जब लोग आपके बारे में बुरा कहते हैं तो आपकी प्रतिक्रिया क्या होती है?...


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जी राधे श्याम राधे कृष्णा मैं आपके संत श्री विमल आचार्य जी जम्मू सर ओर से आपका प्रश्न है जब लोग आपके बारे में बुरा कहते हैं तो आपकी प्रतिक्रिया क्या होनी चाहिए बहुत अच्छा प्रश्न किया है जिन्होंने भी किया है बहुत अच्छा प्रश्न है क्योंकि सब बुराइयां और सब साइयां इतने से प्रसन्न में जुड़ी हुई है पहले बात की कोई आपके बारे में बुरा क्यों सोचेगा और उसका कारण क्या है बुरा सोचने का सबसे बड़ा कारण होता है द्वेष नफरत द्वेष जो तिगरिना पैदा करती है वर्गिना से क्या होता है कि इंसान 17 हो जाता है जल कीजिए दिनेश कैसे उत्पन्न होती है यह मेरे से ज्यादा पड़ गया मेरे से ज्यादा नंबर ले लिए इसने मेरे से ज्यादा अच्छी नौकरी मिलेगी है इसने मेरे से अच्छा घर बना लिया है इसकी पत्नी मेरे से अच्छी सुंदर है इसके चार बेटे हैं वह सभी काम में लगे हैं मेरा बेटा एक भी नहीं लगाया है यह अच्छे-अच्छे बस्तर डालता है इनके पास इतना सुनना है इसके पास इतना पैसा है पूजा ऐसी बात होती है तो देश हो जाता है और जो इंसान की प्रतिक्रिया होती है इंसान अच्छा भी हो उसे बुरा समझा जाता है जैसे श्री रामचंद्र भगवान और रावण श्री राम भगवान सबको मालूम है कि उसके कौन में अच्छे से श्रीराम के मन में कोई कोड नहीं थी पर रावण फिर भी राम को बुरा कहता था और उस रावण ने माता जानकी सीता को हरण कर यानी कि रावण का सोचना श्री राम के प्रति पुरा था और रावण कहता था कि मैं राम से बड़ा हूं जनक द्वेष हो गया उस दिनेश मात्र से पाप हो गया तू जब हमारे विषय में कोई हमको बुरा कहता है कोई तो हमारी प्रतिक्रिया क्या होनी चाहिए या क्या होती आपकी प्रतिक्रिया क्या होती है कौन सी कौन मेरी प्रतिज्ञा अगर मैं आपको सुना हूं कि अगर जब कोई मुझे कोई बुरा कहता है मुझे मेरी कोई नया करते और बोलो निंजा पर करते हैं अगर हमारे एक लाख हमारी संगत है तो उन्हें कम से कम जो संगत अगर हमारी चर्चा करती है हमारे ज्ञान के महत्व जानते हैं तो कुछ लोग ऐसे हैं जो हमारी बुराई भी करती हैं आज का समय वह है कि अगर हमारे को कोई बुरा कहता है तो हमें शांत रहना चाहिए क्योंकि सबसे हमें ज्ञान इन्हीं से प्राप्त करना चाहिए कि जब हमारी कोई दुनिया में बातें करें और कोई हमारे को बुरा कहता है तो समझ लेना कि हम तरक्की करें लेकिन बुरा का है अगर आप बिल्कुल पूरे नहीं हो आप मर्यादा में चल रहे हो संस्कार भी चल रहे हो आप अच्छे काम कर रहे हो फिर अगर आप कोई प्रतिक्रिया कोई आपको बुरा कहता है वह आप इतना सोचो कि मैं रखी करा हूं लेकिन अगर कोई बुरा है कोई पापी है अगर उसकी कोई बुराई करता है उसको कोई बुरा कहता है उसको जो बुरा होता ना उसको क्रोध आता है वह कहता है इसने मेरे को बुरा एक बात कहती मैं चार कहूंगा जाने की उनकी प्रतिक्रिया अलग होती है और जो इंसान अच्छे होते हैं जिनको संस्कार होते हैं जो अपना अच्छे विचार रखते हैं जो अपने भीतर ज्ञान को आप करते हैं उनकी प्रतिक्रिया अलग होती है अगर हमारे माता-पिता हम को बुरा कहते हैं तो हम क्या उनके प्रति हमारी प्रतिक्रिया बुरा होनी चाहिए और माता-पिता हम कहते हैं कि जब हम अच्छा काम नहीं करते हैं या कोई कार्य नहीं करते हैं जहां कारोबार नहीं करते हैं उनका कहना नहीं मानते हैं तो हर इंसान की प्रतिक्रिया अलग-अलग होती है मुझे कोई कुछ कहता है बुरा तो मैं तो परेशान होता हूं बस खुश होता हूं क्योंकि हमारे वेदों में लिखा है कि अगर कोई हमारी बुराई करता है जो हमारे दोस्त होते हैं जो बुरे कर्म होते हैं वह सब पाप बुराई करने वाले में चले जाते हैं मैं बहुत परेशान होता हूं अगर मेरी कोई बुराई करता है और मेरी कोकरोज भी नहीं आता मैं क्रोध में नहीं करता हूं मैं शांत भाग क्योंकि हमारा कारी ही ले ही है कि हमें हर गांव में हादसों में हर तहसील में और गांव में जाकर हमें प्रवचन कथा भागवत या कुछ भी हो हमारे उधर के दृश्य नहीं होते हैं बुरा बोलने वाले में होते हैं लेकिन हम बिल्कुल प्रसन्न होते हैं क्योंकि कलयुग है कलयुग में सभी तो एक समान नहीं होते तो सबको नहीं करना चाहिए कि अगर हमारी कोई बुराई करता है तो बुराई के बदले बुरा मत बनो अस्थाई करो उसी से ज्यादा से ज्यादा प्रेम दोस्त नहीं होता कि उसके मन में जो बुरा विचार आपके अनुसार है आपकी और है वह भी अच्छा हो जाए अगर हम प्रतिक्रिया हमारी बुरी होगी तो हमारी दुश्मनी बढ़ेगी और हम भी बुरा कहेंगे वह भी बुरा कहेंगे और उससे क्या होगा हमें नुकसान होगा इसलिए अगर हमें कोई बुरा कहता है हम बिल्कुल मस्त रहो महात्मा गांधी ने कहा कि अगर हमको को एक चांटा लगाता है तो दूसरी गाल भी आगे कर दो जने की कर्मभूमि है आध्यात्मिक ज्ञान है ऐसा हमको करना चाहिए हम हिंदू हैं और हमारे हिंदू में सबसे बड़ी हिंदुओं की एक ही सबसे विशेषता है इन पर दया बहुत है हिंदुओं में होते हैं बाकी वालों में नहीं होती है आप देख रहे हो अभी हिंदू कितने लंदन लगा रहे हैं कितना खुश करें दान दे रहे हैं और बाकी वाले क्या करें बाकी वाले क्या करें जिसमें दया नहीं है एक हिंदू था मैंने जो भी हिंदू है धर्म से हिंदू है कर्म से हिंदू है उनमें दिया वस्तु होती है करना होती है उनके विचार जैसे भी बुरा हो फिर भी कष्ट समय और सब एक साथ हो जाते हैं लेकिन ऐसा विचार है तू ऐसा कि हिंदू जो है देवान होता है इनकी मित्र कौन अच्छे होते हैं तो अगर कोई हमें बुरा कहता है चुप रहना शांत रहो हमें भी बुरा नहीं बढ़ना है हमें जो बुरा कहते हैं उनके सामने भी अच्छा बनकर दिखाना है और यही करना है इस समय हमें हिंदुस्तान या पूरे विश्व में हमें कोई बुरा कहता है और करो ना आया है इसको रोना को भगाना है और मेरी यही प्रार्थना है सभी से जो हमारा जवाब आप सभी घर में रहो करो ना जो है इनको मारना है हटाना है भारत से भगाना है और कैसे लगेगा क्योंकि हम मिलकर एकता से समोसे इनको दूर करेंगे राधे राधे

