जैन धर्म सारे मानव जाती को बदनाम किया हुआ है जैन स्त्रियाँ जैन मुनि को दूध से नहाती और उसके लिंग के निचे कटोरा रख के पीती है यह महाघोर पाप है ऐसे मुनि को भारत सरकार जेल में क्यों नहीं बंद करता है?...


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Hemant Priyadarshi

Writer | Philospher| Teacher |

1:06
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अजीब बात है इसमें बुरा क्या है ऐसी कोई चर्चा नहीं चर्चा किस ग्रंथ में लिखी हुई है न हिंदू न मुसलमान ईसाई धर्म ग्रंथ में इस बात की कोई चर्चा है ही नहीं और जब चर्चा है ही नहीं तो पाप होता है या पुण्य होता है आप कहां से जान गए आप सबसे बड़ा विद्वान है दुनिया के ऐसा कुछ भी नहीं और वह जो करते हैं वह अपने तरीके से करते हैं वह जो करते हैं उसमें क्या गलत है अगर उसके दूध से गिरकर अगर उसको पी जाती है ठीक है तो श्रद्धा है उसकी या तो समर्थन है उसका इसमें आपको क्या दिक्कत है अभी नहीं सकता इसमें बाप किधर है

ajib baat hai isme bura kya hai aisi koi charcha nahi charcha kis granth me likhi hui hai na hindu na musalman isai dharm granth me is baat ki koi charcha hai hi nahi aur jab charcha hai hi nahi toh paap hota hai ya punya hota hai aap kaha se jaan gaye aap sabse bada vidhwaan hai duniya ke aisa kuch bhi nahi aur vaah jo karte hain vaah apne tarike se karte hain vaah jo karte hain usme kya galat hai agar uske doodh se girkar agar usko p jaati hai theek hai toh shraddha hai uski ya toh samarthan hai uska isme aapko kya dikkat hai abhi nahi sakta isme baap kidhar hai

अजीब बात है इसमें बुरा क्या है ऐसी कोई चर्चा नहीं चर्चा किस ग्रंथ में लिखी हुई है न हिंदू

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका मार्ग चाहिए अब भटक चुके हो आपका मार्ग दूसरे लेकिन भेज चुके हो आप आप बिल्कुल मैं कबीर जी का बिल्कुल भक्ति प्रकार समझा मैं बिल्कुल कबीर जी का भक्त हूं लेकिन तो आप मेरे मंत्री हैं कि आप दुखों में दुखनी में मैं उनसे कह रहा हूं जिन्होंने प्रश्न किया है तो उस भटकाव से निकलने के लिए आपको आप वास्तव में टप्पू को ऑपरेशन हो चुके हो धर्मो जातियों से संविधान से इंस्टिट्यूट भटक चुकी हूं लेकिन मैं आपको एक रास्ता बताऊंगा शानदार रास्ता बताऊंगा आप का रास्ता बहुत अच्छा आप मतलब एक आध्यात्मिक मार्ग में हो हम आपको क्योंकि आपके जैसे लड़के नहीं आया मेरे पास संत रामपाल के भक्तों मेरे पास कोई आए हैं वह भी आया कबीरपंथी भी मेरे पास कोई आए हैं मैं पुस्तक वितरण किया उन्होंने उनके पास बहुत बहुत अच्छा ज्ञान है लेकिन मैंने उनको बताइए तो आप बिल्कुल चैट कर सकते हो मेरे साथ याद कमेंट तो अपने नंबर दे सकते हो मेरे नंबर से 13004 15489 अप व्हाट्सएप चैट कर सकते हो आप अपने प्रश्न पूछ सकता मैं पूरा उत्तर दूंगा मैं सबका उड़ गया जयपुर जमवारामगढ़ गंगा माता का मंदिर जमवारामगढ़ जमवारामगढ़ में गंगा माता की मंदिर है उसमें अध्यापक और बच्चा होगा फिर आप चैट कर सकते बिल्कुल आपके अंदर प्रेम नहीं है आपके अंदर एक जलन एक ईर्ष्या का थोड़ा सा दूर रखा हुआ आपके टॉप मुक्त कैसे हो सकते हो अपने परमात्मा का देखा आपने क्या किया आपने आपका सुख और दुख दोनों को दे रखा है जो हिंदू मुस्लिम इन धर्मों का अपने अपने दुख दे रखा है तो यह जब चाहे जब आपको दुखी कर देते हैं और आप प्रश्न उठा बैठते हो इनके प्रति उनके खिलाफ लाइन के विरुद्ध में कुछ लिखकर दे तू क्यों अपने आपका शुभकामनाएं आपका सुख आपके अंदर है आपको शुभकामनाएं आपको जैन जैन धर्म वालों का अपना सुख दे रखे होगा सारा हेलो जैन धर्म को सुख दे रखे हो आप तो फिर दुखी क्यों हो इन धर्मों की वजह से आप दुखी क्यों हो चिंता नहीं है वास्तव में आप मुक्त नहीं हो तो मैं मैंने नंबर दिया आपको पर कांटेक्ट करें आप बिल्कुल को सही मार्ग बदलने के लिए को प्रकाशित होने के लिए के अंदर शिष्टाचार नहीं आपके अंदर बोलने की होली है आपके अंदर कुछ नहीं है कबीर दास जी को देखा अपने पिताजी के अंदर अद्भुत प्रेम था मित्रों लेकिन आपको तो बोलना नहीं आता है अभी वह बोलना नहीं आता है प्रेम कहां से होगा तो आप मेरे से बात करें धन्यवाद आप बहुत अच्छे का मार्ग अच्छा है कोई लोग होता है जो अध्यात्म मार्ग में रहता है मेरे को पसंद अध्यात्म मार्ग वाले पसंद नंबर अध्यात्म मार्ग में जाते-जाते भी भटक गया बिल्कुल भटक जाते हैं परिसीमन भटके हुए हैं योग करते करते भटक जाते हैं वह उनको मतलब को अंदर कितने नारी होती तब कर होते हैं वह गलत तरीके से जाते हैं गलत तरीके सब जाते हैं जो साधना में सुप्रो भटक जाते हैं तो उनको ऐसे एहसान को हमने दिला किया भटके हुए को ऋषि-मुनियों ने नारदजी ने कइयों ने सीधा किया उनको सब आए या व्हाट्सएप पर चैट करें धन्यवाद

