क्या पैसा इंसानियत से बढ़कर है?...


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Yogender Dhillon

Law Educator , Advocate Motivational Coach

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखो पैसा इंसानियत से बढ़कर कभी नहीं हो सकता है जैसे आज ही लोग डाउन अभी लोग डाउन चल रहा है तो हम यह कहे कि पैसा सब कुछ है लोगों की सैलरी कट रही है तो लोग करें हमारी सैलरी कटियारी भाई आप सोच भी कैसे सकते हो देश संकट के दौर पर खड़ा है अगर हमें घर से भी कुछ निकाल कर देना पड़े तो वह देना चाहिए और इंसान से बढ़कर ऐसा कभी नहीं हो सकता है लेकिन अगर हमने तो देखो पैसा बहुत कुछ ऐसा कुछ नहीं है लेकिन पैसा बहुत कुछ है आपको काम करना चाहिए और इमानदारी से आपको काम करके कमाना भी चाहिए उस समय में पैसे को जरूरतमंद जो नहीं कर सकते हैं उन पर लगाना भी चाहिए तो इसलिए मेरा आंसर यही है इंसानियत सबसे बड़ी चीज है मान्यता सबसे बड़ी चीज है

dekho paisa insaniyat se badhkar kabhi nahi ho sakta hai jaise aaj hi log down abhi log down chal raha hai toh hum yah kahe ki paisa sab kuch hai logo ki salary cut rahi hai toh log kare hamari salary katiyari bhai aap soch bhi kaise sakte ho desh sankat ke daur par khada hai agar hamein ghar se bhi kuch nikaal kar dena pade toh vaah dena chahiye aur insaan se badhkar aisa kabhi nahi ho sakta hai lekin agar humne toh dekho paisa bahut kuch aisa kuch nahi hai lekin paisa bahut kuch hai aapko kaam karna chahiye aur imaandari se aapko kaam karke kamana bhi chahiye us samay me paise ko jaruratmand jo nahi kar sakte hain un par lagana bhi chahiye toh isliye mera answer yahi hai insaniyat sabse badi cheez hai manyata sabse badi cheez hai

देखो पैसा इंसानियत से बढ़कर कभी नहीं हो सकता है जैसे आज ही लोग डाउन अभी लोग डाउन चल रहा है

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Vikas Singh

Political Analyst

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए इंसानियत से बढ़कर कुछ भी नहीं होता है पैसा भी नहीं है इंसानियत एक ऐसी चीज है जो इंसान को खुद की नजर में भगवान के नजर में और समाज के नजर में पूछा उठाती है सपोर्ट करिए आप एक गरीब परिवार से बिलॉन्ग करते हो आप के गेट पर कोई आ गया प्यासा है भूखा है गरीब है और आपके घर थोड़ा बहुत खाने पीने के लिए है तो उस गरीब व्यक्ति को आप अच्छे से खिलाते हो उसे पानी पिलाते हो और 10 5 ऊपर आपके पास जो है उसे जाते समय देते भी हो कि भैया यह लो आप रास्ते में कुछ खा पी लेना तो आप एक अच्छे इंसान हो वही गरीब व्यक्ति सपूत करिए किसी अमीर के गेट पर गया अब वह बोल रहा है कि मुझे कुछ खिला कुछ पिला दो मैं बहुत प्यासा हूं लेकिन वह अमीर व्यक्ति अगर उसे गाली देकर भगा देता है तो वह इंसान नहीं है और ना तो उसके अंदर इंसानियत है तो इंसानियत का मतलब आप समझ गए होंगे जब भी किसी को दर्द हो तो उस दर्द को आप महसूस करो इसे इंसानियत करते हैं अगर जानवर को किसी ने मार दिया है या एक्सीडेंट से किसी जानवर को चोट लगा है अगर आपके अंदर इंसानियत होगी तो आप उस जानवर को ले जाकर हॉस्पिटल उसका ट्रीटमेंट कर आओगे और जब ट्रीटमेंट करा कर उसे ठीक कर दोगे उसे खाना पिला के पी ना अच्छे से खिलाओगे तो आप एक अच्छे इंसान हो अगर आप सपोर्ट करिए कोई गरीब है आपकी आपका पड़ोसी उसके बच्चे भूखे रात में सोते हैं और खाना मांगते हैं मम्मी पापा से और मम्मी पापा के पास भी खाना का व्यवस्था करने का कोई भी जरिया नहीं है समाज देश को रोना वायरस से जूझ रहा है सरकार की योजना का लाभ भी वहां तक नहीं पहुंच पा रहा है और उस गरीब परिवार क्या पड़ोसी हो आपके घर सब कुछ है पैसा रूपया धन दौलत सब कुछ है अगर आपके अंदर इंसानियत रहेगी तो आप उस गरीब परिवार को चावल आटा सब्जी सारा चीज दोगे और बोलोगे कि आप लोगों को कोई भी दिक्कत हो तो मुझे बताना तो यहां पर आपने अपने पैसे से अच्छा काम किया तो इसे भी इंसानियत करते हैं जिनके पास पैसा बहुत होता है वह अच्छा काम नहीं कर पाते हैं उन्हें इंसान इंसान नहीं बोला जाता है और ना तो उन्हें में इंसानियत उनके कर्मों को जानवर से भी बदतर है तो दर्द महसूस होना चाहिए जो दर्द को महसूस करता है वही महान इंसान होता है तो अगर आपके पास पैसा रूपया है और इस टाइम पूरा भारत संकट से जूझ रहा है तो आप भी किसी 12 परिवार गरीब परिवार का मदद करिए उनके घर खाने-पीने का व्यवस्था करिए ताकि वह लोग अपना पेट भर सके अपने बच्चों का पेट भर सके और आराम से रात में सो सकें धन्यवाद

