आपको शिक्षण के बारे में सबसे अधिक निराशा क्या है?...


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Pawan Rajput

Educator

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शिक्षण के बारे में सबसे अधिक निराशा होती है उसे गेन करने वाला प्रॉपर 9 दिन से मैं अध्याय बच्चों को पढ़ा तो कुछ बच्चे ऐसे भी आते हैं तो पढ़ना नहीं चाहते या लगता है इस एज में को नहीं समझाता आगे चलकर में कितना नुकसान होगा तो सबसे होती है उसका झूठ डाटा उसने बहुत मेहनत से खट्टा किया है वह अपने फ्रेंड को शेयर नहीं करता था अपने किसी और को देना नहीं चाहता था जैसे कोई क्वेश्चन की पिक बनाई हमें अवश्य फ्रेंड परदेसिया नहीं करता कोई इसके पास ना चला गया यह हमसे ज्यादा सीख जा रही है उसे बचा के रखा था आने वाले बच्चों के लिए कल क्या नहीं करते ऐसी मजाक में निकाल देते या निराशा होती है और निराशा का होता है या नहीं है माही देश दुनिया में लोग ज्यादा पढ़े लिखे हैं पढ़ा लिखा इसलिए कि है उनको पैसा कमा सकें यहां सभी टीचर धन्यवाद

shikshan ke bare me sabse adhik nirasha hoti hai use gain karne vala proper 9 din se main adhyay baccho ko padha toh kuch bacche aise bhi aate hain toh padhna nahi chahte ya lagta hai is age me ko nahi samajhaata aage chalkar me kitna nuksan hoga toh sabse hoti hai uska jhuth data usne bahut mehnat se khatta kiya hai vaah apne friend ko share nahi karta tha apne kisi aur ko dena nahi chahta tha jaise koi question ki pic banai hamein avashya friend paradesiya nahi karta koi iske paas na chala gaya yah humse zyada seekh ja rahi hai use bacha ke rakha tha aane waale baccho ke liye kal kya nahi karte aisi mazak me nikaal dete ya nirasha hoti hai aur nirasha ka hota hai ya nahi hai maahi desh duniya me log zyada padhe likhe hain padha likha isliye ki hai unko paisa kama sake yahan sabhi teacher dhanyavad

शिक्षण के बारे में सबसे अधिक निराशा होती है उसे गेन करने वाला प्रॉपर 9 दिन से मैं अध्याय ब

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डॉ अर्चना चौधरी

कवयित्री ,कॉन्सलर ,समाजसेवी , शिक्षिका

3:01
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दीपक पाण्डेय

Sports Coach ,trep shooting

0:40
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अगर बात करें शिक्षक कि जब तक शिक्षक क्रिएटिव नहीं होता कुछ रचनात्मक नहीं करता तो यह निराशा होती है और यदि बात करें हम स्टूडेंट की तो जब तक वह अनुशासित नहीं होता उसका व्यवहार आचार व्यवहार निराशाजनक स्थिति लाता है क्लास में 30 नंबर का कराएं बात अभिभावक की अभिभावक का व्यवहार यदि त्यौहार नहीं एक पिता के रूप में शिक्षक से जान गया ज्ञान प्राप्त करने की इसमें भी नहीं है तो उसका व्यवहार जब निराशा

agar baat kare shikshak ki jab tak shikshak creative nahi hota kuch rachnatmak nahi karta toh yah nirasha hoti hai aur yadi baat kare hum student ki toh jab tak vaah anushasit nahi hota uska vyavhar aachar vyavhar nirashajanak sthiti lata hai class me 30 number ka karaye baat abhibhavak ki abhibhavak ka vyavhar yadi tyohar nahi ek pita ke roop me shikshak se jaan gaya gyaan prapt karne ki isme bhi nahi hai toh uska vyavhar jab nirasha

अगर बात करें शिक्षक कि जब तक शिक्षक क्रिएटिव नहीं होता कुछ रचनात्मक नहीं करता तो यह निराशा

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Thakur Satish Journalist

Editor-in-chief संघर्ष न्यूज़

0:13
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जो बच्चे बचपन से ही पढ़ने में रुचि नहीं रखते जिनको सब कुछ मिलने के बावजूद भी और ध्यान नहीं देते यह सबसे बड़ी निराशा है

jo bacche bachpan se hi padhne me ruchi nahi rakhte jinako sab kuch milne ke bawajud bhi aur dhyan nahi dete yah sabse badi nirasha hai

जो बच्चे बचपन से ही पढ़ने में रुचि नहीं रखते जिनको सब कुछ मिलने के बावजूद भी और ध्यान नहीं

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Girish Kumar

Business Owner

2:34
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शिक्षण के बारे में सबसे अधिक निराशा की बात क्या है बहुत अच्छा सवाल है शिक्षक असली अर्थ है शिक्षा देना शिक्षण ग्रहण कराना एंटीचक रिस्पांसिबिलिटी होते हैं कि वह अपने स्टूडेंट से कॉपर एक्यूरेट एंड सोशियोलॉजिकल एजुकेशन प्रोवाइड करें आज किस टाइम में शिक्षण एजुकेशन और जस्टिस बिजनेस बन चुका है जिसके लिए कोई मैटर नहीं करता है कि आप अपने रिलेशन को क्या दे रहे हैं यह दिल्ली शराब से क्या ले रही है यह कोई मैटर नहीं करता आज एजुकेशन सिर्फ एक बिजनेस है जो सबसे हाई पिक पर है जहां पर ट्रस्ट के नाम पर लोग इसको इस कॉलेज बनाते हैं ठीक है स्क्वायर करते हैं एयरटेल सैलरी पैकेज देते लेकिन ऑन द स्पॉट बोलो क्या करते हैं ऑन पेपर सर्दी ज्यादा देते देते शैंपू क्या होता है चेक टीचर से ज्वाइन करते हैं उसे उतना ही वर्क करते हैं जितना उनको दिया जाता है दलित की अगर मुझे 5000 से 10000 इतना ही काम उनको करके दूंगा यह फोन नहीं करूंगा कि मैं किशोर हूं मुझसे जो स्टूडेंट्स एजुकेशन ले रहा है मुझे उसे अपना हंड्रेड परसेंट देना ऐसी मेंटल कभी हकीकत में नहीं है टीचर नहीं कर सकता अभी तो इसमें नहीं है एजुकेशन सिस्टम सैलरी लेने के बावजूद भी हद से ज्यादा अपना देश है क्योंकि वह चीज को मानते हैं कि एजुकेशन क्या है ठीक है लेकिन अधिकतर जोजन रिलेशंस के टीचर से उन लोगों को सिर्फ इतना है कि हमें सैलरी मिलनी चाहिए बाकी फीचर्स जाने अनजाने स्कूल्स कॉलेजेस जाने हमारा काम ऑन टाइम आना है यह लेक्चर लेना है यह देना देखें तो यह बहुत खराब चीज लगती है मुझे एजुकेशन सूरतगढ़ से निकल जाऊं 2 साल से प्रोफेसर रिंकी हैकिंग कॉलेज में पढ़ाया है और मैं जानता हूं इसका क्या प्रभाव बच्चों पर पड़ता है बटन अपना हंड्रेड परसेंट दिया और उसके जीता जागता एग्जांपल मेरसेदेज़ बेंज पड़े आज भी कुछ और विदेश में भी है आज जो मुझसे बात करता है मुझे थैंक्स बोलते हैं क्यों क्योंकि मैंने अपना हंड्रेड परसेंट उनको दिया मैंने उनकी लाइफ में चेंज करने की कोशिश करी जो वह हर एक टीचर्स के अंदर होना चाहिए कि अपने स्टूडेंट्स में वह एप्पल क्वालिटी डालें जो वह नहीं और वह बनना चाहता है वह बन सके

shikshan ke bare me sabse adhik nirasha ki baat kya hai bahut accha sawaal hai shikshak asli arth hai shiksha dena shikshan grahan krana entichak responsibility hote hain ki vaah apne student se copper ekyuret and soshiyolajikal education provide kare aaj kis time me shikshan education aur justice business ban chuka hai jiske liye koi matter nahi karta hai ki aap apne relation ko kya de rahe hain yah delhi sharab se kya le rahi hai yah koi matter nahi karta aaj education sirf ek business hai jo sabse high pic par hai jaha par trust ke naam par log isko is college banate hain theek hai square karte hain airtel salary package dete lekin on the spot bolo kya karte hain on paper sardi zyada dete dete shampoo kya hota hai check teacher se join karte hain use utana hi work karte hain jitna unko diya jata hai dalit ki agar mujhe 5000 se 10000 itna hi kaam unko karke dunga yah phone nahi karunga ki main kishore hoon mujhse jo students education le raha hai mujhe use apna hundred percent dena aisi mental kabhi haqiqat me nahi hai teacher nahi kar sakta abhi toh isme nahi hai education system salary lene ke bawajud bhi had se zyada apna desh hai kyonki vaah cheez ko maante hain ki education kya hai theek hai lekin adhiktar jojan rileshans ke teacher se un logo ko sirf itna hai ki hamein salary milani chahiye baki features jaane anjaane schools colleges jaane hamara kaam on time aana hai yah lecture lena hai yah dena dekhen toh yah bahut kharab cheez lagti hai mujhe education suratgarh se nikal jaaun 2 saal se professor rinki hacking college me padhaya hai aur main jaanta hoon iska kya prabhav baccho par padta hai button apna hundred percent diya aur uske jita jaagta example mersedez benj pade aaj bhi kuch aur videsh me bhi hai aaj jo mujhse baat karta hai mujhe thanks bolte hain kyon kyonki maine apna hundred percent unko diya maine unki life me change karne ki koshish kari jo vaah har ek teachers ke andar hona chahiye ki apne students me vaah apple quality Daalein jo vaah nahi aur vaah banna chahta hai vaah ban sake

