बकरीद पर जानवरों की कुर्बानी क्यों दी जाती है?...


user

Vikas Singh

Political Analyst

4:31
Play

Likes  392  Dislikes    views  7641
WhatsApp_icon
4 जवाब
qIcon
ask
ऐसे और सवाल
Loading...
Loading...
user

Sachin Bharadwaj

Faculty - Mathematics

0:29
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

विकी बकरीद पर जानवरों की कुर्बानी दी जाती है उसको मुझे लगता है कोई मुस्लिम स्कॉलर बहुत अच्छे से बता सकता है लेकिन पर्सनली मुझे ऐसा लगता है कि कोई दो बकरी ईद है उसको कुर्बानी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए क्योंकि यह जो त्यौहार है वह खुशियों का त्योहार है खुशियों के त्योहार पर किसी भी जानवर जो अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर सकता उसकी हत्या करना कहीं ना कहीं बहुत बड़ी हिंसा है

vicky Bakrid par jaanvaro ki kurbani di jaati hai usko mujhe lagta hai koi muslim scholar bahut acche se bata sakta hai lekin personally mujhe aisa lagta hai ki koi do bakri eid hai usko kurbani bilkul nahi honi chahiye kyonki yah jo tyohar hai vaah khushiyon ka tyohar hai khushiyon ke tyohar par kisi bhi janwar jo apni bhavnao ko vyakt nahi kar sakta uski hatya karna kahin na kahin bahut badi hinsa hai

विकी बकरीद पर जानवरों की कुर्बानी दी जाती है उसको मुझे लगता है कोई मुस्लिम स्कॉलर बहुत अच्

Romanized Version
Likes    Dislikes    views  139
WhatsApp_icon
play
user

Swati

सुनो ..सुनाओ..सीखो!

1:24

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अरविंद जी की पुरानी कहानी है लोककथा है उसके मुताबिक एक प्रॉफिट इब्राहिम हुआ करते उनके सपने में अल्लाह बार-बार आ रहे थे और उन्हें कह रहे थे कि तुम जो तुम्हारी सबसे प्रिय सबसे महत्वपूर्ण चीज है उसकी बलि दो उन्होंने अपनी वाइफ को इस बारे में बताया और मैंने डिसाइड किया कि उनकी सबसे प्रिय चीज जो है वह उनका बेटा है तो वह अपने बेटे की बलि देने को तैयार हो गई भगवान के लिए अल्लाह के लिए तुझे अपने बेटे की बलि दे रहे थे तभी भगवान ने उस बच्चे की जगह पर एक भीड़ को रख दिया एक शिव को रख दिया और वहां से यह मानता चली की और भगवान ने उन्हें कहा लालू ने कहा कि जरूरी नहीं कि तुम अपने बेटे की बलि 2 पर तुम फ्री किस चीजों की बलि प्रेशर को जैसे कि भेड़-बकरी गाय-भैंस तेरे किसी और वहां से माने तो चली आ रही है कि बकरी ईद वाले दिन जानवर की बलि दी जाए और मैंने तो यह भी है कि जो उसे बलि दी जा रही है उसका जो क्लास को जो मां से वह गरीबों के बीच में बांट दिया जाएगा यह दिखाने के लिए कि जो लोग सपोर्ट नहीं करता तुझे लोगों के पास पैसे नहीं है जो लोग गरीब है वह भी और जिनके पास पैसे हैं वह उन तक मतलब पहुंचा सके सारे खाने पीने की जगह दिखाने के लिए कि हर कोई बराबर है और खुशियां मनाने पर बैठकर खाने का त्यौहार है

arvind ji ki purani kahani hai lokakatha hai uske mutabik ek profit ibrahim hua karte unke sapne mein allah baar baar aa rahe the aur unhe keh rahe the ki tum jo tumhari sabse priya sabse mahatvapurna cheez hai uski bali do unhone apni wife ko is bare mein bataya aur maine decide kiya ki unki sabse priya cheez jo hai vaah unka beta hai toh vaah apne bete ki bali dene ko taiyar ho gayi bhagwan ke liye allah ke liye tujhe apne bete ki bali de rahe the tabhi bhagwan ne us bacche ki jagah par ek bheed ko rakh diya ek shiv ko rakh diya aur wahan se yah manata chali ki aur bhagwan ne unhe kaha lalu ne kaha ki zaroori nahi ki tum apne bete ki bali 2 par tum free kis chijon ki bali pressure ko jaise ki bhed bakri gaay bhains tere kisi aur wahan se maane toh chali aa rahi hai ki bakri eid waale din janwar ki bali di jaaye aur maine toh yah bhi hai ki jo use bali di ja rahi hai uska jo class ko jo maa se vaah garibon ke beech mein baant diya jaega yah dikhane ke liye ki jo log support nahi karta tujhe logon ke paas paise nahi hai jo log garib hai vaah bhi aur jinke paas paise hain vaah un tak matlab pahuncha sake saare khane peene ki jagah dikhane ke liye ki har koi barabar hai aur khushiyan manane par baithkar khane ka tyohar hai

