हमारे सुप्रीम कोर्ट के जज और यह मीडिया वाले कब ईमानदारी से काम करेंगे?...


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Amit Singh

Advocate

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हमारी सुप्रीम कोर्ट के जज जनवरी भंडारी सही काम करते हैं अप वालों को छोड़कर मीडिया वालों के लिए मैं ऐसा कहना उचित नहीं समझता मीडिया कर्मी भी जहां तक हो सकता है वह भी बमबारी सही काम करता है

hamari supreme court ke judge january bhandari sahi kaam karte hain up walon ko chhodkar media walon ke liye main aisa kehna uchit nahi samajhata media karmi bhi jaha tak ho sakta hai vaah bhi bambari sahi kaam karta hai

हमारी सुप्रीम कोर्ट के जज जनवरी भंडारी सही काम करते हैं अप वालों को छोड़कर मीडिया वालों

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ऐसे और सवाल
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Ansh jalandra

Motivational speaker & criminal lawyer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

विकी भैया सुप्रीम कोर्ट के जज तुम अंदर से ही काम कर रहे हैं तभी उस दिन बोर्ड की जो जाए और बता देना तो उनको कोई वकील भी नहीं बनाता उस दिन गुड़ की डिजाइन में क्या भ्रष्टा एक-एक दिन अपनी मर्जी से कुछ भी कह दिया रोहिल्ला मूवी में जो सुप्रीम कोर्ट ने 34 जजों की बेंच बैठती है वह सारे के सारे देखते हैं 121 देखी गई जो है 11 जो डिसीजन है उसको जाने कितनी बार ऐड किया जाता है तब जाकर के ऑडिशन नेता यह नहीं कि आप जो मर्जी लिख दिया और रही बात मीडिया की तो मीडिया तो काम है बात का बतंगड़ बनाना लेकिन आप जो कह रहे हो सुप्रीम कोर्ट तो आपको फोन उठाकर देखना ऐसी नहीं होता सब कुछ

vicky bhaiya supreme court ke judge tum andar se hi kaam kar rahe hain tabhi us din board ki jo jaaye aur bata dena toh unko koi vakil bhi nahi banata us din good ki design me kya bhrashta ek ek din apni marji se kuch bhi keh diya rohilla movie me jo supreme court ne 34 judgon ki bench baithati hai vaah saare ke saare dekhte hain 121 dekhi gayi jo hai 11 jo decision hai usko jaane kitni baar aid kiya jata hai tab jaakar ke audition neta yah nahi ki aap jo marji likh diya aur rahi baat media ki toh media toh kaam hai baat ka batangad banana lekin aap jo keh rahe ho supreme court toh aapko phone uthaakar dekhna aisi nahi hota sab kuch

विकी भैया सुप्रीम कोर्ट के जज तुम अंदर से ही काम कर रहे हैं तभी उस दिन बोर्ड की जो जाए और

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के जज और मीडिया कर्मी बहुत ही मेहनत और ईमानदारी से कार्य करते हैं यह हो सकता है क्या आप उनके किसी फैसले से सहमत ना हो लेकिन करवा सच्चाई यही है कि जब भी कोई फैसला होगा तो उससे कोई एक पथ सहमत नहीं होगा इसका यह कतई मतलब नहीं है कि वह फैसला बेमानी पूर्ण तरीके से किया गया है या फिर वह सही फैसला नहीं किया गया है सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बेहद ईमानदार और उच्चारण वाले होते हैं मीडिया कर्मी भी दिन रात मेहनत करके हम और आप तक जरूरत और देश दुनिया की खबरें पहुंचाते हैं

aapki jaankari ke liye bata de ki supreme court ke judge aur media karmi bahut hi mehnat aur imaandaari se karya karte hain yah ho sakta hai kya aap unke kisi faisle se sahmat na ho lekin karva sacchai yahi hai ki jab bhi koi faisla hoga toh usse koi ek path sahmat nahi hoga iska yah katai matlab nahi hai ki vaah faisla bemani purn tarike se kiya gaya hai ya phir vaah sahi faisla nahi kiya gaya hai supreme court ke nyayadhish behad imaandaar aur ucharan waale hote hain media karmi bhi din raat mehnat karke hum aur aap tak zarurat aur desh duniya ki khabren pahunchate hain

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के जज और मीडिया कर्मी बहुत ही मेहनत और ईमानदा

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S Bajpay

Yoga Expert | Beautician & Gharelu Nuskhe Expert

1:31
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपको मैं आपको बता दूं क्या आपने जो 2 लोगों पर प्रश्न लगाया है यह 90% ईमानदारी से काम करते हैं यदि आज के युग में प्रश्न तंत्र में यदि कोई टू लुक मंदार हैं दूसरों से ईमानदारी अभी भी मंजन किए हुए हैं और देश के बहुमत का 90% लोगों का 95% लोगों का यदि दो संस्थाओं पर विश्वास है तो यह सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट है ऑडियो पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के लोग बहुत बेहद ईमानदार होते हैं और मैं जान सकता हूं कि मीडिया में कुछ लोग तो सकती लेकिन आज भी बनी अपनी-अपनी क्योंकि आपको यह इस तरह की शंका क्यों हुई लेकिन मैं आपको बता दो आज भी 90% 95% भारतीय इंदौर संस्थाओं पर पूरी तरह से भरोसा करते हैं

aapko main aapko bata doon kya aapne jo 2 logo par prashna lagaya hai yah 90 imaandaari se kaam karte hain yadi aaj ke yug me prashna tantra me yadi koi to look mandar hain dusro se imaandaari abhi bhi manzan kiye hue hain aur desh ke bahumat ka 90 logo ka 95 logo ka yadi do sasthaon par vishwas hai toh yah supreme court highcourt hai audio par highcourt aur supreme court ke log bahut behad imaandaar hote hain aur main jaan sakta hoon ki media me kuch log toh sakti lekin aaj bhi bani apni apni kyonki aapko yah is tarah ki shanka kyon hui lekin main aapko bata do aaj bhi 90 95 bharatiya indore sasthaon par puri tarah se bharosa karte hain

आपको मैं आपको बता दूं क्या आपने जो 2 लोगों पर प्रश्न लगाया है यह 90% ईमानदारी से काम करते

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

सुप्रीम कोर्ट के जज और मीडिया वाले दोनों ही ईमानदारी से काम कर सकते हैं सुप्रीम कोर्ट के जज भारत सरकार के एक बहुत ही मुकेश होते हैं तो आप ऐसा नहीं कर सकते कि सुप्रीम कोर्ट अपनी ईमानदारी से काम नहीं कर रही है जहां तक मीडिया की बात है तो मीडिया के हर एक न्यूज़ पर हंड्रेड परसेंट विश्वास नहीं किया जा सकता है तो अगर मीडिया में कोई दिखाता है तो उससे आप भड़की नहीं उनकी न्यूज़ को सुनें अगर उस मीडिया के न्यूज़ से अगर आप प्रभावित नहीं होते हैं तो किसी दूसरे ने इसको देखें थैंक यू सो मच

supreme court ke judge aur media waale dono hi imaandaari se kaam kar sakte hain supreme court ke judge bharat sarkar ke ek bahut hi mukesh hote hain toh aap aisa nahi kar sakte ki supreme court apni imaandaari se kaam nahi kar rahi hai jaha tak media ki baat hai toh media ke har ek news par hundred percent vishwas nahi kiya ja sakta hai toh agar media me koi dikhaata hai toh usse aap bhadaki nahi unki news ko sunen agar us media ke news se agar aap prabhavit nahi hote hain toh kisi dusre ne isko dekhen thank you so match

सुप्रीम कोर्ट के जज और मीडिया वाले दोनों ही ईमानदारी से काम कर सकते हैं सुप्रीम कोर्ट के ज

