओं को उचित स्थान प्रदान किया जाए

shiksha ko vartaman jeevan se judna ek bahut accha prashna hai aur isse judne ke liye mahatvapurna hai ki jo hamari shiksha pranali hain uska vyavaharik banaya jaaye vishesh roop se hamari shiksha pranali me zarurat is cheez ki hai ki keval kitabi gunaho ko sthan diya jaaye jaise naitik mulya mahatvapurna ho sakte hain paryavaran sanrakshan se judi cheezen mahatvapurna ho sakti hain iske alava ghar me jo hamare sanskar hote hain vaah hamari shiksha paddhatee me aani chahiye yah kuch aise mahatvapurna ho sakti hai shiksha paddhatee ko vartaman jeevan se jodne ke liye mahatvapurna hamare paas hai ki baccho ko prayogik roop se samjhaya jaaye group se tatparya hamare paas hai ki aise hum kitabi gyaan prapt karte hain toh kitabi gyaan ke saath saath aam vyavaharik chijon ke malik pahaluwon ka bhi dhyan rakhen maan lijiye hum itihas padha toh itihas ko keval hatana chahye balki itihas ka manav jeevan par kya prabhav pad raha hai uska samajik prabhav hamare paas kya hai raajnitik prabhav hamare paas kya hai pan paripeksh me usko kaise samjha ja sakta hai yah hamare paas mahatvapurna ho sakta hai usi prakar se maan lijiye aap vigyan se judi hui chijon ko padha rahe hain toh vigyan se judi chijon ko padha rahe hain toh usme prayogik hona nishchit roop se mahatvapurna hone prayogik karke samjhaya ja sakta hai iske alava hamari shiksha pranali me naitik mulyon ko prashaasnik kshamataon ko imaandaari on ko uchit sthan pradan kiya jaaye

शिक्षा को वर्तमान जीवन से जुड़ना एक बहुत अच्छा प्रश्न है और इससे जुड़ने के लिए महत्वपूर्ण

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वर्तमान शिक्षा जीवन कौशल को ही सिखाती है जीवन से जोड़ने के लिए और व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाने के लिए वर्तमान शिक्षा है और इसे हम कैसे अपने आप को और कौशलपुर बनाकर अपना व्यक्तित्व को विकसित कर सकें यह हमें देखना है इसलिए वर्तमान शिक्षा वेबसाइट शिक्षा को ज्यादा जोर देती है और हमें वेबसाइट के लिए प्रेरित करती है जिसके कारण हम जीवन से से जोड़ सकते हैं

vartaman shiksha jeevan kaushal ko hi sikhati hai jeevan se jodne ke liye aur vyakti ko aatmanirbhar banane ke liye vartaman shiksha hai aur ise hum kaise apne aap ko aur kaushalpur banakar apna vyaktitva ko viksit kar sake yah hamein dekhna hai isliye vartaman shiksha website shiksha ko zyada jor deti hai aur hamein website ke liye prerit karti hai jiske karan hum jeevan se se jod sakte hain

वर्तमान शिक्षा जीवन कौशल को ही सिखाती है जीवन से जोड़ने के लिए और व्यक्ति को आत्मनिर्भर बन

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डॉ अर्चना चौधरी

कवयित्री ,कॉन्सलर ,समाजसेवी , शिक्षिका

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हेलो नमस्कार वर्तमान शिक्षा को जोड़ने के लिए वर्तमान शिक्षा को जीवन से जुड़ने के लिए हमें चिंतन करना होगा और वर्तमान शिक्षा को जीवन के संदर्भ में लेना होगा किताबी ज्ञान आभारी किया दोनों जब अलग अलग हो जाते हैं तो शिक्षा का उद्देश्य बदल जाता है शिक्षा को हम अपने जीवन से जोड़कर देखें तो हर जगह हमें उस में अवैध संबंध दिखाई देगा तो हम उदाहरणों द्वारा और संदर्भ द्वारा वर्तमान शिक्षा को अपने जीवन में चिंतन कर और जीवन के प्रक्रियाओं को प्रवृत्तियों का अध्ययन कर उसे जोड़ सकते हैं यह बहुत मुश्किल काम नहीं है या बहुत ही आसान काम है लेकिन हर दौर की दुनिया में हम अपने आपको देखी नहीं पाते हैं हम अपने आप से जुड़े हुए सवालों को बाहर ढूंढने का प्रयास करते हैं तो हमें कुछ सवालों को पहले अपने आप ढूंढने की कोशिश करनी है और जो भी हम शिक्षा के द्वारा प्राप्त करते हैं वह हर चीज हमारे अंदर हैं उस कसौटी पर उस चीज को ढूंढना आवश्यक हो जाता है अगर उस कसौटी पर उसे ढूंढा जाए इस तरह से हम अपने जीवन से धन्यवाद

hello namaskar vartaman shiksha ko jodne ke liye vartaman shiksha ko jeevan se judne ke liye hamein chintan karna hoga aur vartaman shiksha ko jeevan ke sandarbh me lena hoga kitabi gyaan abhari kiya dono jab alag alag ho jaate hain toh shiksha ka uddeshya badal jata hai shiksha ko hum apne jeevan se jodkar dekhen toh har jagah hamein us me awaidh sambandh dikhai dega toh hum udaharanon dwara aur sandarbh dwara vartaman shiksha ko apne jeevan me chintan kar aur jeevan ke prakriyaon ko parvirtiyon ka adhyayan kar use jod sakte hain yah bahut mushkil kaam nahi hai ya bahut hi aasaan kaam hai lekin har daur ki duniya me hum apne aapko dekhi nahi paate hain hum apne aap se jude hue sawalon ko bahar dhundhne ka prayas karte hain toh hamein kuch sawalon ko pehle apne aap dhundhne ki koshish karni hai aur jo bhi hum shiksha ke dwara prapt karte hain vaah har cheez hamare andar hain us kasouti par us cheez ko dhundhana aavashyak ho jata hai agar us kasouti par use dhundha jaaye is tarah se hum apne jeevan se dhanyavad

हेलो नमस्कार वर्तमान शिक्षा को जोड़ने के लिए वर्तमान शिक्षा को जीवन से जुड़ने के लिए हमें