अरविंद जी की पुरानी कहानी है लोककथा है उसके मुताबिक एक प्रॉफिट इब्राहिम हुआ करते उनके सपने

Romanized Version
Likes    Dislikes    views  161
WhatsApp_icon
user

Jyoti Mehta

Ex-History Teacher

2:00
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बकरा ईद पर जानवरों की कुर्बानी क्यों दी जाती है पुरानी मान्यताओं के हिसाब से माना जाता है कि एक हजरत इब्राहिम हुआ करते थे और उन्हें 90 वर्ष की उम्र तक कोई औलाद नहीं हुई थी उन्होंने जब आदत थी तो उन्हें एक बेटा पैदा हुआ उसके बाद उन्हें अपने में कुर्बानी के लिए कहा गया उन्होंने ऊंट की कुर्बानी दी लेकिन उन्हें फिर सपना है उन्होंने एक एक करके सभी तरीके जानवरों की कुर्बानी दे दी लेकिन उन्हें फिर भी सपना आता रहा कि तुम अपनी प्रिय आखिरकार उन्होंने अपने बेटे की कुर्बानी देने का सोचा और अपनी पत्नी से कहा कि बेटी को नहला धुला कर तैयार कर दो और वह से कुर्बानी के लिए ले जाने के रास्ते में उन्हें रोका भी सही कि तुम अपने बेटे की कुर्बानी मत दो जो तुम्हें बहुत प्रिय है इसकी जगह तुम किसी भी और की कुर्बानी दे दो लेकिन उन्होंने उसकी बात नहीं मानी और अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर अपने बेटे की कुर्बानी के लिए तैयार हो गया और फिर उन्होंने अपने हिसाब से अपने बेटे की कुर्बानी थी लेकिन जब उन्होंने आंखें खोली तो उन्होंने देखा कि उनका बीच क्योंकि खुदा ने उसकी जगह एक बकरी को रख दिया था और उनके बेटे उनका बेटा सही सलामत था क्योंकि खुदा उनकी कुर्बानी से खुश होकर उसी के बाद से यह चलन शुरू हुआ और बकरा ईद पर बकरे की कुर्बानी दी जाने लगी मुस्लिम समुदाय में ईद और बकरा ईद दोनों ही बहुत धूमधाम से मनाए जाते हैं जिस तरह से हम हमारे हिंदुओं में दीपावली और होली मनाए जाते हैं उसी तरह से

bakara eid par jaanvaro ki kurbani kyon di jaati hai purani manyataon ke hisab se mana jata hai ki ek hazrat ibrahim hua karte the aur unhe 90 varsh ki umr tak koi aulad nahi hui thi unhone jab aadat thi toh unhe ek beta paida hua uske baad unhe apne mein kurbani ke liye kaha gaya unhone unth ki kurbani di lekin unhe phir sapna hai unhone ek ek karke sabhi tarike jaanvaro ki kurbani de di lekin unhe phir bhi sapna aata raha ki tum apni priya aakhirkaar unhone apne bete ki kurbani dene ka socha aur apni patni se kaha ki beti ko nahala dhula kar taiyar kar do aur vaah se kurbani ke liye le jaane ke raste mein unhe roka bhi sahi ki tum apne bete ki kurbani mat do jo tumhe bahut priya hai iski jagah tum kisi bhi aur ki kurbani de do lekin unhone uski baat nahi maani aur apni aakhon par patti bandhkar apne bete ki kurbani ke liye taiyar ho gaya aur phir unhone apne hisab se apne bete ki kurbani thi lekin jab unhone aankhen kholee toh unhone dekha ki unka beech kyonki khuda ne uski jagah ek bakri ko rakh diya tha aur unke bete unka beta sahi salamat tha kyonki khuda unki kurbani se khush hokar usi ke baad se yah chalan shuru hua aur bakara eid par bakre ki kurbani di jaane lagi muslim samuday mein eid aur bakara eid dono hi bahut dhumadham se manaye jaate hain jis tarah se hum hamare hinduon mein deepawali aur holi manaye jaate hain usi tarah se

बकरा ईद पर जानवरों की कुर्बानी क्यों दी जाती है पुरानी मान्यताओं के हिसाब से माना जाता है

Romanized Version
Likes    Dislikes    views  169
WhatsApp_icon
qIcon
ask

This Question Also Answers:

QuestionsProfiles

Vokal App bridges the knowledge gap in India in Indian languages by getting the best minds to answer questions of the common man. The Vokal App is available in 11 Indian languages. Users ask questions on 100s of topics related to love, life, career, politics, religion, sports, personal care etc. We have 1000s of experts from different walks of life answering questions on the Vokal App. People can also ask questions directly to experts apart from posting a question to the entire answering community. If you are an expert or are great at something, we invite you to join this knowledge sharing revolution and help India grow. Download the Vokal App!