जिस इंसान में सोचने समझने की शक्ति नहीं होती, क्या वह इंसान जानवरों के समान है?...


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Umesh Upaadyay

Life Coach | Motivational Speaker

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ऐसे और सवाल
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार आपका प्रश्न है जिससे इंसान में सोचने समझने की शक्ति नहीं होती क्या वह इंसान जानवरों के समान है देखिए कहीं ना कहीं इंसान और जानवरों में एक ही फर्क है कि व्यक्ति तोड़ सकता है अपने बुद्धि का इस्तेमाल कर सकता है जानवर उसका इस्तेमाल एक लिमिट तक कर सकते हैं इसलिए जो व्यक्ति सोचने समझने की ऊपर ध्यान नहीं देता मैं कहीं ना कहीं जान बन जाता है धन्यवाद

namaskar aapka prashna hai jisse insaan me sochne samjhne ki shakti nahi hoti kya vaah insaan jaanvaro ke saman hai dekhiye kahin na kahin insaan aur jaanvaro me ek hi fark hai ki vyakti tod sakta hai apne buddhi ka istemal kar sakta hai janwar uska istemal ek limit tak kar sakte hain isliye jo vyakti sochne samjhne ki upar dhyan nahi deta main kahin na kahin jaan ban jata hai dhanyavad

नमस्कार आपका प्रश्न है जिससे इंसान में सोचने समझने की शक्ति नहीं होती क्या वह इंसान जानवरो

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Swadesh Rajoriya

Motivational Speaker | Artist Painter, Designer, Thinker

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Dr.Arti Vajpai

Wellness Coach

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गोपाल पांडेय

Journalist, Counselor, motivational speaker

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Ajay kumar

Motivational Speaker , Life Coach

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Sharad Gurudev

Writer Motivator

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Pramod Kumar Singh

Motivator And Business

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Rakesh Tiwari

Life Coach, Management Trainer

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आपका प्रश्न राजस्थान में सोचने समझने की शक्ति नहीं होती है इंसान जानवरों के समान है ऐसा कहा जाता है कि वे एक ही मिट्टी और पशु में कोई फर्क नहीं है क्योंकि इंद्रिय चुस्ती संतानोत्पत्ति स्वार्थपरता के जानवरों में भी होती है मनुष्य को ऐसा माना जाता है कि विवेकशील प्राणी है और सही गलत की पहचान है उचित अनुचित की पहचान है मान अपमान की पहचान है सही गलत की पहचान है और अगर व्यक्ति के आचरण व्यवहार से होता है कि वह एक ही है एक ही व्यक्ति और एक समान है

aapka prashna rajasthan me sochne samjhne ki shakti nahi hoti hai insaan jaanvaro ke saman hai aisa kaha jata hai ki ve ek hi mitti aur pashu me koi fark nahi hai kyonki indriya chusti santanotpatti swarthaparata ke jaanvaro me bhi hoti hai manushya ko aisa mana jata hai ki vivekshil prani hai aur sahi galat ki pehchaan hai uchit anuchit ki pehchaan hai maan apman ki pehchaan hai sahi galat ki pehchaan hai aur agar vyakti ke aacharan vyavhar se hota hai ki vaah ek hi hai ek hi vyakti aur ek saman hai

आपका प्रश्न राजस्थान में सोचने समझने की शक्ति नहीं होती है इंसान जानवरों के समान है ऐसा क

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दोस्त आपका क्वेश्चन है कि जिस इंसान में सोचने समझने की शक्ति नहीं होती क्या इंसान जानवरों के समान है बिल्कुल नहीं उसे आप जानवर कैसे कह सकते हैं यह जरूरी नहीं कि हर सभी लोग तीर बुद्धि वाले ही हो और दूसरी बात कोई रीजन हो सकता है कभी चोट लग जाती है सर में तब सोच समझ नहीं पाता है दिमाग कमजोर एक हिसाब से इसको पागल जैसे लोग पागल बोलते हैं सोचने समझने की शक्ति नहीं होती तभी तो लोग पागल हो जाते हैं ऐसा नहीं है कि वह जानवर जैसा हो जाता है कोई कोई न कोई दिक्कत जरूर आ जाती है ऐसे थोड़ी ना ऐसा कोई होता है और मंदबुद्धि के बच्चे हो जाते हैं लेकिन कोई ना कोई गुड जरूर होता है हम के अंदर या तो अचानक में पागल हुई है किसी कारणवश किसी दुर्घटना बस तब उनके अंदर इंसान समझने की शक्ति नहीं रह जाती है या फिर कितना भी कोई मंदबुद्धि हो या फिर ध्यान रखने कुछ न कुछ रीजन अवश्य होता है उसको आप जानवर नहीं कर सकते हैं वह भी एक इंसान है उसको ऐसे इंसान हूं कि आप हेल्प करिए उसको प्यार दीजिए और उसके प्रति अच्छी भावना रखें हर व्यक्ति कुछ ना कुछ करने लायक होता है तो देखिए उसके अंदर आखिर कुछ ना कुछ गुण तो अवश्य होगा उसी हिसाब से उसको वर्क दीजिए और अभी तक तुम मुझे नहीं मैंने नहीं कभी नहीं देखा कि ऐसा कोई व्यक्ति जिसके अंदर कुछ भी सोचने समझने की शक्ति ना एक मंदबुद्धि बालक को भी अगर आप प्यार से समझा देंगे तो वह भी कुछ ना कुछ तो समझ ही लेता है नहीं होता तो आपकी भाषा है आपकी भावनाओं को समझ लेता है ऐसे थोड़ी ने जो पागल घूमते रहते हैं अगर उसे कुछ लोग कुछ बदतमीज लोग होते हैं उसको मार देते हैं पीट देते हैं किसी और से वह पागल हुए हो चुके होते हैं तो वह सब नहीं मारने शुरू कर देते हैं इससे क्या बाहर निकल कर आता है कि वह समझते हैं कुछ ना कुछ भले ही अच्छा बुरा नहीं समझ पाते लेकिन कुछ ना कुछ तो समझती हैं तो ऐसे इंसानों की आप सभी जो अच्छे अच्छे इंसान है जो है हेल्प करना चाहते हैं वह लोग हेल्प करें उनकी ना कि उनको दूध कारें और जानवरों से इस प्रकार हम पर या जानवर उसको भी तो प्यार करते हैं तो सब प्यार भरे उनको प्यार से कीट करिए वह भी समझदार हो जाएंगे तो आशा करते हैं आपके समझ में आ गया होगा धन्यवाद दोस्त

