एक स्कूल में नर्सरी से लेकर पीएचडी तक की कक्षा क्यों नहीं होती?...


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Sachin Bharadwaj

Faculty - Mathematics

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

स्कूल में नहीं हो सकती उसके बहुत सारे कारण सबसे बड़ा कारण होता है और एक जगह नहीं प्रोवाइड कराया जा सकता है दूसरा ही क्वालिटी की आवश्यकता होती है और उसकी टीम की आठवीं के साइंस में चाहिए कॉमेडी चाहिए ठीक है वगैरह वगैरह

school mein nahi ho sakti uske bahut saare karan sabse bada karan hota hai aur ek jagah nahi provide karaya ja sakta hai doosra hi quality ki avashyakta hoti hai aur uski team ki aatthvi ke science mein chahiye comedy chahiye theek hai vagera vagairah

स्कूल में नहीं हो सकती उसके बहुत सारे कारण सबसे बड़ा कारण होता है और एक जगह नहीं प्रोवाइड

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Vatsal

Engineering Student

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इतना सब कुछ

itna sab kuch

इतना सब कुछ

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Swati

सुनो ..सुनाओ..सीखो!

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए स्कूल में नर्सरी से लेकर पीएससी तक का ऑप्शन नहीं हो सकती क्योंकि स्कूल का इंवॉल्वमेंट अलग होता है और कॉलेज कन्वेंट अलग होता है आप स्कूल में है तो आपके ऊपर बहुत आदर रेगुलेशंस और रूल्स होते हैं आप को भी फॉलो करना होता है क्योंकि आप तक बच्चे होते हैं आप का ग्रूमिंग पीरियड होता है आप सब सीख रहे होते हैं उस टाइम पर जिंदगी के बारे में भी आप बहुत बचपन होता इनोसेंस होती है तो उस टाइम रूल्स रेगुलेशन इंपॉर्टेंट होते हैं कॉलेज में आने के बाद जवाब ग्रेजुएशन के लिए आते तो बाप को क्रिएटिविटी की जरूरत होती है जरूरत होती है कि आप अपने दिमाग से कुछ कम रोशन इंग्लिश हटा दी जाती है और ऐसा पॉसिबल नहीं है स्कूल में रहकर की कुछ बच्चों के लिए कैसा है मेड और कुछ के लिए कैसे स्कूल में सब्सिडी होता है तो इसीलिए यह चीज पॉसिबल नहीं है प्रैक्टिकल इसीलिए कॉलेज और स्कूल को अलग अलग रखा गया है

dekhiye school mein nursery se lekar PSC tak ka option nahi ho sakti kyonki school ka invalwament alag hota hai aur college kanwent alag hota hai aap school mein hai toh aapke upar bahut aadar reguleshans aur rules hote hain aap ko bhi follow karna hota hai kyonki aap tak bacche hote hain aap ka grooming period hota hai aap sab seekh rahe hote hain us time par zindagi ke bare mein bhi aap bahut bachpan hota inosens hoti hai toh us time rules regulation important hote hain college mein aane ke baad jawab graduation ke liye aate toh baap ko creativity ki zarurat hoti hai zarurat hoti hai ki aap apne dimag se kuch kam roshan english hata di jaati hai aur aisa possible nahi hai school mein rahkar ki kuch baccho ke liye kaisa hai made aur kuch ke liye kaise school mein subsidy hota hai toh isliye yah cheez possible nahi hai practical isliye college aur school ko alag alag rakha gaya hai

देखिए स्कूल में नर्सरी से लेकर पीएससी तक का ऑप्शन नहीं हो सकती क्योंकि स्कूल का इंवॉल्वमें

