क्या आपको लगता है कि एक पेशे के रूप में शिक्षण को उस तरह का सम्मान दिया जाता है जिसके वह हकदार हैं?...


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डी.एस.पटनायक

सेवानिव्रृत प्राचार्य

2:47
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प्रश्न थोड़ा कठिन है क्योंकि एक पेशे के रूप में शिक्षण को हर स्थान पर उसका वह सम्मान से प्राप्त नहीं होता है जिसका मोहबात निश्चित रूप से विशेष जो प्राइवेट स्कूल शिक्षक सम्मान नहीं होता है उसे एक कर्मी मानकर व्यवहार किया जाता है नहीं माना जाता है एक जिम्मेदार नागरिक को तैयार करने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा बहुत हद तक की बातें सरकारी और शैली सरकारी शिक्षक प्रशिक्षण का सम्मान समाज में सरकार और माता पिता के पानी को समुचित और उससे भी अच्छी बात है जो छात्र शिक्षक के लिए अपने हृदय में सम्मान का भाव रखते हैं बशर्ते शिक्षक ने अपने आचरण से सम्मान पाने लायक छात्र शिक्षक शिक्षक शिक्षक अध्यापक का रूप में देखते हैं आज भी हम उसी को ढूंढते पालक शिक्षक को में शिक्षकों को रूप से शिक्षक के पर्याय चाहे शुक्राचार्य हूं इसलिए मैं समझती हूं कि व्यक्ति विशेष कभी इसमें सहयोग होता है कि आप इस तरह से कार्य करते हैं और आपके कार्य का संभावित शिक्षक के कार्य को सम्मान योग्य शिक्षक सम्मान की नजरों से देखा जाता है

prashna thoda kathin hai kyonki ek peshe ke roop me shikshan ko har sthan par uska vaah sammaan se prapt nahi hota hai jiska mohbat nishchit roop se vishesh jo private school shikshak sammaan nahi hota hai use ek karmi maankar vyavhar kiya jata hai nahi mana jata hai ek zimmedar nagarik ko taiyar karne ki prakriya ka aham hissa bahut had tak ki batein sarkari aur shaili sarkari shikshak prashikshan ka sammaan samaj me sarkar aur mata pita ke paani ko samuchit aur usse bhi achi baat hai jo chatra shikshak ke liye apne hriday me sammaan ka bhav rakhte hain basharte shikshak ne apne aacharan se sammaan paane layak chatra shikshak shikshak shikshak adhyapak ka roop me dekhte hain aaj bhi hum usi ko dhoondhate paalak shikshak ko me shikshakon ko roop se shikshak ke paryay chahen shukraachaary hoon isliye main samajhti hoon ki vyakti vishesh kabhi isme sahyog hota hai ki aap is tarah se karya karte hain aur aapke karya ka sambhavit shikshak ke karya ko sammaan yogya shikshak sammaan ki nazro se dekha jata hai

प्रश्न थोड़ा कठिन है क्योंकि एक पेशे के रूप में शिक्षण को हर स्थान पर उसका वह सम्मान से प्

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Rajesh Dewangan

Hindi Linguistics

3:44
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पहले शिक्षक का सम्मान था अब नहीं है इसका कारण क्या है इसका कारण है शिक्षा का व्यवसायीकरण हो जाना इस भागदौड़ भरी जिंदगी में प्रथम कौन रहेगा अष्टकोण आएगा एक तनाव का माहौल है और उस तनाव के माहौल में हर पालक चाहता है कि उसका बच्चा इस दौड़ में आगे इसलिए वह एक ऐसा व्यक्ति खोजता है जो उसे इस दौड़ में आगे करा सके और आगे कराने के लिए वह कुछ भी खर्च करने को तैयार हो जाता है वहां पर से शिक्षा का व्यवसायीकरण शुरू हो जाता है शिक्षा एक धर्म है और धर्म का व्यवसायिक हो जाना ठीक नहीं है हालांकि न्यूनतम ऐसे शिक्षक भी हैं जो अपने चरित्र चरित्र हीनता की वजह से शिक्षा के व्यवसाय को दूषित किए हैं और लोगों का नजरिया भी बदला है लेकिन इसे सभी शिक्षक खराब नहीं हो जाते सभी शिक्षक अच्छे हैं इक्का-दुक्का खराब हो सकते हैं इसका कारण है गलत लोगों का शिक्षा के क्षेत्र में घुस जाना शिक्षा को अब नौकरी के रूप में देखा जा रहा है ना की योग्यता के रूप में शिक्षक होना या शिक्षक की नौकरी पाए जाना एक बेरोजगारी से निजात पा जाना है लेकिन ऐसा नहीं है दोस्तों शिक्षक का दायित्व बहुत महत्वपूर्ण है जिन संस्थाओं को भी शिक्षकों की नियुक्ति करना है उन्हें इसका ध्यान रखना चाहिए कि एक ऐसा व्यक्ति जो शिक्षा को अपना धर्म मानता हूं शिक्षा को जो योग्यता मानता शिक्षा को जो गुण मानता ऐसे व्यक्ति को शिक्षक बनना चाहिए किसी को भी शिक्षा के क्षेत्र में नहीं घुस ना चाहिए और ना ही किसी भी व्यक्ति को शिक्षा के क्षेत्र में घुसने का अधिकार होना चाहिए उसको एक मानक मानदंड में कॉल कर ही शिक्षा के क्षेत्र में प्रवेश देना चाहिए अन्यथा आज तो शिक्षा का सर्वनाश हो ही चुका है लेकिन सब जगह नहीं अभी भी एनसीईआरटी की किताबें हैं और किताबों की परिपाठ हैं उनको देखकर आपको नहीं लगेगा कि शिक्षा का व्यवसायीकरण हो गया है केवल शिक्षा को ग्रहण करने वाले और कराने वाले यह दोनों का मनसा को इन दोनों सच्चे इंसान हो तो अभी भी शिक्षा एक उच्च कोटि के चीज है और इसका किसी प्रकार से दुरुपयोग या अपमान नहीं होना चाहिए

pehle shikshak ka sammaan tha ab nahi hai iska karan kya hai iska karan hai shiksha ka vyavasayikaran ho jana is bhagdaud bhari zindagi me pratham kaun rahega ashtakon aayega ek tanaav ka maahaul hai aur us tanaav ke maahaul me har paalak chahta hai ki uska baccha is daudh me aage isliye vaah ek aisa vyakti khojata hai jo use is daudh me aage kara sake aur aage karane ke liye vaah kuch bhi kharch karne ko taiyar ho jata hai wahan par se shiksha ka vyavasayikaran shuru ho jata hai shiksha ek dharm hai aur dharm ka vyavasayik ho jana theek nahi hai halaki nyuntam aise shikshak bhi hain jo apne charitra charitra hinata ki wajah se shiksha ke vyavasaya ko dushit kiye hain aur logo ka najariya bhi badla hai lekin ise sabhi shikshak kharab nahi ho jaate sabhi shikshak acche hain ikka dukka kharab ho sakte hain iska karan hai galat logo ka shiksha ke kshetra me ghus jana shiksha ko ab naukri ke roop me dekha ja raha hai na ki yogyata ke roop me shikshak hona ya shikshak ki naukri paye jana ek berojgari se nijat paa jana hai lekin aisa nahi hai doston shikshak ka dayitva bahut mahatvapurna hai jin sasthaon ko bhi shikshakon ki niyukti karna hai unhe iska dhyan rakhna chahiye ki ek aisa vyakti jo shiksha ko apna dharm maanta hoon shiksha ko jo yogyata maanta shiksha ko jo gun maanta aise vyakti ko shikshak banna chahiye kisi ko bhi shiksha ke kshetra me nahi ghus na chahiye aur na hi kisi bhi vyakti ko shiksha ke kshetra me ghusne ka adhikaar hona chahiye usko ek maanak manadand me call kar hi shiksha ke kshetra me pravesh dena chahiye anyatha aaj toh shiksha ka sarvanash ho hi chuka hai lekin sab jagah nahi abhi bhi ncert ki kitaben hain aur kitabon ki paripath hain unko dekhkar aapko nahi lagega ki shiksha ka vyavasayikaran ho gaya hai keval shiksha ko grahan karne waale aur karane waale yah dono ka manasa ko in dono sacche insaan ho toh abhi bhi shiksha ek ucch koti ke cheez hai aur iska kisi prakar se durupyog ya apman nahi hona chahiye

पहले शिक्षक का सम्मान था अब नहीं है इसका कारण क्या है इसका कारण है शिक्षा का व्यवसायीकरण ह

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J P Singh

Principal

1:17
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जी नमस्कार आपका प्रश्न है क्या आपको लगता है कि एक के पेशे के रूप में शिक्षक को उस तरह का सम्मान दिया जाता है जिसके वह हकदार है जी वर्तमान समय में शायद ऐसा नहीं है क्योंकि वर्तमान समय में यह एक पेशा बन गया बिजनेस बन गया है जहां पर बच्चों की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु अध्यापक को रखा जाता है कि बच्चों की आवश्यकता की पूर्ति हो जाए ऐसा बा कार्य करें जिसके लिए उसे कई बार तो अपनी सुरक्षा के अनुसार कार्य नहीं करने दिया जाता वह बहुत ही दबाव में परिसर में काम को करता है और शिक्षा की जो अलग-अलग नीतियां सरकार के द्वारा बनाई जाती हैं उसमें कई नीतियां ऐसी होती हैं जो कि सिर्फ बच्चों के हित को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं अध्यापकों के विषय में किसी भी प्रकार का सोच विचार नहीं किया जाता तो शायद हमेशा सम्मान आज के दौर में नहीं मिल पा रहा है धन्यवाद

ji namaskar aapka prashna hai kya aapko lagta hai ki ek ke peshe ke roop me shikshak ko us tarah ka sammaan diya jata hai jiske vaah haqdaar hai ji vartaman samay me shayad aisa nahi hai kyonki vartaman samay me yah ek pesha ban gaya business ban gaya hai jaha par baccho ki avashayaktaon ki purti hetu adhyapak ko rakha jata hai ki baccho ki avashyakta ki purti ho jaaye aisa ba karya kare jiske liye use kai baar toh apni suraksha ke anusaar karya nahi karne diya jata vaah bahut hi dabaav me parisar me kaam ko karta hai aur shiksha ki jo alag alag nitiyan sarkar ke dwara banai jaati hain usme kai nitiyan aisi hoti hain jo ki sirf baccho ke hit ko dhyan me rakhakar banai jaati hain adhyapakon ke vishay me kisi bhi prakar ka soch vichar nahi kiya jata toh shayad hamesha sammaan aaj ke daur me nahi mil paa raha hai dhanyavad

जी नमस्कार आपका प्रश्न है क्या आपको लगता है कि एक के पेशे के रूप में शिक्षक को उस तरह का स

