आजकल के बच्चे किसी की नहीं सुनते। वह अपने दोस्तों की बातों में आ कर ग़लत रास्ता चुन लेते हैं और फिर ग़लत राह पर चले जाते है। एक पेरेंट होने के नाते अपने बच्चों को सही राह कैसे दिखाएँ?...


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Dr. Suman Aggarwal

Personal Development Coach

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आप अपने सवाल पर थोड़ा सा ध्यान दें आपने लिखा है कि बच्चे अपने दोस्तों की बात सुनते हैं और सुन कर भले ही वह गलत फैसले कर लेते हैं तो कैसा हो अगर पैरंट भींगा पैरंट हम बच्चे के दोस्त बन जाए तो वह हमारी भी सारी बात सुनेंगे आप के सवाल में ही आपका जवाब है अब अगला सवाल यह बनता है कि कैसे बचे दोस्तों की बात इसलिए सुनते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी दोस्त उनको पूरी तरह से समझते हैं कि वह कैसा फील करते हैं उनको किस वक्त क्या चीज की जरूरत है और मां बाप इस बात को नहीं समझते नहीं यह नहीं कहती कि आप गलत होते हैं मैं भी एक पैरंट हूं मेरे भी बच्चे हैं लेकिन मैं कोशिश करती हूं हमेशा कि मैं अपने बच्चों के साथ उनकी दोस्त बनकर हूं मामा में हूं अपने बच्चों की और मैं हमेशा उनके लिए अच्छा चाहती हूं बहुत बार बच्चों की डिमांड गलत होती है मैं अगर उनको सुतली सीधे मना कर दूं कि यह काम आपको नहीं करना तो कल वह क्या करेंगे दोस्तों के उपलक्ष में आकर मुझसे कर उस काम को कर लेंगे और अगर कर लेते हैं तो 1 तरीके से उन बच्चों को फ्रीडम को इंजॉय करना है और वही अगर मैं उनकी इस बात को समझती हूं तो मैं उनको यूं दिखाती हूं कि आप कर तो सकते हो इस काम को मेल पर पहले आपको यह सोचना है कि इस काम को करने से आपको क्या क्या फायदे होने वाले हैं क्या क्या नुकसान हो सकते हैं और फिर आपको जो सही लगता है वह आप फैसला करो तो इस तरीके से जब हम बच्चों को किसी भी चीज के बारे में समझाएं गे तो वह जरूर हमारी बात समझेंगे और सबसे इंपॉर्टेंट होती है बॉन्डिंग कि मेरा रिलेशन कैसा है मेरे बच्चे के साथ आप बच्चों के दिमाग में यह बात सेट होनी बहुत जरूरी है कि उनके पेरेंट्स से अच्छा उनके लिए कोई और नहीं सोच सकता और वह बॉन्डिंग बनती कैसे वह बॉन्डिंग बनती है अंडरस्टैंडिंग से जबाब हम अपने बच्चों को समझेंगे तो बच्चे भी हमें जरूर समझेंगे तो यह थोड़ा सा टाइम टेकिंग प्रोसेस है पर धीरे-धीरे

aap apne sawaal par thoda sa dhyan de aapne likha hai ki bacche apne doston ki baat sunte hain aur sun kar bhale hi vaah galat faisle kar lete hain toh kaisa ho agar pairant bhinga pairant hum bacche ke dost ban jaaye toh vaah hamari bhi saree baat sunenge aap ke sawaal mein hi aapka jawab hai ab agla sawaal yah baata hai ki kaise bache doston ki baat isliye sunte hain kyonki unhe lagta hai ki unki dost unko puri tarah se samajhte hain ki vaah kaisa feel karte hain unko kis waqt kya cheez ki zarurat hai aur maa baap is baat ko nahi samajhte nahi yah nahi kehti ki aap galat hote hain main bhi ek pairant hoon mere bhi bacche hain lekin main koshish karti hoon hamesha ki main apne baccho ke saath unki dost bankar hoon mama mein hoon apne baccho ki aur main hamesha unke liye accha chahti hoon bahut baar baccho ki demand galat hoti hai agar unko sutli sidhe mana kar doon ki yah kaam aapko nahi karna toh kal vaah kya karenge doston ke uplaksh mein aakar mujhse kar us kaam ko kar lenge aur agar kar lete hain toh 1 tarike se un baccho ko freedom ko enjoy karna hai aur wahi agar main unki is baat ko samajhti hoon toh main unko yun dikhati hoon ki aap kar toh sakte ho is kaam ko male par pehle aapko yah sochna hai ki is kaam ko karne se aapko kya kya fayde hone waale kya kya nuksan ho sakte hain aur phir aapko jo sahi lagta hai vaah aap faisla karo toh is tarike se jab hum baccho ko kisi bhi cheez ke bare mein samjhayen gay toh vaah zaroor hamari baat samjhenge aur sabse important hoti hai bonding ki mera relation kaisa hai mere bacche ke saath aap baccho ke dimag mein yah baat set honi bahut zaroori hai ki unke parents se accha unke liye koi aur nahi soch sakta aur vaah bonding banti kaise vaah bonding banti hai understanding se jawab hum apne baccho ko samjhenge toh bacche bhi hamein zaroor samjhenge toh yah thoda sa time taking process hai par dhire dhire

आप अपने सवाल पर थोड़ा सा ध्यान दें आपने लिखा है कि बच्चे अपने दोस्तों की बात सुनते हैं और

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