कैसे हमारी तेज़ी से लुप्त होती संस्कृति, भाषा और विचारों को बचाया जा सकता है?...


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Harender Kumar Yadav

Career Counsellor.

1:11
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

वैसे हमारी दीदी से लोग तो किसानों को जागरूक करना पड़ेगा अपनी भाषा को जन-जन तक पहुंचाना पड़ेगा अपने विचारों तक और इसके लिए शिक्षा का प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना जरूरी है अगर किया जाए और उसमें अपनी संस्कृत भाषा को जोड़ा जाए तो निश्चित तौर पर इस को बचाया जा सकता है और इसका कोई घटना से जुड़ी जा रही है और कहीं राजस्थानी भाषा अपभ्रंश की राई डीजे मिक्स करके चाय गीतों को गाया जा रहा है हां तो वह सारी चीजें लुप्त होती जा रही थी सामना करना पड़ेगा

waise hamari didi se log toh kisano ko jagruk karna padega apni bhasha ko jan jan tak pahunchana padega apne vicharon tak aur iske liye shiksha ka prabhavi dhang se prastut karna zaroori hai agar kiya jaaye aur usme apni sanskrit bhasha ko joda jaaye toh nishchit taur par is ko bachaya ja sakta hai aur iska koi ghatna se judi ja rahi hai aur kahin rajasthani bhasha apbransh ki rai DJ mix karke chai geeton ko gaaya ja raha hai haan toh vaah saari cheezen lupt hoti ja rahi thi samana karna padega

वैसे हमारी दीदी से लोग तो किसानों को जागरूक करना पड़ेगा अपनी भाषा को जन-जन तक पहुंचाना पड़

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Arpit Shukla

स्वयं मे डूबा | Entrepreneur

1:14

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह बहुत दुर्भाग्य की बात है कि हम अपनी संस्कृति भाषा और अपने मूलभूत विचारों को काफी पीछे छोड़ देगा इसी में वह कल इंडिया जैसे कुछ माध्यम है जो ऐसे सभी लोगों को एक साथ जोड़ने का प्रयास कर रही है जो भाषा संस्कृति और विचारों का महत्व समझते मुझे लगता है कि इस से बचाने का जो सबसे अच्छा माध्यम है उसकी शुरूआत हम खुद ही करें हमें जब कभी भी मौका मिले हम अपनी भाषा को बोलने से ना डरें अपनी संस्कृति के बारे में बताएं उम्मीद है कि आने वाली जो पीढ़ियां है उन्हें भी अपनी संस्कृति के बारे में पता होगा

yah bahut durbhagya ki baat hai ki hum apni sanskriti bhasha aur apne mulbhut vicharon ko kaafi peeche chod dega isi mein vaah kal india jaise kuch madhyam hai jo aise sabhi logo ko ek saath jodne ka prayas kar rahi hai jo bhasha sanskriti aur vicharon ka mahatva samajhte mujhe lagta hai ki is se bachane ka jo sabse accha madhyam hai uski shuruat hum khud hi kare hamein jab kabhi bhi mauka mile hum apni bhasha ko bolne se na daren apni sanskriti ke bare mein bataye ummid hai ki aane wali jo peedhiyaan hai unhe bhi apni sanskriti ke bare mein pata hoga

यह बहुत दुर्भाग्य की बात है कि हम अपनी संस्कृति भाषा और अपने मूलभूत विचारों को काफी पीछे

