मैं हिंदू हूँ और मेरे सामने एक मुसलमान मुझसे मदद मांग रहा है क्या मुझे उसकी मदद करनी चाहिए?...


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दोस्त आपका जैसा बाल है यह सवाल बहुत अच्छे सवाल है कि मैं एक हिंदू हूं और मुसलमान को छोड़ देता हूं मुझे हिंदू की मदद करनी चाहिए नहीं तो क्यों नहीं करनी चाहिए वह लोग हमारे बारे में क्या सोचते हैं उसे मतलब नहीं है पर हमें उनके बारे में अच्छा ही सोचना और मैं कह रहा हूं उनके बारे में ही नहीं हमारे पहले से परंपरा चली आ रही है कि हम लोग हमेशा दुश्मन का भी भला चाहते हैं किसी को भी आपातकालीन स्थिति में या जब उस मुसीबत में फंसा हो तो हमारी पहले इंसान का धर्म है हमारा पहला संगठन का धर्म हमारा पहला कर्तव्य है कि दूसरों का भला करना चाहे दुश्मन ही क्यों ना हो हमारे आदिकाल से यहीं से कहा गया है ऋषि ने मुनियों ने भगवान ओ भगवान तो हमें मर वितरण में ही सिखाया गया है परहित सरिस धर्म नहिं कोई नर सेवा ही नारायण सेवा है भले शुरू कोई भी हो हमेशा हमें दूसरों का भला ही करना है एक छोटी सी कहानी बता रहा हूं आपको आज के अधिकार पुरानी कहानी है एक महा ऋषि गंगा जी के नारे पर गंगा जी में स्नान कर रहे थे यह भी एक बिच्छू देखा होने को डूब रहा है पानी में तो उन्हें उसको पानी से निकाला पानी से निकाला अपने हाथ में लिया है तो उस बिच्छू ने उनको महात्मा के हाथ मा काट दिया तो महात्मा जी के हाथ से वह गिर गया दर्द के कारण फिर दोबारा बोतल पिला पानी में जाकर महात्मा ने दो बार उसको उठाया ऐसे लगभग चार से पांच और बिच्छू डंक मारे महात्मा को महत्व दर्द हो वह गिर जाए फिर दुआ उसको उठा ले तो वहां पर उनका शिष्य देख रहा था तो बोला उसने गुरुदेव जब वह बिच्छू का डंक मार रहा है तो आप फिर क्यों उसको बचा रहे हैं आपको छोड़कर जाओ तब उन महात्मा ने बहुत ही क्षेत्र दिया बताया था कि वह बिच्छू अपना कर्तव्य कर रहा है और मैं अपना कर्तव्य कर रहा हूं तो हमें अपने जो कर्तव्य हमें उसे खुले मरना चाहिए बड़ी से वह उसका कर्तव्य कर रहा है बिच्छू उसका कर्तव्य उसका काम है काटने के पुकार रहा है और महात्मा काम है दूसरों का हित करने का तुम हाथ में अपना काम कर रहा है इसी प्रकार हम आना पुकार बिंदु एचडी हम सनातनी हमें अपना कर्तव्य पूरी तरीके से करना चाहिए वैसे तो कोई भी क्यों ना हो तो दोस्त आप कृपया कर उनकी मदद नहीं सब क्यों न करें इसी में हमारा धर्म हमारा कर्तव्य को छुपा हुआ है

dost aapka jaisa baal hai yah sawaal bahut acche sawaal hai ki main ek hindu hoon aur musalman ko chhod deta hoon mujhe hindu ki madad karni chahiye nahi toh kyon nahi karni chahiye vaah log hamare bare me kya sochte hain use matlab nahi hai par hamein unke bare me accha hi sochna aur main keh raha hoon unke bare me hi nahi hamare pehle se parampara chali aa rahi hai ki hum log hamesha dushman ka bhi bhala chahte hain kisi ko bhi aapatkalin sthiti me ya jab us musibat me fansa ho toh hamari pehle insaan ka dharm hai hamara pehla sangathan ka dharm hamara pehla kartavya hai ki dusro ka bhala karna chahen dushman hi kyon na ho hamare aadikaal se yahin se kaha gaya hai rishi ne muniyon ne bhagwan O bhagwan toh hamein mar vitaran me hi sikhaya gaya hai parhit saris dharm nahin koi nar seva hi narayan seva hai bhale shuru koi bhi ho hamesha hamein dusro ka bhala hi karna hai ek choti si kahani bata raha hoon aapko aaj ke adhikaar purani kahani hai ek maha rishi ganga ji ke nare par ganga ji me snan kar rahe the yah bhi ek bichhoo dekha hone ko doob raha hai paani me toh unhe usko paani se nikaala paani se nikaala apne hath me liya hai toh us bichhoo ne unko mahatma ke hath ma kaat diya toh mahatma ji ke hath se vaah gir gaya dard ke karan phir dobara bottle pila paani me jaakar mahatma ne do baar usko uthaya aise lagbhag char se paanch aur bichhoo dank maare mahatma ko mahatva dard ho vaah gir jaaye phir dua usko utha le toh wahan par unka shishya dekh raha tha toh bola usne gurudev jab vaah bichhoo ka dank maar raha hai toh aap phir kyon usko bacha rahe hain aapko chhodkar jao tab un mahatma ne bahut hi kshetra diya bataya tha ki vaah bichhoo apna kartavya kar raha hai aur main apna kartavya kar raha hoon toh hamein apne jo kartavya hamein use khule marna chahiye badi se vaah uska kartavya kar raha hai bichhoo uska kartavya uska kaam hai katne ke pukaar raha hai aur mahatma kaam hai dusro ka hit karne ka tum hath me apna kaam kar raha hai isi prakar hum aana pukaar bindu hd hum sanatani hamein apna kartavya puri tarike se karna chahiye waise toh koi bhi kyon na ho toh dost aap kripya kar unki madad nahi sab kyon na kare isi me hamara dharm hamara kartavya ko chupa hua hai

दोस्त आपका जैसा बाल है यह सवाल बहुत अच्छे सवाल है कि मैं एक हिंदू हूं और मुसलमान को छोड़ द

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