आपने शिक्षक बनने का फैसला क्यों किया?...


user

Parveen Chauhan

Spoken English Trainer

3:34
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बहुत ही बढ़िया सवाल है कि मैंने शिक्षक बनने का फैसला क्यों लिया सर्वप्रथम मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि शिक्षा के क्षेत्र से चाहे वह विद्यार्थी जीवन हो चाहे प्रोफेशनल लाइफ ओक व्यावसायिक तौर पर हो मेरा एक जिंदगी का एक बहुत बड़ा भाग क्षेत्र से जुड़ा हुआ है सीधे तौर पर यह नकली भी कह सकते हैं मैं आपको बता दूं कि जब मैंने ट्वेल्थ की थी 18 साल का समय तो उसके पश्चात ही मेरे को गवर्नमेंट जॉब मिल गई थी डिफरेंस में उसके पश्चात जब मैंने जॉब ज्वाइन कर ली थी तो ऐसा मानवता और परफेक्शंस भी यही बने हुए कि जो व्यक्ति सरकारी जॉब या अपनी रोजगार हेतु कोई भी चीज प्राप्त कर लेता है तो उस रिक्शा का जो मेन उद्देश्य है उसके प्राप्त समझी जाती लेकिन मैंने अपनी शिक्षा को जा अशोक में ज्वाइन होने के पश्चात मैंने दूरस्थ शिक्षा माध्यमिक जिसको की डिस्टेंस लर्निंग मोड भी बोलते हैं आउट थे आपने ग्रेजुएशन जारी रखी ग्रेजुएशन के पश्चात मैंने इंग्लिश लिटरेचर में पोस्टिंग भी थी तत्पश्चात मैंने अभी-अभी की एलएलबी और लगातार अभी भी ना कुछ ना कुछ शिक्षा प्राप्त करने के समय कोई ना कोई डिग्री करता रहता हूं जिससे कि मैं अपने ज्ञान की शादी कर सकूं अब जॉब से साथ में जो अन्य कौन से ऐप से नॉलेज जो कि अन्य डिग्रियों के माध्यम से मैंने प्राप्ति मैं चाहता था कि उसको भी एक अनुभव और उन सब से नॉलेज के मिक्सर के तौर पर जिसको कि हम जिस भी बोलते हैं और निचोड़ भी बोलते हैं वह विद्यार्थियों को अन्य विद्यार्थियों को जिनकी इनकी इनको इनकी जरूरत है वास्तव में उनको दे सको तो यही सबसे बड़ा कारण था इन सभी चीजों को अनुभव एवं विभिन्न प्रकार की डिग्रियों के माध्यम से जो ज्ञान प्राप्त करा है उसको एक सही दिशा में और सही तरीके से ने विद्यार्थियों को सशक्त माध्यम के द्वारा सुगम रूप से पहुंचाना पहुंचाने के लिए ही मैंने शिक्षक का व्यवसाय चुना क्योंकि यही एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा अन्य विद्यार्थियों के साथ में बहुत ज्यादा और बहुत ही सुगम तरीके से हम आपस में जुड़ सकते हैं और विद्यार्थी कोई व्यक्ति आजकल इतना समय किसी के पास नहीं कि वह ठोकर खाकर सीखे या अपने एक्सपीरियंस पहले वह अनुभव ले और उसके बाद में ही सीख लें यह जरूरी नहीं हम कभी भी किसी अन्य व्यक्तियों के अनुभव और ज्ञान से भी सीख सकते हैं उनको भी हम अपने जीवन में डायरेक्टली अप्लाई कर सकते हैं और एक व्यक्ति जो किन चीजों से निकला हुआ है जिन्होंने इस तरह का अनुभव किया हुआ है वह बिल्कुल सही दिशा में किसी भी अन्य व्यक्ति को जिस को इसकी जरूरत होती है उनको वह ज्ञात गाइड कर सकता है उनको दिशानिर्देश कर सकता है तो मैं भी कुछ इसी उद्देश्य के साथ में इस क्षेत्र में आया था और मुझे लगा कि यह बिल्कुल सही समय और सही चीजें हैं जिससे मैं अपना पूरा का पूरा अनुभव एवं ज्ञान विद्यार्थियों में समर्पित कर सकूं

bahut hi badhiya sawaal hai ki maine shikshak banne ka faisla kyon liya sarvapratham main aapki jaankari ke liye bata doon ki shiksha ke kshetra se chahen vaah vidyarthi jeevan ho chahen professional life oak vyavasayik taur par ho mera ek zindagi ka ek bahut bada bhag kshetra se juda hua hai sidhe taur par yah nakli bhi keh sakte hain main aapko bata doon ki jab maine twelfth ki thi 18 saal ka samay toh uske pashchat hi mere ko government job mil gayi thi difference me uske pashchat jab maine job join kar li thi toh aisa manavta aur parafekshans bhi yahi bane hue ki jo vyakti sarkari job ya apni rojgar hetu koi bhi cheez prapt kar leta hai toh us riksha ka jo main uddeshya hai uske prapt samjhi jaati lekin maine apni shiksha ko ja ashok me join hone ke pashchat maine durasth shiksha madhyamik jisko ki distance learning mode bhi bolte hain out the aapne graduation jaari rakhi graduation ke pashchat maine english literature me posting bhi thi tatpashchat maine abhi abhi ki llb aur lagatar abhi bhi na kuch na kuch shiksha prapt karne ke samay koi na koi degree karta rehta hoon jisse ki main apne gyaan ki shaadi kar sakun ab job se saath me jo anya kaun se app se knowledge jo ki anya degreeon ke madhyam se maine prapti main chahta tha ki usko bhi ek anubhav aur un sab se knowledge ke mixer ke taur par jisko ki hum jis bhi bolte hain aur nichod bhi bolte hain vaah vidyarthiyon ko anya vidyarthiyon ko jinki inki inko inki zarurat hai vaastav me unko de Sako toh yahi sabse bada karan tha in sabhi chijon ko anubhav evam vibhinn prakar ki degreeon ke madhyam se jo gyaan prapt kara hai usko ek sahi disha me aur sahi tarike se ne vidyarthiyon ko sashakt madhyam ke dwara sugam roop se pahunchana pahunchane ke liye hi maine shikshak ka vyavasaya chuna kyonki yahi ek aisa madhyam hai jiske dwara anya vidyarthiyon ke saath me bahut zyada aur bahut hi sugam tarike se hum aapas me jud sakte hain aur vidyarthi koi vyakti aajkal itna samay kisi ke paas nahi ki vaah thokar khakar sikhe ya apne experience pehle vaah anubhav le aur uske baad me hi seekh le yah zaroori nahi hum kabhi bhi kisi anya vyaktiyon ke anubhav aur gyaan se bhi seekh sakte hain unko bhi hum apne jeevan me directly apply kar sakte hain aur ek vyakti jo kin chijon se nikala hua hai jinhone is tarah ka anubhav kiya hua hai vaah bilkul sahi disha me kisi bhi anya vyakti ko jis ko iski zarurat hoti hai unko vaah gyaat guide kar sakta hai unko dishanirdesh kar sakta hai toh main bhi kuch isi uddeshya ke saath me is kshetra me aaya tha aur mujhe laga ki yah bilkul sahi samay aur sahi cheezen hain jisse main apna pura ka pura anubhav evam gyaan vidyarthiyon me samarpit kar sakun

बहुत ही बढ़िया सवाल है कि मैंने शिक्षक बनने का फैसला क्यों लिया सर्वप्रथम मैं आपकी जानकारी

Romanized Version
Likes  5  Dislikes    views  141
WhatsApp_icon
30 जवाब
qIcon
ask
ऐसे और सवाल
Loading...
Loading...
user
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जहां तक मेरी बात है मैंने शिक्षक बनने का फैसला किया है वह तो बच्चों को पढ़ाते पढ़ाते मन में ऐसी हलचल हुई मुझे लगा कि मुझे शिक्षक बनना चाहिए क्योंकि मुझे इस काम में मजा आने लगा और इतना मजा आने लगा कि अगर कोई पैसे ना भी दे तो भी मैं उसे पढ़ आऊंगा

jaha tak meri baat hai maine shikshak banne ka faisla kiya hai vaah toh baccho ko padhate padhate man me aisi hulchul hui mujhe laga ki mujhe shikshak banna chahiye kyonki mujhe is kaam me maza aane laga aur itna maza aane laga ki agar koi paise na bhi de toh bhi main use padh aaunga

जहां तक मेरी बात है मैंने शिक्षक बनने का फैसला किया है वह तो बच्चों को पढ़ाते पढ़ाते मन मे

Romanized Version
Likes  5  Dislikes    views  140
WhatsApp_icon
user

Usha Batra

Beauty Therapist

0:23
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मुझे बच्चों से बहुत प्यार है मैं अपनी 24 घंटे बच्चों से गिरा हूं मैंने अपनी चौक से बच्चों के साथ फिर से वो बचपन को अपने साथ बहुत अच्छा लगता

mujhe baccho se bahut pyar hai main apni 24 ghante baccho se gira hoon maine apni chauk se baccho ke saath phir se vo bachpan ko apne saath bahut accha lagta