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VINEET YADAV

Social Worker and writer

3:10
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Jyoti Mehta

Ex-History Teacher

2:00
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हमारे देश की संस्कृति और भाषा और विचार एक ही विषय होते जा रहे हैं क्योंकि आज हम अपनी भाषा को बोलने से कतराते हैं अकरम राजस्थानी है तुम राजस्थानी नहीं बोलते बल्कि हिंदी और इंग्लिश पर हमारा जाता + रहता है इसी तरह से जब हमें अपने स्थानीय भाषाओं को प्रयोग में नहीं लाते हैं और बोलचाल में उनका प्रयोग नहीं करते हैं तो हमारी आने वाली जनरेशन है वह भी इस भाषा को नहीं जानती है नहीं समझती हो नहीं बोलती है और किसी भी देश के लिए उसकी संस्कृति को बनाए रखने के लिए वहां की भाषा का = प्रयुक्त होना बहुत जरूरी है तो हमें अपनी जो स्थानीय भाषा है उसको बोलचाल में रखना चाहिए और उसको बोलना चाहिए ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियां भी वह भाषा समझे सुनें और बोले इसी तरह से हमारा जो पहना हुआ है हम जो पहनते सतीश में हम रहते हैं उधर सभी तरह का हमारे देश में अलग-अलग पहना हुआ है अलग-अलग खानपान है उसका हमें = उपयोग करना चाहिए हमें उन वेशभूषाओं को समय-समय पर पहनना चाहिए और हमारे जो खानपान हैं जो सदियों से हमारे प्रदेशों में अलग-अलग तरह के खानपान मशहूर है उन्हें हमें ऊपर रखना चाहिए और अपनी आने वाली पीढ़ियों को भी उनके बारे में बताना चाहिए उन्हें बराबर बना कर खिलाना चाहिए ताकि उन्हें उनका स्वास्थ बताओ और वह भी उनको आगे चलकर बनाने आगे बढ़ाएं तू खान पान वेशभूषा भाषा और हमारे जो विचार हैं वह अगर हम आगे की पीढ़ी तक नहीं पहुंच जाएंगे तो हम तक ही सीमित रह जाएंगे जैसे हमारे पूर्वजों ने हम को दिखाया वैसे ही हमें भी अपनी आने वाली पीढ़ियों को यह सारी चीजें सिखानी चाहिए तभी यह जीवित रहेगी और आगे तक

hamare desh ki sanskriti aur bhasha aur vichar ek hi vishay hote ja rahe hai kyonki aaj hum apni bhasha ko bolne se katrate hai akram rajasthani hai tum rajasthani nahi bolte balki hindi aur english par hamara jata rehta hai isi tarah se jab hamein apne sthaniye bhashaon ko prayog mein nahi laate hai aur bolchal mein unka prayog nahi karte hai toh hamari aane wali generation hai vaah bhi is bhasha ko nahi jaanti hai nahi samajhti ho nahi bolti hai aur kisi bhi desh ke liye uski sanskriti ko banaye rakhne ke liye wahan ki bhasha ka prayukt hona bahut zaroori hai toh hamein apni jo sthaniye bhasha hai usko bolchal mein rakhna chahiye aur usko bolna chahiye taki hamari aane wali peedhiyaan bhi vaah bhasha samjhe sunen aur bole isi tarah se hamara jo pehna hua hai hum jo pehente satish mein hum rehte hai udhar sabhi tarah ka hamare desh mein alag alag pehna hua hai alag alag khanpan hai uska hamein upyog karna chahiye hamein un veshbhushaon ko samay samay par pahanna chahiye aur hamare jo khanpan hai jo sadiyon se hamare pradeshon mein alag alag tarah ke khanpan mashoor hai unhe hamein upar rakhna chahiye aur apni aane wali peedhiyon ko bhi unke bare mein bataana chahiye unhe barabar bana kar khilana chahiye taki unhe unka swaasth batao aur vaah bhi unko aage chalkar banane aage badhaye tu khan pan veshbhusha bhasha aur hamare jo vichar hai vaah agar hum aage ki peedhi tak nahi pohch jaenge toh hum tak hi simit reh jaenge jaise hamare purvajon ne hum ko dikhaya waise hi hamein bhi apni aane wali peedhiyon ko yah saree cheezen sikhani chahiye tabhi yah jeevit rahegi aur aage tak

हमारे देश की संस्कृति और भाषा और विचार एक ही विषय होते जा रहे हैं क्योंकि आज हम अपनी भाषा

