अगर भारत में राष्ट्रपति का शासन लागू हो जाए तो क्या होगा?...


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Ravi Sharma

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भारत में यदि राष्ट्रपति शासन लागू हो जाए तो मुझे नहीं लगता भारत का किसी भी प्रकार से कल्याण हो पाएगा क्योंकि भारत एक लोकतांत्रिक देश है तथा किसी भी लोकतांत्रिक देश में सत्ता के अनुपालन तथा सत्यापन सत्ता को चलाने के लिए बहुत से जो राजनीतिक तथा कार्यपालिका संबंधित संस्थाएं उन्हें मिलकर काम करना होता है राष्ट्रपति शासन के अनुसार तथा उसके अनुरूप उसके अंतर्गत चलने के लिए बहुत सी ऐसी संस्थाएं हैं जो अपना कार्य ठीक प्रकार से नहीं कर पाएंगी उनके ऊपर एक अंकुश सा लगा रहेगा वह अपना मतलब एक सही प्रकार से अपने कार्यों का अनुपालन नहीं कर पाएंगे मुझे ऐसा भी लगता है कि राष्ट्रपति का शासन लागू होना या ना होना एक बहुत ही दूर की कौड़ी है एक बहुत ही सुरूर जो विचार है तथा इस पर किसी प्रकार का अमलीजामा आने वाले समय कोई भी सरकार तंग नहीं करना चाहिए क्योंकि राष्ट्रपति भी एक प्रकार से विधान सभा तथा राज्यसभा व लोकसभा के द्वारा संयुक्त रुप से चयनित होकर आते हैं वह एक संवैधानिक पद है तथा एक संवैधानिक पद होने के नाते संविधान का अनुपालन करना ही उसका एक जो मूलभूत आधार होता है परंतु यदि हम लोकतांत्रिक संस्थाओं को विशेषकर जो हमारे राज्य सभा लोक सभा तथा विधान पालिकाएं हैं उनकी अनदेखी करेंगे तो हो सकता है कि हमारे देश का जो लोकतांत्रिक था चाहे वह बिखर जाए तथा उसको सही ढर्रे पर लाने के लिए काफी समय भी लग सकता है तो मुझे ऐसा लगता है कि राष्ट्रपति का शासन आना देश के लिए किसी भी प्रकार से हितकर नहीं होगा लाभकारी नहीं होगा तथा इस प्रकार की संभावनाओं से हमें आरंभिक रूप से दूर ही रहना चाहिए धन्यवाद

bharat mein yadi rashtrapati shasan laagu ho jaaye toh mujhe nahi lagta bharat ka kisi bhi prakar se kalyan ho payega kyonki bharat ek loktantrik desh hai tatha kisi bhi loktantrik desh mein satta ke anupaalan tatha satyapan satta ko chalane ke liye bahut se jo raajnitik tatha karyapalika sambandhit sansthayen unhe milkar kaam karna hota hai rashtrapati shasan ke anusaar tatha uske anurup uske antargat chalne ke liye bahut si aisi sansthayen hain jo apna karya theek prakar se nahi kar paayengi unke upar ek ankush sa laga rahega vaah apna matlab ek sahi prakar se apne karyo ka anupaalan nahi kar payenge mujhe aisa bhi lagta hai ki rashtrapati ka shasan laagu hona ya na hona ek bahut hi dur ki kaudi hai ek bahut hi suroor jo vichar hai tatha is par kisi prakar ka amalijama aane waale samay koi bhi sarkar tang nahi karna chahiye kyonki rashtrapati bhi ek prakar se vidhan sabha tatha rajya sabha va lok sabha ke dwara sanyukt roop se chayanit hokar aate hain vaah ek samvaidhanik pad hai tatha ek samvaidhanik pad hone ke naate samvidhan ka anupaalan karna hi uska ek jo mulbhut aadhaar hota hai parantu yadi hum loktantrik sasthaon ko visheshkar jo hamare rajya sabha lok sabha tatha vidhan palikaen hain unki andekha karenge toh ho sakta hai ki hamare desh ka jo loktantrik tha chahen vaah bikhar jaaye tatha usko sahi dharre par lane ke liye kaafi samay bhi lag sakta hai toh mujhe aisa lagta hai ki rashtrapati ka shasan aana desh ke liye kisi bhi prakar se hitakar nahi hoga labhakari nahi hoga tatha is prakar ki sambhavanaon se hamein aarambhik roop se dur hi rehna chahiye dhanyavad