शिक्षण के बारे में सबसे अधिक निराशा की बात क्या है बहुत अच्छा सवाल है शिक्षक असली अर्थ है

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Shahin Fidai

Relationship & Career Counseling, Pranic Healer, Neuro Linguistic Program Trainer & Teacher

0:50
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपके बारे में सबसे अधिक निराशा के बारे में बतलाइए ईश्वर ने हमें जो जिंदगी दी है वह भी है कि हमारे रहते हमें इतनी सिंपल लाइफ दिए तो फिर हमको क्यों इतना कॉन्प्लिकेटेड कर देना मैसेज दे देती है कि बच्चा जो है वह अपने बचपन को खो देता है और पूरा टाइम पढ़ाई करते रहता है उसे प्लीज करने का वक्त नहीं मिलता है यह बहुत निराशाजनक है

aapke bare me sabse adhik nirasha ke bare me batlaiye ishwar ne hamein jo zindagi di hai vaah bhi hai ki hamare rehte hamein itni simple life diye toh phir hamko kyon itna kanpliketed kar dena massage de deti hai ki baccha jo hai vaah apne bachpan ko kho deta hai aur pura time padhai karte rehta hai use please karne ka waqt nahi milta hai yah bahut nirashajanak hai

आपके बारे में सबसे अधिक निराशा के बारे में बतलाइए ईश्वर ने हमें जो जिंदगी दी है वह भी है क

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Rakesh Tiwari

Life Coach, Management Trainer

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आपका ब्लॉक में आपको शिक्षण के बारे में सबसे अधिक निराशा क्या है सॉरी शिक्षण के बारे में सबसे अधिक निराशा कुछ चुनिंदा विद्यालयों और महाविद्यालयों को छोड़ दिया जाए तो छात्रों में बढ़ती अनुशासनहीनता उद्दंडता स्वच्छता और नशे के प्रति झुकाव इससे बहुत घोर निराशा हमें हुई है हम इस बात को स्वीकार करें या नहीं करें लेकिन हमारी वर्तमान पीढ़ी में छात्रों की है उसका एक बड़े हिस्से में यह बुराइयां स्थान बना चुकी थैंक यू

aapka block me aapko shikshan ke bare me sabse adhik nirasha kya hai sorry shikshan ke bare me sabse adhik nirasha kuch chuninda vidhayalayo aur mahavidyalayon ko chhod diya jaaye toh chhatro me badhti anushasanahinta uddandata swachhta aur nashe ke prati jhukaav isse bahut ghor nirasha hamein hui hai hum is baat ko sweekar kare ya nahi kare lekin hamari vartaman peedhi me chhatro ki hai uska ek bade hisse me yah buraiyan sthan bana chuki thank you

आपका ब्लॉक में आपको शिक्षण के बारे में सबसे अधिक निराशा क्या है सॉरी शिक्षण के बारे में सब

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams

2:16
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आपको शिक्षण के बारे में सबसे अच्छी निराशा के सच में आपने बड़ा अच्छा प्रश्न किया हम विद्यार्थियों को तन मन धन से हर तरह से हमको ज्ञानी विद्वान बनाना चाहते हैं उनके अंदर विशिष्ट करना निकालना चाहते हैं उन्हें एकेडमी के साथ प्रोफेशनल ऑपरेशन इन वर्क करना चाहते हैं सरकारी नौकरियों के लिए पढ़ाई के साथ-साथ आम शहरी करना चाहते हैं ताकि बच्चे पढ़ाई के दौरान शिक्षा के साथ वह अपनी कंपटीशन की विचारी करें कि जैसे उनको प्रतियोगिता में मौका में और वह सफल होकर एक अच्छी नौकरी को ज्वाइन करने जिससे कि वह समाज के लिए आदर्श बन सकते हैं लेकिन चलो भाग हमारे देश का अरे बच्चों और आज के 10 इंच लड़ाई पर पैसा खर्च करने के लिए तैयार नहीं है उनकी छोटी पहले दर्शन करने फिर बात नहीं करनी फिर ग्रेजुएशन करने फिर सोचेंगे कि हमको क्या करें उन्हें हम जिनिंग कराएं ऑनलाइन बैंकिंग की तैयारी करें ज्ञान रेलवे की तैयारी करें जो शिक्षित नजरिया कैमस्कैनर उज्जैन का कोई लेना देना नहीं चाहते हो या नौकरी पर सिर्फ नौकरी पैसे वाले मैंने पर देखा है इस सोच में होते हैं हम सब कुछ कर लेंगे अगर सब कुछ खुद ही कर लेंगे तो क्यों बच्चों को स्कूल में टेस्टिंग क्यों बच्चों को चाहने कराने के लिए कोचिंग सेंटर में भेजते हैं यह सबसे बड़ा अच्छा चैटिंग निराशा का कारण

aapko shikshan ke bare me sabse achi nirasha ke sach me aapne bada accha prashna kiya hum vidyarthiyon ko tan man dhan se har tarah se hamko gyani vidhwaan banana chahte hain unke andar vishisht karna nikalna chahte hain unhe academy ke saath professional operation in work karna chahte hain sarkari naukriyon ke liye padhai ke saath saath aam shahri karna chahte hain taki bacche padhai ke dauran shiksha ke saath vaah apni competition ki vichari kare ki jaise unko pratiyogita me mauka me aur vaah safal hokar ek achi naukri ko join karne jisse ki vaah samaj ke liye adarsh ban sakte hain lekin chalo bhag hamare desh ka are baccho aur aaj ke 10 inch ladai par paisa kharch karne ke liye taiyar nahi hai unki choti pehle darshan karne phir baat nahi karni phir graduation karne phir sochenge ki hamko kya kare unhe hum jining karaye online banking ki taiyari kare gyaan railway ki taiyari kare jo shikshit najariya kaimaskainar ujjain ka koi lena dena nahi chahte ho ya naukri par sirf naukri paise waale maine par dekha hai is soch me hote hain hum sab kuch kar lenge agar sab kuch khud hi kar lenge toh kyon baccho ko school me testing kyon baccho ko chahne karane ke liye coaching center me bhejate hain yah sabse bada accha chatting nirasha ka karan

आपको शिक्षण के बारे में सबसे अच्छी निराशा के सच में आपने बड़ा अच्छा प्रश्न किया हम विद्यार

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Harender Kumar Yadav

Career Counsellor.

2:25
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अब कुछ शिक्षण के बारे में सबसे अधिक निराशा के बीच अच्छी तरह को एक्सप्लेन कर रहे हैं और ज्यादा से ज्यादा क्वेश्चन पूछ रहे हैं और इसके बाद भी जवाब नहीं देता है तो बड़ी निराशा होती है एक बार की बात है कि मैं ब्लड सर्कुलेटरी सिस्टम पढ़ा रहा था एक बता रहा था कि कितने चेंबर होते हैं कहां से है तो फिर से मैंने एक बच्चे से क्वेश्चन पूछा वह थोड़ा कुछ दूसरा सोच रहा था तो हमने पूछा कि बेटा आप बताइए कि हटके कितने चेंबर होते उसके मुंह से तुरंत निकला कि शेर हम सांस जो हैं लेते हैं और हमारे लंड में जाता है मुझे बहुत आश्चर्य हुआ कि मैं सो हार्ड का पड़ा रहा हूं निराशा हुई कि बच्चा क्या सोच रहा था इसी दिन लंड पर चला गया तो मैंने देखा कि लंड तो हमने 1 दिन पहले पढ़ाया था उसको रिस्पेक्ट से सिर्फ पढ़ा रहा हूं तो मैं सोचा कि मैं इतना मेहनत कर रहा हूं और वह बच्चा गिरा हुआ है अच्छी सी प्रैक्टिस नहीं थी कि 14 साल का बच्चा क्या सोच रहा है किस बारे में सोच रहा है कि उसने 30 मिनट में 15 मिनट में इतना बेहतर बनाने और पसीने निकल रहे हैं ब्लैक पॉटरी बिक रहा हूं अब बाकायदा हर्ट का फिगर बनाना उसके चैंबर को बोर्ड पर लिखा हुआ आज उनकी बातचीत टेक्निक मैंने कौन सा टेक्निक हूं मैंने उससे बोला कि ब्रिटेन में इससे बेहतर तो नहीं पढ़ा सकता और बार आप लोग कहो तो मैं पढ़ाना छोड़ दो बच्चे रोने लगे बाकी जो पढ़ा ना मत छोड़ो बाद में