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Rajeev Ranjan Jja

Career Counsellor

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपने प्रश्न क्या है वर्तमान शिक्षा को जीवन से कैसे जुड़े वर्तमान शिक्षा को जीवंत से हम जोड़ सकते हैं यह बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्न है और इसको अगर मैं समझो तो काफी लंबा डिबेट्स पर होना चाहिए एक्चुअल में जो वर्तमान शिक्षा पद्धति है उसको अपने जीवन में हम विभिन्न प्रकार से विभिन्न आयामों से जुड़ सकते हैं जिसमें पहला है कि एक व्यक्तित्व की मूलभूत रचना शिक्षा आपके जीवन को सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए होता है तो आप अपने शिक्षा में क्या चीज अर्जित कर रहे हो जिससे आपका व्यक्तित्व में निखार आ रहा है यह देखना जरूरी है दूसरा वर्तमान शिक्षा में जो टेक्निकल एजुकेशन है उसको अधिक से अधिक ग्रहण करने का प्रयास करें क्योंकि यह पूरा विश्व आर्थिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ रहा है अर्थ का साम्राज्य है और साइंटिफिक तरीके से विश्व आगे बढ़ रहा है तो जो टेक्निकल चीजें हैं उसे अधिक से अधिक ग्रहण करने का प्रयास करें और अपने जीवन को और बेहतर बनाएं तीसरा कि हम यह देखें कि वर्तमान शिक्षा में कंप्यूटर से रिलेटेड जो ज्ञान है विज्ञान से रिलेटेड जो ज्ञान है उस पर हम कितना फोकस कर पा रहे हैं प्रैक्टिकल एजुकेशन पर ज्यादा से ज्यादा हमें ध्यान देना होगा ताकि आगे चलकर लाइफ में हम उसको उतार सके और उसे फायदा उठा सकें तीसरा वर्तमान शिक्षा में जो सबसे बढ़िया चीज है जहां तक हमारे कमेंट में भी इन सब चीजों पर ध्यान दिया है कि स्किल एजुकेशन अपने स्किल को बढ़ाना पहले आप यह देखें कि आप किन चीजों में योग्यता रखते हैं वरीयता रखते हैं जिसमें आपको लगता है कि आप कुछ बढ़िया कर सकते हैं पाप जिस चीज में अपने आप को बढ़िया समझते हैं आप उसी विषय की तरफ अपना ध्यान दें और अपने आप को आगे बढ़ाएं आपके लिए महत्वपूर्ण होगा तो से वर्तमान शिक्षा पद्धति मॉडर्न शिक्षा पद्धति है वार्डन शिक्षा पद्धति में एक विशेष बात यह है कि अब हम बहुत सारी चीजों को इंटरनेट के माध्यम से गूगल के माध्यम से अपने इस बोकल क्लास के माध्यम से भी कर सकते हैं आप किसी भी तरह की प्रश्न की जानकारी ले सकते हैं आपके मन में कोई भी शंका हो तो आप उस संख्या का निवारण कर सकते हैं तो अधिक से अधिक आप इन सारे आयामों का इन सारे तरीकों का उपयोग करें और अपने किसी भी क्वेश्चंस को किसी भी प्रश्न को आप पूछे हैं और जाने और अपने लाइफ में अपने वर्तमान जीवन कमाल कर सके तो दोस्तों इस तरह से कई और भी चीजें हैं हम लोग आगे चर्चा करेंगे अभी इतना ही आगे भी आप अपने प्रश्न पूछ सकते हैं

aapne prashna kya hai vartaman shiksha ko jeevan se kaise jude vartaman shiksha ko jivant se hum jod sakte hain yah bahut hi mahatvapurna prashna hai aur isko agar main samjho toh kaafi lamba debates par hona chahiye actual me jo vartaman shiksha paddhatee hai usko apne jeevan me hum vibhinn prakar se vibhinn aayamon se jud sakte hain jisme pehla hai ki ek vyaktitva ki mulbhut rachna shiksha aapke jeevan ko sarvashreshtha banane ke liye hota hai toh aap apne shiksha me kya cheez arjit kar rahe ho jisse aapka vyaktitva me nikhaar aa raha hai yah dekhna zaroori hai doosra vartaman shiksha me jo technical education hai usko adhik se adhik grahan karne ka prayas kare kyonki yah pura vishwa aarthik drishtikon se aage badh raha hai arth ka samrajya hai aur scientific tarike se vishwa aage badh raha hai toh jo technical cheezen hain use adhik se adhik grahan karne ka prayas kare aur apne jeevan ko aur behtar banaye teesra ki hum yah dekhen ki vartaman shiksha me computer se related jo gyaan hai vigyan se related jo gyaan hai us par hum kitna focus kar paa rahe hain practical education par zyada se zyada hamein dhyan dena hoga taki aage chalkar life me hum usko utar sake aur use fayda utha sake teesra vartaman shiksha me jo sabse badhiya cheez hai jaha tak hamare comment me bhi in sab chijon par dhyan diya hai ki skill education apne skill ko badhana pehle aap yah dekhen ki aap kin chijon me yogyata rakhte hain variyata rakhte hain jisme aapko lagta hai ki aap kuch badhiya kar sakte hain paap jis cheez me apne aap ko badhiya samajhte hain aap usi vishay ki taraf apna dhyan de aur apne aap ko aage badhaye aapke liye mahatvapurna hoga toh se vartaman shiksha paddhatee modern shiksha paddhatee hai vardan shiksha paddhatee me ek vishesh baat yah hai ki ab hum bahut saari chijon ko internet ke madhyam se google ke madhyam se apne is bokal class ke madhyam se bhi kar sakte hain aap kisi bhi tarah ki prashna ki jaankari le sakte hain aapke man me koi bhi shanka ho toh aap us sankhya ka nivaran kar sakte hain toh adhik se adhik aap in saare aayamon ka in saare trikon ka upyog kare aur apne kisi bhi questions ko kisi bhi prashna ko aap pooche hain aur jaane aur apne life me apne vartaman jeevan kamaal kar sake toh doston is tarah se kai aur bhi cheezen hain hum log aage charcha karenge abhi itna hi aage bhi aap apne prashna puch sakte hain

आपने प्रश्न क्या है वर्तमान शिक्षा को जीवन से कैसे जुड़े वर्तमान शिक्षा को जीवंत से हम जोड

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Sushil Kumar

Accountant

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देखिए शिक्षा जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग है जिससे हमारे जीवन का निर्माण होता है शिक्षा से ही वर्तमान शिक्षा को जीवन से जोड़ना हमारी बहुत बड़ी उपलब्धि है जिस चीज से हमें ज्ञान मिलता है हम उस कार्य की ओर सहयोग व्रत का निर्णय करने की क्षमता शिक्षा से प्रदान होती है वही लेने हमारे जीवन को अत्यधिक शोला और शबनम फूल बनाने की संभावना को दर्शाता है वहीं शिक्षा है क्षमा जीवन की बहुत बड़ी संघर्षपूर्ण जीवन है बहुत बड़ी चुनौती है

dekhiye shiksha jeevan ka ek mahatvapurna ang hai jisse hamare jeevan ka nirmaan hota hai shiksha se hi vartaman shiksha ko jeevan se jodna hamari bahut badi upalabdhi hai jis cheez se hamein gyaan milta hai hum us karya ki aur sahyog vrat ka nirnay karne ki kshamta shiksha se pradan hoti hai wahi lene hamare jeevan ko atyadhik shola aur shabnam fool banane ki sambhavna ko darshata hai wahi shiksha hai kshama jeevan ki bahut badi sangharshapurn jeevan hai bahut badi chunauti hai