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Harish Chand

Social Worker

1:38
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ही बहुत बड़ी विडंबना है कि जिस देश में न्याय करने वाले मीडिया वाले भ्रष्ट होंगे उस देश का क्या भविष्य होगा अब आप का सवाल है कि सुप्रीम कोर्ट के जज और मीडिया वाले को ईमानदारी से काम करें देखी सुप्रीम कोर्ट के जज अपडायट किसी के ऊपर आरोप नहीं लगा सकते नंबर एक बार हां नीचे के चित्र में मान सकते लेकिन आप इतने ऊपर देख कर बात करें कि सुप्रीम कोर्ट के जज का विमान दारी से काम करेंगे भाई वह इमानदारी से ही कार्य करते हैं और सराहनीय कार्य करते हैं और जो नहीं करता ते भाग्य की बातें दुर्भाग्य की बात है और बड़ी विडंबना है ऐसे भी अगर जज इस दुनिया में हैं यह हमारे देश के अंदर हैं जो भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाते हैं या रिश्वत लेते हैं या अपना कार्य से तरीके से नहीं करते हैं तो फिर तो इस देश का क्या होगा काम कब करेंगे अभी समय ट्रिक मंत्र

hi bahut badi widambana hai ki jis desh me nyay karne waale media waale bhrasht honge us desh ka kya bhavishya hoga ab aap ka sawaal hai ki supreme court ke judge aur media waale ko imaandaari se kaam kare dekhi supreme court ke judge apadayat kisi ke upar aarop nahi laga sakte number ek baar haan niche ke chitra me maan sakte lekin aap itne upar dekh kar baat kare ki supreme court ke judge ka Vimaan dari se kaam karenge bhai vaah imaandari se hi karya karte hain aur sarahniya karya karte hain aur jo nahi karta te bhagya ki batein durbhagya ki baat hai aur badi widambana hai aise bhi agar judge is duniya me hain yah hamare desh ke andar hain jo bhrashtachar me lipt paye jaate hain ya rishwat lete hain ya apna karya se tarike se nahi karte hain toh phir toh is desh ka kya hoga kaam kab karenge abhi samay trick mantra

ही बहुत बड़ी विडंबना है कि जिस देश में न्याय करने वाले मीडिया वाले भ्रष्ट होंगे उस देश का

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Tarun Rawat

Advocate

0:40
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका यह सवाल कतई गलत है कि सुप्रीम कोर्ट के जज और मीडिया वाले कब ईमानदारी से काम करेंगे मुझे लगता है आपके मन में चोर है इसलिए आप सुप्रीम कोर्ट के जज और मीडिया वालों को ईमानदारी से काम करने के लिए कह रहे हैं जबकि यह लोग सच्चाई से सरोकार रखते हैं और सुप्रीम कोर्ट के जज पर लांछन लगाना आपको शोभा नहीं देता मीडिया वाले पूरी बातें हमेशा निरंतर आपको न्यूज़ चैनल पर दिखाते हैं तो यह आपके आपको शोभा नहीं देता या तो आपके मन में चोर है या फिर आप खुद ईमानदार नहीं है

aapka yah sawaal katai galat hai ki supreme court ke judge aur media waale kab imaandaari se kaam karenge mujhe lagta hai aapke man me chor hai isliye aap supreme court ke judge aur media walon ko imaandaari se kaam karne ke liye keh rahe hain jabki yah log sacchai se sarokar rakhte hain aur supreme court ke judge par lanchan lagana aapko shobha nahi deta media waale puri batein hamesha nirantar aapko news channel par dikhate hain toh yah aapke aapko shobha nahi deta ya toh aapke man me chor hai ya phir aap khud imaandaar nahi hai

आपका यह सवाल कतई गलत है कि सुप्रीम कोर्ट के जज और मीडिया वाले कब ईमानदारी से काम करेंगे मु

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हमारे सुप्रीम कोर्ट का जज ईमानदारी से काम करते हैं या नहीं इस सवाल से पहले आप अपनी अंतरात्मा से विचार करिए कहीं कहां और किस समय आप ने ईमानदारी क्या पूर्ण रूप से पूर्णतया निभाई क्या आप में भी कमियां हैं किसी पर किसी प्रकार की उंगली अथवा दूध लगाने से पहले स्वयं के अंदर झांकना चाहिए स्वयं में ही परिवर्तन आने से दूसरे में परिवर्तन की आशा की जा सकती है

hamare supreme court ka judge imaandaari se kaam karte hain ya nahi is sawaal se pehle aap apni antaraatma se vichar kariye kahin kaha aur kis samay aap ne imaandaari kya purn roop se purnataya nibhaai kya aap me bhi kamiyan hain kisi par kisi prakar ki ungli athva doodh lagane se pehle swayam ke andar jhankana chahiye swayam me hi parivartan aane se dusre me parivartan ki asha ki ja sakti hai

हमारे सुप्रीम कोर्ट का जज ईमानदारी से काम करते हैं या नहीं इस सवाल से पहले आप अपनी अंतरात्

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यकीन मानिए 99% सुप्रीम कोर्ट जज इमानदारी से ही काम करते हैं वहां पर आप जाकर भी बेईमानी नहीं कर पाते हैं वह इतनी बड़ी सीट होती है जब फाइल वहां पर जाती है तो उसमें सिर्फ पेट पर ही फैसला करना होता है क्योंकि वह जो जजमेंट होते हैं वह पूरे देश में फॉलो होते हैं वह लो है तो हम कई बार सॉन्ग ध्यान देकर ऐसा सोच लेते हैं कि वह गलत करते हैं हां टेक्निकल किसी से भी हो सकती है इसके अलावा मुझे नहीं लगता कि वहां वह इमानदारी से फैसले नहीं करते हैं वहां पर बनती है डिस्कस करके कैसे किए जाते हैं कई बार कॉन्स्टिट्यूशन जिसमें 5 जज होते हैं वह फैसले करते हैं तो वह पांचों की ओपिनियन आती है फिर उनका कंपनी से निकाल के फैसले के साथ तो ऐसा आप बिल्कुल नहीं सोचे कि वह गलत फैसले करते 99% सही फैसले होते हैं ईमानदारी से होते हैं एक परसेंट अपवाद तो हर जगह होते हैं उसके लिए मैं नहीं कह रहा तो विश्वास रखें न्यायपालिका में और उसी ने देश को थोड़ा बैलेंस बनाकर रखा हुआ है

yakin maniye 99 supreme court judge imaandari se hi kaam karte hain wahan par aap jaakar bhi baimani nahi kar paate hain vaah itni badi seat hoti hai jab file wahan par jaati hai toh usme sirf pet par hi faisla karna hota hai kyonki vaah jo judgement hote hain vaah poore desh me follow hote hain vaah lo hai toh hum kai baar song dhyan dekar aisa soch lete hain ki vaah galat karte hain haan technical kisi se bhi ho sakti hai iske alava mujhe nahi lagta ki wahan vaah imaandari se faisle nahi karte hain wahan par banti hai discs karke kaise kiye jaate hain kai baar Constitution jisme 5 judge hote hain vaah faisle karte hain toh vaah panchon ki opinion aati hai phir unka company se nikaal ke faisle ke saath toh aisa aap bilkul nahi soche ki vaah galat faisle karte 99 sahi faisle hote hain imaandaari se hote hain ek percent apavad toh har jagah hote hain uske liye main nahi keh raha toh vishwas rakhen nyaypalika me aur usi ne desh ko thoda balance banakar rakha hua hai

यकीन मानिए 99% सुप्रीम कोर्ट जज इमानदारी से ही काम करते हैं वहां पर आप जाकर भी बेईमानी नही