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Sachin Bharadwaj

Faculty - Mathematics

1:22
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

कोई भी शक नहीं है कि हमारे देश की शान धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है लोग आजकल वेस्टर्न कल्चर को बहुत ज्यादा ऐड करें और मुझे लगता है इस बात में कोई काम नहीं है लेकिन हमारी संस्कृति का प्रचार-प्रसार होना चाहिए आप दिल की बहुत साफ और नर है जो हमारे देश की संस्कृति को एक्सेप्ट कर रहे हैं उसको गले लगा रहे हैं आप दे कि कभी मथुरा चाहिए तो महान मथुरा में दिखी किस प्रकार फॉरेनर्स यहां के स्पेशल हो जाते हैं किस प्रकार भजनों में एकदम खो जाते हैं तो कहीं नहीं दिखाता है कि हिंदुस्तान के लोग तो जरूर इंडियन संस्कृति को भूलते जा रहे लोग हैं अपनी भाषा सभ्यता को दूर रखे हुए साथ में इंडियन सभ्यता को भी ऐड कर रहे हैं तो मुझे लगता है कि इसका सबसे अच्छा तरीका यही है कि स्कूल स्तर से यानी स्कूल से हमारी संस्कृति के बारे में प्रचार प्रसार होना जरूरी है क्योंकि जब तक हम स्कूल में चीज को नहीं डालेंगे तब तक नहीं हो पाएगा क्योंकि मुझे लगता है चाहे वह कान्वेंट स्कूलों शिशु मंदिर हो चाहे किसी भी प्रकार का राज्य सरकार का या केंद्र सरकार का स्कूल और नवोदय हो हर स्कूल में कम से कम एक लेक्चर शुरू से लेकर आया नहीं फल फल से लेकर 12 तक एक इंडियन कल्चर के ऊपर होना चाहिए ताकि लोग इस देश की संस्कृति को समझें उसको उसकी वैल्यू को समझें और इस देश की संस्कृति का प्रचार-प्रसार

koi bhi shak nahi hai ki hamare desh ki shan dhire dhire khatam hoti ja rahi hai log aajkal western culture ko bahut zyada aid kare aur mujhe lagta hai is baat mein koi kaam nahi hai lekin hamari sanskriti ka prachar prasaar hona chahiye aap dil ki bahut saaf aur nar hai jo hamare desh ki sanskriti ko except kar rahe hain usko gale laga rahe hain aap de ki kabhi mathura chahiye toh mahaan mathura mein dikhi kis prakar foreigners yahan ke special ho jaate hain kis prakar bhajanon mein ekdam kho jaate hain toh kahin nahi dikhaata hai ki Hindustan ke log toh zaroor indian sanskriti ko bhulte ja rahe log hain apni bhasha sabhyata ko dur rakhe hue saath mein indian sabhyata ko bhi aid kar rahe hain toh mujhe lagta hai ki iska sabse accha tarika yahi hai ki school sthar se yani school se hamari sanskriti ke bare mein prachar prasaar hona zaroori hai kyonki jab tak hum school mein cheez ko nahi daalenge tab tak nahi ho payega kyonki mujhe lagta hai chahen vaah convent schoolon shishu mandir ho chahen kisi bhi prakar ka rajya sarkar ka ya kendra sarkar ka school aur navodaya ho har school mein kam se kam ek lecture shuru se lekar aaya nahi fal fal se lekar 12 tak ek indian culture ke upar hona chahiye taki log is desh ki sanskriti ko samajhe usko uski value ko samajhe aur is desh ki sanskriti ka prachar prasaar

कोई भी शक नहीं है कि हमारे देश की शान धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है लोग आजकल वेस्टर्न कल्च