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N. K. Singh

Educator, Life Coach, Writer and Expert in British English Language

6:04
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देखें अपनी पूछा है क्या आपको लगता है कि एक पेशे के रूप में शिक्षण को उस तरह का सम्मान दिया जाता है जिसका वह हकदार मुझे लगता है कभी भी आ जाता था इस संबंध में गिरावट के हर वर्ग के निकल कर के आ रहा है कि कहीं ना कहीं काम करना शुरू किया जिसके कारण उसके सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस लोगों को खुली छूट दे और जो शिक्षक का एक स्टॉक सॉफ्ट करना थारी युग भी करना बच्चे को और मैं मानता हूं कि कई बार कुछ ऐसे 10 शिक्षक होते हैं ये भी गलतियां होती हैं जो बच्चे के साथ जाते हैं टीचर पर कैसे चूहा सस्पेंड के बच्चे के लिए सस्पेंड करना पड़ा और वह भी मजबूत कैसे किया जाए मां बाप और शिक्षकों ने अपने आप को सीमित कर लिया कि कई मामलों में निर्भया जैसा करना चाहिए सरकार ने भी उन्हें मजबूर किया जिस भीड़ में ऐसे शिक्षक में शामिल हैं जो किसी भी तरह से शिक्षक नहीं सुने रखा है 2000 4000 5000 7000 किसी भी तरह से बंद है नए बच्चों की उत्साह और नैतिकता से दूर रहना यह पिक्चर पिक्चर के लिए घातक साबित हुआ और यही वजह है कि सोच समाज में अपने बच्चे की हर गलती का ठीकरा शिक्षक संघ छोड़ना शुरू कर दिया उसे लगा कि स्कूल में शिक्षक देते हैं इसलिए मेरा बच्चा ऐसा कर रहा है जबकि संस्कार की जिम्मेदारी परिवार की शिक्षा के साथ करता है परिवर्तन कर सकता है परंतु कुछ लाने के लिए उसके पास और परिवार अपनी जिम्मेदारी से दूर होता है वह एक ऐसे कलर को गिफ्ट देता है जो कुछ पैसों के बल पर काम कर लेता है लेकिन ईमानदार शिक्षक को नहीं देता है आज देखते होंगे यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर ऑटो रिक्शा से यूनिवर्सिटी में जाता है और उसके सामने उसे कम पेमेंट वाला कलर महंगी फोर व्हीलर से जाता है लेकिन सम्मान भले यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स का सम्मान करना है उसे सकता लेकिन समाज उस कलर का सम्मान जाने करता है गांव में पंचायतों में पढ़े लिखे लोग तो पीछे की कुर्सियों पर बैठते हैं लेकिन पैसे वाले लोगों को अगली पंक्ति में बैठाया जाता है शिक्षक दिवस के ऊपर एक मनाते हुए खतरे बने और वास्तव में शिक्षण का पेशा सम्मान के अपने ही बिंदु से नीचे गिरने लगा यदि हम इसे उठाना चाहते हैं तो फिर से शिक्षकों का सम्मान करना होगा हम समाज को बचाना चाहते हैं तो फिर से शिक्षकों का सम्मान करना होगा एक अच्छा शिक्षक हमेशा अच्छा होना चाहिए सारे शिक्षकों को एक ही तरह समाज को नहीं तोड़ना चाहिए मुझे लगता है कि देर सबेर समाज को ही समझ में आएगा सरकारों को समझ में आएगा और फिर से ऐसे में हो जाएगी धन्यवाद

dekhen apni poocha hai kya aapko lagta hai ki ek peshe ke roop me shikshan ko us tarah ka sammaan diya jata hai jiska vaah haqdaar mujhe lagta hai kabhi bhi aa jata tha is sambandh me giraavat ke har varg ke nikal kar ke aa raha hai ki kahin na kahin kaam karna shuru kiya jiske karan uske samajik prathishtha ko thes logo ko khuli chhut de aur jo shikshak ka ek stock soft karna thari yug bhi karna bacche ko aur main maanta hoon ki kai baar kuch aise 10 shikshak hote hain ye bhi galtiya hoti hain jo bacche ke saath jaate hain teacher par kaise chuha Suspend ke bacche ke liye Suspend karna pada aur vaah bhi majboot kaise kiya jaaye maa baap aur shikshakon ne apne aap ko simit kar liya ki kai mamlon me Nirbhaya jaisa karna chahiye sarkar ne bhi unhe majboor kiya jis bheed me aise shikshak me shaamil hain jo kisi bhi tarah se shikshak nahi sune rakha hai 2000 4000 5000 7000 kisi bhi tarah se band hai naye baccho ki utsaah aur naitikta se dur rehna yah picture picture ke liye ghatak saabit hua aur yahi wajah hai ki soch samaj me apne bacche ki har galti ka theekaraa shikshak sangh chhodna shuru kar diya use laga ki school me shikshak dete hain isliye mera baccha aisa kar raha hai jabki sanskar ki jimmedari parivar ki shiksha ke saath karta hai parivartan kar sakta hai parantu kuch lane ke liye uske paas aur parivar apni jimmedari se dur hota hai vaah ek aise color ko gift deta hai jo kuch paison ke bal par kaam kar leta hai lekin imaandaar shikshak ko nahi deta hai aaj dekhte honge university ke professor auto riksha se university me jata hai aur uske saamne use kam payment vala color mehengi four wheeler se jata hai lekin sammaan bhale university ke students ka sammaan karna hai use sakta lekin samaj us color ka sammaan jaane karta hai gaon me panchayaton me padhe likhe log toh peeche ki kursiyo par baithate hain lekin paise waale logo ko agli pankti me baithaya jata hai shikshak divas ke upar ek manate hue khatre bane aur vaastav me shikshan ka pesha sammaan ke apne hi bindu se niche girne laga yadi hum ise uthana chahte hain toh phir se shikshakon ka sammaan karna hoga hum samaj ko bachaana chahte hain toh phir se shikshakon ka sammaan karna hoga ek accha shikshak hamesha accha hona chahiye saare shikshakon ko ek hi tarah samaj ko nahi todna chahiye mujhe lagta hai ki der saber samaj ko hi samajh me aayega sarkaro ko samajh me aayega aur phir se aise me ho jayegi dhanyavad

देखें अपनी पूछा है क्या आपको लगता है कि एक पेशे के रूप में शिक्षण को उस तरह का सम्मान दिया

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S Bajpay

Yoga Expert | Beautician & Gharelu Nuskhe Expert

1:50
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आपका प्रश्न है क्या आपको लगता है कि इसी ग्रुप में शिक्षण को उस तरह सम्मान दिया जाता है जिसके वे हकदार हैं तो मैं आपको बता दूं कि शासकीय सेवा में 2 शिक्षक को अच्छा वेतन मिलता है और वर्गिना वर्ष में ज्यादा नहीं है लेकिन प्राइवेट इंस्टीट्यूशंस में प्राइवेट संस्थानों में शिक्षा को गंभीरता से नहीं देती हैं वह शिक्षा में विद्यार्थियों से तो अच्छा पैसा वसूल करते हैं लेकिन शिक्षक शिक्षक का शोषण करती जादे तनखा पर उनकी निशानदेही 30 40 हजार का मुद्रा का निशान लगाती हैं ₹10000 इस तरह का होता है और वह भी मजबूर होते हैं तो क्यों ना कहीं रोजगार नहीं मिलता वह मजबूर होते हैं तुम्हें महसूस करता हूं कि शासकीय सेवा को छोड़कर शिक्षण का हमारे समाज में वह सम्मान नहीं है जो दूसरे देशों में विशेष रूप से है यूरोपियन देशों में शिक्षा शिक्षकों शिक्षकों को सम्मान दिया जाता है प्रतिष्ठा का पद माना जाता है शिक्षक का हमारे देश में समाज में भी शिक्षक को बहुत सराहा नहीं जाता है इस तरीके मैंने पपिया की जोकरी सुनी है कि टीचर फटीचर तो किस तरह पढ़े लिखे लोग भी इस तरह से मजाक उड़ाते हैं पिक्चर का हमारे समाज में भी टीचर का सम्मान नहीं है यही सब बातें हैं जो अपने को विशेष करती हैं हमारे यहां गुरु का सम्मान कम

aapka prashna hai kya aapko lagta hai ki isi group me shikshan ko us tarah sammaan diya jata hai jiske ve haqdaar hain toh main aapko bata doon ki shaaskiye seva me 2 shikshak ko accha vetan milta hai aur vargina varsh me zyada nahi hai lekin private instityushans me private sansthano me shiksha ko gambhirta se nahi deti hain vaah shiksha me vidyarthiyon se toh accha paisa vasool karte hain lekin shikshak shikshak ka shoshan karti jade tankha par unki nishandehi 30 40 hazaar ka mudra ka nishaan lagati hain Rs is tarah ka hota hai aur vaah bhi majboor hote hain toh kyon na kahin rojgar nahi milta vaah majboor hote hain tumhe mehsus karta hoon ki shaaskiye seva ko chhodkar shikshan ka hamare samaj me vaah sammaan nahi hai jo dusre deshon me vishesh roop se hai european deshon me shiksha shikshakon shikshakon ko sammaan diya jata hai prathishtha ka pad mana jata hai shikshak ka hamare desh me samaj me bhi shikshak ko bahut saraha nahi jata hai is tarike maine papiya ki jokri suni hai ki teacher fatichar toh kis tarah padhe likhe log bhi is tarah se mazak udate hain picture ka hamare samaj me bhi teacher ka sammaan nahi hai yahi sab batein hain jo apne ko vishesh karti hain hamare yahan guru ka sammaan kam

आपका प्रश्न है क्या आपको लगता है कि इसी ग्रुप में शिक्षण को उस तरह सम्मान दिया जाता है जिस

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams

2:32
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क्योंकि अपने शिक्षण के माध्यम से योग्य इंसान और व्यक्तित्व को जन्म लेने वाला शिक्षक इसका हकदार है कि उसे सम्मान मिले और ऐसा सम्मान में जो सब उसकी आज्ञा का पालन करें उनके द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें उसे सर्वोपरि मानी स्टरशिप ट्रूपर्स को स्वीकार करें बिना किस चित्रकार भाव के बिना किसी आलोचना की लेकिन इस हफ्ते होते हुए क्योंकि एक अध्यापक अपने बच्चों को नहीं न जाने कितने लोगों की परिवारों के बच्चों को शिक्षा देकर उनको एक ही योग्य जीवन देता है और परिवार को इस योग्य आधार देता है एक व्यक्ति टू देता है तो किसी की आंखें को इंजीनियर टुकड़ा कोई मिस्टेक तो कोई पुलिस तो कोई किसी ना किसी रूप में उभर कर आता है लेकिन आज की युग में विद्यार्थियों परिवार दोनों ही शिक्षा को महत्व नहीं देते हैं इतने एक शिक्षक को उसका सही सम्मान नहीं मिलता और यही कारण है कि हमारे देश की शिक्षा दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और लो क्योंकि मान दर्शन दिखाने वाले को ही अगर हम आईना दिखाएंगे तुम्हें सही दिशा कौन दिखाएगा यही एक कमजोरी है इसलिए एक शिक्षक को वह हक नहीं मिलता जोशी मिलना चाहिए हम कोई अलग नहीं करानी है हम भी उसी प्राणी का एक हिस्सा है उसे चित्र ऑस्ट्रेलिया में जितने दर्ज होते हैं विश्व के किसी इंसान के हृदय में इतनी ठंड और इतनी जो पीना है उन्हें क्योंकि उसे चाहने की 1 मीटर की क्षमता होती है शाम चिंता होती है इसलिए वह हर चीज को सह जाता है

kyonki apne shikshan ke madhyam se yogya insaan aur vyaktitva ko janam lene vala shikshak iska haqdaar hai ki use sammaan mile aur aisa sammaan me jo sab uski aagya ka palan kare unke dwara diye gaye nirdeshon ka palan kare use sarvopari maani staraship troopers ko sweekar kare bina kis chitrakar bhav ke bina kisi aalochana ki lekin is hafte hote hue kyonki ek adhyapak apne baccho ko nahi na jaane kitne logo ki parivaron ke baccho ko shiksha dekar unko ek hi yogya jeevan deta hai aur parivar ko is yogya aadhar deta hai ek vyakti to deta hai toh kisi ki aankhen ko engineer tukda koi mistake toh koi police toh koi kisi na kisi roop me ubhar kar aata hai lekin aaj ki yug me vidyarthiyon parivar dono hi shiksha ko mahatva nahi dete hain itne ek shikshak ko uska sahi sammaan nahi milta aur yahi karan hai ki hamare desh ki shiksha din pratidin badhti ja rahi hai aur lo kyonki maan darshan dikhane waale ko hi agar hum aaina dikhayenge tumhe sahi disha kaun dikhaega yahi ek kamzori hai isliye ek shikshak ko vaah haq nahi milta joshi milna chahiye hum koi alag nahi karani hai hum bhi usi prani ka ek hissa hai use chitra austrailia me jitne darj hote hain vishwa ke kisi insaan ke hriday me itni thand aur itni jo peena hai unhe kyonki use chahne ki 1 meter ki kshamta hoti hai shaam chinta hoti hai isliye vaah har cheez ko sah jata hai

क्योंकि अपने शिक्षण के माध्यम से योग्य इंसान और व्यक्तित्व को जन्म लेने वाला शिक्षक इसका ह