ab kuch shikshan ke bare me sabse adhik nirasha ke beech achi tarah ko explain kar rahe hain aur zyada se zyada question puch rahe hain aur iske baad bhi jawab nahi deta hai toh badi nirasha hoti hai ek baar ki baat hai ki main blood sarkuletri system padha raha tha ek bata raha tha ki kitne chamber hote hain kaha se hai toh phir se maine ek bacche se question poocha vaah thoda kuch doosra soch raha tha toh humne poocha ki beta aap bataiye ki hatake kitne chamber hote uske mooh se turant nikala ki sher hum saans jo hain lete hain aur hamare lund me jata hai mujhe bahut aashcharya hua ki main so hard ka pada raha hoon nirasha hui ki baccha kya soch raha tha isi din lund par chala gaya toh maine dekha ki lund toh humne 1 din pehle padhaya tha usko respect se sirf padha raha hoon toh main socha ki main itna mehnat kar raha hoon aur vaah baccha gira hua hai achi si practice nahi thi ki 14 saal ka baccha kya soch raha hai kis bare me soch raha hai ki usne 30 minute me 15 minute me itna behtar banane aur pasine nikal rahe hain black pottery bik raha hoon ab bakayada heart ka figure banana uske chamber ko board par likha hua aaj unki batchit technique maine kaun sa technique hoon maine usse bola ki britain me isse behtar toh nahi padha sakta aur baar aap log kaho toh main padhana chhod do bacche rone lage baki jo padha na mat chodo baad me

अब कुछ शिक्षण के बारे में सबसे अधिक निराशा के बीच अच्छी तरह को एक्सप्लेन कर रहे हैं और ज्य

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Usha Batra

Beauty Therapist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मुझे किसी टाइप की निराशा नहीं है ट्रेनिंग किसी भी चीज की है नॉलेज कभी बेकार नहीं जाती किसी भी टाइप की ट्रेनिंग हो जइबा एजुकेशन से रिलेटेड है ब्यूटीज की ट्रेनिंग है किसी भी टाइप की ट्रेनिंग है उसका ज्ञान हमेशा बढ़ता है कम नहीं होता इसमें कोई भी निराशा वाली बात नहीं है थैंक यू

mujhe kisi type ki nirasha nahi hai training kisi bhi cheez ki hai knowledge kabhi bekar nahi jaati kisi bhi type ki training ho jaiba education se related hai byutij ki training hai kisi bhi type ki training hai uska gyaan hamesha badhta hai kam nahi hota isme koi bhi nirasha wali baat nahi hai thank you

मुझे किसी टाइप की निराशा नहीं है ट्रेनिंग किसी भी चीज की है नॉलेज कभी बेकार नहीं जाती किसी

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मुझे शिक्षण के बारे में सबसे अधिक निराशा यह हैं किस शिक्षण सिस्टम शिक्षण संस्थान चाहे वह ऑफिस के लाइन से हो स्कूल के लाइन से हो एक तरह से बर्ड अनेक तरह से प्रेशर गए तो एक शिक्षण प्रणाली पर कर रहा है

mujhe shikshan ke bare me sabse adhik nirasha yah hain kis shikshan system shikshan sansthan chahen vaah office ke line se ho school ke line se ho ek tarah se bird anek tarah se pressure gaye toh ek shikshan pranali par kar raha hai

मुझे शिक्षण के बारे में सबसे अधिक निराशा यह हैं किस शिक्षण सिस्टम शिक्षण संस्थान चाहे वह

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

एक शिक्षक होने के नाते शिक्षण से संबंधित जो सबसे बड़ी निराशा ही है कि हमारे यहां एक तो अच्छे शिक्षक भी हैं और अच्छे और शिक्षण सामग्रियां भी हैं लेकिन उनका जो डिस्ट्रीब्यूशन है सभी तक शिक्षा नहीं पहुंच पा रही है जैसे उसको पहुंचना चाहिए इसलिए हमारे यहां शिक्षा का अभी बहुत अभाव है दूसरी चीज है कि जो हमारे शिक्षक हैं वह अपनी परंपरा के अनुसार की शिक्षण कर रहे हैं जबकि पूरी दुनिया में शिक्षक को बाल केंद्रित कर दिया गया है बाल केंद्रित शिक्षा का मतलब कि आप बच्चों का जो सीखने का स्तर है बच्चों को पहचानना वह किस प्रकार सीखना चाहता है और उसको कोई चीज कैसे सिखाई जाती है जिससे खाई जा सकती है उस उसको उस तरीके से सिखाए जाने की रुत है जबकि आज भी हमारे जो शिक्षक हैं वह उनके अंदर जो नॉलेज है वह बच्चों के अंदर घुसना चाहते हैं और उसी से चार्ज कर ले अगर बच्चे के अंदर हमारे से चलना लिस्ट पूछते हैं अगर उनके अंदर नहीं जाता है तो उसे जस्ट लेते हैं कि बच्चा पढ़ने में सही नहीं है या शिक्षा नहीं करण कर पा रहा है जबकि बाल केंद्रित शिक्षा का मतलब यह होता है कि हम उस हम शिक्षक ना लिस्ट पूछने वाला या उसको हटाने वाला ना बंद करके एक फैसिलिटेटर की तरह बने तो अगर यह शिक्षक जो है एक मार्गदर्शक और यह कुछ की तरह बंद करके काम करें और विद्यार्थी या छात्र खुद करके सीखे और अपनी क्षमता के अनुसार उनको सीखने का मौका दिया जाए तो उसे काफी अच्छा सकता है एक उदाहरण बताता हूं मैं मैं यूपी में मैंने हाईस्कूल की परीक्षा दी थी 1930 में इसमें हमारे मुख्यमंत्री कल्याण सिंह उस समय आना कल अधिकतम कर दिया गया था या नहीं अगर पेपर में या नकल करते कोई पकड़ा जाएगा तो जेल जाना है उसमें कक्षा 10 में 7 मार्च को पेपर शुरू हुआ था और पहला पेपर पहले दिन मैच रतिया अगले दिन बिना कैप के मैच सेकंड का पेपर लगती है एनिमल फर्स्ट और मैथ सेकंड के पेपर में कोई कॉपी नहीं थी और कक्षा 10 का एक स्टूडेंट जो कि 14 15 साल का होता है एक नई जगह दूसरे सेंट पर जा करके अपने आपको हम पर एडजस्ट करने में हिसार एनर्जी उसकी भ्रष्ट हो जाती है तो पेपर क्या देगा परीक्षा क्या देगा तो कुल मिलाकर के एक तरीका था कि जो बड़ा मूल्यांकन कब है छठ ना और हतोत्साहित करने वाला तो आज भी हमारे यहां परीक्षा का सिस्टम कुछ इसी प्रकार का है जो बच्चों में धंधा करता है जबकि हां जो शिक्षा है वहां जीवन नहीं है बल्कि जीवन का एक हिस्सा है ठीक है जिससे जीवन अच्छा बनाया जा सकता है तो मेरा जो सबसे बड़ी निराशा है कि शिक्षकों के अंदर जो मानसिकता है अभी भी कि बच्चों को जो अपने नालेज को ही वह तुम पूछना चाहते हैं जबकि बच्चों के सीखने की चद्दर है सीखने की जो प्रवृत्ति है किस तरीके से सीखना चाहता है उसके अनुसार उनको शिक्षित देना चाहिए थैंक्स