dost aapka question hai ki jis insaan me sochne samjhne ki shakti nahi hoti kya insaan jaanvaro ke saman hai bilkul nahi use aap janwar kaise keh sakte hain yah zaroori nahi ki har sabhi log teer buddhi waale hi ho aur dusri baat koi reason ho sakta hai kabhi chot lag jaati hai sir me tab soch samajh nahi pata hai dimag kamjor ek hisab se isko Pagal jaise log Pagal bolte hain sochne samjhne ki shakti nahi hoti tabhi toh log Pagal ho jaate hain aisa nahi hai ki vaah janwar jaisa ho jata hai koi koi na koi dikkat zaroor aa jaati hai aise thodi na aisa koi hota hai aur mandbuddhi ke bacche ho jaate hain lekin koi na koi good zaroor hota hai hum ke andar ya toh achanak me Pagal hui hai kisi karanvash kisi durghatna bus tab unke andar insaan samjhne ki shakti nahi reh jaati hai ya phir kitna bhi koi mandbuddhi ho ya phir dhyan rakhne kuch na kuch reason avashya hota hai usko aap janwar nahi kar sakte hain vaah bhi ek insaan hai usko aise insaan hoon ki aap help kariye usko pyar dijiye aur uske prati achi bhavna rakhen har vyakti kuch na kuch karne layak hota hai toh dekhiye uske andar aakhir kuch na kuch gun toh avashya hoga usi hisab se usko work dijiye aur abhi tak tum mujhe nahi maine nahi kabhi nahi dekha ki aisa koi vyakti jiske andar kuch bhi sochne samjhne ki shakti na ek mandbuddhi balak ko bhi agar aap pyar se samjha denge toh vaah bhi kuch na kuch toh samajh hi leta hai nahi hota toh aapki bhasha hai aapki bhavnao ko samajh leta hai aise thodi ne jo Pagal ghumte rehte hain agar use kuch log kuch badtameez log hote hain usko maar dete hain peat dete hain kisi aur se vaah Pagal hue ho chuke hote hain toh vaah sab nahi maarne shuru kar dete hain isse kya bahar nikal kar aata hai ki vaah samajhte hain kuch na kuch bhale hi accha bura nahi samajh paate lekin kuch na kuch toh samajhti hain toh aise insano ki aap sabhi jo acche acche insaan hai jo hai help karna chahte hain vaah log help kare unki na ki unko doodh karen aur jaanvaro se is prakar hum par ya janwar usko bhi toh pyar karte hain toh sab pyar bhare unko pyar se kit kariye vaah bhi samajhdar ho jaenge toh asha karte hain aapke samajh me aa gaya hoga dhanyavad dost

दोस्त आपका क्वेश्चन है कि जिस इंसान में सोचने समझने की शक्ति नहीं होती क्या इंसान जानवरों

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Ritu Goyal

Motivational Speaker

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखी दो तरीके के लोग होते हैं जिसमें सोचने समझने की शक्ति नहीं होती वह जानवर नहीं होता तू रीजन सो सकते हैं एक इंसान खुद जानबूझकर नहीं समझना चाहता एक इंसान जिसका थोड़ा मेंटल यीशु होता है और एक इंसान जो सोचने समझने की शक्ति होती है लेकिन दिमाग में जो नहीं देता तू देखी सोचने समझने की शक्ति अगर नहीं है तो सामने वाले के साथ कैसा रिएक्ट कर रहा है यह चीज मेंशन करती है कि वह इंसान जानवर है यह नहीं है सोचने समझने की शक्ति कभी-कभी किसी की एक एक्सीडेंट में चली जाती है या किसी डिप्रेशन की वजह से चली जाती है यह घर ऑफिस में क्लेश की वजह से चली जाती है या फिर कम हो जाती है लेकिन हम इस इंसान को जानवर नहीं बोल सकते हम उसके अंदर उस चीज में सुधार कर सकते हैं जिसमें सोचने समझने की शक्ति नहीं होती उसके रिजल्ट मैंने आपको बता दिए हैं कि क्या क्या रियल सो सकते हैं वह इंसान जानवरों के समान नहीं होता क्योंकि जानवरों को आप यह नहीं बोल सकते कि उस पर सोचने समझने की शक्ति नहीं होती जानवर को आप उसमें टीच करते हैं कुछ भी सिखाते हैं तो वह बिल बहुत जल्दी कैच कर लेता है मंकी डॉगी एलीफेंट बहुत जानवर ऐसे हैं जो हमारे लिए बहुत बेनिफिशियल है डॉगी को यह पता होता है कि वह जिस फैमिली में रह रहा है उसके फैमिली मेंबर कौन-कौन से हैं उसका फैमिली मेंबर का बीएड क्या-क्या है तो आप इन चीजों को जानवरों के ऊपर नहीं हो सकते यह नहीं कह सकते कि अगर आप किसी गाय को बुलाते हैं बुलाने के 10 तरीके होते हैं तो गाय समझ जाती है कि आप उसे क्यों बुला रहे हैं सिंपल सी बात है उसको कुछ खिलाने के लिए बुला रही है आप गाय के ऊपर पानी डालते हैं तो वहां से मुंह बुनकर जाती है तो आप प्लीज यह मत कहिए कि जिस में सोचने समझने की शक्ति नहीं होती वह जानवर के समान होता है कुछ जानवर होते हैं जानवर कहने लायक होती है पर हर कोई जानवर जानवर कहने लायक नहीं होता नहीं सोचने समझने की शक्ति तो वह इंसान के माइंड के ऊपर डिपेंड करता है कि वह दिमाग से सोचना ही नहीं चाहता कि उसके अंदर वह शक्ति ही नहीं है या फिर उसके अंदर वह शक्ति थी खत्म हो चुकी है वह सारे रीजन सो सकते हैं आप उनसे इंसान का ट्रीटमेंट करवाइए उसको प्यार से समझाइए प्यार से डिलीट कीजिए और अगर तब भी शायद उसके में दिमाग में वह चीजें नहीं आती है तो आप ही समझ लीजिए कि वह इंसान का दिमाग काम करना बंद कर दिया गया है थैंक यू

