वैदिक काल में किसकी पूजा होती थी?...


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नमो नारायण आपका कृष्ण वैदिक काल में किसकी पूजा होती थी तो वैदिक काल में जो प्रकृति से संबंधित देवताओं की पूजा होती थी जैसे कि इंद्र अग्नि वरुण धवन की पूजा होती थी तो प्रकृति से संबंधित देवताओं की पूजा इंदिरा विवरण इत्यादि देवताओं के सूर्य जो प्रत्यक्ष दिखाई दिया जिनका हमसे प्रत्यक्ष संबंध हो उनकी पूजा हो समय होती थी यही प्रमुख देवी देवता और यज्ञ हवन का उस समय विशेष में प्रताप मूर्ति पूजा वैदिक काल में नहीं थी

namo narayan aapka krishna vaidik kaal me kiski puja hoti thi toh vaidik kaal me jo prakriti se sambandhit devatao ki puja hoti thi jaise ki indra agni varun dhawana ki puja hoti thi toh prakriti se sambandhit devatao ki puja indira vivran ityadi devatao ke surya jo pratyaksh dikhai diya jinka humse pratyaksh sambandh ho unki puja ho samay hoti thi yahi pramukh devi devta aur yagya hawan ka us samay vishesh me pratap murti puja vaidik kaal me nahi thi

नमो नारायण आपका कृष्ण वैदिक काल में किसकी पूजा होती थी तो वैदिक काल में जो प्रकृति से संबं

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Beer Singh Rajput

Career Counsellor & Lecturer.

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वैदिक काल में प्रकृति की शक्तियों की पूजा होती थी ऋग्वेद में सूर्य सविता गंगा बसाक देवता इंद्र अग्नि मरो आदि की पूजा का प्रावधान है ऋग्वेद में वनस्पति औषधि वायु अग्नि पृथ्वी सभी की पूजा सभी की तो भूल ही गए हैं रिजर्व में वैद्य खुशियों ने इन सभी प्रकृति की शक्तियों की आदत नहीं है इससे सिद्ध होता है अधिक काल में स्त्रियों की पूजा होती थी

vaidik kaal me prakriti ki shaktiyon ki puja hoti thi rigved me surya savita ganga basak devta indra agni maro aadi ki puja ka pravadhan hai rigved me vanaspati aushadhi vayu agni prithvi sabhi ki puja sabhi ki toh bhool hi gaye hain reserve me vaidhy khushiyon ne in sabhi prakriti ki shaktiyon ki aadat nahi hai isse siddh hota hai adhik kaal me sthreeyon ki puja hoti thi

वैदिक काल में प्रकृति की शक्तियों की पूजा होती थी ऋग्वेद में सूर्य सविता गंगा बसाक देवता इ

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राकेश

Trainer | Educator | Writer | Poet

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Manish Bhargava

Trainer/ Mentor in Delhi education deptt.

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आपका पसंद है वैदिक काल में किसकी पूजा होती है वैदिक काल के जो ग्रंथ हैं उन्हें मुक्त आहा ब्रह्मा विष्णु महेश का जिक्र है इनके अलावा अलग-अलग देवताओं का जिक्र है जैसे अग्नि देवता इंद्र देवता वरुण देवता इस प्रकार से कई प्रकार के देवताओं का जिक्र है अलग-अलग जगह पर इंद्र इंद्र की पूजा होती थी ऑपरधि रे कभी देखेंगे तो हां इंद्र के लिए अलग सूखता सरस्वती की पूजा का प्रावधान है तो कई प्रकार के जो हिंदू धर्म में इतनी आज पूजा होती है कई प्रकार के देवी देवताओं का जिक्र वैदिक काल से ही मिलता है वैदिक काल के दौरान यज्ञ किया जाता था और वेद जो हमारे चारों वेद है वह वैदिक काल के दौरान ही लिखेगा उसकी पूरी जो भी आज पूजा करते हैं वह उसी दौरान की चली आ रही है

aapka pasand hai vaidik kaal me kiski puja hoti hai vaidik kaal ke jo granth hain unhe mukt aaha brahma vishnu mahesh ka jikarr hai inke alava alag alag devatao ka jikarr hai jaise agni devta indra devta varun devta is prakar se kai prakar ke devatao ka jikarr hai alag alag jagah par indra indra ki puja hoti thi aparadhi ray kabhi dekhenge toh haan indra ke liye alag sookhata saraswati ki puja ka pravadhan hai toh kai prakar ke jo hindu dharm me itni aaj puja hoti hai kai prakar ke devi devatao ka jikarr vaidik kaal se hi milta hai vaidik kaal ke dauran yagya kiya jata tha aur ved jo hamare charo ved hai vaah vaidik kaal ke dauran hi likhega uski puri jo bhi aaj puja karte hain vaah usi dauran ki chali aa rahi hai

आपका पसंद है वैदिक काल में किसकी पूजा होती है वैदिक काल के जो ग्रंथ हैं उन्हें मुक्त आहा ब

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AmarDeep Mukul

मैं ब्लॉगर हूं और मेरी वाइफ ब्यूटीशियन है।

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वैदिक काल में लोग विष्णु ब्रह्मा और इंद्र की पूजा करते थे इंद्र सूर्य वरुण प्रमुख देवता हो गए थे इनकी लोग पूजा करते थे

vaidik kaal me log vishnu brahma aur indra ki puja karte the indra surya varun pramukh devta ho gaye the inki log puja karte the