dekhiye insaniyat se badhkar kuch bhi nahi hota hai paisa bhi nahi hai insaniyat ek aisi cheez hai jo insaan ko khud ki nazar me bhagwan ke nazar me aur samaj ke nazar me poocha uthaati hai support kariye aap ek garib parivar se Belong karte ho aap ke gate par koi aa gaya pyaasa hai bhukha hai garib hai aur aapke ghar thoda bahut khane peene ke liye hai toh us garib vyakti ko aap acche se khilaate ho use paani peelate ho aur 10 5 upar aapke paas jo hai use jaate samay dete bhi ho ki bhaiya yah lo aap raste me kuch kha p lena toh aap ek acche insaan ho wahi garib vyakti sapoot kariye kisi amir ke gate par gaya ab vaah bol raha hai ki mujhe kuch khila kuch pila do main bahut pyaasa hoon lekin vaah amir vyakti agar use gaali dekar bhaga deta hai toh vaah insaan nahi hai aur na toh uske andar insaniyat hai toh insaniyat ka matlab aap samajh gaye honge jab bhi kisi ko dard ho toh us dard ko aap mehsus karo ise insaniyat karte hain agar janwar ko kisi ne maar diya hai ya accident se kisi janwar ko chot laga hai agar aapke andar insaniyat hogi toh aap us janwar ko le jaakar hospital uska treatment kar aaoge aur jab treatment kara kar use theek kar doge use khana pila ke p na acche se khilaoge toh aap ek acche insaan ho agar aap support kariye koi garib hai aapki aapka padosi uske bacche bhukhe raat me sote hain aur khana mangate hain mummy papa se aur mummy papa ke paas bhi khana ka vyavastha karne ka koi bhi zariya nahi hai samaj desh ko rona virus se joojh raha hai sarkar ki yojana ka labh bhi wahan tak nahi pohch paa raha hai aur us garib parivar kya padosi ho aapke ghar sab kuch hai paisa rupya dhan daulat sab kuch hai agar aapke andar insaniyat rahegi toh aap us garib parivar ko chawal atta sabzi saara cheez doge aur bologe ki aap logo ko koi bhi dikkat ho toh mujhe batana toh yahan par aapne apne paise se accha kaam kiya toh ise bhi insaniyat karte hain jinke paas paisa bahut hota hai vaah accha kaam nahi kar paate hain unhe insaan insaan nahi bola jata hai aur na toh unhe me insaniyat unke karmon ko janwar se bhi badataar hai toh dard mehsus hona chahiye jo dard ko mehsus karta hai wahi mahaan insaan hota hai toh agar aapke paas paisa rupya hai aur is time pura bharat sankat se joojh raha hai toh aap bhi kisi 12 parivar garib parivar ka madad kariye unke ghar khane peene ka vyavastha kariye taki vaah log apna pet bhar sake apne baccho ka pet bhar sake aur aaram se raat me so sake dhanyavad

देखिए इंसानियत से बढ़कर कुछ भी नहीं होता है पैसा भी नहीं है इंसानियत एक ऐसी चीज है जो इंसा

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

0:48
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क्या पैसा इंसान ईश्वर है बिल्कुल नहीं इस पृथ्वी पर सबसे पहले इंसानियत है उसकी बहुत बात पैसा है कर्मी धर्म कब तक सोच समझ विचार देवियां व्यवहार आचरण तब कहीं जाकर पैसा है लेकिन आज के युग में पैसा प्रथम में बाकी सब कुछ बाद में अगर आपके पास पैसा है तो आप संतुष्ट हैं आपकी इज्जत क्या आपको लोग सम्मान की नियुक्ति पर आपके पास पैसा नहीं है तो आप दुनिया में कुछ नहीं

kya paisa insaan ishwar hai bilkul nahi is prithvi par sabse pehle insaniyat hai uski bahut baat paisa hai karmi dharm kab tak soch samajh vichar deviyan vyavhar aacharan tab kahin jaakar paisa hai lekin aaj ke yug me paisa pratham me baki sab kuch baad me agar aapke paas paisa hai toh aap santusht hain aapki izzat kya aapko log sammaan ki niyukti par aapke paas paisa nahi hai toh aap duniya me kuch nahi

क्या पैसा इंसान ईश्वर है बिल्कुल नहीं इस पृथ्वी पर सबसे पहले इंसानियत है उसकी बहुत बात प

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Anshu Sarkar

Founder & Director, Sarkar Yog Academy

2:04
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सबसे पहले तो आप को मेरा नमस्कार आपका सवाल है क्या पैसा इंसानियत से बढ़कर है बिल्कुल नहीं इंसानियत से बढ़कर दुनिया में कोई भी चीज़ नहीं होती पैसा तो कुछ भी नहीं पैसा हाथ का मैल है जीने के लिए पैसा जरूरी है जीने के लिए पैसा जरूरी है इसके लिए कविता के लिए आप जीना चाहते हैं तो आप अच्छे इंसान नहीं हो सकता आपका सोच अलग हो जाएगा इरादा अलग हो जाएगा अब सही पद पर नहीं रहेंगे आपका मन हमेशा दोस्ती रहेगा गलत था आपको हमेशा बुलाते रहेगा फिर से रहेगा आप दलदल में फंस जाएंगे फिर भी इतना जान जाए कभी भी किसी परिस्थिति में इंसानियत को मत कोई मनुष्य सामाजिक प्राणी है अगर समाज में रहकर उसके अच्छा इंसान उसका पहचान है समाज अगर यह पहचान दे रहा कि आप अच्छे इंसान हो इससे बड़ा पैसा शोहरत कुछ भी नहीं है बस खरीदना जानिए दुनिया में अगर सबसे बड़ा कोई चीज है वह है इंसानियत कोई मोल नहीं होता अनमोल है तो पैसा का साथ कभी तो नहीं जा सकता दोनों में कोई कंपेयर नहीं होता है पैसा पैसा है जिसके पास पैसा नहीं है जिसके पास पैसा नहीं है लेकिन उसके पास इंसानियत है तो सभी को सम्मान करेंगे लेकिन बहुत पैसा है इंसानियत नहीं है सभी उस पर कार्यक्रम को ठोकेगा करेगा इंसानियत नहीं जानता चिप्स अच्छा इंसान है इंसानियत कोई जानता है