मुझे बच्चों से बहुत प्यार है मैं अपनी 24 घंटे बच्चों से गिरा हूं मैंने अपनी चौक से बच्चों

Romanized Version
Likes  60  Dislikes    views  1087
WhatsApp_icon
user

डॉ अर्चना चौधरी

कवयित्री ,कॉन्सलर ,समाजसेवी , शिक्षिका

1:59
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

प्रश्न है कि आपने शिक्षक बनने का फैसला क्यों किया मैंने भी शिक्षक बनने का फैसला इसलिए किया क्योंकि मैं अधिक से अधिक अपने देश की सेवा करना चाहती थी और यह एक ऐसा प्लेटफार्म है जहां से हम अपने समाज परिवार देश की सेवा कर सकते हैं जितना चाहे कर सकते हैं आ चुकी शिक्षा देना सबसे उत्तम कार्य है और किस तरह की शिक्षा देना है यह भी शिक्षक के लिए बहुत ही चुनौतीपूर्ण कार्य है सिर्फ किताबी ज्ञान ही हम नहीं प्रदान करते बल्कि उनके आचरण का उनके रहन-सहन के व्यवहार का उनके उत्साह का हर तरह से ख्याल रखा सार्वभौमिक शिक्षा या या यह गांधीजी के सर्वांगीण विकास जिसने बच्चों का बचपन जितना ही अच्छा होगा उतना ही देश हमारा अच्छा होगा क्योंकि आज के बच्चे कल देश के भविष्य हैं तो समाज का भविष्य सही होगा तब कल देश का आज सही होगा तब कल देश का भविष्य सुदृढ़ होगा मजबूत होगा और यह काम एक शिक्षक ही भली भांति कर सकता है क्योंकि बच्चा का दिमाग बिल्कुल ही गीली मिट्टी की तरह होता है और शिक्षकों ने जैसा बनाना चाहे वैसा बना सकता है क्योंकि एक चाणक्य ने चंद्रगुप्त को तैयार कर पूरे भारतवर्ष की रक्षा की इस तरह से शिक्षक चाहे कोई बहुत सारी चंद्रगुप्त तैयार कर सकते हैं और कर रहे हैं इसीलिए मैंने शिक्षक बनने का फैसला लिया धन्यवाद आप सभी को नमस्कार

prashna hai ki aapne shikshak banne ka faisla kyon kiya maine bhi shikshak banne ka faisla isliye kiya kyonki main adhik se adhik apne desh ki seva karna chahti thi aur yah ek aisa platform hai jaha se hum apne samaj parivar desh ki seva kar sakte hain jitna chahen kar sakte hain aa chuki shiksha dena sabse uttam karya hai aur kis tarah ki shiksha dena hai yah bhi shikshak ke liye bahut hi chunautipurn karya hai sirf kitabi gyaan hi hum nahi pradan karte balki unke aacharan ka unke rahan sahan ke vyavhar ka unke utsaah ka har tarah se khayal rakha sarvabhaumik shiksha ya ya yah gandhiji ke Sarvangiṇa vikas jisne baccho ka bachpan jitna hi accha hoga utana hi desh hamara accha hoga kyonki aaj ke bacche kal desh ke bhavishya hain toh samaj ka bhavishya sahi hoga tab kal desh ka aaj sahi hoga tab kal desh ka bhavishya sudridh hoga majboot hoga aur yah kaam ek shikshak hi bhali bhanti kar sakta hai kyonki baccha ka dimag bilkul hi gili mitti ki tarah hota hai aur shikshakon ne jaisa banana chahen waisa bana sakta hai kyonki ek chanakya ne chandragupta ko taiyar kar poore bharatvarsh ki raksha ki is tarah se shikshak chahen koi bahut saari chandragupta taiyar kar sakte hain aur kar rahe hain isliye maine shikshak banne ka faisla liya dhanyavad aap sabhi ko namaskar

प्रश्न है कि आपने शिक्षक बनने का फैसला क्यों किया मैंने भी शिक्षक बनने का फैसला इसलिए किया

Romanized Version
Likes  8  Dislikes    views  112
WhatsApp_icon
user

J P Singh

Principal

1:07
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जी नमस्कार आपका प्रश्न है आपने शिक्षक बनने का फैसला क्यों लिया मैंने अपने जीवन में शिक्षक बनने का जो फैसला लिया वह इसलिए लिया ताकि मैं शुरू से ही जिज्ञासु था लोगों को समझना जान ना समझाना चाहता था और ऐसा प्लेटफार्म मुझे शिक्षक के रूप में मिला और मैंने अपने परिवार की आर्थिक मजबूरी को देखते हुए भी शिक्षक के मार्ग को अपनाएं मैंने सन 2014 से प्रधानाचार्य के पद पर कार्य करना प्रारंभ किया जबकि उस समय हमारी आयु मात्र 27 वर्ष थी और मैंने अपने जीवन में तीन बार केंद्र व्यवस्थापक की भूमिका निभाई इसमें मैंने अपने यहां बच्चों को परीक्षा दिलवाई क्षेत्र पर मेरा लोगों से लगाओ लाडला लोगों को सिखाने की जो जिज्ञासा थी उसी वजह से मैंने फैसला लिया

ji namaskar aapka prashna hai aapne shikshak banne ka faisla kyon liya maine apne jeevan me shikshak banne ka jo faisla liya vaah isliye liya taki main shuru se hi jigyasu tha logo ko samajhna jaan na samajhana chahta tha aur aisa platform mujhe shikshak ke roop me mila aur maine apne parivar ki aarthik majburi ko dekhte hue bhi shikshak ke marg ko apanaen maine san 2014 se pradhanacharya ke pad par karya karna prarambh kiya jabki us samay hamari aayu matra 27 varsh thi aur maine apne jeevan me teen baar kendra vyavasthapak ki bhumika nibhaai isme maine apne yahan baccho ko pariksha dilvai kshetra par mera logo se lagao ladla logo ko sikhane ki jo jigyasa thi usi wajah se maine faisla liya

जी नमस्कार आपका प्रश्न है आपने शिक्षक बनने का फैसला क्यों लिया मैंने अपने जीवन में शिक्षक

Romanized Version
Likes  145  Dislikes    views  1694
WhatsApp_icon
user

DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

2:31
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका पेट में क्या अपने शिक्षक बनने का फैसला क्यों किया बचपन में पढ़ने का बहुत शौक था रात रात भर पढ़ते थे और पढ़ने में आनंद आता था सभी मित्रों में हिंदी गणित इंग्लिश समान विज्ञान और विज्ञान इत्यादि विषयों को वाणिज्य विषयों के पढ़ने में बड़ा आनंद आता था यदि उसमें पढ़ाई भोज नहीं लगती थी क्योंकि शौक था इसलिए आनंद आता था यह किस संसाधन नहीं हो पाते थे और संसाधन जुटाने पर चित्र उसके लिए खुद प्रयास करने पर जैसे मैं ट्यूशन पढ़ाता था और ट्यूशन के पैसे से विटामिन खरीद कर मैं अपनी पढ़ाई को कंट्री नहीं रखता था इसके अलावा एक अध्यापक का क्या रुतबा होता है और क्या अध्यापक में विद्यार्थियों के साथ आदर्श चित्रकूट आता एक अध्यापक क्रिश्चियन अपने पिक्चर अंखियों से 20 साल तक कितना प्यार करता अपने विचारों में कितना विश्वास होता है यह चीजें मैंने अपने अध्यापकों से कोई जनों से 16 लगन प्रयास और उनके जीवन को देखकर मैंने भी निर्णय लिया कि मैं भविष्य में अध्यापक जीवन अपना लूंगा और विद्यार्थियों के जीवन में परिवर्तन ना होगा हजारों लाखों विद्यार्थियों के जीवन में अपनी शिक्षा के माध्यम से अपनी योगिता के माध्यम से उनके अंदर सुधारना होगा और लगभग 40 साल की अपने सेवाकाल के दौरान हमने अनेक विद्यार्थियों के जीवन में आमूलचूल परिवर्तन खट्टी में सुधार करने का प्रयास किया भविष्य बनाने का प्रयास किया लेकिन जब कुछ किसी एक इंसान के हाथ में नहीं होता हमारा फैसला समाज सेवा का था इसलिए शिक्षक जीवन का राजस्थानी

aapka pet me kya apne shikshak banne ka faisla kyon kiya bachpan me padhne ka bahut shauk tha raat raat bhar padhte the aur padhne me anand aata tha sabhi mitron me hindi ganit english saman vigyan aur vigyan ityadi vishyon ko wanijya vishyon ke padhne me bada anand aata tha yadi usme padhai bhoj nahi lagti thi kyonki shauk tha isliye anand aata tha yah kis sansadhan nahi ho paate the aur sansadhan jutane par chitra uske liye khud prayas karne par jaise main tuition padhata tha aur tuition ke paise se vitamin kharid kar main apni padhai ko country nahi rakhta tha iske alava ek adhyapak ka kya rutbaa hota hai aur kya adhyapak me vidyarthiyon ke saath adarsh chitrakoot aata ek adhyapak Christian apne picture ankhiyon se 20 saal tak kitna pyar karta apne vicharon me kitna vishwas hota hai yah cheezen maine apne adhyapakon se koi jano se 16 lagan prayas aur unke jeevan ko dekhkar maine bhi nirnay liya ki main bhavishya me adhyapak jeevan apna lunga aur vidyarthiyon ke jeevan me parivartan na hoga hazaro laakhon vidyarthiyon ke jeevan me apni shiksha ke madhyam se apni yogita ke madhyam se unke andar sudharna hoga aur lagbhag 40 saal ki apne sevakal ke dauran humne anek vidyarthiyon ke jeevan me amulchul parivartan khatti me sudhaar karne ka prayas kiya bhavishya banane ka prayas kiya lekin jab kuch kisi ek insaan ke hath me nahi hota hamara faisla samaj seva ka tha isliye shikshak jeevan ka rajasthani