वैदिक काल में लोग विष्णु ब्रह्मा और इंद्र की पूजा करते थे इंद्र सूर्य वरुण प्रमुख देवता हो

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swati gup9

Student

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Shivani

Teacher

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वैदिक काल में किसकी पूजा होती थी वैदिक काल में अगर आप वेदों का अध्ययन करेंगे तो उसमें आप देखेंगे कि प्रकृति की पूजा होती थी आप प्रकृति के अलग-अलग तत्वों का नाम अलग अलग रखा गया था जैसे जो अग्नि देवता है ठीक है वायु के देवता सोम हो गया और वर्षा के देवता इन रहोगे ठीक है वरुण देवता हो गए तो नाम उनका अलग-अलग था ठीक है लेकिन हम उन अलग-अलग नामों से ही हम वह कहीं ना कहीं पृथ्वी के किसी ने किसी तत्व के सूचक है और वैदिक काल में हम मुख्य रूप से जो कि प्रकृति की चीजें थी हम जैसे सूर्य भगवान की पूजा करने का वैदिक काल में उल्लेख मिलता है यह याद जान लीजिए कि यह जो देवता आपको देखना है गणेश भगवान या फिर कार्तिकेय भगवान या पार्वती या दुर्गा माता इन लोकल लेखक और वैदिक काल के ग्रंथों में नहीं मिलेगा क्योंकि यह लोग कहीं न कहीं किसी भी प्रकृति चीज को रिप्लाई नहीं करती है जैसे अग्नि देवता अग्नि को रिप्रेजेंट करते हैं सूर्य देव या वह सीधे सूर्य भगवान को सेंड करते हैं जो कहीं न की प्रकृति है वरुण देव कहते हैं हवा को रिप्रेजेंट करते थे सोमदेव कहीं न कहीं सोमरस या पेड़ पौधों करते सेंड करते थे तो जो भी वैदिक सभ्यता में हम जितने भी लोगों की जितने भी देवताओं को देखेंगे वह सभी कहीं न कहीं प्रकृति से रिलेट करते थे या प्रकृति के किसी ने किसी तत्व को हम देवता के रूप में मान करके उनकी पूजा करते थे जिसे भी प्यारी कविता में आपको वृक्ष की पूजा करने का है नदी की पूजा करने का है सूर्य की पूजा करने का है मतलब वह चीजें प्रकृति की वस्तुएं जो हमारी जरूरतें पूरी जाकर में एवं भूमि की पूजा करने का उल्लेख है प्रकृति की वस्तुएं जो हमारी जरूरतें पूरा करती है हमारा हमें उनकी पूजा करना चाहिए ऐसा वैदिक वैदिक ग्रंथों में यह वैदिक काल का मेन तो वैदिक काल में प्रकृति की पूजा होती थी

vaidik kaal me kiski puja hoti thi vaidik kaal me agar aap vedo ka adhyayan karenge toh usme aap dekhenge ki prakriti ki puja hoti thi aap prakriti ke alag alag tatvon ka naam alag alag rakha gaya tha jaise jo agni devta hai theek hai vayu ke devta Som ho gaya aur varsha ke devta in rahoge theek hai varun devta ho gaye toh naam unka alag alag tha theek hai lekin hum un alag alag namon se hi hum vaah kahin na kahin prithvi ke kisi ne kisi tatva ke suchak hai aur vaidik kaal me hum mukhya roop se jo ki prakriti ki cheezen thi hum jaise surya bhagwan ki puja karne ka vaidik kaal me ullekh milta hai yah yaad jaan lijiye ki yah jo devta aapko dekhna hai ganesh bhagwan ya phir kartikey bhagwan ya parvati ya durga mata in local lekhak aur vaidik kaal ke granthon me nahi milega kyonki yah log kahin na kahin kisi bhi prakriti cheez ko reply nahi karti hai jaise agni devta agni ko represent karte hain surya dev ya vaah sidhe surya bhagwan ko send karte hain jo kahin na ki prakriti hai varun dev kehte hain hawa ko represent karte the Somdev kahin na kahin somaras ya ped paudho karte send karte the toh jo bhi vaidik sabhyata me hum jitne bhi logo ki jitne bhi devatao ko dekhenge vaah sabhi kahin na kahin prakriti se relate karte the ya prakriti ke kisi ne kisi tatva ko hum devta ke roop me maan karke unki puja karte the jise bhi pyaari kavita me aapko vriksh ki puja karne ka hai nadi ki puja karne ka hai surya ki puja karne ka hai matlab vaah cheezen prakriti ki vastuyen jo hamari jaruratein puri jaakar me evam bhoomi ki puja karne ka ullekh hai prakriti ki vastuyen jo hamari jaruratein pura karti hai hamara hamein unki puja karna chahiye aisa vaidik vaidik granthon me yah vaidik kaal ka main toh vaidik kaal me prakriti ki puja hoti thi

वैदिक काल में किसकी पूजा होती थी वैदिक काल में अगर आप वेदों का अध्ययन करेंगे तो उसमें आप

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