क्या आज हमारे देश की शिक्षा प्रणाली को सुधार करने की ज़रूरत नहीं है?...


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Sushil Kumar

Accountant

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

एक शब्द में आंसर दे दो कि विस्तार बताओ एक शब्द नहीं देता हूं कि नहीं शिक्षा को सुधारने की जरूरत नहीं है अब आदमी की आर्थिक स्थिति सुधार नहीं है आर्मी सुधार में है आदमी पर निगरानी रखनी है कभी बसपा में सुधार सकता है इतना विश्वास मत कीजिए देश के सभी उच्च अधिकारियों को सोचना पड़ेगा कि किसी पर विश्वास किया जाए तो यह समाज माननीय व्यवहारों का प्रजातंत्र जाल है मानवीय व्यवहार जब तक चलेंगे तब तक का अनुष्ठान है पैसे से तो चलानी है तो समाज में पैसा दीजिए पैसे का उद्धार कीजिए सही शिक्षा का उद्धार कीजिए नहीं तो ऐसा नहीं हो सकता तो सही शिक्षक कीजिए पैसा वह खुद बम पैसा खुद बना लेंगे तक सुधार नहीं आया तो सरकारी स्कूल डांस है सरकारी स्कूल मस्त है लेकिन कमी है तो सिर्फ कुछ गार्डन सभी मुखिया थी समाचार जाते हैं क्लास टीचर की और उनके जाने वाले सामाजिक कार्य और मीटिंग मीटिंग होती है लेकिन मुझे समझ में नहीं आता आंचल मीटिंग चालू हुई है लेकिन मीटिंग क्या होती है एक दूसरे को पता नहीं है लेकिन गाड़ी नहीं समझ पाता है टीचर पन्ना इनको कुछ समझा पा रहा है कि मीटिंग क्या करनी है यह सब चीजें देखकर तो आए हैं हमारे बाहर के घूमने वाले विदेशी तंत्र के लोग जो विदेशों में अपने आने जाने का प्लान करते हैं वहां के टेक्नोलॉजी देखते हैं कि ऐसे कार्य किया था है तो एकदम ठीक चल रहा है ऐसे काम किया था यह सिस्टम ठीक चल रहा है नकल नकल करने पर नकल करने की परंपरा हमारे नीचे भी चल रही थी सट्टा स्कूली बच्चों की हालत थी नकल नकल तो मिली नहीं नकली कर रहे थे अकल जहां बोल रही थी वहां हमारी आर्थिक स्थिति लटक रही थी

ek shabd me answer de do ki vistaar batao ek shabd nahi deta hoon ki nahi shiksha ko sudhaarne ki zarurat nahi hai ab aadmi ki aarthik sthiti sudhaar nahi hai army sudhaar me hai aadmi par nigrani rakhni hai kabhi BSP me sudhaar sakta hai itna vishwas mat kijiye desh ke sabhi ucch adhikaariyo ko sochna padega ki kisi par vishwas kiya jaaye toh yah samaj mananiya vyavaharon ka prajatantra jaal hai manviya vyavhar jab tak chalenge tab tak ka anushthan hai paise se toh chalani hai toh samaj me paisa dijiye paise ka uddhar kijiye sahi shiksha ka uddhar kijiye nahi toh aisa nahi ho sakta toh sahi shikshak kijiye paisa vaah khud bomb paisa khud bana lenge tak sudhaar nahi aaya toh sarkari school dance hai sarkari school mast hai lekin kami hai toh sirf kuch garden sabhi mukhiya thi samachar jaate hain class teacher ki aur unke jaane waale samajik karya aur meeting meeting hoti hai lekin mujhe samajh me nahi aata aanchal meeting chaalu hui hai lekin meeting kya hoti hai ek dusre ko pata nahi hai lekin gaadi nahi samajh pata hai teacher panna inko kuch samjha paa raha hai ki meeting kya karni hai yah sab cheezen dekhkar toh aaye hain hamare bahar ke ghoomne waale videshi tantra ke log jo videshon me apne aane jaane ka plan karte hain wahan ke technology dekhte hain ki aise karya kiya tha hai toh ekdam theek chal raha hai aise kaam kiya tha yah system theek chal raha hai nakal nakal karne par nakal karne ki parampara hamare niche bhi chal rahi thi satta skuli baccho ki halat thi nakal nakal toh mili nahi nakli kar rahe the akal jaha bol rahi thi wahan hamari aarthik sthiti latak rahi thi

एक शब्द में आंसर दे दो कि विस्तार बताओ एक शब्द नहीं देता हूं कि नहीं शिक्षा को सुधारने की

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Rakhi Saxena

Working Woman And Counseller

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हां शिक्षा प्रणाली में सुधार थी तो बहुत जरूरत है क्योंकि वहां जिस तरह के प्राइवेट स्कूल में एक बिजनेस बना लिया है एक हॉस्पिटल नाइन दूसरी एजुकेशन में दो लाइन सबसे ज्यादा मतलब हेल्पफुल और एक सोशल एड ब्लॉक करने के लिए बहुत इंपॉर्टेंट रोल निभाती है एक हॉस्पिटल जी है इंसान की जान बचाता है और उसमें जो है वह पेशेंट की पूरी केयर करता है सब कुछ करता है ठीक है उसी तरह से स्कूल एक बच्चे को के जीवन को एक कुम्हार मिट्टी का एक राजा बना करके का यह किसी चीज का आकार देता है जैसे ही स्कूल भी एक बच्चे के लिए कुमार का काम करते हैं लेकिन आज की कौन थी दोनों ही क्यों है इतनी बदनाम लाइंस हो गई है यह सिर्फ एक से सौ सौ मॉर्निंग रह गई है इसकी जो मूल वह तो कहीं बहुत दूर दूर हो गए उनको आज कोई नहीं देखना चाहता कोचिंग इंस्टीट्यूट ऐसे हैं कि जहां क्लासेज से ज्यादा कोचिंग सेंटर में बच्चे दिखाई देती है वह बच्चे स्कूल में ड्यूटी कर रहे हैं और वह बच्चे उसी में भी उसी टीचर से पढ़ने आदमी ने कहा कि अपना एक बिजनेस बना लिया यह डबल बिजनेस होगा कि स्कूल से पटेल किसको मिलेगी मिलेगी और साथ-साथ उसको कोचिंग सीरियल अगेन का मोदीकारे कुछ और कोचिंग में भी यह नहीं है कि बच्चों के ऊपर क्वालिटी टाइम कोचिंग में भी पूरे 7070 बच्चों का बैग लगा रहे हैं वह पूरी तरह से क्लास चल रही है स्कूल की जगह कोचिंग नहीं पूरी क्लास लगा देते हैं यह सब कुछ टोटल बंद होना चाहिए अगर बच्चों को एग्जाम चेक करना है तो उनके लिए वह कोचिंग किए फैसिलिटी है वह स्कूल में ही अरेंज करना चाहिए ट्वेल्थ स्टैंडर्ड के लिए खास करके और कैंट के लिए जो बच्चे कैसे एग्जाम क्वालीफाई करना चाहते हैं उसके लिए और जो कल की बात करना चाहती उनके लिए उनकी अपील की है कि वह अपने स्कूल में इस तरह की क्लासेस आफ्टर स्कूल टाइमिंग स्कूल टाइमिंग के बाद इवनिंग क्लास में उन कॉन्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी बच्चों को प्राइवेट कोचिंग सेंटर और इसी तरह से डॉक्टर का भी है जो गवर्नमेंट हॉस्पिटल्स है उसे अच्छी क्वालिटी वहां पर फैसिलिटी डिसिपेशन क्यों है वह प्राइवेट हॉस्पिटल तैनात है क्योंकि एक बकरा पेशेंट को प्राइवेट हॉस्पिटल में लेकर जाते हैं यह मान लीजिए शायद 99% ऑफिस की जानकारी वहां से लेकर आएंगे और बिल अमाउंट आफ मनी के कम से कम 5 शिक्षक तो आपका नॉरमल कंडीशन में लगना ही लगना इससे पहले महिला को डिस्चार्ज देखा ही नहीं तू यह दो ओगी सचिन चूहे को बुखार सागर बिगड़ गई है इन को संभालने के लिए आज के समय में गवर्नमेंट को उचित कदम उठाने चाहिए और स्कूल में तो यह भी है कि हर साल बुक चेंज गुड़िया हर साल एडमिशन बच्चे की फीस ली जाती है हर साल की सेंटीमेंट हो रहा है यह सब चीजें बंद होने की जब बच्चे नहीं एक बार एलकेजी में एडमिशन ले लिया और उसे स्कूलों को 22:30 पर रहा है हर साल एडमिशन किस किस बात की एक ही बुक्स जो है वह चल रही है तो हर साल एक बुक चेंज करके पूरा सिलेबस पेरेंट्स ऊपर क्यों बदल डाला जाता है ऑफिस का स्टैंडर्ड आप देखिए मतलब 1 सेकंड थर्ड स्टैंडर्ड के पूर्व अगर आप क्लास में बच्चों को पढ़ा रहे हैं उसी के साथ मानेसर एक लाख की फीस एक टाइम था हमारे टाइम प्लीज अभी क्वालिटी एजुकेशन थी और उस टाइम पर ट्वेल्थ के बाद पढ़ने के लिए इंसान यह सोचता था कि हम अपने बच्चे का ₹500000 जोड़ के रखे जिससे बच्चा वाला कुछ अच्छा बनता कि आज तो एक बच्चे को पैदा करने को उसके कैरियर तक उसको पहुंचाने के लिए एक पैरंट्स को कम से कम अपनी 40 से 50 लाख के रखने पड़ेंगे वह भी तब जब उसके बच्चे में क्वालिटी हो अब वह आफ्टर आईआईटी एमबीबीएस या कोई अच्छी जो है वह अपॉर्चुनिटी खुद ट्रैक कर सकता मगर वह भी को नहीं कर पाता कि यह मनी एक करोड़ तक बच्चे के लिए आप नॉर्मल है यह सब चीजें बहुत चेंज होना जरूरी है