देखिए शिक्षा जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग है जिससे हमारे जीवन का निर्माण होता है शिक्षा से ही

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Anju pandey

Social Worker

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आपका सवाल है वर्तमान शिक्षा को जीवन से कैसे जोड़ें वैसे तो वर्तमान शिक्षा बहुत अच्छी चल रही है बहुत सारी कमियां है बहुत सारे अच्छी बातें भी हैं हमें उस पर ध्यान नहीं देना चाहिए वर्तमान शिक्षा को अपने जीवन के अंदर उतारने के लिए कुछ नैतिक मूल्यों का भी हमें संग्रह करना चाहिए नैतिक मूल्यों पर विचार करना चाहिए और उसको अपने जीवन में उतारना चाहिए और उसके अनुसार ही हमें अपनी शिक्षा पद्धति को आगे बढ़ाना चाहिए

aapka sawaal hai vartaman shiksha ko jeevan se kaise joden waise toh vartaman shiksha bahut achi chal rahi hai bahut saari kamiyan hai bahut saare achi batein bhi hain hamein us par dhyan nahi dena chahiye vartaman shiksha ko apne jeevan ke andar utarane ke liye kuch naitik mulyon ka bhi hamein sangrah karna chahiye naitik mulyon par vichar karna chahiye aur usko apne jeevan me utarana chahiye aur uske anusaar hi hamein apni shiksha paddhatee ko aage badhana chahiye

आपका सवाल है वर्तमान शिक्षा को जीवन से कैसे जोड़ें वैसे तो वर्तमान शिक्षा बहुत अच्छी चल रह

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Sanjay Kumar Yadav

Career Counsellor

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नमस्कार वर्तमान शिक्षा को जीवन से कैसे जोड़ें तो इस शिक्षा को आप अगर जीवन से जुड़ना चाहते हैं तो इसकी शुरुआत आप अपने फैमिली से भी कर सकते जो भी चीजें आपने सीखी है अपने बच्चों में अपने घर में अपने आसपास इसको आप प्रसारित करें इसका प्रचार करें और आप अपने जीवन में इसको अगर फॉलो करते हैं तो इस शिक्षा के एक समूह का नेतृत्व करें आपकी शिक्षा किस स्तर की है उस स्तर के उच्च स्तर से थोड़ा आप नीचे के लोगों को आप अपने शिक्षक को प्रसारित करें और इस शिक्षा से आप ज्यादा लोगों को लाभ वंचित करें जैसे अपने जो जानकारियां आपकी हैं उसको आप ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इसको बताएं ताकि यह आपकी जो चीजें हैं वह चीजें और लोगों तक प्रकाशित हो और लोग इससे लाभान्वित हो तो इससे आपका सामाजिक स्तर बढ़ेगा आपका सामाजिक उत्थान होगा धन्यवाद आपका दिन शुभ हो

namaskar vartaman shiksha ko jeevan se kaise joden toh is shiksha ko aap agar jeevan se judna chahte hain toh iski shuruat aap apne family se bhi kar sakte jo bhi cheezen aapne sikhi hai apne baccho me apne ghar me apne aaspass isko aap prasarit kare iska prachar kare aur aap apne jeevan me isko agar follow karte hain toh is shiksha ke ek samuh ka netritva kare aapki shiksha kis sthar ki hai us sthar ke ucch sthar se thoda aap niche ke logo ko aap apne shikshak ko prasarit kare aur is shiksha se aap zyada logo ko labh vanchit kare jaise apne jo jankariyan aapki hain usko aap zyada se zyada logo tak isko bataye taki yah aapki jo cheezen hain vaah cheezen aur logo tak prakashit ho aur log isse labhanvit ho toh isse aapka samajik sthar badhega aapka samajik utthan hoga dhanyavad aapka din shubha ho

नमस्कार वर्तमान शिक्षा को जीवन से कैसे जोड़ें तो इस शिक्षा को आप अगर जीवन से जुड़ना चाहते

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Ajit Pandit

visual Artist आप ललित कला में कैरियर बनाना हैं तो संपर्क कर सकते हैं

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देखिए वर्तमान शिक्षा प्रणाली भी जीवन से जुड़ी हुई है उसको इग्नोर बिल्कुल नहीं किया जा सकता है जो जीवन से जुड़ी हुई है बिल्कुल जीवन से जुड़ी हुई है अब डिपेंड करता है यह शिक्षा प्रणाली को अपने जीवन में आप कैसे इमेंट करते हैं उसी के सब कोई टिकट करता है

dekhiye vartaman shiksha pranali bhi jeevan se judi hui hai usko ignore bilkul nahi kiya ja sakta hai jo jeevan se judi hui hai bilkul jeevan se judi hui hai ab depend karta hai yah shiksha pranali ko apne jeevan me aap kaise iment karte hain usi ke sab koi ticket karta hai

देखिए वर्तमान शिक्षा प्रणाली भी जीवन से जुड़ी हुई है उसको इग्नोर बिल्कुल नहीं किया जा सकता

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वर्तमान शिक्षा को अधिक से अधिक व्यावहारिक बनाकर जीवन से जुड़ा था जा सकता है जैसे हम अधिकतर शिक्षा किताब भी रूप में ग्रहण करते हैं जबकि हमको किताबी शिक्षा के साथ-साथ वोकेशनल शिक्षा की भी आवश्यकता है जिससे हम किसी कार्य को पढ़ाई के दौरान सीख सकें और एक स्किल डेवलप कर सके जो हमारे रोजगार में आने में सहायक हो

vartaman shiksha ko adhik se adhik vyavaharik banakar jeevan se juda tha ja sakta hai jaise hum adhiktar shiksha kitab bhi roop me grahan karte hain jabki hamko kitabi shiksha ke saath saath vocational shiksha ki bhi avashyakta hai jisse hum kisi karya ko padhai ke dauran seekh sake aur ek skill develop kar sake jo hamare rojgar me aane me sahayak ho

वर्तमान शिक्षा को अधिक से अधिक व्यावहारिक बनाकर जीवन से जुड़ा था जा सकता है जैसे हम अधिकतर

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Harender Kumar Yadav

Career Counsellor.