aapka marg chahiye ab bhatak chuke ho aapka marg dusre lekin bhej chuke ho aap aap bilkul main kabir ji ka bilkul bhakti prakar samjha main bilkul kabir ji ka bhakt hoon lekin toh aap mere mantri hain ki aap dukhon me dukhni me main unse keh raha hoon jinhone prashna kiya hai toh us bhatkaav se nikalne ke liye aapko aap vaastav me tappu ko operation ho chuke ho dharmon jaatiyo se samvidhan se institute bhatak chuki hoon lekin main aapko ek rasta bataunga shandar rasta bataunga aap ka rasta bahut accha aap matlab ek aadhyatmik marg me ho hum aapko kyonki aapke jaise ladke nahi aaya mere paas sant rampal ke bhakton mere paas koi aaye hain vaah bhi aaya kabirapanthi bhi mere paas koi aaye hain main pustak vitaran kiya unhone unke paas bahut bahut accha gyaan hai lekin maine unko bataiye toh aap bilkul chat kar sakte ho mere saath yaad comment toh apne number de sakte ho mere number se 13004 15489 up whatsapp chat kar sakte ho aap apne prashna puch sakta main pura uttar dunga main sabka ud gaya jaipur jamavaramgadh ganga mata ka mandir jamavaramgadh jamavaramgadh me ganga mata ki mandir hai usme adhyapak aur baccha hoga phir aap chat kar sakte bilkul aapke andar prem nahi hai aapke andar ek jalan ek irshya ka thoda sa dur rakha hua aapke top mukt kaise ho sakte ho apne paramatma ka dekha aapne kya kiya aapne aapka sukh aur dukh dono ko de rakha hai jo hindu muslim in dharmon ka apne apne dukh de rakha hai toh yah jab chahen jab aapko dukhi kar dete hain aur aap prashna utha baithate ho inke prati unke khilaf line ke viruddh me kuch likhkar de tu kyon apne aapka subhkamnaayain aapka sukh aapke andar hai aapko subhkamnaayain aapko jain jain dharm walon ka apna sukh de rakhe hoga saara hello jain dharm ko sukh de rakhe ho aap toh phir dukhi kyon ho in dharmon ki wajah se aap dukhi kyon ho chinta nahi hai vaastav me aap mukt nahi ho toh main maine number diya aapko par Contact kare aap bilkul ko sahi marg badalne ke liye ko prakashit hone ke liye ke andar shishtachar nahi aapke andar bolne ki holi hai aapke andar kuch nahi hai kabir das ji ko dekha apne pitaji ke andar adbhut prem tha mitron lekin aapko toh bolna nahi aata hai abhi vaah bolna nahi aata hai prem kaha se hoga toh aap mere se baat kare dhanyavad aap bahut acche ka marg accha hai koi log hota hai jo adhyaatm marg me rehta hai mere ko pasand adhyaatm marg waale pasand number adhyaatm marg me jaate jaate bhi bhatak gaya bilkul bhatak jaate hain parisiman bhatke hue hain yog karte karte bhatak jaate hain vaah unko matlab ko andar kitne nari hoti tab kar hote hain vaah galat tarike se jaate hain galat tarike sab jaate hain jo sadhna me supro bhatak jaate hain toh unko aise ehsaan ko humne dila kiya bhatke hue ko rishi muniyon ne naradji ne kiyo ne seedha kiya unko sab aaye ya whatsapp par chat kare dhanyavad