haan shiksha pranali me sudhaar thi toh bahut zarurat hai kyonki wahan jis tarah ke private school me ek business bana liya hai ek hospital nine dusri education me do line sabse zyada matlab helpful aur ek social aid block karne ke liye bahut important roll nibhati hai ek hospital ji hai insaan ki jaan bachata hai aur usme jo hai vaah patient ki puri care karta hai sab kuch karta hai theek hai usi tarah se school ek bacche ko ke jeevan ko ek kumhaar mitti ka ek raja bana karke ka yah kisi cheez ka aakaar deta hai jaise hi school bhi ek bacche ke liye kumar ka kaam karte hain lekin aaj ki kaun thi dono hi kyon hai itni badnaam lines ho gayi hai yah sirf ek se sau sau morning reh gayi hai iski jo mul vaah toh kahin bahut dur dur ho gaye unko aaj koi nahi dekhna chahta coaching institute aise hain ki jaha classes se zyada coaching center me bacche dikhai deti hai vaah bacche school me duty kar rahe hain aur vaah bacche usi me bhi usi teacher se padhne aadmi ne kaha ki apna ek business bana liya yah double business hoga ki school se patel kisko milegi milegi aur saath saath usko coaching serial again ka modikare kuch aur coaching me bhi yah nahi hai ki baccho ke upar quality time coaching me bhi poore 7070 baccho ka bag laga rahe hain vaah puri tarah se class chal rahi hai school ki jagah coaching nahi puri class laga dete hain yah sab kuch total band hona chahiye agar baccho ko exam check karna hai toh unke liye vaah coaching kiye facility hai vaah school me hi arrange karna chahiye twelfth standard ke liye khas karke aur cantt ke liye jo bacche kaise exam qualify karna chahte hain uske liye aur jo kal ki baat karna chahti unke liye unki appeal ki hai ki vaah apne school me is tarah ki classes after school timing school timing ke baad evening class me un competetive exam ki taiyari baccho ko private coaching center aur isi tarah se doctor ka bhi hai jo government hospitals hai use achi quality wahan par facility disipeshan kyon hai vaah private hospital tainat hai kyonki ek bakara patient ko private hospital me lekar jaate hain yah maan lijiye shayad 99 office ki jaankari wahan se lekar aayenge aur bill amount of money ke kam se kam 5 shikshak toh aapka normal condition me lagna hi lagna isse pehle mahila ko discharge dekha hi nahi tu yah do ogi sachin chuhe ko bukhar sagar bigad gayi hai in ko sambhalne ke liye aaj ke samay me government ko uchit kadam uthane chahiye aur school me toh yah bhi hai ki har saal book change gudiya har saal admission bacche ki fees li jaati hai har saal ki sentiment ho raha hai yah sab cheezen band hone ki jab bacche nahi ek baar LKG me admission le liya aur use schoolon ko 22 30 par raha hai har saal admission kis kis baat ki ek hi books jo hai vaah chal rahi hai toh har saal ek book change karke pura syllabus parents upar kyon badal dala jata hai office ka standard aap dekhiye matlab 1 second third standard ke purv agar aap class me baccho ko padha rahe hain usi ke saath manesar ek lakh ki fees ek time tha hamare time please abhi quality education thi aur us time par twelfth ke baad padhne ke liye insaan yah sochta tha ki hum apne bacche ka Rs jod ke rakhe jisse baccha vala kuch accha banta ki aaj toh ek bacche ko paida karne ko uske carrier tak usko pahunchane ke liye ek Parents ko kam se kam apni 40 se 50 lakh ke rakhne padenge vaah bhi tab jab uske bacche me quality ho ab vaah after IIT MBBS ya koi achi jo hai vaah opportunity khud track kar sakta magar vaah bhi ko nahi kar pata ki yah money ek crore tak bacche ke liye aap normal hai yah sab cheezen bahut change hona zaroori hai

हां शिक्षा प्रणाली में सुधार थी तो बहुत जरूरत है क्योंकि वहां जिस तरह के प्राइवेट स्कूल मे

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Manubhai.vyas

Social Worker.&.master.coach.mentalenvironment

4:09

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डॉ अर्चना चौधरी

कवयित्री ,कॉन्सलर ,समाजसेवी , शिक्षिका

1:40
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हां अवश्य है हमारे देश के अंदर जो शिक्षा प्रणाली है उसमें सुधार की सख्त आवश्यकता है और हम अपने सुझाव माननीय प्रधानमंत्री जी तक पहुंचा सकते हैं और पहुंचा भी रहे हैं और वह इसके लिए बहुत तंग करती हैं बहुत उत्सुक भी हैं और वह इस तरफ कदम बढ़ा चुके हैं और तो लेकिन अकेले सरकार की जिम्मेदारी नहीं बनती है किसी भी व्यवस्था का सुधार करना इसमें हमारी भी भागीदारी होनी चाहिए आप की भी भागीदारी होनी चाहिए हर किसी की भागीदारी होनी चाहिए जल्दी से एक बार भी अधिक शिक्षित हो गया और बहुत अच्छा हो गया तो वह एक अच्छी जिंदगी जी लेगा इसकी कोई गारंटी नहीं है क्योंकि हम जिस समाज में रहते हैं उस समाज व समाज अच्छा होगा उस पर डिपेंड करेगा कि हम कैसी लाइफ किए हैं आप देखे करो ना का मौसम है हम खुद बचकर बहुत रहना चाहते हैं लेकिन क्या गारंटी है कि हम बचे रहेंगे क्योंकि हम जिस समाज में रह रहे हैं उसने कुछ भी बुरे लोग हैं जिसके कारण बुराइयां फाइल रही है तो हमें शिक्षा प्रणाली के सुधार की तरफ हर किसी को बढ़ना चाहिए तब जाकर हमारे अंदर जो बुराइयां आ रही हैं या आप आधारित शिक्षा के में तरफ अगर चलिए तो हमारे अंदर का राक्षस बन रहा है उस पर लगाम लगाना होगा और हमारी जो शिक्षा प्रणाली है उसमें भी सुधार की तरफ हम सब को आगे आना होगा तभी जाकर हमारी सिस्टम अच्छा काम कर सकता हमारा सिस्टम सरकार अपनी जिम्मेदारी निभा रही है हमें भी अपनाना पड़ेगा

haan avashya hai hamare desh ke andar jo shiksha pranali hai usme sudhaar ki sakht avashyakta hai aur hum apne sujhaav mananiya pradhanmantri ji tak pohcha sakte hain aur pohcha bhi rahe hain aur vaah iske liye bahut tang karti hain bahut utsuk bhi hain aur vaah is taraf kadam badha chuke hain aur toh lekin akele sarkar ki jimmedari nahi banti hai kisi bhi vyavastha ka sudhaar karna isme hamari bhi bhagidari honi chahiye aap ki bhi bhagidari honi chahiye har kisi ki bhagidari honi chahiye jaldi se ek baar bhi adhik shikshit ho gaya aur bahut accha ho gaya toh vaah ek achi zindagi ji lega iski koi guarantee nahi hai kyonki hum jis samaj me rehte hain us samaj va samaj accha hoga us par depend karega ki hum kaisi life kiye hain aap dekhe karo na ka mausam hai hum khud bachakar bahut rehna chahte hain lekin kya guarantee hai ki hum bache rahenge kyonki hum jis samaj me reh rahe hain usne kuch bhi bure log hain jiske karan buraiyan file rahi hai toh hamein shiksha pranali ke sudhaar ki taraf har kisi ko badhana chahiye tab jaakar hamare andar jo buraiyan aa rahi hain ya aap aadharit shiksha ke me taraf agar chaliye toh hamare andar ka rakshas ban raha hai us par lagaam lagana hoga aur hamari jo shiksha pranali hai usme bhi sudhaar ki taraf hum sab ko aage aana hoga tabhi jaakar hamari system accha kaam kar sakta hamara system sarkar apni jimmedari nibha rahi hai hamein bhi apnana padega

हां अवश्य है हमारे देश के अंदर जो शिक्षा प्रणाली है उसमें सुधार की सख्त आवश्यकता है और हम

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Rajesh Dewangan

Hindi Linguistics

2:16
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हां आज हमारे देश की शिक्षा प्रणाली को सुधार करने की जरूरत है पहली बात तो यह कि शिक्षा के क्षेत्र में सरकार को और भी पैसा लगाना पड़ेगा भारत की अपनी जीडीपी की थोड़ी प्रतिशत ज्यादा प्रतिशत जो है जीडीपी का इसमें लगाना पड़ेगा अभी बहुत कम लगा रहा है उससे शिक्षा के संसाधन जो कि बहुत आवश्यक है उनकी पूर्ति करनी होगी यहां तक कि शिक्षकों की कमी है उस से लेकर अन्य संसाधनों बिल्डिंग बैठने की व्यवस्था शौचालय मुख्यालय ट्यून मध्यान भोजन और साला के अंदर आवश्यक सामग्री इन सब की व्यवस्था करनी पड़ेगी और इन चीजों पर विशेष ध्यान नहीं दिया जाता है इसके बजाय शिक्षा की गुणवत्ता लाने के लिए ऐसे ऐसे प्रपंच किए जाते हैं जिससे शिक्षा की गुणवत्ता को सुधार की नहीं है लेकिन शिक्षक जो है वह तनाव में आ जाता है तो जहां जगह सुधार की आवश्यकता है वहां सुधार किया नहीं जा रहा है पता नहीं सरकार उसी पर जानबूझकर ध्यान नहीं दे रही है कि उसके पास संसाधन नहीं है मेरा मानना है कि सरकार के पास संसाधन है उसे शिक्षा पर वह बढ़ाना पड़ेगा भले ही इसे अन्य क्षेत्र से हो इस व्यवस्था में लगने वाले राशि की पूर्ति करें लेकिन अभी हमारी शिक्षा व्यवस्था में बहुत बहुत सुधार की आवश्यकता है

haan aaj hamare desh ki shiksha pranali ko sudhaar karne ki zarurat hai pehli baat toh yah ki shiksha ke kshetra me sarkar ko aur bhi paisa lagana padega bharat ki apni GDP ki thodi pratishat zyada pratishat jo hai GDP ka isme lagana padega abhi bahut kam laga raha hai usse shiksha ke sansadhan jo ki bahut aavashyak hai unki purti karni hogi yahan tak ki shikshakon ki kami hai us se lekar anya sansadhano building baithne ki vyavastha shauchalay mukhyalay tune madhyan bhojan aur sala ke andar aavashyak samagri in sab ki vyavastha karni padegi aur in chijon par vishesh dhyan nahi diya jata hai iske bajay shiksha ki gunavatta lane ke liye aise aise PRAPANCH kiye jaate hain jisse shiksha ki gunavatta ko sudhaar ki nahi hai lekin shikshak jo hai vaah tanaav me aa jata hai toh jaha jagah sudhaar ki avashyakta hai wahan sudhaar kiya nahi ja raha hai pata nahi sarkar usi par janbujhkar dhyan nahi de rahi hai ki uske paas sansadhan nahi hai mera manana hai ki sarkar ke paas sansadhan hai use shiksha par vaah badhana padega bhale hi ise anya kshetra se ho is vyavastha me lagne waale rashi ki purti kare lekin abhi hamari shiksha vyavastha me bahut bahut sudhaar ki avashyakta hai

हां आज हमारे देश की शिक्षा प्रणाली को सुधार करने की जरूरत है पहली बात तो यह कि शिक्षा के क