sabse pehle toh aap ko mera namaskar aapka sawaal hai kya paisa insaniyat se badhkar hai bilkul nahi insaniyat se badhkar duniya me koi bhi cheez nahi hoti paisa toh kuch bhi nahi paisa hath ka mail hai jeene ke liye paisa zaroori hai jeene ke liye paisa zaroori hai iske liye kavita ke liye aap jeena chahte hain toh aap acche insaan nahi ho sakta aapka soch alag ho jaega irada alag ho jaega ab sahi pad par nahi rahenge aapka man hamesha dosti rahega galat tha aapko hamesha bulate rahega phir se rahega aap duldula me fans jaenge phir bhi itna jaan jaaye kabhi bhi kisi paristhiti me insaniyat ko mat koi manushya samajik prani hai agar samaj me rahkar uske accha insaan uska pehchaan hai samaj agar yah pehchaan de raha ki aap acche insaan ho isse bada paisa shoharat kuch bhi nahi hai bus kharidna janiye duniya me agar sabse bada koi cheez hai vaah hai insaniyat koi mole nahi hota anmol hai toh paisa ka saath kabhi toh nahi ja sakta dono me koi compare nahi hota hai paisa paisa hai jiske paas paisa nahi hai jiske paas paisa nahi hai lekin uske paas insaniyat hai toh sabhi ko sammaan karenge lekin bahut paisa hai insaniyat nahi hai sabhi us par karyakram ko thokega karega insaniyat nahi jaanta chips accha insaan hai insaniyat koi jaanta hai

सबसे पहले तो आप को मेरा नमस्कार आपका सवाल है क्या पैसा इंसानियत से बढ़कर है बिल्कुल नहीं इ

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Kanhaiya Bhardwaj

Yoga Expert, M D Panchgavya, Spiritual ,National & Motivational Speaker

1:00
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जी आपका प्रश्न है क्या पैसा इंसानियत से बढ़कर नहीं इंसानियत पर अपनी जगह पर है और पैसा अपने जगह पर पैसे से किसी वस्तु को हम खरीद सकते हैं मगर इंसानियत को नहीं खरीद सकते क्योंकि इंसान जो है हर समय किसी के काम आ सकता है मगर पैसे को अगर इंसान के द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं लेकर जाया गया तब तक उसकी कीमत नहीं होती है तो पैसे की कीमत इंसानी बढ़ाता है ना कि पैसे में कीमत है इंसान में कीमत है तो पैसे की कीमत बढ़ती है इसलिए पैसा जो है कभी भी इंसानी वजूद से बढ़कर नहीं हो सकता है इंसान है तो पर इंसान इंसान को बनाया इसलिए अपने सभी के प्रति इंसानियत का भाव रखिए और सभी के प्रति प्रेमभाव रखिए सभी के प्रति समरूपता का भाव रखिए यही मानवता है यही इंसानियत है

ji aapka prashna hai kya paisa insaniyat se badhkar nahi insaniyat par apni jagah par hai aur paisa apne jagah par paise se kisi vastu ko hum kharid sakte hain magar insaniyat ko nahi kharid sakte kyonki insaan jo hai har samay kisi ke kaam aa sakta hai magar paise ko agar insaan ke dwara ek sthan se dusre sthan tak nahi lekar jaya gaya tab tak uski kimat nahi hoti hai toh paise ki kimat insani badhata hai na ki paise me kimat hai insaan me kimat hai toh paise ki kimat badhti hai isliye paisa jo hai kabhi bhi insani wajood se badhkar nahi ho sakta hai insaan hai toh par insaan insaan ko banaya isliye apne sabhi ke prati insaniyat ka bhav rakhiye aur sabhi ke prati premabhav rakhiye sabhi ke prati samrupta ka bhav rakhiye yahi manavta hai yahi insaniyat hai

जी आपका प्रश्न है क्या पैसा इंसानियत से बढ़कर नहीं इंसानियत पर अपनी जगह पर है और पैसा अपने

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Suneel Solutions

Business Owner

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इंसानियत सबसे बढ़कर है इंसानियत से बढ़कर कुछ भी नहीं कृपया ऐसे में कुछ पावर है अगर आपके पास ज्यादा पैसा होगा और आप अच्छे इंसान हैं तो अब ज्यादा इंसानों की मदद भी कर सकते हैं तो इस पावर को आप उपयोग करें ज्यादा पैसा कमाए और उससे ज्यादा इंसानों की मदद करें और इंसानियत की भलाई होगी धन्यवाद

insaniyat sabse badhkar hai insaniyat se badhkar kuch bhi nahi kripya aise me kuch power hai agar aapke paas zyada paisa hoga aur aap acche insaan hain toh ab zyada insano ki madad bhi kar sakte hain toh is power ko aap upyog kare zyada paisa kamaye aur usse zyada insano ki madad kare aur insaniyat ki bhalai hogi dhanyavad

इंसानियत सबसे बढ़कर है इंसानियत से बढ़कर कुछ भी नहीं कृपया ऐसे में कुछ पावर है अगर आपके प