ek shikshak hone ke naate shikshan se sambandhit jo sabse badi nirasha hi hai ki hamare yahan ek toh acche shikshak bhi hain aur acche aur shikshan samagriyan bhi hain lekin unka jo distribution hai sabhi tak shiksha nahi pohch paa rahi hai jaise usko pahunchana chahiye isliye hamare yahan shiksha ka abhi bahut abhaav hai dusri cheez hai ki jo hamare shikshak hain vaah apni parampara ke anusaar ki shikshan kar rahe hain jabki puri duniya me shikshak ko baal kendrit kar diya gaya hai baal kendrit shiksha ka matlab ki aap baccho ka jo sikhne ka sthar hai baccho ko pahachanana vaah kis prakar sikhna chahta hai aur usko koi cheez kaise sikhai jaati hai jisse khai ja sakti hai us usko us tarike se sikhaye jaane ki rut hai jabki aaj bhi hamare jo shikshak hain vaah unke andar jo knowledge hai vaah baccho ke andar ghusna chahte hain aur usi se charge kar le agar bacche ke andar hamare se chalna list poochhte hain agar unke andar nahi jata hai toh use just lete hain ki baccha padhne me sahi nahi hai ya shiksha nahi karan kar paa raha hai jabki baal kendrit shiksha ka matlab yah hota hai ki hum us hum shikshak na list poochne vala ya usko hatane vala na band karke ek faisilitetar ki tarah bane toh agar yah shikshak jo hai ek margadarshak aur yah kuch ki tarah band karke kaam kare aur vidyarthi ya chatra khud karke sikhe aur apni kshamta ke anusaar unko sikhne ka mauka diya jaaye toh use kaafi accha sakta hai ek udaharan batata hoon main main up me maine highschool ki pariksha di thi 1930 me isme hamare mukhyamantri kalyan Singh us samay aana kal adhiktam kar diya gaya tha ya nahi agar paper me ya nakal karte koi pakada jaega toh jail jana hai usme kaksha 10 me 7 march ko paper shuru hua tha aur pehla paper pehle din match ratia agle din bina cap ke match second ka paper lagti hai animal first aur math second ke paper me koi copy nahi thi aur kaksha 10 ka ek student jo ki 14 15 saal ka hota hai ek nayi jagah dusre sent par ja karke apne aapko hum par adjust karne me hisar energy uski bhrasht ho jaati hai toh paper kya dega pariksha kya dega toh kul milakar ke ek tarika tha ki jo bada mulyankan kab hai chhath na aur hatotsahit karne vala toh aaj bhi hamare yahan pariksha ka system kuch isi prakar ka hai jo baccho me dhandha karta hai jabki haan jo shiksha hai wahan jeevan nahi hai balki jeevan ka ek hissa hai theek hai jisse jeevan accha banaya ja sakta hai toh mera jo sabse badi nirasha hai ki shikshakon ke andar jo mansikta hai abhi bhi ki baccho ko jo apne knowledge ko hi vaah tum poochna chahte hain jabki baccho ke sikhne ki chaddar hai sikhne ki jo pravritti hai kis tarike se sikhna chahta hai uske anusaar unko shikshit dena chahiye thanks

एक शिक्षक होने के नाते शिक्षण से संबंधित जो सबसे बड़ी निराशा ही है कि हमारे यहां एक तो अच्

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सन के बारे में आज की सबसे अधिक निराशा अगर देखा जाए तो निराश है यह है कि आज हम सिर्फ पुस्तक की ज्ञान हासिल कर रहे हैं लेकिन हमें गांव और ज्ञान नहीं मिल रहे बच्चे भले ही बड़ी-बड़ी नौकरी हासिल करने के लिए विद्यार्थी बड़े-बड़े नौकरी हासिल करने के लिए अचानक बारे लेकिन वह सिर्फ की ताकि और पुस्तक ज्ञान प्राप्त कर कर नौकरी पाने के उद्देश्य से पढ़ाई करते हैं व्यावहारिक ज्ञान वे बिल्कुल भी नहीं है नैतिक और मौलिक मूल्यों का उनका कोई भी में ज्ञान होता नहीं है सिर्फ नौकरी पाने हेतु पुस्तक विज्ञान और गौर से स्कोर दाखिला लेते हैं और अक्षांश पर कृपया निरंतर ली जो है कट्टरपंथियों रखने की जो पद्धति उसे ही उसी करता रहे समझ नहीं वह कमी महसूस करें

san ke bare me aaj ki sabse adhik nirasha agar dekha jaaye toh nirash hai yah hai ki aaj hum sirf pustak ki gyaan hasil kar rahe hain lekin hamein gaon aur gyaan nahi mil rahe bacche bhale hi badi badi naukri hasil karne ke liye vidyarthi bade bade naukri hasil karne ke liye achanak bare lekin vaah sirf ki taki aur pustak gyaan prapt kar kar naukri paane ke uddeshya se padhai karte hain vyavaharik gyaan ve bilkul bhi nahi hai naitik aur maulik mulyon ka unka koi bhi me gyaan hota nahi hai sirf naukri paane hetu pustak vigyan aur gaur se score dakhila lete hain aur akshansh par kripya nirantar li jo hai kattarapanthiyon rakhne ki jo paddhatee use hi usi karta rahe samajh nahi vaah kami mehsus kare

सन के बारे में आज की सबसे अधिक निराशा अगर देखा जाए तो निराश है यह है कि आज हम सिर्फ पुस्तक

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Nirav Jani

Teacher and Textbook Writer

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मुझे शिक्षण के बारे में सबसे अधिक निराशा यह है कि आज का शिक्षण और रट्टा मार शिक्षण हो गया है यानी कि 5 साल पहले जो प्रश्न पूछा गया था ठीक उसी पैटर्न से अभी भी प्रश्न पूछे जा रहे हैं कोई योर क्रिएटिविटी कहते हैं उसके ऊपर ध्यान ही नहीं दे रहा है हालांकि उसके बहुत से परिवार ऐसे हैं कि जो हम से पहले ऐसा है कि जो जिम्मेदार है बट मैं यह मानता हूं कि जो शिक्षा पूरी हटा मार्च से होगी है कुछ ना कुछ कहीं ना कहीं पर वहां पर भी कंजूस होना चाहिए क्योंकि वह मेरे लिए बहुत निराशाजनक है कोई कह दे क्या कि यह प्रश्न हमारा आपके परीक्षा में पूछा जाएगा उसको रट्टा मार लो तो मार लेता हुआ परीक्षा में पूरा हुआ तो उससे जो आउट कम होता है फटा मरने के सिवा और कोई कुछ आउटकम उसका निकलता नहीं है तो यानी कि जो हमारा अनुभव है 60 में से दुश्मन होनी चाहिए वह नहीं हो पा रही है

mujhe shikshan ke bare me sabse adhik nirasha yah hai ki aaj ka shikshan aur ratta maar shikshan ho gaya hai yani ki 5 saal pehle jo prashna poocha gaya tha theek usi pattern se abhi bhi prashna pooche ja rahe hain koi your creativity kehte hain uske upar dhyan hi nahi de raha hai halaki uske bahut se parivar aise hain ki jo hum se pehle aisa hai ki jo zimmedar hai but main yah maanta hoon ki jo shiksha puri hata march se hogi hai kuch na kuch kahin na kahin par wahan par bhi kanjus hona chahiye kyonki vaah mere liye bahut nirashajanak hai koi keh de kya ki yah prashna hamara aapke pariksha me poocha jaega usko ratta maar lo toh maar leta hua pariksha me pura hua toh usse jo out kam hota hai phata marne ke siva aur koi kuch autakam uska nikalta nahi hai toh yani ki jo hamara anubhav hai 60 me se dushman honi chahiye vaah nahi ho paa rahi hai

मुझे शिक्षण के बारे में सबसे अधिक निराशा यह है कि आज का शिक्षण और रट्टा मार शिक्षण हो गया

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Anchal

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1:05
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शिक्षण के बारे में सबसे ज्यादा निराशाजनक बात यह है कि उसकी न्यूज़ फुलनेस खत्म हो गई है हम शिक्षण की उपयोगिता को बच्चों को समझा ही नहीं पा रही हैं जो कंटेंटमेंट स्कूल में पढ़ा रहे हैं वह बच्चों के लिए वर्जित नहीं होता बच्चों का इंटरेस्ट अगर किसी और चीज में तो हम उसके ऊपर ध्यान ना देकर सिर्फ अपनी इज्जत से चीज ठोक रहे हम हर चीज को हटवा रहे हैं उसे समझाने के कॉन्सेप्ट पर ध्यान नहीं दिया जा रहा पढ़ाई कहीं ना कहीं सब्जेक्ट ओरिएंटेड हो गई है स्टूडेंट नहीं है बात नहीं करेंगे वह बच्चों की समझ से बाहर होती हमसे सब्जेक्ट को प्ले बस को खत्म करने पर ध्यान देते हैं जाम्स पर ध्यान देते हैं लेकिन बच्चों का एक्शन में कंटेंट कितना समझ में आया उसे कितना अप्लाई कर सकते हैं इससे उसे यूज कर सकते हैं पहला इसमें हम इस चीजों पर फोकस ही नहीं कर पा रहे हैं और इससे शिक्षा की उपयोगिता बिल्कुल खत्म होती जा रही है इस निराशाजनक और क्या हो सकती है

shikshan ke bare me sabse zyada nirashajanak baat yah hai ki uski news fullness khatam ho gayi hai hum shikshan ki upayogita ko baccho ko samjha hi nahi paa rahi hain jo kantentament school me padha rahe hain vaah baccho ke liye varjit nahi hota baccho ka interest agar kisi aur cheez me toh hum uske upar dhyan na dekar sirf apni izzat se cheez thok rahe hum har cheez ko hatva rahe hain use samjhane ke concept par dhyan nahi diya ja raha padhai kahin na kahin subject oriented ho gayi hai student nahi hai baat nahi karenge vaah baccho ki samajh se bahar hoti humse subject ko play bus ko khatam karne par dhyan dete hain jams par dhyan dete hain lekin baccho ka action me content kitna samajh me aaya use kitna apply kar sakte hain isse use use kar sakte hain pehla isme hum is chijon par focus hi nahi kar paa rahe hain aur isse shiksha ki upayogita bilkul khatam hoti ja rahi hai is nirashajanak aur kya ho sakti hai