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Shambhu Das

Officer In Maharatna Company | Motivational Coach | Solution Provider

9:17
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जी हां हमारे देश में शिक्षा प्रणाली को सुधार करने की बहुत जरूरत है आप ने सवाल पूछा क्या जरूरत नहीं है जरूरत है पूरी दुनिया में इस पर चर्चा चल रही है नए नए प्रयोग हो रहे लेकिन हमारे देश में तो जो सबसे जरूरी है दो चीजें एक है शिक्षा व्यवस्था दूसरा आ स्वास्थ्य व्यवस्था यह दोनों में बहुत सुधार की जरूरत है साथियों देखिए पहले तो आते हैं कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था में अभी हम लोगों के ऊपर अंग्रेजी अंग्रेजी माध्यम हावी है क्योंकि भारत की ऑफिसियल भाषा हुआ अंग्रेजी और अंग्रेजी पढ़ने लिखने वाले और माध्यम से पढ़ने लिखने वाले के लिए बहुत सारे आयाम खुल जाते हैं और हनी से नौकरी मिल जाती है परंतु हम अपनी भाषा में उस प्रकार का कोई भी सुधार नहीं कर रहे हैं ज्यादातर क्योंकि अगर मात्री भाषा में ही सभी चीज उपलब्ध हो जाए तो इससे क्या होगा कि हम अपने भाषा में अपने भाव को व्यक्त करेंगे उसे दूसरे भाषा में मीनिंग वगैरह पढ़ने का जरूरत नहीं पड़ेगा पड़ेगा बहुत सारे विकसित देश है जो अपनी भाषा में उन्नति के बिना अंग्रेजी के सहायता को ले लीजिए हमारे बाद आजाद हुआ लेकिन आज देखिए विश्व की दूसरी महाशक्ति बन गई है जापानी लोग थोड़ी अंग्रेजी जानते हो लोग अपने भाषा में पढ़ाई करते हैं अपनी भाषा में टेक्नोलॉजी उत्पन्न किए हैं तो कोई जरूरी नहीं है क्या अंग्रेजी से ही आगे बढ़ेंगे अपनी भाषा में अगर ज्यादा अच्छा होगा पढ़ना समझना क्योंकि मात्री भाषा बचपन से उस भाषा को सीख लेते तो यह खामी है हमारी देश की शिक्षा प्रणाली में दूसरी जो है कि आज शिक्षा व्यवस्था का जो निजी करण हो रहा प्राइवेटाइजेशन हो रहा है इससे यह महंगी होती जा रही है स्कूल की बढ़ती भी सोने अब मध्यमवर्ग आरा पर मीडियम क्लास अभी कमर तोड़ दिया है इसीलिए शिक्षा बहुत महंगी होती जा रही है यदि इस पर सरकारी नियंत्रण रहता थोड़ा सरकारी व्यवस्था में बच्चों को पढ़ने मिलता तो काफी कम पैसे में या निशुल्क शिक्षा मिलती है और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलती एक खबर आया था कि न्यायालय ने आदेश दिया था कि सरकारी जो स्कूल है मैं वहां के डीएम एसडीओ आईपीएस सबके अपने टाइम मिले एमपी इन के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ने चाहिए तो उनका ध्यान उस पर होगा और सरकारी स्कूल जो है उन्नति कर जाएगा यह बहुत बड़ा कदम था साथियों मुझे बहुत अच्छा लगा था लगा था कि देश अब बहुत जल्द बदल जाएगा लेकिन इसका क्रियान्वयन नहीं हुआ मुझे पता नहीं किस कारण से नहीं हुआ तो देखिए हमारे जो सरकारी स्कूल है उस स्कूल में जो शिक्षा की गुणवत्ता है उसे सुधार करने की जरूरत है तो यह सभी तो हुए शिक्षा प्रणाली वगैरा के बारे में सिस्टम जो विदेश में चल रहे हैं उसकी खामियां के बारे में मैं इससे अलग एक बात बोलता हूं कि हमारी जो शिक्षा प्रणाली जो किताबों में सिमट कर रह गई उससे अलग तरह का एक सोच जागृत करना होगा हम लोग जो सोचते हैं शिक्षा किताबों में ही मिलती है विद्यालयों में मिलती है इस सोच से भी बाहर आना पड़ेगा अब कहेगा कैसे देखिए हम लोग जो है अपने घर में कभी अपने बच्चे को आलू दिखाकर नहीं पूछे की जड़ है कि तना आप भी जरा सोचिए गाके आलू जड़ है कितना मुझे कमेंट करके बताइएगा देखते हैं कितने लोग इसका सही जवाब देते हैं कि आज जो खाते हैं वह प्याज के पौधों का कौन सा हिस्सा खाते हैं जड़ खाते हैं कितना खाते हैं कि पति खाते हैं हमारे घर अच्छा होना चाहिए जीवन का शिक्षण के साथ जुड़ा होना चाहिए विज्ञानिक सोचो है हमारे घर से उत्पन्न होना चाहिए क्यूरिसिटी बच्चों को घर से ही जागृत होना चाहिए अदरक जो खाते हैं वह क्या है जड़ है कितना है ऐसी बहुत सारी चीजें हैं जो घर में घटनाक्रम होती है लेकिन उसका ज्ञान हम करते हैं तुम्हें स्कूल से मिलेगा घर में किसी तरह का जिज्ञासा को जगने नहीं देते घर में देखिए लाइट जलती है तो किसी नर्जी में किस नदी में बदल रहा है पंखा चलती है किसी नदी में किसी नदी में नहाते हैं तो ठंडा क्यों लगता है हम अपने घरों को पानी से धो देते गर्म दिन में तो ठंडा क्यों हो जाती है बुखार होने पर माथे पर पट्टी क्यों दी जाती है हमारे जो घर में जो गैस चूल्हे होते हैं वह किस प्रकार से जलते हैं उसमें कौन सा ऊर्जा किस ऊर्जा में बदलता है तो कितना सारा चीज है जो घर से होता देखिए ना अंकुरण की परिभाषा किताब में लिखा है लेकिन कभी हमने अपने बच्चों को ले जाकर एक बीज अंकुरित होते हुए दिखाया या बताया नहीं बताते हैं उसे हम कहते हैं अंकुरण की परिभाषा याद करो होना तो यह चाहिए बच्चे खेत खलिहान में जाते प्रकृति को देखते होने वाली घटनाओं के बारे में जिज्ञासा होता वह अपने आसपास के ज्ञानी अथवा माता-पिता पर स्कूल में जाकर उस पर प्रश्न करते तो इस तरह की प्रणाली विकसित करना भारत में जरूरी है ऐसा दिक्षित नहीं करने पर हम कुछ रतनपुर तोता बना दे रहे हैं वह लौटकर परीक्षा में जाकर लिखते हैं और हम कहते हो शिक्षित हो गया इस प्रकार का शिक्षित होने से किसी प्रकार का रिसर्च अथवा अनुसंधान अथवा खोज नहीं हो पाता है इसीलिए भारत पर ज्यादा वैज्ञानिक नहीं निकलते हैं और वैज्ञानिक नहीं होने कारण रिसर्च एंड डेवलपमेंट नहीं होता है जबकि पाश्चात्य देशों में जहां की शिक्षा प्रणाली बिल्कुल प्रैक्टिकल पर डिपेंड है वहां के बच्चे काफी आगे बढ़ते हैं साइंटिस्ट बनते हैं क्या दीदी अब हम अपने केमिस्ट्री के किताब में आम सोडियम क्लोराइड के बारे में खूब बड़ा घर में कभी नमक देखा ही नहीं नमक की तो सोडियम क्लोराइड डिटर्जेंट दिखाते हैं लेकिन सोडियम कार्बोनेट उस दिन बताते हैं गाय के बारे में लेख भी लटके याद करता रे कभी गाय के सामने बच्चे को खड़ा कर दीजिए उसे देखने बोलिए कितने पैर है कुछ है काम है सिंह है तो आराम से लिख देगा तो इस तरह के शिक्षा प्रणाली भारत में विकसित होनी चाहिए दोस्तों अगर मेरा ऑडियो जो भी गार्जियन सुन रहा था जो भी स्टूडेंट सुन रहे हैं उच्च शिक्षा कोई ढंग पर अपनाएं आपके अंदर ज्ञान का भंडार हो जाएगा आप बहुत ही जी से बहुत आसानी से बहुत कुछ सीख जाएगा अथवा गार्जियन भी अपने बच्चों को इस प्रकार से प्रेरित करें मौजूदा शिक्षा व्यवस्था में भी आपके बच्चे बहुत तेज हो जाएंगे ऐसा मैंने बहुत विद्यार्थियों पर किया है और बताया है जो कि बहुत कमजोर थे लेकिन भाव तुरंत पढ़ने में तेज हो गए पद्धति अपनाने की जरूरत है प्रणाली अपनाने की जरूरत है अगर जवाब अच्छा लगा हो तो फॉलो करें लाइक करें कुछ कमेंट करें धन्यवाद

ji haan hamare desh me shiksha pranali ko sudhaar karne ki bahut zarurat hai aap ne sawaal poocha kya zarurat nahi hai zarurat hai puri duniya me is par charcha chal rahi hai naye naye prayog ho rahe lekin hamare desh me toh jo sabse zaroori hai do cheezen ek hai shiksha vyavastha doosra aa swasthya vyavastha yah dono me bahut sudhaar ki zarurat hai sathiyo dekhiye pehle toh aate hain ki maujuda shiksha vyavastha me abhi hum logo ke upar angrezi angrezi madhyam haavi hai kyonki bharat ki official bhasha hua angrezi aur angrezi padhne likhne waale aur madhyam se padhne likhne waale ke liye bahut saare aayam khul jaate hain aur honey se naukri mil jaati hai parantu hum apni bhasha me us prakar ka koi bhi sudhaar nahi kar rahe hain jyadatar kyonki agar matri bhasha me hi sabhi cheez uplabdh ho jaaye toh isse kya hoga ki hum apne bhasha me apne bhav ko vyakt karenge use dusre bhasha me meaning vagera padhne ka zarurat nahi padega padega bahut saare viksit desh hai jo apni bhasha me unnati ke bina angrezi ke sahayta ko le lijiye hamare baad azad hua lekin aaj dekhiye vishwa ki dusri mahashakti ban gayi hai japani log thodi angrezi jante ho log apne bhasha me padhai karte hain apni bhasha me technology utpann kiye hain toh koi zaroori nahi hai kya angrezi se hi aage badhenge apni bhasha me agar zyada accha hoga padhna samajhna kyonki matri bhasha bachpan se us bhasha ko seekh lete toh yah khami hai hamari desh ki shiksha pranali me dusri jo hai ki aaj shiksha vyavastha ka jo niji karan ho raha privatisation ho raha hai isse yah mehengi hoti ja rahi hai school ki badhti bhi sone ab madhyamavarg aara par medium class abhi kamar tod diya hai isliye shiksha bahut mehengi hoti ja rahi hai yadi is par sarkari niyantran rehta thoda sarkari vyavastha me baccho ko padhne milta toh kaafi kam paise me ya nishulk shiksha milti hai aur gunavattaapoorn shiksha milti ek khabar aaya tha ki nyayalaya ne aadesh diya tha ki sarkari jo school hai main wahan ke dm NDO ips sabke apne time mile MP in ke bacche sarkari schoolon me padhne chahiye toh unka dhyan us par hoga aur sarkari school jo hai unnati kar jaega yah bahut bada kadam tha sathiyo mujhe bahut accha laga tha laga tha ki desh ab bahut jald badal jaega lekin iska kriyanvayan nahi hua mujhe pata nahi kis karan se nahi hua toh dekhiye hamare jo sarkari school hai us school me jo shiksha ki gunavatta hai use sudhaar karne ki zarurat hai toh yah sabhi toh hue shiksha pranali vagera ke bare me system jo videsh me chal rahe hain uski khamiyan ke bare me main isse alag ek baat bolta hoon ki hamari jo shiksha pranali jo kitabon me simat kar reh gayi usse alag tarah ka ek soch jagrit karna hoga hum log jo sochte hain shiksha kitabon me hi milti hai vidhayalayo me milti hai is soch se bhi bahar aana padega ab kahega kaise dekhiye hum log jo hai apne ghar me kabhi apne bacche ko aalu dikhakar nahi pooche ki jad hai ki tana aap bhi zara sochiye gake aalu jad hai kitna mujhe comment karke bataiega dekhte hain kitne log iska 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comment kare dhanyavad

जी हां हमारे देश में शिक्षा प्रणाली को सुधार करने की बहुत जरूरत है आप ने सवाल पूछा क्या जर

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डाॅ. देवेन्द्र जोशी उज्जैन म प्र

पत्रकार, साहित्यकार शिक्षाविद

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Gopal Srivastava

Acupressure Acupuncture Sujok Therapist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखो पहले के मुकाबले अब इस देश में बहुत ज्यादा सुधार हो रही है इतनी ज्यादा हो रहे हैं कि जिसकी हड्डी और आने वाले टाइम में सुधार होते रहेंगे और इतने सुधार हो गए कि आप देखेंगे 5 साल में देश की क्या कायापलट हो जाती है बहुत बढ़िया सुधार होंगे और आप नहीं जनेश्वर के लिए जितना सुधार होंगे कि वह कहीं बनेगी जीजी में दिक्कत नहीं होगी

dekho pehle ke muqable ab is desh me bahut zyada sudhaar ho rahi hai itni zyada ho rahe hain ki jiski haddi aur aane waale time me sudhaar hote rahenge aur itne sudhaar ho gaye ki aap dekhenge 5 saal me desh ki kya kayapalat ho jaati hai bahut badhiya sudhaar honge aur aap nahi janeshwar ke liye jitna sudhaar honge ki vaah kahin banegi GG me dikkat nahi hogi

देखो पहले के मुकाबले अब इस देश में बहुत ज्यादा सुधार हो रही है इतनी ज्यादा हो रहे हैं कि ज

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Santosh Sharma "Kokil"