आपका मार्ग चाहिए अब भटक चुके हो आपका मार्ग दूसरे लेकिन भेज चुके हो आप आप बिल्कुल मैं कबीर

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Narendar Gupta

प्राकृतिक योगाथैरिपिस्ट एवं योगा शिक्षक,फीजीयोथैरीपिस्ट

4:25

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Rakesh Tiwari

Life Coach, Management Trainer

3:02
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका पर्सनल जैन धर्म सारी मानव जाति को बदनाम किया हुआ है स्त्रियां जैन मुनि के दूध से नहाते हैं और उसके लिंक नीचे कटोरा रखती हैं यह महाभूत पाप है वास्तव में धर्म के प्रति जो आपकी जागरूकता है आपको उस जागरूकता को बढ़ाने की आवश्यकता है और आपकी जो नजर है उस नजर को भी आप को ठीक करने की आवश्यकता है वास्तव में श्वेतांबर दिगंबर यह दो प्रकार के जैन धर्म प्रचलित है और परिपाटी परंपराएं प्रचलित है और जैन मुनियों में यह माना जाता है कि आकाश ही उनका वस्त्र है आकाश ही उनका वर्णन है इसलिए वह लग नहीं वह अपनी पूरी साधना करते हैं लेकिन नवीनतम मत देखिए नगर देखते हैं तो आपके अंदर वासना है लेकिन आप यह क्यों नहीं देते कि जब ऐसी प्रक्रिया पूरी होती है या की जाती है मात्र स्पंदन या संवेदन उनके अंग में नहीं क्योंकि वह इंद्रजीत कहलाते हैं अपनी इंद्रियों का अपने विचारों पर उनका पूरा संयम और नियंत्रण होता है ऐसे संत ही समाज में बाहर आने के लिए और इस तरह की प्रक्रिया संपन्न करने के लिए पात्र माने जाते हैं आपके उनकी उनकी साधना ठंड में बिना वस्त्र के बिना पूरे कैसे खेलते हैं इतनी गर्मी में उत्पादन की दृष्टि मत देखिए यह वासना अश्लीलता यह छोटी और खुद सोच एक बार स्वामी विवेकानंद एक एरिया में रह रहे थे और वहां कुछ लोगों से ध्वस्त कराने आए यहां बैठे रहती हैं कृपया आप भी अस्त-व्यस्त कर स्वामी विवेकानंद ने कहा मुझे तो आज तक मेरी माताओं और बहनों को यहां आस-पास तो दिखाई नहीं वासना आपके दिमाग में है दोस्त आप स्त्रियों को दे रहे वासना आपकी सोच में है इसलिए इस सोच को सही करने की आवश्यकता है और अपने ज्ञान के स्तर को अपडेट करने का सकता है थैंक यू