आपका पेट में क्या अपने शिक्षक बनने का फैसला क्यों किया बचपन में पढ़ने का बहुत शौक था रात

Romanized Version
Likes  323  Dislikes    views  4270
WhatsApp_icon
user

Harender Kumar Yadav

Career Counsellor.

1:01
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारत में शिक्षक बनने का फैसला करने का फैसला इसलिए किया तेरे साथ में बच्चों के करीब गया फिर में पढ़ाने लगा कर वहां से जब देखा कि बच्चों के अंदर बहुत कमियां है और उनको सुधारा जा सकता है और मुझे लगा कि नहीं आराम एक शिक्षक बंद करके हम बच्चों के अंदर मॉडल अवेलेबल सकते हैं उनके अंदर सकते हैं और बच्चों के अंदर जुनून जज्बा पैदा कर सकते हैं जो आगे कुछ कर सके देश के लिए समाज के लिए और देश के बाहर बार जाकर के निश्चित तौर पर बेहतर काम कर रहे हैं राष्ट्रीय अध्यक्ष इंसान के रूप में कर रहे हैं समाज कार्य कर सकें ऐसी बिजनेस कर रहे हैं जी

bharat me shikshak banne ka faisla karne ka faisla isliye kiya tere saath me baccho ke kareeb gaya phir me padhane laga kar wahan se jab dekha ki baccho ke andar bahut kamiyan hai aur unko sudhara ja sakta hai aur mujhe laga ki nahi aaram ek shikshak band karke hum baccho ke andar model available sakte hain unke andar sakte hain aur baccho ke andar junun jajba paida kar sakte hain jo aage kuch kar sake desh ke liye samaj ke liye aur desh ke bahar baar jaakar ke nishchit taur par behtar kaam kar rahe hain rashtriya adhyaksh insaan ke roop me kar rahe hain samaj karya kar sake aisi business kar rahe hain ji

भारत में शिक्षक बनने का फैसला करने का फैसला इसलिए किया तेरे साथ में बच्चों के करीब गया फिर

Romanized Version
Likes  350  Dislikes    views  4401
WhatsApp_icon
user

pervs

Tutor

1:08
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका फोन नहीं लोगों से बात करने का मौका मिलता है और बात करते हैं और क्या तुम्हारे पास आते हैं और एक लड़की रहती है टाइम कम रहता है और और बच्चे को किस तरीके से एक्सपेंड करना है वर्तमान कैसे डेवलप करना है तरीके से होगा विजुअल होगा साउंड होगा स्मार्ट क्लासरूम एक्टिविटीज

aapka phone nahi logo se baat karne ka mauka milta hai aur baat karte hain aur kya tumhare paas aate hain aur ek ladki rehti hai time kam rehta hai aur aur bacche ko kis tarike se eksapend karna hai vartaman kaise develop karna hai tarike se hoga visual hoga sound hoga smart classroom activities

आपका फोन नहीं लोगों से बात करने का मौका मिलता है और बात करते हैं और क्या तुम्हारे पास आते

Romanized Version
Likes  188  Dislikes    views  1671
WhatsApp_icon
user

Ajit Pandit

visual Artist आप ललित कला में कैरियर बनाना हैं तो संपर्क कर सकते हैं

0:53
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मैं अपनी बात बता रहा हूं मैंने तो उस शिक्षक बनने का इसलिए फैसला किया जो यह समाज की जो स्पीड है थोड़ी है उससे थोड़ा और तेज कर सको तो मुझे आता है वह दे सकते लेकिन जब मैंने जॉइन किया और जब मैं सिस्टम में घुसने लगा तो मुझे लगा दिया कोई देने वाली बात नहीं है या फॉलो करने वाली बात है वह भी ऑर्डर सरकार का जॉब को पढ़ाने से ज्यादा साइकिल को 440 बनाना है घर-घर जाकर जनगणना करना है इलेक्शन करवाने हैं मतलब शिक्षक शिक्षक नहीं रह गया और जो सोचकर मतलब आप शिक्षक बनते हैं वो जब जमीन पर आते हैं तो वह कुछ नहीं रहता है

main apni baat bata raha hoon maine toh us shikshak banne ka isliye faisla kiya jo yah samaj ki jo speed hai thodi hai usse thoda aur tez kar Sako toh mujhe aata hai vaah de sakte lekin jab maine join kiya aur jab main system me ghusne laga toh mujhe laga diya koi dene wali baat nahi hai ya follow karne wali baat hai vaah bhi order sarkar ka job ko padhane se zyada cycle ko 440 banana hai ghar ghar jaakar janganana karna hai election karwane hain matlab shikshak shikshak nahi reh gaya aur jo sochkar matlab aap shikshak bante hain vo jab jameen par aate hain toh vaah kuch nahi rehta hai

मैं अपनी बात बता रहा हूं मैंने तो उस शिक्षक बनने का इसलिए फैसला किया जो यह समाज की जो स्पी

Romanized Version
Likes  42  Dislikes    views  426
WhatsApp_icon
user
0:38
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हां शिक्षक बनने से पहले मेरी सबसे ज्यादा रुचि थी और विद्यार्थी बने रहने में और शिक्षण एक ऐसा माध्यम है जिसमें व्यक्ति शिक्षण के साथ-साथ जीवन पर्यंत नाले हासिल करता रहता था सीखता भी रहता है तो जाहिर सी बात है शिक्षण इसलिए मुझे पसंद था कि इस क्षेत्र में आकर के मुझे वहां जो मेरा नॉलेज है जो मैंने स्कूल में या कॉलेज में हासिल किया है उसके बाद भी मुझे मिलता रहेगा और नाले से मिलना प्राप्त करना मुझे आनंद देता है इसलिए मैंने शिक्षण व्यवसाय कुछ ना

haan shikshak banne se pehle meri sabse zyada ruchi thi aur vidyarthi bane rehne me aur shikshan ek aisa madhyam hai jisme vyakti shikshan ke saath saath jeevan paryant naale hasil karta rehta tha sikhata bhi rehta hai toh jaahir si baat hai shikshan isliye mujhe pasand tha ki is kshetra me aakar ke mujhe wahan jo mera knowledge hai jo maine school me ya college me hasil kiya hai uske baad bhi mujhe milta rahega aur naale se milna prapt karna mujhe anand deta hai isliye maine shikshan vyavasaya kuch na

हां शिक्षक बनने से पहले मेरी सबसे ज्यादा रुचि थी और विद्यार्थी बने रहने में और शिक्षण एक ऐ

Romanized Version
Likes  20  Dislikes    views  314
WhatsApp_icon
user
0:36
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार तो आप का सवाल है आपने शिक्षक बनने का फैसला क्यों लिया तो सबसे पहला कि मैंने शिक्षक शिक्षक बनने का फैसला जो मेरे जो ग्रुप हैं उन से प्रभावित होकर या मैंने शिक्षक बनने का फैसला क्लास 8th में ले लिया था जो मैं आदर्श टीचर थे उनसे प्रभावित होकर और मैंने उन जैसे जैसे उन्होंने मुझे बताया जिस तरीके से उन्होंने मुझे गाइड किया या जैसे वह बनना चाहते थे मैं उनकी तरह एक आदर्श शिक्षक बनना चाहता था और वहीं से मैंने यह फैसला लिया और आज में एक शिक्षक के रूप में अपने आपको देखता हूं या स्टाइलिश कर चुका हूं धन्यवाद

namaskar toh aap ka sawaal hai aapne shikshak banne ka faisla kyon liya toh sabse pehla ki maine shikshak shikshak banne ka faisla jo mere jo group hain un se prabhavit hokar ya maine shikshak banne ka faisla class 8th me le liya tha jo main adarsh teacher the unse prabhavit hokar aur maine un jaise jaise unhone mujhe bataya jis tarike se unhone mujhe guide kiya ya jaise vaah banna chahte the main unki tarah ek adarsh shikshak banna chahta tha aur wahi se maine yah faisla liya aur aaj me ek shikshak ke roop me apne aapko dekhta hoon ya stylish kar chuka hoon dhanyavad