अभिनेत्री,कवयित्री,मंच संचालक, मार्गदर्शन वक्ता

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बिल्कुल आज जो है हमारी शिक्षा प्रणाली में बहुत परिवर्तन की आवश्यकता है क्योंकि देश को आजाद हुए बहुत साल हो गई हैं आजादी के बाद भी हम उसी मैकाले की शिक्षा प्रणाली पर टिके हुए हैं और हमारे देश में छुरी बहुत अधिक पढ़ाई जाती है प्रयोगात्मक पढ़ाई जो है रुचिकर पढ़ाई नहीं है और दूसरी एक और बात के व्यवहारिक शिक्षा नहीं है जैसे कि हम व्यावहारिक रूप से बच्चों को निर्गुण बनाएं कि कभी ऐसी सिचुएशन भी आ जाती है कि बच्चे के जो व्यापारिक कार्य होती है वह भी जरूरी है चाहे जैसे हमारे पुराने ज्योति 16 कलाई जिसके 64 भाग होते थे उसमें बच्चों के जो व्यावहारिक जीवन में खाना बनाने से लेकर सभी तरह के काम भी साथ-साथ सिखाए जाते थे उसके साथ साथ भाषाओं की जानकारी गणित जो जरूरी होते थे वह भी सिखाए जाते थे तो शिक्षा में परिवर्तन बहुत जरूरी है समय के अनुसार

bilkul aaj jo hai hamari shiksha pranali me bahut parivartan ki avashyakta hai kyonki desh ko azad hue bahut saal ho gayi hain azadi ke baad bhi hum usi maikale ki shiksha pranali par tike hue hain aur hamare desh me chhuri bahut adhik padhai jaati hai prayogatmak padhai jo hai ruchikar padhai nahi hai aur dusri ek aur baat ke vyavaharik shiksha nahi hai jaise ki hum vyavaharik roop se baccho ko nirgun banaye ki kabhi aisi situation bhi aa jaati hai ki bacche ke jo vyaparik karya hoti hai vaah bhi zaroori hai chahen jaise hamare purane jyoti 16 kalaai jiske 64 bhag hote the usme baccho ke jo vyavaharik jeevan me khana banane se lekar sabhi tarah ke kaam bhi saath saath sikhaye jaate the uske saath saath bhashaon ki jaankari ganit jo zaroori hote the vaah bhi sikhaye jaate the toh shiksha me parivartan bahut zaroori hai samay ke anusaar

बिल्कुल आज जो है हमारी शिक्षा प्रणाली में बहुत परिवर्तन की आवश्यकता है क्योंकि देश को आजाद

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जी जरूर है शिक्षा कला को पढ़ाना प्रणाली को सुधार करना बहुत ही जरूरी है क्योंकि हम भ्रष्टाचार की तरह बात करते हैं तो शिक्षा में ही ज्यादा से ज्यादा दिखती है कि जो ऊपर बैठकर जी मंत्री मंत्रालय से जो भी शिक्षा के ऊपर जो भी नीति बनती है जो उसके बारे में जितना पैसा आता है सब साड़ी आपकी जमीनी स्तर पर नहीं देखी जाती है जिसके कारण यहां बहुत ही ज्यादा भ्रष्टाचार से युक्त शिक्षा हमारी भारत की शिक्षा इसमें बहुत ही सुधार की आवश्यकता है पहले तो हम प्री प्राइमरी एजुकेशन को शिक्षा सुधार करेंगे फिर हम मिडिल स्कूल के शिक्षा को सुधार करेंगे फिर हाई स्कूल में जाएंगे फिर हमारे जो इंवर्सिटी के है शिक्षा वह सही है लेकिन फिर भी वहां भी बहुत खामियां दिखती है ना सुधार की आवश्यकता है

ji zaroor hai shiksha kala ko padhana pranali ko sudhaar karna bahut hi zaroori hai kyonki hum bhrashtachar ki tarah baat karte hain toh shiksha me hi zyada se zyada dikhti hai ki jo upar baithkar ji mantri mantralay se jo bhi shiksha ke upar jo bhi niti banti hai jo uske bare me jitna paisa aata hai sab saree aapki zameeni sthar par nahi dekhi jaati hai jiske karan yahan bahut hi zyada bhrashtachar se yukt shiksha hamari bharat ki shiksha isme bahut hi sudhaar ki avashyakta hai pehle toh hum pri primary education ko shiksha sudhaar karenge phir hum middle school ke shiksha ko sudhaar karenge phir high school me jaenge phir hamare jo invarsiti ke hai shiksha vaah sahi hai lekin phir bhi wahan bhi bahut khamiyan dikhti hai na sudhaar ki avashyakta hai

जी जरूर है शिक्षा कला को पढ़ाना प्रणाली को सुधार करना बहुत ही जरूरी है क्योंकि हम भ्रष्टाच

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Laljee Gupta

Career Counsellor

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न अच्छा है सुधार करने की जरूरत नहीं है क्या बिल्कुल किसी भी विधि में किसी भी प्रणाली में किसी भी सिस्टम में सदैव कुछ न कुछ सुधार की आवश्यकता बनी रहती है इंप्लीमेंटेशन किसी भी स्टेज पर कहीं से भी कुछ न कुछ सदैव होता रहता है और बराबर निगरानी के साथ-साथ उसमें सुधार की आवश्यकता होती है ऐसा कोई नहीं कर सकता की सूचना में प्रणाली में सुधार की जरूरत नहीं है क्या बिल्कुल जरूरत है और हमेशा रहेगी हमेशा इंप्लीमेंटेशन की आवश्यकता होती है शिक्षा प्रणाली तो और भी ऐसी चीज है जो 700 चलने वाली चीज है और निरंतर चलते रहते चलते चलते चलते रहते के कारण समय अनुकूल इसमें परिवर्तन की आवश्यकता होती है और निरंतर बनी रहती है एक से ध्यान रखिएगा इंक्रीमेंटेशन विल बी कंटिन्यू एंड लेडी कंटिन्यूविद 18 से बराबर बनी रहती है इसके चांस लगातार बने रहते हैं ओके

aapka prashna accha hai sudhaar karne ki zarurat nahi hai kya bilkul kisi bhi vidhi me kisi bhi pranali me kisi bhi system me sadaiv kuch na kuch sudhaar ki avashyakta bani rehti hai implementation kisi bhi stage par kahin se bhi kuch na kuch sadaiv hota rehta hai aur barabar nigrani ke saath saath usme sudhaar ki avashyakta hoti hai aisa koi nahi kar sakta ki soochna me pranali me sudhaar ki zarurat nahi hai kya bilkul zarurat hai aur hamesha rahegi hamesha implementation ki avashyakta hoti hai shiksha pranali toh aur bhi aisi cheez hai jo 700 chalne wali cheez hai aur nirantar chalte rehte chalte chalte chalte rehte ke karan samay anukul isme parivartan ki avashyakta hoti hai aur nirantar bani rehti hai ek se dhyan rakhiega inkrimenteshan will be continue and lady kantinyuvid 18 se barabar bani rehti hai iske chance lagatar bane rehte hain ok

आपका प्रश्न अच्छा है सुधार करने की जरूरत नहीं है क्या बिल्कुल किसी भी विधि में किसी भी प्र

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Rohil Kabir

banker & Proffessor (Career Counsellor)

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह तो सभी का मानना है कि हमारी तो शिक्षा पर डाली है उसमें सुधार की आवश्यकता है परंतु प्रश्न यह है कि यह होगा कैसे या जहां तक मेरा मानना है व्यक्तिगत विचार यह है कि एक बड़ी जनसंख्या को एक सकारात्मक प्रयास करना पड़ेगा परंतु हाल के दिनों में मैंने जिस तरह का राजनीतिक हालात को महसूस किया उसे देखते हुए मैं यह कह सकता हूं कि फिलहाल शिक्षा प्रणाली की सुधार की ओर देश की जनता की कोई रुचि नहीं तुम मुझे ऐसा लगता है कि फिलहाल निकट भविष्य में शिक्षा प्रणाली के सुधार में कोई बड़ा बदलाव नहीं आने वाला है क्योंकि हमारे देश की जनता शिक्षा के क्षेत्र को लेकर बिल्कुल गंभीर ही नहीं है

yah toh sabhi ka manana hai ki hamari toh shiksha par dali hai usme sudhaar ki avashyakta hai parantu prashna yah hai ki yah hoga kaise ya jaha tak mera manana hai vyaktigat vichar yah hai ki ek badi jansankhya ko ek sakaratmak prayas karna padega parantu haal ke dino me maine jis tarah ka raajnitik haalaat ko mehsus kiya use dekhte hue main yah keh sakta hoon ki filhal shiksha pranali ki sudhaar ki aur desh ki janta ki koi ruchi nahi tum mujhe aisa lagta hai ki filhal nikat bhavishya me shiksha pranali ke sudhaar me koi bada badlav nahi aane vala hai kyonki hamare desh ki janta shiksha ke kshetra ko lekar bilkul gambhir hi nahi hai

यह तो सभी का मानना है कि हमारी तो शिक्षा पर डाली है उसमें सुधार की आवश्यकता है परंतु प्रश्

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Rakesh Tiwari

Life Coach, Management Trainer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न हमारे देश के समान होनहार और आस्तिक व्यक्तियों का निर्माण हो सके ऐसी शिक्षा प्रणाली भारत देश के अंदर लागू करना चाहिए जो शिक्षा प्रणाली वर्तमान में भारत में गुलाम पैदा करने की मानसिकता है भूख की कमी है मोरल हॉस्पिटल उसकी कमी है और कोई जख्मी

aapka prashna hamare desh ke saman honhar aur astik vyaktiyon ka nirmaan ho sake aisi shiksha pranali bharat desh ke andar laagu karna chahiye jo shiksha pranali vartaman me bharat me gulam paida karne ki mansikta hai bhukh ki kami hai moral hospital uski kami hai aur koi jakhmi

आपका प्रश्न हमारे देश के समान होनहार और आस्तिक व्यक्तियों का निर्माण हो सके ऐसी शिक्षा प्

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Manish Bhargava

Trainer/ Mentor in Delhi education deptt.

2:14
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपस में है आज हमारे देश की शिक्षा प्रणाली सुधार करने की जरूरत नहीं है जी बिल्कुल वर्तमान में हमारे देश की शिक्षा प्रणाली में बदलाव की बहुत जरूरत है शिक्षा में जहां सरकार को बदलाव करना पड़ेगा कई चीजें ऐसी हैं जिनमें शिक्षा को नहीं देने पड़ेंगे सबसे पहले शुरुआत कर की बहुत कमी हमारे देश में इंफ्रास्ट्रक्चर टीचर का ना होना यह सबसे पहली बड़ी समस्या है इसको सरकार को दूर करना पड़ेगा उसके बाद माली जाति को दूर कर ही देते हैं तो दूसरी जो कमी है वह भी बहुत बड़ी है टीचर का 3 दिनों का मतलब नहीं है टीचर का वास्ता में ट्रेनिंग देना बच्चों को कैसे पढ़ाएं कैसे हर माहौल में हैंडल कर पाए टीचर बच्ची से कनेक्ट हो पाए टीचर कैसे इस बात को समझें कि सिर्फ इतना ही बच्चे को कंट्रोल करना नहीं होता और भी तरीके होते हैं इन सब चीज के लिए टीचर्स की ट्रेनिंग की जरूरत है इसके बाद एडमिनिस्ट्रेशन लेबल में बदलाव की जरूरत है पूरे सिस्टम में आए जो कल चलता है कि टीचर पढ़ा नहीं लाया तो उस को सस्पेंड कर दो इस कल्चर को बदलने की जरूरत है बजाय इसकी भी ध्यान रही थी जो पढ़ा है उसको मोटिवेट करें हम एप्लीकेशन कल चला फिर सिस्टम में ऐसी बहुत सारी चीजें हैं जिनको सिस्टम में लाने की जरूरत है हमारे पूरे देश में शिक्षा प्रणाली पर बाकी में विचार करने की जरूरत नहीं क्यों हम ऐसी शिक्षा प्रणाली किए हुए हैं देश में जिससे लोगों को कोई भला नहीं हो नहीं तो लोग जॉब के लायक हो पा रहे ना ही लोगों को मानसिक विकास हो रहा है ना ही लोग देश भक्त बन पा रहे हैं ऐसा मॉडल लेकर आना चाहिए सरकार को जिससे कि हर व्यक्ति एजुकेशन का मतलब अपने आप का विकास समझे कोई पड़े तो मतलब उसका डेवलपमेंट को हराया मैं वह सीखे इस दुनिया के इस दुनिया में इस विश्व में हर चुनौती के लिए तैयार कर पाया ऐसी एजुकेशन दिए जाने की याद जरूरत है इस पर पूरे देश को सभी को बैठकर बातचीत विचार मंथन करना चाहिए और कोई प्लान बनाना चाहिए