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A b m ji

Astrologer

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वर्तमान शिक्षा को जीवन से कैसे जुड़े इस प्रश्न का उत्तर है प्रचार प्रसार के माध्यम से

vartaman shiksha ko jeevan se kaise jude is prashna ka uttar hai prachar prasaar ke madhyam se

वर्तमान शिक्षा को जीवन से कैसे जुड़े इस प्रश्न का उत्तर है प्रचार प्रसार के माध्यम से

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Aniel K Kumar Imprints

NLP Master Life Coach, Motivational Speaker

2:20

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वर्तमान शिक्षा को जीवन से कैसे जुड़े बहुत ही बेहतरीन सवाल आज आपने पूछा मेरे दोस्त उसकी वजह है मैं कहना चाहूंगा कि वर्तमान शिक्षा में यदि आप जीवन से जोड़ना चाहते हैं तो उसमें होने वाले जो भी टॉपिक हैं उनके एग्जांपल यथार्थ में अपने लाइफ में देखें कहां-कहां पर ही चीजें हो रही हैं पॉज करो मैं आपसे बात करूं प्रोटेक्शन की प्रोटेक्शन क्या ग्राम बात करते हैं तो आज हमें प्रोडक्शन का नाम सुनते ही कोई भी चीज है जो हमें प्रोटेक्ट करती है उसको प्रोटेक्शन कहते हैं तो आपको सैनिक दिखाई देने चाहिए आपको रेलवे क्रॉसिंग पर खड़ा रेलवे क्रासिंग का बंदा दिखाई देना चाहिए जो रेलटेल के आते ही बंद कर दे रहे हो अपने पुलिसमैन सीआरपीएफ बीएसएफ के जवान दिखने सी के जवान आपको दिखाई देने चीज द डे टुडे मैं आपको प्रोटेक्ट कर रहे हैं आपको आपका फादर दिखाई देना चाहिए जिसने आज तक आपको हर चीज के लिए प्रोटेक्ट किया आपके मदर आपको दिखाई देनी चाहिए जो आपको हर वक्त आती है गलती आपकी तो अपनी लाइफ एग्जांपल है जो आप एक प्रोटेक्ट से ढूंढ रहे हैं आप की स्टोरी में आपके एजुकेशन में जो भी एग्जांपल आते हैं जो भी टॉपिक आता है उस टॉपिक से रिलेटेड एग्जांपल यदि आप जवाब नहीं दे पाओगे कि वह आपके जीवन से सार्थकता के साथ जोड़ रही है और जितना पजेशन को आत्मसात करोगे जितना अपने सार्थकता से जोड़ पाओगे तो उतना ही उसको यूज कर पाओगे फिर चने और यदि उसका अर्थ सिर्फ और सिर्फ एजुकेशन का अर्थ सिर्फ और सिर्फ एग्जांपल रखते हो तो आप वह भी अच्छी बात है एग्जाम के बाद उसको वाइप आउट करोगे और आपके पास कुछ भी नहीं बचेगा तो कुछ भी बसने के लिए आपको चाहिए कि आप उसको ट्रांसफार्म करे शर्ट शर्ट एंड शर्ट ठीक है इमेजेस में और अपने पास कॉल करें सिक्वेंस में उसके बाद उसको इमेजेस को सटेरा एग्जांपल बनाएं और क्रिस्टल बनाएं तो आप आओगे कि वह चीज आपके लिए परमानेंट होगी जय हिंद जय भारत आपका दिन शुभ रहे

vartaman shiksha ko jeevan se kaise jude bahut hi behtareen sawaal aaj aapne poocha mere dost uski wajah hai main kehna chahunga ki vartaman shiksha me yadi aap jeevan se jodna chahte hain toh usme hone waale jo bhi topic hain unke example yatharth me apne life me dekhen kaha kaha par hi cheezen ho rahi hain pause karo main aapse baat karu protection ki protection kya gram baat karte hain toh aaj hamein production ka naam sunte hi koi bhi cheez hai jo hamein protect karti hai usko protection kehte hain toh aapko sainik dikhai dene chahiye aapko railway crossing par khada railway crossing ka banda dikhai dena chahiye jo reltel ke aate hi band kar de rahe ho apne policemen crpf bsf ke jawaan dikhne si ke jawaan aapko dikhai dene cheez the day today main aapko protect kar rahe hain aapko aapka father dikhai dena chahiye jisne aaj tak aapko har cheez ke liye protect kiya aapke mother aapko dikhai deni chahiye jo aapko har waqt aati hai galti aapki toh apni life example hai jo aap ek protect se dhundh rahe hain aap ki story me aapke education me jo bhi example aate hain jo bhi topic aata hai us topic se related example yadi aap jawab nahi de paoge ki vaah aapke jeevan se sarthakta ke saath jod rahi hai aur jitna possession ko aatmsat karoge jitna apne sarthakta se jod paoge toh utana hi usko use kar paoge phir chane aur yadi uska arth sirf aur sirf education ka arth sirf aur sirf example rakhte ho toh aap vaah bhi achi baat hai exam ke baad usko wipe out karoge aur aapke paas kuch bhi nahi bachega toh kuch bhi basne ke liye aapko chahiye ki aap usko transform kare shirt shirt and shirt theek hai images me aur apne paas call kare sikwens me uske baad usko images ko satera example banaye aur crystal banaye toh aap aaoge ki vaah cheez aapke liye permanent hogi jai hind jai bharat aapka din shubha rahe

वर्तमान शिक्षा को जीवन से कैसे जुड़े बहुत ही बेहतरीन सवाल आज आपने पूछा मेरे दोस्त उसकी वजह

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Santosh Sharma "Kokil"

अभिनेत्री,कवयित्री,मंच संचालक, मार्गदर्शन वक्ता

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हम वर्तमान शिक्षा को शिक्षा से इस तरह जुड़ सकते हैं कि व्यवहारिक शिक्षा दीजिए और प्रयोगात्मक सिखाइए बच्चों को आम बजाय इसके कि किताबों को हटाया जाए जो भी आप कर रहे हैं उसको व्यवहार मिलाकर सिखाइए जैसे कि कोई स्विच लगाना भी है यदि अगर हम उस में लिखकर बताएंगे तो बच्चों को इतना समझ में नहीं आएगा यदि हम अपने सामने उनको लगा कर दिखाएंगे और फिर उन्हें कहेंगे कि यह तुम लगा के दिखाओ यह स्विच कैसे लगाना है तो ऐसी शिक्षा जो है ना वह जरूरी है चोरी की वजह जो है प्रैक्टिकल अधिक होना चाहिए बच्चों को बच्चों की शिक्षा में

hum vartaman shiksha ko shiksha se is tarah jud sakte hain ki vyavaharik shiksha dijiye aur prayogatmak sikhaiye baccho ko aam bajay iske ki kitabon ko hataya jaaye jo bhi aap kar rahe hain usko vyavhar milakar sikhaiye jaise ki koi switch lagana bhi hai yadi agar hum us me likhkar batayenge toh baccho ko itna samajh me nahi aayega yadi hum apne saamne unko laga kar dikhayenge aur phir unhe kahenge ki yah tum laga ke dikhaao yah switch kaise lagana hai toh aisi shiksha jo hai na vaah zaroori hai chori ki wajah jo hai practical adhik hona chahiye baccho ko baccho ki shiksha me