dekhi do tarike ke log hote hain jisme sochne samjhne ki shakti nahi hoti vaah janwar nahi hota tu reason so sakte hain ek insaan khud janbujhkar nahi samajhna chahta ek insaan jiska thoda mental yeshu hota hai aur ek insaan jo sochne samjhne ki shakti hoti hai lekin dimag me jo nahi deta tu dekhi sochne samjhne ki shakti agar nahi hai toh saamne waale ke saath kaisa react kar raha hai yah cheez mention karti hai ki vaah insaan janwar hai yah nahi hai sochne samjhne ki shakti kabhi kabhi kisi ki ek accident me chali jaati hai ya kisi depression ki wajah se chali jaati hai yah ghar office me kalesh ki wajah se chali jaati hai ya phir kam ho jaati hai lekin hum is insaan ko janwar nahi bol sakte hum uske andar us cheez me sudhaar kar sakte hain jisme sochne samjhne ki shakti nahi hoti uske result maine aapko bata diye hain ki kya kya real so sakte hain vaah insaan jaanvaro ke saman nahi hota kyonki jaanvaro ko aap yah nahi bol sakte ki us par sochne samjhne ki shakti nahi hoti janwar ko aap usme teach karte hain kuch bhi sikhaate hain toh vaah bill bahut jaldi catch kar leta hai monkey doggy elephant bahut janwar aise hain jo hamare liye bahut benifishiyal hai doggy ko yah pata hota hai ki vaah jis family me reh raha hai uske family member kaun kaun se hain uska family member ka BEd kya kya hai toh aap in chijon ko jaanvaro ke upar nahi ho sakte yah nahi keh sakte ki agar aap kisi gaay ko bulate hain bulane ke 10 tarike hote hain toh gaay samajh jaati hai ki aap use kyon bula rahe hain simple si baat hai usko kuch khilane ke liye bula rahi hai aap gaay ke upar paani daalte hain toh wahan se mooh bunakar jaati hai toh aap please yah mat kahiye ki jis me sochne samjhne ki shakti nahi hoti vaah janwar ke saman hota hai kuch janwar hote hain janwar kehne layak hoti hai par har koi janwar janwar kehne layak nahi hota nahi sochne samjhne ki shakti toh vaah insaan ke mind ke upar depend karta hai ki vaah dimag se sochna hi nahi chahta ki uske andar vaah shakti hi nahi hai ya phir uske andar vaah shakti thi khatam ho chuki hai vaah saare reason so sakte hain aap unse insaan ka treatment karavaiye usko pyar se samjhaiye pyar se delete kijiye aur agar tab bhi shayad uske me dimag me vaah cheezen nahi aati hai toh aap hi samajh lijiye ki vaah insaan ka dimag kaam karna band kar diya gaya hai thank you

देखी दो तरीके के लोग होते हैं जिसमें सोचने समझने की शक्ति नहीं होती वह जानवर नहीं होता तू

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Pankaj Kr(youtube -AJ PANKAJ MATHS GURU)

Motivational Speaker/YouTube-AJ PANKAJ MATHS GURU

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ऐसी कोई बात नहीं है कि संसार में सोचने से मैंने क्षमता नहीं हुआ है जानवर ऐसा हम नहीं कर सकते हैं किसी आदमी के बुद्धि विवेक बहुत तेज होती है तेजी से सोचते हैं कोई-कोई लोग सीधे खाते में धीरे-धीरे सोचते हैं लेकिन हमारी सोच अच्छे विचारों से प्रभावित होते हैं यदि हमारी सोच अच्छे होंगे तुम्हारे विचार अच्छे होंगे जिनके सोच अच्छी नहीं है इसका मतलब है कि वे अपने विचारों में अच्छे करने के लिए कोशिश नहीं करते हैं ध्यान नहीं देते हैं जिसने इंसानों को सही सोच सही कर्तव्य करना चाहिए

aisi koi baat nahi hai ki sansar me sochne se maine kshamta nahi hua hai janwar aisa hum nahi kar sakte hain kisi aadmi ke buddhi vivek bahut tez hoti hai teji se sochte hain koi koi log sidhe khate me dhire dhire sochte hain lekin hamari soch acche vicharon se prabhavit hote hain yadi hamari soch acche honge tumhare vichar acche honge jinke soch achi nahi hai iska matlab hai ki ve apne vicharon me acche karne ke liye koshish nahi karte hain dhyan nahi dete hain jisne insano ko sahi soch sahi kartavya karna chahiye

ऐसी कोई बात नहीं है कि संसार में सोचने से मैंने क्षमता नहीं हुआ है जानवर ऐसा हम नहीं कर सक

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Bk soni

Rajyoga Teacher

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बहुत अच्छा प्रश्न है जिस इंसान में सोचने की शक्ति नहीं होती है क्या वह इंसान जानवरों के समान है ऐसा नहीं बोल सकते हैं कि वह इंसान जानवरों के समान है पर हां जिसके अंदर सॉक्स सोचने की शक्ति नहीं होती है वह पिछले जन्म में किसी को बहुत टॉर्चर किया होता है उसको बहुत ज्यादा टॉर्चर करने के कारण उसका जीवन जानवरों की तरह हो गया था मना मनुष्य जानवर की तरह बिहेव करना शुरू करता है इस कारण ही इस जन्म में उसको सोचने की शक्ति कम है इसलिए उसकी भी 1 जानवरों की तरह हो गया पर जानवर के समान नहीं है वह वह कर्म भोग भोग रहा है इसलिए उसको पहले क्या करना है कि उसको प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में जाकर राज्यों का मेडिटेशन पर आकर उसको थोड़ा लोंग टाइम मिल टेशन करें तो उसके सोचने में सोचना की शक्ति बढ़ जाएगी और उनके अंदर थोड़ा परिवर्तन आना शुरू हो जाएगा क्योंकि राज योगा मेडिटेशन से हमारे कर्मों का हिसाब किताब सब तो होता है धन्यवाद