भारत में यदि राष्ट्रपति शासन लागू हो जाए तो मुझे नहीं लगता भारत का किसी भी प्रकार से कल्या

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देखिए आपका प्रश्न है अगर भारत के अंदर राष्ट्रपति शासन लागू जाए तो क्या हुआ तो देखिए भारत के अंदर राष्ट्रपति शासन अनुच्छेद 356 के तहत लागू होता है इसका मेन कारण होता है अगर किसी राज्य सरकार या किसी राज्य में या किसी प्रदेश में संवैधानिक तरीके से कार्य नहीं हो रही है तो उसे प्रदेश के अंदर आर्टिकल 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लागू हो जाता है जो राज्यपाल के द्वारा राष्ट्रपति को नोटिस भेजा जाता है अगर राष्ट्रपति से राष्ट्रपति ने उस नोटिस को ग्रहण कर लिया यानी कि सरकार कर लिया तो उस राज्य के अंदर राष्ट्रपति शासन लागू जाता है राष्ट्रपति शासन लागू होने के कारण बहुत बड़ी हानि हो जाती है उसे प्रदेश की और जो लोग यदि कोई व्यक्ति किसी बात के ऊपर प्रदर्शन कर रहा होता है कि माना कि प्रदर्शन करना एक अच्छी बात है लेकिन कानून के दायरे में रहकर संवैधानिक तरीके से अगर प्रदर्शन किया जाए तो एक अच्छी बात है लेकिन कानून के असंवैधानिक तरीके से अगर कार्य किया जाए तो उसमें प्रदर्शनकारी बहुत बड़ा नुकसान करते हैं फिर राष्ट्रपति शासन लागू होने पर इसमें बल्कि राष्ट्रपति बल का प्रयोग करने के आदेश आदेश देता है जो पुलिसकर्मियों के द्वारा राष्ट्र जनता और पुलिस के बीच मुठभेड़ होती है इसी इसके कारण हमारे भारत के प्रदेश के अंदर बहुत बड़ा नुकसान होता है अर्थव्यवस्था को हानि पहुंचती है तो अगर राष्ट्रपति शासन लागू हो जाता है तो हमारे देश के अंदर बहुत बड़ा नुकसान होता है थैंक यू धन्यवाद और एक बात और भी है कि 1951 में सबसे पहले राष्ट्रपति शासन पंजाब में लगा था और जब से अब तक लगभग 128 या 127 बार राष्ट्रपति शासन लागू भारत के अंदर हो चुका है थैंक यू सभी राज्यों के अंदर थैंक यू