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Sanjana

PhD ENGLISH AND ASTROLOGER

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Urmila Yadav

Financial Expert

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Anil Kumar Tiwari

Yoga, Meditation & Astrologer

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आपका प्रश्न है क्या पैसा इंसानियत से बढ़कर है नहीं इस समय कोविड-19 करो ना बारिश का समय चल रहा है इस समय इस प्रश्न का उत्तर आप अच्छी तरह समझ सकते हैं अगर आप टीवी से मीडिया से जुड़े हैं तो प्रत्यय के देखिए अभी इटली के अंदर जहां करो ना वायरस के अंतर्गत कितने लोगों के जीवन समाप्त हो रहे हैं ऐसा कुछ नहीं कर सकता है उनके परिवार वाले नातेदार रिश्तेदार मित्रगण शत्रुघ्न सब लगातार मृत्यु को प्राप्त होते जा रहे हैं और जिस सड़क से वह निकल कर के उनकी मृत्यु को ले जा रहे हैं वहां लोग अपने जेब से निकाल निकाल कर के पैसा सड़कों पर फेंक रहे हैं पैसा सड़क के किनारे लगातार पड़ा हुआ है कोई कोई उठाने वाला नहीं है इसका क्या मतलब हुआ इसका यह मतलब है कि इंसानियत और इंसान जरूरी है पैसा तो उसके जब इंसानियत बचेगी इंसान बचेगा तभी तो पैसा तो सबसे पहले इंसानियत और इंसान की सुरक्षा जरूरी है

aapka prashna hai kya paisa insaniyat se badhkar hai nahi is samay kovid 19 karo na barish ka samay chal raha hai is samay is prashna ka uttar aap achi tarah samajh sakte hain agar aap TV se media se jude hain toh pratyay ke dekhiye abhi italy ke andar jaha karo na virus ke antargat kitne logo ke jeevan samapt ho rahe hain aisa kuch nahi kar sakta hai unke parivar waale natedar rishtedar mitragan shatrughan sab lagatar mrityu ko prapt hote ja rahe hain aur jis sadak se vaah nikal kar ke unki mrityu ko le ja rahe hain wahan log apne jeb se nikaal nikaal kar ke paisa sadkon par fenk rahe hain paisa sadak ke kinare lagatar pada hua hai koi koi uthane vala nahi hai iska kya matlab hua iska yah matlab hai ki insaniyat aur insaan zaroori hai paisa toh uske jab insaniyat bachegi insaan bachega tabhi toh paisa toh sabse pehle insaniyat aur insaan ki suraksha zaroori hai

आपका प्रश्न है क्या पैसा इंसानियत से बढ़कर है नहीं इस समय कोविड-19 करो ना बारिश का समय चल

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positive patidaar

Celebrity & Tycoon's Trainer ,yoga Entrepreneur..aanando Parmo Dharm

1:34
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Anil Ramola

Yoga Instructor | Engineer

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पीके पैसा इंग्लैंड में बिल्कुल नहीं जैसा कि आप देख रहे थे पूर्व इसी और मैं कौन हूं इसका प्रभाव भी टाइप पर तू अभी हर व्यक्ति मानव जाति का समय आज तक किसी काम का नहीं लोग घर में बैठे हुए अपनी जान को बचाने की इंसानियत ही काम आ सकती तो अपना जोरदार में अंधकार में इंसान में

pk paisa england me bilkul nahi jaisa ki aap dekh rahe the purv isi aur main kaun hoon iska prabhav bhi type par tu abhi har vyakti manav jati ka samay aaj tak kisi kaam ka nahi log ghar me baithe hue apni jaan ko bachane ki insaniyat hi kaam aa sakti toh apna jordaar me andhakar me insaan me

पीके पैसा इंग्लैंड में बिल्कुल नहीं जैसा कि आप देख रहे थे पूर्व इसी और मैं कौन हूं इसका प्

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Nikhil Ranjan

HoD - NIELIT

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से बढ़कर है तो देखे सही जवाब तो यह है कि नहीं इंसानियत पैसे से बढ़कर होती है लेकिन अगर आज के समय में देखा जाए जिस भौतिकता वादी समाज में रह रहे हैं वहां पर इंसानियत बहुत पीछे छूट गई है और आज के डेट में पैसे से ही लोगों को जज किया जाता है उनका सैलरी पैकेज देखकर ही लोग कौन उसी हिसाब से इज्जत दी जाती है शुभकामनाएं आपके साथ हैं धन्यवाद

se badhkar hai toh dekhe sahi jawab toh yah hai ki nahi insaniyat paise se badhkar hoti hai lekin agar aaj ke samay me dekha jaaye jis bhautikata wadi samaj me reh rahe hain wahan par insaniyat bahut peeche chhut gayi hai aur aaj ke date me paise se hi logo ko judge kiya jata hai unka salary package dekhkar hi log kaun usi hisab se izzat di jaati hai subhkamnaayain aapke saath hain dhanyavad

से बढ़कर है तो देखे सही जवाब तो यह है कि नहीं इंसानियत पैसे से बढ़कर होती है लेकिन अगर आज

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आपने पूछा ही क्या पैसा इंसानियत से बढ़कर है नहीं इंसानों से बढ़कर कोई चीज नहीं होती है इस सृष्टि में इस दुनिया में हम आए इस जग में जग हंसा और हम रोए अब ऐसी करनी कर जाओ कि फिर दोबारा ऐसा ना होए

aapne poocha hi kya paisa insaniyat se badhkar hai nahi insano se badhkar koi cheez nahi hoti hai is shrishti mein is duniya mein hum aaye is jag mein jag hansa aur hum ROYE ab aisi karni kar jao ki phir dobara aisa na hoe

आपने पूछा ही क्या पैसा इंसानियत से बढ़कर है नहीं इंसानों से बढ़कर कोई चीज नहीं होती है इस