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Pragati

Aspiring Lawyer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

एक ही स्कूल में नर्सरी से लेकर पीएचडी तक की कक्षाएं क्यों नहीं होती हैं तो दिखे और किसी भी स्कूल में नर्सरी से लेकर अगर पीएचडी तक को रखा जाएगा सिस्टम तो कहीं ना कहीं उस स्कूल को मैरिज करना बहुत डिफिकल्ट हो जाएगा बहुत मुश्किल हो जाएगा क्योंकि नर्सरी से और 10th तक हमारा जूनियर स्कूल चलता है उसके बाद जब 1112 दादा थोड़ा सा हायर कोर्स आ जाता उसके बाद ग्रेजुएशन के टाइम में और हायर होता है उसके बाद पोस्ट ग्रेजुएशन में और हायर होता है और पीएचडी लेवल तू सबसे ऊपर है एजुकेशन में आती है तो कहीं ना कहीं अगर आप एक ही जगह पर इन सब चीजों को रखा जाएगा तो काफी डिफिकल्ट हो जाएगा किसी एक इंसान के लिए या फिर किसी लोगों कुछ भी अगर ज्यादा लोग होंगे तो भी लोगों के लिए संभालने के लिए इसीलिए अलग-अलग जगह पर अलग-अलग एजुकेशन के हिसाब से कॉलेजेस बनाए जाते हैं पहले बेसिक स्कूल्स होते हैं जो हमें 12 तक का एजुकेशन देते हैं उसके बाद कॉलेजेस होते हैं जो मैं ग्रेजुएशन पोस्ट ग्रेजुएशन या फिर पीएचसी बगैरा की अलग-अलग जगह पर कॉलेजेस होते हैं ताकि उनको अच्छे से संभाला जा सके और वहां पर जो लोग आए पढ़ने के लिए वह सब लाइक माइंड लोगों ने उन सभी का माइंड उन सभी की एज थोड़ा बराबर ही हो क्योंकि अगर इस तरह से रखा जाएगा की नर्सरी से पीएचडी एक ही स्कूल में पढ़ाई जा रही है तो कहीं ना कहीं तो नर्सरी के बच्चे होंगे और मुझे पीएचडी के लोग होंगे उन सब के बीच में एक बहुत बड़ा डिफरेंस आ जाएगा और उस डिफरेंस की वजह से सिस्टम शायद अच्छे से ना चल पाए तो मुझे लगता है इसी वजह से नर्सरी से लेकर पीएचपी तक एक जगह पर कक्षाएं नहीं लगाई जाती है

ek hi school mein nursery se lekar phd tak ki kakshaen kyon nahi hoti hain toh dikhe aur kisi bhi school mein nursery se lekar agar phd tak ko rakha jaega system toh kahin na kahin us school ko marriage karna bahut difficult ho jaega bahut mushkil ho jaega kyonki nursery se aur 10th tak hamara junior school chalta hai uske baad jab 1112 dada thoda sa hire course aa jata uske baad graduation ke time mein aur hire hota hai uske baad post graduation mein aur hire hota hai aur phd level tu sabse upar hai education mein aati hai toh kahin na kahin agar aap ek hi jagah par in sab chijon ko rakha jaega toh kaafi difficult ho jaega kisi ek insaan ke liye ya phir kisi logo kuch bhi agar zyada log honge toh bhi logo ke liye sambhalne ke liye isliye alag alag jagah par alag alag education ke hisab se colleges banaye jaate hain pehle basic schools hote hain jo hamein 12 tak ka education dete hain uske baad colleges hote hain jo main graduation post graduation ya phir PHC bagaira ki alag alag jagah par colleges hote hain taki unko acche se sambhala ja sake aur wahan par jo log aaye padhne ke liye vaah sab like mind logo ne un sabhi ka mind un sabhi ki age thoda barabar hi ho kyonki agar is tarah se rakha jaega ki nursery se phd ek hi school mein padhai ja rahi hai toh kahin na kahin toh nursery ke bacche honge aur mujhe phd ke log honge un sab ke beech mein ek bahut bada difference aa jaega aur us difference ki wajah se system shayad acche se na chal paye toh mujhe lagta hai isi wajah se nursery se lekar PHP tak ek jagah par kakshaen nahi lagayi jaati hai

एक ही स्कूल में नर्सरी से लेकर पीएचडी तक की कक्षाएं क्यों नहीं होती हैं तो दिखे और किसी भी

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Rahul kumar

Junior Volunteer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

एक स्कूल में नर्सरी से लेकर पीएचडी तक की पुस्तक क्यों नहीं होती है नर्सरी से लेकर पीएचडी सेक्टर 11 बिल्डिंग को मेंटेन करना प्रॉब्लम होती है अगर आप देखें जहां से 24 डिग्री कॉलेज लेक्चरार की पिक्चर्स होते हैं एक बिल्डिंग काफी होता है ऑर्गेनाइज करने के लिए आदमी करने में प्रॉब्लम होती होगी

ek school mein nursery se lekar phd tak ki pustak kyon nahi hoti hai nursery se lekar phd sector 11 building ko maintain karna problem hoti hai agar aap dekhen jaha se 24 degree college lekcharar ki pictures hote hain ek building kaafi hota hai organize karne ke liye aadmi karne mein problem hoti hogi

