जब हम किसी से आकर्षित होते हैं तो हमें पता होता है की वो सुन्दर है या कुछ हुनर है जो दिखाई नहीं देता हमे, फिर भी उन्हें हम प्यार करते हैं। ऐसा क्यों होता है?...


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Dr. Suman Aggarwal

Personal Development Coach

1:06
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपकी सवाल पर मेरा यह विचार है कि इंसान को प्यार करने के लिए ना आकर्षण की जरूरत है ना सुंदरता की जरूरत है ना हुनर की जरूरत है और इसका बेस्ट एग्जांपल आफ प्रकृति की शुरुआत से ले जब एक बच्चा एक इंसान पैदा होता है तो उसकी मां का नजरिया कैसा है अपने बच्चे के लिए चाहे वह कितना ही मोटा हो कितना ही काला हो कितना ही गोरा हो कितना ही पतला हो वह कैसा भी हो मां तो उसे बस प्यार करती है तो आप ही समझे प्यार का असली मतलब क्या है प्यार का मतलब है नजर करना किसी को उसकी देखभाल करना उसको खुश रखना उसके लिए जो बेहतर है वह करने की कोशिश करना तो इसमें सुंदरता हुनर मेरे हिसाब से यह चीजें मैटर नहीं करती आकर्षण और प्यार दोनों में डिफरेंस होता है आकर्षण छोटे से पीरियड के लिए होता है कि आज आपको कुछ अच्छा लग रहा है कल कोई और चीज आ जाएगी तो आपको बहुत अच्छी लगेगी और प्यार अंधा बहुत गहरा है सांसे होता है जिसके ऊपर इन चीजों का कोई असर नहीं होता

aapki sawaal par mera yah vichar hai ki insaan ko pyar karne ke liye na aakarshan ki zarurat hai na sundarta ki zarurat hai na hunar ki zarurat hai aur iska best example of prakriti ki shuruat se le jab ek baccha ek insaan paida hota hai toh uski maa ka najariya kaisa hai apne bacche ke liye chahen vaah kitna hi mota ho kitna hi kaala ho kitna hi gora ho kitna hi patla ho vaah kaisa bhi ho maa toh use bus pyar karti hai toh aap hi samjhe pyar ka asli matlab kya hai pyar ka matlab hai nazar karna kisi ko uski dekhbhal karna usko khush rakhna uske liye jo behtar hai vaah karne ki koshish karna toh isme sundarta hunar mere hisab se yah cheezen matter nahi karti aakarshan aur pyar dono mein difference hota hai aakarshan chote se period ke liye hota hai ki aaj aapko kuch accha lag raha hai kal koi aur cheez aa jayegi toh aapko bahut achi lagegi aur pyar andha bahut gehra hai sanse hota hai jiske upar in chijon ka koi asar nahi hota

आपकी सवाल पर मेरा यह विचार है कि इंसान को प्यार करने के लिए ना आकर्षण की जरूरत है ना सुंदर

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Bharti Sharma

Love.. Beauty Tips..Life Tips

1:36
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखी आकर्षित इंसान उसी चीज से होता है जिसमें कुछ ना कुछ खास होता कुछ हुनर होता है हुनर मीन लाइक सुंदरता या फिर कोई टैलेंट बढ़िया पर सुंदरता को बताया गया है बटर जिस इंसान से जिस भी चीज से आकर्षित होते हैं ना तो हमें उससे प्यार नहीं होता हमें सिर्फ उससे लगा होता है प्यार हम नहीं कर पाते क्योंकि हम भी जानते हैं कि हमें उसकी क्या चीज पसंद है क्या चीज़ नहीं पसंद मैं टाइम के साथ साथ धीरे धीरे धीरे धीरे जैसे-जैसे मुंसिफ इंसान के साथ घूमने लग जाते हैं तो वह आकर्षण जो होता है ना वह टाइम के साथ प्यार में कन्वर्ट हो जाता है बट वर्क पहले शुरू शोरूम तो प्यार नहीं होता बट उसे टाइम लगता है आकर्षण को प्यार में कन्वर्ट होने के लिए कई बार क्या होता है कि जो आकर्षण होता है ना वह हमेशा आकर्षण की तरह ही बना रहता है वह सब अट्ठारह की तरह ही रहता है वह इंसान के दिन आपको आखें ट्रैक करती है उसे पाप उसकी आंखों में ही रहोगे अगर उसकी आंखों में बाई चांस कुछ हो जाता है तो वह जो भी आपके ट्रक में रहती है ना वह चली गई चली जाती है बट आप उस इंसान से घुलने मिलने लग जाओगे का किसको टाइम दोगी उसकी खैर करोगी उसका ध्यान रखोगे तो जो उसके अट्रैक्ट में रहती है ना आपके अंदर वह प्यार में कन्वर्ट हो जाती है इसलिए उसे हमसे प्यार हो जाता