aapas me hai aaj hamare desh ki shiksha pranali sudhaar karne ki zarurat nahi hai ji bilkul vartaman me hamare desh ki shiksha pranali me badlav ki bahut zarurat hai shiksha me jaha sarkar ko badlav karna padega kai cheezen aisi hain jinmein shiksha ko nahi dene padenge sabse pehle shuruat kar ki bahut kami hamare desh me infrastructure teacher ka na hona yah sabse pehli badi samasya hai isko sarkar ko dur karna padega uske baad maali jati ko dur kar hi dete hain toh dusri jo kami hai vaah bhi bahut badi hai teacher ka 3 dino ka matlab nahi hai teacher ka vasta me training dena baccho ko kaise padhaaein kaise har maahaul me handle kar paye teacher bachi se connect ho paye teacher kaise is baat ko samajhe ki sirf itna hi bacche ko control karna nahi hota aur bhi tarike hote hain in sab cheez ke liye teachers ki training ki zarurat hai iske baad administration lebal me badlav ki zarurat hai poore system me aaye jo kal chalta hai ki teacher padha nahi laya toh us ko Suspend kar do is culture ko badalne ki zarurat hai bajay iski bhi dhyan rahi thi jo padha hai usko motivate kare hum application kal chala phir system me aisi bahut saari cheezen hain jinako system me lane ki zarurat hai hamare poore desh me shiksha pranali par baki me vichar karne ki zarurat nahi kyon hum aisi shiksha pranali kiye hue hain desh me jisse logo ko koi bhala nahi ho nahi toh log job ke layak ho paa rahe na hi logo ko mansik vikas ho raha hai na hi log desh bhakt ban paa rahe hain aisa model lekar aana chahiye sarkar ko jisse ki har vyakti education ka matlab apne aap ka vikas samjhe koi pade toh matlab uska development ko haraya main vaah sikhe is duniya ke is duniya me is vishwa me har chunauti ke liye taiyar kar paya aisi education diye jaane ki yaad zarurat hai is par poore desh ko sabhi ko baithkar batchit vichar manthan karna chahiye aur koi plan banana chahiye

आपस में है आज हमारे देश की शिक्षा प्रणाली सुधार करने की जरूरत नहीं है जी बिल्कुल वर्तमान म

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निश्चित रूप से हमारे शिक्षा प्रणाली का पुनर्मूल्यांकन होना चाहिए शीशा की पद्धति में मूल्यों और मौलिक शिक्षा का आवा हो गया है नेटवर्किंग ऑन के द्वारा शिक्षण प्रभावशाली नहीं रह पाता है एक शिक्षक द्वारा सीधे बाग में पढ़ाना और विषयों पर विश्लेषण एवं परस्पर जो समाधान समस्याओं पर विमर्श और आपसी वार्तालाप सर्वोत्तम शिक्षा प्रणाली हैं शिक्षा के पाठ्यक्रमों को भी उन्हें मूल्यांकन की आवश्यकता है कुछ साल पहले बनी सिलेबस और शिक्षा के मूलभूत पाठ्य पुस्तकों में परिवर्तन सबसे आवश्यक है इस सरकार से शिक्षा प्रणाली में सुधार होने से व्यक्तित्व का विकास होगा विद्यार्थी है सफल नागरिक बन पाएंगे धन्यवाद

nishchit roop se hamare shiksha pranali ka punarmoolyaankan hona chahiye shisha ki paddhatee me mulyon aur maulik shiksha ka ava ho gaya hai networking on ke dwara shikshan prabhavshali nahi reh pata hai ek shikshak dwara sidhe bagh me padhana aur vishyon par vishleshan evam paraspar jo samadhan samasyaon par vimarsh aur aapasi vartalaap sarvottam shiksha pranali hain shiksha ke paathyakramon ko bhi unhe mulyankan ki avashyakta hai kuch saal pehle bani syllabus aur shiksha ke mulbhut pathy pustakon me parivartan sabse aavashyak hai is sarkar se shiksha pranali me sudhaar hone se vyaktitva ka vikas hoga vidyarthi hai safal nagarik ban payenge dhanyavad

निश्चित रूप से हमारे शिक्षा प्रणाली का पुनर्मूल्यांकन होना चाहिए शीशा की पद्धति में मूल्यो

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लेकिन मेरे विचार अनुसार आज भी हमारे शिक्षा पद्धति को सुधारने की जरूरत है सुधारने की जरूरत सिर्फ इतना नहीं है कि हम उस में कंप्यूटर लगा दे या फिर हम बड़े-बड़े आओ उसमें डिवाइसों का प्रयोग करें और यह सुधार हो जाएगा नहीं मैं कहता हूं कि बच्चों के दिमाग को केचप करने का प्रयास किया जाए जहां पर शिक्षा है वहां पर टीचर्स को इस तरह से बच्चों को पढ़ाने की जरूरत है कि बच्चे खुद सोचने पर मजबूर हो जाए बल्कि आज मैं जो देख पा रहा हूं बहुत ऐसे शिक्षक को मैं किसी शिक्षक की आलोचना भी नहीं कर रहा हूं लेकिन हां यह सच भी है कि वह लोग किताबों के रटे हटाया ज्ञान को बच्चों के दिमाग में डालते हैं लेकिन मैं कहता हूं कि इस शिक्षा पद्धति को सही ढंग से हम नहीं बचता और यही कारण है कि शिक्षा पद्धति आज विदेशों की शिक्षा किसी से कहीं नीचे इसीलिए मैं कहता हूं कि बच्चों को अवसर दिया जाए उन्हें इस हिसाब से पढ़ा जाए कि बच्चे खुद सोचने पर मजबूर हो पाठ्यक्रमों को सही से सलेक्शन किया जाए सही से निर्धारण किया जाए चाहे वह आर्ट एंड सोशल साइंस एस ओ चाहे वह साइंस हो चाहे वह कांग्रेस हो चाहे अन्य हर किसी पर बच्चों के दिमाग को खींचने का प्रयास किया जाए उनके दिमाग ओं को ट्रेस करने का प्रयास किया जाए ताकि वह बच्चे अपनी जिंदगी के हर तथ्यों को समझे उन्हें समझें और उन्हें समझ कर के एक्शन लेने पर खुद तैयार एक तरह का शिक्षा बच्चों की जीवन का एक ट्रेनिंग है एक प्रशिक्षण है और इस प्रशिक्षण में बच्चों को प्रशिक्षित करने लायक बना दिया जाए तभी शिक्षा पर हम सफलता पा सकते हैं और वास्तव में अभी शिक्षा पर सुधार करने की जरूरत है

lekin mere vichar anusaar aaj bhi hamare shiksha paddhatee ko sudhaarne ki zarurat hai sudhaarne ki zarurat sirf itna nahi hai ki hum us me computer laga de ya phir hum bade bade aao usme divaison ka prayog kare aur yah sudhaar ho jaega nahi main kahata hoon ki baccho ke dimag ko ketchup karne ka prayas kiya jaaye jaha par shiksha hai wahan par teachers ko is tarah se baccho ko padhane ki zarurat hai ki bacche khud sochne par majboor ho jaaye balki aaj main jo dekh paa raha hoon bahut aise shikshak ko main kisi shikshak ki aalochana bhi nahi kar raha hoon lekin haan yah sach bhi hai ki vaah log kitabon ke ratte hataya gyaan ko baccho ke dimag me daalte hain lekin main kahata hoon ki is shiksha paddhatee ko sahi dhang se hum nahi bachta aur yahi karan hai ki shiksha paddhatee aaj videshon ki shiksha kisi se kahin niche isliye main kahata hoon ki baccho ko avsar diya jaaye unhe is hisab se padha jaaye ki bacche khud sochne par majboor ho paathyakramon ko sahi se selection kiya jaaye sahi se nirdharan kiya jaaye chahen vaah art and social science S O chahen vaah science ho chahen vaah congress ho chahen anya har kisi par baccho ke dimag ko kheenchne ka prayas kiya jaaye unke dimag on ko trays karne ka prayas kiya jaaye taki vaah bacche apni zindagi ke har tathyon ko samjhe unhe samajhe aur unhe samajh kar ke action lene par khud taiyar ek tarah ka shiksha baccho ki jeevan ka ek training hai ek prashikshan hai aur is prashikshan me baccho ko prashikshit karne layak bana diya jaaye tabhi shiksha par hum safalta paa sakte hain aur vaastav me abhi shiksha par sudhaar karne ki zarurat hai

लेकिन मेरे विचार अनुसार आज भी हमारे शिक्षा पद्धति को सुधारने की जरूरत है सुधारने की जरूरत

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Ajit Pandit

visual Artist आप ललित कला में कैरियर बनाना हैं तो संपर्क कर सकते हैं

0:41
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बिल्कुल जलवा तेरी यह शिक्षा प्रणाली को मतलब दुरुस्त करने के 30 35 साल तक पढ़ते रहते हैं पढ़ते रहते हैं और लास्ट में आपके हाथ में आता क्या बेरोजगारी और कुछ नहीं तू यह शिक्षा प्रणाली बिल्कुल चीनी होनी चाहिए अगर नहीं सुधरेगी इसमें बदलाव नहीं आएगा तब बेरोजगारों की स्थल बढ़ती जाएगी और ज्यादा बढ़ेगी और फिर और ज्यादा पड़ेगी और फिर देखिएगा जो यह भी सपोर्ट कर जाएगा कि रोजगार जनसंख्या विस्फोट तो हो ही रहा है रोजगारी विस्फोट हो जाएगी लोगों खाना नहीं मिलेगा तो सुधार की बहुत आवश्यकता है टेक्निकल एजुकेशन होनी चाहिए जो रोजगार दे

bilkul jalwa teri yah shiksha pranali ko matlab durast karne ke 30 35 saal tak padhte rehte hain padhte rehte hain aur last me aapke hath me aata kya berojgari aur kuch nahi tu yah shiksha pranali bilkul chini honi chahiye agar nahi sudharegi isme badlav nahi aayega tab berozgaron ki sthal badhti jayegi aur zyada badhegi aur phir aur zyada padegi aur phir dekhiega jo yah bhi support kar jaega ki rojgar jansankhya visphot toh ho hi raha hai rojgari visphot ho jayegi logo khana nahi milega toh sudhaar ki bahut avashyakta hai technical education honi chahiye jo rojgar de

बिल्कुल जलवा तेरी यह शिक्षा प्रणाली को मतलब दुरुस्त करने के 30 35 साल तक पढ़ते रहते हैं पढ

