विभिन्न परमाणुओ के कक्षकों में इलक्ट्रोन किस नियम के अनुसार भरे जाते है ?...


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प्रत्येक परमाणु के इलेक्ट्रॉन नाभि के चारो ओर केवल कुछ वशिष्ठ कक्षाओं में ही घूम सकते हैं इन कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन बिना उर्जा कोई गति करते हैं इन वशिष्ठ और बिट्टू को इलेक्ट्रॉन की अवस्थाएं या ऊर्जा स्तर कहते हैं इन कक्षाओं में घूमते समय इलेक्ट्रॉन उर्जा का अवशोषण या वितरण नहीं करते अर्थात इलेक्ट्रॉन में तो त्वरण होता है किंतु इस प्रकार स्थिति अवस्था में स्थिर अवस्था में इलेक्ट्रॉन से एक निश्चित ऊर्जा संकलन रहती है प्रत्येक इलेक्ट्रॉन का अपनी उर्जा के अनुसार एक निश्चित ऑर्बिट होता है किसी वशिष्ठ ऑर्बिट में घूमते समय इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा का चयन नहीं हो पाता जब इलेक्ट्रॉन किसी एक और भी से दूसरे और ऑर्बिट में जाता है तो उसकी ऊर्जा में परिवर्तन होता है ऊर्जा परिवर्तन के अनुसार या अपनी कक्षा बदल देता है अर्थात अगले अर्थात अगले ऊर्जा स्तर अथवा पिछले ऊर्जा स्तर में चला जाता है यदि इलेक्ट्रॉनिक चक्र में नाभि से अनामिक से दूर वाली कक्षा में जाता है तो ऊर्जा अवशोषित होती है और वह जब दूध वाली कक्षा से निकट वाली कक्षा में जाता है तो ऊर्जा विकृत होती है ऊर्जा का अवशोषण उस माया प्रकाश के रूप में होता है इस प्रकार इस प्रकाश की किसी भी इलेक्ट्रॉन के लिए एक से अधिक कक्षाओं का होना संभव है अर्थात इलेक्ट्रॉन एक ऐसा एक से अधिक कक्षा में घूम घूम तो सकता है किंतु नाभिक में गिरता नहीं प्रत्यक्ष कक्षा में उर्जा के निश्चित क्वांटम होते हैं ऊर्जा परिवर्तन की न्यूनतम राशि क्वांटम होती है

pratyek parmanu ke electron nabhi ke chaaro aur keval kuch vashistha kakshaon me hi ghum sakte hain in kakshaon me electron bina urja koi gati karte hain in vashistha aur bittu ko electron ki avasthae ya urja sthar kehte hain in kakshaon me ghumte samay electron urja ka avshoshan ya vitaran nahi karte arthat electron me toh twaran hota hai kintu is prakar sthiti avastha me sthir avastha me electron se ek nishchit urja sankalan rehti hai pratyek electron ka apni urja ke anusaar ek nishchit orbit hota hai kisi vashistha orbit me ghumte samay electron ki urja ka chayan nahi ho pata jab electron kisi ek aur bhi se dusre aur orbit me jata hai toh uski urja me parivartan hota hai urja parivartan ke anusaar ya apni kaksha badal deta hai arthat agle arthat agle urja sthar athva pichle urja sthar me chala jata hai yadi electronic chakra me nabhi se anamik se dur wali kaksha me jata hai toh urja avshoshit hoti hai aur vaah jab doodh wali kaksha se nikat wali kaksha me jata hai toh urja vikrit hoti hai urja ka avshoshan us maya prakash ke roop me hota hai is prakar is prakash ki kisi bhi electron ke liye ek se adhik kakshaon ka hona sambhav hai arthat electron ek aisa ek se adhik kaksha me ghum ghum toh sakta hai kintu nabhik me girta nahi pratyaksh kaksha me urja ke nishchit quantum hote hain urja parivartan ki nyuntam rashi quantum hoti hai

प्रत्येक परमाणु के इलेक्ट्रॉन नाभि के चारो ओर केवल कुछ वशिष्ठ कक्षाओं में ही घूम सकते हैं

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