dekhiye aapka prashna hai agar bharat ke andar rashtrapati shasan laagu jaaye toh kya hua toh dekhiye bharat ke andar rashtrapati shasan anuched 356 ke tahat laagu hota hai iska main karan hota hai agar kisi rajya sarkar ya kisi rajya me ya kisi pradesh me samvaidhanik tarike se karya nahi ho rahi hai toh use pradesh ke andar article 356 ke tahat rashtrapati shasan laagu ho jata hai jo rajyapal ke dwara rashtrapati ko notice bheja jata hai agar rashtrapati se rashtrapati ne us notice ko grahan kar liya yani ki sarkar kar liya toh us rajya ke andar rashtrapati shasan laagu jata hai rashtrapati shasan laagu hone ke karan bahut badi hani ho jaati hai use pradesh ki aur jo log yadi koi vyakti kisi baat ke upar pradarshan kar raha hota hai ki mana ki pradarshan karna ek achi baat hai lekin kanoon ke daayre me rahkar samvaidhanik tarike se agar pradarshan kiya jaaye toh ek achi baat hai lekin kanoon ke asanvaidhanik tarike se agar karya kiya jaaye toh usme pradarshankari bahut bada nuksan karte hain phir rashtrapati shasan laagu hone par isme balki rashtrapati bal ka prayog karne ke aadesh aadesh deta hai jo policekarmiyon ke dwara rashtra janta aur police ke beech muthbhed hoti hai isi iske karan hamare bharat ke pradesh ke andar bahut bada nuksan hota hai arthavyavastha ko hani pohchti hai toh agar rashtrapati shasan laagu ho jata hai toh hamare desh ke andar bahut bada nuksan hota hai thank you dhanyavad aur ek baat aur bhi hai ki 1951 me sabse pehle rashtrapati shasan punjab me laga tha aur jab se ab tak lagbhag 128 ya 127 baar rashtrapati shasan laagu bharat ke andar ho chuka hai thank you sabhi rajyo ke andar thank you

देखिए आपका प्रश्न है अगर भारत के अंदर राष्ट्रपति शासन लागू जाए तो क्या हुआ तो देखिए भारत क

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अगर भारत में राष्ट्रपति शासन लागू हो जाए तो क्या होगा उसका ना हुए और मैं पूरी तरीके से उत्तर देने का प्रयास करूंगा चुकी है मेरी विचार है इसलिए माफ कीजिएगा और कोई गलती हो तो भारत जैसे विशाल देश में राष्ट्रपति का शासन होने की बात है क्या कि विधानसभा में राज्य की विधानसभाओं को बंद कर दिया जाए और राष्ट्रपति के शासन में राज्य परामर्श में रहकर शासन देखें इसका जीता जागता उदाहरण कई बार देखा जा चुका है लेकिन भारत में ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है जिसमें सबसे प्रमुख है एक ही बार मानो तो एक ही बार हुआ है राष्ट्रपति शासन और उसका प्रमुख था इमरजेंसी जो 1975 21 जून को लगाई गई थी इसका 21 महीने में प्रभाव हुआ था उसमें प्रधानमंत्री राष्ट्रपति को हाथ में लेकर शासन किया था लेकिन माना जाए तो यह राष्ट्रपति को आगे करके शासन किया जाता है इसमें प्रधानमंत्री होता है राष्ट्रपति तो बहुत कठपुतली की तरह काम करता है वह तो सिर्फ घोषणा करता है लेकिन इसमें राष्ट्रपति का कोई हाथ नहीं रहता तांत्रिका सब काम रहता है इसमें विभागीय जांच को आगे करके इसका हमें शासन किया था राष्ट्रपति शासन अगर रियल्टी में राष्ट्रपति शासन देखा जाए तो प्रधानमंत्री तो कोई मायने में नहीं है क्योंकि माना जाए तो की राष्ट्रपति जो है वह एक कठपुतली हमारे भारत के किस को पत्र दिया गया है सबसे बड़ा लेकिन प्रधानमंत्री की बातें मानी जाती मां की दुष्कर्म देखे तो राष्ट्रपति और बड़ी-बड़ी पत्ते डोनाल्ड ट्रंप यहां पर गर्म देखे तो रोशनी और उससे से राष्ट्रपति हैं हिंदी में मस्तिष्क कहलाते हैं कि हां उनके सत्यम हैं लेकिन हमारे भाग्य सकता लेकिन हमारे यहां क्या राष्ट्रपति कौन है कोई जानता ही नहीं आप सोच रहे हो गया क्या बात है और बिगड़ते राष्ट्रपति का नाम धन्यवाद क्योंकि संविधान रिकॉर्डिंग काम नहीं कर सकता इसलिए मैं आशीष आशीष ठीक है अभी तो सकते इसलिए धन्यवाद