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DR. I.P.SINGH

Doctorate in Literature

4:00
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आपका प्रश्न क्या आपको लगता है कि एक पेशे के रूप में शिक्षण को इस तरह का सम्मान दिया जाता है जिसके वह हकदार नहीं मित्र बिल्कुल नहीं आ जाए क्या है कि आज की दुनिया भोग वादी दुनिया है और पाम्प्रिंट 100 की दुनिया है वाक्य बताएं कि एक शिक्षक अगर अपने पेशे के प्रति वफादार होता है तो ध्यान रखिए कि वह उस कारखाने का मजदूर अधिकारी कर्मचारी है जिससे देश की समस्त क्षेत्रों के कारीगर तैयार होते हैं लेकिन शिक्षक जो है वह आदर्श की दृष्टि से देखा जाता और उसके आचरण में जरा सी गलती होने पर सारा समाज उसके ऊपर अंगुली उठाता है और सही भी है कि अगर गलत निकल गया तो उसके सारे विद्यार्थी फ्री चेन सिस्टम बनेगा उसकी इज्जत मात्र अब उसके छात्रों तक रे और छात्रों की स्थिति क्या है कि अब वह पढ़ाई के प्रति उनका वह समर्पण नहीं रहा प्रसाधन बहुत आगे मोबाइल से पढ़ ले रहा है नेट लगाकर के किताबों से पढ़ ले रहा बच्चा घर पर मां-बाप पड़ा ले रहे हैं क्योंकि बहुत से स्कूलों में बहुत ऊंचे स्तर है लेकिन वहां केवल होमवर्क दिया जाता है उसकी तुलना में आज एक अधिकारी की इज्जत कहीं बहुत ज्यादा है अब देख लीजिए कि कालेज का लेक्चरर टूटी हुई साइकिल स्कूटर या अपनी निजी कार मेंटेन कर रहा तो उससे आता जाता है और एकता दान में पैक थानेदार को भी आज सरकारी साधन मुहैया कराए जा रहा नायब तहसीलदार को कराया जा रहा है अभी अब गवर्नमेंट को महसूस हो रहा कोरोनावायरस तो कहीं आना जाना तो सबको उपलब्ध कराया जा रहा था बनाने जाने का अध्यापक के साथ ऐसा कुछ भी एक डॉक्टर घर पर प्राइवेट प्रैक्टिस करता है कि सरकार भी अलाव करती है कुछ फीस ले सकता है लेकिन एक शिक्षक नियमानुसार घर पर ट्यूशन भी नहीं कर सकता है उसके अतिरिक्त आमदनी ट्यूशन के अलावा कुछ भी नहीं कुछ सब्जेक्ट तो ऐसे जिसमें ट्यूशन कर भी नहीं सकता है तो अब रहा कि केवल त्याग और तपस्या तो भैया अब ठीक है आदर्शों की बात करिए लेकिन टीचर अपने आदर्शों के साथ अपने परिवार के लोगों का मुंह तो बंद नहीं कर सकता वह वाली मानसिकता उसके बच्चों की भी हो सकती है और साल भर में ही कमाई उसके पास अतिरिक्त होती है क्योंकि बढ़ने पहले का के कुछ विषय में ट्यूशन संभव नहीं है कुछ तो परीक्षा की ड्यूटी कर ले और कापियां जांच लें उसमें भी सबसे पहले इनकम टैक्स लगा दिया जाता है और विश्वविद्यालय साल 2 साल में कभी दे दे तो भुगतान दे दे अपनी सबसे बड़ी प्रॉब्लम है होती है कि सब आपके तो काफी के बंडल ही नहीं बने हैं या फिर आपने जो बिल भेजा तो कहीं मिस हो गया है और जरा सा सावधानी हुई तो 40 ₹50000 जो कमा सकता है वह भी उसे नहीं मिलता है एक तरह से ध्यान रखें कि इस कारण थोड़ा सा विचलन सेक्स डॉट कॉम अभी आया है आज के भौतिकता वादी परिवेश में जो शिक्षक बहुत ही वफादार हैं कर्मों के प्रति सम्मान तो उनका है लेकिन फिर भी वह सम्मान नहीं है जो आज नौकरशाही का है अफसरशाही का है राजनेताओं का है 18 वा पास विधायक हो जाता तो उसके आगे पीछे लोग चलते हैं राज्य मंत्री मंत्री कुछ भी बन जाए चलाते मार दूसरे लोग हैं लेकिन वो फिर मंत्री जी के आगे पीछे लोग टहलते हैं और एक शिक्षक मंत्री बना दे आईएस बना दे कुछ भी बना दे लेकिन उसका सम्मान हुआ है नहीं और हम सम्मान भी अगर देते हैं तो ज्यादा ज्यादा पैर छू लेते हैं और वह शिक्षक बोला बेचारा उतने परी गदगद हो जाता

aapka prashna kya aapko lagta hai ki ek peshe ke roop me shikshan ko is tarah ka sammaan diya jata hai jiske vaah haqdaar nahi mitra bilkul nahi aa jaaye kya hai ki aaj ki duniya bhog wadi duniya hai aur pamprint 100 ki duniya hai vakya bataye ki ek shikshak agar apne peshe ke prati vafaadar hota hai toh dhyan rakhiye ki vaah us karkhane ka majdur adhikari karmchari hai jisse desh ki samast kshetro ke karigar taiyar hote hain lekin shikshak jo hai vaah adarsh ki drishti se dekha jata aur uske aacharan me zara si galti hone par saara samaj uske upar anguli uthaata hai aur sahi bhi hai ki agar galat nikal gaya toh uske saare vidyarthi free chain system banega uski izzat matra ab uske chhatro tak ray aur chhatro ki sthiti kya hai ki ab vaah padhai ke prati unka vaah samarpan nahi raha prasadhan bahut aage mobile se padh le raha hai net lagakar ke kitabon se padh le raha baccha ghar par maa baap pada le rahe hain kyonki bahut se schoolon me bahut unche sthar hai lekin wahan keval homework diya jata hai uski tulna me aaj ek adhikari ki izzat kahin bahut zyada hai ab dekh lijiye ki college ka Lecturer tuti hui cycle scooter ya apni niji car maintain kar raha toh usse aata jata hai aur ekta daan me pack thanedaar ko bhi aaj sarkari sadhan muhaiya karae ja raha naib tahseeldar ko karaya ja raha hai abhi ab government ko mehsus ho raha coronavirus toh kahin aana jana toh sabko uplabdh karaya ja raha tha banane jaane ka adhyapak ke saath aisa kuch bhi ek doctor ghar par private practice karta hai ki sarkar bhi allow karti hai kuch fees le sakta hai lekin ek shikshak niyamanusar ghar par tuition bhi nahi kar sakta hai uske atirikt aamdani tuition ke alava kuch bhi nahi kuch subject toh aise jisme tuition kar bhi nahi sakta hai toh ab raha ki keval tyag aur tapasya toh bhaiya ab theek hai aadarshon ki baat kariye lekin teacher apne aadarshon ke saath apne parivar ke logo ka mooh toh band nahi kar sakta vaah wali mansikta uske baccho ki bhi ho sakti hai aur saal bhar me hi kamai uske paas atirikt hoti hai kyonki badhne pehle ka ke kuch vishay me tuition sambhav nahi hai kuch toh pariksha ki duty kar le aur kapiyan jaanch le usme bhi sabse pehle income tax laga diya jata hai aur vishwavidyalaya saal 2 saal me kabhi de de toh bhugtan de de apni sabse badi problem hai hoti hai ki sab aapke toh kaafi ke bindlu hi nahi bane hain ya phir aapne jo bill bheja toh kahin miss ho gaya hai aur zara sa savdhani hui toh 40 Rs jo kama sakta hai vaah bhi use nahi milta hai ek tarah se dhyan rakhen ki is karan thoda sa vichalan sex dot com abhi aaya hai aaj ke bhautikata wadi parivesh me jo shikshak bahut hi vafaadar hain karmon ke prati sammaan toh unka hai lekin phir bhi vaah sammaan nahi hai jo aaj naukarshahi ka hai afasarashahi ka hai rajnetao ka hai 18 va paas vidhayak ho jata toh uske aage peeche log chalte hain rajya mantri mantri kuch bhi ban jaaye chalte maar dusre log hain lekin vo phir mantri ji ke aage peeche log tahlate hain aur ek shikshak mantri bana de ias bana de kuch bhi bana de lekin uska sammaan hua hai nahi aur hum sammaan bhi agar dete hain toh zyada zyada pair chu lete hain aur vaah shikshak bola bechaara utne pari gadgad ho jata

आपका प्रश्न क्या आपको लगता है कि एक पेशे के रूप में शिक्षण को इस तरह का सम्मान दिया जाता ह

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Bk soni

Rajyoga Teacher

0:48
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आपका प्रश्न बहुत अच्छा है क्या आपको लगता है कि एक पेशे के रूप में शिक्षक को उस तरह का सम्मान दिया जाता है जिसके वह हार्दिक का अधिकार है अखबार है जी बिल्कुल सही है देखिए तो कहीं ना कहीं अगर कोई भी लोग कुछ भी करता है तो उसके पीछे उसका जीवन संभालने का परिवार संभालने का भी एक जिम्मेवारी होता है इसीलिए पैसा जिसका है जो उसके अनुसार उस को सम्मान देना हमारा अधिकार है और उसको सलमान उस पोस्ट को देते हैं ना कि उनको देते हैं इसीलिए सलमान देना वह अधिकार है वह उसका हकदार भी है धन्यवाद

aapka prashna bahut accha hai kya aapko lagta hai ki ek peshe ke roop me shikshak ko us tarah ka sammaan diya jata hai jiske vaah hardik ka adhikaar hai akhbaar hai ji bilkul sahi hai dekhiye toh kahin na kahin agar koi bhi log kuch bhi karta hai toh uske peeche uska jeevan sambhalne ka parivar sambhalne ka bhi ek jimmewari hota hai isliye paisa jiska hai jo uske anusaar us ko sammaan dena hamara adhikaar hai aur usko salman us post ko dete hain na ki unko dete hain isliye salman dena vaah adhikaar hai vaah uska haqdaar bhi hai dhanyavad

आपका प्रश्न बहुत अच्छा है क्या आपको लगता है कि एक पेशे के रूप में शिक्षक को उस तरह का सम्म

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Harender Kumar Yadav

Career Counsellor.

0:34
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क्या आपको लगता है कि एक पेशे के रूप में शिक्षण को उस तरह का सम्मान दिया जाता है इसके हकदार है गवर्नमेंट के द्वारा तो अच्छी फैसिलिटी दी जा रही है और लेकिन जो समाज में है धीरे-धीरे जैसे लोगों की मानसिकता होती चली आ रही है तो वहां पर वह सम्मान नहीं मिला है और खास करके दूसरे रास्तों में जो टीचर्स का सम्मान होता है शायद उनकी कार में हमारे देश में

kya aapko lagta hai ki ek peshe ke roop me shikshan ko us tarah ka sammaan diya jata hai iske haqdaar hai government ke dwara toh achi facility di ja rahi hai aur lekin jo samaj me hai dhire dhire jaise logo ki mansikta hoti chali aa rahi hai toh wahan par vaah sammaan nahi mila hai aur khas karke dusre raston me jo teachers ka sammaan hota hai shayad unki car me hamare desh me

क्या आपको लगता है कि एक पेशे के रूप में शिक्षण को उस तरह का सम्मान दिया जाता है इसके हकदार