नमस्कार तो आप का सवाल है आपने शिक्षक बनने का फैसला क्यों लिया तो सबसे पहला कि मैंने शिक्षक

Romanized Version
Likes  4  Dislikes    views  95
WhatsApp_icon
user
0:29
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

शिक्षक समाज का एक सम्मानित होता है तथा हम अपने समाज को शिक्षित करने के लिए अपने कैरियर में शिक्षा व्यवसाय को चुना है शिक्षा कार्य को चुना है ताकि हम अपने समाज के व्यक्तियों को एक नई दिशा प्रदान कर सकें

shikshak samaj ka ek sammanit hota hai tatha hum apne samaj ko shikshit karne ke liye apne carrier me shiksha vyavasaya ko chuna hai shiksha karya ko chuna hai taki hum apne samaj ke vyaktiyon ko ek nayi disha pradan kar sake

शिक्षक समाज का एक सम्मानित होता है तथा हम अपने समाज को शिक्षित करने के लिए अपने कैरियर में

Romanized Version
Likes  6  Dislikes    views  89
WhatsApp_icon
user
0:46
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

सर आपका प्रसन्न है आपने शिक्षक बनने का फैसला क्यों किया तो मैं बताना चाहता हूं कि मैंने शिक्षक बनने का फैसला इसलिए किया क्योंकि शिक्षक हमारे देश का एक स्तंभ की तरह है जो हमारे देश से का देश का भविष्य मन होता है और जो हमारे देश को एक नई दिशा में ले जाता है क्योंकि कोई भी शिक्षक है वह अपने छात्रों को अपने ऊपर ही देखना चाहता है और उन्हें ज्ञान कराकर इस देश का इस देश में भी वह रहता है उस देश का भला चाहता है और उस देश को एक नई उन्नति के दिशा में ले जाता है धन्यवाद

sir aapka prasann hai aapne shikshak banne ka faisla kyon kiya toh main batana chahta hoon ki maine shikshak banne ka faisla isliye kiya kyonki shikshak hamare desh ka ek stambh ki tarah hai jo hamare desh se ka desh ka bhavishya man hota hai aur jo hamare desh ko ek nayi disha me le jata hai kyonki koi bhi shikshak hai vaah apne chhatro ko apne upar hi dekhna chahta hai aur unhe gyaan karakar is desh ka is desh me bhi vaah rehta hai us desh ka bhala chahta hai aur us desh ko ek nayi unnati ke disha me le jata hai dhanyavad

सर आपका प्रसन्न है आपने शिक्षक बनने का फैसला क्यों किया तो मैं बताना चाहता हूं कि मैंने शि

Romanized Version
Likes  4  Dislikes    views  111
WhatsApp_icon
user

Prashant

Teacher

0:47
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

निकेश शिक्षक बनने का मेरा फैसला कोई एक निजी फैसला इसलिए हो सकता है क्योंकि मुझे शिक्षण कार्य में बहुत रुचि थी जब मैं छोटा था तो मुझे भी अपने से छोटे भाई बहनों को पढ़ाना बहुत अच्छा लगता था जो चीज मैं समझ गया था था उसको मैं जब खुद घर पर पड़ता था तुम एक इंटरेस्ट लगता था और सीखते सीखते का इंटरेस्ट कब मेरा फैशन में बदल गया मुझे खुद पता नहीं चला और आज मुझे शिक्षण कार में बहुत ही अच्छा लगता है इसलिए नहीं इसलिए नहीं क्योंकि मुझे ऐसा लगता है कि शिक्षण कार्य व्यवसाय के साथ-साथ आज एक बहुत ही अच्छा विभाग भी बन गया जहां आपकी इज्जत भी होती है जहां आपको मान सम्मान भी मिलता है साथ ही साथ आपकी नॉलेज जो मनुष्य जीवन भर सीखता रहता है वह भी आपको होती चली जाती है धन्यवाद

nikesh shikshak banne ka mera faisla koi ek niji faisla isliye ho sakta hai kyonki mujhe shikshan karya me bahut ruchi thi jab main chota tha toh mujhe bhi apne se chote bhai bahnon ko padhana bahut accha lagta tha jo cheez main samajh gaya tha tha usko main jab khud ghar par padta tha tum ek interest lagta tha aur sikhate sikhate ka interest kab mera fashion me badal gaya mujhe khud pata nahi chala aur aaj mujhe shikshan car me bahut hi accha lagta hai isliye nahi isliye nahi kyonki mujhe aisa lagta hai ki shikshan karya vyavasaya ke saath saath aaj ek bahut hi accha vibhag bhi ban gaya jaha aapki izzat bhi hoti hai jaha aapko maan sammaan bhi milta hai saath hi saath aapki knowledge jo manushya jeevan bhar sikhata rehta hai vaah bhi aapko hoti chali jaati hai dhanyavad

निकेश शिक्षक बनने का मेरा फैसला कोई एक निजी फैसला इसलिए हो सकता है क्योंकि मुझे शिक्षण कार

Romanized Version
Likes  5  Dislikes    views  114
WhatsApp_icon
user
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मैंने शिक्षक बनने का फैसला इसलिए किया क्योंकि मुझे पढ़ रहा था और अब मैंने मुझसे एक लड़का मेरा दोस्त जो था मुझसे सवाल उसने पूछा और जिसको मैंने बहुत ही आसान तरीके से उसको बता दिया और मुझे नहीं पता था कि मेरे अंदर पढ़ाने का हुनर है जब मैंने उसको वह सवाल का अंतर बताया उसका महत्व बताया तो उस बच्चे ने या उससे भाई ने मुझे कहा कि यह आपने जो मुझे अंतर बताया जो तरीका बताया बहुत ही क्लियर तरीके से मुझे समझ में आ चुका है अब इसको कभी नहीं बोलूंगा तो वह जो उसकी बात जो मेरे दिमाग में गई तो तब से मैंने यह डिसाइड किया कि शायद मेरे अंदर यह कौन है वाकई में यह मेरे अंदर गुण है कि मुझे लोगों को पढ़ाने बहुत अच्छा लगता है आज मैं लोगों को बनाता हूं तो मुझे बहुत ही सुकून मिलता है तो हर शिक्षा के अंदर यही गुण होना चाहिए पूर्व मुझे नहीं पता रहता कि मैं 1 घंटे पढ़ रहा हूं 2 घंटे पर आ रहा हूं मैं पढ़ाने में इतना मगन हो जाता हूं कि बस मैं पढ़ता रहता हूं पढ़ता रहता हूं पढ़ता रहता हूं इसलिए मुझे लगा कि मुझे शिक्षक बनना चाहिए क्योंकि यही मेरी जुनून है यह मेरा पैसा नहीं और जो चीज समझूं होती है वही आगे चलते जाम को बनाती है जिसका को सुनना चाहिए इसलिए मैंने शिक्षक बनने का चुना था सुमित करते आपको समझ में आया थैंक यू

maine shikshak banne ka faisla isliye kiya kyonki mujhe padh raha tha aur ab maine mujhse ek ladka mera dost jo tha mujhse sawaal usne poocha aur jisko maine bahut hi aasaan tarike se usko bata diya aur mujhe nahi pata tha ki mere andar padhane ka hunar hai jab maine usko vaah sawaal ka antar bataya uska mahatva bataya toh us bacche ne ya usse bhai ne mujhe kaha ki yah aapne jo mujhe antar bataya jo tarika bataya bahut hi clear tarike se mujhe samajh me aa chuka hai ab isko kabhi nahi boloonga toh vaah jo uski baat jo mere dimag me gayi toh tab se maine yah decide kiya ki shayad mere andar yah kaun hai vaakai me yah mere andar gun hai ki mujhe logo ko padhane bahut accha lagta hai aaj main logo ko banata hoon toh mujhe bahut hi sukoon milta hai toh har shiksha ke andar yahi gun hona chahiye purv mujhe nahi pata rehta ki main 1 ghante padh raha hoon 2 ghante par aa raha hoon main padhane me itna mogun ho jata hoon ki bus main padhata rehta hoon padhata rehta hoon padhata rehta hoon isliye mujhe laga ki mujhe shikshak banna chahiye kyonki yahi meri junun hai yah mera paisa nahi aur jo cheez samjhu hoti hai wahi aage chalte jam ko banati hai jiska ko sunana chahiye isliye maine shikshak banne ka chuna tha sumit karte aapko samajh me aaya thank you

मैंने शिक्षक बनने का फैसला इसलिए किया क्योंकि मुझे पढ़ रहा था और अब मैंने मुझसे एक लड़का म

Romanized Version
Likes  3  Dislikes    views  117
WhatsApp_icon
user
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

