भारत की शिक्षा व्यवस्था की सुधार हेतु अपनी राय दे?...


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Vatsal

Engineering Student

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

कितना-कितना एग्जाम प्रैक्टिकल प्रैक्टिकल प्रैक्टिकल परीक्षा

kitna kitna exam practical practical practical pariksha

कितना-कितना एग्जाम प्रैक्टिकल प्रैक्टिकल प्रैक्टिकल परीक्षा

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Pragati

Aspiring Lawyer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारत की शिक्षा व्यवस्था और के सुधार के लिए मेरा मानना यह किसी के शिक्षा की जो प्रणाली है जो वह शिक्षा इतने दिनों से बच्चों को दी जा रही है जो व्यवस्था है वह तो काफी सही है लेकिन हमारी तो सोच है उस व्यवस्था के प्रति वह काफी गलत है क्योंकि दी क्या हम जो आप सोच रखते हैं वही रखते हैं कि जिस बच्चे की ज्यादा नंबर नहीं आएंगे वह ज्यादा अच्छा पढ़ने में नहीं होगा या फिर उसको आगे चलकर कुछ नहीं मिलेगा मुझे लगता है कि सोच समाज की बदलना जरूरी है शिक्षा व्यवस्था में शिक्षा व्यवस्था में कोई भी सुधार की आवश्यकता नहीं है लेकिन लोगों की सोच में परिवर्तन की आवश्यकता है क्योंकि देखिए लोग जब इस सोच से बाहर निकलेंगे वह इस चीज को समझेंगे कि हर बच्चे में अलग-अलग गुणवत्ता होती है हर कोई अच्छे नंबर नहीं ला पाता इसका मतलब यह नहीं है कि वह बच्चा गुरुवार नहीं है उसके अंदर कोई योग्यता नहीं है तू दिखे समाज में जो भी सोच परिवर्तन हो जाएगी तो मैं खुद पता लगने लगेगा कभी की शिक्षा व्यवस्था में कोई और ड्यूटी नहीं है कोई सुधार की आवश्यकता नहीं है लेकिन कहीं ना कि हमारी सोच खराब है अवस्था को हम ब्लेम करते रहते हैं और हमें लगता है कि व्यवस्था खराब है इसलिए बच्चे इतने स्ट्रेस में रहते हैं इतना परेशान रहते हैं हालांकि जो बच्चों के ऊपर प्रेशर है वह अंक लाने का प्रेशर है मस्तानी का प्रेशर है ना की शिक्षा व्यवस्था का

bharat ki shiksha vyavastha aur ke sudhaar ke liye mera manana yah kisi ke shiksha ki jo pranali hai jo vaah shiksha itne dino se baccho ko di ja rahi hai jo vyavastha hai vaah toh kaafi sahi hai lekin hamari toh soch hai us vyavastha ke prati vaah kaafi galat hai kyonki di kya hum jo aap soch rakhte hain wahi rakhte hain ki jis bacche ki zyada number nahi aayenge vaah zyada accha padhne mein nahi hoga ya phir usko aage chalkar kuch nahi milega mujhe lagta hai ki soch samaj ki badalna zaroori hai shiksha vyavastha mein shiksha vyavastha mein koi bhi sudhaar ki avashyakta nahi hai lekin logo ki soch mein parivartan ki avashyakta hai kyonki dekhiye log jab is soch se bahar nikalenge vaah is cheez ko samjhenge ki har bacche mein alag alag gunavatta hoti hai har koi acche number nahi la pata iska matlab yah nahi hai ki vaah baccha guruwaar nahi hai uske andar koi yogyata nahi hai tu dikhe samaj mein jo bhi soch parivartan ho jayegi toh main khud pata lagne lagega kabhi ki shiksha vyavastha mein koi aur duty nahi hai koi sudhaar ki avashyakta nahi hai lekin kahin na ki hamari soch kharab hai avastha ko hum blame karte rehte hain aur hamein lagta hai ki vyavastha kharab hai isliye bacche itne stress mein rehte hain itna pareshan rehte hain halaki jo baccho ke upar pressure hai vaah ank lane ka pressure hai mastani ka pressure hai na ki shiksha vyavastha ka

भारत की शिक्षा व्यवस्था और के सुधार के लिए मेरा मानना यह किसी के शिक्षा की जो प्रणाली है ज

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