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सुरेन्द्र पाल गुप्ता

रिटायर्ड प्रधानाचार्य

2:03
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क्या आपको लगता है कि विश्व के रूप में शिक्षक को उस तरह का सम्मान दिया जिसकी वह स्थान जहां तक सम्मान तक सेना सम्मान शिक्षक के साथ में यदि पर बच्चों को अच्छा पढ़ाता है बच्चों को इमानदारी पूर्वक आता है वह पूरी तैयारी के साथ पढ़ाता है तो मैं यह समझता हूं कि बच्चे उसे हमेशा जीवन भर इनाम देते सम्मान देते हैं कोई समान पैसों से नहीं होता है यदि 10 लोगों में को स्टूडेंट से सेक्स का चरण स्पर्श करता है तो उसका सम्मान बढ़ जाता है वे स्टूडेंट्स जो कि आज उस पोस्ट अगर मुझे मिलते हैं और मेरे चरण स्पर्श करते हैं तो मैं यह समझता हूं कि इससे बड़ा कोई भी सामान्य शिक्षक बच्चों को पढ़ा करके उनके भविष्य को बनाता है और शिक्षकों को जो सम्मान देते हैं तो ऐसा लगता है कि शिक्षक ने अपना फर्ज पूरा किया तो शिक्षक का सम्मान तो आजकल हुए हैं और ऐसे बच्चे उसके सम्मान को बढ़ा देते हैं वास्तव में उसका विषय शिक्षक ऐसा है जो कि वास्तविकता से जोड़ता है बच्चों को इस योग्य बनाता है कि बच्चे भविष्य में आगे जाकर के उन्नति करें तरकी करें धन्यवाद

kya aapko lagta hai ki vishwa ke roop me shikshak ko us tarah ka sammaan diya jiski vaah sthan jaha tak sammaan tak sena sammaan shikshak ke saath me yadi par baccho ko accha padhata hai baccho ko imaandari purvak aata hai vaah puri taiyari ke saath padhata hai toh main yah samajhata hoon ki bacche use hamesha jeevan bhar inam dete sammaan dete hain koi saman paison se nahi hota hai yadi 10 logo me ko student se sex ka charan sparsh karta hai toh uska sammaan badh jata hai ve students jo ki aaj us post agar mujhe milte hain aur mere charan sparsh karte hain toh main yah samajhata hoon ki isse bada koi bhi samanya shikshak baccho ko padha karke unke bhavishya ko banata hai aur shikshakon ko jo sammaan dete hain toh aisa lagta hai ki shikshak ne apna farz pura kiya toh shikshak ka sammaan toh aajkal hue hain aur aise bacche uske sammaan ko badha dete hain vaastav me uska vishay shikshak aisa hai jo ki vastavikta se Jodta hai baccho ko is yogya banata hai ki bacche bhavishya me aage jaakar ke unnati kare taraki kare dhanyavad

क्या आपको लगता है कि विश्व के रूप में शिक्षक को उस तरह का सम्मान दिया जिसकी वह स्थान जहां

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सत्य है कि एक पेशे के रूप में शिक्षण जो है सम्मान का पात्र यह सम्मान का विषय वाला पैसा जिसके वह हकदार हैं जिसके हम फरदार होते हैं शिक्षण एक अच्छा पैसा इसमें कहीं दो मत नहीं

satya hai ki ek peshe ke roop me shikshan jo hai sammaan ka patra yah sammaan ka vishay vala paisa jiske vaah haqdaar hain jiske hum fardar hote hain shikshan ek accha paisa isme kahin do mat nahi

सत्य है कि एक पेशे के रूप में शिक्षण जो है सम्मान का पात्र यह सम्मान का विषय वाला पैसा जिस

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गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पाय गुरु बलिहारी जिन गोविंद दियो बताए आज भी समाज में शिक्षक का मान सम्मान वही है जो पुराने समय में होता था समय में परिवर्तन हुआ और शिक्षक भी अपने कार्य प्रणाली में परिवर्तन किए कुछ शिक्षकों की गलत गतिविधियों के कारण कहीं ना कहीं शिक्षक समाज भी बदनाम हुआ लेकिन समाज में आज भी शिक्षक का स्तर और मान सम्मान बहुत ऊपर है धन्यवाद

guru govind dooo khade kake laagu paye guru balihari jin govind diyo bataye aaj bhi samaj me shikshak ka maan sammaan wahi hai jo purane samay me hota tha samay me parivartan hua aur shikshak bhi apne karya pranali me parivartan kiye kuch shikshakon ki galat gatividhiyon ke karan kahin na kahin shikshak samaj bhi badnaam hua lekin samaj me aaj bhi shikshak ka sthar aur maan sammaan bahut upar hai dhanyavad

गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पाय गुरु बलिहारी जिन गोविंद दियो बताए आज भी समाज में शिक्षक

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A_KUMAR

PRINCIPAL TEACHER

2:08
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अवश्य दिया जाता है यदि शिक्षक अपने कार्य के प्रति पूर्ण समर्पित भाव से कार्य करते हैं और अपने कार्य को अंजाम देते हैं एक शिक्षक का दायित्व बच्चों को निखारने उनका जीवन परिवर्तन करना संपूर्ण विकास करना अगर इस रूप में अध्यापक सफल हो जाता है तो आज भी शिक्षक का सम्मान समाज में बरकरार है और वह सम्मान पाता है किंतु आजकल लोगों ने शिक्षण को सिर्फ एक नौकरी पेशा तक ही सीमित कर रखा है जिसको सिर्फ वेप पैसों के लिए ही करना चाहते हैं यदि एक शिक्षक बच्चों के लिए की भूमिका में रहता है तो वह उनका संपूर्ण विकास करता है उनका निर्माण करता है और जब हम बच्चे के जीवन में एक विशिष्ट परिवर्तन लाते हैं उसका संपूर्ण विकास करते हैं उसकी प्रतिभाओं को निखारने हैं तो बच्चे का सम्मान करते हैं उसके साथ-साथ उसके अभिभावक और समाज भी शिक्षक को सम्मान देता है शिक्षक एक समाज के निर्माता की भूमिका के रूप में होता है और ऐसे शिक्षक का सभी सम्मान करते हैं रही बात सम्मान की तो सम्मान मांगा नहीं जाता है सम्मान को हासिल करना पड़ता है उसको हासिल किया जाता है और उसके लिए हमें कुछ करना पड़ता है हमें समर्पित होना पड़ता है अपने कर्तव्य के प्रति अपने कर्म के प्रति अपने देश राष्ट्र और समाज के प्रति जब हम समाज को बच्चों को रोज और इस देश को कुछ देंगे तो यह देश ही समाज है लोग बच्चे सब हमें अवश्य देंगे जैसा हम देते हैं वैसा ही पाते हैं

avashya diya jata hai yadi shikshak apne karya ke prati purn samarpit bhav se karya karte hain aur apne karya ko anjaam dete hain ek shikshak ka dayitva baccho ko nikharne unka jeevan parivartan karna sampurna vikas karna agar is roop me adhyapak safal ho jata hai toh aaj bhi shikshak ka sammaan samaj me barkaraar hai aur vaah sammaan pata hai kintu aajkal logo ne shikshan ko sirf ek naukri pesha tak hi simit kar rakha hai jisko sirf vape paison ke liye hi karna chahte hain yadi ek shikshak baccho ke liye ki bhumika me rehta hai toh vaah unka sampurna vikas karta hai unka nirmaan karta hai aur jab hum bacche ke jeevan me ek vishisht parivartan laate hain uska sampurna vikas karte hain uski pratibhaon ko nikharne hain toh bacche ka sammaan karte hain uske saath saath uske abhibhavak aur samaj bhi shikshak ko sammaan deta hai shikshak ek samaj ke nirmaata ki bhumika ke roop me hota hai aur aise shikshak ka sabhi sammaan karte hain rahi baat sammaan ki toh sammaan manga nahi jata hai sammaan ko hasil karna padta hai usko hasil kiya jata hai aur uske liye hamein kuch karna padta hai hamein samarpit hona padta hai apne kartavya ke prati apne karm ke prati apne desh rashtra aur samaj ke prati jab hum samaj ko baccho ko roj aur is desh ko kuch denge toh yah desh hi samaj hai log bacche sab hamein avashya denge jaisa hum dete hain waisa hi paate hain

अवश्य दिया जाता है यदि शिक्षक अपने कार्य के प्रति पूर्ण समर्पित भाव से कार्य करते हैं और अ

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पेशे के रूप में शिक्षक कितना सम्मान नहीं करते हैं उसका सम्मान नहीं दिया जाता है लेकिन जो शिक्षण के रूप में होना चाहिए को सम्मान उतना नहीं मिल रहा है

peshe ke roop me shikshak kitna sammaan nahi karte hain uska sammaan nahi diya jata hai lekin jo shikshan ke roop me hona chahiye ko sammaan utana nahi mil raha hai

पेशे के रूप में शिक्षक कितना सम्मान नहीं करते हैं उसका सम्मान नहीं दिया जाता है लेकिन जो श

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जिसने भी यह सवाल किया है वह तो मैं धन्यवाद ज्ञापित करता हूं सर्वप्रथम इसके बाद में मैं सवाल के ऊपर आता क्या आपको लगता है कि एक पिता के रूप में शिक्षण को उसी तरह का सम्मान दिया जाता है जिसके कारण देखिए सम्मान पाने के लिए सम्मान देना जरूरी शिक्षक का पैसा पैसा नहीं ज्ञान बांटने का कोई भी जाम से कोई और नहीं हो सकता क्या नहीं लगाया जाता कितने पैसे होते तो एक शिक्षक को उसको सम्मान उसी को दिया जाता है जो दूसरे को सम्मान करता है यदि आपके अंदर बुद्धि जीविता होगी आपके अंदर में गुरु क्या होगी आपके अंदर में अच्छी बातें होंगी सुनना चाहते हुए भी लोग आपके सम्मान करेंगे सम्मान किसे कहा जाता है सम्मान का मतलब यह है कि आपकी बातों को ध्यानपूर्वक सुना जाए ध्यानपूर्वक सुनते हैं किसी की बात को भी सुनते हैं ध्यान अगले अगले की बातों को समझ रहा है अगले की बात को तो ताला के अंतर्गत में जो स्टूडेंट होते हैं वही हमारे लिए चरम बिंदु पर होते हैं उनकी बातों को हम तो समझना पड़ता यदि हम की बातों को समझ रहे एक टीचर यदि 400 स्टूडेंट की बातों को समझ है एक लाख के अंतर्गत और चार स्टूडेंट उसकी बातों को समझ रहे हैं तो एक कक्ष में कभी सूरज इस कक्षा में शोर नहीं हो रहा है इसका अर्थ है कि उस गुरु का उसका हाथ में सम्मान किया जा रहा है शिक्षक को सम्मान पाने की जरूरत नहीं है शिक्षक अपने आप में ही सम्मानित व्यक्ति है लेकिन यदि वह गलत चीजों को अपनाता है एक टीचर होने के बावजूद भी अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं करता वह ऐसे टीचर को कोई पसंद नहीं करता वैसे टीचर पसंद करता अगर घर का कोई मुखिया है और घर के कर्तव्यों से विमुख हो जाता है तो उसका घर के लोग नहीं करते उसी प्रकार से साला में यदि कोई टीचर पढ़ाता लिखाता नहीं एन केन प्रकारेण अनंत अनंत बढ़ाने को छोड़कर तो बच्चे उसे हमेशा खफा होते हैं और उनका सम्मान नहीं करते लेकिन मेरे जीवन में बहुत ज्यादा प्यार पाया हूं मुझे बहुत ज्यादा सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है इसलिए मैं इस बात को नहीं मानता कि टीचर को सम्मान की कभी कमी हो सकती है

jisne bhi yah sawaal kiya hai vaah toh main dhanyavad gyapit karta hoon sarvapratham iske baad me main sawaal ke upar aata kya aapko lagta hai ki ek pita ke roop me shikshan ko usi tarah ka sammaan diya jata hai jiske karan dekhiye sammaan paane ke liye sammaan dena zaroori shikshak ka paisa paisa nahi gyaan baantne ka koi bhi jam se koi aur nahi ho sakta kya nahi lagaya jata kitne paise hote toh ek shikshak ko usko sammaan usi ko diya jata hai jo dusre ko sammaan karta hai yadi aapke andar buddhi jivita hogi aapke andar me guru kya hogi aapke andar me achi batein hongi sunana chahte hue bhi log aapke sammaan karenge sammaan kise kaha jata hai sammaan ka matlab yah hai ki aapki baaton ko dhyanapurvak suna jaaye dhyanapurvak sunte hain kisi ki baat ko bhi sunte hain dhyan agle agle ki baaton ko samajh raha hai agle ki baat ko toh tala ke antargat me jo student hote hain wahi hamare liye charam bindu par hote hain unki baaton ko hum toh samajhna padta yadi hum ki baaton ko samajh rahe ek teacher yadi 400 student ki baaton ko samajh hai ek lakh ke antargat aur char student uski baaton ko samajh rahe hain toh ek kaksh me kabhi suraj is kaksha me shor nahi ho raha hai iska arth hai ki us guru ka uska hath me sammaan kiya ja raha hai shikshak ko sammaan paane ki zarurat nahi hai shikshak apne aap me hi sammanit vyakti hai lekin yadi vaah galat chijon ko apnaata hai ek teacher hone ke bawajud bhi apne kartavya ka nirvahan nahi karta vaah aise teacher ko koi pasand nahi karta waise teacher pasand karta agar ghar ka koi mukhiya hai aur ghar ke kartavyon se vimukh ho jata hai toh uska ghar ke log nahi karte usi prakar se sala me yadi koi teacher padhata likhata nahi N cane prakaren anant anant badhane ko chhodkar toh bacche use hamesha khafa hote hain aur unka sammaan nahi karte lekin mere jeevan me bahut zyada pyar paya hoon mujhe bahut zyada sammaan ki drishti se dekha jata hai isliye main is baat ko nahi maanta ki teacher ko sammaan ki kabhi kami ho sakti hai

