"अकेले जीना सीख जाता है इंसान ,जब उसे पता लग जाता है कि अब साथ देनेवाला कोई नही"कितनी सही बात है?...


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Bhaskar Saurabh

Politics Follower | Engineer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह बात बिल्कुल सही है कि इंसान को उसी वक्त पता चलता है कि उसे अकेली ही अपनी जिंदगी जीनी है जब उसके साथ कोई भी अपना खड़ा नहीं रहता यानी कि अकेले जीना इंसान उसी वक्त सीखता है जब उसे यह पता चल जाता है कि अब उसका साथ देने वाला कोई भी नहीं है कई बार हमारे साथ ऐसी परिस्थितियां होती हैं कि हमारा सभी लोग साथ छोड़ देते हैं और हमें हर एक विषम परिस्थितियों का खुद ही सामना करना पड़ता है और उसे बाहर निकलना होता है तो यही ऐसा वक्त होता है जब इंसान यह सारी बातें सीखता है

yah baat bilkul sahi hai ki insaan ko usi waqt pata chalta hai ki use akeli hi apni zindagi gini hai jab uske saath koi bhi apna khada nahi rehta yani ki akele jeena insaan usi waqt sikhata hai jab use yah pata chal jata hai ki ab uska saath dene vala koi bhi nahi hai kai baar hamare saath aisi paristhiyaann hoti hain ki hamara sabhi log saath chod dete hain aur hamein har ek visham paristhitiyon ka khud hi samana karna padta hai aur use bahar nikalna hota hai toh yahi aisa waqt hota hai jab insaan yah saree batein sikhata hai

यह बात बिल्कुल सही है कि इंसान को उसी वक्त पता चलता है कि उसे अकेली ही अपनी जिंदगी जीनी है

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Jyoti Mehta

Ex-History Teacher

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हमेशा ऐसा होता है कि जब हमारी परिस्थितियां विपरीत होती है तब जो लोग हमारे साथ होते हैं वह हमारा साथ छोड़ देते हैं जब लोगों को लगता है कि हमारा कठिन वक्त है और हमेशा हरि की जरूरत है तब वह हमारा साथ छोड़ देते हैं जब लोगों को लगता है कि हम अकेले हो गए और हमें कोई ना कोई सहारा चाहिए तो वह हमारा साथ छोड़ जाते हैं तू ऐसा ज्यादातर सभी के साथ होता है जब एक परिस्थिति ऐसी आती है तब इंसान अकेला रह जाता है और उसे अकेली ही उन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है और भगवान ने इंसान को इतना मजबूत बनाया है कि वह अकेले रहकर भी उन परिस्थितियों का सामना कर लेता है और उन से निकल भी जाता है लेकिन कई बार ऐसा होता है कि लोग उन परिस्थितियों से घबरा जाते हैं परेशान हो जाते हैं और नेगेटिविटी में इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि वह गलत रास्ता भी चुन लेते हैं फिर भी ज्यादातर इसमें इंसान अपनी परिस्थितियों से सबक लेकर आगे बढ़ जाते हैं और इतना कुछ सीख जाते हैं कि वह अकेले ही उन परिस्थितियों से रूबरू हो जाते हैं उन परिस्थितियों को समझ लेते हैं उन परिस्थितियों से निपट लेते हैं और 1 दिन ऊपर से परिचय पा लेते हैं तो यह सही है कि परिस्थितियां इंसान को अकेले जीना सिखा देती है क्योंकि अक्सर कठिन और विपरीत परिस्थितियों में आपके जो करीब हैं आपकी जो अपने हैं आपकी जो साथी हैं वह आपका साथ छोड़ देते हैं इसलिए इंसान को अकेले ही उन परिस्थितियों से जुड़ना पड़ता है और मुझे लगता है यही सही वक्त होता है अपने आप को निखारने का जब इंसान मजबूत बनता है और उन परिस्थितियों को अच्छे

hamesha aisa hota hai ki jab hamari paristhiyaann viprit hoti hai tab jo log hamare saath hote hain vaah hamara saath chod dete hain jab logo ko lagta hai ki hamara kathin waqt hai aur hamesha hari ki zarurat hai tab vaah hamara saath chod dete hain jab logo ko lagta hai ki hum akele ho gaye aur hamein koi na koi sahara chahiye toh vaah hamara saath chod jaate hain tu aisa jyadatar sabhi ke saath hota hai jab ek paristithi aisi aati hai tab insaan akela reh jata hai aur use akeli hi un paristhitiyon ka samana karna padta hai aur bhagwan ne insaan ko itna majboot banaya hai ki vaah akele rahkar bhi un paristhitiyon ka samana kar leta hai aur un se nikal bhi jata hai lekin kai baar aisa hota hai ki log un paristhitiyon se ghabara jaate hain pareshan ho jaate hain aur negativity mein itni zyada badh jaati hai ki vaah galat rasta bhi chun lete hain phir bhi jyadatar isme insaan apni paristhitiyon se sabak lekar aage badh jaate hain aur itna kuch seekh jaate hain ki vaah akele hi un paristhitiyon se rubaru ho jaate hain un paristhitiyon ko samajh lete hain un paristhitiyon se nipat lete hain aur 1 din upar se parichay paa lete hain toh yah sahi hai ki paristhiyaann insaan ko akele jeena sikha deti hai kyonki aksar kathin aur viprit paristhitiyon mein aapke jo kareeb hain aapki jo apne hain aapki jo sathi hain vaah aapka saath chod dete hain isliye insaan ko akele hi un paristhitiyon se judna padta hai aur mujhe lagta hai yahi sahi waqt hota hai apne aap ko nikharne ka jab insaan majboot baata hai aur un paristhitiyon ko acche

हमेशा ऐसा होता है कि जब हमारी परिस्थितियां विपरीत होती है तब जो लोग हमारे साथ होते हैं वह

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Manish Singh

VOLUNTEER

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लिखे इंसान तुझे फुर्सत में सब पता चल जाता कि आप उसके साथ लाइफ में साथ देने वाला कोई नहीं है तू बिलकुल जो है वह किसी की चाहता है क्योंकि इंसान का नेचर होता है चाहे कोई भी सेट अप करना इंसान सीख जाता है कि किस तरह से सिचुएशन को अडॉप्ट किया जाए कैसे उस में डाला जाए तो चल हार एक माहौल में ढल जाता है लेकिन एक बहुत बड़े इंसान ने कहा है उन्होंने कहा है कि जो अगर लाइफ में आपको बहुत ही जल्दी आगे बढ़ना है तो आप अकेले चले लेकिन अगर आपको लाइफ में ज्यादा दूर तक आगे बढ़ना है तो आप साथ लेकर किसी को चलें

likhe insaan tujhe phursat mein sab pata chal jata ki aap uske saath life mein saath dene vala koi nahi hai tu bilkul jo hai vaah kisi ki chahta hai kyonki insaan ka nature hota hai chahen koi bhi set up karna insaan seekh jata hai ki kis tarah se situation ko adopt kiya jaaye kaise us mein dala jaaye toh chal haar ek maahaul mein dhal jata hai lekin ek bahut bade insaan ne kaha hai unhone kaha hai ki jo agar life mein aapko bahut hi jaldi aage badhana hai toh aap akele chale lekin agar aapko life mein zyada dur tak aage badhana hai toh aap saath lekar kisi ko chalen

लिखे इंसान तुझे फुर्सत में सब पता चल जाता कि आप उसके साथ लाइफ में साथ देने वाला कोई नहीं ह

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