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Vatsal

Engineering Student

1:03
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लेकिन निश्चित तौर पर हमारी संस्कृति हमारी भाषा विचार संस्कारी ऐसी चीजें हैं जो लगातार लेट होती जा रही है जो नई जनरेशन है उनके संगीत इज़्ज़त होती जा रही है उसको बहुत बड़ी वजह है कि देखिए लो पहले के समय में इन चीजों को मानते थे इन चीजों को बहुत संभाल के रखते थे एक धरोहर के तौर पर ने आगे बढ़ाते थे उनके परिवार के दो बच्चे हैं वह सीख लेते थे लेकिन स्थितियां वहीं आकर अटक गई है लोगों को उन चीजों में रूचि नहीं रहे लोगों ने अपने कंफर्ट जोन के हिसाब से चीजों का अनुवाद कर दिया है चीज़ों को ठान लिया है तो उसी कारण जीजा आगे नहीं बढ़ रही है क्योंकि उन को आगे ले जाया नहीं जा रहा है तो निश्चित तौर पर से जरूरी है इन चीजों को दोबारा ताजा किया जाए इनको अवेयरनेस फैलाई जा लोगों को ज्ञान हो कि जो संस्कृति है भाषाएं विचार है इसका कितना अनूठा महत्व है कितना इसका भी एक अलग ही मजा है उसको सांस जब तक नहीं हो तब तक स्थितियां मतलब

lekin nishchit taur par hamari sanskriti hamari bhasha vichar sanskari aisi cheezen hai jo lagatar late hoti ja rahi hai jo nayi generation hai unke sangeet ijjat hoti ja rahi hai usko bahut baadi wajah hai ki dekhiye lo pehle ke samay mein in chijon ko maante the in chijon ko bahut sambhaal ke rakhte the ek dharohar ke taur par ne aage badhate the unke parivar ke do bacche hai vaah seekh lete the lekin sthitiyan wahi aakar atak gayi hai logo ko un chijon mein ruchi nahi rahe logo ne apne comfort zone ke hisab se chijon ka anuvad kar diya hai cheezon ko than liya hai toh usi karan jija aage nahi badh rahi hai kyonki un ko aage le jaya nahi ja raha hai toh nishchit taur par se zaroori hai in chijon ko dobara taaza kiya jaaye inko awareness failai ja logo ko gyaan ho ki jo sanskriti hai bhashayen vichar hai iska kitna anutha mahatva hai kitna iska bhi ek alag hi maza hai usko saans jab tak nahi ho tab tak sthitiyan matlab

लेकिन निश्चित तौर पर हमारी संस्कृति हमारी भाषा विचार संस्कारी ऐसी चीजें हैं जो लगातार लेट

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Pragati

Aspiring Lawyer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

वर्तमान के समय की जो भेजी है उसे हमारी जो संस्कृति है भाषा है जो हमारे विचार हैं उनको लुप्त होने से कैसे बचाया जा सकता है तो मुझे लगता है देखिए और आज कल के फास्ट वर्ल्ड में तेजी से जो चल रहा है समय उसको में हमारे जो संस्कार हमारी भाषा है और संस्कृति है उनको बचाने के लिए हमें थोड़ा सा रुकना होगा और यह चीजें सोच रही होंगी कि हमारे आसपास जो हो रहा है तुम्हारी संस्कृति थी वह क्यों हो रही है उसके अलावा और के हमारे इस समय पूरे समय में मनचाहे पूरे साल का समय हो पूरे महीने का समय हो इसमें कई बार एसोसिएशन आते हैं इसलिए आप समय समय आता है जब आप थोड़ा सा रुक कर अपनी पूरी जिंदगी से थोड़ा सा रुक कर अपने लिए अपने परिवार के लिए अपनी संस्कृति के लिए वक्त निकाल सकते हैं और कोशिश करें कि उस वक्त मैं आपको जो आप की संस्कृति है जो आपके विचार हैं वह अच्छे कर सकें अपने आसपास के लोगों के साथ बैठ सकें अपने और स्टारों के साथ अपने परिवार जनों के साथ बैठे ताकि जो चीजें हमारी जिंदगी से लुप्त होती जा रही हैं उन को बचाया जा सके