जिसने भी यह सवाल किया है वह तो मैं धन्यवाद ज्ञापित करता हूं सर्वप्रथम इसके बाद में मैं सवा

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KL Kashyap

Teacher

1:30
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नमस्कार बहुत ही महत्वपूर्ण बिंदु है हर शिक्षण की अभिलाषा होती है कि उसे सम्मान की दृष्टि से देखा जाए लोग एवं छात्र उसका सम्मान करें जिसका वह हकदार है मैं मानता हूं कि सबसे ज्यादा सम्मान समाज में एक शिक्षक को ही मिलता है क्योंकि उसने निस्वार्थ अपने छात्रों को सफल बना कर समाज का कल्याण किया है आज भी हम अपने पुराने शिक्षकों को याद करके भावुक हो जाते हैं कि किस तरह उन्होंने हमें बिना भेदभाव की भावना से शिक्षित किया लेकिन वर्तमान समय में शिक्षक के सम्मान में कमी आई है छात्रों के लिए मैं एक ऐसा व्यक्ति बन कर रह गया है जो उन्होंने पड़ा मनी का पैसा लेता है ऐसा माहौल केवल छात्रों ने ही उत्पन्न नहीं किया है शिक्षक भी उतने ही जिम्मेदार है अतः आज ही यदि शिक्षक और छात्रों की आपसी संबंध गुरु शिष्य वाले हो जाएं तो मैं समझता हूं कि शिक्षकों को उनका सम्मान प्राप्त होगा जिसके वह हकदार है

namaskar bahut hi mahatvapurna bindu hai har shikshan ki abhilasha hoti hai ki use sammaan ki drishti se dekha jaaye log evam chatra uska sammaan kare jiska vaah haqdaar hai main maanta hoon ki sabse zyada sammaan samaj me ek shikshak ko hi milta hai kyonki usne niswarth apne chhatro ko safal bana kar samaj ka kalyan kiya hai aaj bhi hum apne purane shikshakon ko yaad karke bhavuk ho jaate hain ki kis tarah unhone hamein bina bhedbhav ki bhavna se shikshit kiya lekin vartaman samay me shikshak ke sammaan me kami I hai chhatro ke liye main ek aisa vyakti ban kar reh gaya hai jo unhone pada money ka paisa leta hai aisa maahaul keval chhatro ne hi utpann nahi kiya hai shikshak bhi utne hi zimmedar hai atah aaj hi yadi shikshak aur chhatro ki aapasi sambandh guru shishya waale ho jayen toh main samajhata hoon ki shikshakon ko unka sammaan prapt hoga jiske vaah haqdaar hai

नमस्कार बहुत ही महत्वपूर्ण बिंदु है हर शिक्षण की अभिलाषा होती है कि उसे सम्मान की दृष्टि स

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आचार्य अभिषेक शर्मा

शिक्षक, कवि, शायर

1:01
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नमस्कार महोदय मुझे तो ऐसा कुछ नहीं लगता कि शिक्षक को समाज में उसके अनुकूल जैसा वह परिश्रम कर रहा है जैसा उसका पैसा है उसके पुलिस को सम्मान ना मिलता हो आदरणा मिलता हूं ऐसा कुछ नहीं है आज के समय में भी शिक्षक को उतना ही आदर मान मिलता है जिसका वह हकदार है अगर कहीं नहीं मिल रहा है तो उसका जिम्मेदार खुद शिक्षक ही है ना कोई और शिक्षक आज के समय बच्चों को वह संस्कार नहीं दे पा रहे हैं समाज को वह शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं जो तूने देनी चाहिए उतनी मेहनत परिश्रम वह नहीं कर रहे हैं जितना उन्हें करना चाहिए अगर ऐसा कर रहे हैं तो उन्हें सम्मान नहीं मिलेगा और वह अपनी पूर्ण मेहनत के साथ उन्हें संस्कार की शिक्षा के साथ-साथ संस्कार विश खा रहा है तो कभी नहीं हो सकता है ऐसा कि शिक्षक को सम्मान ना मिले धन्यवाद

namaskar mahoday mujhe toh aisa kuch nahi lagta ki shikshak ko samaj me uske anukul jaisa vaah parishram kar raha hai jaisa uska paisa hai uske police ko sammaan na milta ho adarana milta hoon aisa kuch nahi hai aaj ke samay me bhi shikshak ko utana hi aadar maan milta hai jiska vaah haqdaar hai agar kahin nahi mil raha hai toh uska zimmedar khud shikshak hi hai na koi aur shikshak aaj ke samay baccho ko vaah sanskar nahi de paa rahe hain samaj ko vaah shiksha nahi de paa rahe hain jo tune deni chahiye utani mehnat parishram vaah nahi kar rahe hain jitna unhe karna chahiye agar aisa kar rahe hain toh unhe sammaan nahi milega aur vaah apni purn mehnat ke saath unhe sanskar ki shiksha ke saath saath sanskar wish kha raha hai toh kabhi nahi ho sakta hai aisa ki shikshak ko sammaan na mile dhanyavad

नमस्कार महोदय मुझे तो ऐसा कुछ नहीं लगता कि शिक्षक को समाज में उसके अनुकूल जैसा वह परिश्रम

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Kumar Saurabh

Education

0:24
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नमस्कार दोस्तों इस प्रश्न के उत्तर में मेरा अपना मानना है कि जिस सम्मान के योग है हकदार है ऐसा सम्मान उसे मिलता है

namaskar doston is prashna ke uttar me mera apna manana hai ki jis sammaan ke yog hai haqdaar hai aisa sammaan use milta hai

नमस्कार दोस्तों इस प्रश्न के उत्तर में मेरा अपना मानना है कि जिस सम्मान के योग है हकदार

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मैं पेशे से शिक्षक हूं तो आपका जो यह सवाल है कि क्या उनको उसने का सम्मान मिलता है जिसका सम्मान के हकदार है सबसे पहली बात तो सम्मान आप खुद लोगों के दिल में अपने लिए बनाते हैं आपका एक्शन आपका बहुत सारी चीज है आपकी आपको सम्मान दिलाती आप अपने जॉब फील्ड में कैसे हैं आप का सामाजिक व्यवहार कैसा है आप लोगों के साथ जगधार कैसा करते हैं आप अपने काम को कितने इमानदारी पूर्वक करते हैं इनको देख कर के आप को संभाल आप कमाते हैं इसीलिए सम्मान का हकदार आप अगर सम्मान के हकदार हैं तो आपको जरूर सम्मान देता सही बात मैं अपनी अगर बात करूं मैं पेशे से शिक्षक हूं और मैंने जैसा बताया मैं बहुत ही स्कूल से आई हुई है अलग-अलग टीमें अलग-अलग बच्चों के साथ मिली हूं और मुझे ऐसा कभी नहीं लगा कि मुझे मेरे पैसे में सम्मान नहीं मिल रहा मुझे बहुत सम्मान मिलता है और मैं इस चीज से बहुत खुश हूं

main peshe se shikshak hoon toh aapka jo yah sawaal hai ki kya unko usne ka sammaan milta hai jiska sammaan ke haqdaar hai sabse pehli baat toh sammaan aap khud logo ke dil me apne liye banate hain aapka action aapka bahut saari cheez hai aapki aapko sammaan dilati aap apne job field me kaise hain aap ka samajik vyavhar kaisa hai aap logo ke saath jagdhar kaisa karte hain aap apne kaam ko kitne imaandari purvak karte hain inko dekh kar ke aap ko sambhaal aap kamate hain isliye sammaan ka haqdaar aap agar sammaan ke haqdaar hain toh aapko zaroor sammaan deta sahi baat main apni agar baat karu main peshe se shikshak hoon aur maine jaisa bataya main bahut hi school se I hui hai alag alag teamen alag alag baccho ke saath mili hoon aur mujhe aisa kabhi nahi laga ki mujhe mere paise me sammaan nahi mil raha mujhe bahut sammaan milta hai aur main is cheez se bahut khush hoon

मैं पेशे से शिक्षक हूं तो आपका जो यह सवाल है कि क्या उनको उसने का सम्मान मिलता है जिसका सम

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एक पर्ची व्यापार के रूप में शिक्षण को उस तरह का सम्मान दिया जाता है जिसके वह हकदार हो तो जीवन यापन करने के लिए व्यक्ति अन्य जगह भी सम्मान कहीं भी सम्मान प्राप्त कर सकता है कोई जरूरी नहीं है कि शिक्षा में ही सम्मान प्राप्त करें सम्मानित व्यवहारिकता यदि व्यक्ति में बच्चा हो छात्रों को सामाजिक व्यक्ति हो ग्रामीण और शहरी हो कोई भी यदि व्यवहारिकता है उसके संस्कार अच्छे हैं तो वह हर जगह सम्मान पाता उस को सम्मान दिया जाएगा यह दिया जाता है और जिसके वह हकदार तो ऐसा है व्यक्तित्व का निर्माण जिसमें हो गया जिसके पास व्यक्तित्व है जो जो दूसरे को सम्मान देता है उसी को सम्मान मिलता है तो सम्मान का मतलब यह है कि सम्मान देने वाला लेने वाले ने जब तक सम्मान आप किसी को देंगे नहीं तो आपको सम्मान कहां से मिलेगा कोई भी बच्चे भी 1 दिन टीचर होते हैं बड़े होकर तुमको कुछ चीजें याद रहती है इसलिए सम्मान देना सीखना चाहिए लेना नहीं

ek parchi vyapar ke roop me shikshan ko us tarah ka sammaan diya jata hai jiske vaah haqdaar ho toh jeevan yaapan karne ke liye vyakti anya jagah bhi sammaan kahin bhi sammaan prapt kar sakta hai koi zaroori nahi hai ki shiksha me hi sammaan prapt kare sammanit vyavaharikta yadi vyakti me baccha ho chhatro ko samajik vyakti ho gramin aur shahri ho koi bhi yadi vyavaharikta hai uske sanskar acche hain toh vaah har jagah sammaan pata us ko sammaan diya jaega yah diya jata hai aur jiske vaah haqdaar toh aisa hai vyaktitva ka nirmaan jisme ho gaya jiske paas vyaktitva hai jo jo dusre ko sammaan deta hai usi ko sammaan milta hai toh sammaan ka matlab yah hai ki sammaan dene vala lene waale ne jab tak sammaan aap kisi ko denge nahi toh aapko sammaan kaha se milega koi bhi bacche bhi 1 din teacher hote hain bade hokar tumko kuch cheezen yaad rehti hai isliye sammaan dena sikhna chahiye lena nahi

एक पर्ची व्यापार के रूप में शिक्षण को उस तरह का सम्मान दिया जाता है जिसके वह हकदार हो तो ज

