हमारी ज़िंदगी में हमारे लिए क्या आवश्यक है - भगवान की भक्ति करना या अपने लिए अच्छी तरह से कर्म करना?...


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Dr. Suman Aggarwal

Personal Development Coach

0:23

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मेरे विचार से भगवान भी उन्हीं लोगों से खुश होते हैं जो अपना काम सही तरह से करते हैं तो अगर आप भगवान की भक्ति ही करते रहे और अपने काम को अपनी जिम्मेदारियों को ना निभाए तो भगवान को भी कहीं ना कहीं दुख होगा तो इससे अच्छा है आप अपने काम को बहुत अच्छे से करें अपने आसपास के लोगों को खुश रखे भगवान अपने आप ही आपसे खुश हो जाएंगे

mere vichar se bhagwan bhi unhi logo se khush hote hain jo apna kaam sahi tarah se karte hain toh agar aap bhagwan ki bhakti hi karte rahe aur apne kaam ko apni jimmedariyon ko na nibhaye toh bhagwan ko bhi kahin na kahin dukh hoga toh isse accha hai aap apne kaam ko bahut acche se kare apne aaspass ke logo ko khush rakhe bhagwan apne aap hi aapse khush ho jaenge

मेरे विचार से भगवान भी उन्हीं लोगों से खुश होते हैं जो अपना काम सही तरह से करते हैं तो अगर

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Maulin Pandya

Life Coach and Entrepreneur

2:00
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हाय गाइस मेरा नाम मोहन पंड्या है और अगर यह जो सवाल आ जाता है कि भगवान की भक्ति करनी चाहिए या फिर हमें अपने लिए अपनी जिंदगी जीनी चाहिए तो मैं आपको सिर्फ यह कहना चाहूंगा कि जी हां हमें अपने लिए ही अपनी जिंदगी जीनी चाहिए भगवान की भक्ति में हमें अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहिए क्योंकि एक इमेज इन कीजिए कि आपके पैरेंट्स ने आपके लिए एक बहुत आलीशान घर खरीदा है ठीक है और वह आपको कहते हैं कि यह घर हमारे लिए है और यह जो रूप हैं वह आपके लिए है और हम उस रूम को देखते वह बिल्कुल खाली है और वह हमें यह कहते हैं कि इस रूम को हमें बसाना है ठीक है अपने ही पैसों से अपने खर्चे से इस रूम को सजाना है इसको बहुत बेहतरीन डेकोरेट करना है तो अब आप मुझे यह बताइए कि क्या हम हर रोज हर सुबह को उठकर क्या हम अपने पेरेंट्स को थैंक यू थैंक यू थैंक यू थैंक यू ऐसे कहते रहते है क्या नहीं बिल्कुल नहीं हम यही सोचते हैं कि अब हमें क्या करना है इस रूम को बचाने के लिए हमें बाहर जाना है हमें कुछ पैसे उसे कुछ खरीदना होगा कुछ काम करेंगे तो और पैसा मिलेगा जिसे हम अपने इस रूम को अच्छे से अच्छे लेवल पर डेकोरेट करें तो मैं यही कहना चाहता हूं दोस्तों की इस पृथ्वी पर आपको जब यह कुदरत ने भेजा है तो अपनी जिंदगी को इस रूम के तरीके से देखिए जिसे हमें डेकोरेट करना है जिसे हमें जीना है तो क्या आप हर सुबह या फिर हर 2 मिनट में भक्ति करते रहेंगे थैंक्यू भगवान थैंक्यू भगवान थैंक्यू भगवान या फिर इस जिंदगी को जीने जो आपको दी गई है उसे खुल कीजिए उसके उसको बेहतरीन बनाने की कोशिश कीजिए ईश्वर ने तो आपको भेजा है तो वह तो कुछ सोच समझकर ही भेजता है तो उससे वह एक्सपेक्ट नहीं करता है कि वह थैंक यू थैंक यू थैंक यू एवरी मोमेंट यू आपको दे तो भगवान की भक्ति जो होती है यह कोई एक तरीका है जिससे मैं आपको इंटरप्रेट करो मैं यह नहीं कह रहा हूं कि लोग गलत है जो लोग भक्ति करते हैं मंदिर जाते ह नो टॉकिंग अबाउट दैट प्लीज उसको इस के साथ जोड़ने की कोशिश मत कीजिए उनकी अलग भावनाएं होती है आईएस बैक डेट अजमेर लेकिन सिर्फ भक्ति में ही जिंदगी निकाल ना वह गलत है थैंक यू