agar bharat me rashtrapati shasan laagu ho jaaye toh kya hoga uska na hue aur main puri tarike se uttar dene ka prayas karunga chuki hai meri vichar hai isliye maaf kijiega aur koi galti ho toh bharat jaise vishal desh me rashtrapati ka shasan hone ki baat hai kya ki vidhan sabha me rajya ki vidhansabhaon ko band kar diya jaaye aur rashtrapati ke shasan me rajya paramarsh me rahkar shasan dekhen iska jita jaagta udaharan kai baar dekha ja chuka hai lekin bharat me aisa bahut kam dekhne ko milta hai jisme sabse pramukh hai ek hi baar maano toh ek hi baar hua hai rashtrapati shasan aur uska pramukh tha emergency jo 1975 21 june ko lagayi gayi thi iska 21 mahine me prabhav hua tha usme pradhanmantri rashtrapati ko hath me lekar shasan kiya tha lekin mana jaaye toh yah rashtrapati ko aage karke shasan kiya jata hai isme pradhanmantri hota hai rashtrapati toh bahut kathaputali ki tarah kaam karta hai vaah toh sirf ghoshana karta hai lekin isme rashtrapati ka koi hath nahi rehta tantrika sab kaam rehta hai isme vibhagiya jaanch ko aage karke iska hamein shasan kiya tha rashtrapati shasan agar realty me rashtrapati shasan dekha jaaye toh pradhanmantri toh koi maayne me nahi hai kyonki mana jaaye toh ki rashtrapati jo hai vaah ek kathaputali hamare bharat ke kis ko patra diya gaya hai sabse bada lekin pradhanmantri ki batein maani jaati maa ki dushkarm dekhe toh rashtrapati aur badi badi patte donald trump yahan par garam dekhe toh roshni aur usse se rashtrapati hain hindi me mastishk kehlate hain ki haan unke satyam hain lekin hamare bhagya sakta lekin hamare yahan kya rashtrapati kaun hai koi jaanta hi nahi aap soch rahe ho gaya kya baat hai aur bigadte rashtrapati ka naam dhanyavad kyonki samvidhan recording kaam nahi kar sakta isliye main aashish aashish theek hai abhi toh sakte isliye dhanyavad

अगर भारत में राष्ट्रपति शासन लागू हो जाए तो क्या होगा उसका ना हुए और मैं पूरी तरीके से उत्

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यदि भारत में राष्ट्रपति का शासन लागू हो जाए तू तू तू पूरे राज्य में तथा पूरे भारत में प्रधानमंत्री का शासन यानी राष्ट्रपति का शासन होगा

yadi bharat mein rashtrapati ka shasan laagu ho jaaye tu tu tu poore rajya mein tatha poore bharat mein pradhanmantri ka shasan yani rashtrapati ka shasan hoga

यदि भारत में राष्ट्रपति का शासन लागू हो जाए तू तू तू पूरे राज्य में तथा पूरे भारत में प्रध

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Gunjan

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आदिवासी के लिए राष्ट्रपति शासन जो होता है वह सत्य में भी लागू होता है जब सावधान सावधान को स्पष्ट बहुमत नहीं हो तो उसके मन में जो भी राइट्स वगैरा होता तो सब कुछ खत्म हो जाता तो अगर भारत में ऐसा हो जाएगा तो आज भी हमारे पोलिटिकल राइट्स वगैरा है तो वह सब खत्म हो जाते हैं जो रेशम के द्वारा और जो सरकार चाहती है फिर वही है जो है लागू किया जाता है

aadiwasi ke liye rashtrapati shasan jo hota hai vaah satya mein bhi laagu hota hai jab savdhaan savdhaan ko spasht bahumat nahi ho toh uske man mein jo bhi rights vagera hota toh sab kuch khatam ho jata toh agar bharat mein aisa ho jaega toh aaj bhi hamare political rights vagera hai toh vaah sab khatam ho jaate hain jo resham ke dwara aur jo sarkar chahti hai phir wahi hai jo hai laagu kiya jata hai

आदिवासी के लिए राष्ट्रपति शासन जो होता है वह सत्य में भी लागू होता है जब सावधान सावधान को