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महेश सेठ

रेकी ग्रैंडमास्टर,लाइफ कोच

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क्या पैसा इंसानियत से बढ़कर है वास्तव में पैसा और इंसानियत की तुलना करना ही गलत है पैसा अपनी जगह है इंसानियत की जगह पैसे वाले हैं तो इंसानियत सकते हैं और इंसानियत रखने के लिए पैसे वाला होना जरूरी भी नहीं है और गरीब होने के लिए भी इंसानियत छोड़ना जरूरी कदम अलग-अलग मोहन है अब आपको क्योंकि वही नमक जरूरी है खाने में भी चीनी जरूरी है तो समझदारी से काम करें पैसे की भी अपनी जरूरत है आप नहीं आएंगे और इंसानियत की भी अपनी तो कोई किसी से बढ़कर नहीं है यह तुलना ही मुझे कुछ नहीं सकती आपका मंगल हो धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद

kya paisa insaniyat se badhkar hai vaastav mein paisa aur insaniyat ki tulna karna hi galat hai paisa apni jagah hai insaniyat ki jagah paise waale hain toh insaniyat sakte hain aur insaniyat rakhne ke liye paise vala hona zaroori bhi nahi hai aur garib hone ke liye bhi insaniyat chhodna zaroori kadam alag alag mohan hai ab aapko kyonki wahi namak zaroori hai khane mein bhi chini zaroori hai toh samajhdari se kaam kare paise ki bhi apni zarurat hai aap nahi aayenge aur insaniyat ki bhi apni toh koi kisi se badhkar nahi hai yah tulna hi mujhe kuch nahi sakti aapka mangal ho dhanyavad dhanyavad dhanyavad

क्या पैसा इंसानियत से बढ़कर है वास्तव में पैसा और इंसानियत की तुलना करना ही गलत है पैसा अप

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Dinesh Mishra

Theosophists | Accountant

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जाओ पैसा इंसानियत से बढ़कर की है नहीं इंसानियत पहले है पैसा इसके बाद में अगर इंसान में इंसानियत नहीं है तो पैसा किस काम का इसलिए सर्वप्रथम इंसानियत है और इंसानियत से बढ़कर के कुछ नहीं है पैसा बाद में है लोग कहते हैं कि पैसा ईश्वर तो नहीं लेकिन ईश्वर के बराबर है ऐसे कहने वाले लोग लोगों पैसे को महत्व देते हैं लेकिन लेकिन अगर इंसानियत नहीं है तो ऐसा पैसा किस काम का इसलिए जीवन में इंसानियत का होना बहुत जरूरी है धन्यवाद

jao paisa insaniyat se badhkar ki hai nahi insaniyat pehle hai paisa iske baad mein agar insaan mein insaniyat nahi hai toh paisa kis kaam ka isliye sarvapratham insaniyat hai aur insaniyat se badhkar ke kuch nahi hai paisa baad mein hai log kehte hain ki paisa ishwar toh nahi lekin ishwar ke barabar hai aise kehne waale log logo paise ko mahatva dete hain lekin lekin agar insaniyat nahi hai toh aisa paisa kis kaam ka isliye jeevan mein insaniyat ka hona bahut zaroori hai dhanyavad

जाओ पैसा इंसानियत से बढ़कर की है नहीं इंसानियत पहले है पैसा इसके बाद में अगर इंसान में इंस

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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

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नहीं पैसा इंसान इसे कभी पढ़कर नहीं हो सकता है इंसान से बढ़कर नहीं हो सकता है भारतीय संस्कृति के अनुसार पैसा एक साधन है जबकि वेस्टर्न कल्चर वाले जो है उनके लिए यह पैसा एक साथ शादी है वहां की संस्कृति और परंपरा व संस्कृति संस्कृति जय माताजी को शिक्षा के सिद्धांत पर आधारित है इसलिए पैसा उनके लिए मायने नहीं रखता है डिप्रेशन कैसे को हाथ का मैल समझते हैं मेहनत जमी समझते हैं इंसान का मैप ज्यादा है पैसे कम कम है लेकिन आज जो बहुत एक बार चलना है यह वेस्टर्न कल्चर प्रेरित है और वेस्टर्न कल्चर प्लीज जो लोग होते हैं भौतिकवादी जो लोग हैं उनके लिए पैसा शादी है पैसे कमाने के लिए भी लोग निर्जीव मशीन की तरह आज लगे हुए हैं अध्ययन देख लेना रात देख लेना सुबह देख ले मिश्रा ले कर चोरी बेईमानी गुंडागर्दी स्मगलिंग किडनैपिंग मर्डर रेप मार्केटिंग झूठ अन्याय धर्म सभी प्रकार से धन कमाने के पीछे परिमाण पागल हो रहा है जब आना हो रहा है निबंध भारत एक भारतीय संस्कृति एवं तारों से बनी हुई है सड़क जिंदगी जी यहां पर लेकिन आज का मानव सब कुछ भूल चुका है धन कमाने के लिए प्लीज से गिरा विनर को कट करना है दीवाना हो रहा पागल हो गया है जबकि सच्चाई यह है कि ना हम धन लेकर के पैदा हुए थे ना हम जब मिलेंगे तब हम धन का एक कदम भी ले जा सकेंगे जो सिकंदर ने बच्ची को जीतने का प्रयास किया देखो राजाओं को पराजित किया अनेक देशों को लूटा सिकंदर जब मरने लगा उसने अपने अनुयायियों से मरने से पहले आप मेरे हाथों को दोनों हाथों को तुम बाहर निकाल देना मेरी अच्छी से वहां तक तो मुझे श्मशान ले जाओ जिससे लोग देख सके जो सिकंदर धन की लालच में धन कमाने के लिए धन को लूटने के लिए कितने जीते जीते कितना पर आक्रमण किए और वो सिकंदर तथा संपत्ति का स्वामी होकर के भी लास्ट में ₹1 भी एक ऐसा भी अपने हाथों के निर्देश पर यातायात और खा लिया जा रहा है आशिकी कदम के पीछे दीवाना नहीं होना चाहिए मानव का मानव है मानव के लिए धन है धन के लिए मानव नहीं है जबकि आशिकी वेस्टर्न कल्चर अनुयायियों के लिए धन के लिए मानव हो गया बे यूज एंड थ्रो वाली सिद्धांत पर विश्वास करते हुए मानव का प्रयोग कब आने के लिए कर रहे हैं यह जो आप देख रहे हैं कि मानव अंगों को छोटे-छोटे बच्चों को मृत्यु देकर कि बेलो अंगद चुरा लेते हैं और उनके उस धन कमाते हैं उनको उनको भेज दे चरणों को भेज देते हैं और धन कमाते हैं आज का डॉक्टर यह कसाई रूप में हो गए पहले तुम देख देते कि पहले डॉक्टर को सेकंड गोंडवाना जाता था प्रतिभा सम्मान देते चलो क्योंकि को जीवन देने वाला होता था खुशियों का भागी होता था आज के डॉक्टर से जो मानव अंगों को निकाल निकाल कर भेज देते हैं जबरदस्ती लोगों के अंग निकाल देते हैं ऑपरेशन के दौरान और दो से भेजते हैं उन्हें राक्षस के नाभि बहुत बड़ा गुनाह हो गए रुला कर दिया पागल कर दिया है तो यह ऐसे लोग जो करते हैं इन लोगों के लिए इंसान धन कमाने का जरिया हो गया ऐसे लोग विश्वास रखते हैं यूजन 44 सिद्धांत इन कॉम भारतीय कहना तो बड़ा कौन है तो की मां की संस्कृति को मानते हैं कि भारतीय संस्कृति का मान्य वाला कभी भी पैसे को भगवान नहीं मान सकता है इंसान के लिए पैसा है ना की संस्कृति वाले ऐसा मानते हैं