hi guys mera naam mohan pandya hai aur agar yah jo sawaal aa jata hai ki bhagwan ki bhakti karni chahiye ya phir hamein apne liye apni zindagi gini chahiye toh main aapko sirf yah kehna chahunga ki ji haan hamein apne liye hi apni zindagi gini chahiye bhagwan ki bhakti mein hamein apna samay barbad nahi karna chahiye kyonki ek image in kijiye ki aapke pairents ne aapke liye ek bahut aalishan ghar kharida hai theek hai aur vaah aapko kehte hain ki yah ghar hamare liye hai aur yah jo roop hain vaah aapke liye hai aur hum us room ko dekhte vaah bilkul khaali hai aur vaah hamein yah kehte hain ki is room ko hamein basana hai theek hai apne hi paison se apne kharche se is room ko sajana hai isko bahut behtareen decorate karna hai toh ab aap mujhe yah bataye ki kya hum har roj har subah ko uthakar kya hum apne parents ko thank you thank you thank you thank you aise kehte rehte hai kya nahi bilkul nahi hum yahi sochte hain ki ab hamein kya karna hai is room ko bachane ke liye hamein bahar jana hai hamein kuch paise use kuch kharidna hoga kuch kaam karenge toh aur paisa milega jise hum apne is room ko acche se acche level par decorate kare toh main yahi kehna chahta hoon doston ki is prithvi par aapko jab yah kudrat ne bheja hai toh apni zindagi ko is room ke tarike se dekhiye jise hamein decorate karna hai jise hamein jeena hai toh kya aap har subah ya phir har 2 minute mein bhakti karte rahenge thainkyu bhagwan thainkyu bhagwan thainkyu bhagwan ya phir is zindagi ko jeene jo aapko di gayi hai use khul kijiye uske usko behtareen banane ki koshish kijiye ishwar ne toh aapko bheja hai toh vaah toh kuch soch samajhkar hi bhejta hai toh usse vaah expect nahi karta hai ki vaah thank you thank you thank you every moment you aapko de toh bhagwan ki bhakti jo hoti hai yah koi ek tarika hai jisse main aapko interpret karo main yah nahi keh raha hoon ki log galat hai jo log bhakti karte hain mandir jaate h no talking about that please usko is ke saath jodne ki koshish mat kijiye unki alag bhaavnaye hoti hai ias back date ajmer lekin sirf bhakti mein hi zindagi nikaal na vaah galat hai thank you

हाय गाइस मेरा नाम मोहन पंड्या है और अगर यह जो सवाल आ जाता है कि भगवान की भक्ति करनी चाहिए

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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

2:45
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अमर डीप परम आवश्यक है भगवान की भक्ति करना और भक्ति भी बनाकर मुख्य नहीं हो सकती है कर्म करेंगे जभी तो भक्ति होती है इस शरीर से ही भक्तों सभी से रहित होकर क्या भक्ति नहीं कर सकते देवताओं को देख लीजिए दत्ता देवता लोग हो गए स्वयंवर में रहते हैं वह कभी भगवान की भक्ति नहीं कर पाते हैं यही कारण है कि समस्त भक्त कवियों ने केवल मानव जन्म की कामना की है किसी ने भेज दी भक्तों को नहीं मारना है किसी देवी देवताओं को बंद करके स्वर्ग में रहना पसंद नहीं किया है क्योंकि अपने इष्टदेव का नंबर नापा नहीं कर सकते हैं वहां चिंता नहीं कर सकते हैं वहां तुम हो गए सॉरी का जिंदगी है सॉरी में कभी भी मानव भगवान कृष्ण नहीं करता है यही कारण है कि देखते हो आप लोग जितने भी करोड़पति हैं धनपति कुबेर हैं यह भोग ऐश्वर्य में बंद रहते हैं वे कभी इस प्रकार नमन नहीं करते यह मनमाड की प्रवृत्ति है कि जब मानव को सुख होता है वह कभी ईश्वर का ध्यान नहीं करता कभी मन नहीं करता कभी चंदन नहीं करता कभी बंधन नहीं करता है लेकिन जब मानव पर दुख आते हैं तब मानव उस ईश्वर को स्मरण करता है उसका चिंतन करता है उसके लिए व्रत रहता है उसका पूजन करता है सब ध्यान लगाकर कि भगवान के को स्मरण करता है दुखों से मुक्ति प्राप्त करने के लिए संकटों से बचने के लिए बाधाओं से बचने के लिए यह मानव आज का मानव छल कपट झूठ फरेब अन्याय अधर्म सभी का से भरा हुआ स्वार्थ का एक पुतला है यदि मानव को यह संकटों का भाई नहीं हो दुखों का भाई नहीं वह मृत्यु का भय नहीं हो तो आज का इंसान इंसान को खा जाएगा इंसान भगवान की भक्ति का नहीं करेगा इसलिए कबीर दास जी ने कहा कि दुख में सुमिरन सब करे सुख में करे न कोई जो सुख में सुमिरन करे तो दुख काहे को होय इंसान केवल दुख में ही भगवान की भक्ति करता है दुखों से मुक्ति पाने के लिए ही भगवान की भक्ति करता है संकटों से बचने के लिए भगवान की भक्ति भगवान की भक्ति करता है वह प्राप्ति के देव भगवान की भक्ति करता है मृत्यु के भय से बचने के लिए आदमी दुर्गति से बचने के लिए भगवान की भक्ति करता है

