आध्यात्मिक शिक्षा क्या है?...


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Narendra Bhardwaj

Spirituality Reformer

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महोदय आपने पूछा आध्यात्मिक आध्यात्मिक शिक्षा का संबंध आत्मा के विकास से आत्मक धार से ऐसी शिक्षा जो हमारे जीवन के उद्देश्य सफल करती हूं और हां जीवन की लास्ट तक ले जाती हो उसको आध्यात्मिक शिक्षा के आध्यात्मिक शिक्षा में बहुत सारे गुण धर्म है जैसे मानविता इंसानियत सत्य अहिंसा करुणा दया और उपकार इमानदारी विकारों से दूर रहने के लिए जो जो समबाहु वो कर्म करने का नाम आध्यात्मिक शिक्षा आध्यात्मिक शिक्षा हमेशा त्याग के ऊपर निर्भर है जहां त्याग है जहां समर्पण है जहां प्रेम है यहां करुणा है जहां सत्य है वहां विकास वहां वृद्धि है मां उन्नति आत्मा की उत्तरोत्तर विकास से संबंधित जितना भी ज्ञान है वह समस्त माध्यमिक शिक्षा के अंतर्गत शुभ आचरण सरल आचरण सरल स्वभाव ईश्वर में आस्था गुरुजनों मात पिता और बड़ों का सम्मान जीवो के प्रति दया भाव यह सारे गुण अध्यापक शिक्षा के अन्य जो व्यक्ति आध्यात्मिक मार्ग पर यात्रा कर रहा होता है उसे इन सभी आयामों को अपनाना पड़ता इन सभी गुणों को अपनाना पड़ता इन सभी आश्रमों को अप यदि कोई व्यक्ति आध्यात्मिक शिक्षा में उत्तरोत्तर वृद्धि करना चाहता है उसे प्रेम पूर्ण व्यवहार अपनाना पड़ेगा उसे जीवो के प्रति दया और करुणा का भाव रखना पड़ेगा उसे माता-पिता सदगुरु और भगवान के प्रति सम्मान रखना पड़ेगा बड़ों के प्रति आदर भाव रखना पड़ेगा प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भाव रखना पड़ेगा और जिसने भी जो कुछ भी सीखे उसके प्रति अनुग्रहित होने का भाव यह सारी आध्यात्मिक शिक्षा के महत्वपूर्ण अंग है आध्यात्मिक शिक्षा एक बहुत विस्तृत विषय है और इस विषय में सारे शास्त्रों सारे ग्रंथों का निचोड़ परहित है जो परित्याग इन सब के साथ जीवन यापन कर रहा है वह आध्यात्मिक शिक्षा में आगे बढ़ रहा है आध्यात्मिक शिक्षा जो है एक मानवीय भाव विकसित करना परहित के कार्य करना प्रकृति को सुरक्षित रखना और अपने द्वारा कभी किसी का इतना हो चाहे वह प्रकृति हो चाहे वह चाहे इंसान हो चाहे चर अचर कोई भी वस्तु कोई भी पुरानी हो सब के प्रति आदर माध्यमिक शिक्षा का धन्यवाद