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Sapna

Social Worker

4:20
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न है हमारे सुप्रीम कोर्ट के जज और यह मीडिया वाले तब तक ईमानदारी से काम नहीं करेंगे तो आपके प्रश्न के आंसर सहित मैं आपको बताना चाहूंगी कि हमारे सुप्रीम कोर्ट के जज और मीडिया वाले वही करते हैं जो हम उन से करवाते हैं इसलिए दोस्ती हम ही होते हैं दोस्ती वो नहीं होंगे क्योंकि दोस्ती करने वाला होता है मीडिया वाले ईमानदारी से काम कैसे करेंगे हम जब एक उदाहरण से आप मेरी बात को समझ लीजिए कि मान लो जैसे हम बीमार हैं हम किसी डॉक्टर के पास गए और हमने उस डॉक्टर को अपनी बीमारी के बारे में सही जानकारी दी नहीं तो उस डॉक्टर ने अपने मन मुताबिक हमें दवाई दे दी और हम उस दवाई को लेकर आए हमने उस दवाई को खाया जो हमारी समस्या थी और बढ़ गई उसका परिणाम क्या निकला हमसे पूछा गया कि आप तो समस्या के लिए दवाई लेकर आए थे तो आपकी समस्या ठीक होने की जगह बड़े कैसे गई तो हमने उसमें अपनी गलती को नहीं स्वीकार किया गलती इसमें हमारी ही गई क्योंकि हमने डॉक्टर को सही जानकारी दी ही नहीं तो डॉक्टर हमें सही दवाई कैसे देता यही कारण है कि जो हमारे सुप्रीम कोर्ट के जज और जो मीडिया वाले हैं उनको हम सही तरीके से अपनी समस्या के लिए जो सामने आना चाहिए उस तरीके से हम सामने आते नहीं है इसीलिए हमारी समस्या का सही तरीके से ईमानदारी से निराकरण होना चाहिए वह नहीं हो पाता और हम दोस्त मीडिया वालों को और सुप्रीम कोर्ट के जज को देते हैं जबकि गलतियां हमारी स्वयं की होती हैं इसीलिए तो कहा गया है यह पहले अपने अंदर झांक हैं तब दूसरों पर दोष लगाएं इसलिए मैं तो आपको यही बताना चाहूंगी कि हम से जो गलती हुई है उस पर विचार कीजिए उसके बाद दूसरों पर कोई 2 सालों कुछ कीजिए क्योंकि गलती हम स्वयं करते हैं सब गलती दूसरों के रूप में वह दिखाई देती है इसीलिए पहले कोई काम करने से पहले उस पर विचार कीजिए अपने दिमाग से सोचिए तब उस समस्या का कोई निराकरण निकालिए यदि हम सोच समझ के कोई काम करते हैं और उस काम पर विशेष रूप से ध्यान देते हैं तो ऐसा कोई काम खराब हो ही नहीं पाता और ना कोई जो दोस्ती दिखाई देता है ना फिर उसमें कोई दोस्त नजर आता है क्योंकि हमें अपने जब विचार करते हैं तो हमें अपनी स्वयं की गलतियां नजर आ जाती हैं और फिर हम अपनी स्वयं की गलतियों को सुधारते हैं और आगे फिर किसी गलती को घूमने के लिए मौका ही नहीं देते तो आप भी ऐसा और दूसरों पर दोष लगाना बंद करिए अगर अगर आप किसी को गलत रूप में देख रहे हैं तो उस गलती के लिए पहले अपने स्वयं के विचार कीजिए इसमें हमारी भी तो कोई गलती नहीं रही जो हमें दूसरों में कोई दोस्त नजर आया है इससे आपको जो आपको दोस्त नजर आया था वह दोष आपका ठीक हो जाएगा सपना शर्मा

aapka prashna hai hamare supreme court ke judge aur yah media waale tab tak imaandaari se kaam nahi karenge toh aapke prashna ke answer sahit main aapko batana chahungi ki hamare supreme court ke judge aur media waale wahi karte hain jo hum un se karwaate hain isliye dosti hum hi hote hain dosti vo nahi honge kyonki dosti karne vala hota hai media waale imaandaari se kaam kaise karenge hum jab ek udaharan se aap meri baat ko samajh lijiye ki maan lo jaise hum bimar hain hum kisi doctor ke paas gaye aur humne us doctor ko apni bimari ke bare me sahi jaankari di nahi toh us doctor ne apne man mutabik hamein dawai de di aur hum us dawai ko lekar aaye humne us dawai ko khaya jo hamari samasya thi aur badh gayi uska parinam kya nikala humse poocha gaya ki aap toh samasya ke liye dawai lekar aaye the toh aapki samasya theek hone ki jagah bade kaise gayi toh humne usme apni galti ko nahi sweekar kiya galti isme hamari hi gayi kyonki humne doctor ko sahi jaankari di hi nahi toh doctor hamein sahi dawai kaise deta yahi karan hai ki jo hamare supreme court ke judge aur jo media waale hain unko hum sahi tarike se apni samasya ke liye jo saamne aana chahiye us tarike se hum saamne aate nahi hai isliye hamari samasya ka sahi tarike se imaandaari se nirakaran hona chahiye vaah nahi ho pata aur hum dost media walon ko aur supreme court ke judge ko dete hain jabki galtiya hamari swayam ki hoti hain isliye toh kaha gaya hai yah pehle apne andar jhank hain tab dusro par dosh lagaye isliye main toh aapko yahi batana chahungi ki hum se jo galti hui hai us par vichar kijiye uske baad dusro par koi 2 salon kuch kijiye kyonki galti hum swayam karte hain sab galti dusro ke roop me vaah dikhai deti hai isliye pehle koi kaam karne se pehle us par vichar kijiye apne dimag se sochiye tab us samasya ka koi nirakaran nikaliye yadi hum soch samajh ke koi kaam karte hain aur us kaam par vishesh roop se dhyan dete hain toh aisa koi kaam kharab ho hi nahi pata aur na koi jo dosti dikhai deta hai na phir usme koi dost nazar aata hai kyonki hamein apne jab vichar karte hain toh hamein apni swayam ki galtiya nazar aa jaati hain aur phir hum apni swayam ki galatiyon ko sudharte hain aur aage phir kisi galti ko ghoomne ke liye mauka hi nahi dete toh aap bhi aisa aur dusro par dosh lagana band kariye agar agar aap kisi ko galat roop me dekh rahe hain toh us galti ke liye pehle apne swayam ke vichar kijiye isme hamari bhi toh koi galti nahi rahi jo hamein dusro me koi dost nazar aaya hai isse aapko jo aapko dost nazar aaya tha vaah dosh aapka theek ho jaega sapna sharma

आपका प्रश्न है हमारे सुप्रीम कोर्ट के जज और यह मीडिया वाले तब तक ईमानदारी से काम नहीं करें

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इस बात को कह पाना मुश्किल बहुत ही ज्यादा है क्योंकि न्यायपालिका कार्यपालिका और विधायिका यह सुनो कहानी कोलागला कंट्रोल कोई हैक कर रहा है जब तक यह खत्म नहीं होगा तब तक

is baat ko keh paana mushkil bahut hi zyada hai kyonki nyaypalika karyapalika aur vidhayika yah suno kahani kolagala control koi hack kar raha hai jab tak yah khatam nahi hoga tab tak

इस बात को कह पाना मुश्किल बहुत ही ज्यादा है क्योंकि न्यायपालिका कार्यपालिका और विधायिका यह