amar deep param aavashyak hai bhagwan ki bhakti karna aur bhakti bhi banakar mukhya nahi ho sakti hai karm karenge jab bhi toh bhakti hoti hai is sharir se hi bhakton sabhi se rahit hokar kya bhakti nahi kar sakte devatao ko dekh lijiye datta devta log ho gaye sawamber mein rehte hain vaah kabhi bhagwan ki bhakti nahi kar paate hain yahi karan hai ki samast bhakt kaviyon ne keval manav janam ki kamna ki hai kisi ne bhej di bhakton ko nahi marna hai kisi devi devatao ko band karke swarg mein rehna pasand nahi kiya hai kyonki apne ishta dev ka number napa nahi kar sakte hain wahan chinta nahi kar sakte hain wahan tum ho gaye sorry ka zindagi hai sorry mein kabhi bhi manav bhagwan krishna nahi karta hai yahi karan hai ki dekhte ho aap log jitne bhi crorepati hain dhanpati kuber hain yah bhog aishwarya mein band rehte hain ve kabhi is prakar naman nahi karte yah manmad ki pravritti hai ki jab manav ko sukh hota hai vaah kabhi ishwar ka dhyan nahi karta kabhi man nahi karta kabhi chandan nahi karta kabhi bandhan nahi karta hai lekin jab manav par dukh aate hain tab manav us ishwar ko smaran karta hai uska chintan karta hai uske liye vrat rehta hai uska pujan karta hai sab dhyan lagakar ki bhagwan ke ko smaran karta hai dukhon se mukti prapt karne ke liye sankaton se bachne ke liye badhaon se bachne ke liye yah manav aaj ka manav chhal kapat jhuth fareb anyay adharma sabhi ka se bhara hua swarth ka ek putalaa hai yadi manav ko yah sankaton ka bhai nahi ho dukhon ka bhai nahi vaah mrityu ka bhay nahi ho toh aaj ka insaan insaan ko kha jaega insaan bhagwan ki bhakti ka nahi karega isliye kabir das ji ne kaha ki dukh mein sumiran sab kare sukh mein kare na koi jo sukh mein sumiran kare toh dukh kaahe ko hoy insaan keval dukh mein hi bhagwan ki bhakti karta hai dukhon se mukti paane ke liye hi bhagwan ki bhakti karta hai sankaton se bachne ke liye bhagwan ki bhakti bhagwan ki bhakti karta hai vaah prapti ke dev bhagwan ki bhakti karta hai mrityu ke bhay se bachne ke liye aadmi durgati se bachne ke liye bhagwan ki bhakti karta hai

अमर डीप परम आवश्यक है भगवान की भक्ति करना और भक्ति भी बनाकर मुख्य नहीं हो सकती है कर्म करे

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Sandeep Kumar

Clinical Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मां की भक्ति करेंगे और अपने लिए क्या अच्छा कर्म करेंगे पहला तो बस चाहिए जैसे मैंने आपको बताया था कि ध्यान जो मन की स्थिरता मैं अपने आप को जाना जो हमारी खुद को अपने आप अपनी पहचान हो ना कि हम है क्या अपने ऊपर ध्यान देते हमसे जो भी निकलेगा क्योंकि मेरे पास मैं इतना ही कहूंगा अपनी तरफ

maa ki bhakti karenge aur apne liye kya accha karm karenge pehla toh bus chahiye jaise maine aapko bataya tha ki dhyan jo man ki sthirta main apne aap ko jana jo hamari khud ko apne aap apni pehchaan ho na ki hum hai kya apne upar dhyan dete humse jo bhi niklega kyonki mere paas main itna hi kahunga apni taraf

मां की भक्ति करेंगे और अपने लिए क्या अच्छा कर्म करेंगे पहला तो बस चाहिए जैसे मैंने आपको बत