nahi paisa insaan ise kabhi padhakar nahi ho sakta hai insaan se badhkar nahi ho sakta hai bharatiya sanskriti ke anusaar paisa ek sadhan hai jabki western culture waale jo hai unke liye yah paisa ek saath shaadi hai wahan ki sanskriti aur parampara va sanskriti sanskriti jai mataji ko shiksha ke siddhant par aadharit hai isliye paisa unke liye maayne nahi rakhta hai depression kaise ko hath ka mail samajhte hain mehnat jami samajhte hain insaan ka map zyada hai paise kam kam hai lekin aaj jo bahut ek baar chalna hai yah western culture prerit hai aur western culture please jo log hote hain bhautikvadi jo log hain unke liye paisa shaadi hai paise kamane ke liye bhi log nirjeev machine ki tarah aaj lage hue hain adhyayan dekh lena raat dekh lena subah dekh le mishra le kar chori baimani gundagardi smuggling kidnaiping murder rape marketing jhuth anyay dharm sabhi prakar se dhan kamane ke peeche parimaan Pagal ho raha hai jab aana ho raha hai nibandh bharat ek bharatiya sanskriti evam taaron se bani hui hai sadak zindagi ji yahan par lekin aaj ka manav sab kuch bhool chuka hai dhan kamane ke liye please se gira winner ko cut karna hai deewana ho raha Pagal ho gaya hai jabki sacchai yah hai ki na hum dhan lekar ke paida hue the na hum jab milenge tab hum dhan ka ek kadam bhi le ja sakenge jo sikandar ne bachi ko jitne ka prayas kiya dekho rajaon ko parajit kiya anek deshon ko loota sikandar jab marne laga usne apne anuyayiyon se marne se pehle aap mere hathon ko dono hathon ko tum bahar nikaal dena meri achi se wahan tak toh mujhe shmashan le jao jisse log dekh sake jo sikandar dhan ki lalach me dhan kamane ke liye dhan ko lutane ke liye kitne jeete jeete kitna par aakraman kiye aur vo sikandar tatha sampatti ka swami hokar ke bhi last me Rs bhi ek aisa bhi apne hathon ke nirdesh par yatayat aur kha liya ja raha hai aashiqui kadam ke peeche deewana nahi hona chahiye manav ka manav hai manav ke liye dhan hai dhan ke liye manav nahi hai jabki aashiqui western culture anuyayiyon ke liye dhan ke liye manav ho gaya be use and throw wali siddhant par vishwas karte hue manav ka prayog kab aane ke liye kar rahe hain yah jo aap dekh rahe hain ki manav angon ko chote chote baccho ko mrityu dekar ki below angad chura lete hain aur unke us dhan kamate hain unko unko bhej de charno ko bhej dete hain aur dhan kamate hain aaj ka doctor yah kasai roop me ho gaye pehle tum dekh dete ki pehle doctor ko second gondwana jata tha pratibha sammaan dete chalo kyonki ko jeevan dene vala hota tha khushiyon ka bhaagi hota tha aaj ke doctor se jo manav angon ko nikaal nikaal kar bhej dete hain jabardasti logo ke ang nikaal dete hain operation ke dauran aur do se bhejate hain unhe rakshas ke nabhi bahut bada gunah ho gaye rula kar diya Pagal kar diya hai toh yah aise log jo karte hain in logo ke liye insaan dhan kamane ka zariya ho gaya aise log vishwas rakhte hain yujan 44 siddhant in com bharatiya kehna toh bada kaun hai toh ki maa ki sanskriti ko maante hain ki bharatiya sanskriti ka manya vala kabhi bhi paise ko bhagwan nahi maan sakta hai insaan ke liye paisa hai na ki sanskriti waale aisa maante hain

नहीं पैसा इंसान इसे कभी पढ़कर नहीं हो सकता है इंसान से बढ़कर नहीं हो सकता है भारतीय संस्कृ