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आपका प्रश्न है कि हमारे सुप्रीम कोर्ट के जजों के मीडिया वाले कभी मंदिर से काम करेंगे दिखी मीडिया के संबंध में तो मैं ज्यादा नहीं कहना चाहूंगा मीडिया भी हम अंदर से काम कर रही है कुछ एक चैनल है कुछ एक पत्रकार है जो हर उस में रहते हैं आप किसी भी समुदाय भेजे लेकिन माननीय सुप्रीम कोर्ट ईमानदारी से काम कर रही है और यह मनी की न्यायपालिका ने इस देश को बचाया हुआ है अगर सुप्रीम कोर्ट नहीं होता तो यह देश जिस स्तर पर आ जा रहा है वहां पर नहीं होता सुप्रीम कोर्ट का ही एक डर है जिसके कारण लोग न्याय को मान रहे हैं इसलिए आपका यह कथन सही नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट के जज काम नहीं कर रहे हैं आज भी बंदे से काम कर रहे हैं और करते रहेंगे

aapka prashna hai ki hamare supreme court ke judgon ke media waale kabhi mandir se kaam karenge dikhi media ke sambandh me toh main zyada nahi kehna chahunga media bhi hum andar se kaam kar rahi hai kuch ek channel hai kuch ek patrakar hai jo har us me rehte hain aap kisi bhi samuday bheje lekin mananiya supreme court imaandaari se kaam kar rahi hai aur yah money ki nyaypalika ne is desh ko bachaya hua hai agar supreme court nahi hota toh yah desh jis sthar par aa ja raha hai wahan par nahi hota supreme court ka hi ek dar hai jiske karan log nyay ko maan rahe hain isliye aapka yah kathan sahi nahi hai ki supreme court ke judge kaam nahi kar rahe hain aaj bhi bande se kaam kar rahe hain aur karte rahenge

आपका प्रश्न है कि हमारे सुप्रीम कोर्ट के जजों के मीडिया वाले कभी मंदिर से काम करेंगे दिखी

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आप ऐसे पर्टिकुलर ले किसी के ऊपर पॉइंट आउट नहीं कर सकते लोग ईमानदारी के ऊपर पॉइंट आउट नहीं किया जा सकता जब तक आप उन लोगों को जो है वह आसमां नहीं सकते और हमारे लॉयर्स और हमारे गजल जो है वह कानून के हिसाब से फैसला करते हैं कोई अपना पर्सनल किसी का कोई भी जो है वह किसी से भी रंजिश नहीं होती है और जातक मीडिया का सवाल है मीडिया जो है वह सिर्फ और सिर्फ वही चीज दिखाती है जिसके अंदर पब्लिक को इंटरटेनमेंट मिलता है झूठ सच करना मीडिया का काम है तो मीडिया के बारे में तो मैं यही कहूंगा कि जिससे ज्यादा से ज्यादा जो है वो उनको झूठ दिखाने के पैसे मिलते हैं और मैं चला आप लोगों को यह दूंगा कि कम से कम मीडिया की बात पर जाया करें जब तक आप उस चीज को ना देखने और पढ़ने वाले

aap aise particular le kisi ke upar point out nahi kar sakte log imaandaari ke upar point out nahi kiya ja sakta jab tak aap un logo ko jo hai vaah asaman nahi sakte aur hamare lawyers aur hamare gazal jo hai vaah kanoon ke hisab se faisla karte hain koi apna personal kisi ka koi bhi jo hai vaah kisi se bhi Ranjish nahi hoti hai aur jatak media ka sawaal hai media jo hai vaah sirf aur sirf wahi cheez dikhati hai jiske andar public ko entertainment milta hai jhuth sach karna media ka kaam hai toh media ke bare me toh main yahi kahunga ki jisse zyada se zyada jo hai vo unko jhuth dikhane ke paise milte hain aur main chala aap logo ko yah dunga ki kam se kam media ki baat par jaya kare jab tak aap us cheez ko na dekhne aur padhne waale

आप ऐसे पर्टिकुलर ले किसी के ऊपर पॉइंट आउट नहीं कर सकते लोग ईमानदारी के ऊपर पॉइंट आउट नहीं

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपके द्वारा पूछा गया सवाल तो बहुत अच्छी बात नहीं है और मीडिया वाले कब इमानदारी से काम करें हमारी मीडिया वाले भी हमारे हैं लेकिन कहीं खो जाते हैं वह भी हम ही लोग का हम लोग खुद जब ईमानदार होंगे तो वह लोग मुझको खुद ईमानदार हो जाएंगे पहले आपको इमानदार होना पड़ेगा आपके द्वारा सरकार का टैक्स चोरी बंद करना पड़ेगा टोल टैक्स बचाने के लिए छोटे रास्ते से जाना बंद करना होगा छोटे छोटे अधिकारियों को अपना काम निकालने के लिए घूस देना बंद करना पड़ेगा जब आप सुधरेंगे तो सारी दुनिया से आप खुद भी सोच रहे हैं दूसरों को भी सुधारे खुद भी खुश ना दें ईमानदार होने और दूसरों को भी बंधक

aapke dwara poocha gaya sawaal toh bahut achi baat nahi hai aur media waale kab imaandari se kaam kare hamari media waale bhi hamare hain lekin kahin kho jaate hain vaah bhi hum hi log ka hum log khud jab imaandaar honge toh vaah log mujhko khud imaandaar ho jaenge pehle aapko imaandaar hona padega aapke dwara sarkar ka tax chori band karna padega toll tax bachane ke liye chote raste se jana band karna hoga chote chote adhikaariyo ko apna kaam nikalne ke liye ghus dena band karna padega jab aap sudhrenge toh saari duniya se aap khud bhi soch rahe hain dusro ko bhi sudhare khud bhi khush na de imaandaar hone aur dusro ko bhi bandhak

आपके द्वारा पूछा गया सवाल तो बहुत अच्छी बात नहीं है और मीडिया वाले कब इमानदारी से काम करें

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार आपका क्वेश्चन बहुत अच्छा है लेकिन इन मेरी राय है कि पहले आप तो इमानदार बनिए जिन बंधुओं ने क्वेश्चन पूछा है मैं उनसे पूछना चाहता हूं वह कितना ईमानदार अपने दिल से पूछो वह कितना सच बोलते हैं हमें दूसरों को सुधारने से पहले कुछ भरना होगा तुम्हारा यही निवेदन है आप खुश उधर जाइए खुद ईमानदार बन जाइए जरूर समाज को आप सभा सकते हैं तो पहले खुश होगा थैंक यू

namaskar aapka question bahut accha hai lekin in meri rai hai ki pehle aap toh imaandaar baniye jin bandhuon ne question poocha hai main unse poochna chahta hoon vaah kitna imaandaar apne dil se pucho vaah kitna sach bolte hain hamein dusro ko sudhaarne se pehle kuch bharna hoga tumhara yahi nivedan hai aap khush udhar jaiye khud imaandaar ban jaiye zaroor samaj ko aap sabha sakte hain toh pehle khush hoga thank you

नमस्कार आपका क्वेश्चन बहुत अच्छा है लेकिन इन मेरी राय है कि पहले आप तो इमानदार बनिए जिन बं