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J.P. Y👌g i

Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

प्रश्न है हमारी जिंदगी में हमारे लिए क्या आवश्यक है भगवान की भक्ति करना या अपने लिए अच्छी तरह इत्यादि प्रश्न आता है कर्म करने के लिए तो ही मंच का जीवन बना हुआ है और अपने लिए हर इंसान करता है और यही होना चाहिए कि अपने लिए जो सुविधा हो सके वह जरूर ध्यान में रखना चाहिए और उसके लिए जरूर आगे विकास में रहना चाहिए कर्म के आधार पर भगवान की भक्ति दूसरे ढंग में की जाती है या तो आप दुख से आक्रांत हो उसके बाद आपका मन का अपने अंदर ही पनाह लेने के लिए अग्रसर होते हैं तो भगवान की भक्ति आध्यात्मिक अंतर्मुखी होना आवश्यक होता है तो भगवान की भक्ति उस पर भी होता है कि हम उसको आधारभूत लेकर के कोई कर्म करते हैं और जब फल की प्राप्ति होती है तो हम यह समझते हैं कि उन्हें का यह दिया हुआ आशीर्वाद है तो वह हम उस पर समर्पण करते हैं सुख में भी कर्म करते कर्म करने का जो भी सफलता होती है वह हम ईश्वर की इच्छा पर आधारित समझते हैं और उनको धन्यवाद करते हैं तो यही करता था का जो बोध होता है कि मैं अपने द्वारा कर्म कर रहा हूं तो उसमें अपना ही अहम भाव उत्पन्न होता है कि मेरे द्वारा और ना ही करता हूं तो कर्म में कोई भी चीज अगर निर्माण होता है तो वह कभी ना कभी किसी तरह का प्रवर्तन हमेशा कुछ न कुछ लाता है और वह परिवर्तन के लिए फिर संघर्ष करना पड़ता है हर चीज को मैनेज करने के लिए सदैव तत्पर पड़ता रहना पड़ता है तो यही है कि अगर भक्ति है भगवान जिंदगी में तो भक्ति तो नितांत आवश्यक है कि इसमें कोई दो राय नहीं है क्योंकि हम अपने प्रयोजन में अपने आप को अगर प्रिंटिफाई कर रहे हैं बेशक यह प्रतीकात्मक रूप में लोग और समाज यह जानते हैं कि आपके द्वारा ही मनोनीत हो रहा है लेकिन फिर भी हमारा जो अंत करण का जो साक्षी भाव है वह सोचता है कि अगर मैं किसी और सत्ता पर उसके द्वारा संचालित हो रहा है तो हमारा अहंकार ना होने की बदौलत हमें और भी उन्नत विकास के लिए हमेशा तत्परता बनी रहती है क्योंकि जहां जिस वृत्ति पर हमारा असंतोष निर्धारित होने लगता है हम वही सुनते हैं और इसलिए जगत का व्यवहार बहुत ही उच्चतम दशा में और विकास के लिए बढ़ता चला जाता है और यथार्थ उपयुक्त यहीं रहते हैं की सामर्थ जितनी है सामर्थ के प्रयोजन में कोई ना कोई निर्माण के लिए ही हम सदैव तत्पर रहें और यह अपना एक लॉजिक है कि हम भगवान के द्वारा ही हर कर्म के द्वारा ही भगवान का पूजन करते हैं भक्ति करते हैं तो अच्छी बात होती है क्योंकि भगवान के साथ लीड छोड़ना एक बहुत बड़ी उत्कर्ष का प्लेटफार्म मिलता है जिससे हम आगे निरंतर विकास की ओर उन्मुख रहते हैं तो ईश्वर जो दूसरी सत्ता है जो सर्वश्रेष्ठ है और सब चीज में समर्थ है और उसका ऐश्वर्या भाव एक अनंत है तो ऐसे आधारभूत को लेकर जब हम कोई कार्य करते हैं तो हमारा हर कार्य करने की जो दशा है वह और उन्नत सिस्टम में चलता चला जाएगा तो जिंदगी में जो आप इसमें सवाल कर रहे हैं कि आपका सवाल का जो प्रयोजन आ रहा है वहीं आ रहा है कि कि जिंदगी में विशेषता है कर्म करना चाहिए और जो भक्ति में लगे हुए सपने लेकर हमसे दाने उठा रहे हैं वह जरूर कहीं ना कहीं से दिमाग से कुछ हल्के हैं आप यह समझते हैं इसमें यह प्रशन का प्रतिभास हो रहा है तो यह नहीं है कुछ भी ऐसा और फिर कुछ दौरे से हैं कहीं ना कहीं अपने आप को समर्पण करना ही पड़ता है चाहे हम कितने भी अपने आप में संतुष्ट जिम में हो जाए तो यह अगर एक ही स्वर सत्ता है जो सब को सब के अंदर सब जगह बाहर भीतर ओतप्रोत उसकी कुछ प्रांस सदस्य ना चल रही है और उसका जो दिव्य अपना कार्यक्रम है वह प्रकृति के रूप में परिभाषित हो रहा है और उस प्रादुर्भाव से हमारे को अलौकिक में एक सकारात्मक रंजकता की उपस्थिति मिलती है और उसमें हम बहुत रोमांच होते हैं तो यह है कि अगर हम भी उस चीज से जुड़ना चाहते हैं जो सदैव नित्य रहे और अपने स्वरूप का ज्ञान हो जाओ यथार्थ रूप से कि हम शरीर के अंदर किस रूप से हमारी प्रणालियां व्याप्त है और कहां हमारा तो इस ध्यान में एक बहुत बड़ा देवरा मिलता है क्योंकि जितना समग्र राष्ट्र के अंदर अगर एक प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति उसके भान में आ जाता है कि यह मेरा पूरा पृष्ठभूमि यह मेरा शरीर मेरा है वीरों का जितना भी उसका परिवार का मेथड होता है वही वापस होता चला जाता है से शरीर के अंदर ही मन बुद्धि चित्त शरीर के पांव अंग उपांग जितने भी हैं वह सब हमारे ही आयोजन में उपस्थित हैं और यह सब एक अलग अलग डिपार्टमेंट में जा रहे हैं हम अपने उस संपूर्ण आत्मिक क्षेत्र के दायरे को समझते हैं कि यह सब हमारी सुविधा के लिए एक बहुत बड़ा कार्यालय दिया हुआ है इस वर्ष में हमारी नियुक्ति अच्छा है हम अपने आपको इसमें डिवाइड कर सकते कि मैं ऑनर हूं उसके बाद मैनेजर हैं उसी के ट्री हैं सारा मैनेजमेंट अपने अंदर ही उपस्थित कर लेते हैं तो आत्मा में भी एक राज योग बनता है राजतंत्र बन जाता है जो स्वता ही प्रथाओं में क्रिया कर रही है और बशर्ते यह है कि जो हमारा लक्ष्य है वह परमात्मा के अधीन है तो हमारा सिस्टम आत्मा का और भी उच्च स्तर में उन्नत में आ जाता है और उच्च उच्च स्तरीय प्लेटफार्म के द्वारा हम संसार में जो भी कार्य करते कल्याण दायक कार्य करते हैं और सिस्टमैटिक कल्लू करते हैं और वह अच्छा प्रोग्राम हो जाता है और जीवन को है अतीत करने का जो अपना डिपार्मेंट दिमाग की जो है जो सिस्टम है वह हमारे अधीन होकर के हमारे अनुकूलित प्रेषित होता है तो यह सारी चीजें हैं कि जितना संयम नियंत्रण में हम अपने अंतर जगत की जितने भी हमारी उर्जा है उसका सतत ज्ञान हो उसका प्रयोग करने का शतक ढंग हो जो डिप्रेशन ना करें सुरक्षात्मक रहे सुविधा पूर्ण विकास करता रहता यह सारी चीजें हैं लेकिन यह सब चीजें जब मिलती है जब हम एक ऊंची स्विच के दायरे में नियुक्त होते हैं तो वह सबसे ऊंचा महत्वपूर्ण दायरा ईश्वर ही होता है तो ईश्वर की भक्ति और कर्म अपने जीवन और समाज को सुधारने की क्षमता जैसे-जैसे बढ़ती जाती है हमें अवश्य करना चाहिए और उस गॉड गिफ्टेड है कि हमें वह क्षमता दे रहा है प्रदान हो रहा है तो हमें धन्यवाद करना चाहिए यही सारी चीजें मेरे मुखारविंद से यही बातें आ रही है धन्य बाद में वो कल की तरफ से जेपी योगी