dekhi aakarshit insaan usi cheez se hota hai jisme kuch na kuch khaas hota kuch hunar hota hai hunar meen like sundarta ya phir koi talent badhiya par sundarta ko bataya gaya hai butter jis insaan se jis bhi cheez se aakarshit hote hain na toh hamein usse pyar nahi hota hamein sirf usse laga hota hai pyar hum nahi kar paate kyonki hum bhi jante hain ki hamein uski kya cheez pasand hai kya cheez nahi pasand main time ke saath saath dhire dhire dhire dhire jaise jaise munsif insaan ke saath ghoomne lag jaate hain toh vaah aakarshan jo hota hai na vaah time ke saath pyar mein convert ho jata hai but work pehle shuru showroom toh pyar nahi hota but use time lagta hai aakarshan ko pyar mein convert hone ke liye kai baar kya hota hai ki jo aakarshan hota hai na vaah hamesha aakarshan ki tarah hi bana rehta hai vaah sab attharah ki tarah hi rehta hai vaah insaan ke din aapko akhen track karti hai use paap uski aankho mein hi rahoge agar uski aankho mein bai chance kuch ho jata hai toh vaah jo bhi aapke truck mein rehti hai na vaah chali gayi chali jaati hai but aap us insaan se ghulne milne lag jaoge ka kisko time dogi uski khair karogi uska dhyan rakhoge toh jo uske attract mein rehti hai na aapke andar vaah pyar mein convert ho jaati hai isliye use humse pyar ho jata

देखी आकर्षित इंसान उसी चीज से होता है जिसमें कुछ ना कुछ खास होता कुछ हुनर होता है हुनर मीन

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विकास सिंह

दिल से भारतीय

1:14
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लेकिन जब हम किसी पर आकर्षित होते हैं या प्यार करते हैं तो हमें पता होता है कि वह सुंदर है यह कुछ उनके अंदर हुनर हमें दिखाई नहीं देता तो फिर भी हमने प्यार क्यों करते हैं तो पहली बार प्यार बस एक एहसास है जो कि हो जाता है दो तरीके से होता है एक तो पहला यह कि अब आपको दिल को ज्यादा पसंद आना ऐसा तो नहीं कि कोई चेहरा चेहरा अच्छा है तू ही पसंद आता और दूसरा यह कि अगर बचपन से सेंड ए फ्रेंड से रिश्ते में आगे बढ़े से प्यार हो गया प्यार करते हैं उसमें तो यह देखने गया उनके अंदर अच्छाई क्या है बुराई क्या बस प्यार करते हैं जब कोई आपको अच्छा लगे तो ही प्यार होता है जो कोई अच्छा ना लगे उत्तर दे दिया पसंद है तो प्यार हो सकता है और जानना है

lekin jab hum kisi par aakarshit hote hain ya pyar karte hain toh hamein pata hota hai ki vaah sundar hai yah kuch unke andar hunar hamein dikhai nahi deta toh phir bhi humne pyar kyon karte hain toh pehli baar pyar bus ek ehsaas hai jo ki ho jata hai do tarike se hota hai ek toh pehla yah ki ab aapko dil ko zyada pasand aana aisa toh nahi ki koi chehra chehra accha hai tu hi pasand aata aur doosra yah ki agar bachpan se send a friend se rishte mein aage badhe se pyar ho gaya pyar karte hain usme toh yah dekhne gaya unke andar acchai kya hai burayi kya bus pyar karte hain jab koi aapko accha lage toh hi pyar hota hai jo koi accha na lage uttar de diya pasand hai toh pyar ho sakta hai aur janana hai

लेकिन जब हम किसी पर आकर्षित होते हैं या प्यार करते हैं तो हमें पता होता है कि वह सुंदर है

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