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देखिए बिना साक्ष्य के आधार पर किसी देश की मीडिया या किसी देश की न्यायपालिका पर ऐसे लांछन लगाना बहुत ही गलत बात है हां यदि आपके पास कोई ऐसे साक्ष्य मौजूद हैं वर्तमान में के मीडिया या न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है तूने आप लेकर आइए अब पर हायर कोर्ट में जाइए और ऐसा नहीं है सब अपना ईमानदारी से काम कर रहे हैं लेकिन बात तो यही है कि हमें विश्वास बनाए रखना है जहां हमारा विश्वास खत्म होता है वहां में ऐसा लगता है कि अभी है ईमानदारी से काम नहीं करेंगे ऐसे सभी न्यायालय ईमानदारी से काम कर रहे हैं भरोसा बनाए रखना चाहिए तो एक भरोसा बनाए रखिए मीडिया भी अपना स्वतंत्र तरीके से काम कर रही है न्यायपालिका भी अपना स्वतंत्र जी कैसे काम कर रही है व्यवस्थापिका कार्यपालिका सभी अपने स्वतंत्र तरीके से काम सभी स्वतंत्र हैं आप भी स्वतंत्र हो यदि आपके पास किसी संस्था न्यायपालिका मीडिया व्यवस्थापिका कार्यपालिका के विरुद्ध ऐसे साक्ष्य हैं कि यह अगर यह बेईमानी कर रही है तो आपने उजागर कर सकते आप लेकर आ सकते हो आपको न्याय जा सकते हो तो बगैर किसी देश के किसी पर लांछन लगाना यह सही बात नहीं अगर आपके पास है तो आप उसे पब्लिक कर सकते हो न्यायालय लेकर आ सकते हो और उन्हें उन पर कायम रह सकते हो क्योंकि आप कह रहे हो कि ईमानदारी से काम करेंगे तो मेरा मानना यह है कि आपके मन में यह के लिए ईमानदारी से काम नहीं कर रहे हैं अब यही मांधारी से काम नहीं कर रहे हैं तो इस प्रश्न का स्कोर साबित करने का भार बढ़ना ग्रुप आपके ऊपर है आप इसे साबित करिए कि यह ईमानदारी से काम नहीं कर रहे हैं धन्यवाद

dekhiye bina sakshya ke aadhar par kisi desh ki media ya kisi desh ki nyaypalika par aise lanchan lagana bahut hi galat baat hai haan yadi aapke paas koi aise sakshya maujud hain vartaman me ke media ya nyaypalika me bhrashtachar hai tune aap lekar aaiye ab par hire court me jaiye aur aisa nahi hai sab apna imaandaari se kaam kar rahe hain lekin baat toh yahi hai ki hamein vishwas banaye rakhna hai jaha hamara vishwas khatam hota hai wahan me aisa lagta hai ki abhi hai imaandaari se kaam nahi karenge aise sabhi nyayalaya imaandaari se kaam kar rahe hain bharosa banaye rakhna chahiye toh ek bharosa banaye rakhiye media bhi apna swatantra tarike se kaam kar rahi hai nyaypalika bhi apna swatantra ji kaise kaam kar rahi hai vyavasthapika karyapalika sabhi apne swatantra tarike se kaam sabhi swatantra hain aap bhi swatantra ho yadi aapke paas kisi sanstha nyaypalika media vyavasthapika karyapalika ke viruddh aise sakshya hain ki yah agar yah baimani kar rahi hai toh aapne ujagar kar sakte aap lekar aa sakte ho aapko nyay ja sakte ho toh bagair kisi desh ke kisi par lanchan lagana yah sahi baat nahi agar aapke paas hai toh aap use public kar sakte ho nyayalaya lekar aa sakte ho aur unhe un par kayam reh sakte ho kyonki aap keh rahe ho ki imaandaari se kaam karenge toh mera manana yah hai ki aapke man me yah ke liye imaandaari se kaam nahi kar rahe hain ab yahi mandhari se kaam nahi kar rahe hain toh is prashna ka score saabit karne ka bhar badhana group aapke upar hai aap ise saabit kariye ki yah imaandaari se kaam nahi kar rahe hain dhanyavad

देखिए बिना साक्ष्य के आधार पर किसी देश की मीडिया या किसी देश की न्यायपालिका पर ऐसे लांछन ल

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Ram kumar

Advocate High Court Allahabad

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मीडिया बेसिकली आने वाली इनफॉरमेशन को कितनी जवाब दे तरीके से समाज में रखती है यह इस बात पर निर्भर करता कि समाज को इसकी कितनी जरूरत है

media basically aane wali information ko kitni jawab de tarike se samaj me rakhti hai yah is baat par nirbhar karta ki samaj ko iski kitni zarurat hai

मीडिया बेसिकली आने वाली इनफॉरमेशन को कितनी जवाब दे तरीके से समाज में रखती है यह इस बात पर

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मीडिया को भारतीय संविधान में विशेष स्थान दिया गया था और यह कहा गया था कि न्यायपालिका विधायिका एवं कार्यपालिका के पश्चात जो समाचार पत्र के चौथे लोकतंत्र के चौथे पिलर के रूप में चौथे स्तंभ के रूप में देश को स्थायित्व प्रदान करेंगे परंतु आज के समय में मीडिया सबसे अधिक करप्ट है और कोई भी कानून इन्हें लगाम लगाने के लिए सही घटना ना बताए जाने पर दंडित करने के लिए अभी तक नहीं आया है रही बात न्यायाधीशों की न्यायपालिका है अधिकांश अपना कार्य मांधारी से करते हैं बहुत कम ही है देखने में आया है कि वे करप्शन का शिकार है परंतु न्यायपालिका में बैठे हुए लोग इंसान है एवं उनका भी मानवीय पहलू पर झुकाव हो सकता है उनके स्वयं के राजनैतिक मत भी हो सकते हैं तब ऐसी स्थिति में हमें कई बार देखने को मिलता है कि नए बालिकाओं द्वारा दिया गया मैंने कई बार सरकार के पक्ष में होता है जबकि वह निर्णय जनता के पक्ष में होना चाहिए था तब यह माना जा सकता है कि वह निर्णय देने वाले न्यायाधीश उनकी व्यक्तिगत झुकाव है उसी तरह की राजनीतिक पार्टी के साथ रही होगी इसलिए उनके द्वारा इस प्रकार का निर्णय दिया गया है

media ko bharatiya samvidhan me vishesh sthan diya gaya tha aur yah kaha gaya tha ki nyaypalika vidhayika evam karyapalika ke pashchat jo samachar patra ke chauthe loktantra ke chauthe pillar ke roop me chauthe stambh ke roop me desh ko sthaayitv pradan karenge parantu aaj ke samay me media sabse adhik corrupt hai aur koi bhi kanoon inhen lagaam lagane ke liye sahi ghatna na bataye jaane par dandit karne ke liye abhi tak nahi aaya hai rahi baat nyaydhisho ki nyaypalika hai adhikaansh apna karya mandhari se karte hain bahut kam hi hai dekhne me aaya hai ki ve corruption ka shikaar hai parantu nyaypalika me baithe hue log insaan hai evam unka bhi manviya pahaloo par jhukaav ho sakta hai unke swayam ke rajnaitik mat bhi ho sakte hain tab aisi sthiti me hamein kai baar dekhne ko milta hai ki naye balikaon dwara diya gaya maine kai baar sarkar ke paksh me hota hai jabki vaah nirnay janta ke paksh me hona chahiye tha tab yah mana ja sakta hai ki vaah nirnay dene waale nyayadhish unki vyaktigat jhukaav hai usi tarah ki raajnitik party ke saath rahi hogi isliye unke dwara is prakar ka nirnay diya gaya hai

मीडिया को भारतीय संविधान में विशेष स्थान दिया गया था और यह कहा गया था कि न्यायपालिका विधा

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सुप्रीम कोर्ट के जज तथा मीडिया वाले हमेशा ही ईमानदारी से काम करते हैं सबकी अपनी अपनी धारणा है सबकी अपनी अपनी सोच है कोई किसी को कुछ गलत कहता है कोई किसी को कुछ गलत कहता है इसमें आप यह नहीं कह सकते कि कौन गलत कर रहा है और कौन सही कर रहा है आप क्या करते हैं सबसे पहले आप देखें अपने आप को दे देना आप अपने आप को संभाल लेंगे उस दिन आप देखेंगे कि वह लोग मजबूरी का कारण होता है कब कैसे गलत काम होता है क्यों होता है आपको खुद लाइफ में जवाब मिल जाएंगे इन हर बातों का जवाब आप खुद है अपने आप से सवाल पूछे अपने दिनचर्या और कार्यों को देखें और आपको खुद जवाब सब मिल जाएंगे सारे सवालों के

supreme court ke judge tatha media waale hamesha hi imaandaari se kaam karte hain sabki apni apni dharana hai sabki apni apni soch hai koi kisi ko kuch galat kahata hai koi kisi ko kuch galat kahata hai isme aap yah nahi keh sakte ki kaun galat kar raha hai aur kaun sahi kar raha hai aap kya karte hain sabse pehle aap dekhen apne aap ko de dena aap apne aap ko sambhaal lenge us din aap dekhenge ki vaah log majburi ka karan hota hai kab kaise galat kaam hota hai kyon hota hai aapko khud life me jawab mil jaenge in har baaton ka jawab aap khud hai apne aap se sawaal pooche apne dincharya aur karyo ko dekhen aur aapko khud jawab sab mil jaenge saare sawalon ke