prashna hai hamari zindagi mein hamare liye kya aavashyak hai bhagwan ki bhakti karna ya apne liye achi tarah ityadi prashna aata hai karm karne ke liye toh hi manch ka jeevan bana hua hai aur apne liye har insaan karta hai aur yahi hona chahiye ki apne liye jo suvidha ho sake vaah zaroor dhyan mein rakhna chahiye aur uske liye zaroor aage vikas mein rehna chahiye karm ke aadhar par bhagwan ki bhakti dusre dhang mein ki jaati hai ya toh aap dukh se akrant ho uske baad aapka man ka apne andar hi panah lene ke liye agrasar hote hai toh bhagwan ki bhakti aadhyatmik antarmukhi hona aavashyak hota hai toh bhagwan ki bhakti us par bhi hota hai ki hum usko adharbhut lekar ke koi karm karte hai aur jab fal ki prapti hoti hai toh hum yah samajhte hai ki unhe ka yah diya hua ashirvaad hai toh vaah hum us par samarpan karte hai sukh mein bhi karm karte karm karne ka jo bhi safalta hoti hai vaah hum ishwar ki iccha par aadharit samajhte hai aur unko dhanyavad karte hai toh yahi karta tha ka jo 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hai ki yah mera pura prishthbhumi yah mera sharir mera hai veero ka jitna bhi uska parivar ka method hota hai wahi wapas hota chala jata hai se sharir ke andar hi man buddhi chitt sharir ke paav ang upang jitne bhi hai vaah sab hamare hi aayojan mein upasthit hai aur yah sab ek alag alag department mein ja rahe hai hum apne us sampurna atmik kshetra ke daayre ko samajhte hai ki yah sab hamari suvidha ke liye ek bahut bada karyalay diya hua hai is varsh mein hamari niyukti accha hai hum apne aapko isme divide kar sakte ki main honour hoon uske baad manager hai usi ke tree hai saara management apne andar hi upasthit kar lete hai toh aatma mein bhi ek raj yog banta hai rajtantra ban jata hai jo swata hi prathaon mein kriya kar rahi hai aur basharte yah hai ki jo hamara lakshya hai vaah paramatma ke adheen hai toh hamara system aatma ka aur bhi ucch sthar mein unnat mein aa jata hai aur ucch ucch stariy platform ke dwara hum sansar mein jo bhi karya karte kalyan dayak karya karte hai aur systematic kallu karte hai aur vaah accha program ho jata hai aur jeevan ko hai ateet karne ka jo apna diparment dimag ki jo hai jo system hai vaah hamare adheen hokar ke hamare anukulit preshit hota hai toh yah saari cheezen hai ki jitna sanyam niyantran mein hum apne antar jagat ki jitne bhi hamari urja hai uska satat gyaan ho uska prayog karne ka shatak dhang ho jo depression na kare surakshatmak rahe suvidha purn vikas karta rehta yah saari cheezen hai lekin yah sab cheezen jab milti hai jab hum ek uchi switch ke daayre mein niyukt hote hai toh vaah sabse uncha mahatvapurna dayara ishwar hi hota hai toh ishwar ki bhakti aur karm apne jeevan aur samaj ko sudhaarne ki kshamta jaise jaise badhti jaati hai hamein avashya karna chahiye aur us god gifted hai ki hamein vaah kshamta de raha hai pradan ho raha hai toh hamein dhanyavad karna chahiye yahi saari cheezen mere mukharvind se yahi batein aa rahi hai dhanya baad mein vo kal ki taraf se jp yogi