bahut accha prashna hai jis insaan me sochne ki shakti nahi hoti hai kya vaah insaan jaanvaro ke saman hai aisa nahi bol sakte hain ki vaah insaan jaanvaro ke saman hai par haan jiske andar socks sochne ki shakti nahi hoti hai vaah pichle janam me kisi ko bahut torture kiya hota hai usko bahut zyada torture karne ke karan uska jeevan jaanvaro ki tarah ho gaya tha mana manushya janwar ki tarah behave karna shuru karta hai is karan hi is janam me usko sochne ki shakti kam hai isliye uski bhi 1 jaanvaro ki tarah ho gaya par janwar ke saman nahi hai vaah vaah karm bhog bhog raha hai isliye usko pehle kya karna hai ki usko prajapita brahmakumari ishwariya vishwavidyalaya me jaakar rajyo ka meditation par aakar usko thoda long time mil teshan kare toh uske sochne me sochna ki shakti badh jayegi aur unke andar thoda parivartan aana shuru ho jaega kyonki raj yoga meditation se hamare karmon ka hisab kitab sab toh hota hai dhanyavad

बहुत अच्छा प्रश्न है जिस इंसान में सोचने की शक्ति नहीं होती है क्या वह इंसान जानवरों के सम

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

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आपने कहा जिस इंसान में सोचने समझने की शक्ति नहीं होती क्या मैं इंसान जानवरों के समान है नहीं है तो वह भी मनुष्य डोटामिन मनुष्य की चारणवाला उसके बीजों का जो आंख और एक मुख और एक विवेक और बुद्धि आप ने यह कहा कि जिन लोगों के पास सोचने समझने की शक्ति नहीं होती है नहीं सर संतान में कोई इंसान ऐसा नहीं है जिसके पास सोचने समझने की शक्ति ना लोग सोचना समझना नहीं चाहती क्योंकि कोई सोचते हैं कि जिस चीज से हमें कोई फायदा नहीं उसके विषय में सोच कर क्या करना या जहां उनके सामने आर्थिक समस्याएं आती हो सोचना बंद कर देते हैं गेट जहां लोगों के सामने कोई नई चीज आती है तो वह दूसरों को बेवकूफ या बेवकूफ बनाने वाला इंसान समझ जाते हैं इस तरह की विभिन्न क्रियाएं प्रक्रियाएं उनके द्वारा प्रकट होती है और यह क्रिया योग प्रक्रियाएं यह प्रकट करती हैं कि उनके पास सोचना और समझना तो है लेकिन वह नकारात्मक विचार रखते हैं नकारात्मक सोच रखते हैं नकारात्मक सोच के कारण वे लोग जो है किसी दूसरे की भावनाओं को नहीं जानते दूसरों की महत्व को नहीं समझते दूसरों के द्वारा किए गए उपकार को नहीं समझते और दूसरों के द्वारा उनके साथ इंसानियत का 2 परचे उन्हें दिया गया उनको नहीं समझते तो ऐसे लोग जानबूझकर नहीं करते या समझना नहीं चाहते तो वाकई इंसान इंसान होकर भी पशु समान हम यह कहें कि ऊपर सुई है कि जो सब कुछ समझ कर भी नासमझ बने या अंजान बने कैसे लोगों का भविष्य जीवन अंधकारमय होता

aapne kaha jis insaan me sochne samjhne ki shakti nahi hoti kya main insaan jaanvaro ke saman hai nahi hai toh vaah bhi manushya dotamin manushya ki charanvala uske beejon ka jo aankh aur ek mukh aur ek vivek aur buddhi aap ne yah kaha ki jin logo ke paas sochne samjhne ki shakti nahi hoti hai nahi sir santan me koi insaan aisa nahi hai jiske paas sochne samjhne ki shakti na log sochna samajhna nahi chahti kyonki koi sochte hain ki jis cheez se hamein koi fayda nahi uske vishay me soch kar kya karna ya jaha unke saamne aarthik samasyaen aati ho sochna band kar dete hain gate jaha logo ke saamne koi nayi cheez aati hai toh vaah dusro ko bewakoof ya bewakoof banane vala insaan samajh jaate hain is tarah ki vibhinn kriyaen prakriyaen unke dwara prakat hoti hai aur yah kriya yog prakriyaen yah prakat karti hain ki unke paas sochna aur samajhna toh hai lekin vaah nakaratmak vichar rakhte hain nakaratmak soch rakhte hain nakaratmak soch ke karan ve log jo hai kisi dusre ki bhavnao ko nahi jante dusro ki mahatva ko nahi samajhte dusro ke dwara kiye gaye upkar ko nahi samajhte aur dusro ke dwara unke saath insaniyat ka 2 parche unhe diya gaya unko nahi samajhte toh aise log janbujhkar nahi karte ya samajhna nahi chahte toh vaakai insaan insaan hokar bhi pashu saman hum yah kahein ki upar sui hai ki jo sab kuch samajh kar bhi nasamajh bane ya anjaan bane kaise logo ka bhavishya jeevan andhakarmay hota

आपने कहा जिस इंसान में सोचने समझने की शक्ति नहीं होती क्या मैं इंसान जानवरों के समान है नह

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Gopal Srivastava

Acupressure Acupuncture Sujok Therapist

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जो इंसान में सोचने समझने की शक्ति नहीं होती वह कोई ऐसा इंसान नहीं है कोई भी ऐसा इंसान नहीं है छोटा बच्चा है उसको गोदी में लेकर उठा लोगे तो उसको पता है कि आप गिर जाऊंगा मैं तो वह फट आप का कॉलर पकड़ लेगा ठीक है बच्चा गोदी में है 6 महीने का है उसका पकड़ोगे तो फटाफट कलर पकड़े हो सकता है कि जब चोट लगी मुझे जो आदमी कह रहा कि मुझे सोचने समझने की शक्ति नहीं है झूठ बोला आपसे कोई इंसान ऐसा नहीं जिस इंसान का जीवन है क्यों सोच सकता है समझ सकता है ईमानदारी से काम कर सकता है

jo insaan me sochne samjhne ki shakti nahi hoti vaah koi aisa insaan nahi hai koi bhi aisa insaan nahi hai chota baccha hai usko godi me lekar utha loge toh usko pata hai ki aap gir jaunga main toh vaah phat aap ka collar pakad lega theek hai baccha godi me hai 6 mahine ka hai uska pakdoge toh phataphat color pakde ho sakta hai ki jab chot lagi mujhe jo aadmi keh raha ki mujhe sochne samjhne ki shakti nahi hai jhuth bola aapse koi insaan aisa nahi jis insaan ka jeevan hai kyon soch sakta hai samajh sakta hai imaandaari se kaam kar sakta hai