खुशी ने आपने शिक्षक बनने का फैसला क्यों किया दिखी शिक्षक कहते नहीं की हर एक व्यक्ति जब जन्म लेता है तो कुछ न कुछ गुड ले करके आता है good-good दोनों ले करके आता है तू मेरे मन में मेरी भी इच्छा थी आ कि मैं एक अच्छा मैं शुरू से ही बदलाव लोगों का सेवा भाव करता था मैं कक्षा बारहवीं तक जो कक्षा आठवीं तक की पढ़ाई बहुत लापरवाही से मैंने किया और इसके बाद जो है फिर मैंने हाय नाइंथ के बाद फिर मैंने समझ में आया कि एजुकेशन शिक्षा क्या है मेरे समझ में आया कि शिक्षा बिना जीवन अधूरा होता है इसलिए फिर मैं कक्षा 9 से पढ़ना प्रारंभ किया उसके बाद इंटर तक मैंने पिया इंटर तक मैंने पढ़ा पढ़ने के बाद जब विकलांग विश्वविद्यालय गया पढ़ने के लिए मैं अपने इस बीच बता रहा हूं तू वहां पर क्या हुआ कि आंबेडकर की विकलांगों को देखा कोई देख नहीं पाते सुन बोल नहीं पाता कोई बैठ कर चलता है कोई मतलब 800 बैटरी वाला घर में उनकी सेवा करना शुरू कर दिया धीरे-धीरे मेरे मन में आया कि जैसे स्पेशल एजुकेशन होता है नॉर्मल एजुकेशन इन स्पेशल एजुकेशन एजुकेशन पोर्टल एजुकेशन में कुछ ऐसे सब्जेक्ट होते हैं कि जो हम उनके कोडिंग पढ़ाते हैं विकलांग बच्चों के कोट ब्रेल पढ़ाना संकेतिक भाषा देना बार बच्चों को छोटी-छोटी क्रिएटिविटी करके बच्चों को सिखाना खेल-खेल में सिखाना यह सारी चीजें मैंने देखा और सीखा बल्लभ पढ़ने के दौरान मेरे मन में आया कि मैं जमीन कितनी सेवा करता हूं दिन के लिए मुझे और कुछ करना चाहिए तो फिर मैंने मास्टर ससुराल किया इसके बाद मैंने स्पेशल B.Ed बी आई सी किया ताकि मैं ऐसे बच्चों को पढ़ाओ पढ़ाने के बाद में मेरे अंदर जिज्ञासा हुई और लालसा हुई और लगन हो गई कि मैं नहीं कहा टीचर बनूंगा किचन भरना सरल बांध लेकिन नियमों का पालन करना नहीं वो का पालन करना नहीं आ एक टीचर की क्या कर्तव्य होते हैं एक टीचर के क्या गुण होते हैं एक टीचर के व्यक्तित्व होता है इस सब कुछ होना चाहिए तभी आप एक आदर्श कुशल टीचर बन पाओगे तू कुछ गुड तुम्हारे पास होते हैं कुछ गुड हमको दूसरे को देखकर कि सीखना पड़ता है सो मैंने वही कुछ मेरे अंदर थे कुछ गुड मैंने दूसरे टीचरों को देख कर के मैंने सीखा और सीखने के बाद में आज मैं औरों की नजरों में तो नहीं कह सकता हूं लेकिन हा फ़िलहाल इतने काम कुछ मेरी स्टूडेंट है जो मेरी टंकी पेरेंट्स है जो और लोग हम से वार्तालाप करते हैं हम जाग टीचिंग लेने जाते हैं प्रैक्टिकल लेने जाते हैं या फिर हम वहां जाते हैं कॉन्फ्रेंस में जाते हैं तो मतलब वहां के लोगों की मुस्लिम सुनते तक हमको अच्छा लगता है कि चलिए हमारी आरजू थी हमारी इच्छा थी और जो हमारा जो है यह विचार था वह आज सफल हुआ उन सब की बातों को सुन कर के देखिए हम स्वयं अपने भूले उनका नहीं करते हैं दूसरा कोई हमारा मूल्यांकन करता है तभी हम को पता चलता है कि हम कितने गहरे पानी में है तू यह है कि एक व्यक्ति के अंदर अपने उद्देश्य होते हैं पहले छोटे अपने सिद्धांत होते हैं कि मुझे डॉक्टर बनना है मुझे टीचर बनना है मुझे इंजीनियर बनना है मुझे बाबू बनना है मुझे लेखपाल बनना है मुझे कंपाउंडर बनना है मुझे ओटी टेक्निशियन करना है कुछ भी करना है तुझे तक उसके व्यक्ति के अंदर जिज्ञासा उसके अंदर जो है ललक नहीं होगी तो वह व्यक्ति कुछ नहीं कर पाएगा तो इसलिए मैं कहता हूं कि टीचर बनने के लिए हो तो या फिर या इंजीनियर बनने के लिए हो सबका अपना अपना फैसला अपने अपना उद्देश्य होता है धन्यवाद

khushi ne aapne shikshak banne ka faisla kyon kiya dikhi shikshak kehte nahi ki har ek vyakti jab janam leta hai toh kuch na kuch good le karke aata hai good good dono le karke aata hai tu mere man me meri bhi iccha thi aa ki main ek accha main shuru se hi badlav logo ka seva bhav karta tha main kaksha baarvi tak jo kaksha aatthvi tak ki padhai bahut laparwahi se maine kiya aur iske baad jo hai phir maine hi ninth ke baad phir maine samajh me aaya ki education shiksha kya hai mere samajh me aaya ki shiksha bina jeevan adhura hota hai isliye phir main kaksha 9 se padhna prarambh kiya uske baad inter tak maine piya inter tak maine padha padhne ke baad jab viklaang vishwavidyalaya gaya padhne ke liye main apne is beech bata raha hoon tu wahan par kya hua ki ambedkar ki vikalangon ko dekha koi dekh nahi paate sun bol nahi pata koi baith kar chalta hai koi matlab 800 battery vala ghar me unki seva karna shuru kar diya dhire dhire mere man me aaya ki jaise special education hota hai normal education in special education education portal education me kuch aise subject hote hain ki jo hum unke coding padhate hain viklaang baccho ke coat braille padhana saanketik bhasha dena baar baccho ko choti choti creativity karke baccho ko sikhaana khel khel me sikhaana yah saari cheezen maine dekha aur seekha ballabh padhne ke dauran mere man me aaya ki main jameen kitni seva karta hoon din ke liye mujhe aur kuch karna chahiye toh phir maine master sasural kiya iske baad maine special B Ed be I si kiya taki main aise baccho ko padhao padhane ke baad me mere andar jigyasa hui aur lalasa hui aur lagan ho gayi ki main nahi kaha teacher banunga kitchen bharna saral bandh lekin niyamon ka palan karna nahi vo ka palan karna nahi aa ek teacher ki kya kartavya hote hain ek teacher ke kya gun hote hain ek teacher ke vyaktitva hota hai is sab kuch hona chahiye tabhi aap ek adarsh kushal teacher ban paoge tu kuch good tumhare paas hote hain kuch good hamko dusre ko dekhkar ki sikhna padta hai so maine wahi kuch mere andar the kuch good maine dusre ticharon ko dekh kar ke maine seekha aur sikhne ke baad me aaj main auron ki nazro me toh nahi keh sakta hoon lekin ha filhal itne kaam kuch meri student hai jo meri tanki parents hai jo aur log hum se vartalaap karte hain hum jag teaching lene jaate hain practical lene jaate hain ya phir hum wahan jaate hain conference me jaate hain toh matlab wahan ke logo ki muslim sunte tak hamko accha lagta hai ki chaliye hamari aaraju thi hamari iccha thi aur jo hamara jo hai yah vichar tha vaah aaj safal hua un sab ki baaton ko sun kar ke dekhiye hum swayam apne bhule unka nahi karte hain doosra koi hamara mulyankan karta hai tabhi hum ko pata chalta hai ki hum kitne gehre paani me hai tu yah hai ki ek vyakti ke andar apne uddeshya hote hain pehle chote apne siddhant hote hain ki mujhe doctor banna hai mujhe teacher banna hai mujhe engineer banna hai mujhe babu banna hai mujhe lekhpal banna hai mujhe compounder banna hai mujhe OT technician karna hai kuch bhi karna hai tujhe tak uske vyakti ke andar jigyasa uske andar jo hai lalak nahi hogi toh vaah vyakti kuch nahi kar payega toh isliye main kahata hoon ki teacher banne ke liye ho toh ya phir ya engineer banne ke liye ho sabka apna apna faisla apne apna uddeshya hota hai dhanyavad

खुशी ने आपने शिक्षक बनने का फैसला क्यों किया दिखी शिक्षक कहते नहीं की हर एक व्यक्ति जब जन