प्रश्न है हमारी जिंदगी में हमारे लिए क्या आवश्यक है भगवान की भक्ति करना या अपने लिए अच्छी

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मिस्टर आपका प्रश्न है हमारी जिंदगी में हमारे लिए क्या आवश्यक है भगवान की भक्ति करना या अपने लिए अच्छी तरह से कर्म करना भगवान की भक्ति और अच्छे कर एक ही श्रेणी में आते हैं यदि हम अच्छे कर्म कर रहे हैं दूसरों की सहायता के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं और किसी अन्य की निस्वार्थ भाव से कोई सेवा या कोई कार्य करते हैं तो वह भी ईश्वर भक्ति का ही एक पाठ माना जाता है तो ईश्वर अपनी भक्ति करने में इतना यादव खुश नहीं होता है बल्कि जब हम किसी ऐसे व्यक्ति की सहायता करते हैं जो जरूरतमंद है या जिसको आपकी मदद की जरूरत है तो उस पर ईश्वर कहीं ज्यादा प्रसन्न होते हैं इसलिए हमें ईश्वर की भक्ति के साथ-साथ अन्य लोगों की मदद भी करनी चाहिए जो जरूरतमंद है धन्यवाद आपका दिन शुभ हो

mister aapka prashna hai hamari zindagi mein hamare liye kya aavashyak hai bhagwan ki bhakti karna ya apne liye achi tarah se karm karna bhagwan ki bhakti aur acche kar ek hi shreni mein aate hain yadi hum acche karm kar rahe hain dusro ki sahayta ke liye hamesha tatpar rehte hain aur kisi anya ki niswarth bhav se koi seva ya koi karya karte hain toh vaah bhi ishwar bhakti ka hi ek path mana jata hai toh ishwar apni bhakti karne mein itna yadav khush nahi hota hai balki jab hum kisi aise vyakti ki sahayta karte hain jo jaruratmand hai ya jisko aapki madad ki zarurat hai toh us par ishwar kahin zyada prasann hote hain isliye hamein ishwar ki bhakti ke saath saath anya logo ki madad bhi karni chahiye jo jaruratmand hai dhanyavad aapka din shubha ho

मिस्टर आपका प्रश्न है हमारी जिंदगी में हमारे लिए क्या आवश्यक है भगवान की भक्ति करना या अपन

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बहुत अच्छा प्रश्न आपका हमारी जिंदगी में हमारे लिए क्या आवश्यक है अपने लिए अच्छी तरह से करना करना अच्छी तरह से कम करिए आप अपने लिए अच्छे कर्म करोगे तो अच्छा फल मिलेगा यह तो बोलते ही लोग तो अच्छे कर्म करिए आगे बढ़िए भगवान की भक्ति नेगेटिव सोच में पड़ जाओ तो पॉजिटिव सोच के लिए मेडिटेशन करिए जी हां तो वह भगवान की पक्की जैसा ही आवश्यक है आप समझ गए होगे

bahut accha prashna aapka hamari zindagi mein hamare liye kya aavashyak hai apne liye achi tarah se karna karna achi tarah se kam kariye aap apne liye acche karm karoge toh accha fal milega yah toh bolte hi log toh acche karm kariye aage badhiye bhagwan ki bhakti Negative soch mein pad jao toh positive soch ke liye meditation kariye ji haan toh vaah bhagwan ki pakki jaisa hi aavashyak hai aap samajh gaye hoge

बहुत अच्छा प्रश्न आपका हमारी जिंदगी में हमारे लिए क्या आवश्यक है अपने लिए अच्छी तरह से करन

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Shreekant

Startups

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जिम्मी लड़का कर्म करना जरूरी है या असली भक्ति होती है क्योंकि आपके सामने जो है आपको या तो कोल्हापुर सेट करना है तो आपको करना है या नहीं करना है या नहीं करना मतलब यह चीज है जो अपने आप लोग जो कहते हैं कि जो होना होता है तो कर लो फिर वही लिख कर भेजा है असली भगवान का रूप है ऐसा मैं मानता हूं

jimmy ladka karm karna zaroori hai ya asli bhakti hoti hai kyonki aapke saamne jo hai aapko ya toh kolhapur set karna hai toh aapko karna hai ya nahi karna hai ya nahi karna matlab yah cheez hai jo apne aap log jo kehte hain ki jo hona hota hai toh kar lo phir wahi likh kar bheja hai asli bhagwan ka roop hai aisa main manata hoon