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क्या पैसा इंसानियत से बढ़कर तो नहीं बिल्कुल नहीं पैसा इंसानियत से बढ़कर नहीं है क्योंकि मैं नहीं थी एक ऐसा चीज है इमान ईटी में आपको इंसानियत में आपको पैसे की कोई मोल नहीं होती वह इंसान ऐसा इंसान होता है जो किसी को हेल्प करें तो वह पैसा नहीं लगता है और आपको सबसे बड़ी बात इंसानियत में आपको प्यार आएगा आपको अंदर संतुष्टि मिलेगी जो आपको आगे चलकर बहुत आपको बहुत ऐसे लोग आपको दुआ भी देगी कि आप आगे बढ़ो यह करो तो अभी मैं सोचा पैसे के लिए आप अपनी इंसानियत को बैठे पैसे भी कमा और आप साथ में इंसानियत भी क्योंकि अगर आपकी एक बार इज्जत चली जाएगी तो वापस कभी नहीं आएगी लेकिन पैसा कब आज नहीं है तो कल वापस आ भी सकता है तो वह कभी यह मत सोचो पैसे के लिए पैसा इंसानियत से बढ़कर है सबसे पहले आपको इंसानियत है आपका मैंने कि आपके आकृत है जो यहां भी और मरने के बाद भी काम आएगा तो बी केयरफुल एंड टू बी वेरी ऑन है हमेशा अच्छे से रहो पेंट किसी को सपोर्ट करो जितना आप से हो सके आप भी सुबह में कर सकते हो करो तभी किसी को दिल मत दुखाओ और वही आंखें के लिए सबसे बड़ी खुशी भी है और सबसे बड़ी बात नहीं है थैंक यू सो मच

kya paisa insaniyat se badhkar toh nahi bilkul nahi paisa insaniyat se badhkar nahi hai kyonki main nahi thi ek aisa cheez hai imman ET mein aapko insaniyat mein aapko paise ki koi mole nahi hoti vaah insaan aisa insaan hota hai jo kisi ko help kare toh vaah paisa nahi lagta hai aur aapko sabse badi baat insaniyat mein aapko pyar aayega aapko andar santushti milegi jo aapko aage chalkar bahut aapko bahut aise log aapko dua bhi degi ki aap aage badho yah karo toh abhi main socha paise ke liye aap apni insaniyat ko baithe paise bhi kama aur aap saath mein insaniyat bhi kyonki agar aapki ek baar izzat chali jayegi toh wapas kabhi nahi aayegi lekin paisa kab aaj nahi hai toh kal wapas aa bhi sakta hai toh vaah kabhi yah mat socho paise ke liye paisa insaniyat se badhkar hai sabse pehle aapko insaniyat hai aapka maine ki aapke akrit hai jo yahan bhi aur marne ke baad bhi kaam aayega toh be keyarful and to be very on hai hamesha acche se raho paint kisi ko support karo jitna aap se ho sake aap bhi subah mein kar sakte ho karo tabhi kisi ko dil mat dukhao aur wahi aankhen ke liye sabse badi khushi bhi hai aur sabse badi baat nahi hai thank you so match

क्या पैसा इंसानियत से बढ़कर तो नहीं बिल्कुल नहीं पैसा इंसानियत से बढ़कर नहीं है क्योंकि मै

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Arvind Maurya

Business Counselor

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हे दोस्तों सवाल है आपका पैसा इंसान से बढ़कर हम से बढ़कर कुछ नहीं है इंसानियत रहना बहुत जरूरी है पैसा भी बड़ा है बट कुछ जगह कुछ जगह नहीं है जहां पर इंसानियत काम आती हो इंसानियत ही पड़े जहां पर पैसा काम आता है वैसा ही बड़ा है तो दोनों अपनी जगह सही है बस आपको सोच अपनी अच्छी रखनी चाहिए अगर बट इंसानियत ही बहुत जरूरी है इंसानियत रहेगा तो आपके साथ पैसा भी बहुत बड़ा रहेगा आप इंसानियत रखी है पैसा आपके साथ रहेगा थैंक्यू मेरी बात सुनने के

hai doston sawaal hai aapka paisa insaan se badhkar hum se badhkar kuch nahi hai insaniyat rehna bahut zaroori hai paisa bhi bada hai but kuch jagah kuch jagah nahi hai jaha par insaniyat kaam aati ho insaniyat hi pade jaha par paisa kaam aata hai waisa hi bada hai toh dono apni jagah sahi hai bus aapko soch apni achi rakhni chahiye agar but insaniyat hi bahut zaroori hai insaniyat rahega toh aapke saath paisa bhi bahut bada rahega aap insaniyat rakhi hai paisa aapke saath rahega thainkyu meri baat sunne ke

हे दोस्तों सवाल है आपका पैसा इंसान से बढ़कर हम से बढ़कर कुछ नहीं है इंसानियत रहना बहुत जरू

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Rahul Yadav

Engineer

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इंसानियत से बढ़कर तो कुछ भी नहीं है पैसा भी इंसान नहीं बनाया है इंसानियत इज मोस्ट इंपोर्टेंट पार्ट इन लाइफ इंसानियत है तो सब कुछ है आज के दिन हम इंसानियत की वजह से ही है इंसानियत ही नहीं रहेगी तो फिर कैसे नहीं रहेगा

insaniyat se badhkar toh kuch bhi nahi hai paisa bhi insaan nahi banaya hai insaniyat is most important part in life insaniyat hai toh sab kuch hai aaj ke din hum insaniyat ki wajah se hi hai insaniyat hi nahi rahegi toh phir kaise nahi rahega

इंसानियत से बढ़कर तो कुछ भी नहीं है पैसा भी इंसान नहीं बनाया है इंसानियत इज मोस्ट इंपोर्टे

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Neeraj Shukla

Philosopher || Avid Reader.