aapka personal jain dharm saari manav jati ko badnaam kiya hua hai striyan jain muni ke doodh se nahaate hain aur uske link niche katora rakhti hain yah mahabhut paap hai vaastav me dharm ke prati jo aapki jagrukta hai aapko us jagrukta ko badhane ki avashyakta hai aur aapki jo nazar hai us nazar ko bhi aap ko theek karne ki avashyakta hai vaastav me swetamber digambar yah do prakar ke jain dharm prachalit hai aur paripati paramparayen prachalit hai aur jain muniyon me yah mana jata hai ki akash hi unka vastra hai akash hi unka varnan hai isliye vaah lag nahi vaah apni puri sadhna karte hain lekin navintam mat dekhiye nagar dekhte hain toh aapke andar vasana hai lekin aap yah kyon nahi dete ki jab aisi prakriya puri hoti hai ya ki jaati hai matra spandan ya samvedan unke ang me nahi kyonki vaah indrajit kehlate hain apni indriyon ka apne vicharon par unka pura sanyam aur niyantran hota hai aise sant hi samaj me bahar aane ke liye aur is tarah ki prakriya sampann karne ke liye patra maane jaate hain aapke unki unki sadhna thand me bina vastra ke bina poore kaise khelte hain itni garmi me utpadan ki drishti mat dekhiye yah vasana ashlilata yah choti aur khud soch ek baar swami vivekananda ek area me reh rahe the aur wahan kuch logo se dhwast karane aaye yahan baithe rehti hain kripya aap bhi ast vyast kar swami vivekananda ne kaha mujhe toh aaj tak meri mataon aur bahnon ko yahan aas paas toh dikhai nahi vasana aapke dimag me hai dost aap sthreeyon ko de rahe vasana aapki soch me hai isliye is soch ko sahi karne ki avashyakta hai aur apne gyaan ke sthar ko update karne ka sakta hai thank you

आपका पर्सनल जैन धर्म सारी मानव जाति को बदनाम किया हुआ है स्त्रियां जैन मुनि के दूध से नहात

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S Bajpay

Yoga Expert | Beautician & Gharelu Nuskhe Expert

2:02
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विकी आपका प्रश्न है जैन धर्म सारी मानव जाति को बदनाम किया हुआ है यह निश्चय जैन मुनि को दूध से नापी जाती हैं और उसके लिंग के नीचे की पीछे की महक और पाप है तो मैं आपको बता दूं मैं ब्राह्मण हूं सनातनी हिंदू हूं लेकिन जनों के मोहल्ले में रहता हूं मैंने कई जैन मुनियों को जैन तीर्थंकरों को मैंने देखा है मुल्लों के मोहल्ले में जन मोहल्लों में आते देखा है और मैंने देखा है कि स्त्रियां उन्हें चारों ओर से घेरकर उनकी पूजा करती हूं लेकिन कोई भी जैन मुनि को स्पर्श करती है मैंने दूध से नहलाने जैसी कोई बात या उनके लिंग के नीचे कटोरा रखने ऐसी कोई चीज नहीं देती है जैन मुनि जो है वह अत्यंत सही में होते हैं सत्य अहिंसा अस्तेय अपरिग्रह उनकी जांच प्रतीक है ब्रह्मचर्य का पालन करती हमेशा दूरी बनाए रखती हैं तो आपकी इस बात में मुझे बिल्कुल भी सख्त आपत्ति नहीं होती है आपका यह जो है या अपने पता नहीं कहां देख लिया है मुझे तो मैंने तो आज तक अपने जीवन काल में मैंने कभी भी किसी जननी को इस तरह कारण करते नहीं देखा है मैं कई प्रशासनिक पदों पर रहते हुए मैंने विद्यासागर जी के बहुत से कार्यक्रम करवाए हैं देखें उन ने भाग लिया है मैंने देखा है कि जैन मुनि बड़े तपस्वी होती हैं आपके होते हैं और इस तरह की हरकते नहीं करते पता नहीं आपके कहां से देख लिया कहां से आप कोई प्रश्न मालूम पड़ा आपने तो अपनी आंखों से देखा है तभी इन सब बातों पर विश्वास करें अन्यथा सुन बातों पर विश्वास ना करें