जो इंसान में सोचने समझने की शक्ति नहीं होती वह कोई ऐसा इंसान नहीं है कोई भी ऐसा इंसान नहीं

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Shubham Saini

Software Engineer

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जिस इंसान में सोचने समझने की क्षमता नहीं है तो हम उसकी तुलना में जानवरों से नहीं कर सकते हैं इंसान शिर्डी में जो व्यक्ति जन्म लिया है वह इंसान हालांकि उसकी सोचने और समझने की क्षमता कम है फिर भी वह तो इंसान

jis insaan me sochne samjhne ki kshamta nahi hai toh hum uski tulna me jaanvaro se nahi kar sakte hain insaan shirdi me jo vyakti janam liya hai vaah insaan halaki uski sochne aur samjhne ki kshamta kam hai phir bhi vaah toh insaan

जिस इंसान में सोचने समझने की क्षमता नहीं है तो हम उसकी तुलना में जानवरों से नहीं कर सकते ह

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इंसान मेरा सोचने समझने की शक्ति नहीं तब तो पागल हो जाता है वह संवेदनहीन कहलाता है जानवर के अंदर भी सोचने की शक्ति होती है अभी मालूम रहता कि घर कहां पर है मुझे क्या खाना है कहां मिलेगा सुबह सोचने से बिल्कुल बोल नहीं पाता है वह घर इंसान के अंदर इन दोनों चीजों की कमी से

insaan mera sochne samjhne ki shakti nahi tab toh Pagal ho jata hai vaah samvedanhin kehlata hai janwar ke andar bhi sochne ki shakti hoti hai abhi maloom rehta ki ghar kaha par hai mujhe kya khana hai kaha milega subah sochne se bilkul bol nahi pata hai vaah ghar insaan ke andar in dono chijon ki kami se

इंसान मेरा सोचने समझने की शक्ति नहीं तब तो पागल हो जाता है वह संवेदनहीन कहलाता है जानवर के

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Abhishek prajapati

Education And Motivational Speaker

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जी नमस्ते आप का सवाल है कि जिस इंसान में सोचने समझने की शक्ति नहीं होती है क्या वह इंसान जानवरों के समान है तो यह कहना बिल्कुल तार्किक पूर्ण होगा बिल्कुल सही है वास्तविक है क्योंकि जानवर ही ऐसा कार्य करते हैं आपने देखा होगा जो भी इंसान बिगड़ सोचे समझे जो भी कार्य करता है जो भी फैसला करता है एकदम से बिगड़ सोचे समझे कार्य नहीं करना चाहिए यदि कोई व्यक्ति करता है तो वह जानवर के समान है ऐसा नहीं नहीं ऐसा बताते हैं लोग क्योंकि इंसान में बुद्धि होती है और बुद्धि का यूज किया जाना अति आवश्यक है किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के लिए यदि कोई व्यक्ति अपना यूज नहीं कर रहा है बुद्धि का तो कोई जानवर के तुल्य माना जाएगा इसमें कोई संकोच नहीं है क्योंकि आपने देखा होगा जानवर बगैर सोचे-समझे कहीं भी किसी भी रास्ते में चल जाता है कहीं भी बैठ जाता है कहीं दूर जाता है धन्यवाद

ji namaste aap ka sawaal hai ki jis insaan me sochne samjhne ki shakti nahi hoti hai kya vaah insaan jaanvaro ke saman hai toh yah kehna bilkul tarkik purn hoga bilkul sahi hai vastavik hai kyonki janwar hi aisa karya karte hain aapne dekha hoga jo bhi insaan bigad soche samjhe jo bhi karya karta hai jo bhi faisla karta hai ekdam se bigad soche samjhe karya nahi karna chahiye yadi koi vyakti karta hai toh vaah janwar ke saman hai aisa nahi nahi aisa batatey hain log kyonki insaan me buddhi hoti hai aur buddhi ka use kiya jana ati aavashyak hai kisi bhi mahatvapurna karya ke liye yadi koi vyakti apna use nahi kar raha hai buddhi ka toh koi janwar ke tulya mana jaega isme koi sankoch nahi hai kyonki aapne dekha hoga janwar bagair soche samjhe kahin bhi kisi bhi raste me chal jata hai kahin bhi baith jata hai kahin dur jata hai dhanyavad

जी नमस्ते आप का सवाल है कि जिस इंसान में सोचने समझने की शक्ति नहीं होती है क्या वह इंसान ज

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Aniel K Kumar Imprints

NLP Master Life Coach, Motivational Speaker

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नमस्कार मैं नीचे कुमार इंप्रिंट एंथिमलाई पहुंच आज आपके साथ जुड़ा हूं और आप का सवाल है कि जिस इंसान को सोचने समझने की शक्ति नहीं है क्या वह इंसान जानवरों के समान है इसमें कोई दो राय नहीं ऐसे क्या आपको विवेचना नहीं देती आपको सोचने की शक्ति क्षमता और वह एक दूसरे से कंपैरिजन का कांसेप्ट नहीं रखती वह उसमें इशू यही आ जाता है कि जब अगर आप किस चीज को नहीं तुलना कर पाते हो तो आप मैं और एनिमल्स में कोई डिफरेंस नहीं होता नहीं उठाओगे तो इसलिए ज्ञान अपने आप में परिपूर्ण है जब आप ज्ञान ज्ञान होता है आपको तो आप उसमें सही और गलत का निर्णय कर पाते हैं यहां यदि ज्ञान नहीं है तो सिर्फ आप स्वार्थ की भावना समझते हैं कि मुझे से क्या नुकसान है या मुझे से क्या फायदा है आगरा को किसी से डर लग रहा था उस बैठक करेंगे और अगर आपको डर नहीं लग रहा है आपको उससे कोई लेना देना नहीं है तो आप उतना ही उसका वाइट कर देंगे ज्ञान का होना बहुत जरूरी है और ज्ञान ही आपको सोचने समझने की शक्ति देता है और ज्ञान ही आपको सही और गलत का निर्णय देता है जान यानी एजुकेशन मस्त है एक और वही एजुकेशन ही एक इंसान को और एक जानवर को सिगरेट करता है अपडेट करता है वेरीफाई करता है कि कितना खून है एजुकेशन का मतलब यह सर्टिफिकेट का मंडल बांध लेना आपके पास तुलनात्मक निर्णय ले भाई सही है अगर आशा करता हूं यह जवाब आपको सहायता करेगा आगे बढ़ने में खुश रहने में मुस्कुराने में और जिंदगी के मजे हिंद जय भारत