शिक्षण के बारे में सबसे ज्यादा निराशाजनक बात यह है कि उसकी न्यूज़ फुलनेस खत्म हो गई है हम

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shreyansh

Teacher

0:26
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आप को शिक्षक के बारे में सबसे अधिक निराशा क्या है लेकिन शिक्षकों का आधार ना होना ठीक है समाज में एक ऐसे नेतृत्व करते हैं बच्चों का जो कि समाज को डेवलप किया जाता है समाज को आगे बढ़ाया जाता घर शिक्षक का सम्मान ना हो तो मेरे हिसाब से वह बढ़िया या बेस्ट नहीं रहता है ठीक है

aap ko shikshak ke bare me sabse adhik nirasha kya hai lekin shikshakon ka aadhar na hona theek hai samaj me ek aise netritva karte hain baccho ka jo ki samaj ko develop kiya jata hai samaj ko aage badhaya jata ghar shikshak ka sammaan na ho toh mere hisab se vaah badhiya ya best nahi rehta hai theek hai

आप को शिक्षक के बारे में सबसे अधिक निराशा क्या है लेकिन शिक्षकों का आधार ना होना ठीक है सम

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भारतीय शिक्षा पद्धति विशेषकर प्राथमिक शिक्षा सिर्फ एक्सपेरिमेंट का स्थान है नए-नए प्रयोग कर छात्रों में छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जाता है नित्य नए नए प्रयोग किए जाते हैं जिसका फलाफल कुछ नहीं होता है और करोड़ों रुपए सरकार का खर्च होता है

bharatiya shiksha paddhatee visheshkar prathmik shiksha sirf experiment ka sthan hai naye naye prayog kar chhatro me chhatro ke bhavishya ke saath khilwad kiya jata hai nitya naye naye prayog kiye jaate hain jiska falafel kuch nahi hota hai aur karodo rupaye sarkar ka kharch hota hai

भारतीय शिक्षा पद्धति विशेषकर प्राथमिक शिक्षा सिर्फ एक्सपेरिमेंट का स्थान है नए-नए प्रयोग क

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शिक्षण के बारे में निराशा का प्रश्न ही नहीं है शिक्षा सबसे अच्छी चीज विषय रुचिकर नहीं है तो वह निराशा का कारण है आप शिक्षण कार्य करा रहे हैं या आपको टी ए एल एम जो शिक्षण सहायक सामग्री है वह नहीं है या बच्चे आपको समझ नहीं रहे हैं या आप समझा नहीं पा रहे हैं या कोई समस्या आ रही है चाहे भारी हो यांत्रिक हो तो निराशा हो सकती है हम अधिक निराशा ही है कि जब आप कुछ जानती भी नहीं है या सामने कुछ समझने के लिए एक चुप ही नहीं तो जब कुछ हो ही नहीं रहा है तो ही अधिक निराशा हो सकती है दूसरा कारण हो ही नहीं सकता

shikshan ke bare me nirasha ka prashna hi nahi hai shiksha sabse achi cheez vishay ruchikar nahi hai toh vaah nirasha ka karan hai aap shikshan karya kara rahe hain ya aapko T a el M jo shikshan sahayak samagri hai vaah nahi hai ya bacche aapko samajh nahi rahe hain ya aap samjha nahi paa rahe hain ya koi samasya aa rahi hai chahen bhari ho yantrik ho toh nirasha ho sakti hai hum adhik nirasha hi hai ki jab aap kuch jaanti bhi nahi hai ya saamne kuch samjhne ke liye ek chup hi nahi toh jab kuch ho hi nahi raha hai toh hi adhik nirasha ho sakti hai doosra karan ho hi nahi sakta

शिक्षण के बारे में निराशा का प्रश्न ही नहीं है शिक्षा सबसे अच्छी चीज विषय रुचिकर नहीं है त

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GPD

Teacher

2:26
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शिक्षकों की अवमानना हुई प्राइवेट संस्थानों में जो शिक्षकों की अवमानना होती है उस सबसे दयनीय स्थिति होती है बच्चे को यदि अध्यापक की एक बार मार देता बच्चा घर में शिकायत करता है तो गाजिया से स्कूल तक आते हैं स्कूल वाले अंतर्वेशन भी डालते पढ़ाई का भी सड़क के उस में सबसे बड़ा शिक्षक के ही ऊपर दबाव रहता है ठीक वैसे ही जैसे किसी कांस्टेबल के ऊपर दबाव रहता है उससे भी ज्यादा दूसरी चीज है शिक्षा का स्तर शहरों में अब सरकार को ही दूरी पार्टी पड़ेगी शहरों में शिक्षा का स्तर बहुत अच्छे हैं गांवों में शिक्षा का स्तर इतना अच्छा नहीं है ऐसा क्यों है सरकारी विद्यालयों में शिक्षा के उस सुधारना बहुत जरूरी है इसके लिए सरकार को कदम आगे उठाना पड़ेगा गांवों में भी शिक्षा को बहुत एडवांस नानी के लिए काम करना पड़ेगा ऐसा काम करना पड़ेगा कि ऑनलाइन पढ़ाई भी चल सके मतलब कि जरूर रोज बच्चे स्कूल से आते हैं तो बच्चे को ट्यूशन नहीं मिल पा रही थी उत्तर नहीं मिल पा रही तुमको ऑनलाइन ट्यूटर प्राइवेट ट्यूटर मिल सके ऐसी सरकार वेबसाइट चलाएं इसके लिए सरकार क्या करें इसके लिए सरकार को एक वेबसाइट बनानी पड़ेगी एक एप्लीकेशन देना पड़ेगा जिस में स्नातक जिन को पढ़ाने का शौक है स्किल है वह पड़ा सकीम बच्चे को इससे बेरोजगारी भी दूर हो जाएगी मतलब थोड़ा बहुत उनके जीवन से जुड़े होने के नाते उनको पैसा दिन मिल जाएगा वह बच्चों को ऑनलाइन पढ़ा सकते हैं बच्चों बच्चों से सीख ली सकते ऑनलाइन पढ़ाने का डर नहीं रहेगा यह मत सोचिए क्योंकि माता-पिता के संरक्षण में पढ़ेंगे तो की टेंशन वगैरह जो होती है वह वह मंच की तरफ से सख्ती से समय से हो सख्त नियमों के पालन कराने के लिए उनकी अध्यापकों की फीस वगैरह के भी बारे में सोचा जा सके ऑनलाइन पर आई सबसे ज्यादा जरूरी आजकल हो गई है दूसरी बात शिक्षकों के ऊपर से प्रेशर हटाया तीसरी बात यह गांव और शहर के बीच में शिक्षकों का स्तर बहुत ऊपर और बहुत नीचे है इस स्तर को काटना पड़ेगा सरकार को तीसरी बार बच्चों के ऊपर दबाव ना बनाए माता-पिता

shikshakon ki awamaanana hui private sansthano me jo shikshakon ki awamaanana hoti hai us sabse dayaniye sthiti hoti hai bacche ko yadi adhyapak ki ek baar maar deta baccha ghar me shikayat karta hai toh gajiya se school tak aate hain school waale antarveshan bhi daalte padhai ka bhi sadak ke us me sabse bada shikshak ke hi upar dabaav rehta hai theek waise hi jaise kisi constable ke upar dabaav rehta hai usse bhi zyada dusri cheez hai shiksha ka sthar shaharon me ab sarkar ko hi doori party padegi shaharon me shiksha ka sthar bahut acche hain gaon me shiksha ka sthar itna accha nahi hai aisa kyon hai sarkari vidhayalayo me shiksha ke us sudharna bahut zaroori hai iske liye sarkar ko kadam aage uthana padega gaon me bhi shiksha ko bahut advance naani ke liye kaam karna padega aisa kaam karna padega ki online padhai bhi chal sake matlab ki zaroor roj bacche school se aate hain toh bacche ko tuition nahi mil paa rahi thi uttar nahi mil paa rahi tumko online tuitor private tuitor mil sake aisi sarkar website chalaye iske liye sarkar kya kare iske liye sarkar ko ek website banani padegi ek application dena padega jis me snatak jin ko padhane ka shauk hai skill hai vaah pada sakim bacche ko isse berojgari bhi dur ho jayegi matlab thoda bahut unke jeevan se jude hone ke naate unko paisa din mil jaega vaah baccho ko online padha sakte hain baccho baccho se seekh li sakte online padhane ka dar nahi rahega yah mat sochiye kyonki mata pita ke sanrakshan me padhenge toh ki tension vagera jo hoti hai vaah vaah manch ki taraf se sakhti se samay se ho sakht niyamon ke palan karane ke liye unki adhyapakon ki fees vagera ke bhi bare me socha ja sake online par I sabse zyada zaroori aajkal ho gayi hai dusri baat shikshakon ke upar se pressure hataya teesri baat yah gaon aur shehar ke beech me shikshakon ka sthar bahut upar aur bahut niche hai is sthar ko kaatna padega sarkar ko teesri baar baccho ke upar dabaav na banaye mata pita

