अगर मैं सोचु की मैं यह काम कर सकता हूँ और यदि में सोचु की में नहीं कर सकता तो दिमाग पर असर पड़ता है?...


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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

2:00

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मेरे मित्र यह जो आपने लिखा है वह अपने बुद्धि की अस्थिरता का है आप किसी कार्य के स्टेशन में रहते हैं कि मैं करूं या ना करूं करूं क्या ना करूं इसे हम कहते हैं कि कब तक देवता की क्षति अवतार होना विचारों का होना थोड़ा किसी कार्य की रूपरेखा बनाते हैं इस योजना बनाकर उसके बाद तुरंत क्रियान्वित ही करता है यह कार्य की समीक्षा की है मन लगाकर कि क्या निकाल कर कि जब किसी कार्य को प्रारंभ करते हैं तो वह कार्य निश्चित रूप से सफल होता है उनके साथ में किसी का आदेश मानकर कि जब हम किसी कार्य को करते हैं तो वहां असफलता अधिक मिलती है क्योंकि माना मारा उसमें नहीं लग रहा था जाने का जमारा नहीं था इसलिए आदमी को एस्टर नहीं होना चाहिए जो कुछ करना है वह करना है नहीं करना नहीं करना है किसी कार्य को हमने देखा कि हम देश को नहीं हो रहा है उसके दूसरे लोगों को देखें आप सीखे उसके जो स्पेशलिस्ट उसके जानने वाले मास्टरपीस गिरती है उन लोगों से उसके बारे में विधि जाने उसको करें करत करत अभ्यास के जनमत होत सुजान रसरी आवत जात ते सिल पर परत निशान किसी भी कार्य को करने से कठिन से कठिन कार्य है उसको आप करेंगे मेथड से करेली से मन लगाकर करेंगे तो कार्य सफल होगा और उसका करने में महारत हासिल कर लेंगे तो इसलिए प्रैक्टिस मेकस ए मन परफेक्ट आदमी किसी कार्य से वह आदमी को विषय का मास्टरपीस बना देता है कि रस बना देता है

mere mitra yeh jo aapne likha hai wah apne buddhi ki asthirata ka hai aap kisi karya ke station mein rehte hain ki main karu ya na karu karu kya na karu ise hum kehte hain ki kab tak devta ki kshati avatar hona vicharon ka hona thoda kisi karya ki rooprekha banate hain is yojana banakar uske baad turant kriyanwit hi karta hai yeh karya ki samiksha ki hai man lagakar ki kya nikaal kar ki jab kisi karya ko prarambh karte hain toh wah karya nishchit roop se safal hota hai unke saath mein kisi ka aadesh maankar ki jab hum kisi karya ko karte hain toh wahan asafaltaa adhik milti hai kyonki mana mara usme nahi lag raha tha jaane ka jamara nahi tha isliye aadmi ko ester nahi hona chahiye jo kuch karna hai wah karna hai nahi karna nahi karna hai kisi karya ko humne dekha ki hum desh ko nahi ho raha hai uske dusre logo ko dekhen aap sikhe uske jo specialist uske jaanne wale masterpiece girti hai un logo se uske bare mein vidhi jaane usko karein karat karat abhyas ke janmat hot sujaan rasari avat jaat te syllabus par parat nishaan kisi bhi karya ko karne se kathin se kathin karya hai usko aap karenge method se kurali se man lagakar karenge toh karya safal hoga aur uska karne mein maharat hasil kar lenge toh isliye practice makes a man perfect aadmi kisi karya se wah aadmi ko vishay ka masterpiece bana deta hai ki ras bana deta hai

मेरे मित्र यह जो आपने लिखा है वह अपने बुद्धि की अस्थिरता का है आप किसी कार्य के स्टेशन में

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