"अपने खराब मुद के समय बुरे शब्द ना बोले क्योकि...खराब मुड़ बदलने के बहुत मौके मिलेंगे,परंतु शब्दो को बदलने के लिए कोई मौका नही....मिलेगा।"मित्रो विचार व्यक्त कीजिये।?...


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Jyoti Mehta

Ex-History Teacher

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जी हां यह कथन बिल्कुल सही है कि हमें सब अपना मुंह खराब हो तब बोलना नहीं चाहिए क्योंकि जब हम खराब मूड में होते हैं तो हम क्या बोलते हैं यह हमें भी पता नहीं चलता है और कहां हो थी कि तलवार की घाव भर जाते हैं लेकिन शब्दों के गांव जख्म बनकर तकलीफ देते हैं इसीलिए हमें बोलने का हमेशा ध्यान रखना चाहिए और अच्छे शब्दों का चयन करती ही बोलना चाहिए क्योंकि जब हम गुस्से में होते हैं या जो हमारा मूड खराब होता है तब ना तो हमें समझ में आता है कि हम सही बोल रहे हैं या गलत और ना ही हम सामने वाले को बोलने का मौका देते हैं हमें सिर्फ अपनी बात कहने का उस वक्त इंतजार रहता है कि हम किसी भी तरह से अपने मन की भड़ास को बाहर निकालें और सामने वाले को क्या बोलते हैं यह हम सोचते भी नहीं हैं और बोल देते हैं और वह जो कठोर और कड़वे वचन होते हैं वह जो बुरे शब्द होते हैं वह सामने वाले को बहुत हर्ट करते हैं उन शब्दों को हम अपनी जिंदगी में दोबारा कभी वापस नहीं बदल सकते हैं इसीलिए उस वक्त हमें शांत रह जाना चाहिए चुप रह जाना चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि वह जो भक्त है खराब हो निकल जाए और उसके बाद आप बैठ कर आराम से बात कर सकते हैं अपनी बात सामने वाले को सही तरीके से समझा सकते हैं अपनी बात रख सकते हैं वह बात जरूर सामने वाली की समझ में आएगी लेकिन आपकी गुस्से में कहीं भी बात आपकी गलत शब्द आपकी चुगने वाली बातें उसे कभी भी समझ में नहीं आएगी उल्टा उस से हर्ट करेंगी और वह हमेशा के लिए आपसे दूर हो जाएगा क्योंकि आपके शब्दों ने उसको जो गांव दिए हैं वह वह भुला नहीं सकता है इसीलिए हमें बहुत समझ सोच समझकर शब्दों का इस्तेमाल करना

ji haan yah kathan bilkul sahi hai ki hamein sab apna mooh kharab ho tab bolna nahi chahiye kyonki jab hum kharab mood mein hote hain toh hum kya bolte hain yah hamein bhi pata nahi chalta hai aur kahaan ho thi ki talwar ki ghaav bhar jaate hain lekin shabdon ke gaon jakhm bankar takleef dete hain isliye hamein bolne ka hamesha dhyan rakhna chahiye aur acche shabdon ka chayan karti hi bolna chahiye kyonki jab hum gusse mein hote hain ya jo hamara mood kharab hota hai tab na toh hamein samajh mein aata hai ki hum sahi bol rahe hain ya galat aur na hi hum saamne waale ko bolne ka mauka dete hain hamein sirf apni baat kehne ka us waqt intejar rehta hai ki hum kisi bhi tarah se apne man ki bhadas ko bahar nikale aur saamne waale ko kya bolte hain yah hum sochte bhi nahi hain aur bol dete hain aur vaah jo kathor aur kadve vachan hote hain vaah jo bure shabd hote hain vaah saamne waale ko bahut heart karte hain un shabdon ko hum apni zindagi mein dobara kabhi wapas nahi badal sakte hain isliye us waqt hamein shaant reh jana chahiye chup reh jana chahiye aur koshish karni chahiye ki vaah jo bhakt hai kharab ho nikal jaaye aur uske baad aap baith kar aaram se baat kar sakte hain apni baat saamne waale ko sahi tarike se samjha sakte hain apni baat rakh sakte hain vaah baat zaroor saamne wali ki samajh mein aayegi lekin aapki gusse mein kahin bhi baat aapki galat shabd aapki chugne wali batein use kabhi bhi samajh mein nahi aayegi ulta us se heart karengi aur vaah hamesha ke liye aapse dur ho jaega kyonki aapke shabdon ne usko jo gaon diye hain vaah vaah bhula nahi sakta hai isliye hamein bahut samajh soch samajhkar shabdon ka istemal karna

जी हां यह कथन बिल्कुल सही है कि हमें सब अपना मुंह खराब हो तब बोलना नहीं चाहिए क्योंकि जब

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विकास सिंह

दिल से भारतीय

0:33

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अपनी खराब मूड के समय बुरी शब्द का उपयोग या बुरे सपना बोले क्योंकि खराब मूड बदलने के तो बहुत मौके मिलते हैं जो शब्द हम इस खराब मोड में बोलते हैं उसे बदलने का हमें कोई मौका नहीं मिलता है मेरी सबसे प्यारी है बिल्कुल हंड्रेड प्रतिशत सच है अगर हम खराब मोड में कुछ ऐसे बोलते हैं कुछ ऐसे वो सामने हम बोलते हैं उन से रिश्ते टूट जाते हैं तो अगर आप उस बात को वहीं पर रोक लेते बाद में जो है आप अपने मूड को अच्छा कर सकते हैं तुम्हें सपने जो बात बोली बिल्कुल सही बोलिए

apni kharab mood ke samay buri shabd ka upyog ya bure sapna bole kyonki kharab mood badalne ke toh bahut mauke milte hai jo shabd hum is kharab mode mein bolte hai use badalne ka hamein koi mauka nahi milta hai meri sabse pyaari hai bilkul hundred pratishat sach hai agar hum kharab mode mein kuch aise bolte hai kuch aise vo saamne hum bolte hai un se rishte toot jaate hai toh agar aap us baat ko wahi par rok lete baad mein jo hai aap apne mood ko accha kar sakte hai tumhe sapne jo baat boli bilkul sahi bolie

अपनी खराब मूड के समय बुरी शब्द का उपयोग या बुरे सपना बोले क्योंकि खराब मूड बदलने के तो बहु

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