mahoday aapne poocha aadhyatmik aadhyatmik shiksha ka sambandh aatma ke vikas se aatmkatha dhar se aisi shiksha jo hamare jeevan ke uddeshya safal karti hoon aur haan jeevan ki last tak le jaati ho usko aadhyatmik shiksha ke aadhyatmik shiksha me bahut saare gun dharm hai jaise manvitha insaniyat satya ahinsa corona daya aur upkar imaandari vikaron se dur rehne ke liye jo jo sambahu vo karm karne ka naam aadhyatmik shiksha aadhyatmik shiksha hamesha tyag ke upar nirbhar hai jaha tyag hai jaha samarpan hai jaha prem hai yahan corona hai jaha satya hai wahan vikas wahan vriddhi hai maa unnati aatma ki uttarottar vikas se sambandhit jitna bhi gyaan hai vaah samast madhyamik shiksha ke antargat shubha aacharan saral aacharan saral swabhav ishwar me astha gurujanon maat pita aur badon ka sammaan jeevo ke prati daya bhav yah saare gun adhyapak shiksha ke anya jo vyakti aadhyatmik marg par yatra kar raha hota hai use in sabhi aayamon ko apnana padta in sabhi gunon ko apnana padta in sabhi aashramon ko up yadi koi vyakti aadhyatmik shiksha me uttarottar vriddhi karna chahta hai use prem purn vyavhar apnana padega use jeevo ke prati daya aur corona ka bhav rakhna padega use mata pita sadhguru aur bhagwan ke prati sammaan rakhna padega badon ke prati aadar bhav rakhna padega prakriti ke prati kritagyata ka bhav rakhna padega aur jisne bhi jo kuch bhi sikhe uske prati anugrahit hone ka bhav yah saari aadhyatmik shiksha ke mahatvapurna ang hai aadhyatmik shiksha ek bahut vistrit vishay hai aur is vishay me saare shastron saare granthon ka nichod parhit hai jo parityag in sab ke saath jeevan yaapan kar raha hai vaah aadhyatmik shiksha me aage badh raha hai aadhyatmik shiksha jo hai ek manviya bhav viksit karna parhit ke karya karna prakriti ko surakshit rakhna aur apne dwara kabhi kisi ka itna ho chahen vaah prakriti ho chahen vaah chahen insaan ho chahen char achar koi bhi vastu koi bhi purani ho sab ke prati aadar madhyamik shiksha ka dhanyavad

महोदय आपने पूछा आध्यात्मिक आध्यात्मिक शिक्षा का संबंध आत्मा के विकास से आत्मक धार से ऐसी श

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Ghanshyamvan

मंदिर सेवा

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अपने स्वरूप को जान लेना अपनी आत्मा को जाने ना आए आध्यात्मिक शिक्षा है जो शरीर के तीन भाग हैं स्थूल सूक्ष्म और स्थूल शरीर के नौजवानों की नगरी है जिसे हम स्टोन श्रवन कहते हैं पांच तत्वों से बना है इंसान के मुंह में व्यस्त रहता है उसके मुंह में ही मर जाता है इसके बाद सूक्ष्म शरीर है जो मन बुद्धि चित्त अहंकार है जिसमें सोचने की समझने की शक्ति होती है इंसान इसकी वजन में भी रहता है तभी किसी ने मंच से किसी न किसी का चिंतन करता है और जिसे मन से भी परे सूक्ष्म शरीर से बड़े कांड श्री जाने की आत्मा का ज्ञान हो जाता है यही आध्यात्मिक शिक्षा है क्योंकि आत्मा ही परमात्मा का स्वरुप है और जो अपनी आत्मा को जान लेता है या परमात्मा को जान लेता है उसके संबंध कट जाते हैं यही आध्यात्मिक

apne swaroop ko jaan lena apni aatma ko jaane na aaye aadhyatmik shiksha hai jo sharir ke teen bhag hain sthool sukshm aur sthool sharir ke naujavanon ki nagari hai jise hum stone shravan kehte hain paanch tatvon se bana hai insaan ke mooh me vyast rehta hai uske mooh me hi mar jata hai iske baad sukshm sharir hai jo man buddhi chitt ahankar hai jisme sochne ki samjhne ki shakti hoti hai insaan iski wajan me bhi rehta hai tabhi kisi ne manch se kisi na kisi ka chintan karta hai aur jise man se bhi pare sukshm sharir se bade kaand shri jaane ki aatma ka gyaan ho jata hai yahi aadhyatmik shiksha hai kyonki aatma hi paramatma ka swarup hai aur jo apni aatma ko jaan leta hai ya paramatma ko jaan leta hai uske sambandh cut jaate hain yahi aadhyatmik

अपने स्वरूप को जान लेना अपनी आत्मा को जाने ना आए आध्यात्मिक शिक्षा है जो शरीर के तीन भाग ह