जिम्मी लड़का कर्म करना जरूरी है या असली भक्ति होती है क्योंकि आपके सामने जो है आपको या तो

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Amit Kumar

Motivational Spiker,youtube Kriyeter,professional Advisers (For Carrier Network Marketing , Fitness, Health) And Blogger

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Rounak Romi

Philosopher & Activist

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हमारी जिंदगी में हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण आवश्यक है कर्म कर्म हमें करना चाहिए और कर्मों के आधार पर ही जिंदगी को जिला चाहिए बस कर्मों के प्रति इतना होशो की जो हम कर रहे हैं वह स्वयं की बेहतरी के लिए है और औरों की बेहतरी को भी जितने ध्यान रखा गया है स्वयं अपने माध्यम से अपने आप को या अपने माध्यम से किसी और को कष्ट न पहुंचे कर्मों के प्रतियोगिताओं से तो अच्छे कर्म करते हुए जिंदगी अच्छे से दी जा सकती है बिना भक्ति के भी लेकिन हम कर्मों में कुछ भटक जाते हैं जिसकी वजह से स्वयं हम अपने आप को या औरों को कष्ट देने लगते हैं ऐसे में हमारे भीतर अशांति और नेगेटिविटी बढ़ जाती है ऐसे में हमें ईश्वर का सहारा लेना पड़ता है हमें भगवान की भक्ति की ओर मुड़ना पड़ता है जहां से हमें पूरा चेतना और ऊर्जा मिलती है शांति मिलती है और सत्कर्म का बोध होता है कि हां हमें पुनः शांत होकर एक नई शुरुआत के साथ वापस अच्छे कर्मों की ओर ध्यान देना है तो समय-समय पर दोनों की आवश्यकता है लेकिन प्राथमिक तौर पर मैं कर्म की ओर ध्यान देना होगा भक्ति इतनी आवश्यक नहीं है लेकिन हां ईश्वर की सत्ता है या विश्वास आपको होना चाहिए उड़े जो संसार चल रहा है हमारे जो कर्मों का दृश्य देख रहा है यह पूरा सब कुछ ईश्वर के सामने हो रहा है और उसके लिए कुछ भी ऐसा नहीं है जिसे हम ईश्वर से छुपा सके यदि आपके घर में इतने स्पष्ट है कि स्वयं के लिए आप बेहतरी से कार्य कर रहे हैं और औरों का भी भला कर रहे हैं इस सूट केस आदि देव आगे बढ़ रहे हैं तो भक्ति करना इतनी आवश्यक नहीं है लेकिन अपने कर्मों की वजह से आपको कोई तकलीफ होती है कुछ नहीं ड्यूटी आपकी लाइफ में आती है वहां पर क्या भक्ति से जुड़ते हैं तो आपको पुनः पॉजिटिविटी की ओर मुड़ने का एक आसरा मिल जाता है तो भगवान है इसे मानिए भगवान का जीवन दिया है इसे मानिए और उसकी भक्ति आप चाहे करें या ना करें लेकिन स्वयं के कर्मों के प्रतिनिधि आपका होश है तो आप बेहतरी की ओर ही बढ़ रहे हैं

hamari zindagi mein hamare liye sabse mahatvapurna aavashyak hai karm karm hamein karna chahiye aur karmon ke aadhaar par hi zindagi ko jila chahiye bus karmon ke prati itna hosho ki jo hum kar rahe hain vaah swayam ki behatari ke liye hai aur auron ki behatari ko bhi jitne dhyan rakha gaya hai swayam apne madhyam se apne aap ko ya apne madhyam se kisi aur ko kasht na pahuche karmon ke pratiyogitaon se toh acche karm karte hue zindagi acche se di ja sakti hai bina bhakti ke bhi lekin hum karmon mein kuch bhatak jaate hain jiski wajah se swayam hum apne aap ko ya auron ko kasht dene lagte hain aise mein hamare bheetar ashanti aur negativity badh jaati hai aise mein hamein ishwar ka sahara lena padta hai hamein bhagwan ki bhakti ki aur mudna padta hai jaha se hamein pura chetna aur urja milti hai shanti milti hai aur satkarm ka bodh hota hai ki haan hamein punh shaant hokar ek nayi shuruat ke saath wapas acche karmon ki aur dhyan dena hai toh samay samay par dono ki avashyakta hai lekin prathmik taur par main karm ki aur dhyan dena hoga bhakti itni aavashyak nahi hai lekin haan ishwar ki satta hai ya vishwas aapko hona chahiye ude jo sansar chal raha hai hamare jo karmon ka drishya dekh raha hai yah pura sab kuch ishwar ke saamne ho raha hai aur uske liye kuch bhi aisa nahi hai jise hum ishwar se chupa sake yadi aapke ghar mein itne spasht hai ki swayam ke liye aap behatari se karya kar rahe hain aur auron ka bhi bhala kar rahe hain is suit case aadi dev aage badh rahe hain toh bhakti karna itni aavashyak nahi hai lekin apne karmon ki wajah se aapko koi takleef hoti hai kuch nahi duty aapki life mein aati hai wahan par kya bhakti se judte hain toh aapko punh positivity ki aur mudane ka ek aasra mil jata hai toh bhagwan hai ise maniye bhagwan ka jeevan diya hai ise maniye aur uski bhakti aap chahen kare ya na kare lekin swayam ke karmon ke pratinidhi aapka hosh hai toh aap behatari ki aur hi badh rahe hain

