धर्म क्या है?...


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Yogi Prashant Nath

Business Consultant / M D

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नमस्कार सर्वप्रथम में सराहना करता हूं आपके द्वारा पूछे गए प्रश्न का जो धर्म से संबंधित है उसके उपरांत में अपना परिचय आपसे कराना चाहूंगा मेरा नाम है योगी योगी प्रशांत नाथ चलिए बढ़ते हैं आपके प्रश्न की तरफ अपने प्रश्न क्या है धर्म क्या है धर्म धर्म एक ऐसी स्थापना है जिससे मानव कल्याण निर्धारित होता है मानव समाज में एक तालमेल बैठाने के लिए अच्छाई और हमारे हित के लिए जो मानव और जीवो के लिए इस संसार में इस संसार के कल्याण के लिए किया गया जो काल आता है वह धर्म के लाता है कुछ ऐसे न्याय पूर्वक हमारे कर्म होते हैं दिन कर्मों से इस संसार में न्याय की स्थापना होती है ऐसे कार्य जिन कार्यों के द्वारा हम मानव में मानव में एक ऐसा मैसेज देते या कह सकते हैं कि कैसे सीख जाती है जो हमारे जीवन को एक अर्थ प्रदान करती है जो हमारे जीवन के वास्तविक कर्तव्य का बोध कराती है कि हमारा लक्ष्य क्या है हमारे जन्म लेने का उद्देश्य क्या है किस प्रकार से हमें इस संसार में अपना निर्वाह या अपने आप का कार्य करना चाहिए कौन से ऐसे कार्य हैं जो हमें नहीं करनी चाहिए जो मानव और समाज के हित में हैं होते हैं वह कार्य हमें कभी भी नहीं करनी चाहिए और ऐसे ऐसे कार्य चाहिए करने चाहिए जिससे हमारे और संसार में एक प्रेरणादायक कहते मिसाल के तौर पर जीवन में हमारी एक पहचान बन सके कि इस व्यक्ति ने एक सही स्वरूप हमें जीवन जीने का सिखाया है और वास्तव में ही हमारे जीवन को सार्थकता प्रदान की है क्योंकि वह मनुष्य जब जन्म लेता है जब से जन्म लेता है और जब तक वह मृत्यु को प्राप्त नहीं होता तब तक उसके कुछ ऐसे कर्म होते हैं और उसका कर्म होता है समाज का निर्माण करने के प्रति हम सब का उत्तरदायित्व होता है कि संसार को कुछ ना कुछ दिया जाए अपने द्वारा चाहो ज्ञान के स्वरूप में हो चाहे वह किसी अविष्कार के स्वरूप में चाहे वह धनसंपदा राज्य या संस्कार के स्वरूप में क्योंकि यह सारी चीजें भी एक धन के समान होती है जीवन में सिर्फ सोने-चांदी पैसे यही धनी होते धन हमारे संस्कार भी होता है हमारा विचार अच्छे विचार भी होते हैं धन हमारे अच्छे अच्छा ज्ञान भी होता है तो यह एक ऐसा धन होता है जिन्हें हम जितना ज्यादा बांटते हैं और उतना ही यह बढ़ता है इसी पर ही आधारित है धर्म जितना हम धर्म और कर्म के काम करते हैं समाज में उतना ही समाज में और हमारी अंतरात्मा शांति समृद्धि की स्थापना होती है संसार में और समाज में और अपने अंत करण में जब तक हम शांति और समृद्धि की स्थापना करना चाहते हैं तो हमें धर्म की आवश्यकता पड़ती है धर्म ही हमारे समाज में संसार में शांति की स्थापना करता है और हमें समृद्ध बनाता है कि हमारा जल लक्ष्य क्या है हमारे जीवन का तेज क्या है और हमें कभी भी बुराई के सामने घुटने नहीं टेके चाहिए कभी भी जीवन में गलत रास्ता नहीं अपनाना चाहिए हमें सदैव ही सत्य की राह पर चलना चाहिए चाहे आपको सच्चाई की राह पर चाय आपको अपना सर तक कटवाना पड़े बलिदान तक देना पड़े क्यों नहीं आप बिना जिम बिना हिचकिचाहट क्योंकि इसी से ही संसार की नींव है आज भी यह संसार से चलाएं माने वह धर्म की वजह से ही है जिस दिन धर्म अधर्म में परिवर्तित हो गया तो इस संसार का विनाश हो जाएगा जो लोग अभी एक दूसरे की इज्जत करते हैं सम्मान करते रिस्पेक्ट देते हैं और एक दूसरे से प्रेम स्नेह लगाव है जो सब कहीं ना कहीं खत्म हो जाएगा इन सब को बनाए रखता ही है धर्म हमारे आपसी संबंधों को प्रेम को हमारे को एक दूसरे के प्रति सहानुभूति की भावना एक दूसरे के लिए कुछ करने की इच्छा चाहे वह हमारे परिवार के प्रति ही हो चाहे हमारे समाज या देश के प्रति यह भावनाएं धर्म हमें बनाते हैं हमें और अगर धर्म ना हो तो यह भावनाएं नहीं होंगी एक दूसरे के प्रति सम्मान प्रेम की भावना नहीं तो फिर मनुष्य मनुष्य का ही दुश्मन हो जाएगा मनुष्य एक दूसरे के खून का प्यासा हो जाएगा सब अपने ही छांव के बारे में सोचेंगे अपना ही निजी स्वार्थ चाहेंगे एक अपने आप को ही समृद्ध बनाना चाहेंगे परिवार परिवार में ही फूट पड़ने लगेगी और भाई भाई के खून का प्यासा हो जाएगा तो कहीं ना कहीं तालमेल बनाने के लिए संसार को चलाएं मान बनाने के लिए इन संसार में सही शिक्षा अभियान और आदर्श की स्थापना करने के लिए धर्म अति आवश्यक होता है हम एक ऐसे नियम बनाते हैं जीवन में जो इन चीजों को पालन करने पर हमें इन चीजों का महत्व करने का हमें दर्शाता है किन का क्या महत्व होता है जो नीति नियम होते हैं हमारे संजीवन में जो हमारे हमें चलाएं मान बनाते हैं जो हमारे जीवन को सुखद बनाते हैं जैसे हमारे संस्कार हमारे बड़े बुजुर्गों का दिया हुआ ज्ञान सम्मान आधार छोटों को स्नेह प्यार और बड़ों का सम्मान इन चीजों से ही हमारा जीवन चल रहा होता है अगर यह चीजें ना हो तो यह संसार विनाश के कगार पर आ जाएगा इन चीजों स्थापना ही धर्म की स्थापना होती है जब तक इस संसार में यह सारी चीजें हैं एक दूसरे की रिस्पेक्ट एक दूसरे के प्रति सहानुभूति है एक दूसरे का ख्याल करने का है तब तक धर्म है और जब लोग एक दूसरे के चीजों के पीछे भागने लगेंगे एक दूसरों के हक को छीनने लगेंगे तो कहीं ना कहीं धर्म का विनाश होगा और अधर्म जीतेगा और जब जब धर्म पड़ता है तब तक धर्म की स्थापना करने के लिए संघार और उन पुरानी राजधानियों का संघार अवश्य होता है इसलिए हमें सदैव ही धर्म पद पर ही रहना चाहिए और कभी भी अपने आप में घबराना नहीं चाहिए अपनी आस्था कभी कम होने नहीं देना चाहिए चाहे आधार कितना ही ताकतवर क्यों ना हो उसका अंत जरूर निश्चित निश्चित होता धर्म की स्थापना के लिए जैसा कि सब सर्वश्रेष्ठ उदाहरण गीता में महाभारत के तुरंत द्वारा भगवान श्री कृष्ण ने हमें प्रदान किया था कि जब जब अधर्म होगा और अधर्म का नाश करने के लिए और धर्म की स्थापना करने के लिए प्रभु अपने ज्ञान स्वरूप से उतार देंगे और लोगों का मार्गदर्शन करेंगे क्योंकि हमें यह सीख मिलती है कि हमें कभी भी घबराना नहीं चाहिए धर्म के आगे कभी घुटने नहीं आ धर्म के आगे कभी घुटने नहीं पीनी चाहिए चाय अधर्म कितना ही आज शक्तिशाली क्यों ना हो उसका एक दिन अंत विनाश अवश्य क्योंकि रामायण में भी रामायण काल में जिस तरह से रावण ने स्त्री का हरण करके सीता हरण करके अधर्म का कार्य क्या था