vartmaan ke samay ki jo bheji hai use hamari jo sanskriti hai bhasha hai jo hamare vichar hain unko lupt hone se kaise bachaya ja sakta hai toh mujhe lagta hai dekhiye aur aaj kal ke fast world mein teji se jo chal raha hai samay usko mein hamare jo sanskar hamari bhasha hai aur sanskriti hai unko bachane ke liye hamein thoda sa rukna hoga aur yah cheezen soch rahi hongi ki hamare aaspass jo ho raha hai tumhari sanskriti thi vaah kyon ho rahi hai uske alava aur ke hamare is samay poore samay mein manchahe poore saal ka samay ho poore mahine ka samay ho isme kai baar association aate hain isliye aap samay samay aata hai jab aap thoda sa ruk kar apni puri zindagi se thoda sa ruk kar apne liye apne parivar ke liye apni sanskriti ke liye waqt nikaal sakte hain aur koshish kare ki us waqt main aapko jo aap ki sanskriti hai jo aapke vichar hain vaah acche kar sake apne aaspass ke logo ke saath baith sake apne aur staron ke saath apne parivar jano ke saath baithe taki jo cheezen hamari zindagi se lupt hoti ja rahi hain un ko bachaya ja sake

वर्तमान के समय की जो भेजी है उसे हमारी जो संस्कृति है भाषा है जो हमारे विचार हैं उनको लुप्

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Swati

सुनो ..सुनाओ..सीखो!

1:09
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

PK हमारी तेजी से लुप्त होती संस्कृति भाषा और विचारों को बचाने का सिर्फ एक ही तरीका है आजकल हमारे अंदर क्या चीज खुशी हुई है कि बच्चा पैदा होता है और उससे बचपन से 1 फीट करना शुरू कर देते हैं कि बेटा अंग्रेजी में बात करो अंग्रेजी ही तरीके से रहो अंग्रेजी तरीके से खाना खाओ छुरी कांटे का प्रयोग करो कि हमारी भारतीय संस्कृति में नहीं है और जैसा बच्चों को बचपन से समझाया जाता सिखाया जाता है वह वैसा ही करता है उसके विचार भी ऐसे ही हो जाते हैं भारतीय संस्कृति और भारतीय दर्शन स्कूल लेना देना ही नहीं बचता है तो जो चीज हम कर सकते हैं वह तरीके से बोलिए कि अपने बच्चों को अपने छोटों को अपने ऑफिस वालों को भी यह सब सिखाना बंद करो ठीक है इंग्लिश लैंग्वेज इंपॉर्टेंट है उसमें कोई डाउट नहीं है लेकिन वह सिर्फ ऐसा नहीं उसकी मैं सर्वाइवल पॉसिबल नहीं है सर्वाइवल पॉपुलेशन अच्छा काम पानी के लिए अच्छी कोशिश करने के लिए ही यह सब सीख सकते हैं लेकिन बिना इस के भी काम चल सकता है तो यह सब चीजें सिखाना बंद करें

PK hamari teji se lupt hoti sanskriti bhasha aur vicharon ko bachane ka sirf ek hi tarika hai aajkal hamare andar kya cheez khushi hui hai ki baccha paida hota hai aur usse bachpan se 1 feet karna shuru kar dete hain ki beta angrezi mein baat karo angrezi hi tarike se raho angrezi tarike se khana khao chhuri kante ka prayog karo ki hamari bharatiya sanskriti mein nahi hai aur jaisa baccho ko bachpan se samjhaya jata sikhaya jata hai vaah waisa hi karta hai uske vichar bhi aise hi ho jaate hain bharatiya sanskriti aur bharatiya darshan school lena dena hi nahi bachta hai toh jo cheez hum kar sakte hain vaah tarike se bolie ki apne baccho ko apne choton ko apne office walon ko bhi yah sab sikhaana band karo theek hai english language important hai usme koi doubt nahi hai lekin vaah sirf aisa nahi uski main survival possible nahi hai survival population accha kaam paani ke liye achi koshish karne ke liye hi yah sab seekh sakte hain lekin bina is ke bhi kaam chal sakta hai toh yah sab cheezen sikhaana band karen

PK हमारी तेजी से लुप्त होती संस्कृति भाषा और विचारों को बचाने का सिर्फ एक ही तरीका है आजकल

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