हमारी जिंदगी में हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण आवश्यक है कर्म कर्म हमें करना चाहिए और कर्मों क

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Sachin Bharadwaj

Faculty - Mathematics

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देखी हमारी जिंदगी में सबसे महत्वपूर्ण है कि अच्छे कर्म करना अगर आप अच्छे कर्म करेंगे तो मुझे लगता है कि भगवान की भक्ति की आवश्यकता भी नहीं होगी क्योंकि भगवान भी हमको यही सिखाता है कि व्यक्ति को अपना कर्म करना चाहिए गीता में पढ़ा भी है कि कर्म प्रधान होता है कर्म को हमें सबसे पहले प्रधानता देनी चाहिए और बाकी चीजें बाद में आती हैं तो अगर आप के कर्म अच्छे होंगे तो सब कुछ अच्छा होगा भक्ति की आपको इतनी आवश्यकता नहीं है अगर आप भक्ति करते भगवान की और आपके कर्म ठीक नहीं है तो कहीं ना कहीं आप को उसके लिए पे करना पड़ेगा बाद में तो मुझे लगता है कि व्यक्ति को अपने कर्म सुधारने चाहिए उसको कर्म अच्छे करेगा तो किसी भी प्रकार की भक्ति की आवश्यकता नहीं होगी भगवान वैसे ही खुश रहेंगे उस व्यक्ति से

dekhi hamari zindagi mein sabse mahatvapurna hai ki acche karm karna agar aap acche karm karenge toh mujhe lagta hai ki bhagwan ki bhakti ki avashyakta bhi nahi hogi kyonki bhagwan bhi hamko yahi sikhata hai ki vyakti ko apna karm karna chahiye geeta mein padha bhi hai ki karm pradhan hota hai karm ko hamein sabse pehle pradhanta deni chahiye aur baki cheezen baad mein aati hain toh agar aap ke karm acche honge toh sab kuch accha hoga bhakti ki aapko itni avashyakta nahi hai agar aap bhakti karte bhagwan ki aur aapke karm theek nahi hai toh kahin na kahin aap ko uske liye pe karna padega baad mein toh mujhe lagta hai ki vyakti ko apne karm sudhaarne chahiye usko karm acche karega toh kisi bhi prakar ki bhakti ki avashyakta nahi hogi bhagwan waise hi khush rahenge us vyakti se

देखी हमारी जिंदगी में सबसे महत्वपूर्ण है कि अच्छे कर्म करना अगर आप अच्छे कर्म करेंगे तो मु

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Bhaskar Saurabh

Politics Follower | Engineer

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मुझे लगता है हमें हमारी जिंदगी में ज्यादा अच्छे काम में पर ध्यान देना चाहिए साथ ही साथ अगर आप भगवान की भक्ति में भी रुचि रखते हैं तो इसमें भी कोई बुराई नहीं है क्योंकि अगर हम भगवान में आस्था रखते हैं तो उससे हमें एक आंतरिक सुकून मिलता है एक आंतरिक शक्ति मिलती है जिससे हम अपने कर्म को सही प्रकार से कर सकते हैं और हमारा मन भी एकाग्रचित रहता है लेकिन भगवान ने भी यही कहा है कि कर्म ही पूजा है और अगर आप कर्म पर ध्यान देते हैं अच्छे काम करते हैं तो उससे भगवान ज्यादा प्रसन्न होंगे

mujhe lagta hai hamein hamari zindagi mein zyada acche kaam mein par dhyan dena chahiye saath hi saath agar aap bhagwan ki bhakti mein bhi ruchi rakhte hain toh isme bhi koi burayi nahi hai kyonki agar hum bhagwan mein astha rakhte hain toh usse hamein ek aantarik sukoon milta hai ek aantarik shakti milti hai jisse hum apne karm ko sahi prakar se kar sakte hain aur hamara man bhi ekagrachit rehta hai lekin bhagwan ne bhi yahi kaha hai ki karm hi puja hai aur agar aap karm par dhyan dete hain acche kaam karte hain toh usse bhagwan zyada prasann honge

मुझे लगता है हमें हमारी जिंदगी में ज्यादा अच्छे काम में पर ध्यान देना चाहिए साथ ही साथ अगर

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