एक स्कूल में नर्सरी से लेकर पीएचडी तक की पुस्तक क्यों नहीं होती है नर्सरी से लेकर पीएचडी स

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Manish Singh

VOLUNTEER

1:21
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

क्या आपने कहा कि एक स्कूल में नर्सरी से लेकर बस्ती तक की पढ़ाई क्यों नहीं होती है तू हर जगह पढ़ाई है सबकी अलग-अलग है उसका लेवल बांटा गया है कि जो प्राइमरी स्कूल सोते हैं हाई स्कूल से होते हैं सेकेंडरी स्कूल सीनियर कहते हैं उसके बाद हमारी याद आती है टेन प्लस टू आती है जिसमें सेकेंडरी के अंदर आती है फिर डिग्री आती है फिर पीएचडी आती है नहीं रुकती है कि पॉसिबल ही तू खींच पहले तू इतना बड़ा सिर्फ अगर एक आप और ग्रेजुएशन कॉलेज की बात करें तो आप उसे कैंपस देखते हैं कितनी बड़ी फैकल्टी होती है उसके अंदर कितना बड़ा कैंपस होता है और अगर सचमुच इस को मिला दिया जाए तो बहुत ही बड़ा कैंपस को जरूरत पड़ेगा बहुत ही बड़ा एक मैनेजमेंट टीम का जरूरत पड़ेगा कि यह पॉसिबल नहीं है ऐसा होता है कि बहुत सारी जरूरत नहीं है उनके पास होती है कि वह प्राइमरी स्कूल की भी सेकेंडरी स्कूल की भी और कैसी रोशन तक के बीच पढ़ाई करते जैसे कि अगर DAV की बात करें तो यह भी एक ऐसा स्कूल से प्राइमरी सेकेंडरी और ग्रेजुएशन एंड किंग्स नहीं होती लेकिन कैंपस अलग-अलग होते हैं तू कैसा बहुत सारा काम है जिसने जो की बहुत सारी चीजों की एक साथ पढ़ाई करवाते फिल्म कैंपस अलग-अलग होती है क्योंकि इसमें बहुत ही ज्यादा रिसोर्स की जरूरत पड़ेगी कि एक ही जगह पर सब चीजों को मेंटेन रखने के लिए इस कारणवश जो इंजीनियरिंग कनेक्शन की पीएचडी की प्राइमरी स्कूल की सेकेंडरी स्कूल की पढ़ाई एक साथ नहीं होती है कैंपस के अंदर

kya aapne kaha ki ek school mein nursery se lekar basti tak ki padhai kyon nahi hoti hai tu har jagah padhai hai sabki alag alag hai uska level baata gaya hai ki jo primary school sote hain high school se hote hain secondary school senior kehte hain uske baad hamari yaad aati hai ten plus to aati hai jisme secondary ke andar aati hai phir degree aati hai phir phd aati hai nahi rukti hai ki possible hi tu khinch pehle tu itna bada sirf agar ek aap aur graduation college ki baat kare toh aap use campus dekhte hain kitni badi faculty hoti hai uske andar kitna bada campus hota hai aur agar sachmuch is ko mila diya jaaye toh bahut hi bada campus ko zarurat padega bahut hi bada ek management team ka zarurat padega ki yah possible nahi hai aisa hota hai ki bahut saree zarurat nahi hai unke paas hoti hai ki vaah primary school ki bhi secondary school ki bhi aur kaisi roshan tak ke beech padhai karte jaise ki agar DAV ki baat kare toh yah bhi ek aisa school se primary secondary aur graduation and kings nahi hoti lekin campus alag alag hote hain tu kaisa bahut saara kaam hai jisne jo ki bahut saree chijon ki ek saath padhai karwaate film campus alag alag hoti hai kyonki isme bahut hi zyada resource ki zarurat padegi ki ek hi jagah par sab chijon ko maintain rakhne ke liye is karanvash jo Engineering connection ki phd ki primary school ki secondary school ki padhai ek saath nahi hoti hai campus ke andar

क्या आपने कहा कि एक स्कूल में नर्सरी से लेकर बस्ती तक की पढ़ाई क्यों नहीं होती है तू हर जग

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