हमारे देश में शिक्षा रोज़गार बन गया है इसे सुधारने के लिए क्या करना चाहिए?...


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LAL SINGH

Social Activist

2:31

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह सामने प्रश्न पूछा कि भारत के अंदर बेरोजगारी का मेन मुद्दा है और चना आ रहा है उस विषय पर कोई कोई भी सरकार हिंदुस्तान की मतलब मतलब ही इस्तेमाल कर दी कि लोगों को शिव परिवार देखता है वह शिकार उनको विश्वास के साथ चलती है उस पर वह कार्य नहीं करते हैं कोई भी सरकार हो या कोई नेता केवल आज की धूल जागरूकता होने के बावजूद लोग लोगों को इस प्रकार से चला जाता है कि वह फिर भी दोबारा होने के बहकावे में आ जाते हैं उनकी सरकार द्वारा की जाती है विशाल भारत का युवा युवा वर्ग जो है बेरोजगार है परेशान है अशिक्षित है जो शिक्षण को रोजगार नहीं है क्या शिक्षित बेरोजगार मजदूर किसान को देखने वाला कोई नहीं है बस चुनाव आता है तो असली भारत गांवों में बसता है असली भारत गांवों में बसता है भारत के किसान अन्नदाता है अरे नेता जी अन्नदाता की हालत की स्कूल की जो माली हालत है उसको देखने वाला कोई नहीं मैं गरीबों के दुखड़े जब वही गरीब है गरीब गरीब बच्चे आगे पढ़े पढ़े लिखे उनकी समस्याओं से अवगत हों कोई ऐसा कोई समस्या भारत को नरेंद्र मोदी साहब भी है लेकिन उद्योगपतियों को समर्थन करते हैं कि कोई काम करने को तैयार

yah saamne prashna poocha ki bharat ke andar berojgari ka main mudda hai aur chana aa raha hai us vishay par koi koi bhi sarkar Hindustan ki matlab matlab hi istemal kar di ki logo ko shiv parivar dekhta hai vaah shikaar unko vishwas ke saath chalti hai us par vaah karya nahi karte hain koi bhi sarkar ho ya koi neta keval aaj ki dhul jagrukta hone ke bawajud log logo ko is prakar se chala jata hai ki vaah phir bhi dobara hone ke bahakaave mein aa jaate hain unki sarkar dwara ki jaati hai vishal bharat ka yuva yuva varg jo hai berozgaar hai pareshan hai ashikshit hai jo shikshan ko rojgar nahi hai kya shikshit berozgaar majdur kisan ko dekhne vala koi nahi hai bus chunav aata hai toh asli bharat gaon mein basta hai asli bharat gaon mein basta hai bharat ke kisan annadata hai are neta ji annadata ki halat ki school ki jo maali halat hai usko dekhne vala koi nahi main garibon ke dukhde jab wahi garib hai garib garib bacche aage padhe padhe likhe unki samasyaon se avgat ho koi aisa koi samasya bharat ko narendra modi saheb bhi hai lekin udyogpatiyon ko samarthan karte hain ki koi kaam karne ko taiyar

यह सामने प्रश्न पूछा कि भारत के अंदर बेरोजगारी का मेन मुद्दा है और चना आ रहा है उस विषय पर

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꧁Dℰℰℙ ЅℋᎯℛℳᎯ꧂

Public Prossicutor ;(Sessions court Ahmedabad)