शिक्षकों की अवमानना हुई प्राइवेट संस्थानों में जो शिक्षकों की अवमानना होती है उस सबसे दयनी

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विकी क्वेश्चन है आपको शिक्षण के बारे में सबसे अधिक निराशा क्या है तो एक टीचर बच्चों की न्यू होता है उसके भविष्य को समझता है उसकी बुद्धि के विकास को बढ़ाता है उसके सभी को को बढ़ाता है 100 आत्मनिर्भर बनाता है व्यवसाय के लिए रोजगार के लिए तैयार करता है तू 1 शिक्षा की बालक की न्यू होता है और उसकी लक्ष्य तक एक अध्यापक की पहुंचाता है बात करते हैं कि आपको शिक्षण के बारे में सबसे अधिक निराशा क्या है निराशा भी होती है जब मैनेजमेंट आपको सारे उपकरण उपलब्ध नहीं कराता सारे संसाधन की प्राप्ति जब नहीं होती है तो आप थोड़ा टीचर नर्वस हो जाता है और बच्चों को पढ़ाता तो है वह लेकिन संसाधन होने के साथ अगर संसाधन मिल जाए तो उसमें और अच्छा अच्छी बात है जिसे कहते सोने पे सुहागा तभी आती है जब मैनेजमेंट मतलब उपकरणों की व्यवस्था नहीं करता या फिर यह है कि आजकल तुम देखते हैं कि महाविद्यालय कॉलेज सब आजकल व्यवसाय हो गए हैं क्योंकि आजकल लोग व्यवसाय की मां व्यवसाय करती हैं 1 किलोमीटर में कम से कम दो दो विद्यालय मिलेंगे 307 क्या है व्यवसाय के रूप में विद्यालय चलाते हैं धन की कमी होती हैं इसलिए अध्यापक कभी-कभी नर्वस निराश हो जाता है कि जब उसको संसाधन नहीं प्राप्त हो पाते हैं नहीं मिल पाते हैं तो बच्चों को शिक्षा किताबी ज्ञान दे सकता है ना कि प्रैक्टिकली ज्ञान दे सकता है और इसके साथ-साथ हमको स्कूल के साथ-साथ बहुत से ऐसे ऐसे उपकरण सोते हैं जिनके माध्यम से हम बच्चों को अच्छी शिक्षा दे सकते हैं किताबी ज्ञान तो हम देते देते हैं प्रैक्टिकली ज्ञान देते हैं सुख सुविधाएं प्रदान करना चाहिए जो टीचर जिस चीज की रिक्वायरमेंट करे उसको पूरा करना चाहिए मैनेजमेंट को और यदि टीचर शिक्षण कार्य बहुत कुशल पूर्वक करता है बहुत तारतम्यता लगातार किया बद्ध तरीके से शिक्षण को बच्चों को बच्चों को ज्ञान देता है तू ही तू मैनेजमेंट को भी चाहिए कि वह टीचरों की रिक्वायरमेंट पूरी करें उनको निराश ना करें उनको जिस चीज की आवश्यकता आवश्यकता की पूर्ति करें आप तो बच्चों से पैसा ले लेते हैं सबसे ज्यादा मैं देखता हूं प्राइवेट सेक्टर से कुछ ऐसी होती हैं जो की बहुत ही अच्छा मैनेजमेंट देखते हैं तीनों को भी अच्छी सुविधाएं देते हैं जो टीचर्स कहते हैं वह उनको उपलब्ध करा देते हैं मैं खुद के उदाहरण दे रहा हूं जब हमको कभी जरूरत पड़ती किसी चीज की या हमको विशेष अध्यापकों की जरूरत पड़ती है विशेष उपकरण की जरूरत पड़ती है बसों की जरूरत पड़ती है संसाधन की जरूरत पड़ती है उपकरणों की जरूरत पड़ती है तू लब्ज हो जाता है तो मैनेजमेंट को चाहिए कि आपने टीचरों को कभी निराश नहीं करें आर्य टीचर ही बच्चों का भविष्य होते हैं उनके उद्देश्य उनके लक्षण के सिद्धांतों को सिद्धांतों तक उन्हें पहुंचाती हैं तुझे मेरा एक्सपीरियंस है मेरा इस पीरियंस यही है कि हारी की स्कूल की मैनेजमेंट को यह चाहिए कि हारी टीचरों की रिक्वायरमेंट पूरी करे तब टीचर कभी निराश नहीं होगा धन्यवाद

vicky question hai aapko shikshan ke bare me sabse adhik nirasha kya hai toh ek teacher baccho ki new hota hai uske bhavishya ko samajhata hai uski buddhi ke vikas ko badhata hai uske sabhi ko ko badhata hai 100 aatmanirbhar banata hai vyavasaya ke liye rojgar ke liye taiyar karta hai tu 1 shiksha ki balak ki new hota hai aur uski lakshya tak ek adhyapak ki pohchta hai baat karte hain ki aapko shikshan ke bare me sabse adhik nirasha kya hai nirasha bhi hoti hai jab management aapko saare upkaran uplabdh nahi karata saare sansadhan ki prapti jab nahi hoti hai toh aap thoda teacher nervous ho jata hai aur baccho ko padhata toh hai vaah lekin sansadhan hone ke saath agar sansadhan mil jaaye toh usme aur accha achi baat hai jise kehte sone pe suhaga tabhi aati hai jab management matlab upkarnon ki vyavastha nahi karta ya phir yah hai ki aajkal tum dekhte hain ki mahavidyalaya college sab aajkal vyavasaya ho gaye hain kyonki aajkal log vyavasaya ki maa vyavasaya karti hain 1 kilometre me kam se kam do do vidyalaya milenge 307 kya hai vyavasaya ke roop me vidyalaya chalte hain dhan ki kami hoti hain isliye adhyapak kabhi kabhi nervous nirash ho jata hai ki jab usko sansadhan nahi prapt ho paate hain nahi mil paate hain toh baccho ko shiksha kitabi gyaan de sakta hai na ki practically gyaan de sakta hai aur iske saath saath hamko school ke saath saath bahut se aise aise upkaran sote hain jinke madhyam se hum baccho ko achi shiksha de sakte hain kitabi gyaan toh hum dete dete hain practically gyaan dete hain sukh suvidhaen pradan karna chahiye jo teacher jis cheez ki requirement kare usko pura karna chahiye management ko aur yadi teacher shikshan karya bahut kushal purvak karta hai bahut taratamyata lagatar kiya baddh tarike se shikshan ko baccho ko baccho ko gyaan deta hai tu hi tu management ko bhi chahiye ki vaah ticharon ki requirement puri kare unko nirash na kare unko jis cheez ki avashyakta avashyakta ki purti kare aap toh baccho se paisa le lete hain sabse zyada main dekhta hoon private sector se kuch aisi hoti hain jo ki bahut hi accha management dekhte hain tatvo ko bhi achi suvidhaen dete hain jo teachers kehte hain vaah unko uplabdh kara dete hain main khud ke udaharan de raha hoon jab hamko kabhi zarurat padti kisi cheez ki ya hamko vishesh adhyapakon ki zarurat padti hai vishesh upkaran ki zarurat padti hai bason ki zarurat padti hai sansadhan ki zarurat padti hai upkarnon ki zarurat padti hai tu labj ho jata hai toh management ko chahiye ki aapne ticharon ko kabhi nirash nahi kare arya teacher hi baccho ka bhavishya hote hain unke uddeshya unke lakshan ke siddhanto ko siddhanto tak unhe pahunchati hain tujhe mera experience hai mera is piriyans yahi hai ki haari ki school ki management ko yah chahiye ki haari ticharon ki requirement puri kare tab teacher kabhi nirash nahi hoga dhanyavad

विकी क्वेश्चन है आपको शिक्षण के बारे में सबसे अधिक निराशा क्या है तो एक टीचर बच्चों की न

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Balkrishan

Teacher

1:00
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जी शिक्षा के बारे में सबसे अधिक निराशा मुझे शिक्षण कार्य शिक्षा के दो पहलू से चने के अध्यापक और विद्यार्थी ना तो अध्यापक ही सही से शिक्षण करवा रहे हैं और ना ही गुजरती सजा प्राप्त कर रहे हैं दोनों ही पहलू अनुशासन में नहीं है अनुशासन ही है कुछ विद्या शासन है वह आप अपना ही विद्यार्थी समय से विद्यालय जा रहे हैं ना तो समय से आ रही इसलिए इसके लिए दोनों ही पहलू निराशा का कारण है

ji shiksha ke bare me sabse adhik nirasha mujhe shikshan karya shiksha ke do pahaloo se chane ke adhyapak aur vidyarthi na toh adhyapak hi sahi se shikshan karva rahe hain aur na hi gujarati saza prapt kar rahe hain dono hi pahaloo anushasan me nahi hai anushasan hi hai kuch vidya shasan hai vaah aap apna hi vidyarthi samay se vidyalaya ja rahe hain na toh samay se aa rahi isliye iske liye dono hi pahaloo nirasha ka karan hai