सुप्रीम कोर्ट के जज तथा मीडिया वाले हमेशा ही ईमानदारी से काम करते हैं सबकी अपनी अपनी धारणा

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नमस्कार आपका प्रश्न है कि हमारे सुप्रीम कोर्ट के जज और यह मीडिया वाले कब तक ईमानदारी से काम करेंगे देखिए सर मैं एक अधिवक्ता हूं जो पिछले 5 साल से दिल्ली में B4 सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहा हूं जहां तक ईमानदारी की बात है तो ऐसा सिर्फ आपको लगता है कि न्यायधीश चाहे वह सुप्रीम कोर्ट के हो है वह हाईकोर्ट के चाहे को डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के अपना काम ईमानदारी से नहीं करते क्योंकि जो मानसिकता लोगों ने उनके लिए बनाई है वह बिल्कुल गलत है अगर निर्णय आपके मन के मुताबिक आता है तो उन्होंने ईमानदारी से काम किया अगर नेट आपके मन के मुताबिक नहीं आता तो आप सोचते हो कि सुप्रीम कोर्ट के जज इमानदारी से काम नहीं कर सकते फिर भी अगर आपको कोई ऐसा लगता है कि सुप्रीम कोर्ट के तिमाही से काम नहीं करते तो आप यह मुद्दा सबूत के साथ ही मुद्दत चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के समक्ष रख सकते हैं वे लेटर हुए पीआईएल धन्यवाद

namaskar aapka prashna hai ki hamare supreme court ke judge aur yah media waale kab tak imaandaari se kaam karenge dekhiye sir main ek adhivakta hoon jo pichle 5 saal se delhi me B4 supreme court high court district court me practice kar raha hoon jaha tak imaandaari ki baat hai toh aisa sirf aapko lagta hai ki nyayadhish chahen vaah supreme court ke ho hai vaah highcourt ke chahen ko district court ke apna kaam imaandaari se nahi karte kyonki jo mansikta logo ne unke liye banai hai vaah bilkul galat hai agar nirnay aapke man ke mutabik aata hai toh unhone imaandaari se kaam kiya agar net aapke man ke mutabik nahi aata toh aap sochte ho ki supreme court ke judge imaandari se kaam nahi kar sakte phir bhi agar aapko koi aisa lagta hai ki supreme court ke timaahi se kaam nahi karte toh aap yah mudda sabut ke saath hi muddat chief justice of india ke samaksh rakh sakte hain ve letter hue PIL dhanyavad

नमस्कार आपका प्रश्न है कि हमारे सुप्रीम कोर्ट के जज और यह मीडिया वाले कब तक ईमानदारी से क

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Yogender Dhillon

Law Educator , Advocate,RTI Activist , Motivational Coach

1:07
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यह कैसा सवाल है कि हमारी मीडिया और हमारी सुप्रीम कोर्ट में ईमानदार लोग नहीं हैं ईमानदारी से काम नहीं करते हैं ऐसा नहीं है जी और सुप्रीम कोर्ट में अगर हम बात करें तो और सारी चीजों की बजाय बहुत फेयर काम चलता है पहली बात दूसरी बात कि किसी भी आदमी अगर उस पोस्ट पर बैठा है और कोई काम करता है तो उसको आप हमेशा यह मत समझो उसने इमानदारी से काम नहीं किया उसके सामने सिचुएशन होती है उसको भी कुछ स्टेशनों से कई बार इधर लगता है दूसरे आदमी को ईमानदारी नहीं लगती है बट मैं यह भी नहीं कर सकती हूं कि हंड्रेड परसेंट ईमानदारी से करते हैं सवाल तो है लेकिन कब करेंगे कौन डिसाइड कर सकता है वह लोग उस चीज का अप लेने के लिए तैयार होंगे क्योंकि हम जैसे लोगों को सामने आना होगा धीरे-धीरे आएगा पर हम लोगों को आना होगा सामने लड़ने के लिए

yah kaisa sawaal hai ki hamari media aur hamari supreme court me imaandaar log nahi hain imaandaari se kaam nahi karte hain aisa nahi hai ji aur supreme court me agar hum baat kare toh aur saari chijon ki bajay bahut fair kaam chalta hai pehli baat dusri baat ki kisi bhi aadmi agar us post par baitha hai aur koi kaam karta hai toh usko aap hamesha yah mat samjho usne imaandari se kaam nahi kiya uske saamne situation hoti hai usko bhi kuch stationo se kai baar idhar lagta hai dusre aadmi ko imaandaari nahi lagti hai but main yah bhi nahi kar sakti hoon ki hundred percent imaandaari se karte hain sawaal toh hai lekin kab karenge kaun decide kar sakta hai vaah log us cheez ka up lene ke liye taiyar honge kyonki hum jaise logo ko saamne aana hoga dhire dhire aayega par hum logo ko aana hoga saamne ladane ke liye

यह कैसा सवाल है कि हमारी मीडिया और हमारी सुप्रीम कोर्ट में ईमानदार लोग नहीं हैं ईमानदारी स

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सारे न्यायालय ईमानदारी से कार्य करते हैं केवल हारने वाले की नजर में को नहीं मानता है तो सच बताओ आज भी हमारे न्यायालय की मंदिरों में सृष्टि जी सुपरहिट का ही पालन सत्यमेव जयते

saare nyayalaya imaandaari se karya karte hain keval haarne waale ki nazar me ko nahi maanta hai toh sach batao aaj bhi hamare nyayalaya ki mandiro me shrishti ji superhit ka hi palan satyamev jayate

सारे न्यायालय ईमानदारी से कार्य करते हैं केवल हारने वाले की नजर में को नहीं मानता है तो सच

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Dileep Mawai

Advocate

0:20
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न्यायपालिका से राज्यपाल का जो यह लोकतंत्र है इसको अगर दूर रखा जाए ना तो हमारी न्यायपालिका अच्छा काम करेगी तो सुप्रीम कोर्ट जो आदेश करेगी उसको कोई मना नहीं कर सकता है

nyaypalika se rajyapal ka jo yah loktantra hai isko agar dur rakha jaaye na toh hamari nyaypalika accha kaam karegi toh supreme court jo aadesh karegi usko koi mana nahi kar sakta hai

न्यायपालिका से राज्यपाल का जो यह लोकतंत्र है इसको अगर दूर रखा जाए ना तो हमारी न्यायपालिका