1:58
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अपने देश के अंदर जो अभी फिलहाल तो ऐसी कृष्ण चल रही है एजुकेशन सिस्टम है वह सिस्टम एक कॉमन सिस्टम है उसके अंदर कोई स्पेशल पर्टिकुलर टेकरी नहीं बनाने की शुरुआत सारी बुक्स की जाती है इसके कम पर जो फॉरेंस में है उसको फिर उस में इंटरेस्ट नहीं है यहां के संचालक विजय category-wise से क्या होता है कि नहीं चल रहा है 4 की भर्ती होती है कि भर्ती में पहले ऐसा था कि टेंट वाले चलते उसका दृश्य और अभी इस समय डॉक्टर किया हुआ पीएनजी की आवाज हिंदी क्लास की भर्ती में जाता है उसका रीजन कि हमारे यहां तो बैलेंस बनना चाहिए एजुकेशन का और जो जवाब का वह दोनों बैलेंस एंड बैलेंस नहीं है सेकंड कि हमारे यहां प्राचीन से जो हमारी जो पहले की जो सभ्यता थी जो हमारी तो हिंदू शब्द जो संस्कृति थी उसमें जो संस्कृति के अंदर देश की संस्कृति क्या कारण हो सकता है जिस कारण उसको इंटरेस्टेड वह कला सिखाई जाती व्यवस्था हम लोगों को किसी हो गया लेकिन पढ़ने के बाद आगे क्या करना उसका कोई गाइडेंस नहीं है और उसके हिसाब से कोई जवाब भी नहीं देते कि भी चपरासी की नौकरी में भी ग्रेजुएशन पीएचडी करे हुए भी चपरासी की नौकरी में जा रहे हैं तो हमारे यहां नहीं हो पा रहा है इसका सबसे बड़ा कारण है

apne desh ke andar jo abhi filhal toh aisi krishna chal rahi hai education system hai vaah system ek common system hai uske andar koi special particular tekari nahi banane ki shuruat saree books ki jaati hai iske kam par jo farens mein hai usko phir us mein interest nahi hai yahan ke sanchalak vijay category wise se kya hota hai ki nahi chal raha hai 4 ki bharti hoti hai ki bharti mein pehle aisa tha ki tent waale chalte uska drishya aur abhi is samay doctor kiya hua png ki awaaz hindi class ki bharti mein jata hai uska reason ki hamare yahan toh balance banna chahiye education ka aur jo jawab ka vaah dono balance and balance nahi hai second ki hamare yahan prachin se jo hamari jo pehle ki jo sabhyata thi jo hamari toh hindu shabd jo sanskriti thi usme jo sanskriti ke andar desh ki sanskriti kya karan ho sakta hai jis karan usko interested vaah kala sikhai jaati vyavastha hum logo ko kisi ho gaya lekin padhne ke baad aage kya karna uska koi guidance nahi hai aur uske hisab se koi jawab bhi nahi dete ki bhi chaprasi ki naukri mein bhi graduation phd kare hue bhi chaprasi ki naukri mein ja rahe hain toh hamare yahan nahi ho paa raha hai iska sabse bada karan hai

अपने देश के अंदर जो अभी फिलहाल तो ऐसी कृष्ण चल रही है एजुकेशन सिस्टम है वह सिस्टम एक कॉमन