namaskar main niche kumar imprint enthimalai pohch aaj aapke saath juda hoon aur aap ka sawaal hai ki jis insaan ko sochne samjhne ki shakti nahi hai kya vaah insaan jaanvaro ke saman hai isme koi do rai nahi aise kya aapko vivechna nahi deti aapko sochne ki shakti kshamta aur vaah ek dusre se kampairijan ka concept nahi rakhti vaah usme issue yahi aa jata hai ki jab agar aap kis cheez ko nahi tulna kar paate ho toh aap main aur animals me koi difference nahi hota nahi uthaoge toh isliye gyaan apne aap me paripurna hai jab aap gyaan gyaan hota hai aapko toh aap usme sahi aur galat ka nirnay kar paate hain yahan yadi gyaan nahi hai toh sirf aap swarth ki bhavna samajhte hain ki mujhe se kya nuksan hai ya mujhe se kya fayda hai agra ko kisi se dar lag raha tha us baithak karenge aur agar aapko dar nahi lag raha hai aapko usse koi lena dena nahi hai toh aap utana hi uska white kar denge gyaan ka hona bahut zaroori hai aur gyaan hi aapko sochne samjhne ki shakti deta hai aur gyaan hi aapko sahi aur galat ka nirnay deta hai jaan yani education mast hai ek aur wahi education hi ek insaan ko aur ek janwar ko cigarette karta hai update karta hai verify karta hai ki kitna khoon hai education ka matlab yah certificate ka mandal bandh lena aapke paas tulnaatmak nirnay le bhai sahi hai agar asha karta hoon yah jawab aapko sahayta karega aage badhne me khush rehne me muskurane me aur zindagi ke maje hind jai bharat

नमस्कार मैं नीचे कुमार इंप्रिंट एंथिमलाई पहुंच आज आपके साथ जुड़ा हूं और आप का सवाल है कि ज

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Dr. Sudha Chauhan

Author / Social Worker/Writer

1:11
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इस संसार में सोचने समझने की शक्ति नहीं होती क्या वह इंसान जानवरों के सम्मान में यह बात सत्य है कि सोचने समझने और तर्क करने की शक्ति केवल इंसानों के पास ही होती है वह अच्छा बुरा सोच सकते समझ सकते परंतु जानवरों में तर्क शक्ति और सोचने समझने की शक्ति का अभाव होता है इसलिए यह उपमा दी जाती है कि वह सोचने समझने की शक्ति नहीं होती तो वह इंसान जानवर के समान है लेकिन वह इंसान तो है उसकी पूर्ति की तुलना जानवरों से की जा रही है उसके शरीर की नहीं इसलिए क्या बात सत्य है कि सोचने समझने की शक्ति इंसानों में ही है जानवरों में नहीं धन्यवाद दोस्तों को

is sansar me sochne samjhne ki shakti nahi hoti kya vaah insaan jaanvaro ke sammaan me yah baat satya hai ki sochne samjhne aur tark karne ki shakti keval insano ke paas hi hoti hai vaah accha bura soch sakte samajh sakte parantu jaanvaro me tark shakti aur sochne samjhne ki shakti ka abhaav hota hai isliye yah upma di jaati hai ki vaah sochne samjhne ki shakti nahi hoti toh vaah insaan janwar ke saman hai lekin vaah insaan toh hai uski purti ki tulna jaanvaro se ki ja rahi hai uske sharir ki nahi isliye kya baat satya hai ki sochne samjhne ki shakti insano me hi hai jaanvaro me nahi dhanyavad doston ko

इस संसार में सोचने समझने की शक्ति नहीं होती क्या वह इंसान जानवरों के सम्मान में यह बात सत्

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RAJKUMAR

Sharp Astrology

1:44
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ओम शांति जिस इंसान में सोचने की समझने की शक्ति नहीं होती जानवरों के समान भैया ऐसा कुछ नहीं है जब आदमी सो जाता है तो भी सोचता रहता है और वह सोच से उनके सपने बन जाते और वह सपने में भी सोचता है तो यहां पर सोचना हो ना वह तो पॉसिबल है ही नहीं समझना होना ही हो सकता है अभी इस धरती में जिसके पास पैसे नहीं है ना मान लो कि तुम्हारे पास एक भी रुपया नहीं है ना तुम्हारे में आप है ना तुम्हारे पास ना कोई आपका साथी दार होता है ना आपका रहने का घर होता है तो आदमी का जीवन होने के बाद भी वह पशु के समान इधर-उधर ठोकर खाता है कि दोस्तों जिसके पास लक्ष्मी नहीं पहले वह पशु समान है दूसरा जिसके पास ज्ञान नहीं वह पशु के समान है इतरा जो ज्यादा सब कुछ होते हुए भी जिसके पास लक्ष्मी दी है जिसके पास ज्ञान भी है लेकिन वह सोया रहता है कुछ करता नहीं है किसी को हेल्प करने की भावना नहीं या खुद को और आगे बढ़ने की भावना नहीं है तो वह भी पशु के समान है ओम शांति

om shanti jis insaan me sochne ki samjhne ki shakti nahi hoti jaanvaro ke saman bhaiya aisa kuch nahi hai jab aadmi so jata hai toh bhi sochta rehta hai aur vaah soch se unke sapne ban jaate aur vaah sapne me bhi sochta hai toh yahan par sochna ho na vaah toh possible hai hi nahi samajhna hona hi ho sakta hai abhi is dharti me jiske paas paise nahi hai na maan lo ki tumhare paas ek bhi rupya nahi hai na tumhare me aap hai na tumhare paas na koi aapka sathi daar hota hai na aapka rehne ka ghar hota hai toh aadmi ka jeevan hone ke baad bhi vaah pashu ke saman idhar udhar thokar khaata hai ki doston jiske paas laxmi nahi pehle vaah pashu saman hai doosra jiske paas gyaan nahi vaah pashu ke saman hai itra jo zyada sab kuch hote hue bhi jiske paas laxmi di hai jiske paas gyaan bhi hai lekin vaah soya rehta hai kuch karta nahi hai kisi ko help karne ki bhavna nahi ya khud ko aur aage badhne ki bhavna nahi hai toh vaah bhi pashu ke saman hai om shanti