Romanized Version
Likes  8  Dislikes    views  127
WhatsApp_icon
user
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हेलो मैं नवनीत कुमार वर्मा आपका सवाल है कि अपने शिक्षक बनने का फैसला क्यों किया तो शिक्षक के रूप में आप एक तरह के समाजसेवी के रूप में बहुत सारे बच्चों से जुड़ सकते हैं और अपने अनुभव अपने ज्ञान के आधार पर उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते रहते हैं तो मेरा भी ऐसा ही कुछ लगता मुझे पढ़ाना चलाता था इसी कारण मैंने शिक्षक बनने का फैसला किया

hello main navneet kumar verma aapka sawaal hai ki apne shikshak banne ka faisla kyon kiya toh shikshak ke roop me aap ek tarah ke samajsevi ke roop me bahut saare baccho se jud sakte hain aur apne anubhav apne gyaan ke aadhar par unhe jeevan ke har kshetra me aage badhne ke liye protsahit karte rehte hain toh mera bhi aisa hi kuch lagta mujhe padhana chalata tha isi karan maine shikshak banne ka faisla kiya

हेलो मैं नवनीत कुमार वर्मा आपका सवाल है कि अपने शिक्षक बनने का फैसला क्यों किया तो शिक्षक

Romanized Version
Likes  6  Dislikes    views  122
WhatsApp_icon
user

Ramakant

Teacher

1:03
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

शिक्षक बनने का रास्ता हमने इसलिए चुनाव की शिक्षक में जीवन भर शिक्षक जीवन व सकता है उसे खाता रहता है जो कि मैं सक्षम व्यक्ति अक्षम व्यक्ति अर्थात दोनों पैर से विकलांग व्यक्ति होने के कारण दिव्यांग होने के कारण मेरे लिए दो ही रास्ते बचते थे एक शिक्षक या दूसरा कलर कि हमने दो जगह अपनी किस्मत को अपनाया आजमाया अलर्ट बनना चाहे और शिक्षक बनना चाह शिक्षक की तरफ हमें शिक्षक बनने में हमें सफलता मिली जहां पर हमने शिक्षण कार्य किया वहां लोगों के द्वारा सराहना मिली तो लगा कि शिक्षक ही हमारे लिए शिक्षक बनना ही हमारे लिए उचित होगा इसलिए शिक्षक बनने के लिए हमने प्रयास किया

shikshak banne ka rasta humne isliye chunav ki shikshak me jeevan bhar shikshak jeevan va sakta hai use khaata rehta hai jo ki main saksham vyakti aksham vyakti arthat dono pair se viklaang vyakti hone ke karan divyang hone ke karan mere liye do hi raste bachte the ek shikshak ya doosra color ki humne do jagah apni kismat ko apnaya ajamaya alert banna chahen aur shikshak banna chah shikshak ki taraf hamein shikshak banne me hamein safalta mili jaha par humne shikshan karya kiya wahan logo ke dwara sarahana mili toh laga ki shikshak hi hamare liye shikshak banna hi hamare liye uchit hoga isliye shikshak banne ke liye humne prayas kiya

शिक्षक बनने का रास्ता हमने इसलिए चुनाव की शिक्षक में जीवन भर शिक्षक जीवन व सकता है उसे खात

Romanized Version
Likes  8  Dislikes    views  134
WhatsApp_icon
user
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मैंने शिक्षक बनने का फैसला इसलिए लिया क्योंकि शिक्षक बनना है यह मेरा पसंद है मेरी अभिरुचि थी मेरा ऑपरेशन था मेरा जीवन का लक्ष्य था मेरी उसमें मोदी पर्सनल फेवरेट बात थी और उसी के साथ जो है अध्यापक अध्यापक बच्चों को विसर्जन कर सकता उन्हें पढ़ा सकता क्योंकि इसकी अच्छे सुना करीब आ सके अच्छा ज्ञान देने हेतु पुण्य का काम करना है तो मेरे से करना

maine shikshak banne ka faisla isliye liya kyonki shikshak banna hai yah mera pasand hai meri abhiruchi thi mera operation tha mera jeevan ka lakshya tha meri usme modi personal favourite baat thi aur usi ke saath jo hai adhyapak adhyapak baccho ko visarjan kar sakta unhe padha sakta kyonki iski acche suna kareeb aa sake accha gyaan dene hetu punya ka kaam karna hai toh mere se karna

मैंने शिक्षक बनने का फैसला इसलिए लिया क्योंकि शिक्षक बनना है यह मेरा पसंद है मेरी अभिरुचि

Romanized Version
Likes  8  Dislikes    views  106
WhatsApp_icon
user

Ritika

Teacher,life Coach,motivational Speaker

1:11
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार दोस्तों आज का प्रश्न है आपने शिक्षक बनने का फैसला क्यों किया लेकिन मुझे जो है वह पढ़ने और पढ़ाने दोनों का ही बहुत ज्यादा शौक है मुझे अच्छा लगता है मुझे कोई चीज आती है तो मैं उसे शेयर करना ज्यादा अच्छा मानती हूं कि कि आप जितना ज्यादा ज्ञान को बाटेंगे उतना ही ज्यादा वह बढ़ेगा और अच्छा लगता है जब आप बहुत सारी चीजें दूसरों से सीखते हैं और अपने से भी कुछ दूसरों का सिखाते हैं इस जॉब में मुझे कई सारे ऐसे लोग मिले जिन्होंने मुझे बहुत कुछ सिखाया है जिन्होंने मेरी पूरी लाइफ को बदल कर रख दिया है उसके अलावा मैंने बहुत कुछ अपने बच्चों से भी सीखा है जो छात्रों को मैंने पढ़ाया है उनसे भी मैंने बहुत कुछ सीखा है यह सब पूरी जिंदगी में बार-बार यह चीज मुझे याद आती है उन बच्चों को जिनको मैंने पढ़ाया है वहीं उनकी बातें काफी याद आती हैं और यह वह टाइम होता है जब आप अपने बचपन की जो यादें होती हैं आपको वो याद आती है और यह वह समय होता है जब आप बचपन को अपने द्वारा जीते हैं धन्यवाद आपको

namaskar doston aaj ka prashna hai aapne shikshak banne ka faisla kyon kiya lekin mujhe jo hai vaah padhne aur padhane dono ka hi bahut zyada shauk hai mujhe accha lagta hai mujhe koi cheez aati hai toh main use share karna zyada accha maanati hoon ki ki aap jitna zyada gyaan ko batenge utana hi zyada vaah badhega aur accha lagta hai jab aap bahut saari cheezen dusro se sikhate hain aur apne se bhi kuch dusro ka sikhaate hain is job me mujhe kai saare aise log mile jinhone mujhe bahut kuch sikhaya hai jinhone meri puri life ko badal kar rakh diya hai uske alava maine bahut kuch apne baccho se bhi seekha hai jo chhatro ko maine padhaya hai unse bhi maine bahut kuch seekha hai yah sab puri zindagi me baar baar yah cheez mujhe yaad aati hai un baccho ko jinako maine padhaya hai wahi unki batein kaafi yaad aati hain aur yah vaah time hota hai jab aap apne bachpan ki jo yaadain hoti hain aapko vo yaad aati hai aur yah vaah samay hota hai jab aap bachpan ko apne dwara jeete hain dhanyavad aapko

नमस्कार दोस्तों आज का प्रश्न है आपने शिक्षक बनने का फैसला क्यों किया लेकिन मुझे जो है वह प

Romanized Version
Likes  22  Dislikes    views  300
WhatsApp_icon
user

Lalit Kumar

Selp Employ

1:12
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका सवाल है आपने शिक्षक बनने का फैसला क्यों किया है हर इंसान अपनी उन्नति चाहता है और वह किसी भी रूप में आगे बढ़े लेकिन आगे बढ़ना चाहता है अगर कल को मैं शिक्षक बन जाता हूं तुम मेरी उन्नति के साथ-साथ मैं शायद मेरे स्टूडेंट को भी मेरे बराबर तक पहुंचाने की कोशिश क्यों की कोई छोटा नहीं होता और किसी को छोटा रहना भी नहीं है सबको उन्नति करनी है आगे बढ़ना है धन्यवाद

aapka sawaal hai aapne shikshak banne ka faisla kyon kiya hai har insaan apni unnati chahta hai aur vaah kisi bhi roop me aage badhe lekin aage badhana chahta hai agar kal ko main shikshak ban jata hoon tum meri unnati ke saath saath main shayad mere student ko bhi mere barabar tak pahunchane ki koshish kyon ki koi chota nahi hota aur kisi ko chota rehna bhi nahi hai sabko unnati karni hai aage badhana hai dhanyavad

आपका सवाल है आपने शिक्षक बनने का फैसला क्यों किया है हर इंसान अपनी उन्नति चाहता है और वह क