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सुप्रीम कोर्ट के जज और मीडिया वाले दोनों ही ईमानदारी से काम करते हैं आपको ऐसा लगता होगा यह लोग जो है मैं काम करते मुझे तो नहीं लगता हां आप उनके न्याय से या उनके समाचार से असंतुष्ट हो सकते तो आप उससे संज्ञा ले सकते हैं आप कंप्लेंट कर रिपोर्ट पर जा कर के और कोई जूनियर कोर्ट ने आप को हराया है तो आप उसी के सपोर्ट में जा सकते सिंगल बैटरी डबल बेड भेजा कर ठीक है ना हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में जाकर तरीके से और मीडिया वाले भी सही बोलते ईमानदारी से काम करते हो यह कोई कर दिया और ईमानदारी से ही काम करते हैं आपका प्रश्न जो थोड़ा करेंगे भैया मुझे तो आज तक नहीं लगा के लोग गलत काम भी करते हो रात वाला सेट कर दे काम किया है

supreme court ke judge aur media waale dono hi imaandaari se kaam karte hain aapko aisa lagta hoga yah log jo hai main kaam karte mujhe toh nahi lagta haan aap unke nyay se ya unke samachar se asantusht ho sakte toh aap usse sangya le sakte hain aap complaint kar report par ja kar ke aur koi junior court ne aap ko haraya hai toh aap usi ke support me ja sakte singles battery double bed bheja kar theek hai na highcourt se supreme court me jaakar tarike se aur media waale bhi sahi bolte imaandaari se kaam karte ho yah koi kar diya aur imaandaari se hi kaam karte hain aapka prashna jo thoda karenge bhaiya mujhe toh aaj tak nahi laga ke log galat kaam bhi karte ho raat vala set kar de kaam kiya hai

सुप्रीम कोर्ट के जज और मीडिया वाले दोनों ही ईमानदारी से काम करते हैं आपको ऐसा लगता होगा य

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आज भी न्यायालय हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट जो उनके समक्ष प्रकरण में जो दस्तावेज आते हैं अवलोकन करने के पश्चात उन पर न्यायाधीशों के द्वारा निर्णय किया जाता है न्याय भावनात्मक नहीं है

aaj bhi nyayalaya high court supreme court jo unke samaksh prakaran me jo dastavej aate hain avalokan karne ke pashchat un par nyaydhisho ke dwara nirnay kiya jata hai nyay bhavnatmak nahi hai

आज भी न्यायालय हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट जो उनके समक्ष प्रकरण में जो दस्तावेज आते हैं अवलोकन

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Raj Kumar

Lawyer

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आपका प्रश्न है हमारे सुप्रीम कोर्ट के जज और यह मीडिया कब ईमानदारी से काम करेंगे देखे दोस्त जान तक सुप्रीम कोर्ट के जज इसकी बात है हां इनडायरेक्टली कुछ प्रेशराइजेशन रहता है सरकार के द्वारा कुछ एक बंदूक है इन पर भी ठीक है पर फिर भी कोई भी जा कभी भी अपनी कोई अगर जजमेंट पास करता है तो उसमें लुकोल जरूर छोड़ दें ताकि उसके जाने के पश्चात कोई और जज अगर उसको एंटरटेन करता है या कोई और कोचिंग करते हैं तो उस पर जो है वह लिली कैसे सॉन्ग को वह सब्जेक्ट में कुछ टेक्निकल बातें होती है जो समझ नहीं पड़ती है दूसरी बात रही मीडिया तो यह हमारे देश की विडंबना है और यह बोलिए कि जो हमारी लोकेशन है उसमें बड़ी लिखने से न्यायपालिका के द्वारा इतनी रिमेडी प्रयोग कोट पर आम भारत के नागरिक इससे अभी भी वंचित जैसे कि आपका मेन प्रहार है मीडिया पर अब मीडिया से कोई क्वेश्चन पुट करना चाहते हैं कोर्ट में आंख मीडिया वालों ने ऐसा क्यों दिखाया इसके पीछे क्या है या क्या इन पर कोई क्राइटेरिया नहीं होता है या कुछ ऐसे नहीं यह जो मर्जी बोलते रहे ठीक है इस तरह की बात होती तो अगर आपको लगता है कि मीडिया ने ऐसा कुछ दिखाएं जो समाज के हित में नहीं है तो कुछ लोगों को इकट्ठा होना चाहिए और अपने क्षेत्राधिकार से संबंधित उस राज्य के उच्च न्यायालय में जाना चाहिए हाईकोर्ट में जाना चाहिए या डायरेक्ट सुप्रीम कोर्ट में भी आ सकते हैं और वहां पर जो है लीगल एड फ्रंट ऑफिस बने होने के ऑफिस इसलिए बनाए गए हैं ताकि जो व्यक्ति वकील का खर्चा वहन करने में असमर्थ हूं ठीक है उसको मुफ्त कानूनी सहायता दी जाती है जिसे एन एल एस ए नेशनल लीगल 88 होती के द्वारा गबन किया जाता है और नेशनल लीगल एड अथॉरिटी के अधीन जो एडीएल ऐसे होते हैं हरेक डिस्ट्रिक्ट में जो है इस तरह की ब्रांच है हर एक न्यायालय परिसर में लीगल एड फ्रंट ऑफिस की स्थापना की गई है पूरे भारतवर्ष अगर आप कोई भी पीआईएल लगाना चाहते हो जनहित याचिका लगाना चाहते हो तो आप उस लीगल एड फ्रंट ऑफिस में जा सकते हो चाहे वह हाईकोर्ट के जिला न्यायालय का यह सब डिविजनल कोर्ट का है यह सुप्रीम कोर्ट परिसर का उद्घाटन है वहां पर जाइए उस फर्म को भरिए पुरुषों के लिए साला जो आए हैं वह बताई गई है तीन लाख से नीचे अगर महिलाएं तो उनके लिए कोई इनकम क्राइटेरिया फिक्स नहीं है अगर कोई महिलाएं महिलाओं का समूह जिस तरह से अगर पीआईएल लगाती है तो उनके लिए जो है उनकी और वार्षिक आय का आकलन नहीं किया जाएगा उन्हें मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान की जाएगी उसके तहत सुप्रीम कोर्ट में भी और हाईकोर्ट में भी दोनों ही न्यायालय परिसर में जो फ्री ऑफ कॉस्ट जो है एडवोकेट उनके लिए अपॉइंटेड होगा और वह उनके पक्ष को माननीय न्यायाधीशों के समक्ष रखेगा और उस विवाद ग्रस्त विषय पर अरगुमेंट्स करेगा बहस करेगा और जो भी न्यायालय को लगेगा कि हम मीडिया वाले यहां पर गलत है यहां पर ऐसा होना चाहिए था तो उसे संबंधित गाइडेंस जारी करते हैं और एक जनरलिज्म एक्ट होता है उसके रूल्स एंड रेगुलेशंस होते हैं यदि कोई उसे बाहर जा रहा है तो वह भी सजा का पात्र है यह बन अगर कोई न्यायधीश हुई है वह अपने शक्तियों का दुरुपयोग कर रहे तो उसके विरुद्ध महाभियोग किस चल सकता है पर इस सब के लिए जो है एक डाटा कलेक्ट करना रहता है