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Rahul kumar

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

किसी अपने बोला कि क्या भारत में राष्ट्रपति शासन लागू होता है तो क्या होगा अगर आज तक सबसे पहले राष्ट्रपति शासन कहां चली है इसमें जनता का नुकसान होता है राष्ट्रपति शासन अनुच्छेद 356 365 दोनों में है मध्य राष्ट्रपति कभी भी कोई राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर सकता है अगर इस पर संतुष्ट है कि राज्य सरकार जो है वह जो प्रावधान है उसके मुताबिक सही तरीके से काम नहीं कर रही है यह राज्यपाल का रिपोर्ट होता है उसके आधार पर ही है काम करती है तो विश्व के राष्ट्रपति राष्ट्रपति शासन लगाया जाने के 2 महीने के अंदर संसद में दोनों सदनों लोकसभा लोकसभा और राज्यसभा है दोनों इसका अनुमोदन करना बहुत जरूरी होता है इसके बीच में लोकसभा भंग हो जाती है लोकसभा नहीं होता है इस राज्य सभा द्वारा अनुमोदित के जाने के बाद नहीं लोकसभा अपने गठन पर एक महीने की वजह अनुमोदित किया जाना जरूरी होता है तो यह होता है बेसिकली राष्ट्रपति शासन अगर यह लागू होता है तो इससे जनता का ही नुकसान होता है इसमें लोकसभा इलेक्शन विधानसभा लेकिन दोनों होता है गवर्नमेंट काबिल नुकसान है इसके इसमें कि इसमें इलेक्शन फिर से कहना पड़ता है इसे राजस्व फिर से ज्यादा खर्च पड़ता है जिसने अरेंजमेंट करने पड़ते हैं तो कहीं भी फायदा नहीं है राष्ट्रपति शासन लागू नहीं किया जाता संवैधानिक तौर पर एक प्रावधान है मूसली जो सरकार चलती है राज्यसभा लोकसभा के विशेष पर चलती है एक जो सिस्टम बना हुआ है उसी के अनुसार से चलता है वही ऐसा ही राज व्यवस्था है

kisi apne bola ki kya bharat mein rashtrapati shasan laagu hota hai toh kya hoga agar aaj tak sabse pehle rashtrapati shasan kahaan chali hai isme janta ka nuksan hota hai rashtrapati shasan anuched 356 365 dono mein hai madhya rashtrapati kabhi bhi koi rajya mein rashtrapati shasan laagu kar sakta hai agar is par santusht hai ki rajya sarkar jo hai vaah jo pravadhan hai uske mutabik sahi tarike se kaam nahi kar rahi hai yah rajyapal ka report hota hai uske aadhaar par hi hai kaam karti hai toh vishwa ke rashtrapati rashtrapati shasan lagaya jaane ke 2 mahine ke andar sansad mein dono sadano lok sabha lok sabha aur rajya sabha hai dono iska anumodan karna bahut zaroori hota hai iske beech mein lok sabha bhang ho jaati hai lok sabha nahi hota hai is rajya sabha dwara anumodit ke jaane ke baad nahi lok sabha apne gathan par ek mahine ki wajah anumodit kiya jana zaroori hota hai toh yah hota hai basically rashtrapati shasan agar yah laagu hota hai toh isse janta ka hi nuksan hota hai isme lok sabha election vidhan sabha lekin dono hota hai government kaabil nuksan hai iske isme ki isme election phir se kehna padta hai ise rajaswa phir se zyada kharch padta hai jisne arrangement karne padte hain toh kahin bhi fayda nahi hai rashtrapati shasan laagu nahi kiya jata samvaidhanik taur par ek pravadhan hai muesli jo sarkar chalti hai rajya sabha lok sabha ke vishesh par chalti hai ek jo system bana hua hai usi ke anusaar se chalta hai wahi aisa hi raj vyavastha hai

किसी अपने बोला कि क्या भारत में राष्ट्रपति शासन लागू होता है तो क्या होगा अगर आज तक सबसे प

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