vicky aapka prashna hai jain dharm saari manav jati ko badnaam kiya hua hai yah nishchay jain muni ko doodh se naapi jaati hain aur uske ling ke niche ki peeche ki mahak aur paap hai toh main aapko bata doon main brahman hoon sanatani hindu hoon lekin jano ke mohalle me rehta hoon maine kai jain muniyon ko jain tirthankaron ko maine dekha hai mullon ke mohalle me jan mohallon me aate dekha hai aur maine dekha hai ki striyan unhe charo aur se gherakar unki puja karti hoon lekin koi bhi jain muni ko sparsh karti hai maine doodh se nahlane jaisi koi baat ya unke ling ke niche katora rakhne aisi koi cheez nahi deti hai jain muni jo hai vaah atyant sahi me hote hain satya ahinsa astey aparigrah unki jaanch prateek hai brahmacharya ka palan karti hamesha doori banaye rakhti hain toh aapki is baat me mujhe bilkul bhi sakht apatti nahi hoti hai aapka yah jo hai ya apne pata nahi kaha dekh liya hai mujhe toh maine toh aaj tak apne jeevan kaal me maine kabhi bhi kisi janani ko is tarah karan karte nahi dekha hai main kai prashaasnik padon par rehte hue maine vidyasagar ji ke bahut se karyakram karwaye hain dekhen un ne bhag liya hai maine dekha hai ki jain muni bade tapaswi hoti hain aapke hote hain aur is tarah ki harkate nahi karte pata nahi aapke kaha se dekh liya kaha se aap koi prashna maloom pada aapne toh apni aakhon se dekha hai tabhi in sab baaton par vishwas kare anyatha sun baaton par vishwas na kare

विकी आपका प्रश्न है जैन धर्म सारी मानव जाति को बदनाम किया हुआ है यह निश्चय जैन मुनि को दूध

