बकरीद त्योहार का महत्व क्या है?...


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Shubham

Software Engineer in IBM

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बकरी त्यौहार की बात की जाए तो सबसे पहले तो यह बताऊंगा कि मुसलमानों का सबसे प्रमुख त्योहार बकरीद माना जाता है और इसके महत्व की बात की जाए तो काफी महत्व लिखिए मुसलमानों में यह कहा गया है कि यह व्यक्ति को हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए रेडी रहना चाहिए और वह हमेशा दूसरों की मदद करें दिल को बहुत ज्यादा जरूरत है मदद की इसलिए उनको उनके यह बोला गया है कि उनको अपनी कोई भी मनपसंद चीज जो वह बहुत अच्छा पसंद करते हैं उसकी कुर्बानी देनी चाहिए कुर्बानी मैसेज कि वह हमेशा रेडी रहती थी हमने भी कुर्बानी देने के लिए जब भी किसी व्यक्ति को जरूरत हो या फिर हमेशा रेडी रहे दूसरों की हेल्प करने के लिए इसलिए उनको किसी भी अपनी पसंदीदा चीज की कुर्बानी देनी पड़ती है और उनके यह कहा गया कि जिस चीज की भी वह कुर्बानी देनी है उसके तीन ऐसे होंगे वह अपने लिए रखेंगे और बाकी के जो है वह आवाज में बाढ़ दैनिक दिन को बहुत ज्यादा जरूरत है जैसे जो लोग गरीब होते हैं जो जिसकी भी कुर्बानी दी जाएगी अगर बकरी की कुर्बानी दी जाती है तो उसके तीन इससे उन्हें एक मूवीस अपने पास रखते हैं और बाकी के दो हिस्से को समाज में बाट देते हैं जिनको बहुत जरूरत होती है जिनको नहीं होती है तो वही जो चीजें हैं वह अच्छाई को दर्शाती है और ऐसा उनके समाज में बोला गया है कि अगर व्यक्ति हमेशा दूसरों की हेल्प करने के लिए रेडी रहना और अपनी चीजों को अगर वह कुर्बान करेगा दूसरों की मदद के लिए तो हमेशा बहुत अच्छी चीज़ होगी यह और हमेशा अल्लाह भी इन सब चीजों से खुश रहेंगे अगर व्यक्ति दूसरों की मदद करता है तो तो यही चीज है और यह अच्छा नहीं आया जो उनके समाज में बताइए और यह भी तू आशीष जी आपकी का महत्व और काफी अच्छे से मनाया जाता है

bakri tyohar ki baat ki jaaye toh sabse pehle toh yah bataunga ki musalmanon ka sabse pramukh tyohar bakri eid mana jata hai aur iske mahatva ki baat ki jaaye toh kaafi mahatva likhiye musalmanon mein yah kaha gaya hai ki yah vyakti ko hamesha dusro ki madad karne ke liye ready rehna chahiye aur vaah hamesha dusro ki madad kare dil ko bahut zyada zarurat hai madad ki isliye unko unke yah bola gaya hai ki unko apni koi bhi manpasand cheez jo vaah bahut accha pasand karte hain uski kurbani deni chahiye kurbani massage ki vaah hamesha ready rehti thi humne bhi kurbani dene ke liye jab bhi kisi vyakti ko zarurat ho ya phir hamesha ready rahe dusro ki help karne ke liye isliye unko kisi bhi apni pasandida cheez ki kurbani deni padti hai aur unke yah kaha gaya ki jis cheez ki bhi vaah kurbani deni hai uske teen aise honge vaah apne liye rakhenge aur baki ke jo hai vaah awaaz mein baadh dainik din ko bahut zyada zarurat hai jaise jo log garib hote hain jo jiski bhi kurbani di jayegi agar bakri ki kurbani di jaati hai toh uske teen isse unhe ek Movies apne paas rakhte hain aur baki ke do hisse ko samaj mein Baat dete hain jinako bahut zarurat hoti hai jinako nahi hoti hai toh wahi jo cheezen hain vaah acchai ko darshatee hai aur aisa unke samaj mein bola gaya hai ki agar vyakti hamesha dusro ki help karne ke liye ready rehna aur apni chijon ko agar vaah kurban karega dusro ki madad ke liye toh hamesha bahut achi cheez hogi yah aur hamesha allah bhi in sab chijon se khush rahenge agar vyakti dusro ki madad karta hai toh toh yahi cheez hai aur yah accha nahi aaya jo unke samaj mein bataye aur yah bhi tu aashish ji aapki ka mahatva aur kaafi acche se manaya jata hai

बकरी त्यौहार की बात की जाए तो सबसे पहले तो यह बताऊंगा कि मुसलमानों का सबसे प्रमुख त्योहार

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Swati

सुनो ..सुनाओ..सीखो!