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आपका सवाल है आध्यात्मिक शिक्षा क्या है तो आध्यात्मिक शिक्षा एक ऐसी शिक्षा है जो हमें अपने धर्म के बारे में बताता है धर्म के बारे में सभी जानकारी हमें आध्यात्मिक शिक्षा के दौरान ही मिलता है आध्यात्मिक शिक्षा में हमें सिर्फ अपने धर्म की ही नहीं दूसरों के धर्म के भी बारे में जानना जरूरी होता है क्योंकि जब हम अध्यात्म करते हैं तो हमारे अंदर से गिरना दूर हो जाता है सिर्फ प्रेम बसता है

aapka sawaal hai aadhyatmik shiksha kya hai toh aadhyatmik shiksha ek aisi shiksha hai jo hamein apne dharm ke bare me batata hai dharm ke bare me sabhi jaankari hamein aadhyatmik shiksha ke dauran hi milta hai aadhyatmik shiksha me hamein sirf apne dharm ki hi nahi dusro ke dharm ke bhi bare me janana zaroori hota hai kyonki jab hum adhyaatm karte hain toh hamare andar se girna dur ho jata hai sirf prem basta hai

आपका सवाल है आध्यात्मिक शिक्षा क्या है तो आध्यात्मिक शिक्षा एक ऐसी शिक्षा है जो हमें अपने

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जो स्वयं से स्वयं की पहचान करा दे उसे आध्यात्मिक शिक्षा कहते हैं

jo swayam se swayam ki pehchaan kara de use aadhyatmik shiksha kehte hain

जो स्वयं से स्वयं की पहचान करा दे उसे आध्यात्मिक शिक्षा कहते हैं

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ज्योति के साथ धर्म व आत्मा से जुड़ी है उसे आध्यात्मिक शिक्षा कहा जा सकता है

jyoti ke saath dharm va aatma se judi hai use aadhyatmik shiksha kaha ja sakta hai

ज्योति के साथ धर्म व आत्मा से जुड़ी है उसे आध्यात्मिक शिक्षा कहा जा सकता है

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आपका सवाल है आध्यात्मिक शिक्षा क्या है तो दोस्तों आध्यात्मिक शिक्षा जो है निराकार और आत्मा से है धार का आध्यात्मिक शिक्षा किसी भी धर्म पर आधारित नहीं है अध्यात्म करसन संबंध निराकार और अदृश्य संसार से है जो शारीरिक क्रियाओं पर निर्भर नहीं है यदि कोई व्यक्ति है समझता है कि वसरिश्ता दशमी क्रियाएं करता है आत्मा से धार्मिक न्याय करता है तो वह आध्यात्मिक नहीं है वह दोनों क्रिया कर रहा है संसार के अधिकतर लोग अंधविश्वास और मान्यताओं करण पाप पुण्य और सही गलत के बारे में भ्रमित जीवन जी रहे जिसके कानून के दैनिक कर्मों में अनेक प्रकार की त्रुटि आ रहे हैं अध्यात्म इन त्रुटियों से मुक्त करता है

aapka sawaal hai aadhyatmik shiksha kya hai toh doston aadhyatmik shiksha jo hai nirakaar aur aatma se hai dhar ka aadhyatmik shiksha kisi bhi dharm par aadharit nahi hai adhyaatm karsan sambandh nirakaar aur adrishya sansar se hai jo sharirik kriyaon par nirbhar nahi hai yadi koi vyakti hai samajhata hai ki vasrishta dashami kriyaen karta hai aatma se dharmik nyay karta hai toh vaah aadhyatmik nahi hai vaah dono kriya kar raha hai sansar ke adhiktar log andhavishvas aur manyataon karan paap punya aur sahi galat ke bare me bharmit jeevan ji rahe jiske kanoon ke dainik karmon me anek prakar ki truti aa rahe hain adhyaatm in trutiyon se mukt karta hai

आपका सवाल है आध्यात्मिक शिक्षा क्या है तो दोस्तों आध्यात्मिक शिक्षा जो है निराकार और आत्मा

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