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

10:00
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जैन धर्म मानव जाति को बदनाम किया हुआ जैन स्त्रियां जैन मुनि को दूध से नहाती औरत लिंग के नीचे कटोरा रखे तेज दिमाग और पापा से मिलने को भारत देखिए ऐसा है कि मैं जान नहीं हूं लेकिन मेरे बहुत से मित्र जैन हैं और बहुत से जैन मंदिरों में 13 स्वरों में और उनके स्थानों को में गया हूं और मैंने कभी भी कहीं भी दो अब बात बता रहे हैं ऐसा कभी भी नहीं सुना हो सकता है कि बहुत से धर्मों के बारे में अलग-अलग क्रांतियां फैलाई जाती जैन धर्म में 301 में दिगंबर जैन वह जो मूर्ति होती है उनके शंकर कि उसे वह कपड़ा नहीं पहना था और उस तर्क को मानने वाले दिगंबर जैन चलाते हैं दूसरे होते हैं श्वेतांबर जैन श्वेतांबर जैन जो है वह मूर्ति को कपड़ा पहना से हैं और आगे करते हैं याने की मूर्ति को सजावट करते हैं और कितने होते तेरापंथी तेरापंथी जैन है वह बहुत ही कठोर साधना उनकी होती है तेरापंथी जयंत साहू कभी भी आपको देखने को भी नहीं मिलते वह जंगलों में विचरण करते हैं और पूजा वगैरह जो उनका कार्य करते हैं इस तरह से जैन धर्म बहुत ही कठोर तप और कठोर अहिंसा अहिंसा प्रेमी है और उनकी जो पूजा विधि है वह सुबह की चंदन की पूजा होती है वह मूर्ति में मूर्ति को चंदन अर्पण करते हैं जब जैन साधु साध्वी जी होते हैं वह दीक्षा लेते हैं और उसके पहले उज्जैन साधु के संसद में रहते हैं और दीक्षा लेने का अगर अपना मन बना लेते हैं और उसके योग्य होते तभी उन्हें दीक्षा दी जाती है और शरीर के बाल होते हैं सिर के एक-एक करके नौ से जाते केश लोचन उसको बोलते हैं बहुत पीड़ा होती है और सहने की शक्ति होना बहुत ही कठिन होता है इसके अलावा उनके संसारी जितने भी संबंध होते हैं वह उन्हें त्याग देते हैं और अपना जो कुछ भी संसारी के रूप में होता है जो भी धन वैभव उत्सव को लुटा देते हैं पार्क में बैठते हैं और जो भी होता है वह चावल के साथ सब कुछ लुटा देते हैं और जब जैन साधु और साध्वी जी पंजाब से उसके बाद उन्हें हर रोज बहुत दूर तक यात्रा पैदल करनी पड़ती है और पैर में कुछ दिन पहनना नहीं रहता से देखकर सफेद कपड़ा हो धारण किए होते और मुख पर वो बंद किए जाते हैं मुखर बंद करते हैं इस तरह से बहुत ही कठिन उनकी जिंदगी होती है वह कोई भी भौतिक चीज वस्तु का उपयोग नहीं करते वह भिक्षा मांगकर ही खाते हैं उसे वह लोग गोचरी कहते हैं देरासर में विराजमान होते हैं जानता हूं जैसा भी ले तो गुजरी के लिए जहां जैन परिवार रहते हैं वहां पर वह लकड़ी का कमंडल होता है उसमें उनको जो कुछ भी गोचरी दी जाती है पद मिला क्यों इसकी पत्र में दी जाती और वापस गोचरी अपने थाना प्यार दिखाते तेरापंथी जैन के जो संतु होते हैं वह तो सिर्फ हाथ दोनों बांध दें और उसमें दो हाथ को बढ़ने पर अकेली में जितना आता है सिर्फ उतना ही वह खाते हैं इसके अलावा गर्म पानी ही पीते हैं और जो पानी जो होता है वह एकदम जंतु मुक्त होता है इसके अलावा और परिक्रमण और बहुत उनकी कठोर साधना होती है और उनके साधु साध्वी जी को निभाने का जो जैन संप्रदाय के लोग वही सब तारीफ करते हैं और वही बात जो है वह देरासर का सेट कल्याणजी-आनंदजी आनंदजी कल्याणजी पेढ़ी है वह है और दूसरी ऐसी बहुत सी संस्थाएं हैं वह करती हैं जैन मंदिर असर जोड़ते हैं वहां पर आपको टोंक अंदर से नाश्ता खाना और रात का खाना भी सूर्यास्त के पहले मिल जाता है और उसका नौकर होता है मक्कार को देना पड़ता है जाने की छोटी रकम जी की बोली लगती है आरती में दरअसल में एक मन कब विकास किया होता उन्हें आरती करने का लाभ मिलता है रात को देरासर में भावना होती है उसमें वह भजन गाते हैं इससे जैन धर्म जो है वह बहुत ही अलग तरह का धर्म है उसमें अहिंसा त्याग और अपने शरीर को जितना हो सके कष्ट देने की बात होती है और कष्ट को हंसते हुए सहना रहता है इसके अलावा जो उनकी समाधि लेते हैं जो जाने की समाधि अवस्था में बैठते हैं रिजल्ट साधु साध्वी जी और प्राण त्याग देते हैं तो बहुत ही उम्दा तरीके से उठना चाहते हैं और उनको कहते हैं कि सीज गया यानी कि मतलब बच्चों को पा लिया उन्होंने और उनकी पालकी यात्रा भव्य निकलती है जो उनके स्थान पर होते हैं पंजाबी राज पेंशन कहते हैं उसके पहले वह 28 तक मांस खाना और बहुत ही कठिन हो सिर्फ गर्म पानी पीकर ऊपर कोई 8 दिन का कोई 15 दिन का कोई एक महीने का कोई डेढ़ महीना कब बहुत ही कठिन तपस्या जैन लोग करते हैं उज्जैन के अलावा भी दूसरे लिए लोग कर सकते हैं लेकिन उन्हें जैन देरासर में जो धर्म गुरु या साधु साध्वी जी होते हैं उनके साथ उनको मिलना पड़ता है और उनके साथ उनको लेकर संसद में जैन धर्म की बातें हैं वह बहुत ही सुंदर हैं और त्याग वाली हैं जैन धर्म काफी अलग सिद्धांतों पर है और हिंदुओं में से ही वह निकले हैं वह कोई भी पंखा या एसपी या कंप्यूटर जब यहां तक कि लाइट बिजली का दुरुपयोग रोकने में मंदिरों में देरासर में नहीं करते वहां पर सिर्फ दिया जलता है और जितने भी मंदिर हैं बहुत ही भव्य है जैन धर्म बहुत ही कठिन है धर्म है पढ़ने वाले बहुत ही कठिन ता का सामना करते हुए अपने दर्द को पालते हैं लेकिन आपने जिस बात का उल्लेख किया है वह मैंने अभी तक कहीं देखा नहीं है और कभी सुना दे नहीं है इसलिए आप जनता से तरफ गया और फिर बाद में आपको मालूम पड़ेगा