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Dr J B Tiwari

Chairman and Managing Director

0:44
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मैडम जेपी तिवारी आपको प्रणाम करता हूं और आप का सवाल है कि क्या देश की शिक्षा प्राणी को सुधार करने की आवश्यकता नहीं है बिल्कुल है आज हम जो जॉब ओरिएंटेड + राज कैसा होना चाहिए नहीं है हमको कुछ बढ़ाते हैं जिसका रिक्वायरमेंट नहीं है हम उस आदमी कोचिंग पढ़ाते हैं जो पढ़ना नहीं चाहता है तो सिलेक्शन ऑफ फील्ड ऑफ इंपॉर्टेंट पढ़ना चाहता लड़का उसको माताजी डॉक्टर इंजीनियर बनना होता है उसका सिंगर बनना होता है ऐसा होने जा रहा है कि वही पढ़ाएंगे जो जरूरत होगी जो जरूरत होगी उसी तरह से

madam jp tiwari aapko pranam karta hoon aur aap ka sawaal hai ki kya desh ki shiksha prani ko sudhaar karne ki avashyakta nahi hai bilkul hai aaj hum jo job oriented raj kaisa hona chahiye nahi hai hamko kuch badhate hain jiska requirement nahi hai hum us aadmi coaching padhate hain jo padhna nahi chahta hai toh selection of field of important padhna chahta ladka usko mataji doctor engineer banna hota hai uska singer banna hota hai aisa hone ja raha hai ki wahi padhaenge jo zarurat hogi jo zarurat hogi usi tarah se

मैडम जेपी तिवारी आपको प्रणाम करता हूं और आप का सवाल है कि क्या देश की शिक्षा प्राणी को सुध

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Dr. Ashwani Kumar Singh

Chairman & Director at VEMS

4:00
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नमस्कार कल के मित्रों आपको सुमित कुमार सिंह का नमस्कार क्या हमारे शिक्षा में सुधार नहीं परिवर्तन बदलाव की जरूरत बहुत बार बात करते हैं कि हमारी शिक्षा बहुत अच्छी थी निश्चित रूप से बहुत अच्छी थी लेकिन इस देश पर बाहर से आया क्रांतिकारियों ने अपने शिक्षक को ध्वस्त किया अब पुरानी बातों की व्यवस्था थी शासकों के अनुरूप केवल उनको चलाने के लिए जो सहयोग के लिए उसके हिसाब से शिक्षा प्रणाली में डिवेलप किया था कि लोग यहां के अच्छी संस्कृति अच्छे पड़ा व्यवस्थाओं को भूल जाए जिससे उनके अनुकूल हो चल सके और प्रतिकार दो चीज है की सूची जाते हैं उसका वर्तमान में एप्लीकेशन अप्लाई आप उन चीजों को ज्यादा पढ़ाते हैं जिसके परिवर्तन से जिसको जानकर भी हम उसका कोई इस वक्त नहीं कर सकते तो जब वर्तमान में किसी चीज का नहीं होगा तो उसका भविष्य भी नहीं बदलेगा एक कारक तो अब मुझे तो लगता है दूसरा कि जब तक जिस भी दे अनुसंधान रिचार्ज शोध नहीं होते बड़े पैमाने मिश्रा कौन है योग्यता महाभियोग व्यवस्था उपलब्ध कराएं तो हमारे देश के परिवेश में परिवर्तन की आसमानी के यहां पर बहुत बेहतर पढ़ाई-लिखाई करके जो नौजवान तैयार होते हैं उनके अनुरूप व्यवस्था आते हैं रोजगार नहीं दे पाते पाते तो क्या होता है उनको कोई दूसरे देश के लोग एक अच्छे ऑफर लेकर अपने या लेकर चले जाते तो संसाधन आपका लगा देश के टैक्स का पैसा उस पर खर्च हुआ और वह चला गया दूसरे दूसरे कंट्री में वहां की व्यवस्था को सुधारने आगे बढ़ाने अमेरिका में जो सबसे बड़े डॉक्टर का ग्रुप है वह आप सोच कर देखिए कि अभी यहां पर डॉक्टरों की हनुमानता 10 लाख से ऊपर की जरूरत और यहां के लोग बाहर जाकर के साथ ऐसा कर रहे हैं वहां की से बात कर रहे हैं वहां के लोगों को व्यवस्था दे रहे हैं लेकिन अपने देश में नहीं तो हम उनके लिए व्यवस्था नहीं सोच पाए उनके लिए कोई तरीका नहीं निकाल पाए तो हमारी देश की व्यवस्था में दो बहुत आवश्यक रूप से सामाजिक सांस्कृतिक रूप से और तकनीकी रूप से वर्तमान को बेहतर बनाने में योगदान दे सकें वह शिक्षा आवश्यक है और बाकी सब बकवास शुक्रिया शुभकामनाएं

namaskar kal ke mitron aapko sumit kumar Singh ka namaskar kya hamare shiksha me sudhaar nahi parivartan badlav ki zarurat bahut baar baat karte hain ki hamari shiksha bahut achi thi nishchit roop se bahut achi thi lekin is desh par bahar se aaya krantikariyon ne apne shikshak ko dhwast kiya ab purani baaton ki vyavastha thi shaasakon ke anurup keval unko chalane ke liye jo sahyog ke liye uske hisab se shiksha pranali me develop kiya tha ki log yahan ke achi sanskriti acche pada vyavasthaon ko bhool jaaye jisse unke anukul ho chal sake aur pratikar do cheez hai ki suchi jaate hain uska vartaman me application apply aap un chijon ko zyada padhate hain jiske parivartan se jisko jaankar bhi hum uska koi is waqt nahi kar sakte toh jab vartaman me kisi cheez ka nahi hoga toh uska bhavishya bhi nahi badlega ek kaarak toh ab mujhe toh lagta hai doosra ki jab tak jis bhi de anusandhan recharge shodh nahi hote bade paimane mishra kaun hai yogyata mahabhiyog vyavastha uplabdh karaye toh hamare desh ke parivesh me parivartan ki asamani ke yahan par bahut behtar padhai likhai karke jo naujawan taiyar hote hain unke anurup vyavastha aate hain rojgar nahi de paate paate toh kya hota hai unko koi dusre desh ke log ek acche offer lekar apne ya lekar chale jaate toh sansadhan aapka laga desh ke tax ka paisa us par kharch hua aur vaah chala gaya dusre dusre country me wahan ki vyavastha ko sudhaarne aage badhane america me jo sabse bade doctor ka group hai vaah aap soch kar dekhiye ki abhi yahan par doctoron ki hanumanta 10 lakh se upar ki zarurat aur yahan ke log bahar jaakar ke saath aisa kar rahe hain wahan ki se baat kar rahe hain wahan ke logo ko vyavastha de rahe hain lekin apne desh me nahi toh hum unke liye vyavastha nahi soch paye unke liye koi tarika nahi nikaal paye toh hamari desh ki vyavastha me do bahut aavashyak roop se samajik sanskritik roop se aur takniki roop se vartaman ko behtar banane me yogdan de sake vaah shiksha aavashyak hai aur baki sab bakwas shukriya subhkamnaayain

नमस्कार कल के मित्रों आपको सुमित कुमार सिंह का नमस्कार क्या हमारे शिक्षा में सुधार नहीं पर

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Rajesh Kumar Saxena

Assistant Professor

0:51
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हां हमारी शिक्षा प्रणाली में थोड़ा सुधार करने की जरूरत है जो हम लोग शिक्षक कोई भी किताब का लेसन पढ़ते हैं तो उस क्वेश्चंस उस किताब के अंदर टीचर स्वयं अपनी तरफ से कुछ सामान आए प्रश्नों को बनाए और उसका उत्तर बच्चे से देने के लिए बच्चे से पूरा पाठ हलवाई तब उसके आंसर वह निकाल पाएगा उसके उत्तर दे पाएगा यदि इस तरीके की प्रणाली लागू की जाए तब शिक्षा बहुत अच्छी तरीके से लागू हो सकती है और बच्चे को बहुत अच्छी तरीके से सारे दिशा निर्देश और जो भी पार्टी के पाठ सामग्री

haan hamari shiksha pranali me thoda sudhaar karne ki zarurat hai jo hum log shikshak koi bhi kitab ka Lesson padhte hain toh us questions us kitab ke andar teacher swayam apni taraf se kuch saamaan aaye prashnon ko banaye aur uska uttar bacche se dene ke liye bacche se pura path halwai tab uske answer vaah nikaal payega uske uttar de payega yadi is tarike ki pranali laagu ki jaaye tab shiksha bahut achi tarike se laagu ho sakti hai aur bacche ko bahut achi tarike se saare disha nirdesh aur jo bhi party ke path samagri

हां हमारी शिक्षा प्रणाली में थोड़ा सुधार करने की जरूरत है जो हम लोग शिक्षक कोई भी किताब का

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DR. I.P.SINGH

Doctorate in Literature

2:12
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आपका प्रश्न है कि क्या आज हमारे देश की शिक्षा प्रणाली को सुधारने की जरूरत नहीं है बेटा परिष्कार अपरिवर्तनीय परिवर्धन जिंदगी सत्य है शिक्षा प्रणाली अंग्रेजो के द्वारा हमने ली थी और उस समय हमारी समझ में कुछ नहीं है हमने उसको चलाया गुरुकुल प्रणाली आज विश्व का सबसे बड़ा संगठन जो भी स्काउटिंग है स्काउट एंड गाइड उसको देखिए तो भारतीय गुरुकुल प्रणाली से आज भी चल रही है हम झोपड़ियों में रहते तो उनके पास ग्रास कोर्ट ने दोनों ने टेंट बना डाला हमारे पूर्वज जंगलों में रहकर के काम करते थे अभी जंगलों में रह रहे हैं रात में आग जला कर के हम पशुओं से बचने की कोशिश करते थे और जागने के लिए आनंद का उत्सव मनाया करते थे हमारे देश में ही आग जलाकर नाचने गाने की परंपरा जैनियों ने हमें दिए जो आज स्काउटिंग में है लेकिन हम एक ही शिक्षा प्रणाली से चिपके हुए हैं लेकिन यह ध्यान रखिए कि इस शिक्षा प्रणाली का उपयोग तो है वह है मानसिक दक्षता को हमेशा बनाए रखना आप किसी चीज को रखते हैं ऐसे में हिंदी का प्राध्यापकों सूरदास तुलसीदास सूरदास तुलसीदास किशोर तुलसीपुर रखते हुए हमने अपने मानसिक दक्षता को अपनी स्मृतियों को तेज बनाया है निर्णय लेने की क्षमता को तेज बनाएं यह शिक्षा का उद्देश्य है टीचर और दूसरा उद्देश्य है कि आप किसी क्षेत्र विशेष में जाना चाहते तो क्षेत्र विशेष की जानकारी प्राप्त करिए लेकिन अब समय की तेजी के साथ हो 3 घंटे के एग्जाम दो 2 महीने चलने वाले एग्जाम यह बातें बदलनी चाहिए अब हमारे पास इतने इलेक्ट्रॉनिक माध्यम है एग्जाम और पढ़ाई की इस प्रक्रिया पर एक बार सरकार को आपके विचार करना चाहिए लेकिन मित्र दुर्भाग्य ही है कि हां जब कोई कमेटी बन जाती है तो विदेशों में जितने दिन में कमेटी में निर्णय या तो कितने दिन में तारे हैं कमेटी बन पाती है

aapka prashna hai ki kya aaj hamare desh ki shiksha pranali ko sudhaarne ki zarurat nahi hai beta parishkar aparivartaniya parivardhan zindagi satya hai shiksha pranali angrejo ke dwara humne li thi aur us samay hamari samajh me kuch nahi hai humne usko chalaya gurukul pranali aaj vishwa ka sabse bada sangathan jo bhi scouting hai scout and guide usko dekhiye toh bharatiya gurukul pranali se aaj bhi chal rahi hai hum jhopadiyon me rehte toh unke paas grass court ne dono ne tent bana dala hamare purvaj jungalon me rahkar ke kaam karte the abhi jungalon me reh rahe hain raat me aag jala kar ke hum pashuo se bachne ki koshish karte the aur jagne ke liye anand ka utsav manaya karte the hamare desh me hi aag jalakar nachane gaane ki parampara jainiyon ne hamein diye jo aaj scouting me hai lekin hum ek hi shiksha pranali se chipake hue hain lekin yah dhyan rakhiye ki is shiksha pranali ka upyog toh hai vaah hai mansik dakshata ko hamesha banaye rakhna aap kisi cheez ko rakhte hain aise me hindi ka pradhyapakon surdas tulsidas surdas tulsidas kishore tulsipur rakhte hue humne apne mansik dakshata ko apni smritiyon ko tez banaya hai nirnay lene ki kshamta ko tez banaye yah shiksha ka uddeshya hai teacher aur doosra uddeshya hai ki aap kisi kshetra vishesh me jana chahte toh kshetra vishesh ki jaankari prapt kariye lekin ab samay ki teji ke saath ho 3 ghante ke exam do 2 mahine chalne waale exam yah batein badalni chahiye ab hamare paas itne electronic madhyam hai exam aur padhai ki is prakriya par ek baar sarkar ko aapke vichar karna chahiye lekin mitra durbhagya hi hai ki haan jab koi committee ban jaati hai toh videshon me jitne din me committee me nirnay ya toh kitne din me taare hain committee ban pati hai