ओम शांति जिस इंसान में सोचने की समझने की शक्ति नहीं होती जानवरों के समान भैया ऐसा कुछ नहीं

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RISHAV RAJ

Social Worker | Motivational Speaker | Life Coach | Young Politician | Corporate Trainer

3:00
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विकी ऐसा नहीं है कि जिस इंसान में सोचने से शक्ति नहीं है वहां जानवरों के समान है को देखिए कुछ ना कुछ सब के अंदर कारण होती है हमारे यहां सोसाइटी का यह मानना होता है जो कि मैं सोसाइटी में बहुत सी बातें हैं जो कि मैं खराब होती है वह समझ नहीं पाते तो एक दूसरे से गवार लोग जो होते वह बोलती है कि गाय का मूत्र पीना चाहिए खुद नहीं पीते हैं लोग बोलते हो कि हम सब कुत्ते का भी है कुल्लू का है सब उसी तरह डाइजेस्टिव सिस्टम जब हमारे इंटरनल पेट में जो हम खाते हैं जो पैसा बनता है सुबह-शाम बनता है जो भी हमारे पेट में जो होता है वह भी रिचा एक अंदर होता डंकन द्रव्यों का मुर्गे करना उसके अंदर होता है यह समझने वाली बात है उसी तरह के कुछ नहीं सकती कम नहीं होती वह बंदा वहां पर समझ नहीं पाता बच्चों को समझेगा नहीं बच्चे को उसके को देखेगा कुछ भी मतलब सोच नहीं पाएगा कुछ भी मतलब समझ नहीं पाएगा उसके मतलब रिक्स नहीं दे पाएगा तो सबसे पहले उसको समाज के बीच रखे हैं को अच्छी जगह पर रख देना कि इधर-उधर गंदी बातें हो रही हैं गंदे लोग हैं वहां पर ना रखें तो अगर कोई अननोन परसेंट जो सोचे नहीं पा रहा कुछ भी नहीं कर पाया तो टाइम दे उसको बोले उसको बताएं उसको दिखाएं कुछ अच्छा के लिए दिखाएं अच्छे माहौल में रखो उसको तू दिखे कुछ कर लेगा वह भी एक अच्छा गाना पीपल जैसा सोचने लगेगा समझने लगे तो कोई भी चीज दिखाओ नहीं होता हर एक कचरे का एक दिन आता है हर एक कचरे के डिब्बे का भी रिक्वायरमेंट होती है इसका अपना आर्डर होता अपना काम हो तो कोई भी चीज दुनिया में बेकार नहीं है कोई भी चीज दुनिया में बेकार नहीं है तो हर एक चीज की इज्जत करें जो भी इंसान ऐसा है तो उसको समझाया कोशिश करें उसकी इज्जत सम्मान करें कुछ ऐसे प्यार से चेक करें अपने भाई बहन की तरह अपने घरवालों की तरह और फिर देखिए वह रास्ते पर आएंगे सही रास्ते पर अच्छा सोचेंगे जब कोई इंसान इंसान इंसान और जानवर जो किसी को भी कंट्रोल रखें अच्छा बोले किसी को अच्छा मोटिवेट करें खराब ना बोले अच्छा सोचते हैं अच्छा सोचने को मजबूर करें अच्छी बातें करो अच्छे से बातें बताएं

vicky aisa nahi hai ki jis insaan me sochne se shakti nahi hai wahan jaanvaro ke saman hai ko dekhiye kuch na kuch sab ke andar karan hoti hai hamare yahan society ka yah manana hota hai jo ki main society me bahut si batein hain jo ki main kharab hoti hai vaah samajh nahi paate toh ek dusre se gavar log jo hote vaah bolti hai ki gaay ka mutra peena chahiye khud nahi peete hain log bolte ho ki hum sab kutte ka bhi hai kullu ka hai sab usi tarah digestive system jab hamare internal pet me jo hum khate hain jo paisa banta hai subah shaam banta hai jo bhi hamare pet me jo hota hai vaah bhi richa ek andar hota duncan dravyon ka murge karna uske andar hota hai yah samjhne wali baat hai usi tarah ke kuch nahi sakti kam nahi hoti vaah banda wahan par samajh nahi pata baccho ko samjhega nahi bacche ko uske ko dekhega kuch bhi matlab soch nahi payega kuch bhi matlab samajh nahi payega uske matlab riks nahi de payega toh sabse pehle usko samaj ke beech rakhe hain ko achi jagah par rakh dena ki idhar udhar gandi batein ho rahi hain gande log hain wahan par na rakhen toh agar koi unknown percent jo soche nahi paa raha kuch bhi nahi kar paya toh time de usko bole usko bataye usko dikhaen kuch accha ke liye dikhaen acche maahaul me rakho usko tu dikhe kuch kar lega vaah bhi ek accha gaana pipal jaisa sochne lagega samjhne lage toh koi bhi cheez dikhaao nahi hota har ek kachre ka ek din aata hai har ek kachre ke dibbe ka bhi requirement hoti hai iska apna order hota apna kaam ho toh koi bhi cheez duniya me bekar nahi hai koi bhi cheez duniya me bekar nahi hai toh har ek cheez ki izzat kare jo bhi insaan aisa hai toh usko samjhaya koshish kare uski izzat sammaan kare kuch aise pyar se check kare apne bhai behen ki tarah apne gharwaalon ki tarah aur phir dekhiye vaah raste par aayenge sahi raste par accha sochenge jab koi insaan insaan insaan aur janwar jo kisi ko bhi control rakhen accha bole kisi ko accha motivate kare kharab na bole accha sochte hain accha sochne ko majboor kare achi batein karo acche se batein bataye