जी शिक्षा के बारे में सबसे अधिक निराशा मुझे शिक्षण कार्य शिक्षा के दो पहलू से चने के अध्या

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गुड इवनिंग फ्रेंड्स मुझे शिक्षण के बारे में सबसे अधिक निराशा क्या है अगर व्यक्तिगत रूप से देखा जाए तो यह जो निजी करण है स्कूलों का और व्यवसायीकरण हो रहा है कि लोग शिक्षा को बेच रहे हैं और समाज को बिगाड़ रहे हैं बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं तो यह काफी दुखद और भयावह स्थिति है जैसा कि मैं इसमें कोई संशय नहीं है कि यह सभी लोग जानते हैं कि मानव अपने आंकड़ों की पूर्ति के लिए छत गिर गया है कि उसे क्या किसी के भविष्य समाज और देश से केवल औपचारिक भी नाता रह गया है मतलब वह कहने का मतलब उसने उसके प्रति उसको कोई लगाव नहीं है सिर्फ और सिर्फ उसको फीस और उसके पैसे से मतलब है उनके व्यक्तित्व या उनके ज्ञान कौशल और उनके मतलब आगे बढ़ने से नहीं है मार्गदर्शन से नहीं है कहने का मतलब यह तो यही अगर व्यक्तिगत रूप से देखा जाए तो इसमें मैं दुखी हूं कि मैं उन सभी मैनेजमेंट से मैं कोई मैसेज देना चाहता हूं कि आप इसमें ट्रांसपेरेंसी ले आएं क्योंकि आपने केवल बच्चों को एक प्लेटफार्म दे रहे हैं बल्कि आप है उन्हें समाज में एक अच्छा नागरिक बनाने में भी सहयोग कर रहे हैं थैंक यू सो मच

good evening friends mujhe shikshan ke bare me sabse adhik nirasha kya hai agar vyaktigat roop se dekha jaaye toh yah jo niji karan hai schoolon ka aur vyavasayikaran ho raha hai ki log shiksha ko bech rahe hain aur samaj ko bigad rahe hain baccho ke bhavishya ke saath khilwad kar rahe hain toh yah kaafi dukhad aur bhyavah sthiti hai jaisa ki main isme koi sanshay nahi hai ki yah sabhi log jante hain ki manav apne aankado ki purti ke liye chhat gir gaya hai ki use kya kisi ke bhavishya samaj aur desh se keval aupcharik bhi nataa reh gaya hai matlab vaah kehne ka matlab usne uske prati usko koi lagav nahi hai sirf aur sirf usko fees aur uske paise se matlab hai unke vyaktitva ya unke gyaan kaushal aur unke matlab aage badhne se nahi hai margdarshan se nahi hai kehne ka matlab yah toh yahi agar vyaktigat roop se dekha jaaye toh isme main dukhi hoon ki main un sabhi management se main koi massage dena chahta hoon ki aap isme transparency le aaen kyonki aapne keval baccho ko ek platform de rahe hain balki aap hai unhe samaj me ek accha nagarik banane me bhi sahyog kar rahe hain thank you so match

गुड इवनिंग फ्रेंड्स मुझे शिक्षण के बारे में सबसे अधिक निराशा क्या है अगर व्यक्तिगत रूप से

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Akshaya Kumar

Director Of School

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नैतिक शिक्षा का दूर होना सामाजिक शिक्षा का व्यवसायीकरण होना शिक्षा आज पर्याप्त मात्रा में व्यवसाई करम खुदया है व्यवहारिक ज्ञान नहीं मिलना

naitik shiksha ka dur hona samajik shiksha ka vyavasayikaran hona shiksha aaj paryapt matra me vyavasai karam khudaya hai vyavaharik gyaan nahi milna

नैतिक शिक्षा का दूर होना सामाजिक शिक्षा का व्यवसायीकरण होना शिक्षा आज पर्याप्त मात्रा में

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शिक्षण के बारे में सबसे अधिक निराशा हमें यह है कि यहां पर शिक्षा का स्तर बहुत ही अभाव है इसलिए क्योंकि बेरोजगारी और गरीबी है और गरीबी में बच्चे माता-पिता अपने बच्चों को पढ़ा नहीं पाते वह एक मेहनत मजदूर बन जाते हैं जो मजदूरी करके बच्चों को भेज तो देते हैं पढ़ने के लिए लेकिन बच्चों में वह ग्रेड नहीं बन पाता है क्योंकि केवल बच्चे अपने स्कूल पर डिपेंड हो जाते हैं और विद्यालय में 8 घंटे ही बच्चे रहते हैं जिससे बहुत ही मुश्किल होती है क्योंकि उनके मां-बाप खाली अपना समय बचाने के लिए बच्चे को स्कूल भेज देते हैं फॉर्मेलिटी करते हैं कि मेरा बच्चा पड़ रहा है और वह खुद पड़े अनपढ़ होने के वजह से पढ़े-लिखे नहीं होने की वजह से और अपना घर पालने की वजह से बिछड़ जाते हैं उनके बच्चे क्यों टाइम नहीं देते और विद्यालय लेने के लिए लेकिन मां से बढ़कर कोई गुड टीचर नहीं हो सकती क्योंकि वह अपने बच्चों के मनोभावों को समझती है वह चाहे अगर वह पढ़ी-लिखी होती तू अपने शिक्षण को बच्चे की शिक्षण को आगे बढ़ा सकती थी उसको खाली इतनी खुशी होती है कि मेरा बच्चा विद्यालय जाता है उसका विश्वास होता है टीचर पर इससे अच्छा पढ़ा रहा है यह निराशा होती है कि अगर इनके मां बाप बड़े होते अच्छी तरह पढ़े लिखे होते तो अपने बच्चों को सहयोग करते पढ़ाने में उनके बच्चे कमजोर नहीं होते

shikshan ke bare me sabse adhik nirasha hamein yah hai ki yahan par shiksha ka sthar bahut hi abhaav hai isliye kyonki berojgari aur garibi hai aur garibi me bacche mata pita apne baccho ko padha nahi paate vaah ek mehnat majdur ban jaate hain jo mazdoori karke baccho ko bhej toh dete hain padhne ke liye lekin baccho me vaah grade nahi ban pata hai kyonki keval bacche apne school par depend ho jaate hain aur vidyalaya me 8 ghante hi bacche rehte hain jisse bahut hi mushkil hoti hai kyonki unke maa baap khaali apna samay bachane ke liye bacche ko school bhej dete hain formality karte hain ki mera baccha pad raha hai aur vaah khud pade anpad hone ke wajah se padhe likhe nahi hone ki wajah se aur apna ghar palne ki wajah se bichhad jaate hain unke bacche kyon time nahi dete aur vidyalaya lene ke liye lekin maa se badhkar koi good teacher nahi ho sakti kyonki vaah apne baccho ke manobhavon ko samajhti hai vaah chahen agar vaah padhi likhi hoti tu apne shikshan ko bacche ki shikshan ko aage badha sakti thi usko khaali itni khushi hoti hai ki mera baccha vidyalaya jata hai uska vishwas hota hai teacher par isse accha padha raha hai yah nirasha hoti hai ki agar inke maa baap bade hote achi tarah padhe likhe hote toh apne baccho ko sahyog karte padhane me unke bacche kamjor nahi hote

शिक्षण के बारे में सबसे अधिक निराशा हमें यह है कि यहां पर शिक्षा का स्तर बहुत ही अभाव है इ

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उचित और सही ढंग से पढ़ाने पर बच्चों का ना पढ़ना ना समझना और शिक्षा के प्रति शिक्षा के प्रति रुचि ना लेना मारी निराशा का सबसे बड़ा कारण है

uchit aur sahi dhang se padhane par baccho ka na padhna na samajhna aur shiksha ke prati shiksha ke prati ruchi na lena mari nirasha ka sabse bada karan hai

उचित और सही ढंग से पढ़ाने पर बच्चों का ना पढ़ना ना समझना और शिक्षा के प्रति शिक्षा के प्रत

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आपके आप को शिक्षक के बारे में सबसे अधिक निराशा क्या है मेरा मानना है इसके बारे में उससे अधिक रास्ता है क्या है अगर टीचर हमें जो भी चीज समझा तो हमें समझने का प्रयास करते रहते हैं लेकिन उस समय जो भी प्रश्न जल्दी काम करते हैं और शायद मेरी गलती करना याद नहीं कर पाता यह भूल जाता हूं तो हमें टीचर में क्या करता है समझाने के लिए और समझाने के प्रयास करते हैं और करते हैं हमेशा सोचते हैं किसी तरह कुछ कहना ऐसा अनुमान करते रहते हैं लेकिन जब टिकट बांटते हैं तो निराशा कि मैं ऐसा हमें क्यों कहा ऐसे हमें क्यों मारी क्यों डांट पिक्चर हमको काम है अपना कार्य पूरा करना होता है काम करना है महसूस किया है गलती से सीखा है

aapke aap ko shikshak ke bare me sabse adhik nirasha kya hai mera manana hai iske bare me usse adhik rasta hai kya hai agar teacher hamein jo bhi cheez samjha toh hamein samjhne ka prayas karte rehte hain lekin us samay jo bhi prashna jaldi kaam karte hain aur shayad meri galti karna yaad nahi kar pata yah bhool jata hoon toh hamein teacher me kya karta hai samjhane ke liye aur samjhane ke prayas karte hain aur karte hain hamesha sochte hain kisi tarah kuch kehna aisa anumaan karte rehte hain lekin jab ticket bantate hain toh nirasha ki main aisa hamein kyon kaha aise hamein kyon mari kyon dant picture hamko kaam hai apna karya pura karna hota hai kaam karna hai mehsus kiya hai galti se seekha hai