हम वर्तमान शिक्षा को शिक्षा से इस तरह जुड़ सकते हैं कि व्यवहारिक शिक्षा दीजिए और प्रयोगात्

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Laljee Gupta

Career Counsellor

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वर्तमान शिक्षा को शिक्षा से जोड़ने की बात सच्चाई तो यह है शिक्षा को जीवन में अडॉप्ट करना शिक्षक को जीवन में उतारना और इसे आत्मसात करना जो अनुशासन और जो जीवन के लिए निष्ठा और जो विश्वास शिक्षा के साथ जुड़ी हुई है उसे हमें जीवन में भी उतारना एकमात्र उद्देश्य होता है और जब हम इसे जीवन में उतारते हैं तो एक अच्छे इंसानियत की ओर बढ़ते हैं माता की ओर अग्रसर होते हैं समाज के साथ एडिट करते हैं और उसके साथ-साथ पारिवारिक बैकग्राउंड भी हमारा एडजेस्टेबल हो जाता है और एक मनुष्य जो शिक्षा प्राप्त करता है उसे अनेक लोग लाभान्वित होते हैं तो इसे शिक्षा से जोड़ने का मतलब यह होता है कि जीवन में शिक्षा को आत्मसात करना कैसे जोड़ा जा सकता उसके मूलभूत उद्देश्यों को जीवन में उतारी है मात्र लेक्चर देने से किसी भी चीज के बारे में जानकारी प्राप्त करने से मनुष्य मनुष्य नहीं होता उसके साथ साथ जानकारी के साथ साथ जो हमें और भी कुछ मिलता है जैसे हमने विश्वास की बात की शिक्षा की एक अनुशासन की बात की एक मानव जीवन के मूल्यों को समझने की बात की उससे मुझे कोई जोड़ना होता है शिक्षा अगर हम जोड़ सके तुम मुझे ऐसे ही जोड़ना चाहिए जैसे हमने आपको पता है

vartaman shiksha ko shiksha se jodne ki baat sacchai toh yah hai shiksha ko jeevan me adopt karna shikshak ko jeevan me utarana aur ise aatmsat karna jo anushasan aur jo jeevan ke liye nishtha aur jo vishwas shiksha ke saath judi hui hai use hamein jeevan me bhi utarana ekmatra uddeshya hota hai aur jab hum ise jeevan me utarate hain toh ek acche insaniyat ki aur badhte hain mata ki aur agrasar hote hain samaj ke saath edit karte hain aur uske saath saath parivarik background bhi hamara edajestebal ho jata hai aur ek manushya jo shiksha prapt karta hai use anek log labhanvit hote hain toh ise shiksha se jodne ka matlab yah hota hai ki jeevan me shiksha ko aatmsat karna kaise joda ja sakta uske mulbhut udyeshyon ko jeevan me utaari hai matra lecture dene se kisi bhi cheez ke bare me jaankari prapt karne se manushya manushya nahi hota uske saath saath jaankari ke saath saath jo hamein aur bhi kuch milta hai jaise humne vishwas ki baat ki shiksha ki ek anushasan ki baat ki ek manav jeevan ke mulyon ko samjhne ki baat ki usse mujhe koi jodna hota hai shiksha agar hum jod sake tum mujhe aise hi jodna chahiye jaise humne aapko pata hai

वर्तमान शिक्षा को शिक्षा से जोड़ने की बात सच्चाई तो यह है शिक्षा को जीवन में अडॉप्ट करना श

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भोजपुर वर्तमान शिक्षा को जीवन से कैसे जुड़े आपको इस प्रकार की शिक्षा ग्रहण करें जो आपके व्यापार या आपके सुजीत को पाचन में सहायक सचिव शिक्षा ग्रहण करें जो आपको आर्थिक उन्नति और होशियार बनाएगा इससे आपको इस समाज में आपको आज छुट्टी मिलेगी आप लोगों का भला कर सकेंगे धन्यवाद

bhojpur vartaman shiksha ko jeevan se kaise jude aapko is prakar ki shiksha grahan kare jo aapke vyapar ya aapke sujit ko pachan me sahayak sachiv shiksha grahan kare jo aapko aarthik unnati aur hoshiyar banayega isse aapko is samaj me aapko aaj chhutti milegi aap logo ka bhala kar sakenge dhanyavad

भोजपुर वर्तमान शिक्षा को जीवन से कैसे जुड़े आपको इस प्रकार की शिक्षा ग्रहण करें जो आपके व्

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

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वर्तमान शिक्षा को जीवन से कैसे जोड़ें आज की जो शिक्षाएं यह किताबी शिक्षा यह शिक्षा हमारी व्यवसाय शिक्षा माध्यमिक शिक्षा में हमारी जान की चूत चाहिए हमारे ग्रुप की शिक्षा नहीं है इसलिए कहते हैं कि हमारी वर्तमान जो सिर्फ है यह बहुत ज्यादा उन्नतशील हो बहुत ज्यादा सफल हो तो उसके लिए हमें क्या करना होगा वर्तमान स्थिति को बदलना होगा क्योंकि वित्त आयोग नहीं बदलता बीते युग के वर्तमान युग बदलता है हमारी शिक्षा हमारे जीवन से जुड़ जाती है तो जीवन भी शिक्षित हो जाता है आनंद नहीं हो जाता है कि वह टूट जाता है और जीवन सफलता का आधार चेतन अपनाकर शिक्षा का प्रचार करके लोगों को संघर्ष की शिक्षा अधिकारी जीवन में बहुत उतार-चढ़ाव आने पर किस दिन कुछ माना जाता है यह वास्तव में शिक्षा का जीवन से नजदीकी रिश्ता होता है जहां इंसान जगत की तरफ बढ़

vartaman shiksha ko jeevan se kaise joden aaj ki jo sikshayen yah kitabi shiksha yah shiksha hamari vyavasaya shiksha madhyamik shiksha me hamari jaan ki chut chahiye hamare group ki shiksha nahi hai isliye kehte hain ki hamari vartaman jo sirf hai yah bahut zyada unnatashil ho bahut zyada safal ho toh uske liye hamein kya karna hoga vartaman sthiti ko badalna hoga kyonki vitt aayog nahi badalta bite yug ke vartaman yug badalta hai hamari shiksha hamare jeevan se jud jaati hai toh jeevan bhi shikshit ho jata hai anand nahi ho jata hai ki vaah toot jata hai aur jeevan safalta ka aadhar chetan apnakar shiksha ka prachar karke logo ko sangharsh ki shiksha adhikari jeevan me bahut utar chadhav aane par kis din kuch mana jata hai yah vaastav me shiksha ka jeevan se najdiki rishta hota hai jaha insaan jagat ki taraf badh