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Shantanu Purohit

Political Analyst, Life Management, Career Counseler

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बड़े ही प्रशंसनीय प्रशंसक मारूंगा बहुत सुंदर प्रश्न आपने पूछा है कि हमारे देश में सब त्याग रोजगार बन गया उसका कारण कोई भी व्यक्ति अस्पष्ट आपको नहीं कर पाएगा इस कारण मैं आपको आखरी में बताऊंगा ढेर सारी कोचिंग संस्थान को चुके हैं कॉलेज स्कूल खुल रहे हैं और इनका जिले एकमात्र पैसा कमाना गांव देहातों से छोटे शहरों से कदमों से जो विद्यार्थी हैं वह महानगरों में पहुंच रहे इस आस में कि बड़े किसी कोचिंग संस्थान में दाखिला लेने के बाद उनकी नौकरी लग जाएगी उन को जॉब मिल जाएगी सरकारी नौकरी में चले जाएंगे सरकारी नौकरी के प्रति आकर्षण भारतीय युवा मानस के भीतर व्याप्त हो चुका है यह सबसे बड़ा कारण जो भटक भाव शिक्षा संस्थान खुल गए हैं डेढ़ सौ शिक्षण संस्थान ढेर सारी स्कूल कोलकाता स्कूल खुलना चाहिए थे कॉलेज कॉलेज कॉलेज कॉलेज कॉलेज बड़ी-बड़ी पूरे भारत में स्वतंत्र 500 विश्वविद्यालय थे 500 कॉलेज थे और लगभग 23:00 के आसपास विश्वविद्यालय थे आज 7:30 सौ के आसपास उच्च विद्यालय हैं और कॉलेज कितने हो गए करीब करीब 30 हजार के ऊपर कॉलेज स्कूल की बहुत कम होते थे अब लाखों की संख्या में स्कूल खुल चुके हैं जो प्राइवेट स्कूल है वह अभिभावकों को लूट रहे हैं वह शिक्षा नहीं देते और शिक्षा के लिए कहते ही कोचिंग लगा लो उसका मूवीस में यूनिफार्म भेजते हैं बस से वह भेजते हैं जूते मोजे भेजते हैं बेड बिस्तर टाइप्स थे शॉपिंग मॉल टाइप का खोल कर रखा है प्राइवेट स्कूलों में बच्चे की रैंक कमाए शिकायत करें तो कहते हैं कोचिंग लगा लो कोचिंग पढ़ने वाला कौन है कोचिंग पढ़ाने वाली टीचर पढ़ाता है इस प्रकार से व्यवसाय बन चुका कोचिंग संस्थानों का जो गोरख धंधा धड़ल्ले से चल रहा है आज के समय में सबसे ज्यादा कमा कर देने वाले अगर कोई बिजनेस है तो कोचिंग संस्थान सबसे विद्वान बहुत विद्यार्थी बहुत कोचिंग विद्यार्थी बहुत कॉन्पिटिशन बहुत बढ़िया सरकारी नौकरी प्रति जनमानस आपको ध्यान होगा यदि आपको 50 60 साल की उम्र के हैं 50 55 की उम्र के भी है तो या फिर अपने घर में अपने दादा या अपने पिता से आप पूछ कर देख सकते हैं इस देश में नौकरी करने वाले लोग बहुत कम थे पियस उसमें जो सरकारी कंपनियां है जो सरकारी उपक्रमों में भर्तियां कर रही थी उस समय कितनी नौकरियां नौकरी करना नहीं चाहते क्योंकि यह देश शुरू से शुरू से स्वरोजगार करने वालों का देश रहा है यह देश व्यापारियों के देश विदेश व्यापार की संस्कृति उस समय पश्चिम में 3 लोग प्रश्नों में 3 लोग नौकरी आने करना चाहते हैं नौकरी मिल जाते थे लेकिन लोग ज्वाइन करते थे नौकरी के लिए बुलाया जाता था घर में निकला इस साल बाद यानी कि आज की परिस्थितियों में लोगों ने देखा कि उस समय जिस व्यक्ति ने नौकरी पकड़ लिया आज भी एक अच्छी कंडीशन में है तो सोचते हैं कि मेरे बच्चे की नौकरी में जाए सरकारी नौकरी में जाए जो विद्यार्थियों देखते हैं कि जिसके पास सरकारी नौकरी थी वो आज एक बहुत ही अच्छी आर्थिक स्थिति अच्छी जीवन स्तर पर पहुंच चुका है इसलिए ब्लॉक री करना चाहते हैं उस देश में रोजगार के विश्व व्यापार की दशा अनुकूल दशा है वह निर्मित करनी पड़ेगी इज ऑफ डूइंग बिजनेस लाना पड़ेगा व्यापार करने की सुगमता लानी पड़ेगी कार्य करने की जो अन्य क्षेत्र है उन्हें सुगम बनाना पड़ेगा तभी इस स्थिति को सुधारा जा सकता है उच्च शिक्षा जो है उसको रोजगार यह पूरी तरह से बन चुकी है शिक्षा रोजगार बन गई है सबको गलत है और रोजगार बन्ना ठीक है रोजगार तो लोगों को मिलता है तो शेर का शिकार बन चुकी विद्या दान देने की वस्तुओं के व्यापार की वस्तु नहीं इस देश में एक समय 900000 गुरुकुल हुआ करते थे कार्ल मार्क्स और लिखा है इस देश में बच्चा बच्चा गणित में बच्चा बच्चा भाषा में बच्चा बच्चा तर्कशास्त्र मदर्स दर्शन में यूरोप किसी भी देश के आगे उस समय 5:00 से 2:30 सौ साल पहले 3:30 सौ साल पहले यूरोप के दास में कौन ऐसा लिखा कार्ल मार्क्स में जब देखा लॉर्ड मैकाले ने जब देखा तब उसने ब्रिटेन की संसद में कहा भारत सुरक्षा के दृष्टिकोण से देखा जाए तो यूरोप अखिलेश यादव उपस्थिति हमें आज निर्मित करनी पड़ेगी तभी इस दशा को सुधारा जा सकता बहुत-बहुत धन्यवाद