namaskar sarvapratham me sarahana karta hoon aapke dwara pooche gaye prashna ka jo dharm se sambandhit hai uske uprant me apna parichay aapse krana chahunga mera naam hai yogi yogi prashant nath chaliye badhte hain aapke prashna ki taraf apne prashna kya hai dharm kya hai dharm dharm ek aisi sthapna hai jisse manav kalyan nirdharit hota hai manav samaj me ek talmel baithne ke liye acchai aur hamare hit ke liye jo manav aur jeevo ke liye is sansar me is sansar ke kalyan ke liye kiya gaya jo kaal aata hai vaah dharm ke lata hai kuch aise nyay purvak hamare karm hote hain din karmon se is sansar me nyay ki sthapna hoti hai aise karya jin karyo ke dwara hum manav me manav me ek aisa massage dete ya keh sakte hain ki kaise seekh jaati hai jo hamare jeevan ko ek arth pradan karti hai jo hamare jeevan ke vastavik kartavya ka bodh karati hai ki hamara lakshya kya hai hamare janam lene ka uddeshya kya hai kis prakar se hamein is sansar me apna nirvah ya apne aap ka karya karna chahiye kaun se 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नमस्कार सर्वप्रथम में सराहना करता हूं आपके द्वारा पूछे गए प्रश्न का जो धर्म से संबंधित है

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