वर्तमान शिक्षा को जीवन से कैसे जोड़ें आज की जो शिक्षाएं यह किताबी शिक्षा यह शिक्षा हमारी व

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Dharam Singh Thakur

पत्रकार ,समाज सेवक,लेखक

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वर्तमान शिक्षा को आम जीवन से अर्थात P1 से जोड़ने के लिए हमें निश्चित रूप से भारत की पुरातन शिक्षा पद्धति गुरुकुल की ओर जाना ही पड़ेगा अर्थात जो आज हम प्रैक्टिकल 12 प्रश्न करते हैं और बाकी सारी काग्नी पढ़ाई करते लेकिन जब हम सारा प्रैक्टिकल व्यवहारिक कार्य जो है वह धन वापस ऐड करेंगे आप तो परसेंट ही काबिले काम करेंगे 2% ही काबिले काम करेंगे खाना प्रथम व्यापारिक रूप से कुछ भी सीखेंगे तो निश्चित रूप से हम लोग शिक्षा पद्धति को जीवन से जोड़ सकेंगे चाहे वो बीजेपी का अधिकारी कितना भी बड़ा क्यों ना हो उसको भी आधा पौना घंटा सड़क पर या फिर मजदूरों की तरह काम करना ही होगा और पढ़ाई में यह सिखाना ही होगा तब जाकर के हम लोग अपनी इच्छा को जीवन पत्ती से जोड़ सकती है अन्यथा अगर एक मजदूर के लिए शॉकअप्सर हम उस पर रखेंगे तो निश्चित रूप से यह ना तो अच्छी पद्धति है और ना ही अच्छी सी क्या है तो ऐसी ऐसा मेरा सोचना है

vartaman shiksha ko aam jeevan se arthat P1 se jodne ke liye hamein nishchit roop se bharat ki puratan shiksha paddhatee gurukul ki aur jana hi padega arthat jo aaj hum practical 12 prashna karte hain aur baki saari kagni padhai karte lekin jab hum saara practical vyavaharik karya jo hai vaah dhan wapas aid karenge aap toh percent hi kabile kaam karenge 2 hi kabile kaam karenge khana pratham vyaparik roop se kuch bhi sikhenge toh nishchit roop se hum log shiksha paddhatee ko jeevan se jod sakenge chahen vo bjp ka adhikari kitna bhi bada kyon na ho usko bhi aadha pauna ghanta sadak par ya phir majduro ki tarah kaam karna hi hoga aur padhai me yah sikhaana hi hoga tab jaakar ke hum log apni iccha ko jeevan patti se jod sakti hai anyatha agar ek majdur ke liye shakapsar hum us par rakhenge toh nishchit roop se yah na toh achi paddhatee hai aur na hi achi si kya hai toh aisi aisa mera sochna hai

वर्तमान शिक्षा को आम जीवन से अर्थात P1 से जोड़ने के लिए हमें निश्चित रूप से भारत की पुरातन

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Dr. Ashwani Kumar Singh

Chairman & Director at VEMS

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नमस्कार दोस्तों वह करते आप सभी मित्रों का स्वागत है आपका प्रश्न है कि वरदान शिक्षा पद्धति शिक्षा को जीवन से कैसे जोड़े की माता शिक्षा पद्धति जीवन से जुड़ा हुआ है लेकिन संपूर्णता के साथ नहीं हुआ वह एक केवल और एक ही विषय जुड़ा हुआ है कि सहवाग कोई शिक्षा प्राप्त कर लीजिए और उसको उसके बाद आपको रोजी रोटी कमाने के लिए रास्ता मिल जाए लेकिन कोई स्वस्थ चिंतन उसमें नहीं है कि अच्छा मानव कैसे बनेगा और जब तक अच्छा मानव अच्छा चिंतक अच्छा पुत्र अच्छा पुत्री अच्छा पिता अच्छा माता-पिता यह सब चीज संपूर्णता के साथ नहीं आएगी अच्छा चरित्र तो कोई भी पद्धति का संपूर्ण और इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट नहीं होगा और ना उसका काम आएगा अब क्या है कि अपने जमाने में पुराने जमाने में हैंडसेट काल में जो शिक्षा प्रणाली थी मनुष्य को संपूर्ण मनुष्य बनाती थी उसको सारी बातों का पता था कि साहब हमको एक नागरिक होने के नाते क्या-क्या करना चाहिए और क्या क्या नहीं करना चाहिए क्या-क्या पुत्र होने के नाते हमारा कर्तव्य है क्या-क्या एक पिता होने के नाते कर्तव्य क्या शिक्षक होने के नाते कर्तव्य इन सारी चीजों का उसको बखूबी ज्ञान वह शारीरिक और मानसिक रूप से इतना स्वस्थ और मजबूत हुआ करते थे कि जीवन यापन के लिए कोई भी काम कभी भी किसी मत कर सकते उनको यह डर नहीं था कि चाय हमको कंप्यूटर नहीं आता है तो किस तरह से जिएंगे उनको यह डर नहीं था कि साहब हमको यह काम करना पड़ेगा तो कैसे करेंगे उनको सब कामों के बारे में शिक्षा दी जाती थी उनका अहंकार उनके रखा जाता था कि समाज की कुरीतियों से अपने के लिए अनुकूल बना है उनको मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बनाया जाता था इतना चरित्र और चरित्रवान बनाया जाता था कि वह जहां भी हो जिस काम में हाथ लगाते थे तो संपूर्णता के साथ सफलतापूर्वक उसको संपन्न करते थे आज के डेट में कोई बहुत अच्छा ही नहीं है लेकिन वह सामाजिक तौर पर घूसखोर है तो आप उस ने घूस लेकर कोई पुल बनवा दिया ठेकेदार अरुण 3 महीने बाद को लेट करके उसके दिमाग में यह कभी आया नहीं कि पुल टूट जाएगा तो कितनी बड़ी जनहानि होगी देश का कितना नुकसान होगा समाज का कितना नुकसान होगा यह मास्टर क्वेश्चन उसके सामने आया नहीं यह हमारी शिक्षा पद्धति का दोष है इसको दूर करना है कि कोई भी इंजीनियर अच्छा तुम अच्छा है जब वह चरित्र से भी अच्छा है अपने उत्तरदायित्व भी अच्छा है अपने इमानदारी से भी अच्छा इन सारी बातों का इनपुट आज के युग एक्शन ना होने के कारण विश्व में में देश में ही नहीं भारत में नहीं पूरे विश्व में एक विचित्र तरह का आपाधापी है जहां कुछ सही नहीं कुछ गलत नहीं ऐसा हो रहा है और यह सही और गलत समय अनुकूल उसका जस्टिफिकेशन होना चाहिए समय सापेक्ष में उसकी प्रासंगिकता होनी चाहिए इन सब विषयों को अगर हम लेंगे तो हम विष्णु गुरु थे विश्वरूप फिर हो जाएंगे और देश सोने की चिड़िया थी फिर हो जाएगी शुक्रिया शुभकामनाएं