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Prashant

Teacher

2:26
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देखिए एक शिक्षक का विद्यार्थी के जीवन में बहुत बड़ा महत्व होता है विद्यार्थी को क्या करना है कैसे करना है उसको पता तो सब चीजें होती हैं लेकिन उनका सही दिशा में निर्धारण नहीं हो पाता इसके लिए एक शिक्षक की आवश्यकता होती है जरूरी नहीं है कि वह शिक्षक कोई बाहर का व्यक्ति हो शिक्षा जो देता है वही आपका शिक्षक होता है क्या माता-पिता एक शिक्षक नहीं होते हैं बिल्कुल होते हैं कि माता-पिता भी आपको हमेशा सही दिशा की ओर अग्रसर करेंगे या आपका बड़ा भाई बड़ा बहन सभी आपके लिए एक शिक्षक का कार्य करते हैं लेकिन अगर हमें गुरु की बात करें गुरु का इसलिए हम लोग महत्व अधिक अधिक लगते हैं क्योंकि जो गुरु होता है वह आपसे ब्लड रिलेटेड नहीं होगा इसका मतलब रक्त संबंधी आपका नहीं होगा वह बिना दांत संबंधी होते हुए भी आपको जीवन में ऊंचे पद पर पहुंचने के लिए हमेशा प्रोत्साहित करता रहेगा आप की कमियों को दूर करता रहेगा आपकी अच्छाइयों को उजागर करता रहेगा लेकिन आजकल एक हम यह कह सकते हैं दुर्भाग्य शिक्षा का की याद शिक्षा भी व्यवसाय का रूप ले तमाम तरह के आप देखेंगे कि कोचिंग स्कूल गई है या शिक्षक भी बच्चों को एक तरह से कह दें कि ब्लैकमेल करते हैं कि आप मेरी कोचिंग में आकर पढ़ो नहीं तो हम तुम्हें प्रैक्टिकल के नंबर नहीं देंगे या तुमको हम होम एग्जाम में फेल कर देंगे यह व्यवसाय का रूप जो बन गया है इसका एक कारण इसलिए भी क्योंकि कई सारे आप देखिए प्राइवेट विद्यालय ऐसे हैं जो सीबीएसई आईसीएसई द्वारा संचालित किए जाते हैं यह यूपी बोर्ड के भी कुछ विद्यालय हैं जो उस शिक्षकों को उनका उतना वेतन नहीं दे पाते हैं जिसके वह स्वयं हकदार है और सरकारी टीचर को इतनी ज्यादा सैलरी आज दी जाती है कि शायद उनके पास इतने बच्चे ही नहीं होते हैं जितनी हजार उनकी सैलरी होती है मैं यह नहीं कह रहा हूं कि आप सरकारी टीचर की सैलरी कम कर दीजिए या प्राइवेट टीचर की सैलरी बढ़ा दीजिए आप दोनों में बैलेंस बनाइए जिससे यह जो बहुत बड़ा अंतर आता है इसको हम खत्म कर सके और शिक्षक को भी अगर आप उचित उसका वेतन देंगे तो वह जो स्कूल में पढ़ा रहा है बच्चों को वह इमानदारी के साथ पढ़ा सकता है जिससे सा बच्चों के साथ साथ वह अपने साथ भी न्याय कर सकता है कई बार शिक्षक ने ना चाहते हुए भी उसको व्यवसाय करना पड़ता है क्योंकि वह मजबूर हो जाता है तो मेरा बस यही हैं सरकार से एक मैं रिक्वेस्ट कर सकता हूं कि कृपया करके प्राइवेट शिक्षकों के बारे में भी कुछ सोचा जाए और सरकारी शिक्षकों के लिए भी हित पर नियमानुसार ध्यान देना चाहिए धन्यवाद

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देखिए एक शिक्षक का विद्यार्थी के जीवन में बहुत बड़ा महत्व होता है विद्यार्थी को क्या करना

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Ramakant

Teacher

1:05
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

वर्तमान समय में हमको लगता है कि शिक्षक को जिस तरह का सम्मान मिलना चाहिए वह नहीं मिल रहा है प्राचीन काल में शिक्षा प्रदान प्राचीन काल में शिक्षक प्रधान शिक्षा हुआ करते थे शिक्षक पर ही सब लोग सभी छात्र छात्र डिपेंड होकर शांत होकर उनकी बातों को सुना करते थे परंतु वर्तमान काल में शिक्षा व्यवस्था बदल गई अब शिक्षक प्रधान शिक्षा नहीं रह गई अब छात्र प्रधान शिक्षा हो गई इसको देखते हुए वर्तमान काल में शिक्षकों के प्रति लोगों का सामान निरंतर घटता चला जा रहे हैं कुछ शिक्षकों के व्यवहार शिक्षकों के कार्य से भी सम्मान घटता जा रहा है इस समय वर्तमान में ऐसा लगता है कि जो सम्मान मिलना चाहिए वह सामान शिक्षकों को नहीं मिल रहा है

vartaman samay me hamko lagta hai ki shikshak ko jis tarah ka sammaan milna chahiye vaah nahi mil raha hai prachin kaal me shiksha pradan prachin kaal me shikshak pradhan shiksha hua karte the shikshak par hi sab log sabhi chatra chatra depend hokar shaant hokar unki baaton ko suna karte the parantu vartaman kaal me shiksha vyavastha badal gayi ab shikshak pradhan shiksha nahi reh gayi ab chatra pradhan shiksha ho gayi isko dekhte hue vartaman kaal me shikshakon ke prati logo ka saamaan nirantar ghatata chala ja rahe hain kuch shikshakon ke vyavhar shikshakon ke karya se bhi sammaan ghatata ja raha hai is samay vartaman me aisa lagta hai ki jo sammaan milna chahiye vaah saamaan shikshakon ko nahi mil raha hai

वर्तमान समय में हमको लगता है कि शिक्षक को जिस तरह का सम्मान मिलना चाहिए वह नहीं मिल रहा है

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मुझे लगता है कि आज के युग में शिक्षण को एक पैसे के रूप में वह सम्मान नहीं दिया जा रहा है जिसका वह हकदार है या जो सम्मान उसे कभी प्राप्त था लेकिन अब इस संबंध में मैं थोड़ी बात को आगे बढ़ाना चाहूंगा कि आज अगर वह सम्मान नहीं रहा तो क्यों नहीं रहा एक वक्त था जब गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरु देवो महेश्वरा गुरु साक्षात परम ब्रम्ह तस्मै श्री गुरुवे नमः इस तरह की उक्ति यों के माध्यम से गुरु का बहुत ऊंचा स्थान माना गया था मध्यकाल में भी कबीर जैसे संतों ने लिखा है कि गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पाय बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताए तो निसंदेह प्राचीन काल में गुरु का स्थान बड़ा ऊंचा था उसे भगवान माता पिता इन सबसे ऊपर माना गया था लेकिन वर्तमान स्थिति ऐसी नहीं है अब नहीं है तो क्यों नहीं इसके बहुत सारे कारण हैं पहला कारण तो यह है कि आज का जो शिक्षण व्यवसाई है जो पैसा है वह उस सच्चे सम्मान का तो हकदार ही नहीं है क्योंकि उस काल में जो गुरु होता था जो शिक्षा देने का कार्य करता था वह उसे सेवा मानता था उसे व्यवसाय नहीं मानता था लेकिन आज बड़े अफसोस के साथ कहता हूं मैं शिक्षक होते हुए भी इस बात को स्वीकार करता हूं कि हमने शिक्षण को एक व्यवसाय बना दिया एक पैसा बना दिया अब हम लोग करें हम एक बहुत बड़ी तनख्वाह लेते हैं और तनख्वाह के बदले काम करते हैं तो हर कोई जो मजदूरी करता है जो किसी की या नौकरी करता है या कुछ भी करता है वह जो काम कर रहा है उसके बदले में वह एक बहुत बड़ा रकम अपने हाथ में ले रहा है फिर ऊपर से वह चाहता है कि मेरा बहुत बड़ा सम्मान हो तो भाई क्यों हो तुमने जो काम किया उसके बदले तुम्हें पैसा मिल गया ना तो सम्मान किस बात का अब सम्मान किसका होता है तो पैसा लेकर काम करने के साथ-साथ काम को इतनी तन्मयता से इतनी ईमानदारी से और इतनी बखूबी से कर जाए लोगों की तारीफ करें बिना नहीं रहे अब उस पैसे से उस काम की तुलना नहीं होगी बल्कि उसे सम्मान देकर उसके बराबर लाया जाएगा जो उसने किया है और यही शिक्षण व्यवसाय में हो रहा है आज जो अध्यापक बहुत अच्छा काम कर रहे हैं अपने विद्यार्थियों के अंतर्मन से जुड़े हुए हैं जो उनके जीवन को उन्नत करने के लिए ऊपर उठाने के लिए हमेशा कुछ ना कुछ सोचते रहते हैं और करते रहते हैं उनका अवश्य सम्मान होता है भाई जब हम एक छोटे से गाने बजाने वाले कलाकार को किसी पार्टी में लेकर आते हैं कुछ पैसे देकर उसे हायर करते हैं तू अपनी सारी कला सारे जोश के साथ सारे उत्साह और उमंग के साथ कितनी ताकत उसमें है उतनी ताकत उस कला में वह छूट देता है और तब सामने बैठे हुए लोग ताली बजाए बिना नहीं रहते कि भाई वाह क्या शानदार कलाकार है भाई यही है जरा एक बार सोचिए क्या हमने शिक्षक के रूप में जब भी हम कक्षा में गए जब भी कक्षा के उन विद्यार्थियों के सामने हमने एक पाठ प्रस्तुत किया तो क्या हमने सारी ताकत झोंकी क्या हमने हमारा संपूर्ण उत्तर निचोड़ कर उनके सामने रख दिया क्या हम पूरे के पूरे जोश से उस कक्षा में के और यदि यह सब हमने किया तो उस कक्षा का प्रत्येक विद्यार्थी सच्चे दिल से आपका सम्मान करेगा इसमें कोई गुंजाइश नहीं है बिल्कुल करेंगे लेकिन यदि हमने यह सब नहीं किया तो वह हमारा सम्मान नहीं करेंगे और उन नहीं करना चाहिए क्योंकि हमने उतना ही किया जितना हमने पैसा लिया तो फिर सम्मान किस बात का आप चोली ले रहे हैं उससे अधिक करके दिखाइए किसी के जीवन को उन्नत बनाकर दिखाइए तो लोग आपका सम्मान जरूर करेंगे दूसरी बात पढ़ाना तो आपका काम है वह तो आपको करना ही है वह तो आपकी सेवा नियमों में है कभी जरा उससे हटकर भी कुछ की अपनी कक्षा का एक विद्यार्थी जो आज थोड़ा उदास मासूम लगता बैठा है कभी वक्त निकालकर इंटरवल में उसके पास जाइए उसे अलग बुलाइए उसके सिर पर हाथ फिर आइए और उसे प्यार के पूछे बेटा क्या हुआ कोई समस्या है मुझे बताओ मैं तुम्हारी सहायता करूंगा और वह तो कोमल मन के बच्चे होते हैं मोमसा कोमल उनका दिल होता है पीएल जाएंगे बता देंगे आपको चाहे उनके घर से समझते आए चाहे उन्हें मित्रों से समस्या है चाहे उन्हें अपने अध्ययन से समस्या है वह आपके सामने जरूर शेयर करेगा आप उसके लिए कुछ कर सकते हैं या ना कर सके लेकिन इतना जरूर कीजिए कि उसका हौसला बढ़ाइए उसके सिर पर हाथ फेर कर कहिए बेटा चिंता करने की जरूरत नहीं है मैं हूं ना तुम्हारे साथ और फिर देखिए कैसे वह बच्चा अंतर तन पर आप से जुड़ जाता है और आप सम्मान की बात करते हो जीते जी आपको कभी भुला नहीं पाए तो इसी तरह से आपने एक एक विद्यार्थी के साथ जोड़कर उनके मन से जोड़कर और पढ़ाते समय अपना संपूर्ण ज्ञान अपनी संपूर्ण सामर्थ्य अपनी संपूर्ण शक्ति और संपूर्ण उत्साह प्रेम उनके ऊपर लूटा दीजिए तो कोई गुंजाइश नहीं है कि आज के युग में भी लोग आपका वही सम्मान करेंगे जो प्राचीन काल में हुआ था