विकी ऐसा नहीं है कि जिस इंसान में सोचने से शक्ति नहीं है वहां जानवरों के समान है को देखिए

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Paras

Blessing Baba

1:12
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जी हां जिस इंसान की सोचने और समझने की शक्ति नहीं होती वह इंसान जानवरों के समान ही हैं क्योंकि अगर उस सबसे पहले इंसान को भगवान ने बनाया और भगवान ने जो बुद्धि की शक्ति है वह इंसानों को ही दिए कोई भी जानवर आप देख लो ना तो वह बात कर सकता है ना विचार-विमर्श कर सकता है चले उसको खाने की बुद्धि दी गई है इसलिए अगर मानव में बुद्धि ना हो तो एक जानवर के समान ही है और कोई भी कार्य करता है तो इंसानों जैसे नहीं कर पाता या तो वह आतंकवादी होगा या कोई आकृति कार्य जरूर करता होगा जिसके कारण आने वाले समय में आने वाले उसका यह जीवन समाप्त होने के बाद उसको जानवर की योनि की मिलेगी तो कोई भी होनी उसको मिल सकती है जैसे उसके करते होंगे जैसा उसने काम किया होगा जैसे उसमें पाप किया होंगे तो मुझे लगता है कि इंसान में सोचने समझने की शक्ति नहीं होती है तो वह इंसान जानवरों के समान है

ji haan jis insaan ki sochne aur samjhne ki shakti nahi hoti vaah insaan jaanvaro ke saman hi hain kyonki agar us sabse pehle insaan ko bhagwan ne banaya aur bhagwan ne jo buddhi ki shakti hai vaah insano ko hi diye koi bhi janwar aap dekh lo na toh vaah baat kar sakta hai na vichar vimarsh kar sakta hai chale usko khane ki buddhi di gayi hai isliye agar manav me buddhi na ho toh ek janwar ke saman hi hai aur koi bhi karya karta hai toh insano jaise nahi kar pata ya toh vaah aatankwadi hoga ya koi akriti karya zaroor karta hoga jiske karan aane waale samay me aane waale uska yah jeevan samapt hone ke baad usko janwar ki yoni ki milegi toh koi bhi honi usko mil sakti hai jaise uske karte honge jaisa usne kaam kiya hoga jaise usme paap kiya honge toh mujhe lagta hai ki insaan me sochne samjhne ki shakti nahi hoti hai toh vaah insaan jaanvaro ke saman hai

जी हां जिस इंसान की सोचने और समझने की शक्ति नहीं होती वह इंसान जानवरों के समान ही हैं क्यो

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sachet chetan

allrounder

0:44
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नहीं वह इंसान जानवरों के समान तो नहीं हो सकता है क्योंकि जानवर भी वही करते हैं जो उनकी इच्छा होती है जैसे कि शेर को अगर आप पालक या गोभी या कोई सब्जी फिर आना चाहोगे तो नहीं खाएगा खाएगा मासी लेकिन आपने पूछा जिस इंसान में सोचने समझने की शक्ति नहीं होती क्या वो इंसान जानवर के समान है कुछ जानवरों से भी बदतर है क्योंकि उससे आप जो चाहो करा सकते हो उसमें कुछ पता नहीं है कि क्या सही करना है क्या गलत है क्या मेरे लिए ठीक है ठीक नहीं है इसलिए जानवरों से भी नीचे की कैटेगरी में आता है

nahi vaah insaan jaanvaro ke saman toh nahi ho sakta hai kyonki janwar bhi wahi karte hain jo unki iccha hoti hai jaise ki sher ko agar aap paalak ya gobhi ya koi sabzi phir aana chahoge toh nahi khaega khaega maasi lekin aapne poocha jis insaan me sochne samjhne ki shakti nahi hoti kya vo insaan janwar ke saman hai kuch jaanvaro se bhi badataar hai kyonki usse aap jo chaho kara sakte ho usme kuch pata nahi hai ki kya sahi karna hai kya galat hai kya mere liye theek hai theek nahi hai isliye jaanvaro se bhi niche ki category me aata hai

नहीं वह इंसान जानवरों के समान तो नहीं हो सकता है क्योंकि जानवर भी वही करते हैं जो उनकी इच्

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Rakesh Samdadiya

Business Owner

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Mamta Sen

Retired Teacher

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Lokesh kesharwani

Psychologist & Philosopher (Life Coach), Counsellor Of Everything.

1:03

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आप इतने दिन इंसान में सोचने समझने की शक्ति नहीं होती क्या वह इंसान जानवरों का समान है तो मैं बताना चाहूंगा कि कुछ हद तक हम कह सकते हैं कि वह जानवरों के ही समान है इंसान अपनी बुद्धि अपनी सोचने समझने की शक्ति से ही इंसान के रूप में जाना जाता है कि नहीं जाता है और भी क्योंकि जानवर भी कुछ न कुछ समझ पाते हैं हमारे इशारों को जानवर भी समझते हैं और कुछ न कुछ भी समझ पाते हैं जो भी किया गया है जहां तक बात रही इंसान की जमीन का सोचने समझने की शक्ति खत्म हो जाते हैं तो यह बात तो सच है कि वह इंसान जानवरों के समान हो जाता है वह बुद्धि से तो जानवर का समर्थन देगा लेकिन बुद्धि रूप में बुद्धा

aap itne din insaan me sochne samjhne ki shakti nahi hoti kya vaah insaan jaanvaro ka saman hai toh main batana chahunga ki kuch had tak hum keh sakte hain ki vaah jaanvaro ke hi saman hai insaan apni buddhi apni sochne samjhne ki shakti se hi insaan ke roop me jana jata hai ki nahi jata hai aur bhi kyonki janwar bhi kuch na kuch samajh paate hain hamare ishaaron ko janwar bhi samajhte hain aur kuch na kuch bhi samajh paate hain jo bhi kiya gaya hai jaha tak baat rahi insaan ki jameen ka sochne samjhne ki shakti khatam ho jaate hain toh yah baat toh sach hai ki vaah insaan jaanvaro ke saman ho jata hai vaah buddhi se toh janwar ka samarthan dega lekin buddhi roop me buddha

आप इतने दिन इंसान में सोचने समझने की शक्ति नहीं होती क्या वह इंसान जानवरों का समान है तो म

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