namaskar doston vaah karte aap sabhi mitron ka swaagat hai aapka prashna hai ki vardaan shiksha paddhatee shiksha ko jeevan se kaise jode ki mata shiksha paddhatee jeevan se juda hua hai lekin sanpoornataa ke saath nahi hua vaah ek keval aur ek hi vishay juda hua hai ki sehwag koi shiksha prapt kar lijiye aur usko uske baad aapko rozi roti kamane ke liye rasta mil jaaye lekin koi swasth chintan usme nahi hai ki accha manav kaise banega aur jab tak accha manav accha chintak accha putra accha putri accha pita accha mata pita yah sab cheez sanpoornataa ke saath nahi aayegi accha charitra toh koi bhi paddhatee ka sampurna aur integrated development nahi hoga aur na uska kaam aayega ab kya hai ki apne jamane me purane jamane me haindaset kaal me jo shiksha pranali thi manushya ko sampurna manushya banati thi usko saari baaton ka pata tha ki saheb hamko ek nagarik hone ke naate kya kya karna chahiye aur kya kya nahi karna chahiye kya kya putra hone ke naate hamara kartavya hai kya kya ek pita hone ke naate kartavya kya shikshak hone ke naate kartavya in saari chijon ka usko bakhubi gyaan vaah sharirik aur mansik roop se itna swasth aur majboot hua karte the ki jeevan yaapan ke liye koi bhi kaam kabhi bhi kisi mat kar sakte unko yah dar nahi tha ki chai hamko computer nahi aata hai toh kis tarah se jeeenge unko yah dar nahi tha ki saheb hamko yah kaam karna padega toh kaise karenge unko sab kaamo ke bare me shiksha di jaati thi unka ahankar unke rakha jata tha ki samaj ki kuritiyon se apne ke liye anukul bana hai unko mansik aur sharirik swasthya banaya jata tha itna charitra aur charitravan banaya jata tha ki vaah jaha bhi ho jis kaam me hath lagate the toh sanpoornataa ke saath safaltaapurvak usko sampann karte the aaj ke date me koi bahut accha hi nahi hai lekin vaah samajik taur par ghuskhor hai toh aap us ne ghus lekar koi pool banwa diya thekedaar arun 3 mahine baad ko late karke uske dimag me yah kabhi aaya nahi ki pool toot jaega toh kitni badi janhani hogi desh ka kitna nuksan hoga samaj ka kitna nuksan hoga yah master question uske saamne aaya nahi yah hamari shiksha paddhatee ka dosh hai isko dur karna hai ki koi bhi engineer accha tum accha hai jab vaah charitra se bhi accha hai apne uttardayitva bhi accha hai apne imaandari se bhi accha in saari baaton ka input aaj ke yug action na hone ke karan vishwa me me desh me hi nahi bharat me nahi poore vishwa me ek vichitra tarah ka apadhapi hai jaha kuch sahi nahi kuch galat nahi aisa ho raha hai aur yah sahi aur galat samay anukul uska jastifikeshan hona chahiye samay sapeksh me uski parasangikta honi chahiye in sab vishyon ko agar hum lenge toh hum vishnu guru the vishwaroop phir ho jaenge aur desh sone ki chidiya thi phir ho jayegi shukriya subhkamnaayain

नमस्कार दोस्तों वह करते आप सभी मित्रों का स्वागत है आपका प्रश्न है कि वरदान शिक्षा पद्धति

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Shobit Dixit

Motivational Speaker | Writer | Counsellor | Social Worker | Program Coordinator

0:31
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प्रयोगात्मक जीवन को लेकर के पाठ्यक्रम तैयार करना चाहिए और उस पाठ्यक्रम में जीवन के सभी पहलुओं पर आधारित अध्याय तैयार करने होंगे और यह किसी वरिष्ठ व्यक्ति द्वारा या अनुभवी व्यक्ति द्वारा ही संभव है और साथ में यूथ हैं जो हमारे जो नवयुवक हैं उनको लेकर 18 हो सकता है लेकिन अनुभवी व्यक्तियों का मार्गदर्शन इसमें बहुत जरूरी होगा

prayogatmak jeevan ko lekar ke pathyakram taiyar karna chahiye aur us pathyakram me jeevan ke sabhi pahaluwon par aadharit adhyay taiyar karne honge aur yah kisi varishtha vyakti dwara ya anubhavi vyakti dwara hi sambhav hai aur saath me youth hain jo hamare jo navayuvak hain unko lekar 18 ho sakta hai lekin anubhavi vyaktiyon ka margdarshan isme bahut zaroori hoga

प्रयोगात्मक जीवन को लेकर के पाठ्यक्रम तैयार करना चाहिए और उस पाठ्यक्रम में जीवन के सभी पहल

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Gopal Srivastava

Acupressure Acupuncture Sujok Therapist

1:00
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दिखाओ ऐसा होता है कि आठवीं क्लास के बाद से ही छठी क्लास के बाद से ही बच्चों को कोर्ट ने इस ट्रक को उसके लिए एक्स्ट्रा लैंग्वेज दी जाती है एक्स्ट्रा लैंग्वेज कमरिया की जो 1 घंटे की लैंग्वेज है उसमें आप किसी चीज में मस्ती हासिल करके बाद में लेक्चरर बन सकते हो प्रोफेसर बन सकते हो ट्रांसलेटर बन सकते हो जैसे टूल्स कंपनी हमसे बात कर लो बाबू का फोटो स्टेट वाइज असली घी आपको इंटरप्रेटर एक लिंगी उनके व्हाट्सएप पर आते हैं उनको लेकर जाने होते एक टूट के लाख रुपए मिलते हैं उन्हें 7 दिन का खाना पका है और एक बहुत अच्छा है लैंग्वेज सीखे और जलाएंगे ठीक बात से दोस्ती है वह बहुत महंगी होती हैं

dikhaao aisa hota hai ki aatthvi class ke baad se hi chathi class ke baad se hi baccho ko court ne is truck ko uske liye extra language di jaati hai extra language kamriya ki jo 1 ghante ki language hai usme aap kisi cheez me masti hasil karke baad me Lecturer ban sakte ho professor ban sakte ho translator ban sakte ho jaise tools company humse baat kar lo babu ka photo state wise asli ghee aapko intarapretar ek lingi unke whatsapp par aate hain unko lekar jaane hote ek toot ke lakh rupaye milte hain unhe 7 din ka khana paka hai aur ek bahut accha hai language sikhe aur jalayenge theek baat se dosti hai vaah bahut mehengi hoti hain