aapka prashna hai hamare supreme court ke judge aur yah media kab imaandaari se kaam karenge dekhe dost jaan tak supreme court ke judge iski baat hai haan indirectly kuch presharaijeshan rehta hai sarkar ke dwara kuch ek bandook hai in par bhi theek hai par phir bhi koi bhi ja kabhi bhi apni koi agar judgement paas karta hai toh usme lukol zaroor chhod de taki uske jaane ke pashchat koi aur judge agar usko entertain karta hai ya koi aur coaching karte hain toh us par jo hai vaah lily kaise song ko vaah subject me kuch technical batein hoti hai jo samajh nahi padti hai dusri baat rahi media toh yah hamare desh ki widambana hai aur yah bolie ki jo hamari location hai usme badi likhne se nyaypalika ke dwara itni rimedi prayog coat par aam bharat ke nagarik isse abhi bhi vanchit jaise ki aapka main prahaar hai media par ab media se koi question put karna chahte hain court me aankh media walon ne aisa kyon dikhaya iske peeche kya hai ya kya in par koi criteria nahi hota hai ya kuch aise nahi yah jo marji bolte rahe theek hai is tarah ki baat hoti toh agar aapko lagta hai ki media ne aisa kuch dikhaen jo samaj ke hit me nahi hai toh kuch logo ko ikattha hona chahiye aur apne kshetradhikar se sambandhit us rajya ke ucch nyayalaya me jana chahiye highcourt me jana chahiye ya direct supreme court me bhi aa sakte hain aur wahan par jo hai legal aid front office bane hone ke office isliye banaye gaye hain taki jo vyakti vakil ka kharcha wahan karne me asamarth hoon theek hai usko muft kanooni sahayta di jaati hai jise N el S a national legal 88 hoti ke dwara gaban kiya jata hai aur national legal aid authority ke adheen jo ADL aise hote hain harek district me jo hai is tarah ki branch hai har ek nyayalaya parisar me legal aid front office ki sthapna ki gayi hai poore bharatvarsh agar aap koi bhi PIL lagana chahte ho janhit yachika lagana chahte ho toh aap us legal aid front office me ja sakte ho chahen vaah highcourt ke jila nyayalaya ka yah sab divijanal court ka hai yah supreme court parisar ka udghatan hai wahan par jaiye us firm ko bhariye purushon ke liye sala jo aaye hain vaah batai gayi hai teen lakh se niche agar mahilaye toh unke liye koi income criteria fix nahi hai agar koi mahilaye mahilaon ka samuh jis tarah se agar PIL lagati hai toh unke liye jo hai unki aur vaarshik aay ka aakalan nahi kiya jaega unhe muft kanooni sahayta pradan ki jayegi uske tahat supreme court me bhi aur highcourt me bhi dono hi nyayalaya parisar me jo free of cost jo hai advocate unke liye appointed hoga aur vaah unke paksh ko mananiya nyaydhisho ke samaksh rakhega aur us vivaad grast vishay par araguments karega bahas karega aur jo bhi nyayalaya ko lagega ki hum media waale yahan par galat hai yahan par aisa hona chahiye tha toh use sambandhit guidance jaari karte hain aur ek janaralijm act hota hai uske rules and reguleshans hote hain yadi koi use bahar ja raha hai toh vaah bhi saza ka patra hai yah ban agar koi nyayadhish hui hai vaah apne shaktiyon ka durupyog kar rahe toh uske viruddh mahabhiyog kis chal sakta hai par is sab ke liye jo hai ek data collect karna rehta hai

आपका प्रश्न है हमारे सुप्रीम कोर्ट के जज और यह मीडिया कब ईमानदारी से काम करेंगे देखे दोस्त

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

2:35
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हमारी सुप्रीम कोर्ट के जज ने मीडिया वाले कभी हमसे काम करेंगे आपका प्रश्न सब को आरोपित करता है लेकिन अगर कोई एक सरकार यह सरकार के प्रभाव से प्रभावित होता है जिसका अर्थ यह नहीं होता कि संपूर्ण हाई को भैया संपूर्ण संपूर्ण सुप्रीम कोर्ट से प्रभावित हो गए क्योंकि न्यायपालिका विधायिका और कार्यपालिका तीनों स्वायत्त संस्थान और उन पर किसी तरह का दबाव नहीं होना चाहिए और ना ही होता है लेकिन गत 5 वर्षों से मीडिया सरकार की टोटा बनी हुई है इसमें कोई दो राय नहीं लेकिन एक चीज और स्पष्ट हो गई कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई अवनी राज सभा की सदस्यता ग्रहण कर ली तो भारत के इतिहास में यह एक और प्रश्न खड़ा हो गया कि न्यायपालिका भी कहीं न कहीं प्रभावी है अगर काश इमानदारी से हमारी मीडिया और हमारी न्यायपालिका में सब को दोषी नहीं मानता हूं अपना कार्य करें जो भारत एक लोकतांत्रिक को प्रजातांत्रिक देश होते हुए विश्व के लिए एक महान उदाहरण बन जाए लेकिन भारत में लोकतंत्र की हत्या तीन प्रतिदिन हो रही है एक ने कई उदाहरण ऐसे सामने आए हैं जिससे आपने जो प्रश्न किया है तो कहीं आप उन घटनाओं से प्रभावित रही घटनाओं से दुखी करें क्योंकि बिना किसी भी प्रभाव के क्वेश्चन का जन्म नहीं होता

hamari supreme court ke judge ne media waale kabhi humse kaam karenge aapka prashna sab ko aropit karta hai lekin agar koi ek sarkar yah sarkar ke prabhav se prabhavit hota hai jiska arth yah nahi hota ki sampurna high ko bhaiya sampurna sampurna supreme court se prabhavit ho gaye kyonki nyaypalika vidhayika aur karyapalika tatvo svayat sansthan aur un par kisi tarah ka dabaav nahi hona chahiye aur na hi hota hai lekin gat 5 varshon se media sarkar ki totta bani hui hai isme koi do rai nahi lekin ek cheez aur spasht ho gayi ki supreme court ke chief justice ranjan gogoi avani raj sabha ki sadasyata grahan kar li toh bharat ke itihas me yah ek aur prashna khada ho gaya ki nyaypalika bhi kahin na kahin prabhavi hai agar kash imaandari se hamari media aur hamari nyaypalika me sab ko doshi nahi maanta hoon apna karya kare jo bharat ek loktantrik ko prajatantrik desh hote hue vishwa ke liye ek mahaan udaharan ban jaaye lekin bharat me loktantra ki hatya teen pratidin ho rahi hai ek ne kai udaharan aise saamne aaye hain jisse aapne jo prashna kiya hai toh kahin aap un ghatnaon se prabhavit rahi ghatnaon se dukhi kare kyonki bina kisi bhi prabhav ke question ka janam nahi hota

हमारी सुप्रीम कोर्ट के जज ने मीडिया वाले कभी हमसे काम करेंगे आपका प्रश्न सब को आरोपित करता

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सुरेश चंद आचार्य

Social Worker ( Self employed )

1:29

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नमस्कार दोस्तों प्राचीन काल में ईमानदारी का मतलब होता था सबसे पहले खुद से ईमानदारी आत्मा से ईमानदारी जिस कार्य के लिए मन और आत्मा स्वीकार करें वही कार्य करना और जिस किसी से कोई नुकसान न पहुंच सके ऐसा कार्य करना हित में कार्य करना किंतु वर्तमान स्थिति या दूसरी है वर्तमान में ईमानदारी के पैमाने सरकारों ने तय कर दिए हैं कानून बनाकर और जो पढ़े-लिखे कानून को जानकार लोग हैं वह उन कानून की पारियों को इस्तेमाल कर कानून का फायदा उठाते हुए कार्य कर लेते हैं और सब कुछ समझते हुए भी कानून उनका कुछ नहीं कर सकता इसलिए भी अपनी नजर में ईमानदार है पकड़ा गया वह चोर है जो बच गया वह सयाना है

namaskar doston prachin kaal me imaandaari ka matlab hota tha sabse pehle khud se imaandaari aatma se imaandaari jis karya ke liye man aur aatma sweekar kare wahi karya karna aur jis kisi se koi nuksan na pohch sake aisa karya karna hit me karya karna kintu vartaman sthiti ya dusri hai vartaman me imaandaari ke paimane sarkaro ne tay kar diye hain kanoon banakar aur jo padhe likhe kanoon ko janakar log hain vaah un kanoon ki paariyon ko istemal kar kanoon ka fayda uthate hue karya kar lete hain aur sab kuch samajhte hue bhi kanoon unka kuch nahi kar sakta isliye bhi apni nazar me imaandaar hai pakada gaya vaah chor hai jo bach gaya vaah sayana hai

नमस्कार दोस्तों प्राचीन काल में ईमानदारी का मतलब होता था सबसे पहले खुद से ईमानदारी आत्मा स

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