ji radhe shyam radhe krishna main aapke sant shri vimal aacharya ji jammu sir aur se aapka prashna hai jab log aapke bare me bura kehte hain toh aapki pratikriya kya honi chahiye bahut accha prashna kiya hai jinhone bhi kiya hai bahut accha prashna hai kyonki sab buraiyan aur sab saiyan itne se prasann me judi hui hai pehle baat ki koi aapke bare me bura kyon sochega aur uska karan kya hai bura sochne ka sabse bada karan hota hai dvesh nafrat dvesh jo tigrina paida karti hai vargina se kya hota hai ki insaan 17 ho jata hai jal kijiye dinesh kaise utpann hoti hai yah mere se zyada pad gaya mere se zyada number le liye isne mere se zyada achi naukri milegi hai isne mere se accha ghar bana liya hai iski patni mere se achi sundar hai iske char bete hain vaah sabhi kaam me lage hain mera beta ek bhi nahi lagaya hai yah acche acche bastar dalta hai inke paas itna sunana hai iske paas itna paisa hai puja aisi baat hoti hai toh desh ho jata hai aur jo insaan ki pratikriya hoti hai insaan accha 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जी राधे श्याम राधे कृष्णा मैं आपके संत श्री विमल आचार्य जी जम्मू सर ओर से आपका प्रश्न है

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