mujhe lagta hai ki aaj ke yug me shikshan ko ek paise ke roop me vaah sammaan nahi diya ja raha hai jiska vaah haqdaar hai ya jo sammaan use kabhi prapt tha lekin ab is sambandh me main thodi baat ko aage badhana chahunga ki aaj agar vaah sammaan nahi raha toh kyon nahi raha ek waqt tha jab guroor brahma guroor vishnu guru devo maheshwara guru sakshat param bramh tasmai shri guruve namah is tarah ki ukti yo ke madhyam se guru ka bahut uncha sthan mana gaya tha madhyakaal me bhi kabir jaise santo ne likha hai ki guru govind dooo khade kake laagu paye balihari guru aapne govind diyo bataye toh nisandeh prachin kaal me guru ka sthan bada uncha tha use bhagwan mata pita in sabse upar mana gaya tha lekin vartaman sthiti aisi nahi hai ab nahi hai toh kyon nahi iske bahut saare karan hain pehla karan toh yah hai ki aaj ka jo shikshan vyavasai hai jo paisa hai vaah us sacche sammaan ka toh haqdaar hi nahi hai kyonki us kaal me jo guru hota tha jo shiksha dene ka karya karta tha vaah use seva maanta tha use vyavasaya nahi maanta tha lekin aaj bade afasos ke saath kahata hoon main shikshak hote hue bhi is baat ko sweekar karta hoon ki humne shikshan ko ek vyavasaya bana diya ek paisa bana diya ab hum log kare hum ek bahut badi tankhvaah lete hain aur tankhvaah ke badle kaam karte hain toh har koi jo mazdoori karta hai jo kisi ki ya naukri karta hai ya kuch bhi karta hai vaah jo kaam kar raha hai uske badle me vaah ek bahut bada rakam apne hath me le raha hai phir upar se vaah chahta hai ki mera bahut bada sammaan ho toh bhai kyon ho tumne jo kaam kiya uske badle tumhe paisa mil gaya na toh sammaan kis baat ka ab sammaan kiska hota hai toh paisa lekar kaam karne ke saath saath kaam ko itni tanmayata se itni imaandaari se aur itni bakhubi se kar jaaye logo ki tareef kare bina nahi rahe ab us paise se us kaam ki tulna nahi hogi balki use sammaan dekar uske barabar laya jaega jo usne kiya hai aur yahi shikshan vyavasaya me ho raha hai aaj jo adhyapak bahut accha kaam kar rahe hain apne vidyarthiyon ke antarman se jude hue hain jo unke jeevan ko unnat karne ke liye upar uthane ke liye hamesha kuch na kuch sochte rehte hain aur karte rehte hain unka avashya sammaan hota hai bhai jab hum ek chote se gaane bajane waale kalakar ko kisi party me lekar aate hain kuch paise dekar use hire karte hain tu apni saari kala saare josh ke saath saare utsaah aur umang ke saath kitni takat usme hai utani takat us kala me vaah chhut deta hai aur tab saamne baithe hue log tali bajaye bina nahi rehte ki bhai wah kya shandar kalakar hai bhai yahi hai zara ek baar sochiye kya humne shikshak ke roop me jab bhi hum kaksha me gaye jab bhi kaksha ke un vidyarthiyon ke saamne humne ek path prastut kiya toh kya humne saari takat jhonki kya humne hamara sampurna uttar nichod kar unke saamne rakh diya kya hum poore ke poore josh se us kaksha me ke aur yadi yah sab humne kiya toh us kaksha ka pratyek vidyarthi sacche dil se aapka sammaan karega isme koi gunjaiesh nahi hai bilkul karenge lekin yadi humne yah sab nahi kiya toh vaah hamara sammaan nahi karenge aur un nahi karna chahiye kyonki humne utana hi kiya jitna humne paisa liya toh phir sammaan kis baat ka aap choli le rahe hain usse adhik karke dikhaiye kisi ke jeevan ko unnat banakar dikhaiye toh log aapka sammaan zaroor karenge dusri baat padhana toh aapka kaam hai vaah toh aapko karna hi hai vaah toh aapki seva niyamon me hai kabhi zara usse hatakar bhi kuch ki apni kaksha ka ek vidyarthi jo aaj thoda udaas masoom lagta baitha hai kabhi waqt nikalakar interval me uske paas jaiye use alag bulaiye uske sir par hath phir aaiye aur use pyar ke pooche beta kya hua koi samasya hai mujhe batao main tumhari sahayta karunga aur vaah toh komal man ke bacche hote hain momsa komal unka dil hota hai piyela jaenge bata denge aapko chahen unke ghar se samajhte aaye chahen unhe mitron se samasya hai chahen unhe apne adhyayan se samasya hai vaah aapke saamne zaroor share karega aap uske liye kuch kar sakte hain ya na kar sake lekin itna zaroor kijiye ki uska hausla badhaiye uske sir par hath pher kar kahiye beta chinta karne ki zarurat nahi hai main hoon na tumhare saath aur phir dekhiye kaise vaah baccha antar tan par aap se jud jata hai aur aap sammaan ki baat karte ho jeete ji aapko kabhi bhula nahi paye toh isi tarah se aapne ek ek vidyarthi ke saath jodkar unke man se jodkar aur padhate samay apna sampurna gyaan apni sampurna samarthya apni sampurna shakti aur sampurna utsaah prem unke upar loota dijiye toh koi gunjaiesh nahi hai ki aaj ke yug me bhi log aapka wahi sammaan karenge jo prachin kaal me hua tha

मुझे लगता है कि आज के युग में शिक्षण को एक पैसे के रूप में वह सम्मान नहीं दिया जा रहा है

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नमस्कार जैसा कि प्रश्न है कि क्या आपको लगता है कि एक पेशे के रूप में शिक्षण को उस तरह का सम्मान दिया जाता है जिसके वह हकदार है बिल्कुल नहीं हम इसके पक्ष में नहीं है हमको ऐसा नहीं लगता है कि एक पेशे के रूप में शिक्षण को उस तरह का सामान दिया जाता है जिसके वह हकदार है क्योंकि जितना सम्मानित होना चाहिए जितना सम्मान दिया जाना चाहिए उतना सामान मिलता नहीं है कोई भी कोई भी शिक्षक मान लीजिए कि कोई शिक्षक हैं शिक्षक है तो यहां मतलब ऐसी व्यवस्था है पूरे भारत की हम बात करें तो ऐसी व्यवस्था है कोई भी गार्जियन है कोई भी पेरेंट्स है कुछ भी क्या बात करना चाहिए क्या बोलना चाहिए कैसी उनकी इज्जत करनी चाहिए कोई जात नहीं कर पाते हैं अन्य लोगों की भी बात की जाए अन्य अधिकारियों की भी बात किया जाए वह भी शिक्षण को उतना इज्जत नहीं देते हैं समान नहीं देते हैं जितना मिलने चाहिए इसलिए कि जो शिक्षण होता है जो याद करेगा शिक्षा की बात करें तो शिक्षण जो होता है जो शिक्षण देता है वह पूरे समाज का सुधारक होता है वह पूरे समाज को कोई भी अधिकारी आए उसको वहां तक पहुंचाने में अहम भूमिका जो होती है वह शिक्षक की होती है उस उस को शिक्षक का सम्मान करना चाहिए ताकि उन्हीं के बदौलत वह उसे पद तक पहुंचा है लेकिन ऐसा होता नहीं है बस सामान दिया नहीं जाता है और यह होना चाहिए उतनी उतनी जो हक होना चाहिए सम्मान होना चाहिए उसे मिलनी चाहिए धन्यवाद

namaskar jaisa ki prashna hai ki kya aapko lagta hai ki ek peshe ke roop me shikshan ko us tarah ka sammaan diya jata hai jiske vaah haqdaar hai bilkul nahi hum iske paksh me nahi hai hamko aisa nahi lagta hai ki ek peshe ke roop me shikshan ko us tarah ka saamaan diya jata hai jiske vaah haqdaar hai kyonki jitna sammanit hona chahiye jitna sammaan diya jana chahiye utana saamaan milta nahi hai koi bhi koi bhi shikshak maan lijiye ki koi shikshak hain shikshak hai toh yahan matlab aisi vyavastha hai poore bharat ki hum baat kare toh aisi vyavastha hai koi bhi guardian hai koi bhi parents hai kuch bhi kya baat karna chahiye kya bolna chahiye kaisi unki izzat karni chahiye koi jaat nahi kar paate hain anya logo ki bhi baat ki jaaye anya adhikaariyo ki bhi baat kiya jaaye vaah bhi shikshan ko utana izzat nahi dete hain saman nahi dete hain jitna milne chahiye isliye ki jo shikshan hota hai jo yaad karega shiksha ki baat kare toh shikshan jo hota hai jo shikshan deta hai vaah poore samaj ka sudharak hota hai vaah poore samaj ko koi bhi adhikari aaye usko wahan tak pahunchane me aham bhumika jo hoti hai vaah shikshak ki hoti hai us us ko shikshak ka sammaan karna chahiye taki unhi ke badaulat vaah use pad tak pohcha hai lekin aisa hota nahi hai bus saamaan diya nahi jata hai aur yah hona chahiye utani utani jo haq hona chahiye sammaan hona chahiye use milani chahiye dhanyavad

नमस्कार जैसा कि प्रश्न है कि क्या आपको लगता है कि एक पेशे के रूप में शिक्षण को उस तरह का स

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Vinayak

Biology Teacher

1:11
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बिल्कुल दिया जाता है जो लोग पढ़े लिखे हैं और जो सच में अपने बच्चों को लेकर सीरियस होते हैं वह जो चाहते हैं कि उनके बच्चों को सबसे घर जाएं हम लोग कभी भी टीचर्स को रिस्पेक्ट नहीं करते तो वह हमेशा टीचर को बहुत ज्यादा सम्मान के साथ में देखते हैं और अपने बच्चों को भी यही सिखाते हैं तो आई थिंक दिस इज द ओनली प्रोफेशन जहां पर का पैरामीटर कभी कम होता ही नहीं है डॉक्टर अगर कोई है तो कई बार ऐसा होता है कि वे शंकरगढ़ डेथ हो जाती है तो द पीपल विक्रम दूसरे स्पेक्ट्रम बहुत बार उनको ही पेश करना पड़ता है अनफॉर्चूनेटली एनएसएस के साथ में भी थे वैसे ही चीज है तो हर एक फील्ड के अंदर आप अगर जाएंगे तो वहां पर कहीं ना कहीं दर्द सेंस ऑफ दिस कम फोटो सेटिस्फेक्शन लेकिन टीचिंग में ऐसा कभी नहीं होता आई थिंक बच्चों के पेरेंट्स जो हमेशा चाहते हैं कि उनके बच्चे कुछ अच्छा करें टीचर्स के लिए हमेशा रिस्पेक्टफुल रहते हैं और यह भी एक बहुत बड़ी बड़ा सेट है कि ऐसे बच्चे जो टीचर्स के लिए रिस्पेक्ट रखते हैं और अपने आप को डेडिकेट कर देते हैं ऐसे बच्चे ही आगे बढ़ते हैं

bilkul diya jata hai jo log padhe likhe hain aur jo sach me apne baccho ko lekar serious hote hain vaah jo chahte hain ki unke baccho ko sabse ghar jayen hum log kabhi bhi teachers ko respect nahi karte toh vaah hamesha teacher ko bahut zyada sammaan ke saath me dekhte hain aur apne baccho ko bhi yahi sikhaate hain toh I think this is the only profession jaha par ka parameter kabhi kam hota hi nahi hai doctor agar koi hai toh kai baar aisa hota hai ki ve shankargarh death ho jaati hai toh the pipal vikram dusre spectrum bahut baar unko hi pesh karna padta hai anafarchunetli NSS ke saath me bhi the waise hi cheez hai toh har ek field ke andar aap agar jaenge toh wahan par kahin na kahin dard sense of this kam photo setisfekshan lekin teaching me aisa kabhi nahi hota I think baccho ke parents jo hamesha chahte hain ki unke bacche kuch accha kare teachers ke liye hamesha respectful rehte hain aur yah bhi ek bahut badi bada set hai ki aise bacche jo teachers ke liye respect rakhte hain aur apne aap ko dedicate kar dete hain aise bacche hi aage badhte hain

बिल्कुल दिया जाता है जो लोग पढ़े लिखे हैं और जो सच में अपने बच्चों को लेकर सीरियस होते हैं