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देखी आपने जो पोस्ट नहीं किया है क्या पैसा इंसानियत से बढ़कर है तो इस पोस्ट पर है कि नहीं पैसा किसी भी कीमत पर इंसानियत से बढ़कर हो ही नहीं सकता और मेरा मानना है मनुष्य ना तो जन्म से बड़ा होता है ना नाम से बड़ा होता है ना किसी समुदाय से और ना ही किसी वंश से बल्कि इंसान बड़ा होता है अपने कर्म से कर्म अगर अच्छे हो तो उसे बड़ा बनने से महान बनने से दुनिया की कोई दुनिया का कोई भी व्यक्ति नहीं रोक सकता लेकिन अगर कर्म अच्छे नहीं हो तो राजपरिवार में जन्म लेने के बाद भी उस पशु का जीवन व्यतीत करते हैं और जिस इंसान को लगता है तुमको बताना चाहूंगा कि लक्ष्मी चंचल होती है ऐसे कोई बड़ी बात नहीं है ऐसा इंसानियत से बढ़कर हो ही नहीं सकता है कोई नहीं हो सकता उदाहरण के तौर पर बता रहा हूं आपको कि आप ने जन्म लिया एक ना एक दिन सब की मूर्ति होनी है एग्जांपल जान लिया और उनकी मृत्यु हो गई पैसा क्या है दौलत है क्या मृत्यु के उपरांत आप उस तो लग तो अपने साथ ले जाना चाहेंगे या ले जा सकते हैं या फिर ले जाकर उसका कोई इस्तेमाल कर सकते हैं आपका जवाब नहीं लेकिन पैसे की कोई अहमियत नहीं है इंसानियत के सामने जवाब पसंद आया हो तो लाइक कमेंट कीजिएगा धन्यवाद

dekhi aapne jo post nahi kiya hai kya paisa insaniyat se badhkar hai toh is post par hai ki nahi paisa kisi bhi kimat par insaniyat se badhkar ho hi nahi sakta aur mera manana hai manushya na toh janam se bada hota hai na naam se bada hota hai na kisi samuday se aur na hi kisi vansh se balki insaan bada hota hai apne karm se karm agar acche ho toh use bada banne se mahaan banne se duniya ki koi duniya ka koi bhi vyakti nahi rok sakta lekin agar karm acche nahi ho toh rajaparivar me janam lene ke baad bhi us pashu ka jeevan vyatit karte hain aur jis insaan ko lagta hai tumko batana chahunga ki laxmi chanchal hoti hai aise koi badi baat nahi hai aisa insaniyat se badhkar ho hi nahi sakta hai koi nahi ho sakta udaharan ke taur par bata raha hoon aapko ki aap ne janam liya ek na ek din sab ki murti honi hai example jaan liya aur unki mrityu ho gayi paisa kya hai daulat hai kya mrityu ke uprant aap us toh lag toh apne saath le jana chahenge ya le ja sakte hain ya phir le jaakar uska koi istemal kar sakte hain aapka jawab nahi lekin paise ki koi ahamiyat nahi hai insaniyat ke saamne jawab pasand aaya ho toh like comment kijiega dhanyavad

देखी आपने जो पोस्ट नहीं किया है क्या पैसा इंसानियत से बढ़कर है तो इस पोस्ट पर है कि नहीं

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Saurabh Kumar

Biology student

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MonuTiwari

Little Businessman And Motivational Teacher

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आपका प्रश्न है क्या पहचान इंसानियत से बचके हैं तो नहीं पैसा इंसानियत बची नहीं है अगर पैसे की मौत इतना ज्यादा होता ना तो आज नाम की कोई चीज नहीं होती मनोज पैसा कमाता है क्यों है इसके लिए अपने घर के लिए अपने साजन के लिए अब भोजन के लिए किसी ना किसी के घर जाकर भोजन मांगने में मिल जाए वह भोजन पा सके उसको पहन ने के लिए कपड़े या घूमने फिरने के लिए स्थान मिल सके तो पैसे कमा ही ना तो पैसे की मां ने फिर है क्या जाएगी पैसे इंसानियत से पक्की नहीं होती अगर मानवता इंसानियत आपके शरीर में आपके पास मौजूद है तो पैसे तो आते जाते ही रहेंगे वैसे कोई बड़ी चीनी छोटी चीज है जो सुबह से हम सबको आपस में एक अलग करके रखता है एकता को तोड़ देता है वैसे कुछ भी हमारी नहीं है अगर बिना पैसे के भी हम जीवित सकते हैं अगर हमें सही समय पर भोजन वस्त्र खाना मिल सके तो पैसे की जरूरत क्या पड़ेगी लेकिन हमें धन की प्राप्ति के लिए पैसे के लिए भोजन कपड़े धोने की घर के लिए हमें पैसे कमाने पड़ते हैं लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि पैसे इंसान इससे बच्चे हैं और ही बरात के प्रश्न की तो नहीं ऐसे इंसान से बस की नहीं है

aapka prashna hai kya pehchaan insaniyat se bachake hain toh nahi paisa insaniyat bachi nahi hai agar paise ki maut itna zyada hota na toh aaj naam ki koi cheez nahi hoti manoj paisa kamata hai kyon hai iske liye apne ghar ke liye apne sajan ke liye ab bhojan ke liye kisi na kisi ke ghar jaakar bhojan mangne me mil jaaye vaah bhojan paa sake usko pahan ne ke liye kapde ya ghoomne phirne ke liye sthan mil sake toh paise kama hi na toh paise ki maa ne phir hai kya jayegi paise insaniyat se pakki nahi hoti agar manavta insaniyat aapke sharir me aapke paas maujud hai toh paise toh aate jaate hi rahenge waise koi badi chini choti cheez hai jo subah se hum sabko aapas me ek alag karke rakhta hai ekta ko tod deta hai waise kuch bhi hamari nahi hai agar bina paise ke bhi hum jeevit sakte hain agar hamein sahi samay par bhojan vastra khana mil sake toh paise ki zarurat kya padegi lekin hamein dhan ki prapti ke liye paise ke liye bhojan kapde dhone ki ghar ke liye hamein paise kamane padate hain lekin iska yah matlab nahi ki paise insaan isse bacche hain aur hi baraat ke prashna ki toh nahi aise insaan se bus ki nahi hai

आपका प्रश्न है क्या पहचान इंसानियत से बचके हैं तो नहीं पैसा इंसानियत बची नहीं है अगर पैसे

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Purushottam Choudhary

ब्राह्मण Next IAS institute गार्ड

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RB Rajput

I am student

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Brijesh ojha

Nurse Assitance

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