jain dharm manav jati ko badnaam kiya hua jain striyan jain muni ko doodh se nahati aurat ling ke niche katora rakhe tez dimag aur papa se milne ko bharat dekhiye aisa hai ki main jaan nahi hoon lekin mere bahut se mitra jain hain aur bahut se jain mandiro me 13 swaron me aur unke sthano ko me gaya hoon aur maine kabhi bhi kahin bhi do ab baat bata rahe hain aisa kabhi bhi nahi suna ho sakta hai ki bahut se dharmon ke bare me alag alag krantiyan failai jaati jain dharm me 301 me digambar jain vaah jo murti hoti hai unke shankar ki use vaah kapda nahi pehna tha aur us tark ko manne waale digambar jain chalte hain dusre hote hain swetamber jain swetamber jain jo hai vaah murti ko kapda pehna se hain aur aage karte hain yane ki murti ko sajawat karte hain aur kitne hote terapanthi terapanthi jain hai vaah bahut hi kathor sadhna unki hoti hai terapanthi jayant sahu kabhi bhi aapko dekhne ko bhi nahi milte vaah jungalon me vichran karte hain aur puja vagera jo unka karya karte hain is tarah se jain dharm bahut hi kathor tap aur kathor ahinsa ahinsa premi hai aur unki jo puja vidhi hai vaah subah ki chandan ki puja hoti hai vaah murti me murti ko chandan arpan karte hain jab jain sadhu sadhvi ji hote hain vaah diksha lete hain aur uske pehle ujjain sadhu ke sansad me rehte hain aur diksha lene ka agar apna man bana lete hain aur uske yogya hote tabhi unhe diksha di jaati hai aur sharir ke baal hote hain sir ke ek ek karke nau se jaate kesh lochan usko bolte hain bahut peeda hoti hai aur sahane ki shakti hona bahut hi kathin hota hai iske alava unke SANSARI jitne bhi sambandh hote hain vaah unhe tyag dete hain aur apna jo kuch bhi SANSARI ke roop me hota hai jo bhi dhan vaibhav utsav ko loota dete hain park me baithate hain aur jo bhi hota hai vaah chawal ke saath sab kuch loota dete hain aur jab jain sadhu aur sadhvi ji punjab se uske baad unhe har roj bahut dur tak yatra paidal karni padti hai aur pair me kuch din pahanna nahi rehta se dekhkar safed kapda ho dharan kiye hote aur mukh par vo band kiye jaate hain mukhar band karte hain is tarah se bahut hi kathin unki zindagi hoti hai vaah koi bhi bhautik cheez vastu ka upyog nahi karte vaah bhiksha mangakar hi khate hain use vaah log gochri kehte hain derasar me viraajamaan hote hain jaanta hoon jaisa bhi le toh gujari ke liye jaha jain parivar rehte hain wahan par vaah lakdi ka kamandal hota hai usme unko jo kuch bhi gochri di jaati hai pad mila kyon iski patra me di jaati aur wapas gochri apne thana pyar dikhate terapanthi jain ke jo santu hote hain vaah toh sirf hath dono bandh de aur usme do hath ko badhne par akeli me jitna aata hai sirf utana hi vaah khate hain iske alava garam paani hi peete hain aur jo paani jo hota hai vaah ekdam jantu mukt hota hai iske alava aur parikraman aur bahut unki kathor sadhna hoti hai aur unke sadhu sadhvi ji ko nibhane ka jo jain sampraday ke log wahi sab tareef karte hain aur wahi baat jo hai vaah derasar ka set kalyanji anandaji anandaji kalyanji pedhi hai vaah hai aur dusri aisi bahut si sansthayen hain vaah karti hain jain mandir asar jodte hain wahan par aapko tonk andar se nashta khana aur raat ka khana bhi suryaast ke pehle mil jata hai aur uska naukar hota hai makkar ko dena padta hai jaane ki choti rakam ji ki boli lagti hai aarti me darasal me ek man kab vikas kiya hota unhe aarti karne ka labh milta hai raat ko derasar me bhavna hoti hai usme vaah bhajan gaate hain isse jain dharm jo hai vaah bahut hi alag tarah ka dharm hai usme ahinsa tyag aur apne sharir ko jitna ho sake kasht dene ki baat hoti hai aur kasht ko hansate hue sahna rehta hai iske alava jo unki samadhi lete hain jo jaane ki samadhi avastha me baithate hain result sadhu sadhvi ji aur praan tyag dete hain toh bahut hi umda tarike se uthna chahte hain aur unko kehte hain ki seas gaya yani ki matlab baccho ko paa liya unhone aur unki paalakee yatra bhavya nikalti hai jo unke sthan par hote hain punjabi raj pension kehte hain uske pehle vaah 28 tak maas khana aur bahut hi kathin ho sirf garam paani peekar upar koi 8 din ka koi 15 din ka koi ek mahine ka koi dedh mahina kab bahut hi kathin tapasya jain log karte hain ujjain ke alava bhi dusre liye log kar sakte hain lekin unhe jain derasar me jo dharm guru ya sadhu sadhvi ji hote hain unke saath unko milna padta hai aur unke saath unko lekar sansad me jain dharm ki batein hain vaah bahut hi sundar hain aur tyag wali hain jain dharm kaafi alag siddhanto par hai aur hinduon me se hi vaah nikle hain vaah koi bhi pankha ya SP ya computer jab yahan tak ki light bijli ka durupyog rokne me mandiro me derasar me nahi karte wahan par sirf diya jalta hai aur jitne bhi mandir hain bahut hi bhavya hai jain dharm bahut hi kathin hai dharm hai padhne waale bahut hi kathin ta ka samana karte hue apne dard ko palate hain lekin aapne jis baat ka ullekh kiya hai vaah maine abhi tak kahin dekha nahi hai aur kabhi suna de nahi hai isliye aap janta se taraf gaya aur phir baad me aapko maloom padega