Romanized Version
Likes  8  Dislikes    views  60
WhatsApp_icon
user

Preeti

Teacher

0:48
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

शिक्षक बनने का फैसला इसलिए किया क्योंकि मेरे में ऐसा है एक ऐसा अक्सर होता है जिससे हम अपने जरिए कई लोगों तक उस बात को उस सोच को पहुंचा सकते हैं लोगों को बच्चों को सिखा सकते हैं जो हम चाहते हैं और यह एक अत्यंत सम्मान को क्योंकि अगर हम बच्चों को प्यार देंगे तभी बच्चे बदले में हमें सम्मान तू मेरी मैं तेरी नहीं है बहुत ही सम्मान तो और एक प्यारा होता है

shikshak banne ka faisla isliye kiya kyonki mere me aisa hai ek aisa aksar hota hai jisse hum apne jariye kai logo tak us baat ko us soch ko pohcha sakte hain logo ko baccho ko sikha sakte hain jo hum chahte hain aur yah ek atyant sammaan ko kyonki agar hum baccho ko pyar denge tabhi bacche badle me hamein sammaan tu meri main teri nahi hai bahut hi sammaan toh aur ek pyara hota hai

शिक्षक बनने का फैसला इसलिए किया क्योंकि मेरे में ऐसा है एक ऐसा अक्सर होता है जिससे हम अपने

Romanized Version
Likes  7  Dislikes    views  150
WhatsApp_icon
user
3:31
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

प्यारी सूरत अगन शिक्षक बनने का फैसला मैंने नहीं किया मेरी अंदर की आवाज थी जिसने मत बना मैं जब कॉलेज में पढ़ता था बीएससी नों मेडिकल कर रहा था तो पता नहीं क्या मैं कक्षा में ही रहता था मेरी चपाती जो थी वो उठ के चल जाती थी जान कक्षा में नहीं जाना बाहर कैंटीन पर वह मौज मस्ती करने पर मैं कक्षा में ही बैठा रहता था मेरे साथी मजाक बहुत उड़ाते थे कि क्या कोई गोल्ड मेडल लेना है यह है वह है मैं उनकी बातों को इग्नोर करके से अंदर से आनंद आता था कि सीकर आगे से आगे आगे से उपयोग नहीं करता से सीखता है अच्छी तरह से उसको बताएगा भी बच्चों को बताएगा भी बच्चों को समझाएगा मैं भी तो यही नियम है जो वस्तु जिस प्रकाश को अवशोषित करती है उसी को परिवर्तित करती है तो हमें खरी वस्तु खरीद क्यों दिखाई देती है क्योंकि वह कर इरम को पर सूचित करें क्या पूरी समय प्रदान की है तो अगर आप किसी कला में किसी विषय में अच्छी तरह से उसके अंदर चल जाते हो डूब जाते हो तो आपका हो जाते हो आप किसी की हो जाती है इसी तरह मुझे भी पैकिंग करने की अंदर से आवाज आई और मैडम बीएससी नॉन मेडिकल करा था जब दिल कर रहा था तो मैं अपने ही बुक गली मोहल्ले के बच्चों को लेकर बैठे पढ़ाने वाली जाता था तो बच्चों की कॉल करके देखो और नहीं करते थे फिर मैं बन जाता था मुझे बहुत आनंद आता था तो यह जो मैं कह रहा हूं कि कोई क्या है अंदर से आवाज आती है अगर आप उस आवाज को दबा कर कुछ और बनना चाहती हो तो बहुत कम संभावना है कि आप उसमें फिल्मी उस क्षेत्र में सफल हो गए हो भी सकती हो कि आप उसमें ज्यादा मेहनत कर लो 2 सालों से ऊपर संभावना बहुत और अगर आपको अपनी रूचि के अनुसार कार्य मिल जाए तो आप उस कार्य को करते करते थकते नहीं हो जितना करते हो उतना ज्यादा और अपने आपको तरोताजा महसूस करती हूं इसलिए मेरी पढ़ा नहीं है और शिक्षण में बहुत ज्यादा रुचि अंदर से पैदा हुई तो मैंने उसको बनाया नहीं है अंदर से बंद धन्यवाद

pyaari surat agan shikshak banne ka faisla maine nahi kiya meri andar ki awaaz thi jisne mat bana main jab college me padhata tha bsc non medical kar raha tha toh pata nahi kya main kaksha me hi rehta tha meri chapati jo thi vo uth ke chal jaati thi jaan kaksha me nahi jana bahar canteen par vaah mauj masti karne par main kaksha me hi baitha rehta tha mere sathi mazak bahut udate the ki kya koi gold medal lena hai yah hai vaah hai main unki baaton ko ignore karke se andar se anand aata tha ki sikar aage se aage aage se upyog nahi karta se sikhata hai achi tarah se usko batayega bhi baccho ko batayega bhi baccho ko samajhaega main bhi toh yahi niyam hai jo vastu jis prakash ko avshoshit karti hai usi ko parivartit karti hai toh hamein khadi vastu kharid kyon dikhai deti hai kyonki vaah kar iram ko par suchit kare kya puri samay pradan ki hai toh agar aap kisi kala me kisi vishay me achi tarah se uske andar chal jaate ho doob jaate ho toh aapka ho jaate ho aap kisi ki ho jaati hai isi tarah mujhe bhi packing karne ki andar se awaaz I aur madam bsc non medical kara tha jab dil kar raha tha toh main apne hi book gali mohalle ke baccho ko lekar baithe padhane wali jata tha toh baccho ki call karke dekho aur nahi karte the phir main ban jata tha mujhe bahut anand aata tha toh yah jo main keh raha hoon ki koi kya hai andar se awaaz aati hai agar aap us awaaz ko daba kar kuch aur banna chahti ho toh bahut kam sambhavna hai ki aap usme filmy us kshetra me safal ho gaye ho bhi sakti ho ki aap usme zyada mehnat kar lo 2 salon se upar sambhavna bahut aur agar aapko apni ruchi ke anusaar karya mil jaaye toh aap us karya ko karte karte thakate nahi ho jitna karte ho utana zyada aur apne aapko tarotaja mehsus karti hoon isliye meri padha nahi hai aur shikshan me bahut zyada ruchi andar se paida hui toh maine usko banaya nahi hai andar se band dhanyavad

प्यारी सूरत अगन शिक्षक बनने का फैसला मैंने नहीं किया मेरी अंदर की आवाज थी जिसने मत बना मैं

Romanized Version
Likes  7  Dislikes    views  75
WhatsApp_icon
user

Monika

Teacher

0:31
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

टीचर बनने का फैसला मैंने ले लिया जो कि टीचर की जॉब सबसे रिस्पेक्टबल जॉब होती है और इसको जितना हम जान बांट सकते हैं उतना हम बांटना चाहिए हमें और दूसरी बात कि शिक्षक बनने के बाद ही मैंने जाना कि मैंने कितने अच्छे प्रोफेशन को चूस किया है जहां पर मैं एक छोटे से बच्चे से स्टार्ट करते करते एक बड़े बच्चे तक को ज्ञान अपना बांट सकते हो इसलिए मुझे शिक्षक बनने का प्रदर्शन बहुत अच्छा लगा

teacher banne ka faisla maine le liya jo ki teacher ki job sabse respectable job hoti hai aur isko jitna hum jaan baant sakte hain utana hum bantana chahiye hamein aur dusri baat ki shikshak banne ke baad hi maine jana ki maine kitne acche profession ko chus kiya hai jaha par main ek chote se bacche se start karte karte ek bade bacche tak ko gyaan apna baant sakte ho isliye mujhe shikshak banne ka pradarshan bahut accha laga

टीचर बनने का फैसला मैंने ले लिया जो कि टीचर की जॉब सबसे रिस्पेक्टबल जॉब होती है और इसको जि

Romanized Version
Likes  4  Dislikes    views  63
WhatsApp_icon
user
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

क्योंकि मेरी रुचि बच्चों को पढ़ाने में है मैं वहां कर लोगों की भलाई करना चाहता हूं और अपना रोजगार की करना चाहता हूं मुझे बच्चों को पढ़ाना पसंद है

kyonki meri ruchi baccho ko padhane me hai main wahan kar logo ki bhalai karna chahta hoon aur apna rojgar ki karna chahta hoon mujhe baccho ko padhana pasand hai

क्योंकि मेरी रुचि बच्चों को पढ़ाने में है मैं वहां कर लोगों की भलाई करना चाहता हूं और अपना