bade hi prashansaniya prasanshak marunga bahut sundar prashna aapne poocha hai ki hamare desh me sab tyag rojgar ban gaya uska karan koi bhi vyakti aspast aapko nahi kar payega is karan main aapko aakhri me bataunga dher saari coaching sansthan ko chuke hain college school khul rahe hain aur inka jile ekmatra paisa kamana gaon dehaton se chote shaharon se kadmon se jo vidyarthi hain vaah mahanagaron me pohch rahe is aas me ki bade kisi coaching sansthan me dakhila lene ke baad unki naukri lag jayegi un ko job mil jayegi sarkari naukri me chale jaenge sarkari naukri ke prati aakarshan bharatiya yuva manas ke bheetar vyapt ho chuka hai yah sabse bada karan jo bhatak bhav shiksha sansthan khul gaye hain dedh sau shikshan sansthan dher saari school kolkata school khulana chahiye the college college college college college badi badi poore bharat me swatantra 500 vishwavidyalaya the 500 college the aur lagbhag 23 00 ke aaspass vishwavidyalaya the aaj 7 30 sau ke aaspass ucch vidyalaya hain aur college kitne ho gaye kareeb kareeb 30 hazaar ke upar college school ki bahut kam hote the ab laakhon ki sankhya me school khul chuke hain jo private school hai vaah abhibhavakon ko loot rahe hain vaah shiksha nahi dete aur shiksha ke liye kehte hi coaching laga lo uska Movies me uniform bhejate hain bus se vaah bhejate hain joote mose bhejate hain bed bistar types the shopping mall type ka khol kar rakha hai private schoolon me bacche ki rank kamaye shikayat kare toh kehte hain coaching laga lo coaching padhne vala kaun hai coaching padhane wali teacher padhata hai is prakar se vyavasaya ban chuka coaching sansthano ka jo gorakh dhandha dhadalle se chal raha hai aaj ke samay me sabse zyada kama kar dene waale agar koi business hai toh coaching sansthan sabse vidhwaan bahut vidyarthi bahut coaching vidyarthi bahut competition bahut badhiya sarkari naukri prati janmanas aapko dhyan hoga yadi aapko 50 60 saal ki umar ke hain 50 55 ki umar ke bhi hai toh ya phir apne ghar me apne dada ya apne pita se aap puch kar dekh sakte hain is desh me naukri karne waale log bahut kam the pious usme jo sarkari companiya hai jo sarkari upakramon me bhartiyan kar rahi thi us samay kitni naukriyan naukri karna nahi chahte kyonki yah desh shuru se shuru se swarojgar karne walon ka desh raha hai yah desh vyapariyon ke desh videsh vyapar ki sanskriti us samay paschim me 3 log prashnon me 3 log naukri aane karna chahte hain naukri mil jaate the lekin log join karte the naukri ke liye bulaya jata tha ghar me nikala is saal baad yani ki aaj ki paristhitiyon me logo ne dekha ki us samay jis vyakti ne naukri pakad liya aaj bhi ek achi condition me hai toh sochte hain ki mere bacche ki naukri me jaaye sarkari naukri me jaaye jo vidyarthiyon dekhte hain ki jiske paas sarkari naukri thi vo aaj ek bahut hi achi aarthik sthiti achi jeevan sthar par pohch chuka hai isliye block ri karna chahte hain us desh me rojgar ke vishwa vyapar ki dasha anukul dasha hai vaah nirmit karni padegi is of doing business lana padega vyapar karne ki sugamata lani padegi karya karne ki jo anya kshetra hai unhe sugam banana padega tabhi is sthiti ko sudhara ja sakta hai ucch shiksha jo hai usko rojgar yah puri tarah se ban chuki hai shiksha rojgar ban gayi hai sabko galat hai aur rojgar banna theek hai rojgar toh logo ko milta hai toh sher ka shikaar ban chuki vidya daan dene ki vastuon ke vyapar ki vastu nahi is desh me ek samay 900000 gurukul hua karte the carl marks aur likha hai is desh me baccha baccha ganit me baccha baccha bhasha me baccha baccha tarkshastra mothers darshan me europe kisi bhi desh ke aage us samay 5 00 se 2 30 sau saal pehle 3 30 sau saal pehle europe ke das me kaun aisa likha carl marks me jab dekha lord maikale ne jab dekha tab usne britain ki sansad me kaha bharat suraksha ke drishtikon se dekha jaaye toh europe akhilesh yadav upasthitee hamein aaj nirmit karni padegi tabhi is dasha ko sudhara ja sakta bahut bahut dhanyavad