जैन धर्म मानव जाति को बदनाम किया हुआ जैन स्त्रियां जैन मुनि को दूध से नहाती औरत लिंग के नी

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santosh kumar jain

Motivational Speaker

1:10

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ऐसा नहीं है यह झूठा रेप किया जाता है या अपने वास्तविक स्थिति में देखा नहीं है ऐसा कभी कुछ नहीं होता है यह एक असत्य प्रचार है मैंने अपनी पूरी आयु में ऐसा कहीं नहीं देखा यह सरासर झूठ है असत्य है कोई तर्क नहीं है इस बात में और रही बात दूसरी तो जिस जगह यह कार्य होता है कैसे शिवलिंग पर दूध आदि डालना तो यह जैन संस्कृति से रिलेटेड नहीं है इसलिए जिसने भी आपको कहा है क्या आपने कहीं पढ़ा है वह असत्य है ब्रह्म बस चलावे बाद या दुर्भावना वास डाला गया है

aisa nahi hai yah jhutha rape kiya jata hai ya apne vastavik sthiti me dekha nahi hai aisa kabhi kuch nahi hota hai yah ek asatya prachar hai maine apni puri aayu me aisa kahin nahi dekha yah sarasar jhuth hai asatya hai koi tark nahi hai is baat me aur rahi baat dusri toh jis jagah yah karya hota hai kaise shivling par doodh aadi dalna toh yah jain sanskriti se related nahi hai isliye jisne bhi aapko kaha hai kya aapne kahin padha hai vaah asatya hai Brahma bus chalave baad ya durbhavana was dala gaya hai

ऐसा नहीं है यह झूठा रेप किया जाता है या अपने वास्तविक स्थिति में देखा नहीं है ऐसा कभी कुछ

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जब तक हम लोग ही विरोध नहीं कर सकता उनका को सरकार का विरोध करेगा पूनम विश्वासों के खिलाफ तभी सरकार अपना कदम उठाएगी वरना करम देखते रहे तो सरकार भी देखते रहे

jab tak hum log hi virodh nahi kar sakta unka ko sarkar ka virodh karega poonam vishwason ke khilaf tabhi sarkar apna kadam uthayegee varna karam dekhte rahe toh sarkar bhi dekhte rahe

जब तक हम लोग ही विरोध नहीं कर सकता उनका को सरकार का विरोध करेगा पूनम विश्वासों के खिलाफ तभ

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