1:25

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मोहित जी जो बकरीद है वह मुस्लिमों का बहुत ही पेमेंट के हाल है और पीछे महत्व यह है कि देखिए इस दिन किसी जानवर की भेड़ बकरी ऊंट गायक किसी भी जानवर की बलि चढ़ाई जाती है मुस्लिमों के द्वारा मान्यता यह है कि हर कोई अमीर नहीं होता गरीब लोग भी होते हैं तो उसका महत्व यह कि जो भी बकरी चराई बलि चढ़ाई जाएगी उसमें से कुछ पोषण Flash का गरीब होते रहेगा कुछ आने की Wanted उसके बाद बाकी का Wanted रिलेटिव के बीच में बांटा जाएगा क्योंकि यह खुशी का और उल्लास बनाने का त्यौहार है और बचाव अंदर खुद की उसके लिए सेल्फी उसके लिए इस्तेमाल किया जाएगा इसके पीछे नहीं कर सकते जो लोग इतने अमीर नहीं है उन तक भी खाना पहुंचे उन तक भी सब चीज पहुंचे इसलिए जो भी मुस्लिम जिसके पास 90 ग्राम के बराबर 90 ग्राम सोने के बराबर मैं उनके पास इतना सोना है उतने पैसे हैं बोलो यह बलि देते हैं यह बलि चढ़ाते हैं तो यह इस त्यौहार का महत्व है कि सब के पास जो लोग गरीब है उनके पास भी और जो लोग नहीं और किसी के पास खाने को नहीं है उनके लिए भी तो हर महत्व रखते हैं कि जो अमीर लोगों को उनके बीच में बाटी अपने पास उनके पास जो कुछ भी है

mohit ji jo bakri eid hai vaah muslimo ka bahut hi payment ke haal hai aur peeche mahatva yah hai ki dekhiye is din kisi janwar ki bhed bakri unth gayak kisi bhi janwar ki bali chadhai jaati hai muslimo ke dwara manyata yah hai ki har koi amir nahi hota garib log bhi hote hain toh uska mahatva yah ki jo bhi bakri charai bali chadhai jayegi usme se kuch poshan Flash ka garib hote rahega kuch aane ki Wanted uske baad baki ka Wanted relative ke beech mein baata jaega kyonki yah khushi ka aur ullas banane ka tyohar hai aur bachav andar khud ki uske liye selfie uske liye istemal kiya jaega iske peeche nahi kar sakte jo log itne amir nahi hai un tak bhi khana pahuche un tak bhi sab cheez pahuche isliye jo bhi muslim jiske paas 90 gram ke barabar 90 gram sone ke barabar main unke paas itna sona hai utne paise hain bolo yah bali dete hain yah bali chadhate hain toh yah is tyohar ka mahatva hai ki sab ke paas jo log garib hai unke paas bhi aur jo log nahi aur kisi ke paas khane ko nahi hai unke liye bhi toh har mahatva rakhte hain ki jo amir logo ko unke beech mein bati apne paas unke paas jo kuch bhi hai

मोहित जी जो बकरीद है वह मुस्लिमों का बहुत ही पेमेंट के हाल है और पीछे महत्व यह है कि देखिए

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Jyoti Mehta

Ex-History Teacher

1:45
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इस बार 22 अगस्त को बकरा ईद मनाई जाएगी और बकरा ईद रमजान के पवित्र महीने के 70 दिन के बाद आता है करीब-करीब और मुस्लिम समुदाय में दो तोहार बहुत धूमधाम से मनाए जाते हैं एक बकरा ईद और एक मीठी मीठी सेवइयां वगैरा बनती है उसे भी ठीक कहते हैं और बकरा ईद पर बकरे की बलि दी जाती है इसे कुर्बानी का त्योहार भी कहा जाता है इसका महत्व इसलिए है क्योंकि माना जाता है कि मुस्लिम समुदाय उन्होंने खुदा के आदेश पर अपने प्यारे बेटे इस्माइल की बलि देने की तैयारी कर ली थी लेकिन अल्लाह ने उनकी कुर्बानी की मंशा देखते हुए उसकी जगह बकरी को खड़ा कर दिया था और उनका बेटा जीवित रह गया था उसके बाद से ही मुस्लिम समुदाय में भी चले जो भी समर्थ लोग हैं जो भी ऐसा कर सकते हैं अपने सामर्थ्य के अनुसार उन्हें सभी को देनी चाहिए ऐसा उनके समुदाय में माना जाता है और उसका महत्व यह भी है क्योंकि बकरे की बलि देने के बाद उसका पोस्ट होता है उसे तीन भागों में बांटा जाता है गरीबों के लिए अलग निकाला जाता है उसके बाद नाते रिश्तेदारों के लिए अलग रखा जाता है और एक भाग अल्लाह को भेंट किया जाता है और क्यों की कुर्बानी का मुस्लिम समुदाय के लिए बहुत महत्व रखता है

is baar 22 august ko bakara eid manai jayegi aur bakara eid ramjaan ke pavitra mahine ke 70 din ke baad aata hai kareeb kareeb aur muslim samuday mein do tohar bahut dhumadham se manaye jaate hain ek bakara eid aur ek mithi mithi sevaiyan vagera banti hai use bhi theek kehte hain aur bakara eid par bakre ki bali di jaati hai ise kurbani ka tyohar bhi kaha jata hai iska mahatva isliye hai kyonki mana jata hai ki muslim samuday unhone khuda ke aadesh par apne pyare bete ismail ki bali dene ki taiyari kar li thi lekin allah ne unki kurbani ki mansha dekhte hue uski jagah bakri ko khada kar diya tha aur unka beta jeevit reh gaya tha uske baad se hi muslim samuday mein bhi chale jo bhi samarth log hain jo bhi aisa kar sakte hain apne samarthya ke anusaar unhe sabhi ko deni chahiye aisa unke samuday mein mana jata hai aur uska mahatva yah bhi hai kyonki bakre ki bali dene ke baad uska post hota hai use teen bhaagon mein baata jata hai garibon ke liye alag nikaala jata hai uske baad naate rishtedaron ke liye alag rakha jata hai aur ek bhag allah ko bhent kiya jata hai aur kyon ki kurbani ka muslim samuday ke liye bahut mahatva rakhta hai

इस बार 22 अगस्त को बकरा ईद मनाई जाएगी और बकरा ईद रमजान के पवित्र महीने के 70 दिन के बाद आ

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