आपका प्रश्न है कि क्या आज हमारे देश की शिक्षा प्रणाली को सुधारने की जरूरत नहीं है बेटा परि

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देखिए शिक्षा प्रणाली को सुधारने की जरूरत है आपने प्रश्न गलत कर दिया है शिक्षा प्रणाली को ही सुधारने की जरूरत है देखिए हम लोग के हाथ दो पैर दो चीज की सुधार भी बहुत जरूरी है पहला तो शिक्षा और दूसरा जो है स्वास्थ्य इस समय लॉक डाउन में आपने देखा यह करो ना कोई वजह से हमारे यहां स्वास्थ्य की लचर व्यवस्था है कहीं वेट नहीं है कहीं वेंटीलेटर नहीं है इसलिए जो है शिक्षा और स्वास्थ्य पर हमारे देश को काम करना चाहिए अगर शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों मजबूत हो जाए तो हम लोग भी शक्तिशाली देशों में शामिल हो सकता है

dekhiye shiksha pranali ko sudhaarne ki zarurat hai aapne prashna galat kar diya hai shiksha pranali ko hi sudhaarne ki zarurat hai dekhiye hum log ke hath do pair do cheez ki sudhaar bhi bahut zaroori hai pehla toh shiksha aur doosra jo hai swasthya is samay lock down me aapne dekha yah karo na koi wajah se hamare yahan swasthya ki lachar vyavastha hai kahin wait nahi hai kahin ventilator nahi hai isliye jo hai shiksha aur swasthya par hamare desh ko kaam karna chahiye agar shiksha aur swasthya dono majboot ho jaaye toh hum log bhi shaktishali deshon me shaamil ho sakta hai

देखिए शिक्षा प्रणाली को सुधारने की जरूरत है आपने प्रश्न गलत कर दिया है शिक्षा प्रणाली को ह

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Sapna

Social Worker

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न है क्या आज हमारे देश की शिक्षा प्रणाली को सुधारने की जरूरत नहीं है मैं आपको बताना चाहूंगी कि आज हमारे देश की शिक्षा प्रणाली को सुधारने की बहुत जरूरत है बहुत अच्छा से भरण-पोषण करने के लिए हमारे लिए शिक्षा प्राप्त की जा रही है जो सोता है हमें ज्ञान मिले और ज्ञान के साथ सही ध्यान हो और हमारे पास संस्कार हमारे पास प्रेम हो भाईचारा के अंदर नहीं है बस हमें शिक्षा प्रणाली को इसी स्तर पर सुधार करना है आज के वर्तमान इच्छा है उस दिशा में जो जरूरी होते हैं उनको मिला में संस्कार भी होना चाहिए था केवल उदर पूर्ति के लिए नहीं होना चाहिए शिक्षा में ऐसा ज्ञान होना चाहिए संस्कार होना चाहिए होना चाहिए इतना के अंदर यही सब होना चाहिए इन्हीं इन्हीं तथ्यों को बिठा में शामिल करना क्या सभी रिक्शा रिक्शा चलाई जिसमें सही ज्ञान मिल पाए इंसान को सभी इंसान सही शिक्षा प्राप्ति का जो अक्सर होता है वह से मिल पाएगा इसलिए बीमार होना चाहिए ऐसी हो जिसमें हमारा भी हो और सब का विद्रोह और विकास को समाज का हित और विकास समुदाय का विकास हो और हमारे संपूर्ण देश का हित और विकास हो ऐसा होना चाहिए और जिसकी शुरुआत हमारे घर पर हो यदि हम शिक्षा प्राप्त करके अपने माता पिता के संस्कार हैं संस्कार होते हैं माता-पिता भी होता है उनका पालन नहीं करते पत्नी के प्रति समाज समुदाय देश के लिए जो कर सकता है उसका पालन नहीं करते तो फिर हम सबको साथ लेकर चलें और विकास को ऐसी शिक्षा होती है बेकार होती है और जरूरत होती है इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपने शब्दों को विराम देने जा रही हूं सपना शर्मा आपका दिन शुभ हो धन्यवाद

aapka prashna hai kya aaj hamare desh ki shiksha pranali ko sudhaarne ki zarurat nahi hai main aapko batana chahungi ki aaj hamare desh ki shiksha pranali ko sudhaarne ki bahut zarurat hai bahut accha se bharan poshan karne ke liye hamare liye shiksha prapt ki ja rahi hai jo sota hai hamein gyaan mile aur gyaan ke saath sahi dhyan ho aur hamare paas sanskar hamare paas prem ho bhaichara ke andar nahi hai bus hamein shiksha pranali ko isi sthar par sudhaar karna hai aaj ke vartaman iccha hai us disha me jo zaroori hote hain unko mila me sanskar bhi hona chahiye tha keval udar purti ke liye nahi hona chahiye shiksha me aisa gyaan hona chahiye sanskar hona chahiye hona chahiye itna ke andar yahi sab hona chahiye inhin inhin tathyon ko bitha me shaamil karna kya sabhi riksha riksha chalai jisme sahi gyaan mil paye insaan ko sabhi insaan sahi shiksha prapti ka jo aksar hota hai vaah se mil payega isliye bimar hona chahiye aisi ho jisme hamara bhi ho aur sab ka vidroh aur vikas ko samaj ka hit aur vikas samuday ka vikas ho aur hamare sampurna desh ka hit aur vikas ho aisa hona chahiye aur jiski shuruat hamare ghar par ho yadi hum shiksha prapt karke apne mata pita ke sanskar hain sanskar hote hain mata pita bhi hota hai unka palan nahi karte patni ke prati samaj samuday desh ke liye jo kar sakta hai uska palan nahi karte toh phir hum sabko saath lekar chalen aur vikas ko aisi shiksha hoti hai bekar hoti hai aur zarurat hoti hai inhin shabdon ke saath main apne shabdon ko viraam dene ja rahi hoon sapna sharma aapka din shubha ho dhanyavad

आपका प्रश्न है क्या आज हमारे देश की शिक्षा प्रणाली को सुधारने की जरूरत नहीं है मैं आपको बत

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Pradeep Solanki

Corporate Yoga Consultant

0:42
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हमारे देश की शिक्षा प्रणाली को सुधारने की जरूरत है बिल्कुल जरूरत है समान शिक्षा कोई पब्लिक स्कूल प्राइवेट स्कूल में कुछ नहीं होना चाहिए सबके लिए शिक्षा जो है वह समान होनी चाहिए या प्राइवेट स्कूल बनाएंगे सर सरकारी स्कूलों जो भी है लेकिन एक जैसी स्टडी एक जैसी पढ़ाई सबके लिए एक जैसा अवसर वह सबसे पहले जरूरी है कि कंट्रोल में एक ही टाइप के स्कूल होने की ताकि सबको समान शिक्षा और समान अधिकार मिले

hamare desh ki shiksha pranali ko sudhaarne ki zarurat hai bilkul zarurat hai saman shiksha koi public school private school me kuch nahi hona chahiye sabke liye shiksha jo hai vaah saman honi chahiye ya private school banayenge sir sarkari schoolon jo bhi hai lekin ek jaisi study ek jaisi padhai sabke liye ek jaisa avsar vaah sabse pehle zaroori hai ki control me ek hi type ke school hone ki taki sabko saman shiksha aur saman adhikaar mile

हमारे देश की शिक्षा प्रणाली को सुधारने की जरूरत है बिल्कुल जरूरत है समान शिक्षा कोई पब्लिक

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

1:36
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अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली को सुधार करने की जरूरत नहीं है बिल्कुल हमारे देश को शिक्षा प्रणाली को सुधार करने की आरजू शिक्षा प्रणाली को पर्याप्त नहीं है वह 29 लायक नहीं है वह जनजीवन देने लायक नहीं है तो केवल किताबी ज्ञान है और किताबी ज्ञान पेंशन का निखार नहीं होता है क्लिप बिहारी ज्ञान उपयोगी ज्ञान और इंसान के विकास के लिए ज्ञान का ज्ञान का विस्तार होना जरूरी है जो आज इस शिक्षा से संभव नहीं है अगर हम चाहते हैं हमारे देश में एक शिक्षा का चूड़ी चमके कहानी इस शिक्षा को बदलना होगा और पूरे देशवासियों को हमारे सिद्धांत को कष्ट आज टीना का किस सिद्धांत को लेकर हम प्रयासरत हैं चिंतन कहते हैं रात-दिन प्रयास कर रहे हैं उचित को एक अमूल्य ज्ञान देना ट्रैक्टर उम्मीद है हमारी शिक्षा जो है निश्चित रूप से इस देश में क्रांति लाई और स्ट्रीट को 1 सप्ताह तक की खाड़ी देश बनाएगी बच्चे हुए थे हमारे विद्यार्थियों की हमारी युवाओं की और उनके संरक्षक ओं की अष्टम देशवासियों की जो हमारे विचारों को समर्थन करें

angrezi shiksha pranali ko sudhaar karne ki zarurat nahi hai bilkul hamare desh ko shiksha pranali ko sudhaar karne ki aaraju shiksha pranali ko paryapt nahi hai vaah 29 layak nahi hai vaah janjivan dene layak nahi hai toh keval kitabi gyaan hai aur kitabi gyaan pension ka nikhaar nahi hota hai clip bihari gyaan upyogi gyaan aur insaan ke vikas ke liye gyaan ka gyaan ka vistaar hona zaroori hai jo aaj is shiksha se sambhav nahi hai agar hum chahte hain hamare desh me ek shiksha ka chudi chamke kahani is shiksha ko badalna hoga aur poore deshvasiyon ko hamare siddhant ko kasht aaj tina ka kis siddhant ko lekar hum prayasarat hain chintan kehte hain raat din prayas kar rahe hain uchit ko ek amuly gyaan dena tractor ummid hai hamari shiksha jo hai nishchit roop se is desh me kranti lai aur street ko 1 saptah tak ki khadi desh banayegi bacche hue the hamare vidyarthiyon ki hamari yuvaon ki aur unke sanrakshak on ki ashtam deshvasiyon ki jo hamare vicharon ko samarthan kare

अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली को सुधार करने की जरूरत नहीं है बिल्कुल हमारे देश को शिक्षा प्रणाली