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Ritika

Teacher,life Coach,motivational Speaker

1:53
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नमस्कार दोस्तों आज का प्रश्न है क्या आपको लगता है कि एक पेशे के रूप में शिक्षण को उस तरह का सम्मान दिया जाता है जिसके वह हकदार है जी नहीं ऐसा नहीं है उनको उस तरह के का सम्मान नहीं मिल रहा है क्योंकि आजकल जो है सिस्टर और स्कूलों में आजकल जो है पढ़ाई को एक धंधा बना रखा है एक व्यवसाय का जरिया बना रखा है हर एक इंसान पैसे के पीछे इतना अंधा हो गया है कि वह बच्चों के फ्यूचर को भी नहीं देखते देखता है और सिर्फ पैसे की होड़ में सब एक-दूसरे को पीछे छोड़ रहे हैं आगे से आगे भागने की कोशिश कर रहे हैं वह पैसे में इतने अंधे हो चुके हैं कि उन्हें कुछ और दिखाई नहीं देता हर इंसान का हर एक चीज के पीछे कमीशन फिट होता है इसे अब स्कूल की बात करने तो बुक्स के पीछे कमीशन पर होगा वरना बच्चों की पढ़ाई को लेंगे तो स्कूल में किसी ना किसी का एडमिशन करवा मैंने कमीशन पर होगा तो ऐसे बहुत से जरिए है इंसान अपने आपको पैसे की होड़ में आगे जाता जा रहा है उसे किसी भी चीज से कोई मतलब नहीं है वह यह नहीं देख रहा है कि इस पैसे के चक्कर में हमारा बच्चे की कितनी बर्बादी हो रही है उसी के अलावा बहुत से शिक्षण बहुत से अध्यापक ऐसे भी है जो स्कूल तो आते हैं पढ़ाते ही नहीं है कहते हैं बच्चों से कि मुझसे कोचिंग पढ़ो तभी माफ दूंगा तो यह चीज जो है यह गलत है यह कुछ अध्यापक की वजह से पूरा अध्यापक जो है पूरी दुनिया के अध्यापक उनकी वजह से बदनाम हो रहे हैं मैंने अपने समय में ऐसे बहुत से अध्यापक देखे भी हैं और मेरे अभी समय में भी बहुत से ऐसे अध्यापक हैं जो यह करते हैं पर यह बिल्कुल गलत है धन्यवाद आपका दिन शुभ हो

namaskar doston aaj ka prashna hai kya aapko lagta hai ki ek peshe ke roop me shikshan ko us tarah ka sammaan diya jata hai jiske vaah haqdaar hai ji nahi aisa nahi hai unko us tarah ke ka sammaan nahi mil raha hai kyonki aajkal jo hai sister aur schoolon me aajkal jo hai padhai ko ek dhandha bana rakha hai ek vyavasaya ka zariya bana rakha hai har ek insaan paise ke peeche itna andha ho gaya hai ki vaah baccho ke future ko bhi nahi dekhte dekhta hai aur sirf paise ki hod me sab ek dusre ko peeche chhod rahe hain aage se aage bhagne ki koshish kar rahe hain vaah paise me itne andhe ho chuke hain ki unhe kuch aur dikhai nahi deta har insaan ka har ek cheez ke peeche commision fit hota hai ise ab school ki baat karne toh books ke peeche commision par hoga varna baccho ki padhai ko lenge toh school me kisi na kisi ka admission karva maine commision par hoga toh aise bahut se jariye hai insaan apne aapko paise ki hod me aage jata ja raha hai use kisi bhi cheez se koi matlab nahi hai vaah yah nahi dekh raha hai ki is paise ke chakkar me hamara bacche ki kitni barbadi ho rahi hai usi ke alava bahut se shikshan bahut se adhyapak aise bhi hai jo school toh aate hain padhate hi nahi hai kehte hain baccho se ki mujhse coaching padho tabhi maaf dunga toh yah cheez jo hai yah galat hai yah kuch adhyapak ki wajah se pura adhyapak jo hai puri duniya ke adhyapak unki wajah se badnaam ho rahe hain maine apne samay me aise bahut se adhyapak dekhe bhi hain aur mere abhi samay me bhi bahut se aise adhyapak hain jo yah karte hain par yah bilkul galat hai dhanyavad aapka din shubha ho

नमस्कार दोस्तों आज का प्रश्न है क्या आपको लगता है कि एक पेशे के रूप में शिक्षण को उस तरह क

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इसका आंसर हां भी और सकता है और नहीं भी लेकिन आज का समय शिक्षक को वह सम्मान नहीं मिलता है जो सम्मान प्राचीन काल में शिक्षकों को मिलता था आज के समय में पैसे का महत्व देखें लोग पैसे को महत्व देते हैं क्योंकि पसंद नहीं आया तो अध्यापक को निकाल देते और दूसरे टीचर को उस विजय पर लगा देते क्योंकि आज के समय में रोजगार की सबसे अधिक कमी है या अध्यापकों की संख्या देखें

iska answer haan bhi aur sakta hai aur nahi bhi lekin aaj ka samay shikshak ko vaah sammaan nahi milta hai jo sammaan prachin kaal me shikshakon ko milta tha aaj ke samay me paise ka mahatva dekhen log paise ko mahatva dete hain kyonki pasand nahi aaya toh adhyapak ko nikaal dete aur dusre teacher ko us vijay par laga dete kyonki aaj ke samay me rojgar ki sabse adhik kami hai ya adhyapakon ki sankhya dekhen

इसका आंसर हां भी और सकता है और नहीं भी लेकिन आज का समय शिक्षक को वह सम्मान नहीं मिलता है ज

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mahendra kumar puram

aassitant teacher

3:14
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नमस्कार दोस्तों प्रश्न है कि क्या आपको लगता है कि एक पेशे के रूप में शिक्षण को उतरा का सम्मान दिया जाता है इसका हकदार है इसमें दो पहलू है इसमें समझने वाले के दो पहलू हैं एक है कि लोग आपको किस दिन आपके काम को पसंद करते हैं या नहीं करते हैं दूसरा है आपकी कितनी विरोधी इसे बहुत एक कुछ इस प्रश्न का उत्तर कुछ हद तक एक सिखाने वाले पर निर्भर करता है कि वह सिखाने वाला प्रशिक्षण शिक्षा किस प्रकार दे रहा है 1 शिक्षक होता है व्यावहारिक शिक्षक होता है एक होता है फालतू शिक्षक होता है फालतू शिक्षा को अब दिखाएं के लिए करता है और ऐसा शिक्षक होता है जो उस सिखाने के लिए करता है कि उसके लिए कुछ काम आ सकती एक शिक्षण का महत्व बहुत व्यापक है इसको बताना बहुत मुश्किल है लेकिन शिक्षा से संबंधित ऐसा नहीं है क्या आप किसी जूस पी सकते हैं लेकिन आप समझने वाला आपको किस दृष्टिकोण से समझ रहा है और आपका शिक्षण आपको जैसे खाई हुई चीज लोगों कितने फायदे हो रहा है उसी के हिसाब से आपको सामने वाला रिस्पेक्ट देखा आपको पसंद करेगा और उस पसंद तो चार आपको सम्मान दें लेकिन कुछ ऐसा हमारे शिक्षण होता है लोग जो लोग नहीं समझ पाते हैं वह लोग हमें विरोधाभास करते हैं हमारे कार्य को पसंद नहीं करते हैं तो लोग हमको इतना सम्मान नहीं दे पाते हैं तो इसमें एक 5050 है अधिकतर लोग जो समझते हैं इस कार्य को इस पेशे को वह 100% सम्मान करते हैं लेकिन आपको जो कार्य को पसंद नहीं करते जो आप शिक्षा दे रहे हैं वह आप उस कार्य के अनुरूप नहीं होता तो आपको उतना हकदार उतना सम्मान नहीं देता लेकिन शिक्षक शिक्षण ऐसा है शिक्षक वह नहीं है जो स्कूल में पढ़ाते हैं शिक्षकों है जो कोई जगह ज्ञान देता है और सिखाने वाला काम किसी के काम आता है वह गुरु होता है कोई भी ग्रुप बन सकता है जब पिता हो चमार हो बहन हो कोई भी यह दोस्तों एक शिक्षक है जो हमें सिखाता है वह शिक्षक है और उसके सिखाएं चीज हमारे ऊपर काम आता है तो हम को 100% का सम्मान करना चाहिए मैं एक विशेष शिक्षक हूं मुझे सम्मान मिलता है अपने कार्य के प्रति हमारे हमारे कार को पसंद करने वाले समाज समाज के समस्त व्यक्ति होते हैं हमारे बच्चे होते हैं जो हमारे कार को पसंद करते हैं तो लोग इतना सा कर दे सामान मिलता है लेकिन यह सामाजिक दुनिया व्यापक है इसमें आपको विरोधाभास करने वाले भी मिलेंगे और आपकी अच्छाई को पसंद करने वाली भी मिलेंगे प्लीज के दो पहलू हैं वही चाहता हूं कि अगर जो श्रेष्ठ काम करता है उसको सम्मान जरूर मिलता है आमिर शिक्षक से जो मुझे जो सरकार से रिश्ता होता है तो सामान बनता है इतना कहूंगा कि शिक्षकों का सम्मान जरूर मिलता है

namaskar doston prashna hai ki kya aapko lagta hai ki ek peshe ke roop me shikshan ko utara ka sammaan diya jata hai iska haqdaar hai isme do pahaloo hai isme samjhne waale ke do pahaloo hain ek hai ki log aapko kis din aapke kaam ko pasand karte hain ya nahi karte hain doosra hai aapki kitni virodhi ise bahut ek kuch is prashna ka uttar kuch had tak ek sikhane waale par nirbhar karta hai ki vaah sikhane vala prashikshan shiksha kis prakar de raha hai 1 shikshak hota hai vyavaharik shikshak hota hai ek hota hai faltu shikshak hota hai faltu shiksha ko ab dikhaen ke liye karta hai aur aisa shikshak hota hai jo us sikhane ke liye karta hai ki uske liye kuch kaam aa sakti ek shikshan ka mahatva bahut vyapak hai isko batana bahut mushkil hai lekin shiksha se sambandhit aisa nahi hai kya aap kisi juice p sakte hain lekin aap samjhne vala aapko kis drishtikon se samajh raha hai aur aapka shikshan aapko jaise khai hui cheez logo kitne fayde ho raha hai usi ke hisab se aapko saamne vala respect dekha aapko pasand karega aur us pasand toh char aapko sammaan de lekin kuch aisa hamare shikshan hota hai log jo log nahi samajh paate hain vaah log hamein virodhabhas karte hain hamare karya ko pasand nahi karte hain toh log hamko itna sammaan nahi de paate hain toh isme ek 5050 hai adhiktar log jo samajhte hain is karya ko is peshe ko vaah 100 sammaan karte hain lekin aapko jo karya ko pasand nahi karte jo aap shiksha de rahe hain vaah aap us karya ke anurup nahi hota toh aapko utana haqdaar utana sammaan nahi deta lekin shikshak shikshan aisa hai shikshak vaah nahi hai jo school me padhate hain shikshakon hai jo koi jagah gyaan deta hai aur sikhane vala kaam kisi ke kaam aata hai vaah guru hota hai koi bhi group ban sakta hai jab pita ho chamaar ho behen ho koi bhi yah doston ek shikshak hai jo hamein sikhata hai vaah shikshak hai aur uske sikhaye cheez hamare upar kaam aata hai toh hum ko 100 ka sammaan karna chahiye main ek vishesh shikshak hoon mujhe sammaan milta hai apne karya ke prati hamare hamare car ko pasand karne waale samaj samaj ke samast vyakti hote hain hamare bacche hote hain jo hamare car ko pasand karte hain toh log itna sa kar de saamaan milta hai lekin yah samajik duniya vyapak hai isme aapko virodhabhas karne waale bhi milenge aur aapki acchai ko pasand karne wali bhi milenge please ke do pahaloo hain wahi chahta hoon ki agar jo shreshtha kaam karta hai usko sammaan zaroor milta hai aamir shikshak se jo mujhe jo sarkar se rishta hota hai toh saamaan banta hai itna kahunga ki shikshakon ka sammaan zaroor milta hai

नमस्कार दोस्तों प्रश्न है कि क्या आपको लगता है कि एक पेशे के रूप में शिक्षण को उतरा का सम्

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Arjun jha

Rt Science Teacher

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