आपके आप को शिक्षक के बारे में सबसे अधिक निराशा क्या है मेरा मानना है इसके बारे में उससे अध

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Lalit Kumar

Selp Employ

1:33
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शिक्षक के बारे में सबसे अधिक निराशा क्या है कि शिक्षक कठोर नहीं होना चाहिए और ना ही इच्छा उनके अंदर होनी चाहिए शिक्षक जो होता है उसे कोमल मधुर होना चाहिए वह जिस इंसान से बात करते हैं किसी भी इंसान से तो उनकी लैंग्वेज बॉडी लैंग्वेज इस तरह की होनी चाहिए कि सामने वाले के दिल और दिमाग में अगर कोई ख्याल आए तो बस हां यह शिक्षक होना एक शिक्षक ही होगा ऐसा ख्याल आना चाहिए जबकि ना की किसी से बात करने का तरीका गलत हो तो शिक्षक की सबसे बड़ी निराशा होती है किसी भी तरह के गलत शौक ना हो सकती हो सकते बड़ी निराशा होती है

shikshak ke bare me sabse adhik nirasha kya hai ki shikshak kathor nahi hona chahiye aur na hi iccha unke andar honi chahiye shikshak jo hota hai use komal madhur hona chahiye vaah jis insaan se baat karte hain kisi bhi insaan se toh unki language body language is tarah ki honi chahiye ki saamne waale ke dil aur dimag me agar koi khayal aaye toh bus haan yah shikshak hona ek shikshak hi hoga aisa khayal aana chahiye jabki na ki kisi se baat karne ka tarika galat ho toh shikshak ki sabse badi nirasha hoti hai kisi bhi tarah ke galat shauk na ho sakti ho sakte badi nirasha hoti hai

शिक्षक के बारे में सबसे अधिक निराशा क्या है कि शिक्षक कठोर नहीं होना चाहिए और ना ही इच्छा

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Arjun jha

Rt Science Teacher

3:10

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आपको शिक्षण के बारे में सबसे अधिक निराशा क्या है और सबसे अधिक निराशा तो एक शिक्षक को वही हो सकती है कि जब उसका शिक्षक उसको ग्रहण करने के स्त्री बना रहे या उसको अपनी बात उसको समझाने में असफल रहता है जब होमवर्क नहीं करता है यावे पठान नहीं करता है स्कूल नहीं जाता है और सारी बातें तो उन पर हमेशा ही निराशा होती धन्यवाद

aapko shikshan ke bare me sabse adhik nirasha kya hai aur sabse adhik nirasha toh ek shikshak ko wahi ho sakti hai ki jab uska shikshak usko grahan karne ke stree bana rahe ya usko apni baat usko samjhane me asafal rehta hai jab homework nahi karta hai yaave pathan nahi karta hai school nahi jata hai aur saari batein toh un par hamesha hi nirasha hoti dhanyavad

आपको शिक्षण के बारे में सबसे अधिक निराशा क्या है और सबसे अधिक निराशा तो एक शिक्षक को वही ह

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Mohsina

Teacher

1:57
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मुझे शिक्षण के बारे में सबसे अधिक निराशा इस बात की होती है कि मैं नाइंथ क्लास को पढ़ाती हूं ना इसलिए कर 12th की लेकिन उन नाइंथ क्लास के बच्चों को जो एक पास करके आते हैं उनको बिल्कुल बेसिक जानकारी नहीं होती है कि वर्ल्ड के नक्शे में इंडिया कहां भरना है ऑस्ट्रेलिया कहां भरना है यह बहुत सारी छोटी-छोटी चीज है तो मुझे लगता है कि मुझे इस बात से बड़ी निराशा होती है कि जब बच्चों को सिखाएं जाने का टाइम होता है क्लास वन से लेकर 8 तक उस वक्त उनकी जो सरकारी स्कूलों में शिक्षा का बहुत ही खराब है कोई न टीचर पढ़ाना चाहता है ना कोई पढ़ना चाहता है टीचर के ऊपर इतने काम भी जाते हैं कि वह दूसरे काम में उलझा रहे जोकली भी होते हैं वह भी नहीं पढ़ाना चाहते तो इस व्यवस्था को मुझे दुरुस्त किया जाना चाहिए कि जब बच्चे एक से लेकर पांचवी क्लास में हो उनको इतनी अच्छी शिक्षा दी जाए और उनकी नींव मजबूत की जाए जिससे कि वह आगे जाकर हर बात को सीखने के लिए उनके अंदर उत्सुक 48 पॉइंट कर दिए जाते हैं उसके बाद नाइंथ में मुझे दिए जाते हैं हमारे जैसे और टीचर्स को दिए जाते हैं तो मुझे लगता है आप मुझे सिखाना बड़ा मुश्किल होता है उनके लेवल पर जाकर नाइंथ क्लास की चीजें फिल्म क्लास वन से कैसे शुरू कर सकते हैं इसी बात की मुझे सबसे ज्यादा निराशा होती है कि किस तरह से हम शिक्षा को सुधारें जो एक से लेकर आठवीं तक की शिक्षा है उसमें क्या सुधार करना चाहिए यही मुझे लगता है कि बच्चों को जब सीखने का टाइम है उसका तुमको सीखने देना चाहिए और उस वक्त उन को सिखाया जाना चाहिए जो उनकी बेसिक चीजें हैं जिससे कि वह आगे जाकर शिक्षा के प्रति उत्सुक रहे और हर बात को सीखने के लिए उनके अंदर एक-एक उत्सुकता हो एक घन के अंदर शौक पैदा हो कि वह सीखने की कोशिश करें एयर तक उनका जो सीखने का जो सीखने की प्रक्रिया है जो उनकी लर्निंग की प्रोसेस है बिल्कुल खत्म हो जाती है और उनका इंटरेस्ट मर जाता है पढ़ाई के प्रति

mujhe shikshan ke bare me sabse adhik nirasha is baat ki hoti hai ki main ninth class ko padhati hoon na isliye kar 12th ki lekin un ninth class ke baccho ko jo ek paas karke aate hain unko bilkul basic jaankari nahi hoti hai ki world ke nakshe me india kaha bharna hai austrailia kaha bharna hai yah bahut saari choti choti cheez hai toh mujhe lagta hai ki mujhe is baat se badi nirasha hoti hai ki jab baccho ko sikhaye jaane ka time hota hai class van se lekar 8 tak us waqt unki jo sarkari schoolon me shiksha ka bahut hi kharab hai koi na teacher padhana chahta hai na koi padhna chahta hai teacher ke upar itne kaam bhi jaate hain ki vaah dusre kaam me uljha rahe jokli bhi hote hain vaah bhi nahi padhana chahte toh is vyavastha ko mujhe durast kiya jana chahiye ki jab bacche ek se lekar paanchvi class me ho unko itni achi shiksha di jaaye aur unki neev majboot ki jaaye jisse ki vaah aage jaakar har baat ko sikhne ke liye unke andar utsuk 48 point kar diye jaate hain uske baad ninth me mujhe diye jaate hain hamare jaise aur teachers ko diye jaate hain toh mujhe lagta hai aap mujhe sikhaana bada mushkil hota hai unke level par jaakar ninth class ki cheezen film class van se kaise shuru kar sakte hain isi baat ki mujhe sabse zyada nirasha hoti hai ki kis tarah se hum shiksha ko sudhare jo ek se lekar aatthvi tak ki shiksha hai usme kya sudhaar karna chahiye yahi mujhe lagta hai ki baccho ko jab sikhne ka time hai uska tumko sikhne dena chahiye aur us waqt un ko sikhaya jana chahiye jo unki basic cheezen hain jisse ki vaah aage jaakar shiksha ke prati utsuk rahe aur har baat ko sikhne ke liye unke andar ek ek utsukata ho ek ghan ke andar shauk paida ho ki vaah sikhne ki koshish kare air tak unka jo sikhne ka jo sikhne ki prakriya hai jo unki learning ki process hai bilkul khatam ho jaati hai aur unka interest mar jata hai padhai ke prati

मुझे शिक्षण के बारे में सबसे अधिक निराशा इस बात की होती है कि मैं नाइंथ क्लास को पढ़ाती हू

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