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Umesh kumar

Lecturer & Brain Guru ,Finger Prints Consultant

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार आपका कृष्ण क्या आज हमारे देश की शिक्षा प्रणाली को सुधार करने की जरूरत नहीं बिल्कुल हमारी शिक्षा प्रणाली जैसा मैंने पहले वीडियो में बताया कि यह अंग्रेजो के समय ही सपना ने चली आ रही है हमारी शिक्षा प्रणाली में हमें आवाम हुई चोर परिवर्तन करने की आवश्यकता है अगर हमने इसमें परिवर्तन नहीं करते हैं तो किस प्रकार बेरोजगारों की भीड़ बढ़ती जा रही है तो यह संख्या और बढ़ते जाएंगे और बेरोजगारों की फौज खड़ी हो सकती है इसलिए मेरा मानना है कि शिक्षा को रोजगार परक बनाया जाना चाहिए तथा उसमें आवश्यक परिवर्तन किए जाने चाहिए अंग्रेजों द्वारा जो शिक्षा शुरू की गई थी वह उनके हित आरती हमारे दांत नहीं थी इसलिए इसमें परिवर्तन की नितांत आवश्यकता है ऐसा मेरा मानना है धन्यवाद

namaskar aapka krishna kya aaj hamare desh ki shiksha pranali ko sudhaar karne ki zarurat nahi bilkul hamari shiksha pranali jaisa maine pehle video me bataya ki yah angrejo ke samay hi sapna ne chali aa rahi hai hamari shiksha pranali me hamein avam hui chor parivartan karne ki avashyakta hai agar humne isme parivartan nahi karte hain toh kis prakar berozgaron ki bheed badhti ja rahi hai toh yah sankhya aur badhte jaenge aur berozgaron ki fauj khadi ho sakti hai isliye mera manana hai ki shiksha ko rojgar parak banaya jana chahiye tatha usme aavashyak parivartan kiye jaane chahiye angrejo dwara jo shiksha shuru ki gayi thi vaah unke hit aarti hamare dant nahi thi isliye isme parivartan ki nitant avashyakta hai aisa mera manana hai dhanyavad

नमस्कार आपका कृष्ण क्या आज हमारे देश की शिक्षा प्रणाली को सुधार करने की जरूरत नहीं बिल्कुल

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Aniel K Kumar Imprints

NLP Master Life Coach, Motivational Speaker

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नमस्कार आपका सवाल है क्या आज से हमारे देश की शिक्षा प्रणाली को सुधार करने की जरूरत है या नहीं देखी दोस्त मेरा स्पा इंटरव्यू में शुरू से ही अलग है विचार रहा है मैं पूरी तरह सहमत हूं कि आज की शिक्षा प्रणाली में काफी सुधार करने की जरूरत है क्योंकि जब यह प्रणाली इंडिया में लागू की गई तब इसका हीरोज एक्टिव अलग था उसमें सिर्फ एजुकेशन एजुकेशन इसलिए दी जा रही है क्या आपको एक नौकर क्रिएट करना है आपको यहां पर एम्पलाईमेंट के लिए जो अंग्रेजों को चाहिए थे तो उन्होंने इसके लिए ही इस एजुकेशन सिस्टम को तैयार किया था जबकि एजुकेशन का मतलब यह नहीं कि सिर्फ आप पढ़ो नौकरी ढूंढो यहां पर इंडिया में आज अगर पेरेंट्स भी यह कहते हैं तो आपको यही कहते मिलेंगे अच्छे से पढ़ ले नहीं तो नौकरी नहीं मिले तो आज के जो लोगों की और अजमेर में प्रणाली का दोनों का ऑब्जेक्टिव है कि है कि आपको पढ़कर की कच्छा नौकर बनना है जबकि एजुकेशन सिस्टम का जो उद्देश्य है वह मेरे बेड पर भी यह है कि पुराने एक्सपीरियंस को पढ़कर समझ कर अपने दिमाग में उपजे हुए सवालों के खुद से जवाब निकाल पाना ही एजुकेशन है देखिए जो भी चीजें आपके पास हुई आज ग्रेविटी की फोर्स आफ ग्रेविटी का अपना रिसर्च किया हुआ है फोर्स का अपना रिसर्च किया हुआ है इसको पढ़ने के बाद में जो हमारे दिमाग में जो सवाल आता है वह सवाल हमारा होना चाहिए जबकि आज रिजर्वेशन सिस्टम सिर्फ और सिर्फ क्वेश्चन दे करके उनके आंसर आठवां रहा है तुम का कहीं कोई वजूद नहीं है देखी अगर नौटंकी बात करें न्यूटन लॉ ऑफ ग्रेविटी दिया तो कब दिया कि उसके दिमाग में सवाल उठ जा ऊपर से नीचे क्यों आता है तब उसने उसको ढूंढना शुरू किया और जब उसने उसी चीज को समझना शुरू किया जब ढूंढना शुरू किया तो हमारे पास 19 अगर वह भी उसी तरह से उठा कर के खा कर चल देता है से ऊपर से गिरता हुआ से उठाया उसने उस आगे चल देता तो क्या आज होता उसके पास इसलिए उसने एक उसके दिमाग में सवाल कैसे हुआ क्यों नीचे ऊपर क्यों नहीं गया उसके दिमाग में जवाब सवाल आया उसने जवाब अपने अंदर से ढूंढा अपने आप से तूने अपने दिमाग से पूछा तो क्रेडिट स्कोर एनालाइज कर बायोम एजुकेशन यही है कि आप पास के एक्सपीरियंस को पढ़कर अपने दिमाग में उसे विश वालों की जवाब आप अपने दिमाग से पूछे निकाले और जब आप उसको निकालेंगे इस समाज में सोसाइटी और यूनिवर्स भी मानेगा यदि आप सोच सिद्ध कर पाते हैं तो सिद्ध कर पाना ही एजुकेशन किसी भी बात पर विश्वास नहीं है तो आप सिर्फ और सिर्फ फॉलोवर बन सकते हैं यूजर मिल सकते हैं क्रिएटर नहीं क्रिकेटर बनने के लिए आपको सवाल पैदा करने हुए उनके साथ जवाब ढूंढने में जितने भी नए इनोवेशन किया है उसके पास उसके दिमाग में एक सवाल आ गई ऐसा कैसे हो सकता है क्यों नहीं हो सकता जब उसने चीज किया तो आपके पास जवाब जो भी चीजें हैं वह बन पाई जय हिंद जय भारत आपका दिन शुभ रहे

namaskar aapka sawaal hai kya aaj se hamare desh ki shiksha pranali ko sudhaar karne ki zarurat hai ya nahi dekhi dost mera spa interview me shuru se hi alag hai vichar raha hai main puri tarah sahmat hoon ki aaj ki shiksha pranali me kaafi sudhaar karne ki zarurat hai kyonki jab yah pranali india me laagu ki gayi tab iska hiroj active alag tha usme sirf education education isliye di ja rahi hai kya aapko ek naukar create karna hai aapko yahan par empalaiment ke liye jo angrejo ko chahiye the toh unhone iske liye hi is education system ko taiyar kiya tha jabki education ka matlab yah nahi ki sirf aap padho naukri dhundho yahan par india me aaj agar parents bhi yah kehte hain toh aapko yahi kehte milenge acche se padh le nahi toh naukri nahi mile toh aaj ke jo logo ki aur ajmer me pranali ka dono ka objective hai ki hai ki aapko padhakar ki kaccha naukar banna hai jabki education system ka jo uddeshya hai vaah mere bed par bhi yah hai ki purane experience ko padhakar samajh kar apne dimag me upaje hue sawalon ke khud se jawab nikaal paana hi education hai dekhiye jo bhi cheezen aapke paas hui aaj gravity ki force of gravity ka apna research kiya hua hai force ka apna research kiya hua hai isko padhne ke baad me jo hamare dimag me jo sawaal aata hai vaah sawaal hamara hona chahiye jabki aaj reservation system sirf aur sirf question de karke unke answer aathwan raha hai tum ka kahin koi wajood nahi hai dekhi agar nautanki baat kare newton law of gravity diya toh kab diya ki uske dimag me sawaal uth ja upar se niche kyon aata hai tab usne usko dhundhana shuru kiya aur jab usne usi cheez ko samajhna shuru kiya jab dhundhana shuru kiya toh hamare paas 19 agar vaah bhi usi tarah se utha kar ke kha kar chal deta hai se upar se girta hua se uthaya usne us aage chal deta toh kya aaj hota uske paas isliye usne ek uske dimag me sawaal kaise hua kyon niche upar kyon nahi gaya uske dimag me jawab sawaal aaya usne jawab apne andar se dhundha apne aap se tune apne dimag se poocha toh credit score analyse kar bayom education yahi hai ki aap paas ke experience ko padhakar apne dimag me use wish walon ki jawab aap apne dimag se pooche nikale aur jab aap usko nikalenge is samaj me society aur Universe bhi manega yadi aap soch siddh kar paate hain toh siddh kar paana hi education kisi bhi baat par vishwas nahi hai toh aap sirf aur sirf Follower ban sakte hain user mil sakte hain creator nahi cricketer banne ke liye aapko sawaal paida karne hue unke saath jawab dhundhne me jitne bhi naye innovation kiya hai uske paas uske dimag me ek sawaal aa gayi aisa kaise ho sakta hai kyon nahi ho sakta jab usne cheez kiya toh aapke paas jawab jo bhi cheezen hain vaah ban payi jai hind jai bharat aapka din shubha rahe

नमस्कार आपका सवाल है क्या आज से हमारे देश की शिक्षा प्रणाली को सुधार करने की जरूरत है या न

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Dr. Mahesh Mohan Jha

Asst. Professor,Astrologer,Author

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आज की शिक्षा प्रणाली खासकर विद्यार्थी को प्रतियोगी बना दिया और प्रतियोगिता में वह अगर पीछे रह जाता है तो हीन भावना से ग्रसित हो जाता है जो कि शिक्षा का उद्देश्य होता है नैतिक शिक्षा का विकास और आज हमारी शिक्षा प्रणाली में नैतिक शिक्षा का योगदान नहीं होने के कारण लोग पिता को मात्र पैसा कमाने का जरिया बना दिया जो गलत जब तक छात्रों में नैतिक विकास में ही होगा अध्यात्मिक विकास में ही होगा तब तक समाज में समरसता संभव नहीं है और एक दूसरे से प्रेम संभव नहीं है इसलिए इस शिक्षा प्रणाली को धीरे-धीरे सुधार करके नैतिक शिक्षा आध्यात्मिक शिक्षा जो हमारे भारत में प्राचीनतम शिक्षा पद्धति था उसको फिर से लागू करने की आवश्यकता है

aaj ki shiksha pranali khaskar vidyarthi ko pratiyogi bana diya aur pratiyogita me vaah agar peeche reh jata hai toh heen bhavna se grasit ho jata hai jo ki shiksha ka uddeshya hota hai naitik shiksha ka vikas aur aaj hamari shiksha pranali me naitik shiksha ka yogdan nahi hone ke karan log pita ko matra paisa kamane ka zariya bana diya jo galat jab tak chhatro me naitik vikas me hi hoga adhyatmik vikas me hi hoga tab tak samaj me samarsata sambhav nahi hai aur ek dusre se prem sambhav nahi hai isliye is shiksha pranali ko dhire dhire sudhaar karke naitik shiksha aadhyatmik shiksha jo hamare bharat me prachintam shiksha paddhatee tha usko phir se laagu karne ki avashyakta hai

आज की शिक्षा प्रणाली खासकर विद्यार्थी को प्रतियोगी बना दिया और प्रतियोगिता में वह अगर पी

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Pawan Rajput

Educator

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आज मर देश की शिक्षा प्रणाली को सुधार करने की बहुत जरूरत है जरूर नहीं है जो पहले था वह आज होगा समय के साथ हर चीज परिवर्तनशील होती है भगवान बुद्ध ने कहा है हर चीज को मत मानो मन में जो अंतरात्मा एक बात करती है वह बात को लोग ऐसे नहीं जो पुराने जमाने में कह दिया है वह चीज फोरम नहीं करें

aaj mar desh ki shiksha pranali ko sudhaar karne ki bahut zarurat hai zaroor nahi hai jo pehle tha vaah aaj hoga samay ke saath har cheez parivartanshil hoti hai bhagwan buddha ne kaha hai har cheez ko mat maano man me jo antaraatma ek baat karti hai vaah baat ko log aise nahi jo purane jamane me keh diya hai vaah cheez forum nahi kare

आज मर देश की शिक्षा प्रणाली को सुधार करने की बहुत जरूरत है जरूर नहीं है जो पहले था वह आज ह

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Harender Kumar Yadav

Career Counsellor.

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