बड़े ही प्रशंसनीय प्रशंसक मारूंगा बहुत सुंदर प्रश्न आपने पूछा है कि हमारे देश में सब त्याग

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शिक्षा संपूर्ण रोजगार का साधन नहीं है अपनी जगह महत्वपूर्ण है लेकिन बड़ी आर्थिक सफलता के लिए सेवा सत्कर्म के मार्ग पर आधारित संगठित पर लगा रखना पड़ेगा सीखने हेतु संपर्क करें 98375 35360

shiksha sampurna rojgar ka sadhan nahi hai apni jagah mahatvapurna hai lekin badi aarthik safalta ke liye seva satkarm ke marg par aadharit sangathit par laga rakhna padega sikhne hetu sampark kare 98375 35360

शिक्षा संपूर्ण रोजगार का साधन नहीं है अपनी जगह महत्वपूर्ण है लेकिन बड़ी आर्थिक सफलता के लि

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हमारे देश में शिक्षा का विकास रोजगार बनाया गया है वह तो बहुत अच्छी है लेकिन इसके लिए स्पेशल एक टीम बनाई जाए जो कि शिक्षा विभाग पर जाकर समय-समय पर हम को संभाला जाए ताकि रोजगार कि मुझे शिक्षा भी ज्यादा से ज्यादा दें ताकि हमारा देश शिक्षित बन सके

hamare desh me shiksha ka vikas rojgar banaya gaya hai vaah toh bahut achi hai lekin iske liye special ek team banai jaaye jo ki shiksha vibhag par jaakar samay samay par hum ko sambhala jaaye taki rojgar ki mujhe shiksha bhi zyada se zyada de taki hamara desh shikshit ban sake

हमारे देश में शिक्षा का विकास रोजगार बनाया गया है वह तो बहुत अच्छी है लेकिन इसके लिए स्पेश

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विकास सिंह

दिल से भारतीय

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BP हमारे देश में शिक्षा जो है बिल्कुल अभी एक बिजनेस बन गया है पहले के जमाने में क्या होता था कि शिक्षा होता था कि किसी को विद्या देना किसी को विद्वान बनाना शिक्षा बच्चे स्कूल में पढ़ाई के लिए क्या करना चाहिए सुधारने के लिए पहले तो हमारी गवर्नमेंट स्कूल का डिमांड ज्यादा हो गया है और शिक्षक बिजनेसमैन गया तो हमारी गवर्नमेंट स्कूल का सुधार हो जाएगा गवर्मेंट स्कूल में पढ़ाई होगा

BP hamare desh mein shiksha jo hai bilkul abhi ek business ban gaya hai pehle ke jamane mein kya hota tha ki shiksha hota tha ki kisi ko vidya dena kisi ko vidhwaan banana shiksha bacche school mein padhai ke liye kya karna chahiye sudhaarne ke liye pehle toh hamari government school ka demand zyada ho gaya hai aur shikshak bussinessmen gaya toh hamari government school ka sudhaar ho jaega government school mein padhai hoga

BP हमारे देश में शिक्षा जो है बिल्कुल अभी एक बिजनेस बन गया है पहले के जमाने में क्या होता

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