Romanized Version
Likes  7  Dislikes    views  108
WhatsApp_icon
user

mahendra kumar puram

aassitant teacher

2:11
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हेलो नमस्कार प्रश्न है आप शिक्षक बनने का फैसला किया जब मैं पहली बार क्लास में गया और बड़ा होकर ऐसे गुरुजी बनाओ उसको पढ़ाओ मेरे को शिक्षक बनने का परिणाम रोक अपने शिक्षक से मिला बचपना लग गया तो मैं पहले स्कूल में हम को ज्ञान देने वाले बताने वाला कौन मिला शिक्षक तुमसे मैं बहुत इंप्रेस हुआ अब उसी दिन समय सोचा कि मैं 1 दिन में भी बड़ों का शिक्षक बंधुओं को शिक्षक एक राष्ट्रपिता होता है राष्ट्र निर्माता होता है कि वह अपने जीवन काल में इतने सालों तक पढ़ाते हुए अनेक लोगों को शिक्षित करता है वही लोग क्या करते हैं देश का बड़े-बड़े नागरिक बनते हैं वहीं राष्ट्रपिता देख लो राष्ट्रपति प्रधानमंत्री जी को मतलब देश का जितने भी नाम महत्वपूर्ण काम करने वाले स्कूल से पैदा होते हैं कोई भी एक काम है आदमी एक ही जान को कार्य करता है लेकिन शिक्षा का ऐसा है कि एक क्लास से लेकर क्लास में आने वाले बच्चों को पढ़ाने के बाद कितने लोगों को पढ़ाता है और उसने लोग ही देश के राष्ट्र सेवा के कार्य करते हैं तो यह सब बातें जब जाना तो मुझे भी अपने शिक्षक बनने का मन में उत्साह पैदा होगा अपने यह सब प्रेरणा अपने शक से मिला और मैं सोचा कि सब लोग कोई भी अगर नौकरी करते हैं तो व्यक्तिगत काम करेंगे एक जान को करेंगे लेकिन मैं अगर शिक्षक बन जाता हूं और पढ़ाता हूं उतना हजारों अपने जीवन काल में हजारों लोगों को शिक्षित कर लूंगा अब हजार लोग क्या बनेंगे देश के लिए काम करेंगे राष्ट्रपति के लिए कोई महान कार्य करेंगे एवं करेंगे तो मेरे को मतलब शांति मिले उसको आज उसे देश के बहुत अच्छा काम कर रहे हैं उनमें बताया कि मैं भी चलूंगा

hello namaskar prashna hai aap shikshak banne ka faisla kiya jab main pehli baar class me gaya aur bada hokar aise guruji banao usko padhao mere ko shikshak banne ka parinam rok apne shikshak se mila bachapana lag gaya toh main pehle school me hum ko gyaan dene waale batane vala kaun mila shikshak tumse main bahut impress hua ab usi din samay socha ki main 1 din me bhi badon ka shikshak bandhuon ko shikshak ek rashtrapita hota hai rashtra nirmaata hota hai ki vaah apne jeevan kaal me itne salon tak padhate hue anek logo ko shikshit karta hai wahi log kya karte hain desh ka bade bade nagarik bante hain wahi rashtrapita dekh lo rashtrapati pradhanmantri ji ko matlab desh ka jitne bhi naam mahatvapurna kaam karne waale school se paida hote hain koi bhi ek kaam hai aadmi ek hi jaan ko karya karta hai lekin shiksha ka aisa hai ki ek class se lekar class me aane waale baccho ko padhane ke baad kitne logo ko padhata hai aur usne log hi desh ke rashtra seva ke karya karte hain toh yah sab batein jab jana toh mujhe bhi apne shikshak banne ka man me utsaah paida hoga apne yah sab prerna apne shak se mila aur main socha ki sab log koi bhi agar naukri karte hain toh vyaktigat kaam karenge ek jaan ko karenge lekin main agar shikshak ban jata hoon aur padhata hoon utana hazaro apne jeevan kaal me hazaro logo ko shikshit kar lunga ab hazaar log kya banenge desh ke liye kaam karenge rashtrapati ke liye koi mahaan karya karenge evam karenge toh mere ko matlab shanti mile usko aaj use desh ke bahut accha kaam kar rahe hain unmen bataya ki main bhi chalunga

हेलो नमस्कार प्रश्न है आप शिक्षक बनने का फैसला किया जब मैं पहली बार क्लास में गया और बड़ा

Romanized Version
Likes  4  Dislikes    views  111
WhatsApp_icon
user
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

शिक्षक बनने का फैसला इसलिए लिया कि शिक्षा के ऐसा पात्र हैं जिस समाज को बिखेरने से बचाता है समाज के बच्चों को समाज के लोगों को समाज के सभी प्रकार के लोगों को वह राष्ट्रीय हित के बारे में समझाने की कोशिश करता है पर एक शिक्षक ही ऐसा पात्र है जो बच्चों के भविष्य को देखता है बाकी तो सब अपने अपने हिसाब से तथा अपने अपने पर्सनल व्यवहार से तथा पर्सनल काम से तथा पैसों से उनकी शिक्षा पात्र हैं जो समाज को आगे बढ़ाता है और देश के महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है

shikshak banne ka faisla isliye liya ki shiksha ke aisa patra hain jis samaj ko bikherane se bachata hai samaj ke baccho ko samaj ke logo ko samaj ke sabhi prakar ke logo ko vaah rashtriya hit ke bare me samjhane ki koshish karta hai par ek shikshak hi aisa patra hai jo baccho ke bhavishya ko dekhta hai baki toh sab apne apne hisab se tatha apne apne personal vyavhar se tatha personal kaam se tatha paison se unki shiksha patra hain jo samaj ko aage badhata hai aur desh ke mahatvapurna bhumika nibhata hai

शिक्षक बनने का फैसला इसलिए लिया कि शिक्षा के ऐसा पात्र हैं जिस समाज को बिखेरने से बचाता

Romanized Version
Likes  8  Dislikes    views  141
WhatsApp_icon
user
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपसे शिक्षक बनने का फैसला क्यों किया यह मेरे मन की अंतरात्मा ने मुझे कहा कि मैं शिक्षक मनु और मैं लोग खुश करो आगे मैं सूचित करूंगा तो समाज शिक्षित होगा समाज तो का देश में किसी को ध्यान रखते हुए मैंने फैसला किया

aapse shikshak banne ka faisla kyon kiya yah mere man ki antaraatma ne mujhe kaha ki main shikshak manu aur main log khush karo aage main suchit karunga toh samaj shikshit hoga samaj toh ka desh me kisi ko dhyan rakhte hue maine faisla kiya

आपसे शिक्षक बनने का फैसला क्यों किया यह मेरे मन की अंतरात्मा ने मुझे कहा कि मैं शिक्षक मनु

Romanized Version
Likes  8  Dislikes    views  157
WhatsApp_icon
user
0:47
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मैंने शिक्षक व शिक्षिका बनने का फैसला इसलिए लिया क्योंकि काफी समय तक मैं ट्यूशन पढ़ाती रही थी घर में मेरे बच्चे छोटे होने की वजह से मैं ट्यूशन पढ़ाते पढ़ाते मेरा ज्ञान भी बढ़ता चला गया और मुझे कुछ करने की इच्छा हुई तो मेरे हस्बैंड ऑफ द टाइम्स ने सलाह दी कि तुम्हारे लिए शिक्षिका बनना सबसे बढ़िया और तेज चीज है इसलिए मैंने शिक्षिका बनने का अपना फैसला लिया और आज मैं अपने करियर से खुश हूं चाय में प्राइवेट जॉब कर रही हूं तब भी मैं बहुत अच्छा लगता है

maine shikshak va shikshika banne ka faisla isliye liya kyonki kaafi samay tak main tuition padhati rahi thi ghar me mere bacche chote hone ki wajah se main tuition padhate padhate mera gyaan bhi badhta chala gaya aur mujhe kuch karne ki iccha hui toh mere husband of the times ne salah di ki tumhare liye shikshika banna sabse badhiya aur tez cheez hai isliye maine shikshika banne ka apna faisla liya aur aaj main apne career se khush hoon chai me private job kar rahi hoon tab bhi main bahut accha lagta hai

मैंने शिक्षक व शिक्षिका बनने का फैसला इसलिए लिया क्योंकि काफी समय तक मैं ट्यूशन पढ़ाती रही

Romanized Version
Likes  8  Dislikes    views  167
WhatsApp_icon
user

Race academy maneesh

Competitive Exam Expert (Youtube- Race Academy Maneesh)https://www.youtube.com/channel/UCEwGqvTOdzZnbc70zgFiJYQ

0:25
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

शिक्षक बनने का फैसला है वह मेरा निजी फैसला है और एक शिक्षक ऐसा मार्गदर्शक होता है जो ना केवल अपने परिवार को अपने रिश्तेदार को सपोर्ट करता है

shikshak banne ka faisla hai vaah mera niji faisla hai aur ek shikshak aisa margadarshak hota hai jo na keval apne parivar ko apne rishtedar ko support karta hai

शिक्षक बनने का फैसला है वह मेरा निजी फैसला है और एक शिक्षक ऐसा मार्गदर्शक होता है जो ना के

Romanized Version
Likes  8  Dislikes    views  114
WhatsApp_icon
qIcon
ask
QuestionsProfiles

Vokal App bridges the knowledge gap in India in Indian languages by getting the best minds to answer questions of the common man. The Vokal App is available in 11 Indian languages. Users ask questions on 100s of topics related to love, life, career, politics, religion, sports, personal care etc. We have 1000s of experts from different walks of life answering questions on the Vokal App. People can also ask questions directly to experts apart from posting a question to the entire answering community. If you are an expert or are great at something, we invite you to join this knowledge sharing revolution and help India grow. Download the Vokal App!