जब कोई इलेक्शन के समय नामांकन करता है तो वह अपनी पापर्टी ओने लाख से जयादा नहीं बताता लेकिन जीतने के बाद अरबों रुपये की पोर्पार्टी हो जाती है तो CEO उन पर कारवाही क्यों नहीं करता उनसे क्यों नहीं पूछा जाता की ये पोर्पार्टी आपके पास कंहा से आई हैं?...


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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

2:19

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जब कोई इलेक्शन के समय नामांकन करता है तो अपनी प्रॉपर्टी होने लाख से ज्यादा नहीं बताता लेकिन जीतने के बाद अब तो पार्टी हो जाती है तो पर क्यों करवाई पीके इलेक्शन ऑफिसर जो होते हैं वह जब नामांकन पत्र लेते तब हर एक उम्मीदवार की जो प्रॉपर्टी है जो उनकी माल मिलकर था वह सब उसमें रिक्वेस्ट करते हैं और जब दूसरी बार इलेक्शन लड़ते हैं तब भी हो वही सिस्टम वही बातों को फॉलो करते तो उसमें जो उनकी सोर्स ऑफ इनकम होती है उसके द्वारा जो संपत्ति बड़ी है ऐसा ही दिखाने का प्रयास करते लेकिन कई मामलों में ऐसा भी देखा गया है कोई पहली बार इलेक्शन लड़ रहा है तो बहुत ज्यादा अपनी प्रॉपर्टी वज्र दिखाता है और और जीतने के बाद उससे भी ज्यादा बढ़ जाती है और वह सोर्स ऑफ इनकम अपनी सैलरी और दूसरी इनकम दिखाकर वह किसी न किसी तरह से वह शिकार करवा लेता है बाकी इनकम से ज्यादा अगर किसी उम्मीदवार के प्रॉपर्टी पाई जाती है उसके ऊपर चीफ इलेक्शन कमिश्नर वो एक्शन नहीं लेते लेकिन इनकम टैक्स डिपार्टमेंट जरूर प्लीज पैसे मांग सकता है और जैसा कि बहुत से किस्सों में ऐसा सामने आया जैसे लालू प्रसाद यादव उनके ऊपर मुकदमा चला चारा घोटाले में फिलहाल जेल में और 5 साल की सजा जिसको जाती है उसको चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध आ जाता है वह चुनाव 6 साल तक नहीं लगा से जो हमारे संविधान है उसके अनुसार सबको शुभकामनाएं

jab koi election ke samay namankan karta hai toh apni property hone lakh se zyada nahi batata lekin jitne ke baad ab toh party ho jaati hai toh par kyon karwai pk election officer jo hote hai vaah jab namankan patra lete tab har ek ummidvar ki jo property hai jo unki maal milkar tha vaah sab usme request karte hai aur jab dusri baar election ladte hai tab bhi ho wahi system wahi baaton ko follow karte toh usme jo unki source of income hoti hai uske dwara jo sampatti baadi hai aisa hi dikhane ka prayas karte lekin kai mamlon me aisa bhi dekha gaya hai koi pehli baar election lad raha hai toh bahut zyada apni property vajra dikhaata hai aur aur jitne ke baad usse bhi zyada badh jaati hai aur vaah source of income apni salary aur dusri income dikhakar vaah kisi na kisi tarah se vaah shikaar karva leta hai baki income se zyada agar kisi ummidvar ke property payi jaati hai uske upar chief election commissioner vo action nahi lete lekin income tax department zaroor please paise maang sakta hai aur jaisa ki bahut se kisson me aisa saamne aaya jaise lalu prasad yadav unke upar mukadma chala chara ghotale me filhal jail me aur 5 saal ki saza jisko jaati hai usko chunav ladane par pratibandh aa jata hai vaah chunav 6 saal tak nahi laga se jo hamare samvidhan hai uske anusaar sabko subhkamnaayain

जब कोई इलेक्शन के समय नामांकन करता है तो अपनी प्रॉपर्टी होने लाख से ज्यादा नहीं बताता लेकि

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