दिखाओ ऐसा होता है कि आठवीं क्लास के बाद से ही छठी क्लास के बाद से ही बच्चों को कोर्ट ने इस

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Kartikeya

Health Insurance Adviser

1:03
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सिंपल शिक्षा व्यवस्था में एक बहुत बड़ी बात है जोकि बहुत सारे लोगों ने भी यह इस बात पर चिंतन किया पहले भी पहले गुरुकुल शिक्षण पद्धति में एक चीज अच्छी थी कि शिक्षा के साथ-साथ उन्हें कुछ घरेलू काम भी करने पड़ते थे जैसे कुकिंग बच्चे खाने का इंतजाम करते थे भिक्षा मांगते थे खाना बनाते थे सब कुछ सारा लाइफ स्ट्रगल करते थे आज के टाइम में बच्चे कैसे पढ़ते हैं और वह बोर हो जाते हैं तो इसका उपाय यह है कि आप उन्हें शिक्षा के साथ-साथ और भी जिंदगी की काम दे उन्हें सौंपी है उन्हें मार्केट में जाने दें सामान लेने वहां पर वह भाग नहीं सीखेंगे उन्हें कोई सेल्स एंड मार्केटिंग की छोटी-मोटी टेक्निक ते हैं उन्हें पैसों के बारे में ज्ञान दें उन्हें जिंदगी बारे में ज्ञान दें

simple shiksha vyavastha me ek bahut badi baat hai joki bahut saare logo ne bhi yah is baat par chintan kiya pehle bhi pehle gurukul shikshan paddhatee me ek cheez achi thi ki shiksha ke saath saath unhe kuch gharelu kaam bhi karne padate the jaise coocking bacche khane ka intajam karte the bhiksha mangate the khana banate the sab kuch saara life struggle karte the aaj ke time me bacche kaise padhte hain aur vaah bore ho jaate hain toh iska upay yah hai ki aap unhe shiksha ke saath saath aur bhi zindagi ki kaam de unhe saumpi hai unhe market me jaane de saamaan lene wahan par vaah bhag nahi sikhenge unhe koi sales and marketing ki choti moti technique te hain unhe paison ke bare me gyaan de unhe zindagi bare me gyaan de

सिंपल शिक्षा व्यवस्था में एक बहुत बड़ी बात है जोकि बहुत सारे लोगों ने भी यह इस बात पर चिंत

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Surya Prakash Mishra

Career Counsellor& Marital Psychologist

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आज के वर्तमान शिक्षा प्रणाली परंपरागत शिक्षा प्रणाली से हम जीवन से तभी जोड़ सकते हैं जबकि वर्तमान शिक्षा प्रणाली को हम परंपरागत नजरिए की जगह पर सेट कर दे अगर हम शिक्षा से संबंधित विचारों को अपने जीवन में अपनाएं तभी हम सफल हो सकते हैं अन्यथा सफल होने की संभावनाएं कम हो जाएंगे अगर हम वर्तमान शिक्षा प्रणाली को परंपरागत शिक्षा की जगह पर प्रायोगिक शिक्षा के रूप में अपना आएंगे तभी हम अपने जीवन को व्यवस्थित और मूल्यवान बना सकता है और अपने जीवन से जोड़ सकते हैं

aaj ke vartaman shiksha pranali paramparagat shiksha pranali se hum jeevan se tabhi jod sakte hain jabki vartaman shiksha pranali ko hum paramparagat nazariye ki jagah par set kar de agar hum shiksha se sambandhit vicharon ko apne jeevan me apanaen tabhi hum safal ho sakte hain anyatha safal hone ki sambhavnayen kam ho jaenge agar hum vartaman shiksha pranali ko paramparagat shiksha ki jagah par prayogik shiksha ke roop me apna aayenge tabhi hum apne jeevan ko vyavasthit aur mulyavan bana sakta hai aur apne jeevan se jod sakte hain

आज के वर्तमान शिक्षा प्रणाली परंपरागत शिक्षा प्रणाली से हम जीवन से तभी जोड़ सकते हैं जबकि

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वर्तमान शिक्षा पद्धति विभिन्न प्रकार के रोजगार हो जगदीश जी से अपनाई गई है इस पद्धति के द्वारा व्यक्ति को एक विशिष्ट कला प्राप्त होती है जिस आधार पर वह किसी विशेष क्षेत्र में अपने आप को सफल बना सकता है और उससे इतर में अपने कैरियर बना सकता है इसलिए वर्तमान शिक्षा पद्धति जीविकोपार्जन के लिए तो उचित है जीवन के लिए समय और समग्र नहीं है जीव को उपार्जन के लिए रोजगार मूलक शिक्षा पद्धति में वर्तमान व्यवस्था की देन है ताकि बेरोजगारी नहीं बड़े जनहित में यह उचित है लेकिन विकास के लिए स्वाध्याय और संपूर्ण शिक्षा प्रणाली समग्र शिक्षा की आवश्यकता है जिससे कि मनुष्य अपने आप को एक सफल नागरिक और भविष्य में एक सफल व्यक्ति के रूप में स्थापित कर सके धन्यवाद

vartaman shiksha paddhatee vibhinn prakar ke rojgar ho jagdish ji se apnai gayi hai is paddhatee ke dwara vyakti ko ek vishisht kala prapt hoti hai jis aadhar par vaah kisi vishesh kshetra me apne aap ko safal bana sakta hai aur usse itra me apne carrier bana sakta hai isliye vartaman shiksha paddhatee jivikoparjan ke liye toh uchit hai jeevan ke liye samay aur samagra nahi hai jeev ko uparjan ke liye rojgar mulak shiksha paddhatee me vartaman vyavastha ki then hai taki berojgari nahi bade janhit me yah uchit hai lekin vikas ke liye swaadhyaay aur sampurna shiksha pranali samagra shiksha ki avashyakta hai jisse ki manushya apne aap ko ek safal nagarik aur bhavishya me ek safal vyakti ke roop me sthapit kar sake dhanyavad

वर्तमान शिक्षा पद्धति विभिन्न प्रकार के रोजगार हो जगदीश जी से अपनाई गई है इस पद्धति के द्व

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